True Crime Story: एक साधारण परिवार की सरिता नायर ने अपनी महत्वाकांक्षाओं की खातिर बड़ेबड़े लोगों तक पहुंच बनाई. यहां तक कि केरल के मुख्यमंत्री ओमन चांडी भी उस की पहुंच से परे नहीं थे. लेकिन इस सब से सरिता नायर को जिल्लत की जिंदगी के अलावा क्या मिला?
कहानी शुरू होती है 1994 से. केरल प्रांत के चेनगन्नूर के शिक्षा विभाग कार्यालय परिसर में एक आयोजन किया जा रहा था, जिस में इस जिले के एक छोटे से गांव की एक लड़की को सम्मानित किया जाना था. उस लड़की की खूबी यह थी कि वह 10वीं क्लास में गांव के स्कूल में अव्वल आई थी और उस का नाम जिले के टौप 10 बच्चों की सूची में था. उस लड़की के साथ एक बड़ी त्रासदी यह हुई थी कि परीक्षा शुरू होने से 2 दिन पहले अचानक उस के पिता का देहांत हो गया था, हालांकि उस दिन सुबह तक वह पूरी तरह स्वस्थ थे.
पिता की मौत उस लड़की के लिए किसी बड़े हादसे से कम नहीं थी. फिर भी उस ने हौसला बरकरार रखते हुए परीक्षाएं दे कर एक मिसाल कायम की थी. इस परीक्षा में उस ने 600 में से 538 (करीब 90 प्रतिशत) अंक हासिल किए थे. उस क्षेत्र में यह एक कीर्तिमान था. उन दिनों बोर्ड की परीक्षा में इतने अंक हासिल करना किसी आश्चर्य से कम नहीं था. वैसे भी उस लड़की ने विपरीत परिस्थिति में परीक्षा दी थी. शिक्षा विभाग के इस आयोजन में कांग्रेस विधायक सोभना जौर्ज मुख्य अतिथि के रूप में पधारे थे. उन्होंने अपने अभिभाषण में उस लड़की की प्रशंसा करते हुए अन्य विद्यार्थियों को उस से प्रेरणा लेने को कहा था.
वह बच्ची को अपनी जेब से नकद पुरस्कार देने को भी बेताब थे, लेकिन लड़की ने पैसा लेने से इनकार करते हुए कहा था कि उसे केवल बड़ों का आशीर्वाद चाहिए, यही उस के लिए सब से बड़ा पुरस्कार होगा. इस बात पर उस की बहुत सराहना हुई थी. इस की वजह यह थी कि उस का संबंध एक गरीब परिवार से था. वह नायर सर्विस सोसायटी के एक छोटे से फ्लैट में रहती थी. उस के पिता सोमाशेखरन नायर इस सोसायटी के औफिस में क्लर्क थे. यहां से मिलने वाली साधारण सी तनख्वाह से वह जैसेतैसे घर का खर्च चलाते थे. लड़की के परिवार में एक छोटी बहन और मां इंदिरा नायर थीं.
पति की मौत के कुछ दिनों बाद इंदिरा ने परिवार की गुजरबसर करने के लिए स्कूली बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने के अलावा एक प्राइवेट फाइनैंस कंपनी में एकाउंटैंट की नौकरी कर ली थी. दुनिया में 2 बेटियों के अलावा उन का अपना कोई नहीं था. उन्हें खुशी केवल इस बात की थी कि उन की दोनों बेटियां पढ़ाई में होशियार थीं. उन की बड़ी बेटी ने तो दसवीं में एक कीर्तिमान स्थापित किया था.
शिक्षा विभाग के आयोजन के अलावा नायर सर्विस सोसाइटी के पदाधिकारियों और उस सेंट एन्जींस स्कूल वालों ने भी लड़की को सम्मानित किया था, जहां वह पढ़ती थी. स्कूल में संपन्न आयोजन में प्रिंसिपल से ले कर अध्यापिकाओं तक ने उस लडकी को अपनी प्रिय विद्यार्थी कहते हुए घोषणा की थी कि वह जिंदगी में बहुत ऊंचाई पर जा कर अपने परिवार के अलावा इस स्कूल का भी नाम रोशन करेगी. अधिकांश अध्यापिकाओं ने उसे बांहों में भर कर इस तरह अपनत्व जताने की कोशिश की थी कि जैसे वह उन की स्टूडैंट न हो कर बेटी या बहन हो.
