UP Crime: शिवानी निषाद की शादी देवरिया के युवक से हो जरूर गई थी, लेकिन वह किसी भी कीमत पर अपने प्रेमी विनय उर्फ दीपक निषाद को छोडऩा नहीं चाहती थी. विनय ने उसे लाख समझाया, लेकिन वह प्रेमी के साथ रहने की जिद पर अड़ी थी. एक दिन प्रेमी पर हक जमाना शिवानी को इतना भारी पड़ा कि…
अपनी प्रेमिका शिवानी की जिद से विनय उर्फ दीपक निषाद डर चुका था. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि उसे शिवानी से कैसे निबटा जाए? जिस तरह से वह अपनी जिद पर अड़ी हुई थी, सचमुच उस के गले की हड्डी बन गई थी, जो न तो निगली जा रही थी और न ही उगली ही जा रही थी. इसी उहापोह में उस ने शिवानी से निबटने के लिए एक खतरनाक रास्ता अख्तियार करने के लिए अपना मन मजबूत कर लिया था.
शिवानी उसे पहले ही बता चुकी थी कि वह 23 नवंबर, 2025 को अपनी चचेरी बहन की शादी में शामिल होने के लिए ससुराल से आ रही है. वह हमेशाहमेशा के लिए ससुराल छोड़ कर मायके रहने के लिए आ रही है. विनय के दिमाग में तभी एक खतरनाक प्लान ने जन्म ले लिया. काफी सोचविचार कर उस ने इसी मौके पर प्रेमिका शिवानी को मौत के घाट उतारने का प्लान बनाया. खतरनाक प्लान बना कर वह मन ही मन बहुत खुश हो रहा था.
शादी से 3 दिन पहले यानी 21 नवंबर, 2025 को देवरिया में स्थित अपनी ससुराल से शिवानी चचेरी बहन की शादी में शरीक होने के लिए रसूलपुर अपने मायके पति के साथ आई. ससुराल के बाकी सदस्य शादी वाले दिन आने वाले थे. वह बहुत खुश थी. उस के खुश होने का सब से बड़ा कारण शादी में शरीक होना नहीं था, बल्कि वह इसलिए खुश हो रही थी कि उस का मिलन उस के प्रेमी विनय से होने वाला था, क्योंकि प्रेमी ने उसे वचन दिया था कि वह उसे हमेशा के लिए अपना लेगा. यही सोचसोच कर वह खुश हो रही थी.
23 नवंबर, 2025 की रात 8 बजे रसूलपुर गांव से 500 मीटर दूर शादी का कार्यक्रम था. कार्यक्रमस्थल पर सुबह से ही फेमिली वालों के आनेजाने का सिलसिला जारी था. घर वाले बेहद खुश थे. नियत समय पर रात में बारात दरवाजे पर लग गई थी. रात 10 बजे जयमाल का कार्यक्रम शुरू हो गया था. घर के सदस्य और नातेरिश्तेदार कार्यक्रम का लुत्फ उठा रहे थे. शिवानी भी वहां मौजूद थी और बेहद खुश नजर आ रही थी.

शिवानी निषादः विवाह हो जाने के बाद भी विनय के साथ रहने की जिद कर रही थी
उसी समय उस की नजर बाहर दरवाजे की ओर पड़ी तो उस की खुशियों का ठिकाना नहीं रहा. बाहर दरवाजे पर प्रेमी विनय खड़ा उसे ही देख रहा था और इशारा कर उसे अपने पास बुला रहा था. उसे देख कर ही इशारे से शिवानी ने कहा कि थोड़ी देर रुक जाओ, जयमाला देख लूं, फिर आ रही हूं. विनय ने आंखें तरेर कर उसे तुरंत अपने पास आने का इशारा किया तो शिवानी न चाहते हुए भी उस से मिलने उस की ओर हो ली. विनय नजरें बचाते हुए वहां से शिवानी को ले कर उस के ही घर की ओर बढा. इतनी सफाई से दोनों वहां से घर की ओर निकले थे कि वहां से जाते हुए उन्हें किसी ने भी नहीं देखा.
