UP News: झांसी की 40 वर्षीय अनीता चौधरी ने जब औटोरिक्शा चलाना शुरू किया तो लोगों ने उस की हिम्मत की दाद देते हुए बहुत सम्मान दिया. जिले की इस पहली लेडी औटो ड्राइवर को न सिर्फ सामाजिक संगठनों बल्कि पुलिस के सीनियर अधिकारियों ने भी सम्मानित किया, लेकिन एक दिन उस की हत्या हो जाने पर पुलिस अधिकारी भी भौचक्के रह गए. कौन था अनीता चौधरी का हत्यारा और क्यों की गई उस की हत्या? पढ़ें, लव क्राइम की यह खास स्टोरी.
अनीता चौधरी की उपेक्षा से मुकेश झा बहुत परेशान रहने लगा था. वह समझ नहीं पा रही था कि जिस अनीता ने शादीशुदा होते हुए भी उस के साथ मंदिर में लव मैरिज की थी, उस ने अचानक उस से मुंह क्यों मोड़ लिया. मुकेश ने अनीता को लाख मनाने की कोशिश की थी, लेकिन वह उस की बात सुनने को राजी ही नहीं थी. क्योंकि अनीता का झुकाव अरुण नाम के युवक की तरफ हो गया था. 4 जनवरी, 2026 का दिन मुकेश झा के लिए खास दिन था. खास इसलिए कि इसी दिन मुकेश ने अनीता के साथ मंदिर में लव मैरिज की थी. शादी की सालगिरह की खुशी में मुकेश बीते दिनों की कड़वाहट भुला कर अनीता से मिलने गया.
उस ने अनीता को शादी की सालगिरह की याद दिला कर साथ रहने को मनाने की कोशिश की, लेकिन अनीता राजी नहीं हुई. उस ने घूमनेफिरने को साथ चलने को कहा तो इस के लिए भी अनीता ने मना कर दिया. इतना ही नहीं, अनीता ने मुकेश को खरीखोटी सुना कर अपमानित भी किया.
अपमान और बेवफाई का घूंट पी कर मुकेश वापस घर आ गया. उसे अनीता की बेवफाई पसंद नहीं आई. वह सोचने लगा कि जिस के लिए उस ने तन मन धन सब न्योछावर कर दिया, अपनी पत्नी व बच्चों से छल किया, जिस को उस ने प्रेमिका की जगह पत्नी का दरजा दिया, उसी ने उस के साथ इतना बड़ा धोखा किया. ऐसी बेवफा को वह कभी माफ नहीं करेगा. उसे उस की बेवफाई की सजा जरूर देगा. वह उस की न हुई तो वह उसे किसी और की भी नहीं होने देगा.
इस के बाद मुकेश झा ने शादी की सालगिरह की रात ही अनीता व उस के प्रेमी अरुण की हत्या का प्लान बनाया. मुकेश अपनी सुरक्षा के लिए अपने साथ तमंचा रखता था. अपने प्लान के मुताबिक उस ने तमंचा लोड किया, फिर रात 9 बजे अपनी कार से अनीता की खोज में घर से निकल गया. अनीता झांसी जिले की पहली औटोरिक्शा महिला ड्राइवर थी. वह अकसर रात में ही औटो चलाती थी. एक दिन मुकेश ने मौका पा कर उस के औटोरिक्शा में ट्रैकर लगा दिया था. अपने फोन से ट्रैकर को कनेक्ट कर वह अनीता पर नजर रखता था.
अनीता 4 जनवरी, 2026 की रात लगभग साढ़े 9 बजे औटो ले कर घर से निकली और रेलवे स्टेशन पहुंची. वहां उस का प्रेमी अरुण मौजूद था. अनीता ने अरुण को औटो में बैठा लिया फिर दोनों बातचीत में लीन हो गए. इधर मुकेश झा तमंचा लोड कर अपनी कार से अनीता का पीछा करने निकला. ट्रैकर के सहारे वह पीछा करते हुए अनीता तक जा पहुंचा. औटो में अरुण भी था. उस समय रात का डेढ़ बज रहा था.