अब 22 साल बाद सरिता नायर नाम की वह लड़की 38 वर्ष की प्रौढ़ महिला बन चुकी है. इस बीच उस की जिंदगी में सब कुछ बदल गया है. कह सकते हैं कि सब उथलपुथल हो चुका है. आज उसी के इलाके के लोग उस के बारे में बात करने से कतराते हैं. उस पर अपनत्व की बौछार करने वाली अध्यापिकाएं उसे पहचानने से इनकार करती हैं. 90 प्रतिशत अंक लाने वाली इलाके की उस पहली लड़की के बारे में याद दिलाने पर भी कुछ याद न आने का अभिनय करती हैं.
दरअसल, ये लोग अब यह सोच कर भयभीत हो जाते हैं कि कहीं जांच एजेंसियां उन के बारे में यह धारणा न बना लें कि वे आज भी सरिता नायर के संपर्क में हैं. उन्हें डर है कि सरिता नायर के बारे में कुछ बोलने से वे बैठेबिठाए नाहक झमेले में उलझ सकती हैं. इस की वजह यह है कि सरिता नायर ने पिछले कुछ सालों से न केवल केरल के कई मंत्रियों और राजनेताओं, यहां तक कि कई पुलिस अधिकारियों को भी अपने निशाने पर ले रखा था, केरल के मुख्यमंत्री ओमन चांडी के लिए भी वह खतरा बनी हुई थी. इन लोगों के खिलाफ मीडिया में रोजाना ही उस के बयान आ रहे थे. फिर वह खुद भी जेल की हवा खा चुकी थी. अपने बच्चों को भी उस ने जेल में ही जन्म दिया था.
सरिता नायर की इस बदली जिंदगी के बारे में जानने के लिए हमें फिर से उसी मुकाम पर लौटना पड़ेगा, जब उस के पिता सोमाशेखरन का अचानक देहांत हुआ था और सरिता ने करीब 90 प्रतिशत अंकों के साथ दसवीं पास कर के वाहवाही बटोरी थी. सरिता को बताया गया था कि उस के पिता की मौत हार्टअटैक से हुई थी. बाद में यह बात भी उड़ी कि नौकरी के दौरान उन पर पैसों की हेराफेरी का आरोप लगा था, जिस से परेशान हो कर उन्होंने आत्महत्या कर ली थी. सरिता ने इस सब की गहराई में जाने की कोशिश की थी, लेकिन वह किसी भी पुख्ता नतीजे पर नहीं पहुंच पाई थी.
मां इंदिरा तो अपनी दोनों बेटियों की परवरिश के लिए मेहनत करने में ही इतनी व्यस्त हो गई थीं कि उन के पास कुछ सोचने या करने का वक्त ही नहीं था. वह किसी भी तरह अपनी बेटियों को पढ़ालिखा कर उन्हें अपने पैरों पर खड़ा करना चाहती थीं. सरिता ने यप 1996 में चेनगन्नूर के क्रिश्चियन कौलेज से अपनी प्री-डिग्री (12वीं कक्षा) की पढ़ाई खत्म की. इस के बाद कोई प्रोफैशनल कोर्स कर के उस ने नौकरी हासिल करने की सोची. लेकिन प्रोफैशनल कोर्स महंगे थे. इंदिरा की इतनी हैसियत नहीं थी कि ऐसे किसी कोर्स में बेटी को दाखिला दिलवा देती.
इस पर सरिता ने थिरूवानानाथापुरम के पास अपने ननिहाल नैय्याटिंकारा के पौलिटेक्निक कौलेज में इंजीनियरिंग करने के लिए दाखिला ले लिया. बाद में उस ने यहां से पढ़ाई छोड़ दी और धानुवाथारापुरम के वीटीएमएनएसएस कालेज में पढ़ने लगी. यहां के लड़के उस से दोस्ती करने को लालायित रहते थे, लेकिन उस ने किसी को अपने नजदीक नहीं आने दिया. जवान होतेहोते सरिता खूब स्मार्ट हो गई थी. उस की कदकाठी भी बढि़या थी. अब वह फर्राटेदार अंग्रेजी भी बोलने लगी थी. पढ़ाई में वह अब भी तेज थी. कौलेज के किसी लड़के में इतनी हिम्मत नहीं थी कि वह उस का रास्ता रोक ले या उस से किसी तरह की बदतमीजी करने की हिमाकत करे.
