UP Crime: खेत पर जाते समय दिनदहाड़े कुछ युवकों ने सुनीता के सामने उस की बेटी मनीषा को किडनैप करने की कोशिश की तो सुनीता के विरोध करने पर युवकों ने सुनीता की हत्या कर दी और मनीषा को किडनैप कर ले गए. इस कांड के बाद गांव में तनाव व्याप्त हो गया और प्रदेश सरकार की भी नींद उड़ गई. कौन थे किडनैपर और क्यों किया गया मनीषा का किडनैप?

कहते हैं कि बालक उम्र का प्यार न तो जातपात व ऊंचनीच देखता है और न अमीरीगरीबी. इस आयुवर्ग के प्यार में एक ऐसा आकर्षण होता है, जिस के पाश में फंसे किशोर न तो समाज की बंदिशों को मानते हैं, न ही समाज की वर्जनाओं को. जाहिर है ऐसे प्यार का अंजाम भी खतरनाक होता है. पारस सोम और मनीषा का प्यार भी शायद समाज में ऊंचनीच के भेदभाव के बीच पनपा एक ऐसा ही प्यार था, जिस ने दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में सरधना थाना क्षेत्र के कपसाड़ गांव को जातीय भेदभाव की आग में झुलसने पर मजबूर कर दिया.

सुनीता की आंखों के सामने ही उस की बेटी को कुछ युवकों द्वारा ले जाने की कोशिश हुई तो उस ने विरोध किया फलस्वरूप उस पर जानलेवा हमला हुआ, जिस में उसकी जान चली गई

हालात ऐसे बने कि कपसाड़ गांव बवाल की आग में जलतेजलते बचा. गांव की गली से ले कर चट्टीचौराहे तक पुलिस छावनी बन गए. इस गांव में न कोई आ सकता था, न जा सकता था. किसी को अगर आनाजाना भी होता तो उसे पुलिस को पहले संतुष्ट करना पड़ता कि वह किसी गलत इरादे से गांव में नहीं जा रहा है. कपसाड़ गांव मेरठ महानगर की सीमा से सटा होने के कारण संपन्न और घनी आबादी वाला है. राजपूत और जाटव बिरादरी बहुल इस गांव में कुछ वैश्य, ब्राह्मण और अन्य जातियों के लोग भी रहते हैं. राजूपत जाति के लोग संपन्न और बड़े खेतिहर किसान हैं.

जबकि जाटव जाति के लोग या तो छोटे किसान हैं या राजूपतों के खेतों में मजदूरी कर गुजरबसर करते हैं अथवा शहर जा कर फैक्ट्री और दुकानों में नौकरी करते हैं.  इसी गांव में रहता है सतेंद्र कुमार जाटव का परिवार. उस के परिवार में पत्नी सुनीता के अलावा 5 बच्चे थे. परिवार में सब से बड़ा बेटा है नरसी, उस से छोटे 2 बेटे मनदीप और शुभम हैं. जबकि 2 बेटियों में मनीषा बड़ी है.

परिवार में नरसी सब से बड़ा है, जबकि मनीषा दूसरे नंबर की है. पढ़ाई के नाम पर वैसे तो सभी बच्चे पढ़ेलिखे हैं, लेकिन मनीषा समेत सभी ने इंटरमीडिएट से ज्यादा की पढ़ाई नहीं की है. मनीषा ने गांव के ही आदर्श जनता इंटर कालेज में इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई की थी. गुजरबसर के लिए सतेंद्र व उन का परिवार या तो गांव के तरुण राजपूत के खेतों में मजदूरी का काम करते या शहर सरधना कस्बे व मेरठ शहर में नौकरी कर गुजरबसर करते थे.

इन दिनों गन्ने की पैदावार तैयार थी, इसलिए सतेंद्र की पत्नी सुनीता व बेटी मनीषा तरुण राजपूत के खेत में गन्ने की छिलाई के लिए सुबह ही खेतों में काम करने चली जाती थीं. मनीषा की सहारनपुर में शादी तय हो चुकी थी. फरवरी महीने में उस की शादी थी, इसलिए सतेंद्र का पूरा परिवार इस समय उस की शादी को ले कर पैसे जुटाने व दूसरी तैयारियां करने में व्यस्त था.