विनय यही चाहता भी था कि उसे वहां से जाते हुए कोई न देख पाए और उस ने प्रेमिका शिवानी को मारने का जो फुलप्रूफ प्लान बनाया है, वह शतप्रतिशत कामयाब हो जाए. सब कुछ उस के प्लान के अनुसार चल रहा था. शिवानी नहीं जानती थी कि जिसे वह सच्चे दिल से प्यार करती है, वही फरेबी आशिक उस के जीवन का दीया बुझाने जा रहा है. उस के खतरनाक इरादों की उसे तनिक भी भनक होती तो वह उस के साथ कतई नहीं जाती. लेकिन वह तो ये सोच कर खुश हो रही थी कि जैसेतैसे कर के प्रेमी को अपने प्यार के तराजू पर तौल कर साथ रखने को मना ही लेगी, उसे पीछे हटने नहीं देगी.
रात लगभग साढ़े 10 बजे विनय शिवानी को ले कर उस के घर के वाशरूम में पहुंचा, क्योंकि घर के बाकी सभी कमरों पर ताला जड़ा हुआ था, इसलिए उन्हें वाशरूम का चुनाव करना पड़ा था. खैर, कुछ देर वहां गहरी खामोश छाई रही, फिर शिवानी ने ही खामोशी तोड़ी, ”बताओ, तुम मुझे यहां क्यों ले कर आए हो?’’
”मैं तुम से खुल कर बात नहीं कर पा रहा था, जब से ससुराल से लौट कर आई हो.’’
”अच्छा, इतना मिस कर रहे थे मुझे. तो फिर फोन पर तो न जाने कैसीकैसी बातें कर रहे थे. लगता है मुझे खोने का एहसास हो गया है जनाब को.’’
”कुछ ऐसा ही सोच लो. मेरे दिल में तुम्हारे लिए जो प्यार है, इस जनम में तो क्या, जनमजनम तक कभी कम नहीं होगा. मैं भी तुम्हारे लिए उतना ही तड़पा हूं, जितना तुम मेरे लिए विरह की आग में जली हो.’’ शातिर विनय ने भावनाओं के तरकश से तीर निशाने पर लगाया. उस का निशाना ठीक जगह पर लगा था. वह आगे बोला, ”रियली मुझे अब अपने किए का बहुत पछतावा हो रहा है. सच कहूं तो मैं सचमुच कायर था, बुजदिल था, डरपोक था, जो तुम जैसी महबूबा के सच्चे प्यार को नहीं समझ सका. तुम्हारी सच्ची भावनाओं की कद्र नहीं कर सका. हो सके तो मुझे माफ कर देना शिवानी. आज के बाद तुम्हें कभी दुख नहीं होने दूंगा, तुम्हें इतना प्यार दूंगा कि बीते दिनों के जख्मों को भुला दोगी.’’
”सुबह का भूला शाम को घर लौट आए तो उसे भूला नहीं कहते. आप को अपनी शिवानी की याद आई, उस का प्यार याद आया तो समझो कि मेरे सारे गिलेशिकवे मिट गए. अब दोनों मिल कर साथ रहेंगे और साथ जीएंगे भी, जमाना चाहे जो भी सोचे. हम दो जिस्म, एक जान थे, जान हैं और जान रहेंगे. हमें कोई अलग नहीं कर सकता.’’ शिवानी बोली.
शिवानी की बात सुन कर विनय के जिस्म में आग लग गई. वह उस से छुटकारा पाने के लिए पापड़ बेल रहा था और शिवानी थी कि उसे ले कर भविष्य की योजनाएं बना रही थी. तभी विनय ने अपने तरकश से भावनाओं का एक तीर निकाला और चलाते हुए बोला, ”आई लव यू मेरी जान. सच कहा तुम ने, हमें एकदूसरे से कोई जुदा नहीं कर सकता. हम 2 जिस्म एक जान हैं.’’ कह कर विनय ने शिवानी का माथा चूमा और उसे सीने से आलिंगनबद्ध किया तो वह भी अपना प्यार लुटाने के लिए उस में समा गई और उसे प्यार करने लगी.

