Crime Story: किसी का भी खून करना इतना आसान नहीं है, क्योंकि ज्यादातर लोग खून देख कर ही घबरा जाते हैं. लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जिन्हें किसी को भी मार देना खेल लगता है. यह कहानी ऐसे ही लोगों की है.

लुधियाना न्यू कोर्ट का माहौल उस दिन बड़ा रहस्यमयी लग रहा था. गेट से ले कर अंदर तक चप्पेचप्पे पर पुलिस तैनात थी. इस की वजह यह थी कि उस दिन अदालत लुधियाना के बहुचर्चित डीएसपी बलराज गिल और उन की महिला मित्र मोनिका कपिला हत्याकांड का फैसला सुनाने वाली थी. हत्यारे कितने खतरनाक और खूंखार थे, इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता था कि उन्हें जेल से अदालत तक लाने के लिए 60 पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई थी. अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रिया सूद की अदालत को सुरक्षा की दृष्टि से पुलिसकर्मियों ने पूरी तरह से घेर रखा था. क्योंकि उन्हीं की अदालत में फैसला सुनाया जाने वाला था.

राष्ट्रपति पदक से सम्मानित डीएसपी बलराज गिल और उन की महिला मित्र मोनिका कपिला की 1 फरवरी, 2012 की रात बड़ी बेरहमी से हत्या कर दी गई थी. इस दोहरे हत्याकांड को 6 लोगों, उमेश कारड़ा उर्फ सोनू, हरविंदर सिंह उर्फ पिंदर, प्रितपाल सिंह उर्फ लड्डू, हसनजीत सिंह उर्फ जीता, दविंदरपाल सिंह उर्फ लाडी और रविंदर सिंह उर्फ रिंकू ने मिल कर अंजाम दिया था. पंजाब पुलिस ने इन लोगों को बड़ी मेहनत से पकाड़ा था. डीएसपी बलराज गिल की तैनाती उन दिनों जिला मोगा में डीएसपी हैडक्वार्टर के रूप में थी. चुनाव की वजह से पिछले एक महीने से वह काफी व्यस्त थे. ठीकठाक चुनाव संपन्न हो गए तो उन्होंने चैन की सांस ली थी और 1 फरवरी को छुट्टी ले कर लुधियाना स्थित अपने घर आ गए थे.

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