Queen of Tigers: 19 साल की हो चुकी बाघिन मछली उम्र के अंतिम पड़ाव पर भले ही जीवन के लिए संघर्ष कर रही हो, लेकिन जवानी के दिनों में उस की दहाड़ से न केवल रणथंभौर अभयारण्य थर्राता था, बल्कि बड़ेबड़े विशालकाय जीव भी भाग खड़े होते थे.

उस का नाम मछली जरूर है, लेकिन वह किसी नदी या समुद्र में तैरने वाली मछली नहीं, बल्कि बाघिन है. उस के बाएं गाल पर मछली जैसा निशान होने की वजह से वन अधिकारियों ने उसे मछली नाम दिया था. करीब 19 साल की मछली राजस्थान के रणथंभौर बाघ अभयारण्य में रहती है. माना जाता है कि बाघबाघिनों के वंश में वह भारत ही नहीं, दुनिया भर की सब से ज्यादा उम्र वाली बाघिन है. मछली को लाइफटाइम अवार्ड सहित दुनिया के कई नामी पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है.

मछली रणथंभौर की रौयल बाघिन है. उसे बाघों की रानी भी कहा जाता है. वह लेडी औफ द लेक्स और मगरमच्छों की शिकारी के रूप में भी मशहूर रही है. मछली अब जीवन के आखिरी पड़ाव पर है. जवानी के दिनों में रणथंभौर अभयारण्य में मछली के अपने जलवे थे. रणथंभौर में सब से ज्यादा पर्यटक मछली को ही देखने के लिए आते थे. रणथंभौर की आर्थिक समृद्धि और राजस्थान में वन्यजीव पयर्टन बढ़ाने में मछली का सब से बड़ा योगदान रहा है. यह भी माना जाता है कि राजस्थान ही नहीं, बल्कि गुजरात और मध्य प्रदेश के अभयारण्य भी मछली के वंशजों से आबाद हैं.

मौजूदा समय में मछली की 4 पीढि़यां आसपास के अभयारण्यों में राज कर रही हैं. मछली अब दादी, पड़दादी, सगड़दादी, नानी, पड़नानी और सगड़नानी तक बन चुकी है. रणथंभौर की रानी मछली की कहानी बरसों पुरानी है. उस का जन्म सन 1997 की जुलाई में मानसून के दौरान हुआ था. रणथंभौर के वन कर्मचारियों को उसी वर्ष अक्तूबर के महीने में वह अपनी मां और 2 अन्य शावकों के साथ पहली बार जंगल में विचरण करती दिखाई दी थी. जब वह किशोर अवस्था से जवानी की दहलीज की ओर बढ़ने लगी तो पदचिन्हों के आधार पर पता चला कि वह बाघ वंश की मादा है. उस की मां के साथ जो 2 अन्य शावक थे, वे भी मादा थीं. यानी ये तीनों बहनें थीं.

आगे की कहानी पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

डिजिटल

(1 साल)
USD48USD10
सब्सक्राइब करें

डिजिटल + 12 प्रिंट मैगजीन

(1 साल)
USD100USD79
सब्सक्राइब करें

बुकलेट की सुपर डील!

(डिजिटल + 12 प्रिंट मैगजीन + बुकलेट!)
₹ 1514₹ 999
सब्सक्राइब करें
और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...