सुकुवां ढुकुवां कालोनी के पास मुकेश ने चलती कार से अनीता पर फायर कर दिया. गोली उस की कनपटी पर लगी. अनीता लहूलुहान हो कर सड़क पर जा गिरी. औटो कुछ दूरी पर जा कर पलट गया. औटो पलटने से मुकेश अनीता के दूसरे प्रेमी अरुण को नहीं मार सका. अरुण छिप कर वहां से भाग गया. मुकेश भी कार ले कर फरार हो गया. 4-5 जनवरी, 2026 की दरम्यानी रात डेढ़ बजे किसी युवक ने झांसी के थाना नवाबाद पुलिस को सूचना दी कि स्टेशन रोड पर सुकुवां ढुकुवां कालोनी के पास सड़क पर एक्सीडेंट हुआ है, औटो पलटा पड़ा है और एक महिला सड़क पर खून से लथपथ पड़ी है. वह जिंदा है या नहीं, यह बताना मुश्किल है.
पहली थी लेडी ड्राइवर
एक्सीडेंट की सूचना पर एसएचओ रवि श्रीवास्तव कुछ पुलिसकर्मियों के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. सर्दी की रात थी, इसलिए वहां सन्नाटा पसरा था. एक महिला सड़क पर मरणासन्न पड़ी थी और चंद कदमों की दूरी पर एक औटो पलटा पड़ा था. एसएचओ रवि श्रीवास्तव ने जब घायल पड़ी महिला को गौर से देखा तो उन के आश्चर्य का ठिकाना न रहा. उसे वह जानते थे. वह कोई और नहीं, बल्कि झांसी की पहली महिला औटो ड्राइवर अनीता चौधरी थी. वह झांसी की चर्चित महिला थी. उसे पूरा शहर जानता था.
इंसपेक्टर रवि श्रीवास्तव ने एक्सीडेंट की सूचना पुलिस अधिकारियों व अनीता के फेमिली वालों को दी और अनीता को इलाज के लिए मैडिकल कालेज अस्पताल भेजा. वहां डौक्टरों ने परीक्षण के बाद उसे मृत घोषित कर दिया. सुबह एसएसपी बी.बी.जी.टी. एस. मूर्ति, एसपी (सिटी) प्रीति सिंह तथा सीओ (सिटी) लक्ष्मीकांत गौतम घटनास्थल पर पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया. पहली नजर में अधिकारियों को लगा कि अनीता चौधरी की मौत एक्सीडेंट में हुई है.
सूचना पा कर मृतका की बहन विनीता चौधरी, पति द्वारका चौधरी व देवर दिलदार सिंह पहले घटनास्थल फिर मोर्चरी पहुंचे. वहां अनीता का शव देख कर सभी परिजन बिलख पड़े. मृतका का बेटा विक्की उस समय पुणे में था. उसे भी सूचना दे दी गई. पुलिस मान रही थी कि अनीता चौधरी की मौत दुर्घटना है, लेकिन अनीता के फेमिली वाले पुलिस की बात से सहमत नहीं थे. उन का कहना था कि अनीता की हत्या की गई है. दुर्घटना में मौत दर्शाने के लिए औटो को पलटा गया है. अनीता के शरीर से ज्वैलरी भी गायब थीं. वह मंगलसूत्र, झुमके, पायल आदि पहने थी. उस का मोबाइल फोन भी गायब था.
इधर सुबह होते ही फस्र्ट लेडी औटो ड्राइवर अनीता चौधरी की मौत की खबर झांसी शहर में जंगल की आग की तरह फैली. जिस ने भी सुना, वही दंग रह गया. अधिकारियों से जानकारी जुटाने मीडियाकर्मी भी उमड़ पड़े. अनीता के फेमिली वालों से भी उन्होंने बातचीत की. उन्होंने मीडियाकर्मियों से साफ कहा कि अनीता की हत्या हुई है. फेमिली वाले पुलिस अधिकारियों से भी मिले और हत्या की आशंका जताई.
