National Bravery Awards. बड़े हमेशा बच्चों को नादान समझते हैं. लेकिन कभीकभी यही बच्चे ऐसा कारनामा कर जाते हैं कि बड़े दांतों तले अंगुली दबाने के लिए मजबूर हो जाते हैं. भारत के ऐसे ही 25 बच्चों ने धैर्य और अदम्य साहस दिखाते हुए ऐसे कारनामे कर दिखाए कि उन्हें राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया गया.

दिल्ली के यमुना विहार के रहने वाले दीपक गुप्ता अपने परिवार के साथ केदारनाथ की यात्रा पर गए थे. लेकिन 16 जून, 2013 को वहां अचानक आई बाढ़ का पानी इतना बढ़ गया कि लोग अपनी जान बचाने के लिए इधरउधर भागने लगे. दीपक गुप्ता उस समय मंदिर में थे. बाढ़ का पानी मंदिर तक में घुस गया था. पानी का बहाव इतना तेज था कि लोग उस की चपेट में आ कर बहने लगे. इस अफरातफरी में दीपक गुप्ता के परिवार के लोग अलगअलग हो गए. वह नाम ले कर उन्हें आवाज दे रहे थे. पत्नी और बच्चों की चिंता में दीपक गुप्ता बहुत परेशान हो रहे थे.

इसी बीच उन का 4 साल का बेटा पानी में बहने लगा. साढ़े 8 साल की बेटी महिका गुप्ता ने जब भाई को बहते देखा और उस की चीख सुनी तो वह उसे बचाने के लिए उस की ओर बढ़ी. हालांकि वह तैरना नहीं जानती थी, लेकिन उस ने अपनी जान की परवाह न करते हुए भाई को बचाने की ठान ली. बाढ़ का पानी उस के नाकमुंह तक पहुंच गया था, लेकिन उस ने हिम्मत नहीं हारी. उस ने कोशिश कर के उस के कपड़े पकड़ लिए. फिर एक हाथ से भाई को पकड़ कर किनारे की तरफ लाने लगी.

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