Rajasthan Crime Story: 2 बच्चों के पिता आरएएस अधिकारी प्रदीप बालाच ने गर्लफ्रैंड के चक्कर में अपनी पत्नी नेहा की सुनियोजित तरीके से हत्या कर के उसे दुर्घटना का रूप देने की कोशिश तो बहुत की, लेकिन…
नेहा को जब पता चला कि उस का रिश्ता एक आरएएस अधिकारी प्रदीप बालाच से पक्का हो गया है तो वह फूली नहीं समा रही थी. उस के मांबाप व घर के अन्य लोग भी खुश थे कि एक प्रशासनिक अधिकारी प्रदीप के साथ शादी के बाद नेहा राज करेगी. लड़का नेहा को हर वह खुशी देगा, जो उसे चाहिए. प्रदीप बालाच राजस्थान के बाड़मेर जिले के गांव गडरा रोड के रहने वाले प्रेम प्रकाश बालाच का बेटा था. प्रेम प्रकाश कोई बड़े आदमी नहीं थे, वह एक साधारण आदमी थे.
खेतीकिसानी से होने वाली आमदनी से उन्होंने अपने बच्चों को पढ़ायालिखाया था. प्रदीप शुरू से ही पढ़ाई में होशियार था. स्कूली पढ़ाई पूरी कर के कालेज की पढ़ाई भी पूरी कर ली थी. बाद इस के वह राजस्थान प्रशासनिक सेवा (आरएएस) की तैयारी करने लगा. उस की मेहनत रंग लाई और आरएएस में उस का चयन हो गया. राजस्थान इंस्टीट्यूट औफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन (रीपा), जोधपुर में ट्रेनिंग करने के बाद 13 नवंबर, 2006 को प्रदीप की पहली नियुक्ति जैसलमेर में उपजिलाधिकारी के पद पर हुई. इस के बाद वह जैसलमेर में करीब 2 सालों तक विभिन्न पदों पर प्रशिक्षु के रूप में कार्य करते रहे.
जैसलमेर में तैनाती के दौरान ही 31 जनवरी, 2007 को प्रदीप की शादी बाड़मेर के रहने वाले भीमाराम की बेटी निर्मला उर्फ नेहा के साथ हुई थी. यह शादी बड़ी धूमधाम से हिंदू रीतिरिवाज से हुई थी. शादी में जैसलमेर के तत्कालीन जिलाधिकारी सहित तमाम प्रशासनिक अधिकारियों के अलावा इलाके के अनेक प्रतिष्ठित लोग भी शामिल हुए थे. गोरे रंग और शर्मीले स्वभाव की नेहा जब अपनी ससुराल पहुंची तो अपने मृदु व्यवहार से उस ने सब का मन मोह लिया. ससुराल में नेहा की सभी तारीफ कर रहे थे. इस से नेहा भी खुश हो रही थी. नेहा ने अपने दिल में ढेरों सपने संजोए थे. वह दुनिया की वे सब खुशियां पाना चाहती थी, जो एक लड़की चाहती है.
शादी के बाद प्रदीप और नेहा के नवजीवन की शुरुआत हुई. दोनों ही बेहद खुश थे. प्रदीप की छुट्टियां कब बीत गईं, पता ही नहीं चला. छुट्टियां समाप्त होने पर प्रदीप जैसलमेर में अपनी ड्यूटी पर चले गए. एक बार मायके जाने के बाद नेहा भी प्रदीप के साथ जैसलमेर में रहने लगीं. हंसीखुशी के साथ उन का समय गुजर रहा था. इसी बीच नेहा एक बेटे की मां बन गईं. बेटा पैदा होने के बाद घर में खुशी और बढ़ गई. नेहा का समय बच्चे के लालनपालन में व्यतीत होने लगा.
