Love Story: जिस महेश के लिए राधा ने पति से बेवफाई की, उसी महेश की नीयत जब उस की 14 साल की बेटी पर बिगड़ी तो भला राधा इस बात को कैसे बरदाश्त करती. फिर उस ने जो किया, क्या वह ठीक था

उत्तर प्रदेश के जिला कानपुर देहात के थाना झीझंक का एक गांव है महेवा. इसी गांव में राम सिंह अपने परिवार के साथ रहता था. उस के परिवार में पत्नी के अलावा 2 बेटे और एक बेटी राधा थी. राम सिंह घी का कारोबार करता था. वह गांवगांव जा कर लोगों के यहां से घी खरीदता और उसे ले जा कर कानपुर में बेच आता. इस से उसे जो फायदा होता, उसी से उस के परिवार की गुजरबसर होती थी.

राम सिंह की बेटी राधा सुंदर होने के साथसाथ थोड़ी चंचल भी थी. इसलिए सयानी होने पर गांव का हर लड़का उसे अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश में लग गया था. जब यह सब राम सिंह ने देखा तो उसे लगा कि अब जल्दी ही राधा की शादी कर देनी चाहिए. उस ने उस के लिए लड़के की तलाश शुरू की तो उसे गांव बेलूपुर में एक लड़का मिल गया.

लड़के का नाम अजय था. उस के पिता लाखन सिंह के पास 10 बीघा खेती की जमीन थी, जिस में अच्छी पैदावार होती थी. इसी वजह से उस की आर्थिक स्थिति ठीकठाक थी. बातचीत शुरू हुई तो राधा और अजय का रिश्ता तय हो गया. इस रिश्ते में अगर कोई खटकने वाली बात थी तो यह कि अजय सांवला था, जबकि राधा गोरी थी. इस के बावजूद अजय का पलड़ा भारी था, क्योंकि उस के पास 10 बीघा जमीन थी. जल्दी ही दोनों की शादी हो गई.

अजय तो सुंदर पत्नी पा कर खुश था, जबकि राधा अपने सांवले पति से खुश नहीं थी. शादी के पहले उस के मन में पति की जो छवि थी, अजय उस में कहीं भी फिट नहीं बैठता था. लेकिन अब विवाह हो गया था, इसलिए साथ तो रहना ही था. धीरेधीरे राधा एक बेटी अर्पिता और 2 बेटों जय तथा विजय की मां बन गई. 3 बच्चों की मां बनने के बाद भी राधा में कोई बदलाव नहीं आया था. उस के मन में न तो बच्चों के प्रति वह मोह जागा था, जो एक मां को अपने बच्चों के प्रति होता है और न ही पति के प्रति वह चाहत जागी थी, जो जागनी चाहिए थी. पत्नी की इस उपेक्षा से अजय काफी दुखी था.

इस दुख को कम करने के लिए वह शराब पीने लगा. जब वह पक्का शराबी हो गया तो खेतीकिसानी से उस का मन हट गया. उसे लगता था कि आखिर वह किस के लिए मेहनत करे. जब वह पूरी तरह से निठल्ला हो गया तो मांबाप ने उसे अलग कर दिया. गांव में अजय का एक और अन्य मकान था, इसलिए मांबाप से अलग होने पर उसे कोई परेशानी नहीं हुई. वह पत्नी और बच्चों के साथ उसी मकान में रहने लगा. वह मेहनत कर नहीं सकता था, इसलिए बाप से मिली जमीन उस ने बटाई पर दे दी.

राधा 3 बच्चों की मां जरूर बन गई थी, लेकिन अब भी उस की सुंदरता में जरा भी कमी नहीं आई थी. बल्कि शरीर भर गया था, इसलिए वह पहले से भी ज्यादा सुंदर लगने लगी थी. स्वभाव से हंसमुख और चंचल राधा का मन घरगृहस्थी में बिलकुल नहीं लगता था. इस की वजह यह थी कि वह कभी अजय को पति के रूप में स्वीकार नहीं कर पाई. शायद इसी वजह से उस का मन भटकता रहता था. राधा की सुंदरता और चंचलता की वजह से गांव के महेश का दिल उस पर आ गया था. वह उस तक पहुंचने का तिकड़म भिड़ाने लगा था.

3 भाइयों में महेश सब से बड़ा था. उस के पिता भवानी सिंह ने उस का विवाह शिवली कस्बा की रहने वाली रजनी से कर दिया था. लेकिन अपनी आशिकमिजाजी की वजह से वह पत्नी का हो कर नहीं रह सका. वह इधरउधर मुंह मारता फिरता था. गांव की कई महिलाओं से उस के संबंध थे. लेकिन उन के बारे में कोई नहीं जान सका. राधा पर वह पूरी तरह से मोहित था. इसलिए उस तक पहुंचने के लिए उस ने उस के खेत बटाई पर ले लिए. इस से उसे राधा के घर आनेजाने में आसानी हो गई थी. वह जब भी राधा के घर जाता, मौका मिलने पर उस से हंसीमजाक करने से नहीं चूकता.

