Hindi Stories: सना इकबाल युवाओं को तनाव से निकालने और हर हाल में जिंदगी की जंग जीतने का जज्बा भरने के लिए बुलेट से घूमघूम कर उन्हें जागरूक कर के जिंदगी की अहमियत बता रही हैं. इसीलिए उन की पहचान बुलेट गर्ल के रूप में हो रही है.
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में ठंड के बीच गुनगुनी धूप ने उस दिन के मौसम को थोड़ा खुशगवाना दिया था. इसी वजह से राजपुर रोड स्थित इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूट में उस दिन कुछ ज्यादा ही चहलपहल थी. दोपहर का वक्त था, तमाम छात्रछात्राएं इंस्टीट्यूट के कौमन हौल में जमा थे. इंस्टीट्यूट प्रशासन के अधिकारी और कुछ छात्रछात्राएं हौल के दरवाजे के बाहर इस तरह खड़े थे, जैसे उन्हें किसी के आने का इंतजार हो. बीचबीच में वे अपनी घडि़यों पर भी नजर डाल लेते थे. उसी वक्त सफेद रंग की चमचमाती बुलेट मोटरसाइकिल पर सवार एक लड़की इंस्टीट्यूट परिसर में दाखिल हुई. उस की आंखों पर स्टाइलिश रंगीन चश्मा लगा था.
खास बात यह थी कि उस के सिर पर हेलमेट और शरीर पर कपडों के ऊपर सेफ्टी आरमर थे. चंद सैकेंड में हौल के बाहर पहुंच कर उस ने मोटरसाइकिल को स्टैंड पर खड़ी की और हेलमेट उतार कर हौल के बाहर खड़े लोगों के पास पहुंच गई.
उन लोगों में से एक छात्रा ने आगे बढ़ कर ताजे खूबसूरत फूलों का गुच्छा थमाते हुए कहा, ‘‘योअर मोस्ट वैलकम.’’
आने वाली लड़की के चेहरे पर गजब का उत्साह और चमक थी. उस ने मुसकराते हुए कहा, ‘‘थैंक्यू, बट सौरी मुझे आने में थोड़ी देर हो गई.’’
वह लड़की कुछ और कहती, वहां खड़े लोगों में से किसी ने कहा, ‘‘नो प्रौब्लम, सब स्टूडैंट आप का इंतजार कर रहे हैं. प्लीज चलिए.’’
‘‘ओके.’’ लड़की मुसकराई और उन लोगों के साथ हौल के अंदर दाखिल हुई तो पूरा हौल उस के स्वागत में तालियों से गूंज उठा. इसी के साथ कुछ स्टूडैंट ने कहा, ‘‘वैलकम बुलेट गर्ल.’’
तभी मंच का संचालन कर रही एंकर ने अपनी मधुर आवाज में कहा, ‘‘स्टूडैंट्स बुलेट गर्ल सना हमारे बीच आ चुकी हैं. वह आप को वे टिप्स देंगी, जिन की आप को इस लाइफ में बहुत जरूरत है.’’
इसी के साथ उस ने युवती को मंच पर आने का इशारा करते हुए पूरी गर्मजोशी से कहा, ‘‘सो वैलकम बुलेट गर्ल सना.’’
सना ने सब की ओर हाथ हिलाते हुए मंच पर पहुंच कर माइक संभाला और कहना शुरू किया, ‘‘हैलो एवरीवन, मैं आप को वह बताना चाहती हूं, जो किताबों में नहीं पढ़ाया जाता, लेकिन वह हमारी जिंदगी को बदल देता है. पढ़ाई हो या जिंदगी के उतारचढ़ाव, बुरे से बुरे हालातों में भी खुद को कभी टूटने मत दीजिए, क्योंकि यह जिंदगी अनमोल तोहफा है. खुद को डिप्रैशन में न आने दें और आ भी जाएं तो उस से बहुत जल्द निकलने की कोशिश करें, क्योंकि यह इंसान का सब से बड़ा दुश्मन है, जो सीधे जिंदगी पर वार करता है.
‘‘खुद को निगेटिव न होने दें, हमेशा पौजिटिव रहें. फ्रैंड्स, सही बात यह है कि लाइफ में कुछ भी निगेटिव नहीं है, बस उसे देखने का नजरिया पौजिटिव होना चाहिए. अपने अंदर की निगेटिविटी को खत्म करने के लिए वे काम करें, जो आप को सब से ज्यादा अच्छे लगते हों. डिप्रेशन में स्टूडैंट जिंदगी खत्म करने तक की सोच लेते हैं, लेकिन सुसाइड इज नौट सौल्यूशन.