जैसलमेर में लगभग 2 साल रहने के बाद प्रदीप का ट्रांसफर भरतपुर हो गया. भरतपुर के बाद जहांजहां भी प्रदीप का ट्रांसफर हुआ, नेहा उन के साथ ही रही. लेकिन जब प्रदीप को जोधपुर का जिला आबकारी अधिकारी बना कर भेजा गया तो नेहा के पारिवारिक जीवन में अचानक बदलाव आ गया. वह एक और बेटे की मां बन गई. नेहा के साथ उस के सासससुर भी रह रहे थे. जोधपुर आने के बाद नेहा महसूस कर रही थी कि उस का पति उस से कुछ ज्यादा ही चिड़ाचिड़ा सा रहने लगा है. उस ने इस पर कुछ खास ध्यान नहीं दिया. वह सोचती थी कि ड्यूटी की भागादौड़ी की वजह से यह सब हो रहा है, सब ठीक हो जाएगा. मगर ऐसा नहीं हुआ. ठीक होने के बजाय घर में हर समय कलह रहने लगी.
बातबात पर प्रदीप व उस की मां उसे डांटतेफटकारते थे. नेहा को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि ये लोग उस के साथ ऐसा व्यवहार क्यों कर रहे हैं. ऐसी स्थिति में आखिर वह क्या करे. रोजरोज की किचकिच से परेशान हो कर नेहा ने एक दिन अपनी मां पार्वती देवी व सहेलियों को यह बात बता दी. मां ने नेहा को ही समझाया कि पारिवारिक विवाद हर घर में होता है. आज नहीं तो कल सब ठीक हो जाएगा. लेकिन घर का माहौल ठीक नहीं हुआ. दिनप्रतिदिन घर में कलह बढ़ती ही गई. नेहा जैसे ही प्रदीप के सामने पड़ती, वह उसे खा जाने वाली नजरों से घूरते हुए कहता, ‘‘मैं ने तुम से शादी कर के बहुत बड़ी गलती की है. काश, मैं अपनी मनमरजी से शादी करता तो मेरा जीवन आज नरक नहीं बनता.’’
पति के मुंह से यह बात सुन कर नेहा समझ गई कि प्रदीप ने अपने घर वालों के दबाव में शादी की है. तभी तो वह इस तरह की बातें कह रहा है. नेहा कुछ कहती तो प्रदीप उस पर चिल्लाने लगता. सास तो उसे चैन से बैठने तक नहीं देती. नेहा कहां तो प्रदीप से शादी करने के बाद खुद को किस्मत वाली समझ रही थी. लेकिन अब उस के व्यवहार को देख कर सोचती थी कि इस से तो भला था वह किसी गरीब लड़के से ब्याही होती. एक रोज तो हद ही हो गई. प्रदीप ने अपने मोबाइल में एक लड़की का फोटो दिखाते हुए कहा, ‘‘अगर तू मेरी जिंदगी में नहीं आई होती तो मैं इस से ब्याह रचाता. क्योंकि मैं इस से प्यार करता हूं और यह मुझ से. हम दोनों अच्छे मित्र हैं.’’
यह बात सुन कर नेहा के पैरों तले से जैसे जमीन खिसक गई. अब पति की बेरुखी का कारण उस की समझ में आ गया था. नेहा ने एक दिन मौका मिलते ही प्रदीप के मोबाइल से उस की गर्लफ्रैंड की फोटो अपने मोबाइल में ट्रांसफर कर ली. नेहा जब मायके गई तो वह फोटो उस ने मां को दिखाते हुए अपना दुखड़ा रोया. दामाद की हकीकत जान कर पार्वती भी हक्कीबक्की रह गई. पार्वती ने बेटी की समस्या के बारे में पति और बेटे को भी अवगत कराया. तब भीमाराम अपने कुछ रिश्तेदारों को ले कर प्रदीप के यहां गए और बेटी को तंग करने के मुद्दे पर बात की. उस समय प्रदीप ने उन से वादा किया कि वह आईंदा नेहा को तंग नहीं करेगा.
बात आईगई हो गई. नेहा भी मायके से जोधपुर लौट आई. उस के लौटने पर प्रदीप आंखें तरेर कर बोला, ‘‘अपने मांबाप से मेरी शिकायत कर के तुम ने अच्छा नहीं किया. मैं आबकारी अधिकारी हूं. इसलिए पुलिस के बड़ेबड़े अधिकारियों से मेरे अच्छे संबंध हैं. तुम पुलिस के पास जाओगी, तब भी मेरा कुछ नहीं बिगड़ेगा.’’