राधा भी उस से खुल कर हंसीमजाक करती थी. एक दिन महेश आया तो अजय घर में नहीं था. राधा को अकेली पा कर उस के दिल की धड़कन बढ़ गई. वैसा ही कुछ हाल राधा का भी था. उस ने इठलाते हुए कहा, ‘‘आओ देवरजी, कैसे आना हुआ?’’

‘‘खेतों पर काम कर रहा था, अचानक तुम्हारी याद आई तो मन मचल उठा. पहले तो उसे मनाने की कोशिश की, जब वह नहीं माना तो यह सोच कर चला आया कि चल कर प्यारी भाभी का दीदार कर लूं. कभीकभी सोचता हूं कि इतनी सुंदर भाभी कालेकलूटे अजय भैया के पल्ले कैसे पड़ गईं?’’

‘‘अपनाअपना नसीब है देवरजी. मेरी तकदीर में यही लिखा था.’’ राधा ने लंबी सांस ले कर कहा.

राधा के इस जवाब से महेश को लगा कि उस का तीर सही निशाने पर लगा है. वह उस के एकदम करीब आ कर बोला, ‘‘नसीब अपने हाथ में होता है भाभी, मैं आप से प्यार करता हूं. मैं कोई पराया तो हूं नहीं. वैसे भी मैं न जाने कब से तुम्हारी खूबसूरती का दीवाना हूं.’’

‘‘देवरजी, यह दीवानापन छोड़ो और अब चुपचाप चले जाओ. कहीं वह आ गए तो पता नहीं क्या सोचेंगे?’’ राधा ने उस की आंखों में झांकते हुए कहा.

महेश ने उसे बांहों में भर कर कहा, ‘‘भाभी, मैं चला तो जाऊंगा, पर खाली हाथ नहीं जाऊंगा. आज तो तुम्हारा प्यार ले कर ही जाऊंगा.’’

राधा को बांहों में भरते ही उस ने उस के साथ छेड़छाड़ शुरू कर दी थी. राधा ने उस की इस हरकत का कोई विरोध नहीं किया. इस की वजह यह थी कि वह भी यही चाहती थी. उस ने मुसकराते हुए कहा, ‘‘भूखे भेडि़ए की तरह क्यों टूटे पड़ रहे हो, थोड़ा सब्र से काम लो, दरवाजा खुला है. वैसे भी तुम जो कुछ कर रहे हो, वह ठीक नहीं है.’’

महेश समझ गया कि राधा को कोई आपत्ति नहीं है. इस का उस ने पूरा फायदा उठाया और अपने तथा राधा के बीच की सारी दूरियां मिटा दीं. इस तरह राधा के कदम एक बार बहके तो बहकते चले गए. मौका मिलते ही महेश राधा के घर आ जाता. राधा भी हर तरह से उस का सहयोग कर रही थी. इस की वजह यह थी कि वह उस के पति से हर मायने में इक्कीस था. महेश और राधा का यह अवैध संबंध चोरीछिपे सालों तक चलता रहा, किसी को पता नहीं चला. आखिर कब तक उन का यह गलत संबंध छिपा रहता. वे समय के साथ लापरवाह होते गए, परिणामस्वरूप एक दिन अजय ने दोनों को आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया. फिर तो उसे समझते देर नहीं लगी कि उन के बीच यह खेल काफी दिनों से चल रहा है.

महेश चूंकि दबंग स्वभाव का था, इसलिए अजय ने उस से सीधे टकराना ठीक नहीं समझा. उस के जाने के बाद उस ने राधा को आड़े हाथों लेते हुए कहा, ‘‘शरम आनी चाहिए तुम्हें यह सब करते हुए. 3 बच्चों की मां होने के बावजूद तुम नीचता पर उतर आई हो.’’

इस के बाद जब दोनों में तूतूमैंमैं शुरू हुई तो बात बढ़ती गई. इस के बाद अजय ने राधा की जम कर पिटाई कर दी. लेकिन इस पिटाई के बाद भी राधा ने महेश को नहीं छोड़ा. वह महेश की इतनी दीवानी हो चुकी थी कि जब उसे घर में उस से मिलने का मौका नहीं मिलता तो वह किसी न किसी बहाने खेतों पर जा कर उस से मिल लेती. जब इस का पता अजय को चलता तो वह शराब पी कर राधा और महेश को खूब गालियां देता.