विनय इसी समय का इंतजार कर रहा था. शातिर विनय ने उसी समय अपनी कमर में खोंस रखा धारदार हंसिया निकाला और शिवानी की गरदन पर चला दिया. अचानक हुए हमले से शिवानी घबरा गई और उस की मजबूत पकड़ से दूर हो कर जान बचाने के लिए पीछे की तरफ भागी. आशिक से शैतान बना विनय उस पर शेर के मानिंद टूट पड़ा. दोनों के बीच में गुत्थमगुत्थी हो गई.
शिवानी विनय के चंगुल से खुद को आजाद कराने के लिए संघर्ष करती रही, लेकिन उस के वार से बच नहीं पाई और अपने ही खून से सनी शिवानी धीरेधीरे ठंडी पड़ती गई. जब उस ने उसे हिलाडुला कर देखा तो उस के शरीर में कोई हरकत होती नहीं दिखी तो वह समझ गया कि ये मर चुकी है. फिर उस ने वाशरूम में पड़े कपड़ों से खून से सना हंसिया साफ किया और बाल्टी में भरे पानी से अपना हाथमुंह धो कर अपने घर लौट गया और इत्मीनान से सो गया. घटनास्थल से 200 मीटर दूर उस का घर था. हंसिया उस ने बीच रास्ते की झाडिय़ों में छिपा दिया था.
शिवानी को शादी मंडप से निकले घंटों बीत चुके थे, उस की मम्मी नोहरी देवी बेटी को काफी देर से ढूढ रही थी. वह स्टेज से उतरने के बाद से दिखाई नहीं दे रही थी तो नोहरी देवी घर के सभी सदस्यों से उस के बारे में पूछ चुकी थी. किसी ने भी उस के बारे में ठीक से जवाब नहीं दिया, सभी यही कहते रहे कि काफी देर से वह यहां दिखाई नहीं दे रही है. शादी स्थल पर बेटी को न पा कर नोहरी देवी बुरी तरह परेशान हो गई थीं. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि इतनी रात में वह कहां जा सकती है?
पता नहीं क्यों नोहरी देवी का मन बेटी को ले कर बुरी तरह घबरा रहा था. अचानक मन में खयाल आया कि कहीं ऐसा तो नहीं कि वह आराम करने के लिए घर चली गई हो. घर पर भी जा कर देख लेते हैं. यह सोच वह घर के लिए चल दीं. घर पर सभी कमरों पर ताला जड़ा हुआ था. यह देख कर उस का मन किसी अनहोनी से भर गया और वह बुरी तरह परेशान हो गई. फिर बेटी को तलाशते हुए नोहरी देवी गुसलखाने में पहुंची तो वहां का नजारा देख कर वह बुरी तरह चीख पड़ीं. शिवानी खून में सनी मरी पड़ी थी. उलटे पांव दौड़ती हुई नोहरा देवी शादी के मंडप में पहुंची, जहां शादी हो रही थी. सभी को उस ने शिवानी की हत्या की खबर दी.
फिर क्या था? पलभर में यह खबर पूरे गांव में फैल गई और शादी का कार्यक्रम बीच में छोड़ कर सभी लोग घटनास्थल पर पहुंच गए. शादी के घर में खुशियों की जगह मातम छा गया था. घर में रोनापीटना शुरू हो गया. किसी की समझ में नहीं आ रहा था कि यह काम किस ने और क्यों किया? उसी रात घटना की सूचना ग्राम प्रधान शिवकरन ने थाना झंगहा को दी. सूचना मिलते ही पुलिस टीम घटनास्थल की तरफ रवाना हो गई थी. उस समय रात के करीब 4 बज रहे थे. पुलिस टीम के पहुंचने के बाद मौके पर डौग स्क्वायड और फोरैंसिक टीम भी पहुंच गई थी.

