UP Crime: 20 वर्षीय अनुराधा की खता इतनी थी कि वह फोन पर अपने किसी दोस्त से बात करती थी. केवल इसी बात पर उस के बड़े भाई मनीष ने अपनी मम्मी के साथ मिल कर बहन की हत्या कर दी. यहां सोचने वाली बात यह है कि भाई चाहे किसी भी लड़की से मटरगश्ती करे, लेकिन जब उस की बहन किसी दोस्त से बात भी करे तो भाई उस का दुश्मन क्यों बन जाता है?
बात 16 नवंबर, 2025 की है. उत्तर प्रदेश के जिला बस्ती के परसाजागीर गनेशपुर निवासी मनीष ने छोटी बहन अनुराधा को फोन पर किसी अनजान युवक से बात करते देख लिया था. जिस से वह गुस्से से तमतमा गया. वह बहन पर आगबबूला हो गया. उस ने अनुराधा से कहा, ”तू फोन पर किस से बात कर रही है. यह बात करना बंद कर दे. मैं इस बारे में पहले भी तुझ से कई बार मना कर चुका हूं.’’

अनुराधा – फोन पर बात करना जान पर भारी पड़ा
तभी मनीष की मम्मी निर्मला देवी ने उलाहना दिया, ”मैं ने भी कई बार इस से बात करने से मना किया है, लेकिन यह किसी की बात सुनती ही नहीं है, बल्कि मुझ से झगड़ती है. जो मन में आए, वह करती है. यह तो पूरी तरह अपनी मरजी की मालिक हो गई है.’’
मम्मी की इन बातों ने आग में घी डालने का काम किया. इस से मनीष का पारा सातवें आसमान पर जा पहुंचा. गुस्सा करने के साथ ही वह अपना आपा खो बैठा और उस ने अनुराधा की बुरी तरह पिटाई कर दी. अत्यधिक पिटाई से अनुराधा बेहोश हो गई. इस में मम्मी ने भी मनीष का साथ दिया. तब मनीष अपनी कार की डिक्की में बेहोश अनुराधा को डाल कर रात के अंधेरे में चल दिया. रास्ते में सुनसान इलाके में उस ने अनुराधा की रस्सी से गला घोंट कर हत्या कर दी. शव को ठिकाने लगाने के लिए ममेरे भाई मुसकान को ननिहाल से अपने साथ ले लिया था.
शव को ठिकाने लगाने के लिए दोनों अयोध्या की ओर कार ले कर निकल गए, लेकिन पुलिया का निर्माण होने के कारण लौट आए. दुबौलिया-विश्वेश्वरगंज होते हुए मनीष गोंडा पहुंचा. वहां नवाबगंज में कार में पेट्रोल भरवाया. बनगांव के पास पीडी बंधा पर सुनसान जगह देख कर मनीष और मुसकान ने अनुराधा की लाश को कार की डिक्की से बाहर निकाला और उस की मौत सुनिश्चित करने के लिए मनीष ने उसे कार से कुचल कर दुर्घटना का रूप देने की कोशिश की.
अपनी सगी बहन को बेदर्दी से मारने के बाद शव को वहीं फेंक कर वे लोग मनकापुर-बभनान-गौरा मार्ग होते हए बस्ती की ओर फरार हो गए. बाद में मनीष ने ममेरे भाई मुसकान को उस के गांव छोड़ दिया और खुद अपने घर वापस आ गया. 17 नवबंर, 2025 को गोंडा पुलिस को थाना तरबगंज के अंतर्गत बनगांव के पास सिकरेटरीपुरवा और कंचनपुर के बीच पीडी बंधा पर सड़क किनारे एक अज्ञात युवती का शव मिला. इस की जानकारी बनगांव के ग्राम प्रधान मंजीत सिंह ने पुलिस को दी थी.
सूचना मिलने पर तरबगंज के एसएचओ कमलाकांत त्रिपाठी पुलिस बल सहित घटनास्थल पर पहुंच गए. घटनास्थल का गहराई से निरीक्षण किया. जिस युवती की लाश मिली थी, उस के हाथ में रस्सी बंधी थी. फील्ड यूनिट, डौग स्क्वायड और फोरैंसिक टीम को भी मौके पर बुला लिया गया. मौके से टीमों द्वारा साक्ष्य जुुटाए गए. ग्रामप्रधान की शिकायत पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया.

हत्या के बाद अनुराधा की लाश को इसी कार से ठिकाने लगाया गया था
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उस के शरीर व गले पर चोटों के कई निशान मिले तथा मृत्यु का कारण हेमोरेजिक शाक व एंटीमार्टम इंजरी पाया गया. इस पर पुलिस ने थाना तरबगंज में हत्या का मामला दर्ज कर लिया. युवती की शिनाख्त न होने और उस के बारे में कोई सुराग न मिलने पर मामले को ब्लाइंड मर्डर घोषित कर जांच तेज कर दी गई. पुलिस टीमों ने लगातार तकनीकी इनपुट खंगालने और सीसीटीवी फुटेज चैक किए.

