Mathura Crime Story: प्यार के नाम पर लड़केलड़कियां घर वालों की मरजी के खिलाफ शादी तो कर लेते हैं, लेकिन जब यथार्थ की जमीन पर उन के पांव पड़ते हैं तो उन्हें अपने प्रेमिल संबंध दरकते से नजर आने लगते हैं. बस यहीं से कभीकभी उन के बीच अपराध की भूमिका बनने लगती है. ममता और मुकेश के बीच भी कुछ ऐसा ही हुआ...

कस्बा नौहफील, मथुरा जिला मुख्यालय से करीब 70 किलोमीटर दूर है. कन्हैयालाल शर्मा उत्तर प्रदेश जलनिगम में यहीं पर नौकरी करते थे. कुछ साल पहले उन की मृत्यु हो गई तो मृतक आश्रिता के रूप में उन की पत्नी राजकुमारी को नौकरी मिल गई. राजकुमारी के 3 बेटे थे, मुकेश, सोनू और सुभाष. पति की मौत के बाद परिवार की जिम्मेदारी राजकुमारी पर आ गई. बड़े बेटे मुकेश का पढ़ाई में मन नहीं लगा तो राजकुमारी ने एक दुकान पर उस की नौकरी लगवा दी.

मंझला बेटा सोनू पढ़ाई में तेज था. सौफ्टवेयर इंजीनियर बन कर वह दिल्ली में हिंदुस्तान सिरिंज कंपनी में काम करने लगा, जबकि छोटा सुभाष अभी पढ़ रहा था. राजकुमारी के दोनों बेटे अपने पैरों पर खड़े हो चुके थे, अब उन का पूरा ध्यान छोटे बेटे मुकेश पर था. लेकिन वह महसूस कर रही थीं कि मुकेश का लगाव पढ़ाई से हटता जा रहा है. मुकेश कोई छोटा बच्चा तो था नहीं, जो उसे डांटडपट कर पढ़ाई कराई जा सकती. एक दिन उन्होंने उस से बात की.

इस पर मुकेश ने कहा कि उस के कई दोस्त जागरण मंडली के साथ जाते हैं. वहां से उन्हें अच्छी कमाई होती है, अगर वह अपनी जागरण मंडली बना ले तो अच्छीभली कमाई कर सकता है. दरअसल मुकेश उन लोगों में था, जो रातोंरात अमीर होना चाहते हैं. मां ने भी सोचा कि जब बेटे की इच्छा यही है तो उसे एक मौका दे ही देना चाहिए. जागरण मंडली बनाने के लिए मुकेश को काफी सामान जुटाना था. जबकि सामान खरीदने के लिए उस के पास पैसे नहीं थे. ऐसे में उस की मां ने ही उसे सामान खरीदने के लिए पैसे दिए. सामान आदि जुटाने के बाद मुकेश ने कुछ जानने वाले कलाकारों को अपनी मंडली में शामिल कर लिया. जब पूरी तैयारी हो गई तो उस ने अपनी जागरण मंडली का प्रचार करना शुरू कर दिया.

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