Kerala News: रंजिनी फौजी प्रेमी दिविल के सामने बहुत गिड़गिड़ाई, लेकिन वह उस से शादी करने के लिए तैयार नहीं हुआ, बल्कि उस पर अबौर्शन कराने का दबाव बनाने लगा. रंजिनी ने उस की बात नहीं मानी और 2 बेटियों को जन्म दिया. इस के बाद इस कुंवारी मां और उस की बच्चियों का ऐसा हश्र हुआ कि…
केरल के कोल्लम जिले के आंचल गांव की रहने वाली 70 साल की सांथम्मा मंदिर के बरामदे में बैठी फूल बेच रही थी. 4 जनवरी को उसी दौरान उस के सस्ते मोबाइल की घंटी बजी. सांथम्मा ने फोन की स्क्रीन पर नंबर देखा. नंबर एकदम अनजान था. फिर भी उस ने फोन उठाया. दूसरी ओर से फोन करने वाले की भारी और रौबदार आवाज सुनाई दी. यह आवाज पुलिस अधिकारी की थी.

हमेशा कानूनी दांवपेंच और रौब से बात करने वाले पुलिस अधिकारी की आवाज में उस समय स्नेह का पुट था. उस ने कहा, ”अम्मा, आप की प्रार्थना और हमारी मेहनत सफल हुई. देर भले हुई, पर 19 साल की जहमत के बाद हम ने उन दोनों नराधमों को पकड़ लिया है.’’
यह सुन कर अनायास ही बूढ़ी सांथम्मा के गाल आंसुओं से भीग रहे थे. गांव के किसी आदमी ने यह समाचार टीवी पर देखा था, इसलिए पूरे गांव में यह बात फैल गई थी, जिस से गांव वाले सांथम्मा के पास दौड़े आए थे. पुलिस की यह बड़ी उपलब्धि थी, इसलिए थोड़ी देर में मीडिया वाले भी सांथम्मा का इंटरव्यू लेने आ गए थे. सांथम्मा ने कांपती आवाज में सब से पहले यही कहा था, ”मैं अदालत से यही प्रार्थना करती हूं कि वे दोनों हत्यारे जब तक जिंदा रहें, तब तक वे सूरज का उजाला न देख पाएं.’’
आखिर क्या है यह पूरा मामला? अब इस के बारे में विस्तार से जानते हैं. केरल के कोल्लम जिला के अलायमोन गांव में सांथम्मा अपनी बेटी रंजिनी के साथ रहती थी. मांबेटी काफी गरीब थीं. मामूली वेतन पर सांथम्मा गांव के मंदिर में नौकरी करती थी. रंजिनी लोगों के घर छोटेमोटे काम करती थी. गांव का ही एक बढ़ई युवक दिविल कुमार सेना में नौकरी करता था. साल में 2-3 बार वह सेना से छुट्टी मिलने पर गांव आता था. उसी दौरान उस की रंजिनी से मुलाकात होती थी. दोनों जवान थे. परिणामस्वरूप दोनों के बीच प्रेम संबंध बन गया. इस के बाद तो दिविल बारबार गांव आने लगा. प्रेम के आवेश में दोनों तमाम मर्यादाएं लांघ गए.
इस के बाद दिविल गांव आया तो रंजिनी उस से मिली. इस बार रंजिनी काफी गंभीर थी. उस ने दिविल के कंधे पर सिर रख कर कहा, ”दिविल, अभी मैं ने अपनी मम्मी को कुछ नहीं बताया है. मैं गर्भवती हूं और जनवरी महीने में हमारे बच्चे को जन्म देने वाली हूं, इसलिए उस के पहले हमें विवाह कर लेना चाहिए.’’
इस के बाद रंजिनी ने रुआंसी आवाज में कहा, ”अगर हम विवाह नहीं करते हैं तो एक कुंवारी मां के रूप में मेरा गांव में रहना मुश्किल हो जाएगा. इसलिए तुम तय कर लो कि हमें विवाह कब करना है.’’
रंजिनी की बात सुन कर दिविल चौंक उठा. उस ने कहा, ”अभी तो विवाह करना मुमकिन नहीं है. पर इस समस्या के हल का एक सरल उपाय है. तुम अबौर्शन करा लो.’’
दिविल का जवाब सुन कर रंजिनी परेशान हो उठी. उस के सामने हाथ जोड़ कर गिड़गिड़ाने लगी कि वह उस के साथ ऐसा व्यवहार न करे. जितनी जल्दी हो सके विवाह कर ले और उस के गर्भ में पल रहे अपने बच्चे को इस दुनिया में आने दे. पर दिविल तो गर्भपात की जिद पकड़े बैठा रहा. दिविल की जिद पर रंजिनी खीझ उठी. उस ने गुस्से में कहा, ”दिविल, चाहे कुछ भी हो, मेरा निर्णय अटल है. किसी भी संयोग में अपने गर्भ में पल रहे बच्चे को मैं हरगिज नहीं मरने दूंगी. मैं इसे जन्म दूंगी और इस के पिता के रूप में तुम्हारा नाम लिखाऊंगी.’’