पत्नी शिवानी की दुखद मृत्यु से आक्रोशित भीम निषाद
पुलिस घटना की जांच कर रही थी. घटनास्थल को देख कर पुलिस ने अनुमान लगाया कि मृतका अपनी जान बचाने के लिए कातिल से भिड़ गई होगी, क्योंकि मौके पर संघर्ष के संकेत मिले. खोजी कुत्ते को घटनास्थल सुंघा कर छोड़ दिया तो वह सूंघ कर घर के पीछे 200 मीटर दूर स्थित विनय के घर पहुंचा और वहां रुक कर भौंकने लगा. यह क्रिया 3 बार की गई. डौग ने तीनों बार यही क्रिया दोहराई. पुलिस को समझने में देर नहीं लगी कि इस घर के किसी सदस्य का घटना में हाथ हो सकता है. इस बारे में पुलिस ने मृतका के घर वालों से जानकारी ली तो पता चला कि गांव के विनय उर्फ दीपक निषाद और शिवानी के बीच में कई सालों से प्रेम संबंध चल रहा था.

शिवानी के मायके का वाशरूम जिस में उस के प्रेमी ने उस की जान ले ली
इस की जानकारी जब लड़की के घर वालों को हुई, तब दोनों के परिवार वाले खिलाफ हो गए थे. इसे ले कर दोनों परिवारों के बीच काफी झगड़ा भी हुआ था. बाद में शिवानी की शादी उस के पेरेंट्स ने देवरिया में कर दी थी. शादी के बाद भी विनय शिवानी से फोन पर बात करता था और उसे परेशान करता था. पुलिस के लिए इस क्लू ने अंधेरे में रोशनी की तरह काम कर गया. उस के बाद पुलिस ने शिवानी के फोन की कौल डिटेल्स निकलवाई और उस का अध्ययन किया तो घटना वाली रात शिवानी के फोन पर विनय के नंबर से कौल आई थी.
इस के अलावा शादी की हो रही वीडियो रिकौर्डिंग की जांच की गई तो जयमाला के समय जब सारे लोग कार्यक्रम देखने में बिजी थे, तब शिवानी स्टेज से उतर कर विनय के साथ जाती हुई कैमरे में रिकौर्ड हो गई थी. फिर क्या था? पुलिस के लिए यह फुटेज कातिल तक पहुंचने में मददगार साबित हुई. इसी साक्ष्य के आधार पर पुलिस ने 25 नवंबर, 2025 की रात विनय को उस के घर से दबोच लिया. उस से गहन पूछताछ की गई तो वह पुलिस के सामने टूट गया और अपना जुर्म कुबूल कर लिया.
विनय ने पूरी घटना पुलिस को बता दी. उस के बाद पुलिस ने उसे कोर्ट में पेश कर बिछिया मंडलीय जेल भेज दिया. इस के पहले मृतका की मम्मी नोहरी देवी की तहरीर पर पुलिस ने बीएनएस की धारा 103(1) के तहत विनय उर्फ दीपक निषाद के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया था. आरोपी विनय से पूछताछ के बाद शिवानी के मर्डर की जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार निकली—
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर दक्षिण में स्थित है थाना झंगहा. इसी थानाक्षेत्र के जंगल रसूलपुर नंबर-2 स्थित लक्ष्मीपुर गांव पड़ता है. इसी गांव में नोहरी देवी अपने 4 सदस्यों वाले परिवार के साथ रहती थी. पति की सालों पहले स्वाभाविक मौत हो चुकी थी. पति की मौत के बाद परिवार की जिम्मेदारी नोहरी देवी के कंधों पर आ गई थी. अपनी दिनरात की मेहनत से बच्चों की परवरिश में उस ने कोई कमी आने नहीं दी थी.