अनीता चौधरी की हत्या हुई या फिर एक्सीडेंट में मौत हुई, इस के लिए पुलिस ने शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम हेतु मैडिकल कालेज भेजा. 2 डाक्टरों के पैनल ने वीडियोग्राफी के बीच अनीता चौधरी के शव का पोस्टमार्टम किया और रिपोर्ट पुलिस को सौंप दी. रिपोर्ट की एक प्रति एसपी कार्यालय भी भिजवा दी. एसएचओ रवि श्रीवास्तव ने जब अनीता चौधरी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट पढ़ी तो वह चौंक पड़े. क्योंकि उस की मौत एक्सीडेंट में नहीं हुई थी, बल्कि उस की गोली मार कर हत्या की गई थी. उस की कनपटी (कान के नीचे) पर गोली मारी गई थी. गोली उस के गले में फंस गई थी. रवि श्रीवास्तव ने यह जानकारी आला अधिकारियों को दी तो वे भी सकते में आ गए.
अनीता की मौत के मामले में पुलिस से भारी चूक हुई थी, अत: पुलिस अधिकारियों ने मृतका अनीता चौधरी के फेमिली वालों को बुलवाया और उस की हत्या के संबंध में उन से पूछताछ की.
प्रेमी पर हुआ शक

मृतका की छोटी बहन विनीता चौधरी, पति द्वारका तथा देवर दिलदार ने बताया कि अनीता की हत्या मुकेश झा ने की है, जो प्रेमनगर थाने के ईसाई टोला मोहल्ले में रहता है. दोनों के बीच पैसों के लेनदेन का झगड़ा था. मुकेश अनीता के चरित्र पर भी शक करता था. अनीता की हत्या में उस का बेटा शिवम झा व उस का बहनोई मनोज झा भी शामिल हो सकता है. पूछताछ के बाद पुलिस अधिकारियों के आदेश पर इंसपेक्टर रवि श्रीवास्तव ने मृतका अनीता के पति द्वारका चौधरी की तहरीर पर बीएनएस की धारा 103(1) के तहत मुकेश झा, उस के बेटे शिवम झा तथा बहनोई मनोज झा के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली. तुरंत काररवाई करते हुए पुलिस ने शिवम झा व मनोज झा को हिरासत में ले लिया, लेकिन मुकेश झा घर से फरार हो गया.
मुकेश झा की गिरफ्तारी के लिए एसएसपी बी.बी.जी.टी.एस. मूर्ति ने 3 टीमों का गठन एसपी (सिटी) प्रीति सिंह तथा सीओ (सिटी) लक्ष्मीकांत की अगुवाई में किया. ये टीमें मुहिम में जुट गईं. उस की तलाश में कई संभावित ठिकानों पर दबिश दी गई, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी. तब एसएसपी ने उस की गिरफ्तारी के लिए 25 हजार रुपए का इनाम घोषित कर दिया.
कार में मिला तमंचा
6 जनवरी, 2026 की देर रात एसएचओ रवि श्रीवास्तव को खबर मिली कि बरुआ सागर थाना क्षेत्र के बेतवा नदी के नोटघाट पुल पर एक लावारिस कार खड़ी है. खबर पाते ही वह अपनी टीम के साथ पहुंचे और कार की तलाशी ली. कार के अंदर से एक तमंचा तथा एक मोबाइल फोन बरामद हुआ. मोबाइल फोन स्विच्ड औफ था. जांचपड़ताल से पता चला कि लावारिस खड़ी इग्निस कार हत्यारोपी मुकेश झा की है. एसएचओ ने मुकेश झा की कार बरामद होने की जानकारी पुलिस अधिकारियों को दी. साथ ही आशंका जताई कि गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी मुकेश ने नदी में छलांग लगा दी है.

इस पर एसपी (सिटी) प्रीति सिंह व सीओ (सिटी) लक्ष्मीकांत गौतम नोटघाट पुल पहुंचे और नदी में जाल डलवा कर गोताखोरों की मदद से मुकेश की खोज कराई. लेकिन घंटों की मशक्कत के बाद भी मुकेश का कुछ भी पता न चला. तब पुलिस अधिकारियों को शक हुआ कि शायद मुकेश पुलिस को गुमराह कर भाग गया होगा. अब पुलिस ने मुकेश की तलाश और तेज कर दी. जंगलों में भी उस की तलाश शुरू कर दी. इस के अलावा पुलिस अधिकारियों ने अपने खास खबरियों को भी लगा दिया. लेकिन इस के बावजूद मुकेश हाथ नहीं आया.