पति की बात सुन कर नेहा अवाक सी रह गई. कहां तो वह समझ रही थी कि प्रदीप अब उस से कुछ नहीं कहेगा, लेकिन उस ने तो पहले जैसे ही तेवर दिखाने शुरू कर दिए. नेहा की आंखें भर आईं. पति से बहस करने के बजाय वह चुप हो गई, ताकि बात न बिगड़े. लेकिन उस की यह सोच गलत साबित हुई. सास और प्रदीप ने उस का जीना हराम कर दिया था. प्रदीप अकसर देर रात को घर लौटने लगा. नेहा जब उस से देर से आने की वजह पूछती तो वह कहता कि वह अपनी महिलामित्रों के साथ ऐश कर रहा था. यह सब वह नेहा को चिढ़ाने के लिए कहता था या फिर वह जो कह रहा था सच था, इस बात को वह ही जानता था.
कोई भी महिला सब कुछ सहन कर सकती है, पर यह हरगिज बरदाश्त नहीं कर सकती कि उस का पति किसी दूसरी महिला से नजदीकी बनाए. उसी बीच नेहा ने एक दिन पति को घर में ही एक महिला से हंसहंस कर बातें करते देख लिया. वह वही महिला थी, जिस का फोटो उस ने पति के मोबाइल में देखा था. बात गंभीर थी, इसलिए नेहा ने यह बात अपनी मां को फोन पर बता दी. बेटी की बात सुन कर मायके वाले भी बहुत आहत हुए. नेहा की समस्या दिनोंदिन बढ़ती जा रही थी.
वह भी चाहते थे कि किसी तरह प्रदीप पर दबाव बना कर उसे लाइन पर लाया जाए. इसलिए वह अपने गांव के कुछ संभ्रांत लोगों को ले कर प्रदीप के गांव गडरा रोड चले गए. जोधपुर से प्रदीप और उस के घर वाले भी अपने गांव चले गए. गांव में पंचायत हुई. पंचायत में प्रदीप ने फिर से वादा किया कि वह नेहा को अब तंग नहीं करेगा. मगर यह उस का मात्र दिखावा था. वह मन से नेहा को निकाल चुका था. उस के दिल में नेहा की जगह कोई और बस गई थी. यही कारण था कि नेहा के सामने वह इस तरह के हालात खड़े कर रहा था कि नेहा परेशान हो कर खुदबखुद मायके जा कर रहने लगे.
लेकिन वह उस से दूर नहीं होना चाहती थी. प्रदीप को जब लगा कि नेहा उस का पीछा छोड़ने वाली नहीं है तो वह उस से छुटकारा पाने के उपाय खोजने लगा. इस के लिए उस के दिमाग में यही उपाय आया कि किसी भी तरह नेहा को ठिकाने लगा दिया जाए. इस से उस का नेहा से हमेशा के लिए पीछा छूट जाएगा और कुछ समय बाद वह अपनी उस प्रेमिका से शादी भी कर लेगा, जिस का फोटो नेहा को दिखाया था. भोलीभाली नेहा अपने फरेबी पति के शौतानी दिमाग में मच रही खलबली से नावाकिफ थी. उस के लिए पति और दोनों बेटे ही संसार की सारी खुशियां थीं. नेहा का सोचना था कि हर काली रात के बाद उजाला जरूर होता है. आज नहीं तो कल उस के जीवन से भी अंधकार के बादल छंट जाएंगे और जीवन में उजियारा आएगा. मगर यह उस की सोच भर साबित हुई.
योजना को अंजाम देने के लिए प्रदीप नेहा को ले कर कई बार अपने गांव भी गया, लेकिन मौका न मिलने पर योजना सफल नहीं हो सकी. फिर एक दिन प्रदीप ने नेहा से कहा, ‘‘यदि तुम मेरी बीवी बनी रहना चाहती हो तो अपने बाप से 10 लाख रुपए और एक बंगला दिलवा दो. अगर यह नहीं हुआ तो तुम्हें ठिकाने लगा कर मैं अपनी गर्लफ्रैंड से शादी कर लूंगा. मैं अधिकारी हूं, इसलिए पुलिस भी मेरा कुछ नहीं कर पाएगी.’’