”अगर तुम्हें मेरी बात नहीं माननी तो फिर तुम्हारी जो मरजी हो, वह करो.’’ इतना कह कर दिविल उठा और चला गया. अगले दिन वह पठानकोट चला गया, क्योंकि उन दिनों उस की तैनाती वहीं थी. इस के बाद वह फिर कभी गांव नहीं आया.

स्वाभिमानी रंजिनी अपने फैसले पर अटल रही. दिविल तो धोखा दे कर भाग निकला था. इस के बावजूद हिम्मत हारे बगैर रंजिनी ने रोते हुए सारी बात अपनी मम्मी को बता कर अपना फैसला भी सुना दिया. धर्मकर्म को मानने वाली सांथम्मा को झटका तो लगा, फिर भी उसने बेटी से कहा कि वह चिंता न करे. वह भ्रूण हत्या नहीं होने देगी. वह उस के साथ है.
पैदा हुईं जुड़वां बेटियां
अलायमोन गांव के कुछ लोगों से रुपए उधार ले कर जनवरी, 2006 में मांबेटी त्रिवेंद्रम आ गईं. वहां के सरकारी श्री अवित्तम थिरुनल अस्पताल में रंजिनी को दिखाया. वहां के डाक्टरों ने रंजिनी की जांच करने के बाद सांथम्मा को शुभकामनाएं देते हुए कहा, ”अम्मा, आप एक नहीं, 2 बच्चों की नानी बनने वाली हैं.’’
22 जनवरी, 2006 को रंजिनी को अस्पताल में भरती कराया गया. एकदम अंजान शहर और अस्पताल का मामला था. इसलिए सांथम्मा परेशान थी, पर अस्पताल में उस के पास एक मददगार आ गया. अनिल कुमार नाम के उस युवक ने सांथम्मा के पास आ कर कहा, ”अम्मा, आप किसी बात की चिंता न करें. मैं यहां गरीब रोगियों की सेवा करने का काम करता हूं. आप का कोई भी काम हो या जरूरत हो, आप मुझ से कहिएगा. अगर सीजेरियन औपरेशन होगा तो खून की भी जरूरत पड़ेगी. जरूरत पडऩे पर मैं खून का भी इंतजाम करवा दूंगा.’’

सांथम्मा ने अनिल कुमार नाम के उस देवदूत का आभार व्यक्त किया. अस्पताल में अनिल कुमार उस के आसपास ही रहता था. जरूरत पडऩे पर छोटेमोटे काम कर देता था. खून की जरूरत तो नहीं पड़ी. 24 जनवरी, 2006 को रंजिनी ने 2 स्वस्थ बेटियों को जन्म दिया. अस्पताल से छुट्टी मिलती, उस के पहले ही रंजिनी को अपनी दोनों बेटियों के भविष्य की चिंता सताने लगी. उन दोनों का पालनपोषण के अलावा उन की पढ़ाईलिखाई की भी व्यवस्था करनी अनिवार्य थी. आंचल गांव में रह कर मांबेटी मुश्किल से अपना गुजारा कर रही थीं, उस में 2 लोग और जुड़ गए थे.
पिता के रूप में दिविल अपनी जिम्मेदारी से भाग न सके, इस के लिए उन दोनों के लिए उस से एक निश्चित रकम लेनी चाहिए. इस के लिए रंजिनी ने केरल के महिला आयोग में अपनी शिकायत दर्ज कराई कि उस की इन दोनों बेटियों का बाप दिविल है. इस के लिए उस ने उन का डीएनए टेस्ट कराने की भी मांग की. राज्य महिला आयोग ने दिविल को डीएनए टेस्ट कराने का आदेश भी दे दिया. अस्पताल से छुट्टी मिलने वाली थी तो मांबेटी दुविधा में थीं कि वे कहां जाएंगी. कुंवारी रंजिनी अपनी 2 बच्चियों को ले कर गांव जाएगी तो गांव वाले उस पर थूकेंगे.
उन की चिंता का अंदाजा लगा कर अनिल कुमार ने कहा, ”मैं आप लोगों को आंचल गांव में एक कमरा किराए पर दिला देता हूं. वहां कोई आप लोगों के बारे कुछ नहीं जानता, इसलिए कोई कुछ कहेगा भी नहीं. इस तरह आप लोग बेइज्जती कराने से बची रहेंगी.’’