अचानक 8 जनवरी, 2026 की सुबह सतेंद्र जाटव के परिवार पर कयामत बन कर टूट पड़ी. सुबह करीब 8 बजे सुनीता बेटी मनीषा के साथ तरुण के खेत में गन्ने की छिलाई के लिए जा रही थी. जब ये दोनों रजवाहे के नए पुल के पास पहुंचीं, तभी गांव के एक राजूपत योगेश सोम का बेटा पारस सोम व उस का हमजाति दोस्त सुनील तथा उन के कुछ अज्ञात साथियों ने सुनीता व मनीषा का रास्ता रोक लिया.

पारस व उस के साथी मनीषा को पकड़ कर जबरदस्ती अपने साथ ले जाने लगे. जब सुनीता ने इन लोगों का विरोध किया तो उन लोगों ने सुनीता के साथ गालीगलौज शुरू कर दी. उन्हें जातिसूचक शब्द कहते हुए हाथापाई शुरू कर दी. लेकिन सुनीता बेटी को उन के चंगुल से बचाने के लिए मां दुर्गा का रूप धारण कर चुकी थी. इसी दौरान पारस व उस के साथियों ने सुनीता के सिर पर फरसे का प्रहार किया, जिस से वह जमीन पर गिर कर वहीं बेहोश हो गई.

पारस व उस के साथियों का उद्देश्य शायद मनीषा को वहां से ले कर जाने का था, इसीलिए सुनीता के खून से लथपथ होने के बाद जमीन पर गिरते ही वे सभी मनीषा को वहां से ले कर नौ दो ग्यारह हो गए. चूंकि उस वक्त बहुत सारे लोग उस रजवाहे पर खेतों में काम करने के लिए आजा रहे थे. सुनीता की बिरादरी की 2 लड़कियां भी उस वक्त वहीं से गुजर रही थीं, जिन्होंने इस मंजर को अपनी आंखों से देखा था. उन्होंने तुरंत शोर मचा कर लोगों की भीड़ इकट्ठी कर ली और सब को वह माजरा बता दिया, जो कुछ देर पहले घटित हुआ था.

लोगों की भीड़ में से किसी ने गांव में जा कर सतेंद्र व उस के परिवार को इस घटना की खबर कर दी तो सतेंद्र का परिवार और बिरादरी के दूसरे लोग भी वहां पहुंच गए, जहां सुनीता खून से लथपथ बेहोश पड़ी थी. सुनीता को उपचार देना पहली प्राथमिकता थी, इसलिए फेमिली वालों ने सब से पहले सुनीता को बेहोशी की हालत में एसडीएस ग्लोबल हौस्पिटल, मोदीपुरम, मेरठ में भरती कराया, जहां डौक्टरों ने उस का इलाज तो शुरू कर दिया, लेकिन इस बात से भी आगाह कर दिया कि सुनीता के सिर में काफी गंभीर चोट है तथा खून भी काफी बह चुका था, इसलिए उस के बचने की उम्मीद कम ही है.

बहरहाल, डौक्टर अपना प्रयास कर रहे थे, लेकिन उन के परिवार ने अपना दूसरा काम यह किया कि मनीषा को तलाशने के लिए पुलिस की शरण ली. सतेंद्र के बेटे नरसी ने कुछ रिश्तेदारों के साथ जा कर सरधना थाने में इस बात की शिकायत दर्ज करा दी. उस ने पुलिस को बताया कि 2 किशोरियां इस बात की गवाह हैं कि पारस सोम अपने दोस्त सुनील व अन्य अज्ञात लोगों के साथ सुनीता पर फरसे से हमला कर के मनीषा का अपहरण कर के ले गया है.

सरधना थाने के एसएचओ इंसपेक्टर प्रताप सिंह ने नरसी जाटव की शिकायत पर तत्काल एक टीम ग्लोबल अस्पताल व कपसाड़ गांव भेज दी, ताकि शिकायत की सच्चाई का पता लगाया जा सके. गांव में इस बात की पुष्टि हो गई कि यह घटना सच है, जबकि अस्पताल के डौक्टरों ने भी सुनीता के मरणासन्न हालत में होने की बात बता दी.