आरोपी मनीष – बहन की हत्या का मनीष को जरा भी अफसोस नहीं हुआ
इस ब्लाइंड मर्डर के खुलासे के लिए गोंडा के एसपी विनीत जायसवाल ने तरबगंज क्षेत्र के एएसपी राधेश्याम राय के निर्देशन तथा सीओ (तरबगंज) उमेश्वर प्रभात सिंह की अध्यक्षता में एसओजी, सर्विलांस सहित 5 पुलिस टीमों का गठन कर दिया. पुलिस इस ब्लाइंड मर्डर के खुलासे के लिए 13 दिन तक जुुटी रही. उस की शिनाख्त कराने के साथ ही उस के हत्यारे की तलाश में जमीनआसमान एक कर दिया, इस के साथ ही अपने मुखबिरों को लगा दिया.
पुलिस टीमों ने लगातार टेक्निकल व मैनुअल इनपुट खंगाले और घटनास्थल के आसपास लगे कई सीसीटीवी चैक किए. पुलिस द्वारा तरबगंज और अयोध्या के सोहवल तक लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली. एक फुटेज में एक सफेद रंग की कार जरूर दिखाई दी, लेकिन नंबर स्पष्ट न होने से कार के बारे में जानकारी नहीं मिल सकी.
इस बीच पुलिस को पता चला कि जनपद बस्ती परसाजागीर गणेशपुर की एक 20-22 साल की युवती अनुराधा 13 दिन पहले लापता हो गई थी. पुलिस जांंच में पता चला कि इस संबंध में उस के फेमिली वालों ने थाने में कोई सूचना या रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई है. इस पर पुलिस गांव परसाजागीर गणेशपुर जा पहुंची. पुलिस को गांव वालों से जानकारी हुई कि मनीष की बहन अनुराधा कई दिनों से घर से गायब है. वह गांव में किसी को दिखाई नहीं दे रही है.
वहां मनीष कुमार के घर पर ताला लगा था. पुलिस ने गांव वालों से परिवारीजनों के बारे में पूछताछ की. गांव वालों ने बताया कि पिछले कई दिनों से उन के घर पर ताला लगा हुआ है. गांव के लोगों ने बताया कि 16 नवंबर के बाद से अनुराधा को नहीं देखा. ग्रामीणों ने जब अनुराधा की मम्मी निर्मला देवी से अनुराधा के बारे में पूछा तो उस ने बताया कि अनुराधा अपने मामा के घर गई हुई है. इस पर ग्रामीण संतुष्ट हो गए थे.
30 नवंबर को गोंडा पुलिस ने जब मृतका के फोटो निर्मला देवी के पड़ोसियों को दिखाए तो उन्होंने कपड़ोंं के आधार पर उस की शिनाख्त अनुराधा के रूप में की. अनुराधा की हत्या से गांव वाले सन्न रह गए. उन का कहना था कि फेमिली वाले संपन्न व प्रतिष्ठित हैं. इस के बाद पुलिस के अलावा गांव वालों को भी यही शक हो गया कि अनुराधा की हत्या किसी और ने नहीं, बल्कि उस के फेमिली वालों ने ही की है, इसलिए वे फरार हो गए. उन के फोन नंबरों के आधार पर पुलिस उन्हें तलाशने लगी.
पुलिस की यह कोशिश रंग लाई. पुलिस ने मनीष कुमार और उस की मम्मी निर्मला को बस्ती के वाल्टरगंज थाना मोड़ के पास से 30 नवंबर, 2025 को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने आरोपी से गांव से 100 किलोमीटर से अधिक दूर आने का कारण पूछा तो मनीष कोई जवाब नहीं दे सका. आरोपियों की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त बलेनो कार भी पुलिस ने बरामद कर ली.

मृतका की मम्मी और भाई की गिरफ्तारी के बाद प्रैस कौन्फ्रैंस करते अधिकारी
मांबेटे से अनुराधा के बारे में सख्ती से पूछताछ की गई तो दोनों ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया.
इस संबंध में जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार थी—
उत्तर प्रदेश के जिला बस्ती के थाना वाल्टरगंज के परसाजागीर गनेशपुर की रहने वाली 20 वर्षीय अनुराधा ग्रैजुएशन कर रही थी. उस की बड़ी बहन की शादी हो चुकी है. अनुराधा के 2 भाई मनीष कुमार और आशीष कुमार हैं. बड़ा भाई आशीष कुमार पुणे में पत्थर का काम करता है, जबकि मनीष घर पर ही रहता है. 16 नवबंर, 2025 को मनीष अपने दोस्तों के साथ गोरखपुर गया था. घर लौटने पर उस ने बहन अनुराधा को किसी अनजान लड़के से मोबाइल पर बात करते देख लिया. उस ने गुस्से से कहा, ”कितनी बार तुझे मना किया कि बात करना बंद कर दे. लेकिन समझाने के बाद भी तू मानती नहीं है.’’