‘‘जब भी ऐसा खयाल आप के मन में आए, आप अपना औडियो रिकौर्ड करें और उसे सुनें कि आप ऐसा क्यों करना चाहते हैं. अपनी आवाज सुनने के बाद आप महसूस करेंगे कि रीजन इतना बड़ा नहीं है, जिस की सजा मौत है. किसी भी तरह की समस्या पर नहीं, उस के समाधान पर फोकस करें. छुटकारा सौल्यूशन से ही मिलता है.’’
सना इतना कह कर चुप हुई तो वहां इकट्ठा छात्रछात्राओं से सवालोंजवाबों का सिलसिला शुरू हुआ. एक छात्रा ने सवाल किया, ‘‘सना मैम, न चाहते हुए भी बहुत बातें ऐसी होती हैं, जो हमें तनाव देती हैं. ऐसे में हमें क्या करना चाहिए?’’
‘‘खुश रहने की कोशिश करें और छोटीछोटी बातों को बड़ा होने से पहले ही खत्म कर दें. इस का सब से बेहतरीन उपाय यही है. बादलों के टूटने पर पानी की फुहार आती है, मिट्टी टूटने पर खेत का रूप लेती है, फल के टूटने पर बीज निकलता है और बीज के टूटने पर नए पौधे की संरचना होती है. इसलिए जब भी खुद को टूटा महसूस करें, बिलकुल निराश न हों.
‘‘सोचिए, कुछ ऐसा होने वाला है, जो आप की कल्पनाओं से परे है. सोच सकारात्मक रहेगी तो मेरा यकीन मानिए, कुछ भी गलत नहीं होगा. दुनिया में ऐसा कोई इंसान नहीं है, जिस पर कभी मुसीबत न आई हो, समस्याओं का शिकार न हुआ हो. इन बातों का हमारे जीवन से गहरा नाता है. लेकिन इस का मतलब यह नहीं कि हम उन से हार जाएं. जीवन की चुनौतियों का डट कर सामना करना चाहिए.’’
करीब आधे घंटे तक चले इस सिलसिले में ढेरों सवालजवाब हुए. सना ने युवाओं को समझाया कि वे सकारात्मक रहें. अपनी बात कह कर सना अपनी बुलेट पर सवार हो कर चली गई. उस का यह पहला या अंतिम पड़ाव नहीं था, बल्कि वह शहरशहर इसी तरह घूम कर स्कूलकालेजों और इंस्टीट्यूटों में जा कर युवाओं को जागरूक करती है. इसी मकसद से वह 18 दिसंबर, 2015 को देहरादून के इस इंस्टीट्यूट में आई थी.
सना न कोई प्रोफैसर है, न किसी सरकारी मिशन का हिस्सा और न ही धर्म की ठेकेदार, बल्कि खुद उस की जिंदगी जिन कड़वे अनुभवों से रूबरू हुई थी, उस के बाद ही उस ने ऐसा करने का निश्चय किया था. चंद महीनों में वह कई प्रदेशों के दर्जनों शहरों का अपनी मोटरसाइकिल से सफर कर चुकी है. उस के ऐसा बनने और करने के पीछे एक कहानी है. सना इकबाल देश के प्रसिद्ध शहर हैदराबाद की रहने वाली है. उस का संबंध एक अच्छे परिवार से है. परिवार में 3 बहनों में वह दूसरे नंबर पर है. वह बचपन से ही होनहार थी. उस की परवरिश भी बेहतरीन माहौल में हुई. जिंदगी में न कोई गम था, न कोई चिंता.
सना पढ़लिख कर अच्छा मुकाम हासिल करना चाहती थी. इस के लिए उस ने जीजान से कोशिश भी की थी. एक साल पहले की बात है, जब सना उस्मानिया यूनिवर्सिटी से साइकोलौजी से पीजी कर रही थी. इसी बीच उस ने कौरपोरेट ट्रैनर की नौकरी हासिल कर ली थी. बेटियां जवानी की दहलीज पर हों तो हर मातापिता की ख्वाहिश होती है कि उन की रुखसती अच्छे परिवार में हो जाए. सना के मातापिता भी यही चाहते थे, इसलिए उन्होंने उस के लिए एक अच्छा रिश्ता ढूंढ़ लिया. दोनों परिवारों में मेलमुलाकातें हुईं. दोनों ओर से रिश्ता पसंद आया तो निकाह की तारीख तय कर दी गई.
हर लड़की की तरह सना भी खुश थी. जिंदगी के इस मोड़ पर हर लड़की आने वाले कल को ले कर अपनी कल्पनाओं का खूबसूरत महल तैयार करती है. सना ने भी वैसा ही किया. दुलहन की कल्पना में वह खुशियों से लबरेज थी. इंसान की जिंदगी में खुशियों का रिश्ता अजीब होता है. वह अपनी मर्जी से आती है और अपनी ही मर्जी से चली जाती है. खुशियों को बांधे रखना किसी के वश में नहीं होता, लेकिन खूबसूरत यादों और खुशियों की उम्र बहुत लंबी होती है. लेकिन जरूरी नहीं है कि इंसान जो चाहता है, ठीक वैसा ही हो. जिंदगी के पेश आने का अपना तरीका है. तकलीफ तब होती है, जब ठहरी हुई खुशियों के चमन के फूल मुरझाने लगते हैं.