गांव में हुआ तनाव

लिहाजा अपने सीओ आशुतोष कुमार व एसएसपी विपिन ताड़ा को सारे हालात बता कर इंसपेक्टर प्रताप सिंह ने मुकदमा दर्ज कर लिया. गलत तरीके से रोकने के लिए भारतीय न्याय संहिता की धारा 126(2), शांति भंग करने के इरादे से जानबूझ कर अपमान करने व हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज कर लिया, क्योंकि तब तक सुनीता जिंदा थी.

चूंकि जिस लड़की मनीषा का अपहरण हुआ था और उस की घायल मां दोनों जाटव बिरादरी के थे और जिन लोगों पर आरोप था, वे सभी राजपूत बिरादरी के थे, इसलिए मामला बड़ा जातीय रूप न ले ले, इसीलिए आशंका को समझते हुए एसएसपी विपिन ताड़ा ने गांव में अतिरिक्त पुलिस बन तैनात करवा दिया. साथ ही पुलिस की एक टीम कपसाड़ गांव में ही रहने वाले योगेश व उस के परिजनों को पूछताछ के लिए सरधना थाने ले आई. पुलिस को पारस सोम व उस के दूसरे साथी अपने घर पर नहीं मिले.

लेकिन इसी बीच 8 जनवरी की देर शाम तक अस्पताल में गंभीर रूप से इलाज करा रही सुनीता ने दम तोड़ दिया. बस, सुनीता की मौत के बाद ही हालात एकदम गंभीर हो गए. कपसाड़ गांव में जाटव बिरादरी के लोगों का एक होना शुरू हो गया. इस हत्या का आरोप व मनीषा के किडनैप का आरोप चूंकि एक राजपूत युवक और उस के हमबिरादरी साथियों पर लगा था, इसलिए मामला पूरी तरह जातीय हो गया. बढ़ते तनाव को देखते हुए एसएसपी विपिन ताड़ा ने गांव में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया.

मनीषा का भाई नरसी

सुनीता की मौत के बाद रात को ही उस का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया. अगली सुबह शव का पोस्टमार्टम होने के बाद शव को अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को सौंप दिया गया. चूंकि सुनीता की मौत होने के बाद मामला अब हत्या में तब्दील हो चुका था और फेमिली वालों के आरोप के बाद इस में एससी/एसटी एक्ट की धाराएं भी जोड़ दी गई थीं. लिहाजा एसएसपी के आदेश पर इस की जांच सरधना के सीओ आशुतोष कुमार को सौंप दी गई.

सुनीता की मौत से गुस्साए फेमिली वालों और गांव वालों ने शव के गांव में आते ही उस एंबुलेंस में तोडफ़ोड़ कर दी, जिस में शव को लाया गया था. शव को ले कर फेमिली वाले धरने पर बैठ गए. डीएम के साथ मौके पर पहुंचे एसएसपी विपिन ताड़ा ने परिजनों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन परिजन और ग्रामीण मनीषा की बरामदगी और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग पर अड़े रहे. उन का साफ कहना था कि जब तक अपहृत मनीषा बरामद नहीं होती और आरोपी पकड़े नहीं जाते, तब तक अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा.

मनीषा के किडनेप और उस की मम्मी की मौत के गम में डूबी घर की महिलाएं

शुरुआत में पीडि़त परिवार मृतका सुनीता का अंतिम संस्कार करने को तैयार नहीं था, लेकिन सरधना से भाजपा के पूर्व विधायक संगीत सोम की मध्यस्थता के बाद सरकार की ओर से 10 लाख रुपए की आर्थिक सहायता की घोषणा के बाद परिवार मान गया और 9 जनवरी की रात को सुनीता का अंतिम संस्कार कर दिया गया. हालांकि फेमिली वालों की तरफ से 50 लाख रुपए की आर्थिक सहायता व परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी की मांग की गई थी, लेकिन बाकी मांगें कुछ समय में पूरी करने के वादे पर फिलहाल 10 लाख का चैक मिलने से मामला थोड़ा शांत हो गया था.