यह बात नेहा के दिल पर हथौड़े की तरह लगी. उस ने इस की चर्चा अपने मायके में की. मगर मायके वालों की इतनी हैसियत नहीं थी कि वे प्रदीप की यह मांग पूरी करते. नेहा ने मांबाप की असमर्थता प्रदीप से बता दी. अब प्रदीप ने अपनी चाल चली. 15 अप्रैल, 2015 को प्रदीप नेहा को जोधपुर से ले कर बाड़मेर गया. प्रदीप अपने साथ छोटे भाई हितेश को भी ले गया था. बाड़मेर में एक रात रुक कर अगले दिन वह अपने गांव गडरा रोड गया. पति के बदले मिजाज को देख कर नेहा को शक हो गया. उस ने फोन से अपनी मां पार्वती से बात करते हुए कहा कि मुझे प्रदीप और उस के छोटे भाई हितेष पर शक हो रहा है. ये मेरे साथ कोई अनहोनी कर सकते हैं.
मां ने समझाते हुए कहा कि यह तेरा वहम है. भला वे ऐसा क्यों करेंगे?
‘‘मम्मी, वहम नहीं, न जाने मुझे ऐसा क्यों लग रहा है कि अब मैं आप से कभी नहीं मिल सकूंगी.’’ इतना कह कर नेहा रोने लगी. मां ने धैर्य रखने को कहा.
3-4 दिन गांव में रुकने के बाद 19 अप्रैल, 2015 की रात प्रदीप ने नेहा से कहा, ‘‘चलो, कोई पूजा करनी है, जिस से घर की सुखशांति लौट आए और रोजरोज के क्लेश से मुक्ति मिल जाए.’’
नेहा भी घर में शांति चाहती थी, इसलिए पति के साथ चली गई. पति के साथ वह चली तो गई, लेकिन उस समय कार में बैठने पर उसे डर लग रहा था. बहरहाल वह कार में बैठ कर चली तो गई, लेकिन वापस जीवित नहीं लौटी. दो-ढाई घंटे बाद प्रदीप उस की लाश ले कर वापस अपने घर लौटा. उस समय उस के साथ उस का छोटा भाई हितेष और भाजपा नेता दशरथ मेघवाल भी थे. पड़ोसियों और मोहल्ले वालों के पूछने पर प्रदीप ने विस्तार से बताया, ‘‘चलती गाड़ी का दरवाजा अचानक खुल जाने से नेहा सड़क पर गिर गई. घायल अवस्था में इसे गडरा रोड अस्पताल ले जाया गया, जहां डा. अशोक मीणा ने हालत नाजुक बताई और ऐंबुलैंस से इसे बाड़मेर ले जाने की सलाह दी. तब मैं बाड़मेर अस्पताल ले गया. लेकिन वहां के डाक्टर ने मृत घोषित कर दिया.
‘‘चूंकि मामला दुर्घटना का था, इसलिए डाक्टर ने पुलिस को सूचना दे दी. उस समय आधी रात का समय था. एक कांस्टेबल अस्पताल आया. उस ने कहा कि शव मोर्चरी में रखवा देते हैं, सुबह पोस्टमार्टम के बाद ले जाना. मैं ने सिपाही को अपना परिचय देते हुए कहा कि इन की मौत कार का गेट खुलने पर गिरने से हुई है. मैं इन का पोस्टमार्टम नहीं कराना चाहता. सिपाही को मेरी बात समझ आ गई और मैं लाश को घर ले आया.’’
प्रदीप ने नेहा की मौत की खबर उस के मायके वालों को देने के बजाय सुबह नेहा का अंतिम संस्कार कर दिया. शव के ऊपर उस ने नमक डाल दिया था. नेहा मेघवाल जाति की थी और राजस्थान में मेघवाल जाति के लोगों का अंतिम संस्कार जमीन में दफना कर ही किया जाता है. मेघवाल जाति हिंदू धर्म में ही आती है, इस के बावजूद भी इस जाति के लोग चिता जलाने के बजाय अंतिम संस्कार लाश को दफना कर करते हैं. नेहा एक जिला आबकारी अधिकारी की पत्नी थी, इसलिए मीडिया वालों को जब घटना की जानकारी हुई तो प्रिंट और इलेक्ट्रौनिक मीडिया में नेहा की मौत की खबर प्रसारित हुई तो प्रदीप को जानने वाले अनेक लोग उस के गांव पहुंचने लगे.