ज्यादा शराब पीने की वजह से अजय बीमार पड़ गया. राधा ने कानपुर ले जा कर उस का इलाज कराया. समय पर सही इलाज मिलने से अजय ठीक हो गया. उस के इलाज में सारा पैसा महेश ने लगाया था, इसलिए वह उस के एहसान तले दब गया. अब उस ने महेश से समझौता कर लिया कि वह उस के और राधा के बीच में बाधा नहीं बनेगा. इस के बाद महेश ने उस की नौकरी झीझंक कस्बा में एक आढ़ती के यहां लगवा दी. अजय सुबह 11 बजे घर से निकलता तो शाम को ही वापस आता. कभीकभी काम ज्यादा होता तो वह आढ़त पर ही रुक जाता.

अब तक राधा की बेटी अर्पिता 14 साल की हो चुकी थी. वह भी मां की तरह सुंदर और चंचल थी. गांव के रिश्ते के नाते वह महेश को भइया कहती थी. मां और महेश के संबंधों की उसे जानकारी थी. लेकिन मां के डर की वजह से वह विरोध नहीं कर पाती थी. इस की एक वजह यह भी थी कि स्कूल की फीस से ले कर बाकी के उस के सारे खर्च महेश ही उठाता था. शायद इसीलिए वह अपनी जुबान बंद रखती थी.

एक दिन अजय ने घर से जाते समय राधा से कहा कि रात को वह घर नहीं आ पाएगा, इसलिए वह बच्चों के साथ खाना खा कर सो जाए. शाम ढलते ही राधा ने महेश को फोन कर के बता दिया कि वह जल्दी से घर आ जाए. आज की पूरी रात उन की अपनी है. क्योंकि अजय घर नहीं आएगा. राधा की बात सुन कर महेश बहुत खुश हुआ. रात 10 बजे के आसपास वह शराब के नशे में झूमता हुआ राधा के घर पहुंचा. अब तक राधा ने बच्चों को खिलापिला कर दूसरे कमरे में सुला दिया था. महेश ने आते ही राधा को बांहों में भरा और उस के साथ कमरे में चला गया.

आधी रात के बाद महेश लघुशंका के लिए कमरे से बाहर निकला तो उस की नजर दूसरे कमरे में सो रही अर्पिता पर पड़ी. उस को उस रूप में देख कर महेश की सांसें तेज हो गईं. कुछ देर तक वह उसे अपलक निहारता रहा. उस के बाद लघुशंका कर के लौटा तो एक बार फिर उस की नजरें अर्पिता कर टिक गईं.

उस की नीयत खराब  होने लगी. वह राधा के कमरे में आया तो देखा राधा सो रही थी. अब तक उस की नीयत पूरी तरह खराब हो चुकी थी. वह लौटा और जा कर अर्पिता के बगल में लेट गया. उस ने अर्पिता से छेड़छाड़ की तो उस की नींद खुल गई. उस ने चीखना चाहा. लेकिन महेश ने उस के मुंह पर हाथ रख कर फुसफुसाते हुए कहा, ‘‘चुप रह, मैं हूं महेश.’’

‘‘महेश भइया तुम? यह क्या कर रहे हो?’’

‘‘चुप रह, मैं जो करने जा रहा हूं, इस में बड़ा मजा आएगा.’’

‘‘नहीं भइया, यह गलत है. आप को जो करना है, मम्मी के साथ करो. मेरे साथ कुछ किया तो शोर मचा दूंगी.’’ अर्पिता ने धमकाया तो महेश डर गया और चुपचाप राधा के कमरे में चला गया.

अर्पिता राधा से ज्यादा सुंदर थी, इसलिए वह महेश के दिलोदिमाग में बस गई. अर्पिता को पाने के लिए वह उस से छेड़छाड़ करने लगा. इस छेड़छाड़ का परिणाम यह निकला कि अर्पिता को भी मजा आने लगा. अब वह भी महेश के आने का इंतजार करने लगी. महेश अर्पिता के साथ कुछ कर पाता, इस से पहले ही एक दिन राधा ने उसे अर्पिता से छेड़छाड़ करते देख लिया. उस के बाद तो राधा महेश पर बिफर पड़ी, ‘‘मेरी फूल सी बच्ची को बरगलाने में तुम्हें शरम नहीं आई, मैं ने पति से बेवफाई कर के तुम्हारा साथ दिया, जबकि तुम मेरी ही बेटी को बरबाद करने पर तुले हो. कान खोल कर सुन लो, आज के बाद तुम ने उसे बरगलाने की कोशिश की तो अच्छा नहीं होगा.’’