9 जनवरी, 2026 की रात 10 बजे एसएचओ रवि श्रीवास्तव अपनी टीम के साथ भगवंतपुरा के पास चैकिंग कर रहे थे, तभी उन्हें खास मुखबिर से जानकारी मिली कि मुकेश झा को भगवंतपुरा से करगुआं वाले कच्चे रास्ते पर देखा गया है. इस पर नवाबाद थाने के एसएचओ रवि प्रकाश श्रीवास्तव ने पुलिस टीम के साथ घेराबंदी की. पुलिस को देख कर मुकेश कच्चे रास्ते पर भागा. रोकने पर उस ने पुलिस टीम पर फायर किया. पुलिस की जवाबी फायरिंग में उस के दाएं पैर में गोली लगी. गोली लगते ही वह लडख़ड़ा कर गिर पड़ा. पुलिस ने उसे तब गिरफ्तार कर लिया. घायल मुकेश को इलाज हेतु अस्पताल में भरती कराया गया.

एसएसपी बी.बी.जी.टी.एस. मूर्ति तथा एसपी (सिटी) प्रीति सिंह ने मुकेश झा से अनीता चौधरी की हत्या के बारे में पूछताछ की तो उस ने बताया, ”मैं अनीता से बेहद प्यार करता था. हम दोनों पिछले 7 सालों से रिलेशनशिप में थे. मंदिर में शादी भी कर चुके थे, लेकिन अनीता अब दूसरे युवक को चाहने लगी थी. इसलिए उस ने 3 महीने पहले ब्रेकअप कर लिया था.’’
उस ने आगे बताया, ”प्यार में धोखा मिला तो मुझे बरदाश्त नहीं हुआ. मैं ने मैरिज एनिवर्सरी की रात 4 जनवरी को कनपटी पर गोली मार कर उस की हत्या कर दी थी. फिर अपनी कार नोटघाट पुल पर खड़ी कर भाग गया था, ताकि पुलिस को लगे कि मैं ने बेतवा नदी में कूद कर जान दे दी है. मैं अनीता के प्रेमी अरुण को भी मारना चाहता था, लेकिन औटो पलटने से वह बच गया.’’

पुलिस अधिकारियों की पूछताछ के बाद उन के आदेश पर एसएचओ रवि प्रकाश ने मुकेश झा को अनीता चौधरी की हत्या के आरोप में विधिसम्मत गिरफ्तार कर लिया. लेकिन हिरासत में लिए गए मुकेश के बेटे शिवम झा तथा बहनाई मनोज झा को साक्ष्य के अभाव में गिरफ्तार नहीं किया गया. दोनों ने खुद को अनीता की हत्या में निर्दोष बताया. अनीता चौधरी कौन थी? वह झांसी की प्रथम महिला औटो चालक कैसे बनी? मुकेश झा के संपर्क में कैसे आई? लिवइन रिलेशन में रहने के बावजूद उस का मुकेश से ब्रेकअप क्यों हुआ? मुकेश ने उस की हत्या क्यों की? यह सब जानने के लिए अनीता का अतीत झांकना होगा.
मैनेजर से हुआ प्यार
उत्तर प्रदेश का झांसी शहर वीरांगना लक्ष्मीबाई की कर्मभूमि के रूप में जाना जाता है. इसी शहर के नवाबाद थाना अंतर्गत एक मोहल्ला है तालपुरा. इसी तालपुरा मोहल्ले की अंबेडकर नगर कालोनी में द्वारका चौधरी सपरिवार रहता था. उस के परिवार में पत्नी अनीता के अलावा एक बेटा विक्की तथा 2 बेटियां थीं. द्वारका झांसी बस स्टौप के पास चाय का ठेला लगाता था. इसी की आमदनी से परिवार का भरणपोषण करता था.