होटल में मिले दोनों

उस रात को अंतिम संस्कार होने के बाद पुलिस के ऊपर आरोपी की गिरफ्तारी और मनीषा की बरामदगी का दबाव आ गया. पुलिस पारस के फेमिली वालों के साथ सख्ती से पूछताछ करने के अलावा अपने इंटैलीजेंस सिस्टम से यह पता लगाने में जुट गई कि पारस मनीषा को ले कर कहां छिपा है? जहां से भी जानकारी मिल रही थी, पुलिस की टीमें वहां दबिशें डाल रही थीं, लेकिन पुलिस को सफलता मिली अगले दिन यानी 10 जनवरी की शाम को. रुड़की के एक होटल में आरोपी पारस सोम व पीडि़ता मनीषा के ठहरने की सूचना मिली थी.

इंसपेक्टर प्रताप सिंह व स्पैशल स्टाफ की एक टीम तत्काल रुड़की के उस होटल में पहुंची और पुलिस ने वहां मनीषा को आरोपी पारस सोम के साथ बरामद कर लिया. दोनों को ले कर पुलिस टीम पहले रात को मेरठ पहुंची. मनीषा के बरामद होने के बाद एसएसपी व महिला पुलिस ने उस से काफी लंबी पूछताछ की, जिस के बाद उसे आशा ज्योति केंद्र भेज दिया गया.

मनीषा के किडनेप का आरोपी पारस सोम

अगले दिन पहले प्यारे लाल अस्पताल में मनीषा का मैडिकल चैकअप कराया गया. उस के बाद पुलिस ने एसीजेएम नम्रता सिंह की अदालत में मनीषा के दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 164 के इकबालिया बयान दर्ज कराए. बाद में अदालत के आदेश पर मनीषा को पुलिस की अभिरक्षा में उस के फेमिली वालों के साथ भेज दिया गया. दूसरी तरफ पारस से खुद एसएसपी विपिन ताड़ा ने कई घंटे तक गहन पूछताछ की, जिस के बाद पारस सोम को स्पैशल सीजेएम न्यायालय में पेश कर 14 दिन की न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया.

पुलिस को दिए बयान में पारस सोम ने बताया कि गांव से मनीषा को ले कर निकलने के बाद वह उसे ले कर अपनी रिश्तेदारी खतौली गया था. शाम को सुनीता की मौत की खबर मिलने पर दोनों दिल्ली चले गए, वहां एक होटल में रात गुजारी. उस के बाद वहां से अपने दोस्त के पास गुरुग्राम चले गए. मीडिया के जरिए गांव के माहौल पर पारस सोम नजर रखे हुए था.

गांव का माहौल बिगडऩे पर मनीषा को गुरुग्राम से साथ ले कर ट्रेन से सहारनपुर पहुंच गया. सहारनपुर के टपरी गांव में पारस की बहन रहती है. उन के घर पर शुक्रवार की रात बिताई. शनिवार को रुड़की के लिए ट्रेन में सवार हो गया. पारस सोम ने अपने परिवार के बारे में गांव के ही झोलाछाप डौक्टर राजेंद्र, जो उस का दोस्त भी था, उस से लगातार गांव की जानकारी ले रहा था. राजेंद्र ने उसे बताया कि मनीषा की मम्मी की मौत के बाद मामला काफी तूल पकड़ चुका है और पुलिस उसे चारों तरफ तलाश कर रही है तो वह समझ नहीं पाया कि क्या करे. चूंकि मनीषा और पारस के मोबाइल को पुलिस लगातार ट्रैक कर रही थी, जिस से उस की रियल टाइम लोकेशन का पता चल गया.

उस वक्त वह रुड़की रेलवे स्टेशन के पास एक होटल में ठहरा था और मनीषा उस के साथ ही थी. पुलिस की टीम वहीं पहुंच गई और 10 जनवरी, 2026 की शाम को पारस को हिरासत में ले कर मनीषा को पुलिस ने अपने संरक्षण में ले लिया और मेरठ ले आई.