नोहरी की 2 बेटियां थीं सुमन और शिवानी. इन में शिवानी छोटी थी. वह सुंदर, चंचल और हंसमुख थी. हर किसी की बातों का मुसकरा कर जबाव देती थी. उस के इसी अंदाज के सभी कायल थे. जैसेजैसे वह सयानी होती गई, आवारा भौंरे उस की ओर आकर्षित होने लगे. उन्हीं भौरों में विनय उर्फ दीपक निषाद का था, जो उस के पड़ोस में रहता था. सुदर शिवानी नैनों के रास्ते उस के दिल में उतर गई थी. उस ने उसे अपने दिल की कोठरी में कैद कर लिया था. आलम यह था कि उसे बिना देखे रह नहीं पाता था. दिन का चैन और रातों की नींद गंवा चुका था वह. उठते, बैठते, सोते और जागते हर घड़ी उसे अपनी आंखों के सामने देखना चाहता था.
मोहब्बत की यह आग विनय के सीने में ही नहीं लगी थी. यह आग तो शिवानी के अंदर भी धधक रही थी. ऐसा नहीं था कि वह विनय की आशिकी से अंजान और बेपरवाह थी, बल्कि उस की हर हरकत पर अपनी नजरें गड़ाए हुई थी. वह भी चाहती थी कि वह पलभर के लिए भी उस की निगाहों से दूर न जाए. विनय से कहीं ज्यादा तड़पन शिवानी के दिल में थी. अपने कोरे दिल पर मोहब्बत की स्याही से उस ने विनय का नाम लिख लिया था.
दोनों दिलों में मोहब्बत की आग बराबर लगी हुई थी. समय देख कर विनय और शिवानी ने एकदूसरे से अपने प्यार का इजहार कर दिया था. प्यार का इजहार करने के बाद दोनों मिल कर भविष्य के सपनों में खो गए थे. यह करीब 2 साल पहले की बात थी. धीरेधीरे 2 साल बीत गए थे. अपने प्यार को दोनों छिपा कर रखे थे. उन का प्यार अब परदों के पीछे और छिपा नहीं रह सकता था, क्योंकि फिजा में तैरती हुई यह खबर शिवानी के फेमिली वालों तक पहुंची तो उन के पैरों तले जमीन खिसक गई.
नोहरी देवी ने आव देखा न ताव शिवानी पर टूट पड़ी, ”करमजली, इसी दिन के लिए तुझे पालपोस कर बड़ा किया था कि परिवार का नाम मिट्टी में मिला दो.’’
”मम्मी, मुझे बताओ तो सही मैं ने क्या किया है? क्यों मुझ पर गुस्सा कर रही हो?’’ शिवानी ने सवाल किया.
”पूछती है मैं ने किया क्या है? तू तो ऐसे बन रही है जैसे तुझे अपनी करतूतों का ज्ञान ही नहीं है?’’
”सच मम्मी, मुझे नहीं पता कि आप मेरे से क्यों गुस्सा हो? आखिर मैं ने किया क्या है?’’
”तुझे सच में पता नहीं है, तूने क्या किया है? उस विनय के साथ तेरा क्या रिश्ता है? कब से तेरा उस के साथ चक्कर चल रहा है? देख, तू सचसच बता दे कि तूने कोई ऐसीवैसी हरकत तो नहीं की है जिस से हमें समाज में मुंह छिपाना पड़े?’’
”नहीं…नहीं मम्मी, तुम्हारी कसम, मैं ने कोई ऐसा कदम नहीं उठाया है, जिस से घर की बदनामी हो. मैं सच कहती हूं, पापा की कसम.’’ शिवानी ने कसम खाई.
”देख शिवानी, तू झूठ बोल रही है या नहीं, ये तो तू ही जानती है, लेकिन यदि मुझे पता चला कि तूने उस करमजले के साथ कुछ ऐसीवैसी नीच हरकत की है तो जान ले, तुझे जान से मार दूंगी.’’ नोहरी देवी ने शिवानी को धमकाया.