अनीता पढ़ीलिखी खूबसूरत युवती थी, जबकि उस का पति द्वारका चौधरी साधारण रंगरूप का कम पढ़ालिखा इंसान था. अनीता की छोटी बहन विनीता भी द्वारका के छोटे भाई दिलदार के साथ ब्याही थी. वह भी झांसी में ही रहता था. अनीता 3 बच्चों की मां थी. वह चाहती थी कि उस के बच्चे पढ़लिख कर अपने पैरों पर खड़े हों, लेकिन पति द्वारका की कमाई इतनी नहीं थी कि वह बच्चों का पालनपोषण ठीक से कर सके, उन की पढ़ाई का बोझ उठा सके. उस के लिए तो परिवार की दोजून की रोटी जुटाना ही मुश्किल था. अनीता सदैव चिंता में डूबी रहती थी.
अनीता को जब बच्चों की देखभाल की चिंता ज्यादा सताने लगी तो उस ने घर की दहलीज लांघ कर नौकरी करने का मन बनाया. इस बाबत उस ने पति से बात की तो उस ने साफ मना कर दिया. द्वारका ने कहा, ”वह चौहान वंश का है. वह गरीब जरूर है, लेकिन उस के वंश की महिलाएं घर की देहरी नहीं लांघतीं.’’
लेकिन अनीता ने पति की बात अनसुनी कर दी और नौकरी के लिए प्रयास करने लगी. अनीता के मोहल्ले की कुछ महिलाएं ओरछा स्थित एक ग्लास फैक्ट्री में काम करती थीं. अनीता ने उन महिलाओं से बात की, फिर उन के सहयोग से अनीता को भी वहां नौकरी मिल गई. अनीता कांच फैक्ट्री में काम करने लगी तो उस की माली हालत सुधरने लगी. बच्चों का पालनपोषण व पढ़ाई ठीक से होने लगी.
वह जिस ग्लास फैक्ट्री में काम करती थी, उसी में मुकेश झा भी काम करता था. वह मैनेजर था. फैक्ट्री के कर्मचारियों पर निगाह रखना तथा उन का वेतन आदि वितरण करना उस का काम था. फैक्ट्री के अन्य काम भी वही देखता था. कर्मचारी को काम पर रखना या फिर निकालना उसी के हाथ में था. फैक्ट्री पर उस की मजबूत पकड़ थी. मुकेश झा प्रेमनगर थाने के ईसाई टोला मोहल्ले में परिवार सहित रहता था. उस के परिवार में पत्नी अंजना के अलावा बेटा शुभम व एक बेटी थी. मुकेश फैक्ट्री में मैनेजर तो था ही, इस के अलावा वह एक होटल का संचालन भी करता था. उस की आर्थिक स्थिति मजबूत थी. उस के पास एक कार तथा बाइक भी थी. वह ठाठबाट से रहता था. रंगीनमिजाज भी था.
एक रोज मुकेश झा की नजर फैक्ट्री में काम कर रही अनीता पर पड़ी. खूबसूरत अनीता को देख कर उस की धड़कनें बढ़ गईं. कुछ देर तक वह उसे अपलक निहारता रहा, फिर चला गया. इस के बाद तो यह सिलसिला ही चल पड़ा. अनीता को रिझाने के लिए वह उस से नजदीकियां बढ़ाने लगा. अनीता की पारखी नजरें भांप गईं कि मैनेजर बाबू की नजरें उस पर गड़ी हैं, इसलिए वह उस से नजरें चुराने लगी, लेकिन मुकेश झा कहां मानने वाला था. एक रोज मौका पा कर उस ने अनीता को रोक लिया और बोला, ”अनीता, तुम बहुत खूबसूरत हो. तुम्हारी खूबसूरती पर मैं फिदा हूं. तुम से दोस्ती करना चाहता हूं.’’
अनीता झिझकते व शरमाते हुए बोली, ”मुकेश बाबू, आप यह क्या कह रहे हैं. मैं 3 बच्चों की मां हूं. भला मुझ से दोस्ती कर के आप को क्या हासिल होगा?’’
”अनीता तुम 3 बच्चों की मां जरूर हो, लेकिन खूबसूरती में किसी नवयौवना से कम नहीं हो. मेरे लिए तो तुम अप्सरा जैसी हो.’’