हालांकि प्रेम संबंध के इस तरह के मामलों में यूं तो मामला लड़की के बरामद होने और आरोपी की गिरफ्तारी के बाद खत्म हो जाता है, लेकिन यहां यह सब होने के बाद पूरा मामला कानूनी दांवपेंच में फंस गया. हालांकि मनीषा के फेमिली वाले तो पहले से ही उस की उम्र 17 साल बता रहे थे, लेकिन पारस के जेल जाने के बाद पारस के अधिवक्ता बलराम राणा व संजीव उर्फ संजू राणा ने अदालत में हाईस्कूल की मार्कशीट पेश कर उस के नाबालिग होने का दावा कर दिया. जबकि उन्होंने कोर्ट को बताया कि जिस मनीषा को उस का परिवार नाबालिग यानी 17 साल की बता रहा है, उस की उम्र 21 साल है.

उम्र बनी सिरदर्द

पुलिस के सामने सब से बड़ी चुनौती पारस और मनीषा की सही उम्र का पता लगाना था. मामला कानूनी दांवपेंच में फंसने के बाद पुलिस के सामने चुनौती आ गई कि पीडि़ता व आरोपी दोनों की सही उम्र का पता करें ताकि सच्चाई सामने आ सके. पारस और मनीषा दोनों ने गांव के ही आदर्श जनता इंटर कालेज में पढ़ाई की थी. लिहाजा पुलिस ने कालेज की प्रधानाचार्य मंजू देवी से संपर्क किया और दोनों की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की मार्कशीट हासिल कर ली.

जिस के बाद पता चला कि मनीषा ने 2023 में इंटरमीडिएट की परीक्षा पास कर ली थी. उस का जन्म का साल 2005 था यानी वह 21वें साल में चल रही थी. पारस के अधिवक्ता ने मनीषा को बालिग और पारस को नाबालिग साबित करने के लिए सबूत पेश किए, लेकिन यह कैसे तय हो कि कौन बालिग है और कौन नाबालिग. उम्र के इन दावों की जटिलता को देखते हुए पुलिस अधिकारी कानून विशेषज्ञों से विधिक राय ले रहे हैं. एसएसपी डा. विपिन ताड़ा ने एक मैडिकल बोर्ड से दोनों के बोन टेस्ट कराने पर भी विचार कर रही है.

वैसे इस तरह के मामले बाल किशोर बोर्ड के अधीन आयु निर्धारण केंद्रों में मामले भेजे जाते हैं. आयु का निर्धारण करने के लिए मैडिकल बोर्ड का गठन भी किया जा सकता है. हालांकि मनीषा की हाईस्कूल की मार्कशीट के मुताबिक वह बालिग है, लेकिन कई बार गफलत में गांव के स्कूल में जन्मतिथि गलत भी लिखवा दी जाती है. इसी तरह पीडि़त की उम्र भी नाबालिग या बालिग हो सकती है, इसीलिए पुलिस अब कानूनी दांवपेंच में फंसे उम्र के दांवपेंच को बाल किशोर बोर्ड की मदद से सुलझाने का काम करेगी.

सुनीता की हत्या व मनीषा के किडनैप केस की जांच करने वाले सीओ (सरधना) आशुतोष कुमार को शक है कि पारस ने पकड़े जाने से पहले अपने झोलाछाप दोस्त को फोन कर गांव के माहौल की जानकारी ली थी. इसी जानकारी के आधार पर पुलिस ने पारस को सर्विलांस पर ले कर गिरफ्तार भी किया था. जांच अधिकारी अब इस बात का पता लगा रहे हैं कि गांव का झोलाछाप डौक्टर राजेंद्र इस पूरी साजिश का हिस्सा तो नहीं था.

अपने बयान में मनीषा ने स्पष्ट कहा है कि पारस ने अपने साथियों के साथ उस का किडनैप किया और फरसे का वार कर उस की मम्मी सुनीता की हत्या की. मनीषा ने अपने बयान में यह भी कहा कि पारस के पास एक तमंचा था, जिसे दिखा कर उसे डराया गया, जिस से वह उस का विरोध नहीं कर सकी और वह मनमानी करता रहा. हालांकि उस के बयानों का विरोधाभास इसी बात से साबित होता है कि पुलिस ने उन्हें रुड़की के जिस होटल से पकड़ा, वहां मनीषा आरोपी पारस के साथ आराम से रह रही थी. साथ ही जांच में यह बात भी सामने आई कि उस ने कहीं भी आरोपी के साथ जाते हुए उस का विरोध नहीं किया.