नेहा के मायके वालों को जब नेहा की ऐक्सीडैंट में मौत होने की खबर मिली तो उस के मायके में चीखपुकार मच गई. मायके वाले प्रदीप के गांव पहुंचे. उन्हें विश्वास ही नहीं हो रहा था कि चलती कार का गेट अचानक कैसे खुल जाएगा. अगर मान भी लिया जाए कि नेहा की मौत ऐक्सीडैंट में हुई थी तो प्रदीप ने उन्हें सूचना क्यों नहीं दी. सूचना दिए बगैर और बिना पोस्टमार्टम कराए ही, उस ने जल्दबाजी में उस का अंतिम संस्कार क्यों कर दिया. ऐसे कई सुलगते सवाल थे, जो नेहा के पिता भीमाराम एवं माता पार्वती के साथ उस के भाइयों के दिमाग में घूम रहे थे.
उन्हें ऐसा लग रहा था कि प्रदीप ने नेहा को मार कर ऐक्सीडैंट का रूप दिया है. पार्वती और भीमराम ने 22 अप्रैल, 2015 को बाड़मेर के पुलिस अधीक्षक पारिस देशमुख अनिल से मुलाकात कर के बेटी की शादी होने के बाद से उसे प्रताडि़त करने, दहेज मांगने की पूरी बात बताई. उन्होंने बताया कि यह दुर्घटना नहीं, बल्कि हत्या का मामला है. उन्होंने नेहा के पति प्रदीप बालाच, देवर हितेष और सास के ऊपर शक जताते हुए उन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर कानूनी काररवाई करने की मांग की. नेहा की लाश का पोस्टमार्टम नहीं करवाने और मायके वालों को मौत की सूचना दिए बगैर आननफानन में लाश का अंतिम संस्कार कराने पर एसपी को भी शक हो गया.
उन्होंने गडरा रोड के थानाप्रभारी को निर्देश दिया कि प्रदीप बालाच और उस के भाई को थाने बुला कर पूछताछ की जाए, ताकि नेहा की मौत की सच्चाई सामने आ सके. उधर मीडियाकर्मी अपने स्तर पर नेहा की मौत के राज से परदा उठाने के लिए मैदान में कूद पड़े. प्रदीप बालाच ने जहां नेहा की दुर्घटना होने की बात बताई थी, उस जगह रात 10 बजे रियाज खां नाम का एक शख्स अपनी गाड़ी ले कर गुजर रहा था. रियाज ने सड़क किनारे बोलेरो देख कर अपनी गाड़ी रोक दी थी. उसे बोलेरो में लाल शर्ट पहने ड्राइवर व एक बच्चा बैठा दिखा. सड़क से दूर एक व्यक्ति टौर्च लिए खड़ा था.
रियाज ने जब ड्राइवर से पूछा कि कहां से आए हो तो उसने जवाब देने के बजाय जीप के गेट का शीशा ऊपर चढ़ा दिया. इस के बाद रियाज वहां से गाड़ी ले कर चला गया. रियाज को पत्रकारों ने ढूंढ़ निकाला था और उस से बात कर के यह साबित कर दिया था कि जरूर नेहा को मारा गया था. प्रदीप आबकारी विभाग, जोधपुर की बोलेरो जीप नंबर आरजे19यू आर1069 ले कर जोधुपर से गडरा रोड आया था. उस समय नेहा का 4 वर्षीय बेटा रजत भी था. पत्रकारों ने आबकारी विभाग, जोधपुर के ड्राइवर सुगनलाल से बात की तो उस ने बताया कि उस दिन जीप प्रदीप बालाच के पास थी. नेहा की मौत की खबर मिलने पर वह 20 अप्रैल को प्रदीप बालाच की इनोवा गाड़ी में प्रदीप के मातापिता को ले कर गडरा रोड गया था. इनोवा को गडरा में छोड़ कर वह सरकारी बोलेरो गाड़ी ले कर जोधपुर लौट आया था.