अपनी खूबसूरती की तारीफ सुन कर अनीता मन ही मन खुश हुई, लेकिन दिखावे के तौर पर बोली, ”आप मेरी झूठी तारीफ कर रहे हो. भला मैं इतनी खूबसूरत कहां हूं.’’
इस के बाद मुकेश अनीता के पीछे पड़ गया. वह उसे हर तरह से रिझाने की कोशिश करने लगा. उस की आर्थिक मदद भी करने लगा. धीरेधीरे अनीता भी उस की ओर आकर्षित होने लगी. यही आकर्षण कब प्यार में तब्दील हो गया, अनीता नहीं जान पाई. अनीता और मुकेश का प्यार परवान चढ़ा तो उन के बीच की दूरियां भी कम होने लगीं. अब दोनों साथसाथ घूमनेफिरने लगे. होटल रेस्त्रां में गुलछर्रे उड़ाने लगे. अनीता को अब मुकेश का साथ अच्छा लगने लगा था. मुकेश भी ज्यादा समय अनीता के साथ बिताने लगा. उसे अनीता हूर की परी लगने लगी थी.

मुकेश झा आर्थिक रूप से संपन्न था. शहर में उस का मकान तथा आवागमन के लिए घर में कार व बाइक थी. अनीता की आर्थिक स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं थी. उस का पति द्वारका चौधरी ठेले पर चाय बेचता था. वह बीमार भी रहता था. अनीता जितनी खूबसूरत थी, उस का पति साधारण शक्लसूरत का था. अत: अनीता को जब मुकेश का साथ मिला तो वह उस की तरफ खिंचती चली गई. मुकेश के सामने उसे अब अपना पति फीका लगने लगा था. यही हाल मुकेश का भी था. अनीता के मुकाबले अपनी पत्नी फीकी लगने लगी थी.
मंदिर में लव मैरिज
अनीता और मुकेश का प्यार परवान चढ़ा तो दोनों एक रोज मंदिर में पहुंचे और मुकेश ने उस की मांग में सिंदूर भर कर उसे पत्नी का दरजा दे दिया. इस के बाद दोनों अलग मकान ले कर लिवइन रिलेशन में रहने लगे. मुकेश अनीता की हर सुखसुविधा का ध्यान रखता था. अनीता गहने, कपड़े, पैसों जिस किसी की भी डिमांड करती थी, मुकेश झा उसे पूरा करता था. अनीता की मांग में सिंदूर भले ही पति द्वारका का सजा था, लेकिन वह पतिधर्म प्रेमी मुकेश के साथ निभाती थी. हंसीखुशी से उन का समय बीत रहा था.
अनीता ने मुकेश को दिल मेें बसाया तो उसे अपना बीमार पति द्वारका फीका लगने लगा. वह उस की उपेक्षा करने लगी. उस ने उस की परवाह करना छोड़ दी. अनीता और मुकेश अब साथसाथ रहना चाहते थे. अत: 4 जनवरी, 2019 को मुकेश ने मंदिर में जा कर अनीता की मांग में सिंदूर भर कर उस के साथ लव मैरिज कर ली.

इस के बाद अनीता और मुकेश ने अपनेअपने घरों से दूरियां बना लीं और अलग मकान में लिवइन रिलेशन में रहने लगे. दोनों के फेमिली वालों को विवाह रचाने की जानकारी हुई तो उन्होंने विरोध जताया, लेकिन विरोध का उन पर असर नहीं हुआ. 19 फरवरी, 2020 को अनीता और मुकेश के बीच फैक्ट्री में किसी बात को ले कर बहस हो गई. गुस्से में मुकेश ने अनीता से कह दिया कि कल से फैक्ट्री मत आना. मुकेश की यह बात अनीता के दिल में कांटे की तरह चुभ गई, अत: उस ने फैक्ट्री जाना बंद कर दिया.
हालांकि मुकेश ने अनीता को मनाने की कोशिश की, लेकिन बात दिल को चुभ गई थी, इसलिए अनीता फैक्ट्री नहीं गई. मार्च 2020 के पहले हफ्ते में अनीता नौकरी की तलाश में मुंबई चली गई. वहां गए उसे 10 दिन ही बीते थे कि कोरोना की वजह से लौकडाउन की चर्चा होने लगी. वहां उसे नौकरी भी नहीं मिली थी, इसलिए वह घर लौट आई. मुंबई से लौटने के बाद अनीता के घर की आर्थिक स्थिति और बिगड़ गई.