अब चूंकि पीडि़त परिवार अनुसूचित जाति से है. इस कारण वारदात ने इलाके में तनाव फैला दिया था. चूंकि सभी राजनीतिक दल अनुसूचित जाति के लोगों की हमदर्दी बटोरना चाह रहे थे, इसलिए विपक्षी दलों ने मामले को पूरी तरह गरमा दिया. हर सियासी दल का नेता खुद को पीडि़त परिवार का हमदर्द साबित करना चाहता था, इसलिए सब की दौड़ कपसाड़ गांव की तरफ शुरू हो गई.

पुलिस को पहले से ही इस बात की आशंका थी कि इस मामले में सियासत होगी. लिहाजा आसपास के कई थानों की पुलिस के साथ पीएसी व रैपिड ऐक्शन फोर्स की टीमें गांव में तैनात कर दी गईं. कोई भी बाहरी व्यक्ति गांव में घुस न सके, इसलिए गांव के बाहर टोल प्लाजा के पास मेनरोड पर बैरिकेड लगा कर रास्तों को बंद कर दिया. जिस राजनीतिक दल के नेता ने कपसाड़ गांव में जाने की कोशिश की, उसे या तो वहीं से वापस लौटा दिया गया अथवा हिरासत में ले लिया गया. एक तरह से मामला पूरी तरह राजपूत बनाम अनुसूचित जाति का हो गया था.

मनीषा और पारस की इस उलझी हुई प्रेम कहानी में एक पक्ष गांव के लोगों का भी है. एक तरफ जहां पीडि़त परिवार जो आरोप लगा रहा है, उसे गांव के लोग गलत बता रहे हैं. गांव के लोगों का कहना है कि लड़की का लड़के के साथ पिछले ढाई 3 साल से अफेयर था. लड़की ने ही लड़के को फोन कर के बुलाया था. लड़की ने ही अपनी मम्मी के ऊपर हमला करवाने में लड़के का साथ दिया और उस के साथ भाग गई.

गांव वालों का कहना है कि करीब 3 साल पहले जब मनीषा के सब से बड़े भाई नरसी की शादी हुई थी, तब पारस व मनीषा पहली बार एकदूसरे से मिले थे. वहीं से दोनों में एकदूसरे के प्रति प्यार व आकर्षण हुआ. चूंकि दोनों एक ही कालेज में पढते भी थे, इसलिए गांव से बाहर दोनों की एकदूसरे से मुलाकातों का सिलसिला भी शुरू हो गया. दोनों ही इस बात से अंजान थे कि उन का वास्ता ऐसी जातियों से था, जहां उन के प्रेम संबंधों को स्वीकार नहीं किया जाएगा.

छिप सकी आशिकी

किशोर उम्र के प्यार में ऐसा जुनून और मस्तीभरी होती है, जो किसी से छिपती नहीं है. पारस व मनीषा का प्यार भी किसी से छिपा नहीं रह सका. दोनों के इश्क की कहानियां गांव के लोगों के बीच जब किस्से बन कर तैरने लगी तो जल्द ही दोनों के फेमिली वालों को भी इस की भनक लग गई. ऐसे मामलों में जो होता है, वैसा ही पारस और मनीषा के साथ भी हुआ. दोनों के ऊपर पहले परिवार की बंदिशें लगीं, लेकिन आशिकी का जुनून दोनों को जब मिलने से नहीं रोक सका तो एक दिन ऐसा भी आया कि मनीषा के परिवार वालों ने पारस के परिवार पर मनीषा को बरगलाने का आरोप लगाते हुए झगड़ा किया.