सना के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था. उस की कोख में शौहर की मोहब्बत की निशानी पलने लगी थी. मां बनने के खयाल से वह खुश थी. कई बार न चाहते हुए भी ऐसे हालात बन जाते हैं, जो उम्मीदों से परे होते हैं. सना भी वक्त के इन हालात का शिकार हुई और उस के शौहरबीवी के रिश्ते की डोर कमजोर पड़ने लगी. ऐसे वक्त पर हर किसी के अपनेअपने फैसले होते हैं. जिंदगी सना के साथ पूरी सख्ती से तब पेश आई, जब उस का शौहर से तलाक हो गया. सना इस के लिए दिमागी तौर पर कतई तैयार नहीं थी, इसलिए उसे गहरा आघात लगा.
वह अपने मातापिता के पास आ गई. वहीं उस ने बेटे को जन्म दिया. इस के बावजूद उस की खुशियां पूरी तरह से नदारद थीं. उसे जिंदगी उदासियों में लिपटी उस वीरान इमारत सी नजर आ रही थी, जो कभी खुशियों के खूबसूरत सितारों से जगमगाया करती थी. सना बुरी तरह से तनाव का शिकार हो गई. नौकरी वह निकाह से पहले ही छोड़ चुकी थी. अब पढ़ाई में भी दिल लगना बंद हो गया था. वह खुद को निहायत अकेली महसूस करने लगी थी. दिनरात तनाव में गुजरते थे. उसे अपना वजूद ही जैसे डराता नजर आने लगा.
जिंदगी में तकलीफों का सामना करना कोई आसान काम नहीं है. सना बुरी तरह टूट चुकी थी. बुरे खयाल उस के दिमाग में आने लगे. उसे लगने लगा कि बोझिल हो चुकी इस जिंदगी से छुटकारा पाने का एक ही रास्ता है कि अपनी सांसों की डोर खुद ही किसी तरीके से तोड़ ली जाए. सना गुमसुम रहने लगी थी. उस ने मन ही मन फैसला लिया कि वह इस दुनिया को अलविदा कह देगी. इन्हीं बुरे खयालों के बीच उस ने मोबाइल में अपनी आवाज को आखिरी संदेश के रूप में टेप किया. इस के बाद उसे इस तरह सुना, जैसे उसे कोई सुना रहा हो. उसे सुन कर वह बहुत रोई. उसे झटका सा लगा. उसे लगा कि उस की वजह ऐसी नहीं है कि वह मौत को गले लगा ले.
इंसान के पास सोचने के 2 ही नजरिए होते हैं, एक नकारात्मक और दूसरा सकारात्मक. जब कोई नकारात्मक सोचता है तो छोटी से छोटी परेशानी भी बड़ी नजर आती है और इस तरह खयालों का तूफान सा आने लगता है. जबकि सकारात्मक सोच होती है तो बड़ी से बड़ी परेशानी भी छोटी लगती है और अपनेआप अच्छे खयाल आने लगते हैं.
सना का बेटा 3 महीने का हो चुका था. उस ने उस के बारे में सोचा और अपनी सोच को सकारात्मक बनाने की कोशिश शुरू कर दी. उस ने सोचा कि दुनिया में ऐसे लाखोकरोड़ो लोग हैं, जिन के दर्द उस से भी बड़े हैं. इन्हीं बातों से उसे लगा कि वह मौत की चौखट के एकदम नजदीक पहुंच कर सिर्फ अपनी सकारात्मक सोच की वजह से मौत के मुंह से निकल सकी है. उस ने मौत का फैसला तो टाल दिया, लेकिन डिप्रैशन से पूरी तरह नहीं उबर सकी. सना को बचपन से ही बुलेट मोटरसाइकिल चलाने का शौक था, लेकिन सामाजिक सोच की वजह से उस ने कभी चलाई नहीं थी.
अपने डिप्रैशन को कम करने के लिए उस ने अपने इस शौक को पूरा करने का मन बना लिया. सना ने बुलेट खरीदी और जब भी वह अधिक तनाव में होती, बुलेट पर सवार हो कर शहर की सड़कों पर घूमने निकल पड़ती. इस से उसे थोड़ा राहत मिलती. उस ने आत्महत्या के खयालों और उस से निकलने के अहसास को बेहद करीब से जिया था. वह नहीं चाहती थी कि दुखी करने वाले दर्द से उस का हमेशा का रिश्ता बना रहे.