अनीता कर्मठ, लगनशील और खुद्ïदार महिला थी. काफी सोचविचार कर उस ने फाइनैंस पर औटो ले कर चलाने का प्लान बनाया, लेकिन उस के सामने पहला प्रश्न यह था कि पैसा कौन देगा? इस के लिए उस ने कई बैंकों से संपर्क साधा, लेकिन कोई बैंक बिना गारंटी उसे लोन देने को तैयार न था. काफी प्रयास के बाद एक निजी बैंक ने लोन देने की हामी भरी. जब बैंक अधिकारी जांचपड़ताल करने घर आए तो अनीता के पति द्वारका ने अपना आधार और बैंक पासबुक की कौपी देने से इंकार कर दिया. क्योंकि वह नहीं चाहता था कि अनीता महिला हो कर औटो चलाए.
वैसे भी झांसी में कोई महिला औटो चालक नहीं थी, लेकिन विरोध के बावजूद अनीता ने हिम्मत नहीं हारी. इस बुरे वक्त में अनीता ने मुकेश झा से मदद मांगी. मुकेश की मदद से उस ने बैंक के कागज पूरे किए और लोन ले लिया. 18 फरवरी, 2021 को अनीता ने फाइनैंस करा कर नई औटो खरीदी और झांसी की सड़कों पर उसे चलाने लगी. इस तरह अनीता चौधरी झांसी की फस्र्ट लेडी औटो ड्राइवर बन गई. उस के जज्बे की हर तरफ तारीफ होने लगी. वह अखबारों की सुर्खियों में भी छा गई. कई सामाजिक संगठनों ने उस के जज्बे को सलाम करते हुए उसे सम्मानित भी किया.
पुलिस विभाग में भी वह चर्चा का विषय बन गई. उस ने अपने औटो के आगेपीछे पोस्टर चस्पा किए थे, जिन पर लिखा था— जनपद झांसी पुलिस, झांसी की पहली महिला औटो ड्राइवर. पुरुष और महिला एक समान, जनजन का हो यही आह्वान. पुलिस अफसरों के फोन नंबर भी लिखे थे. अनीता का हौसला बढ़ाने के लिए तत्कालीन डीआईजी (झांसी रेंज) जोगेंद्र सिंह ने भी उस के औटो पर सफर किया था और 13 दिसंबर, 2021 को उस के कार्य की सराहना करते हुए उसे प्रशस्ति पत्र दिया था.
इस तरह समय बीतता रहा और अनीता औटो चला कर पैसे कमाती रही. साथ ही सुर्खियों में भी छाई रही. अनीता और मुकेश साथ रहते थे. मुकेश अनीता को प्यार करता था, इसलिए वह उस की हर डिमांड पूरी करता था. उस ने अनीता को गहनों से लाद दिया था. अनीता अकसर औटो ले कर झांसी रेलवे स्टेशन के पास खड़ी होती थी. यहां जुलाई 2025 में उस की दोस्ती अरुण नाम के युवक से हुई. अरुण स्टेशन के पास ही एक ट्रेवल एजेंसी में काम करता था. अनीता और अरुण एकदूसरे को पसंद करने लगे. दोनों घंटों मोबाइल पर रसभरी बातें करते और हंसीठिठोली करते.
प्यार में आया ट्विस्ट
अनीता की अरुण से नजदीकियां बढ़ीं तो वह मुकेश की उपेक्षा करने लगी. उस का फोन रिसीव करना भी बंद कर दिया. लेकिन इधर कुछ समय से अनीता के व्यवहार में रूखापन आ गया था. वह उस की उपेक्षा भी करने लगी थी. उस की जुबान में कड़वाहट भी आ गई थी. वह पहले जैसा न तो बरताव करती थी और न ही हंसतीबोलती थी. वह साथ घूमने को चलने के लिए कहता तो साफ मना कर देती. कोई उपहार लाता तो उसे लेने से इंकार कर देती. मुकेश की समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर अनीता के स्वभाव मेें यह परिवर्तन कैसे और क्यों आया.