अनिल कुमार ने अगले ही दिन आंचल गांव में सांथम्मा और रंजिनी को एक छोटा सा घर किराए पर दिला दिया. इस के बाद सांथम्मा रंजिनी और उस की दोनों बेटियों को ले कर उस घर में रहने आ गई. नामकरण की रस्म बाकी थी, पर रंजिनी ने दोनों बेटियों का मुंह ताकते हुए उन के नाम तय कर लिए थे— आनंदा और अक्षया. अनिल कुमार जबतब आ कर हालचाल पूछ लेता था. एक दिन आ कर उस ने सांथम्मा से कहा, ”बच्चियों के जन्म प्रमाणपत्र के लिए अस्पताल के कागज ले कर कल सुबह आप को पंचायत के औफिस जाना है.’’
किस ने किए 3 मर्डर
अगले दिन 10 फरवरी, 2006 को सांथम्मा 11 बजे पंचायत औफिस गई. एक घंटे बाद वह वापस आई तो घर का दरवाजा केवल अटका कर बंद किया हुआ था. सांथम्मा ने दरवाजा खोल कर जैसे ही कदम अंदर रखा, उसके मुंह से चीख निकल गई. वह तुरंत बाहर आ गई और रोते हुए गिर पड़ी. आसपास वाले इकट्ठा हो गए. लोगों ने अंदर कमरे में झांक कर देखा. कमरे के फर्श पर खून से लथपथ 28 साल की रंजिनी की लाश पड़ी थी और 19 दिन की दोनों बच्चियों की लाशें चारपाई पर पड़ी थीं. तीनों की गरदन बड़ी बेरहमी से काटी गई थी.
किसी ने इस की सूचना पुलिस को दे दी थी. सूचना पा कर पुलिस आ गई थी. रंजिनी और उस की 2 नवजात बेटियों की हत्या किस ने की, पुलिस ने जांच शुरू कर दी. पूछताछ में पड़ोसियों ने बताया था कि जबतब एक युवक इन के यहां आता था. पर उस का नाम कोई नहीं बता सका था. जब उस युवक के बारे में सांथम्मा से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि उस का नाम अनिल कुमार था. उस ने यहां उन की काफी मदद की थी. किसी होशियार पड़ोसी ने अनिल की बाइक का नंबर देख लिया था, जो उसे याद था. उस ने पुलिस को उस की बाइक का नंबर बता दिया था.
इस जानकारी के आधार पर पुलिस ने अपनी जांच आगे बढ़ाई. पुलिस ने बाइक के मालिक के बारे में पता किया. उस का नाम अनिल कुमार नहीं, बल्कि राजेश था. सांथम्मा ने पुलिस को दिविल के खिलाफ रंजिनी द्वारा महिला आयोग में की गई शिकायत के बारे में बता कर रंजिनी और उस की दोनों बच्चियों की हत्या की रिपोर्ट दर्ज करा दी थी.
पुलिस ने जब राजेश के बारे में पता किया तो जानकारी मिली कि राजेश तो दिविल का जिगरी दोस्त था. वह अनिल कुमार के नाम से इस परिवार के नजदीक आ कर मदद का नाटक कर रहा था. राजेश भी दिविल के साथ सेना में नौकरी करता था. वह भी उसी रेजिमेंट में था, जिस में दिविल था. दोनों पठानकोट के एक ही कैंप में रहते भी थे.
केरल पुलिस पठानकोट पहुंची तो दिविल और राजेश फरार हो चुके थे. पुलिस ने सेना के अधिकारियों से बात की तो अधिकारियों ने दोनों को डेजर्टर घोषित कर दिया. दोनों के बारे में पता करने के लिए पुलिस ने रातदिन एक कर दिया, एड़ीचोटी का जोर लगा दिया, दोनों की सूचना देने वाले को एक लाख रुपए का इनाम देने की भी घोषणा की गई, पर उन का कुछ पता नहीं चला. 3 हत्याएं करने वाले आरोपियों के खिलाफ लोगों को गुस्सा तो था ही, अब उनके न पकड़े जाने से लोगों को पुलिस पर भी गुस्सा आने लगा था, पर पुलिस की लाख कोशिश के बावजूद आरोपी पकड़े नहीं जा सके. तब हाईकोर्ट के आदेश पर हत्याओं के इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई.
सीबीआई ने इस मामले की जांच शुरू की. आरोपी तो नहीं पकड़े जा सके, पर सीबीआई ने अपनी जांच के बाद दोनों को आरोपी बना कर चार्जशीट दाखिल कर दी तो चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रैट, अर्नाकुलम की अदालत ने दिविल कुमार और राजेश कुमार को आरोपी घोषित कर दिया. परंतु ट्रिपल मर्डर के इस मामले में हत्यारे अब तक पकड़े नहीं जा सके थे. सीबीआई की भी काररवाई फाइलों तक सिमट कर रह गई थी. सभी ने यही सोच लिया था कि अब रंजिनी को न्याय नहीं मिल पाएगा.