मीडिया द्वारा पुलिस को यह खबरें मिलीं तो एसपी के निर्देश पर चोहटन के सीओ नीरज पाठक ने भाजपा के पदाधिकारी दशरथ मेघवाल से पूछताछ की. दशरथ ने बताया, ‘‘मुझे फोन पर प्रदीप बालाच ने बताया था कि कार का गेट खुलने से नेहा का ऐक्सीडैंट हो गया है और मैं गाड़ी ले कर पहुंचूं. चूंकि उन से मेरे घनिष्ठ संबंध थे, इसलिए मैं गाड़ी ले कर घटनास्थल पर गया और नेहा को ले कर गडरा रोड अस्पताल गया. नेहा की हालत गंभीर थी, इसलिए वहां के डाक्टर ने उसे बाड़मेर रैफर कर दिया. बाड़मेर के डाक्टर ने नेहा को मृत घोषित कर दिया था.’’
इस के बाद सीओ नीरज पाठक ने गडरा रोड सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के डा. अशोक मीणा के बयान भी नोट किए. इन बयानों के बाद सीओ को जो चौंकाने वाले तथ्य मिले, उस से लगा कि प्रदीप की ससुराल वालों द्वारा लगाए आरोप सही हैं. पुलिस प्रदीप के खिलाफ पहले सबूत जुटाना चाहती थी. इसलिए 24 अप्रैल, 2015 को मैडिकल बोर्ड और मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में नेहा का शव जमीन से निकाल कर पोस्टमार्टम कराया. नमक डालने की वजह से शव सड़गल चुका था. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि नेहा की मौत सड़क हादसे में नहीं हुई थी. उस के शरीर पर ऐसी कोई गंभीर चोट नहीं थी, जिस से लगे कि उस की मौत हो गई. नेहा की मौत के कारणों को जानने के लिए विसरा को मैडिकल कालेज, जोधपुर भेज दिया गया.
पुलिस को पूछताछ में पता चला कि प्रदीप बालाच की सरकारी बोलेरो गाड़ी घटनास्थल पर मौजूद थी. इस के बाद उसे बाड़मेर रैफर करने तक प्रदीप ने 3 बार गाडि़यां बदलीं. अपनी सरकारी गाड़ी से नेहा को वह अस्पताल क्यों नहीं ले गया? उस ने अस्पताल ले जाने के लिए भाजपा नेता को क्यों बुलाया? ये सारे सबूत मिल जाने के बाद प्रदीप बालाच और उस के छोटे भाई से पूछताछ करनी जरूरी थी. पुलिस जब उस के घर पहुंची तो हितेष घर से गायब मिला और प्रदीप ने थाने आने से मना कर दिया. सीओ ने इस बात से एसपी को अवगत कराया. एसपी को प्रदीप की यह बात नागवार लगी. उन का मानना था कि सरकारी अधिकारी होने के नाते आबकारी अधिकारी प्रदीप को पुलिस जांच में सहयोग करना चाहिए.
उन्होंने सीओ नीरज पाठक के नेतृत्व में भारी पुलिस बल प्रदीप के घर 25 अप्रैल, 2015 को भेज दिया. पुलिस प्रदीप को पूछताछ के लिए गडरा रोड थाने ले आई. पुलिस अधीक्षक पारिस देशमुख, सीओ चोहटन नीरज पाठक, गडरा रोड थानाप्रभारी बाबूलाल विश्नोई ने प्रदीप से नेहा की हत्या से संबंधित मनोवैज्ञानिक तरीके से रातभर पूछताछ की. लेकिन वह पुलिस को गुमराह करने के लिए बारबार रोने का नाटक करता रहा. पूरी रात ऐसे ही बीत गई. सुबह को अधिकारियों ने उस से फिर पूछताछ की. इस बार वह पुलिस अधिकारियों के सवालों के चक्रव्यूह में फंस गया. आखिर उस ने पत्नी नेहा की हत्या का राज उगल दिया. वह फफकफफक कर रोते हुए बोला, ‘‘हां, मैं ने नेहा की हत्या की है. लंबे समय से कलह के कारण मैं परेशान हो गया था और बस इसी कारण मैं ने उस की जान ले ली.’’