अनीता के स्वभाव को ले कर मुकेश की उलझन बढ़ी तो उस ने अनीता की जासूसी की. तब उसे पता चला कि अनीता अब किसी अरुण नाम के युवक से प्यार करने लगी है. इसी कारण वह उस की उपेक्षा करती है.
एक रोज मुकेश ने अनीता के चेहरे पर नजरें गड़ा कर पूछा, ”अनीता, यह अरुण कौन है? इस से तुम्हारा क्या रिश्ता है?’’
अरुण का नाम सुनते ही अनीता घबरा गई. वह जान गई कि मुकेश को उस के और अरुण की दोस्ती का पता चल गया है. फिर भी वह संभलते हुए बोली, ”अरुण एक अच्छा इंसान है. हम दोनों के बीच दोस्ती है. कभीकभी उस से बतिया लेती हूं.’’
”तुम दोनों के बीच सिर्फ दोस्ती है या फिर नाजायज रिश्ता भी है?’’ मुकेश ने कटाक्ष किया.
मुकेश के इस कटाक्ष से अनीता भड़क गई और बोली, ”तुम मुझ पर लांछन लगा कर अपनी हदें पार कर रहे हो. मैं यह सब कतई बरदाश्त नहीं करूंगी.’’
उस रोज अरुण को ले कर अनीता और मुकेश के बीच खूब कहासुनी हुई. इस के बाद तो आए दिन विवाद होने लगा. उन दोनों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि मामला पुलिस के सामने जा पहुंचा. अरुण को ले कर अकसर दोनों में झगड़ा होने लगा. अक्तूबर, 2025 में एक रोज मुकेश ने अनीता के साथ रेलवे स्टेशन के बाहर अभद्रता व मारपीट की तो औटो चालकों का गुस्सा फूट पड़ा. चालकों ने मुकेश की पिटाई कर दी. अनीता ने भी थाना नवाबाद में मुकेश के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी. इस के बाद मुकेश को थाने लाया गया. थाने में पंचायत शुरू हुई. दोनों के फेमिली वाले भी थाने पहुंचे.
थाने में मुकेश पुलिस व अपने फेमिली वालों के सामने बोला कि वह अनीता के साथ ही रहेगा, लेकिन जब अनीता से पूछा गया तो उस ने कहा कि वह मुकेश के साथ नहीं रहना चाहती. यह सुनते ही मुकेश बौखला गया और कहने लगा कि अब या तो तुम रहोगी या हम. धमकी देने पर पुलिस ने उसे काफी फटकार लगाई. इस घटना के बाद अनीता ने मुकेश से ब्रेकअप कर लिया और उसे छोड़ कर पति के साथ रहने लगी. अनीता अब दिन में घर संभालती और रात को औटो चलाती. रात में अकसर अरुण भी उस के साथ रहता. सुरक्षा की दृष्टि से वह अरुण को साथ रखती थी.

मुकेश किसी भी कीमत पर अनीता को खोना नहीं चाहता था, अत: अनीता चौधरी की जिंदगी में जब अरुण आया तो वह बौखला गया. वह दोनों पर नजर रखने लगा. मुकेश ने गुपचुप तरीके से अनीता के औटो में ट्रैकर लगा दिया. मोबाइल के जरिए वह निगाह रखता था. ट्रैकर औन होने पर उस से होने वाली बात सुनता था. अनीता व अरुण में क्या बातचीत होती, उसे सब पता चल जाता था. मुकेश अब जान गया था कि अनीता और अरुण के बीच गहरे प्रेम संबंध हैं.

4 जनवरी, 2026 की शाम मुकेश अनीता के पास गया. उस ने उसे शादी की सालगिरह की याद दिलाई और घर वापस चलने को कहा, लेकिन अनीता ने साफ मना करते हुए मुकेश की बेइज्जती की. तब उस ने उसी रात अनीता की गोली मार कर हत्या कर दी, लेकिन उस का दूसरा प्रेमी अरुण बच गया. आरोपी मुकेश झा से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने 10 जनवरी, 2026 को उसे झांसी की कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जिला जेल भेज दिया. UP News