उन दिनों कालेज कैंपस में राजनीति जोरों पर थी. विद्यार्थी अलगअलग खेमों में बंटे हुए थे. सरिता की किसी खेमे में कोई दिलचस्पी नहीं थी. वह आजाद घूमती थी. बस से कालेज आतीजाती थी. आखिर में उस के बारे में यही सोच लिया गया कि वह अलग किस्म की घमंडी लड़की है, जिसे किसी के साथ दोस्ती में कोई रुचि नहीं है, खासकर लड़कों से. शायद मौजमस्ती की लाइफ से उसे परहेज था. तभी एक दिन एक लड़का सरिता को मोटरसाइकिल पर कालेज छोड़ने आया. उन दिनों उस इलाके में किसी के पास मोटरसाइकिल होना धनाढ्य होने की निशानी थी. इस से कालेज के लड़कों को सरिता के चरित्र पर संदेह हुआ. उन्हें लगा कि वह एकदम छिपी रुस्तम है, जो कालेज में किसी को नजदीक नहीं फटकने देती, लेकिन बाहर किसी अमीरजादे से रिश्ता बनाए हुए थी.
विद्यार्थियों को हैरान करने और जलती पर घी का काम करने वाली बात तब सामने आई, जब सरिता ने अचानक वहां से पढ़ाई बीच में छोड़ कर एक सर्टिफिकेट प्रोग्रामिंग कोर्स करना शुरू कर दिया. यह एक महंगा प्रोफैशनल कोर्स था. इस कोर्स के बाद उसे ढाई लाख रुपए सलाना पैकेज की सैलरी पर कतर एयरलाइंस में एयर होस्टेस की नौकरी मिल गई.
सरिता के पिता की मौत के बाद उस के दूर के रिश्ते के एक अंकल इस परिवार के सुखदुख का ध्यान रखने लगे थे. घर की हर बात के लिए इंदिरा उन से हर तरह की सलाह लिया करती थी. सरिता की एयर होस्टेस की नौकरी की बात बताते हुए इंदिरा ने जब उन से सलाह मांगी तो उन्होंने इस नौकरी पर सख्त ऐतराज जताया. उन का कहना था कि एयर होस्टेस को शर्मनाक कपड़े पहनने पड़ते हैं, जो शरीफ घरों की लड़कियों को शोभा नहीं देते. इस पर सरिता ने गुस्से में आ कर अपौइंटमैंट लैटर फाड़ कर फेंक दिया.
उन अंकल ने प्रयास कर के सरिता की शादी खाड़ी देश में रहने वाले एक शख्स से करवा दी. उन दिनों वह भारत आया हुआ था. कुछ वक्त सरिता के साथ बिताने के बाद वह जल्दी ही उसे अपने पास बुलाने का वादा कर के वापस चला गया. लेकिन बाद में वह सरिता पर कई तरह के आरोप लगा कर उसे तलाक देने की बात कहने लगा.
सरिता फिर से अकेली हो गई थी. अब उस पर एक तरह से बेचारी का ठप्पा लग गया था. लेकिन सरिता ने किसी बात की परवाह न कर के एरनाकुलम की एक प्रसिद्ध शेयर ट्रैडिंग कंपनी में नौकरी कर ली. सरिता बनसंवर कर सलीके से रहती थी. उस के व्यक्तित्व में पहले से कहीं अधिक निखार आ गया था. उस का बातचीत का अंदाज भी बहुत अच्छा था. फर्राटेदार अंग्रेजी उस के व्यक्तित्व पर खूब फबती थी. अपनी नौकरी से जुड़ी हर जिम्मेदारी को वह अच्छी तरह समझती थी और बखूबी निभाती थी.