बात बढ़ती, इस से पहले ही राजपूत व जाटव बिरादरी के कुछ समझदार लोगों ने बीचबचाव किया और इस के बाद गांव में दोनों पक्षों की एक पंचायत बुलाई गई. ये अप्रैल, 2024 की बात है. इस पंचायत में फैसला लिया गया कि मनीषा और पारस उस दिन के बाद एकदूसरे से नहीं मिलेंगे. गांव के कुछ लोग तो यह भी कहते हैं कि मनीषा के पिता ने अनुसूचित जाति का होने के कारण पारस के परिवार के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट का मुकदमा दर्ज कराने का मन बनाया था, इसलिए पारस के फेमिली वालों ने खुद इस समझौते के तहत मनीषा के पापा को एक बड़ी रकम दी थी और कहा था कि वे जल्द से जल्द अपनी बिरादरी में एक लड़का ढूंढ कर उस की शादी करा दें, ताकि यह समस्या हमेशा के लिए दूर हो जाए.

गांव वालों का कहना है कि इसी के बाद मनीषा के फेमिली वालों ने भागदौड़ शुरू की और उस के लिए सहारनपुर में अपनी बिरादरी का एक अच्छा लड़का देख कर उस की शादी तय कर दी. यह शादी 10 फरवरी, 2026 को होनी थी. गांव वालों का यह भी कहना है कि मनीषा पारस को भुला नहीं पा रही थी, इसीलिए गुपचुप तरीके से उस का पारस से मिलनाजुलना जारी रहा और उस ने अपनी शादी से कुछ दिन पहले पारस के साथ मिल कर खुद को भगाने की यह साजिश रची.

हालांकि मनीषा के फेमिली वाले कहते हैं कि पारस मनीषा पर अपने साथ भागने का दबाव बना रहा था, लेकिन मनीषा ने जब साफ मना कर दिया तो 8 जनवरी की सुबह उस ने इस वारदात को अंजाम दिया. यह तो अदालत के फैसले के बाद ही पता चलेगा कि दोनों का प्यार कितना सच्चा या झूठा था. प्यार की इस नासमझी में न सिर्फ पारस की जिंदगी अंधेरे में पड़ गई, वहीं मनीषा के दामन पर भी बदनामी का दाग लग गया और उस की मम्मी की जान गई सो अलग.

इस घटना के बाद सियासी रंग ले कर बवाल को टालने के लिए फिलहाल यूपी सरकार ने परिवार को 10 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दे कर और व स्थानीय पूर्व विधायक और बीजेपी नेता संगीत सोम ने 2 लाख नकद आर्थिक मदद दे कर पीडि़त परिवार की मदद से मामले को ठंडा करने की कोशिशें तो की हैं, लेकिन समाजवादी पार्टी ने 5 लाख व सपा के सरधना विधायक अतुल प्रधान ने एक लाख के चैक से परिवार को आर्थिक मदद दे कर इस घटना को सियासी रंग में रंगने का काम कर दिया है.

मुख्य आरोपी पारस सोम को कोर्ट में पेश करने ले जाती पुलिस

अब इस प्रकरण में जांच अधिकारी सीओ (सरधना) आशुतोष कुमार ने सुनीता की हत्या और बेटी मनीषा के किडनैप के मामले में पुलिस की जांच तेज कर दी है. आरोपी पारस सोम को अदालत के आदेश से रिमांड पर ले कर सुनीता की हत्या में प्रयुक्त फरसा (आलाएकत्ल) बरामद कर लिया गया है, जो केस के लिए अहम सबूत है. साथ ही पुलिस ने इस मामले में 2 नाबालिग चश्मदीद लड़कियों के बयान कोर्ट के दर्ज कराए, जिस से पारस सोम के खिलाफ केस और मजबूत होगा.

जांच अधिकारी आशुतोष कुमार ने मनीषा के परिजनों में उस के पापा सतेंद्र कुमार और भाइयों नरसी, मनदीप व शुभम से भी पूछताछ कर उन के बयान दर्ज किए.

(कथा पुलिस की जांच, पीडि़त व आरोपी पक्ष के बयान और ग्रामीणों द्वारा बताए गए तथ्यों पर आधारित है. कथा में मनीषा परिवर्तित नाम है)

 

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