घटनास्थल की जांच करता डौग स्क्वायड
”नहीं मम्मी, मैं ने कोई नीच हरकत नहीं की है. मैं जानती हूं एक बार इज्जत चली जाने पर फिर दोबारा वापस नहीं लौटती है, फिर मैं ऐसी नीच हरकत क्यों करूंगी.’’ शिवानी ने मम्मी को सफाई दी.
”आज से तेरा घर से बाहर निकलना बंद. घर में पड़ी रह चुपचाप. देखती हूं कैसे इश्क लडाती है अपने यार से. उस की भी खबर लेती हूं मैं.’’
नोहरी देवी का गुस्से से चेहरा ऐसा तमतमाया हुआ था, जैसे बेटी को जिंदा खा जाएगी. उसी हाल में वह विनय के घर जा पहुंची और उस के फेमिली वालों से खूब झगड़ी. उन्हें धमकाते हुए कहा, ”अपने बेटे को समझा दो, मेरी बेटी से दूर रहे. इज्जत से न खेेले, वरना इस का अंजाम बहुत बुरा हो सकता है. यह मत समझना कि मेरा आदमी (पति) नहीं है तो जो चाहे हमारी इज्जत से खेल लेगा, बोटीबोटी काट डालूंगी, समझे. फिर से कहती हूं अपने बेटे को समझा देना, जाती हूं.’’
नोहरी देवी का रौद्र रूप देख कर विनय के फेमिली वालों का पसीना छूट गया था. बेटे की हरकतों से वे बुरी तरह शर्मिंदा थे. चूंकि खोट उन के बेटे में थी, इसलिए वे चुपचाप नोहरी देवी की जलीकटी सुनते रहे, एक बोल उन के मुंह से नहीं फूटा था और सारा गुस्सा विनय पर उतार दिया था. विनय के फेमिली वालों ने उसे समझाया, ”देख बेटा, तुम जिस काम में लगे हो उसे मन लगा कर पूरा करो. अच्छी नौकरी होते ही दरवाजे पर लड़कियों की लाइन लग जाएगी या तुम जिस लड़की से शादी करने को कहोगे, उसी से तुम्हारा ब्याह करा दूंगा, लेकिन तुम अपने भविष्य पर ध्यान दो.’’
फेमिली वालों की बात सुन कर वह एकदम चुप रहा, कुछ नहीं बोला. उस वक्त वह यही सोच रहा था कि आखिर शिवानी की मम्मी को हमारे प्यार के बारे में कैसे पता चला? हम शिवानी के बिना जिंदा नहीं रह पाएंगे. उस के बिना मर जाएंगे. इधर यही हाल शिवानी का था. वह विनय के अलावा किसी और के बारे में सोच भी नहीं सकती थी. जबकि उस की मम्मी तेजी से उस की शादी के लिए लड़का ढूंढने लगी थी और जल्द ही लड़का भी मिल गया.
8 मई, 2025 को देवरिया के रहने वाले भीम निषाद के साथ बेटी के हाथ पीले कर दिए. शिवानी ने अपनी हर ख्वाहिशों को अपने सीने में दफन कर के भीम के साथ शादी तो कर ली, लेकिन उसे दिल से पति नहीं माना. जिंदा लाश के समान वह खुद को तो पति के सामने बिस्तर पर बिछ जाती थी, लेकिन उस का सुख उसे पता नहीं चलता था. सिसकसिसक कर उस के दिन कटते रहे और वह ससुराल वालों से चोरीछिपे दिन में एक बार फोन पर विनय से बात जरूर कर लेती थी तो उस का मन थोड़ा हलका हो जाता था.