उस का पति उस से रिश्ता खत्म करने पर तुला था. अब सरिता के बारे में यह कहना शुरू कर दिया कि उस के कई लोगों से अनैतिक संबंध थे. आखिर सरिता ने भी उस पति से रिश्ता खत्म करने का मन बना लिया. दोनों के बीच तलाक की काररवाई शुरू हो गई. जिस फर्म में सरिता नौकरी करती थी, उस के एक मुलाजिम पोरिंजू वेलियाथ ने अपनी एक अलग कंपनी खोल ली थी. वह सरिता को बहुत पसंद करता था और उस की खूबियों से प्रभावित था. वह चाहता था कि वह उस की कंपनी में नौकरी कर ले. सरिता ने पिछली नौकरी छोड़ कर पोरिंजू की फर्म में रिसैप्शनिस्ट की नौकरी कर ली.
जल्दी ही उस का इस नौकरी से मन भर गया और उस ने यहां से रिजाइन कर के पाथानामथिट्टा के नजदीक कोजैनचैरी स्थित केरल फाइनैंस कार्पोरेशन लिमिटेड कंपनी में सहायक ब्रांच मैनेजर की नौकरी कर ली. यहां वह पहले से भी अधिक कुशल कर्मचारी साबित हुई. उस ने कंपनी के लिए बेतहाशा निवेशक जुटाने में अहम भूमिका निभाई. लेकिन उन्हीं दिनों शराब की एक दुकान के मालिक के साथ उस का नाम जुड़ने की अफवाहें उड़ने लगीं.
वह आदमी था बीजू राधाकृष्णन, जो पहले से शादीशुदा था. वह शराब का अपना छोटामोटा कारोबार करने के अलावा उसी फर्म में नौकरी भी करता था, जहां सरिता नौकरी करती थी. सरिता और राधाकृष्णन दोनों एकदूसरे को पसंद करते थे. धीरेधीरे दोनों की नजदीकियां बढ़ती गईं. तब तक सरिता को बीजू के शादीशुदा होने की बात मालूम नहीं थी.
सन 2003 में सरिता और बीजू ने नौकरी छोड़ कर कम ब्याज पर ऋण देने के औफर के साथ क्रेडिट फाइनैंस शौप नाम से अपनी फर्म खोल ली. अभी यह धंधा जम भी न पाया था कि केरल फाइनैंस कार्पोरेशन लिमिटेड कंपनी ने सरिता के खिलाफ उन के यहां नौकरी करने के दौरान घपला करने का केस दर्ज करा दिया. बाद में पता चला कि उसे फंसाने के पीछे बीजू का हाथ था. इस से बीजू व सरिता के संबंधों में दरार आने लगी.
सन 2005 में एक दैनिक अखबार में सरिता नायर से संबंधित एक सनसनीखेज खबर छपी. खबर के अनुसार, सरिता के एक पुलिस अधिकारी से नजदीकी संबंध थे, जिन का वह भरपूर लाभ उठा रही थी. उसी अधिकारी के प्रभाव की वजह से वह लोगों को बेवकूफ बना कर उन की खूनपसीने की कमाई ऐंठ लेती थी. जबकि सरिता के अनुसार ऐसा कुछ नहीं था, बल्कि यह उसे फंसाने और बदनाम करने की साजिश थी. सरिता को इस के पीछे भी बीजू का ही दिमाग काम करता नजर आया.
सरिता ने गहराई में जाने की कोशिश की तो उसे पता चला कि बीजू ने उस से शादी करने के चक्कर में अपनी पत्नी की हत्या कर के उसे आत्महत्या का रूप दे दिया था. इस बीच वह सरिता के साथ लिव इन रिलेशनशिप में रहता रहा था. अब जब उस के एक फिल्म एक्ट्रैस से संबंध बन गए थे तो वह सरिता को अपने रास्ते से हटाने की कोशिश करने लगा था. अंतत: सरिता ने बीजू के खिलाफ पुलिस में लिखित शिकायत कर दी. इस पर विधिवत छानबीन शुरू हो गई.
उन्हीं दिनों सरिता ने आत्महत्या करने की भी कोशिश की. दरअसल वह अपने बारे में स्थानीय अखबारों में छपने वाली झूठी खबरों से परेशान हो गई थी. तब तक उस का अपने पति से तलाक भी हो चुका था. दूसरी ओर बीजू ने यह बात उड़ानी शुरू कर दी थी कि उस की पत्नी रेशमी ने सरिता नायर से परेशान हो कर आत्महत्या की थी. आखिर एक दिन सरिता ने कोजैनचैरी को अलविदा कहते हुए एरनाकुलम के एक काल सेंटर में नौकरी कर ली. यहां उसे एचएसबीसी बैंक के क्रैडिट कार्ड बनवाने के संबंध में लोगों से फोन पर संपर्क करने का काम मिला था. एरनाकुलम में उस का मन नहीं लगा तो उस ने निवेदन कर के अपना तबादला तिरुवनंतपुरम करवा लिया. यह सन 2006 की बात है.