राधा की धमकी का महेश पर कोई असर नहीं हुआ. उसे जब भी मौका मिलता, वह अर्पिता के साथ छेड़खानी कर बैठता. एक दिन तो हद हो गई, महेश ने राधा के सामने ही अर्पिता को अपनी बांहोें में भर लिया. इस के बाद तो राधा आपा खो बैठी. उस ने महेश और अर्पिता दोनों की पिटाई कर दी. इस के बाद राधा और महेश में जम कर कहासुनी हुई. राधा की समझ में आ गया कि महेश ऐसा सांप है, जो किसी भी दिन उस की बेटी को डंस सकता है, इसलिए उस ने इस सांप का फन कुचलने का निश्चय कर लिया.

14 दिसंबर, 2015 की सुबह राधा थाना झीझंक पहुंची और थानाप्रभारी आर.के. सिंह को बताया कि बेलूपुर के रहने वाले महेश ने उस के घर में फांसी लगा कर आत्महत्या कर ली है. उस की इस सूचना पर आर.के. सिंह पुलिस बल के साथ उस के घर जा पहुंचे. उस समय राधा के घर के बाहर भीड़ लग चुकी थी. भीड़ को हटा कर थानाप्रभारी वहां पहुंचे, जहां महेश फांसी के फंदे से झूल रहा था. महेश जीने की ग्रिल से लटका था. उस के पैर जमीन को छू रहे थे. पहली ही नजर में फांसी लगाने जैसा कोई लक्षण नजर नहीं आ रहा था. न तो उस के मुंह से झाग निकला था और न ही मलमूत्र निकला था. शक होने पर आर.के. सिंह ने लाश को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया.

उन्होंने राधा से पूछताछ की तो उस ने बताया कि महेश ने उस के खेत बटाई पर ले रखे हैं, इसलिए उस का उस के घर आनाजाना था. उस के पति अजय के नौकरी पर जाने के बाद महेश आया और उस की साड़ी का फंदा बना कर ग्रिल से झूल गया. उस ने महेश को न आते देखा और न फांसी पर झूलते देखा. आर.के. सिंह ने मृतक महेश के पिता भवानी सिंह से पूंछतांछ की तो फफकफफक कर रोते हुए उस ने बताया कि महेश की हत्या राधा और उस के पति अजय ने की है. पुलिस को गुमराह करने के लिए लाश को फंदे पर लटकाया गया है. हत्या की वजह राधा और मेहश के बीच अवैध संबंध हैं.

अगले दिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिली तो आर.के. सिंह चौंके. क्योंकि महेश की मौत गला दबाने से हुई थी. उस ने आत्महत्या नहीं की थी. चूंकि शक के घेरे में राधा और उस का पति अजय था, इसलिए वह उन्हें हिरासत में ले कर थाने ले आए और पूछताछ की. अजय ने बताया कि वह घर पर नहीं था, इसलिए महेश की हत्या किस ने की, उसे पता नहीं है. अजय ने हत्या करने से साफ मना कर दिया तो आर.के. सिंह ने राधा से पूछताछ की. पहले तो वह उन्हें गुमराह करती रही, लेकिन जब उस से थोड़ी सख्ती से पूछताछ की गई तो वह टूट गई और महेश की हत्या का अपना जुर्म कबूल कर लिया.

उस ने बताया कि उस के और महेश के बीच पिछले कई सालों से संबंध थे. उस के प्यार में अंधी हो कर उस ने पति तक से बेवफाई कर डाली. तब उसे पता नहीं था कि उस की यह बेवफाई उस की बेटी की जिंदगी पर भारी पड़ जाएगी. महेश उस की बेटी अर्पिता पर बुरी नजर डाल रहा था. राधा ने उसे कई बार समझाया, लेकिन वह नहीं माना. मजबूर हो कर उस ने साजिश रच कर 14 दिसंबर की सुबह 4 बजे जब अजय काम पर चला गया तो महेश को बुला लिया. आते ही महेश ने जैसे ही उसे पकड़ा, उस ने उस के नाजुक अंग को दांतों से काट लिया.

वह दर्द से तड़पने लगा तो वह उस की छाती पर सवार हो गई और साड़ी से उस का गला घोंट दिया. पुलिस को गुमराह करने के लिए उस ने उस की लाश को फंदे से जीने की ग्रिल से लटका दिया. उस के बाद थाने जा कर पुलिस को सूचना दे दी. राधा के इसी बयान के आधार पर आर.के. सिंह ने मृतक के पिता भवानी सिंह की ओर से अपराध संख्या 347/2015 पर महेश की हत्या का मुकदमा राधा के खिलाफ दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया.

17 दिसंबर, 2015 को थाना झीझंक पुलिस ने राधा को कानपुर देहात की माती अदालत में रिमांड मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया, जहां से उसे जिला जेल भेज दिया गया. कथा संकलन तक उस की जमानत नहीं हुई थी. चूंकि अजय निर्दोष था, इसलिए पुलिस ने उसे छोड़ दिया. Love Story

 

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