सना इस हकीकत को जानती है कि युवाओं में विभिन्न कारणों से आत्महत्या के मामले बढ़ते जा रहे हैं. छोटी से छोटी मुसीबत में भी उन की सहनशीलता और विवेक जवाब दे जाता है. इंटरनेट पर उस ने ऐसे कारणों की तलाश की तो पता चला कि वे कारण इतने भी बड़े नहीं हैं, जिन की वजह से युवा जिंदगी की जंग हार रहे हैं. युवाओं के सामने पूरी जिंदगी होती है. अगर वे बुरे खयालों को उस वक्त टाल दें तो बाकी जिंदगी बाहें फैला कर उन का बेसब्री से इंतजार कर रही होती है. लेकिन अफसोस करने के लिए वे जिंदा नहीं रहते.
सना मनोविज्ञान की छात्रा थी. उस ने एक अनोखा फैसला लिया कि अब वह युवाओं को मानसिक तनाव से निकालने और उन्हें सकारात्मक सोच के जरिए जिंदगी बदलने का तरीका सिखाने की मुहिम चलाएगी. युवाओं से अपने अनुभवों को शेयर करेगी. ऐसा कर के वह बहुतों को नई जिंदगी दे सकेगी. इस सोच को साकार करने के लिए सना ने सब से पहले सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक पर सुसाइड नो बोनर नामक पेज बनाया. इस से लोग जुड़ते गए. कई युवकयुवतियों को उस ने सकारात्मक बातें समझा कर उन्हें अवसाद से निकाला. वह यहीं तक सीमित नहीं रही, उस ने कुछ महीनों के लिए पूरे देश में घूमघूम कर संदेश देने का फैसला किया.
उस ने अपना इरादा घर वालों को बताया. सना अवसाद से गुजर रही थी और धीरेधीरे उस से निकलने की कोशिश कर रही थी, यह सभी जानते थे. इसलिए किसी ने भी उसे रोकने की कोशिश नहीं की और उसे जो मन में हो, करने की इजाजत दे दी. इजाजत मिलने के बाद सना ने बेटे को घर पर छोड़ा और अपना जरूरी सामान ले कर गोवा पहुंच गई. वह अपनी मुहिम बुलेट से ही शुरू करना चाहती थी. एक अकेली लड़की के लिए यह आसान नहीं था, लेकिन उस ने अपने इरादों को इतना बुलंद कर लिया था कि उस के मन में नकारात्मक सोच का कोई बीज पौध नहीं बन पाया.
वैसे भी इरादे बुलंद हों तो हौसलों को परवाज जरूर लग जाती है. सना ने 23 नवंबर, 2015 को गोवा से सभी जरूरी सुराक्षात्मक उपायों के साथ मोटरसाइकिल संभाली और देशभ्रमण पर निकल पड़ी. उस ने बुलेट पर पट्टिका लगवाई, जिस पर लिखा था ‘राइड अगेंस्ट सुसाइड डिप्रैशन’. सना स्कूल, कालेजों और इंस्टीट्यूटों में जाती हैं और वहां के प्रशासनिक अधिकारियों से इजाजत ले कर युवाओं को तनाव से निकलने के गुर सिखाने के साथसाथ जिंदगी की उस अहमियत को समझाती हैं, जिसे नकारात्मक सोच की वजह से कई बार युवा भूल जाते हैं. सना की पहचान धीरेधीरे बुलेट गर्ल के रूप में बनती जा रही है. कई राइडर्स ग्रुप से भी उस की पहचान हो चुकी है.
सना जहां भी जाती हैं, वहां युवाओं को सकारात्मकता का पाठ पढ़ाती हैं. ‘सुसाइड इज नौट सौल्यूशन’ टौपिक पर चर्चा करती हैं. 3 महीने पहले मुहिम पर निकली सना अब तक महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब राज्यों के दर्जनों शहरों में युवाओं को प्रेरित कर चुकी है. उस का कहना है कि आत्महत्या कोई समाधान नहीं है. लाइफ में कुछ भी नकारात्मक नहीं है, बस देखने का नजरिया सकारात्मक होना चाहिए. तनाव का कारण सिर्फ समस्या होता है और समस्या से छुटकारा सिर्फ समाधान से ही निकलता है. इंसान को खुश रहने की कोशिश करनी चाहिए. मुश्किलों से घिर जाने पर भी जिंदगी से हार नहीं माननी चाहिए. पूरे देश में घूम कर वह अपना यह संदेश युवाओं तक पहुंचाना चाहती है.
अभी तक वह करीब 8 हजार किलोमीटर का सफर तय कर चुकी सना को उम्मीद है कि वह 6 महीने में अपना भ्रमण पूरा कर लेगी. कथा लिखे जाने तक सना का सफर जारी था. Hindi Stories
—कथा पात्र से बातचीत पर आधारित