दरअसल, अब वह एक तरह से बीजू से डरने लगी थी. लेकिन वह यहां भी एक दिन अपने गुंडों को ले कर आ धमका और सरिता से बोला, ‘‘तू अगर चाहती है कि तेरी जिंदगी सलामत रहे तो सीधेसीधे मेरा वह 5 लाख रुपया वापस कर दे, जो तूने मुझ से उधार ले रखा है. मेरे खिलाफ तू कितनी भी शिकायतें करती रह, मेरा कुछ नहीं बिगड़ने वाला.’’
बकौल सरिता उस ने बीजू से कभी कोई पैसा नहीं लिया था. दरअसल वह उस पर इस तरह का आरोप लगा कर उसे भयभीत करना चाहता था, ताकि वह उस के खिलाफ पुलिस में की गई अपनी शिकायत वापस ले ले. बहरहाल, जो भी हुआ हो, उन दोनों का आपस में समझौता हो गया. उन्हीं दिनों सोलर एनर्जी प्रोजैक्ट को ले कर व्यापारियों के बीच काफी खुसरफुसर चल रही थी. सरकारी मदद से बड़े स्तर पर जो प्रोजैक्ट शुरू किए जाते हैं, उन में शुरू में लोगों को बहुत फायदा पहुंचने की गुंजाइश होती है. बीजू राधाकृष्णन और सरिता नायर ने भी इस सुनहरे अवसर का फायदा उठाने की सोची.
सन 2007 में बीजू राधाकृष्णन और सरिता नायर ने आईसीएमएस नाम से अपनी सोलर इक्विपमैंट कंपनी रजिस्टर करवा ली, साथ ही इन लोगों ने तिरुवनंतपुरम में कंपनी का औफिस भी खोल लिया. बीजू के अनुसार उस की सब से बड़ी ताकत उस के वे दोस्त थे, जिन की सीधी पहुंच सरकार तक थी. इन में कुछेक मंत्रियों के बेटे वगैरह भी थे. सोलर प्रोजैक्ट के नाम पर फूलप्रूफ व्यवस्था का मुलम्मा चढ़ा कर इन लोगों ने आम लोगों से बहुत पैसा खींचा. आखिर इन लोगों के खिलाफ लोगों की शिकायत पर पुलिस ने धोखाधड़ी का केस दर्ज कर बीजू राधाकृष्णन व सरिता को गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया. गिरफ्तारी के वक्त सरिता 8 महीने की गर्भवती थी.
पूछताछ के वक्त उस ने पुलिस को बताया था कि उस के एक राजनेता से संबंध थे, जिस से वह गर्भवती हो गई थी. बाद में उस ने अपनी न्यायिक हिरासत के दौरान जेल में ही एक बेटे को जन्म दिया था. यहां जब उस से उस बच्चे के पिता का नाम पूछा गया था तो उस ने यह कहते हुए नाम बताने से इनकार कर दिया था कि यह उस की राइट टू प्राइवेसी का मामला है, इसलिए उसे बच्चे के पिता का नाम बताने के लिए मजबूर न किया जाए. खैर, जल्दी ही बीजू की जमानत हो गई और वह जेल से बाहर आ गया. जबकि सरिता को इस के बाद 6 महीनों तक जेल में ही रहना पड़ा था. बाद में उस की जमानत बीजू के प्रयासों से ही हो सकी थी.
केस चलता रहा, धीरेधीरे मामला ठंडा पड़ता गया. वक्त अपनी रफ्तार से आगे बढ़ता गया. बीजू और सरिता के बीच संबंध बनतेबिगड़ते रहे. सन 2011 में केंद्र सरकार की ओर से जवाहर लाल नेहरू नैशनल सोलर मिशन योजना के तहत इच्छुक लोगों को इस मिशन का हिस्सा बनने के एवज में भारी ग्रांट देने की घोषणा हुई. इस मुद्दे पर बीजू और सरिता एक बार फिर साथसाथ हो गए. इस बार उन्होंने पुराना नाम रद्द कर के कंपनी का नया नाम रखा ‘टीम सोलर’.