शिवानी का ब्याह हो जाने से विनय उस से काफी नाराज हो गया था और उसे अब दूसरे की जूठन समझने लगा था. वह उस से धीरेधीरे दूरियां बढ़ाने लगा था. यह बात शिवानी जान चुकी थी कि विनय अब उस से दूर भाग रहा है, लेकिन वह उसे इतनी आसानी से छोडऩे वाली नहीं थी. बारबार वह फोन कर के उसे अपना कसम और वायदे याद दिलाती थी. गोरखपुर जिले के रसूलपुर गांव के रहने वाले रामवचन निषाद के तीनों बेटों में 25 वर्षीय विनय उर्फ दीपक निषाद काफी होशियार था.
जब किसी पुलिसकर्मी को वरदी में देखता तो उस का रोमरोम खिल उठता था. वह भी पुलिस विभाग में नौकरी करना चाहता था, इसीलिए वह अपने ऊपर यानी अपने शरीर पर खास ध्यान रखता था. वह जिम में खूब वर्जिश करता था. यह सब तो अलग था. लेकिन वह पिछले 6 महीने से काफी परेशान रह रहा था. उस की परेशानी का नाम था शिवानी निषाद, जो उस की प्रेमिका थी और पड़ोसन भी थी. दोनों के बीच करीब साढ़े 3 साल से प्रेम संबंध कायम था. हालांकि शिवानी के घर वालों ने उस की शादी देवरिया में कर दी थी, लेकिन इस के बावजूद दोनों के प्रेम संबंध चल रहे थे.
शिवानी विनय से बेइंतहा मोहब्बत करती थी. उस ने कसम भी खाई थी कि विनय के अलावा कोई और पुरुष उस के जीवन का हिस्सा नहीं बन सकता, अगर फेमिली वालों के दबाव में वह पति बन भी गया तो उसे वह अधिकार नहीं देगी जो उसे मिलना चाहिए. विनय ही उस का सब कुछ था, है और सब कुछ रहेगा. इसलिए वह उसे अकसर फोन करती थी. यही नहीं, उस पर शादी करने और साथ रहने के लिए दबाव भी बनाते हुए कहा, ”विनय, तुम यूं मुझ से आसानी से पीछा नहीं छुड़ा सकते. मेरे जीते जी तो कतई नहीं. प्यार किया है मैं ने तुम से… फिर मुझ से अपना पीछा क्यों छुड़ा रहे हो.’’
”यार शिवानी, एक बात कहना चाहता हूं मैं तुम से…’’ विनय ने भी समझाते हुए आगे कहा, ”तुम्हारी शादी हो चुकी है, मुझ से ज्यादा प्यार करने वाला तुम्हारा पति है, सासससुर हैं, घरपरिवार है, सब कुछ तो है तुम्हारे पास, फिर मुझ बेचारे को क्यों परेशान किए जा रही हो. मेरी बात मानो, अपनी गृहस्थी पर ध्यान दो, परिवार पर ध्यान दो. मेरी दुआएं तुम्हारे साथ हमेशा हैं.
”रही बात प्यार करने की तो मैं तुम्हें बता दूं कि मैं तुम से कितना प्यार करता हूं, यह मैं तुम से बता नहीं सकता. जीते जी तो मैं तुम्हें अपने दिल से जुदा नहीं कर सकता. बस यही कहना चाहता हूं तुम से.’’
”कितनी आसानी से यह बात कह दी कि मैं तुम्हें परेशान करती हूं. मेरे पास पति है, घर परिवार है. है तो, लेकिन तुम नहीं हो न मेरे पास. मैं ने अपनी मरजी से यह शादी थोड़े ही न की थी. घर वालों ने जोरजबरदस्ती से मेरी शादी कराई थी. इस में मेरी क्या गलती है, तुम ही बताओ कि कहां गलत हूं मैं?’’

मृतका शिवानी निषाद की मम्मी नोहरी देवी
”दोष तो मैं तुम्हें दे ही नहीं रहा. बस यही समझाने की कोशिश कर रहा हूं कि तुम्हारी शादी हो चुकी है. अच्छा घरपरिवार भी मिला हैं. क्यों अपनी बसीबसाई गृहस्थी में अपने ही हाथों से आग लगा रही हो. क्यों नहीं ख्वाब समझ कर पिछली बातों को भूल जाती हो?’’
