Hindi Stories: लक्ष्य को ध्यान में रख कर अगर मजबूत इरादों के साथ काम किया जाए तो विकलांगता भी बौनी साबित होती है, देखने और सुनने में अक्षम मनीराम शर्मा ने आईएएस अफसर और नेत्रहीन ब्रह्मानंद शर्मा ने जज बन कर यही कर दिखाया.

कहते हैं, आदमी के लिए कुछ भी असंभव नहीं है. अगर वह ठान ले तो कोई भी काम उस के लिए मुश्किल नहीं है. जिन लोगों ने अपनी कमी और कमजोरी को हथियार बना कर मेहनत की, उन्होंने कामयाबी की मंजिल निश्चित रूप से हासिल की. ऐसे अनेक लोगों की कामयाबी के किस्सेकहानियां हमें सुनने को मिलते रहते हैं. जो देख नहीं सकते, सुन नहीं सकते या बोल नहीं सकते थे. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और मन की आवाज को सुनी, जुनून के साथसाथ तब तक पीछे मुड़ कर नहीं देखा, जब तक उन्होंने कामयाबी हासिल नहीं कर ली.

ऐसे दिव्यांग लोगों ने अपनी शारीरिक कमियों को अपनी पढ़ाई या दूसरी विधा पर हावी नहीं होने दिया. अपनी जिद और जज्बे से दुनिया में कामयाबी की कहानी लिखी. शारीरिक रूप से विकलांग ऐसे ही कुछ लोगों की सफलता की कहानी यहां पेश है, जो आज हीरो बन कर समाज को एक नई दिशा दे रहे हैं. सब से पहले हम भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी मनीराम शर्मा के बारे में बताना चाहेंगे. वह इस समय हरियाणा के मेवात के नूंह जिले में जिला परिषद में मुख्य कार्यकारी अधिकारी के पद पर तैनात हैं. राजस्थान के जिला अलवर की तहसील कठूमर के बदनगढ़ी गांव के रहने वाले मनीराम शर्मा जन्म से ही न तो पूरी तरह बोल सकते थे और न पूरी तरह सुन सकते थे. उन के पिता मजदूरी करते थे और मां बधिर थीं. पूरा परिवार अनपढ़ था.

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