सरिता नायर फर्राटेदार अंग्रेजी में बात करने में माहिर थी. हालांकि वह किसी से कोई ठगी करना नहीं चाहती थी. लेकिन उस की इस कला और प्रभावशाली व्यक्तित्व से सामने वाला उस की बात मानने को मजबूर हो जाता था. बकौल सरिता अकेला बीजू ही ऐसा था, जिस के सामने न जाने क्यों उसे घुटने टेकने पड़े थे और वह हर तरह से उस का शोषण करता रहा था.
सरिता के बताए अनुसार, अपनी इस खूबी के सहारे उस ने तमाम बडे़बड़े लोगों से संपर्क बना लिए थे, जिन में कई पुलिस अधिकारियों, मंत्रियों और यहां तक कि मुख्यमंत्री ओमन चांडी तक शामिल थे. इन लोगों के यहां उसे बिना किसी औपचारिकता के आनेजाने की आजादी थी. वहां उसे सब पहचानते थे. न कोई उसे मुख्यमंत्री के औफिस में जाने से रोकता था न ही उस के लिए उन के निवास में प्रवेश करने पर कोई पाबंदी थी.
बकौल सरिता, इस के बावजूद सोलर मिशन से संबंधित ग्रांट देने के लिए मुख्यमंत्री ने 7 करोड़ की रिश्वत मांगी थी, जबकि पावर मिनिस्टर आर्यादन मोहम्मद ने अलग से 2 करोड़ रुपए की मांग की थी. सरिता के मुताबिक, तब उस ने 1.9 करोड़ रुपए मुख्यमंत्री चांडी के सहायक थौमस कुरुविला को दिए थे और 40 लाख रुपए ले जा कर मोहम्मद के सैके्रट्री केसावान के हाथ पर रखे थे. लेकिन इन लोगों का साफ कहना है कि उन्होंने सरिता से कभी कोई रुपया नहीं लिया. वह झूठ बोल रही है. पता नहीं किस के इशारे पर वह उन्हें बदनाम करने के लिए इस तरह की मक्कारी भरा खेल खेल रही है.
सरिता के बताए अनुसार, रिश्वत में इतनी बड़ी रकम देने के बाद उसे पूरा विश्वास था कि उस का यह काम हो जाएगा. लेकिन उस का टैंडर ही गायब कर दिया गया. सरकारी ग्रांट मिलने का तो अब सवाल ही नहीं रह गया था. सरिता का ताश का महल भरभरा कर गिर चुका था. जिन लोगों ने इन के प्रोजैक्ट में पैसे लगाए थे, वे इन के विरुद्ध आ खड़े हुए. आखिर उन लोगों की शिकायत पर आपराधिक मामला दर्ज हुआ और जून, 2013 में सरिता नायर व बीजू राधाकृष्णन फिर से गिरफ्तार हो कर सलाखों के पीछे पहुंच गए.
सरिता के मुताबिक थिरुवानानाथापुरम के नजदीक जो जेल है, उसी में बैठ कर उस ने एक चिट्ठी लिखी. उस में उस ने उन तमाम अतिमहत्त्वपूर्ण लोगों के नाम दिए, जिन्होंने सोलर बिजनैस कौंट्रेक्ट दिलवाने के प्रौमिस के एवज में उस से शारीरिक संबंध बनाए थे. उपरोक्त 42 पृष्ठों की चिट्ठी में 13 वीआईपी लोगों के अलावा एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का भी जिक्र था. हर व्यक्ति के बारे में सरिता ने विस्तारपूर्वक खुलासा किया था कि किस वादे के एवज में किस तारीख को और कहां उस का जिस्म नोचा गया था.