निर्मला देवी: बेटी की हत्या में बेटे मनीष का साथ दिया
मनीष को शक था कि अनुराधा का चालचलन ठीक नहीं है. प्रतिष्ठित परिवार होने के कारण गांव में उन के परिवार की इज्जत थी. मनीष को यह बरदाश्त नहीं हुआ. मनीष ने उस लड़के के बारे में पूछा, जिस से वह फोन पर बातें कर रही थी. इसी बात पर मनीष की अनुराधा से बहस होने लगी. इस के बाद मनीष से उस की मम्मी निर्मला देवी ने भी अनुराधा की शिकायत की. इस से बहन के प्रति मनीष का गुस्सा और बढ़ गया. उस समय तो मनीष ने किसी तरह अपने गुस्से पर काबू कर लिया.
देर रात भी मनीष का गुस्सा शांत नहीं हुआ. मन ही मन उस के अंदर उथलपुथल मचती रही. सोचने लगा कि यदि अनुराधा ने कोई गलत कदम उठा लिया तो फेमिली वाले मुंह दिखाने लायक नहीं रहेंगे, क्योंकि उन के परिवार की गांव में बड़ी प्रतिष्ठा थी. मनीष ने अनुराधा से जब उस का मोबाइल मांगा तो उस ने मोबाइल फोन देने से साफ इंकार कर दिया. इसी बात को ले कर रात में मनीष का अनुराधा से फिर झगड़ा हुआ. तभी मनीष ने अनुराधा के हाथ से मोबाइल छीन कर तोड़ दिया.
इस पर अनुराधा भाई मनीष पर बिफर पड़ी. दोनों में एक बार फिर तकरार होने लगी. बात बढ़ गई और मनीष ने अनुराधा की बुरी तरह पिटाई कर दी. ज्यादा पिटाई के चलते अनुराधा बेहोश हो गई. तब बिना आगापीछा सोचे मनीष ने एक खतरनाक निर्णय ले लिया. उस ने अनुराधा को जान से मारने का प्लान बनाया ताकि न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी. फिर मनीष ने अपनी मम्मी निर्मला देवी से रस्सी मंगा कर मम्मी के साथ मिल कर बहन के हाथपैर रस्सी से बांध दिए. इस के बाद अनुराधा को बोरे में भर कर अपनी कार की डिक्की में डाल दिया. मम्मी को साथ ले कर मनीष अपने मामा के घर की ओर चल पड़ा. मनीष के मामा का गांव थाना दुबौलिया क्षेत्र में था.
मामा के गांव पहुंचने से पहले एक सुनसान जगह पर कार रोक कर मनीष ने रस्सी से अनुराधा का गला घोंट दिया. फिर मम्मी को मामा के घर छोड़ कर ममेरे भाई मुसकान को कार में साथ ले कर अकबरपुर टांडा की तरफ निकल पड़ा और तरबगंज के पीडी बांध मार्ग पर अनुराधा के शव को डिक्की से निकाल कर सड़क पर फेंका, फिर कार से कुचल दिया. मनकापुर-बभनान-गौरा होते हुए घर लौट गया.
बहन की हत्या का उसे कोई अफसोस नहीं था. पुलिस ने अनुराधा की हत्यारी मां निर्मला देवी व सगे भाई मनीष को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया. तीसरे आरोपी मनीष के ममेरे भाई मुसकान की गिरफ्तारी के लिए कई जगहों पर दबिश डाली गई, लेकिन वह पुलिस के हाथ नहीं लगा.

पुलिस हिरासत में आरोपी
इस ब्लाइंड मर्डर केस का परदाफाश कर आरोपी मनीष व उस की मां को गिरफ्तार करने वाली टीम में इंसपेक्टर (तरबगंज) कमलाकांत त्रिपाठी, एसओजी प्रभारी गौरव सिंह, एडिशनल इंसपेक्टर थाना तरबगंज राजकुमार यादव, एसआई उपेंद्र यादव, एसओजी के रणवीर, अरुण यादव, राकेश सिंह, राशिद अली, अमित पाठक, इमरान अली, कांस्टेबल अंकित राय प्रमोद वर्मा व शशिबाला शामिल थे. एसपी (गोंडा) विनीत जायसवाल ने इस ब्लाइंड मर्डर का परदाफाश करने गिरफ्तार करने वाली पुलिस टीम तथा एसओजी टीम को 25 हजार रुपए का पुरस्कार भी दिया है.
अपनी बहन का गला घोंटते समय भाई को जरा भी मलाल नहीं हुआ. वह जल्लाद बन गया. मनीष और उस की मम्मी ने यह भी पता करने की कोशिश नहीं की कि अनुराधा किस युवक से बात करती है और वह युवक कौन है? अपनी कोख से जन्म देने वाली निर्मला ने भी उस की हत्या में अहम भूमिका निभाई, यदि वह चाहती तो अनुराधा की जान बच सकती थी. प्रश्न उठता है कि कब तक लोग कानून को अपने हाथ में लेते रहेंगे? कब तक निर्दोष लोग इस प्रकार अपनी जान से हाथ धोते रहेंगे? गांव के बुजुर्गों का कहना है कि मोबाइल कल्चर इस के लिए जिम्मेदार है, जिस ने एक हंसतेखेलते परिवार को उजाड़ दिया. UP Crime