प्रदीप ने बताया कि वह नेहा को टोनेटोटके के बहाने हेलीपैड पर ले गया. वहां टोटका करने के लिए अगरबत्ती जलाई, गेहूं, ज्वार के दाने रखे. जब नेहा पूजा कर रही थी, उस समय गाड़ी में रखे डंडे से नेहा के सिर पर वार किया, जिस से वह घायल हो गई. उसी समय उस ने अपने छोटे भाई हितेष को वहां बुला लिया. फिर वे दोनों नेहा को गाड़ी में डाल कर जैसिंधर गांव से दूर सुनसान सड़क पर ले गए. वहां उन्होंने गाड़ी रोकी और नेहा को धक्का दे कर गिरा दिया ताकि हत्या को हादसे का रूप दे सकें. बाद में उस का गला घोंट दिया.
पुलिस टीम ने जोधुपर से आबकारी विभाग की बोलेरो गाड़ी भी जब्त कर ली. इस के अलावा घटनास्थल से माचिस, लकड़ी के टुकड़े व अन्य सामग्री जब्त की. भीमाराम की तहरीर के आधार पर नेहा की हत्या का मुकदमा गडरा रोड थाना में भादंवि की धारा 302, 498ए, 201 के तहत प्रदीप बालाच, उस के छोटे भाई हितेष बालाच व मां के खिलाफ दर्ज कर लिया गया. जांच एसआई बाबूलाल बिश्नोई को सौंप दी गई. पुलिस ने हितेष की गिरफ्तारी के लिए अलगअलग टीमें गठित कर उस की तलाश शुरू कर दी. प्रदीप बालाच को 27 अप्रैल को बाड़मेर कोर्ट में पेश किया, वहां से उसे 3 दिन के रिमांड पर ले कर उस से विस्तार से पूछताछ की और घटनास्थल की तफ्तीश कराने के साथ कई सबूत भी जुटाए.
प्रदीप ने पुलिस अधिकारियों से कहा कि पत्नी की हत्या कर के उस ने बड़ा अपराध किया है. उधर 27 अप्रैल, मंगलवार को हितेष बालाच ने पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया. पुलिस टीम उसे भी घटनास्थल पर ले गई और मौका मुआयना कर नेहा की हत्या से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी हासिल की. हितेष को 28 अप्रैल को कोर्ट में पेश कर 2 दिनों के रिमांड पर ले लिया. 30 अप्रैल को पुलिस ने रिमांड अवधि समाप्त होने पर प्रदीप व हितेष को बाड़मेर कोर्ट में पेश कर और रिमांड मांगा. प्रदीप को 2 दिनों के रिमांड पर दिया, वहीं हितेष को न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया.
2 दिनों के रिमांड अविध पूर्ण होने पर गडरा पुलिस द्वारा प्रदीप बालाच को 2 मई, 2015 को बाड़मेर कोर्ट में पेश किया, जहां न्यायाधीश द्वारा प्रदीप बालाच को भी न्यायिक अभिरक्षा में भेजने के आदेश दिए. दोनों भाई न्यायिक अभिरक्षा में बाड़मेर जेल में बंद अपने किए की भूल पर पछताते हुए आंसू बहा रहे हैं. नेहा के दोनों मासूम बेटे मां की ममता की छांव से हमेशा के लिए दूर हो गए. 5 मई को पुलिस ने नेहा की सास को भी गिरफ्तार कर लिया. उसे धारा 498ए (दहेज के लिए प्रताडि़त करना) के तहत गिरफ्तार किया था. गिरफ्तारी के बाद उसे बाड़मेर की अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया.
5 मई, 2015 को राज्य सरकार ने पत्नी की हत्या के आरोपी प्रदीप को निलंबित कर दिया है. 48 घंटे से अधिक पुलिस अभिरक्षा में रहने के कारण राज्य सरकार ने निलंबन आदेश जारी किए. कथा लिखने तक प्रदीप व हितेष बाड़मेर जेल में बंद थे. Rajasthan Crime Story
(कथा पुलिस सूत्रों/समाचार पत्रों/नेहा के मायके पक्ष द्वारा दी जानकारी पर आधारित)