बकौल सरिता, वह अपने इस पत्र को मूल आकार में रिलीज करना चाहती थी, लेकिन एक जेल अधिकारी ने उसे समझाया और कांटछांट कर के इसे 4 पन्नों का बनवा दिया था. बीजू के अनुसार, इस से संबंधित एक सीडी उस के पास है. बीजू राधाकृष्णन द्वारा अपनी पत्नी की हत्या करने के सबूत भी पुलिस के हाथ लग गए थे. इस अपराध में उस की मां का शामिल होना भी पाया गया था. रेशमी हत्याकांड में उन पर केस चलाया गया. सन 2006 में हुए इस मर्डर का फैसला जनवरी, 2014 में आया, जिस के तहत बीजू व उस की मां को उम्रकैद की सजा सुनाई गई.
टीम सोलर के घपलों और सरिता नायर के गंभीर आरोपों के सिलसिले में सोलर कमीशन बना कर इस की व्यापक न्यायिक जांच पहले ही शुरू हो चुकी थी. इस जांच में एक से एक सनसनीखेज तथ्य सामने आ रहे हैं. इस सिलसिले में मुख्यमंत्री ओमन चांडी के गनमैन सलीमराज को गिरफ्तार करने के अलावा कई सरकारी उच्च अधिकारियों को नौकरी से निलंबित भी किया गया है. चांडी के खिलाफ सबूतों में सरिता ने उन नेताओं की रिकौर्डिंग भी कमीशन के हवाले की है, जिस में वे उसे चांडी के हक में बयान देने की बात समझा रहे हैं. मुख्यमंत्री ओमन चांडी इस सिलसिले में खुद को और अपनी सरकार को बचाने की जीतोड़ कोशिश कर रहे थे, जबकि सरिता नायर को आधार बना कर उन पर विपक्ष के ताबड़तोड़ हमले जारी थे.
पहले सरिता, फिर नंदनी, फिर लक्ष्मी और अंत में फिर से सरिता नायर के रूप में आ कर इस अलग सी महिला ने जिंदगी से हर तरह की जंग लड़ने की ठान ली है. लड़के के बाद एक लड़की को भी उस ने जेल में ही जन्म दिया था. उस के ये दोनों बच्चे उस की मां की देखरेख में पल रहे हैं. जेल से जमानत पर छूटने के बाद सरिता नायर ने अपने खिलाफ लगे आरोपों को दरकिनार कर, अपनी जिंदगी का एक नया अध्याय लिखना शुरू कर दिया है. अपने को संगीत की दुनिया से जोड़ते हुए उस ने क्रिश्चियनैटी व हिंदुत्व के धार्मिक गीतों की 4 म्यूजिक एलबम निकाली हैं. 4 फिल्मों में काम करने का अनुबंध भी उस ने किया है. इन में एक फिल्म में वह महिला पुलिस अधिकारी का किरदार निभा रही है.
उस का कहना है, ‘‘मैं एक ऐसा डूबता जहाज हूं, जो कभी इस किनारे तो कभी उस किनारे से टकराने की भूल कर के अपने आस्तित्व को डांवाडोल करता रहा. मैं हरेक पर भरोसा कर के गलती पर गलती करती गई. मैं नहीं चाहती कि कोई मुझे मेरी गलती के लिए माफी दे. जहां भी मैं गलत साबित हो जाऊं, मुझे मेरे कुसूर की बराबर सजा दी जाए.
‘‘मैं हंसतेहंसते यह सजा कबूल करूंगी और इस सजा के खिलाफ अपील करने की सोचूंगी भी नहीं. लेकिन मुझे चिंता है अपने दोनों बच्चों के भविष्य की. आगे मुझे जो भी वक्त मिलेगा, मैं उस का सदुपयोग कर के अपने बच्चों का भविष्य सुरक्षित करने की कोशिश करूंगी. फिल्में करूं या एलबम रिलीज करूं, करूंगी सब पैसा कमाने के लिए ही.’’
सराह जोसेफ मलयालम लेखक और एक्टिविस्ट हैं. सरिता नायर पर की गई उन की टिप्पणी के अनुसार, वह एक ऐसी महिला है, जो सिस्टम की पहचान अपने तरीके से करने की कोशिश कर के भ्रष्ट राजनीतिज्ञों का इस्तेमाल करने की सोच बैठी थी. लेकिन उन्होंने न केवल उस से मोटी रिश्वत खाई, उस का जिस्मानी शोषण भी किया. इस लिहाज से वे सरिता नायर से भी बड़े अपराधी हैं. सरिता ने इन्हें एक्सपोज करने का साहस दिखाया है. True Crime Story