”भूल तुम सकते हो, मैं नहीं.’’ शिवानी गुस्सा हो गई, ”मेरा प्यार कोई गुड्ïडेगुडिय़ा का खेल नहीं था, जिसे जब चाहा प्यार किया, जब चाहा भुला दिया. मेरा प्यार कोई मजाक भी नहीं था कि जब चाहा दिल लगाया, जब चाहा रेत के घरौंदे की तरह तोडफ़ोड़ डाला.
”कहे देती हूं जो तुम मुझ से पीछा छुड़ा कर भागने की कोशिश कर रहे हो न, मैं तुम्हारी मंशा को समझ चुकी हूं. और ऐसा होने नहीं दूंगी मैं. किसी कीमत पर नहीं होने दूंगी. इसे अपने दिलोदिमाग में गांठ बांध लीजिएगा.’’
”क्यों खामख्वाह लालपीली हो रही हो यार. तुम से कहां भाग रहा हूं मैं और भाग कर जाऊंगा कहां? रहूंगा इसी धरती पर. बिलावजह उलझ रही हो मुझ से.’’

पुलिस हिरासत में आरोपी विवेक निषाद
”तुम भी इतना समझ लो कि अपने प्यार को पाने के लिए शिद्ïदत तक लड़ूंगी? लेकिन मैं तुम्हारा साथ नहीं छोड़ूंगी. इतने बुजदिल और कायर निकलोगे तुम, अगर पहले जानती तो तुम से कभी दिल न लगाती.’’
जोर से फोन पर विनय चिल्लाया, ”मैं कायर नहीं हूं शिवानी. मैं न तो कायर हूं, न डरपोक हूं और न ही बुजदिल. तुम मेरी परेशानियों को समझ नहीं रही हो. यार, क्यों अपना घर उजाडऩे पर तुली हुई हो? मेरे समझाने का कोई फायदा नहीं है क्या?’’
”नहीं, मुझे कुछ समझना नहीं है, मैं ने तय किया है मुझे तो बस तुम्हारे साथ रहना है. इसे मेरी जिद कह लो या जोरजबरदस्ती. इस के अलावा मैं कुछ नहीं जानती. इसी नवंबर में मेरी चचेरी बहन की शादी है, मैं उस में आ रही हूं. फिर लौट कर ससुराल नहीं जाऊंगी. तुम्हारे ही साथ रहूंगी, यह मैं ने फैसला कर लिया है.’’
इतना सुनते ही विनय ने कौल डिसकनेक्ट कर दी. प्रेमिका शिवानी निषाद की बातों को ले कर विनय काफी परेशान रह रहा था. उस की बातें सोचसोच कर उस के दिन का चैन और रात की नींद उड़ चुकी थी. वह सोच रहा था कि कहीं सचमुच ही शिवानी अपनी ससुराल छोड़ कर साथ रहने आ गई तो उस की इज्जत मटियामेट हो जाएगी. गांवसमाज को वह क्या मुंह दिखाएगा. फेमिली वालों को क्या जबाव देगा. उस के करिअर का क्या होगा?
इस से पहले कि वह कोई ऐसावैसा कदम उठाए, उस का काम तमाम करना होगा. उस से पीछा छुड़ाने के लिए उस ने मन बना लिया था. इस के लिए वह किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार हो गया था. आखिर में वही हुआ, जो विनय ने तय किया था. शिवानी से पीछा छुड़ाने के लिए उस ने उसे मौत के घाट उतार दिया और जेल के सलाखों के पीछे जा पहुंचा. विनय उर्फ दीपक निषाद जेल में बंद था. उस की निशानदेही पर पुलिस ने झाड़ी में छिपा कर रखा गया हंसिया बरामद कर लिया था. UP Crime