परंतु केरल पुलिस के एडीजीपी (ला एंड और्डर) मनोज अब्राहम ने उम्मीद नहीं छोड़ी थी. साल 2024 के शुरू से ही उन की टैक्निकल इंटेलिजेंस विंग के अधिकारी आर्टीफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से हल न होने वाले पुराने मामलों की डिजिटल कुशलता से हल करने की कोशिश शुरू कर दी थी.
एआई से मिली हेल्प
दिविल और राजेश के साल 2006 में मिले फोटो पर उन्होंने आर्टीफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से काम शुरू किया. इतने सालों बाद उन की स्थिति (हालत) कैसी होगी? चेहरा, हेयरस्टाइल और शरीर में होने वाले बदलाव से वे कैसे दिखाई देते होंगे, उन की फोटो तैयार की गई. इस के बाद दुनिया भर के सोशल मीडिया पर जितने भी फोटो थे, उन से मिलाया जाने लगा. अत्यंत धैर्य और होशियारी से उन की टीम द्वारा की गई मेहनत अंत में दिसंबर, 2024 में रंग लाई.
पुडुचेरी के एक वैवाहिक समारोह में दिखाई देने वाला एक चेहरा राजेश के चेहरे से 90 प्रतिशत मेल खा रहा था. मनोज अब्राहम ने सीबीआई अधिकारियों से मिल कर वह फोटो उन्हें दे कर बताया कि रंजिनी की हत्या वाला यह एक आरोपी पुडुचेरी में है. फिर तो सीबीआई की टीम उत्साह में आ गई. राजेश की तलाश में सीबीआई टीम पुडुचेरी पहुंच गई. इस के बाद उस फोटो वाले व्यक्ति को खोज कर उस पर नजर रखने लगी. जब टीम को विश्वास हो गया कि प्रवीण नाम का यह आदमी राजेश ही है तो 4 जनवरी, 2025 को प्रवीण उर्फ राजेश को हिरासत में ले लिया गया.
इस के बाद उस से दिविल कुमार के बारे में भी उगलवा लिया गया. दिविल कुमार ने पुडुचेरी में अपना नाम विष्णु रख लिया था. राजेश से नामपता मिलने के बाद सीबीआई टीम ने उसे भी दबोच लिया. साल 2006 में रंजिनी और उस की दोनों नवजात बेटियों की हत्या कर के राजेश और दिविल पठानकोट जा कर वहां से भाग कर पुडुचेरी आ गए थे. 2006 से 2025 तक दोनों ने पार्टनरशिप में इंटीरियर डिजाइनर का काम कर के अपना अच्छा धंधा जमा लिया था. बढ़ई के काम के साथ उन में महिलाओं को पटाने का भी हुनर था, इसलिए वहां 2 अध्यापिकाओं को पटा कर उन से विवाह कर के अपना घरसंसार बसा लिया था. रहने के लिए दोनों ने फ्लैट भी खरीद लिए थे.
हत्या के 19 साल बीत चुके थे. नए नाम से नए शहर में इन दोनों हत्यारों ने नई जिंदगी शुरू की थी. नए नाम का आधार कार्ड भी बनवा लिया था. इसलिए दोनों पूरी तरह निश्चिंत थे कि अब वे कभी पकड़े नहीं जाएंगे. परंतु आर्टीफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से पुलिस ने असंभव लगने वाला काम कर दिखाया और दोनों हत्यारे पकड़ लिए गए थे.
यह समाचार सुन कर बूढ़ी सांथम्मा की आंखों से खुशी के आंसू बह निकले थे. उस ने पत्रकारों से कहा कि जब उनकी बेटी रंजिनी ने उन से प्रेग्नेंसी की बात बताई थी तो उन्हें झटका सा लगा था. बाप के रूप में आने वाली संतान का खर्च या जिम्मेदारी उठाने को दिविल तैयार नहीं था, इसलिए उस ने रंजिनी को अबौर्शन कराने की सलाह दी थी.
पर रंजिनी इस के लिए तैयार नहीं थी. वह अपनी जिद पर अड़ी थी कि कुछ भी हो जाए, वह अपने बच्चे को जन्म देगी. तब एक मां होने के नाते सांथम्मा ने उस का साथ दिया था. उन्होंने अपनी जवान बेटी और उस की 19 दिन की नवजात बेटियों की खून में लथपथ लाशें देखी थीं. यह दृश्य जब भी उन की आंखों के सामने आता था, उस रात उन्हें नींद नहीं आती. पुलिस ने उन दोनों आरोपियों दिविल कुमार और प्रवीण उर्फ राजेश से 3 हत्याओं के बारे में विस्तार से पूछताछ कर जेल भेज दिया. Kerala News






