Hindi Crime Story: अबरार अपने चचेरे भाई उम्मीद खां की हत्या कर के एक तीर से दो निशाने साधना चाहता था. उस ने भाई को तो मार दिया, लेकिन क्या उस की इच्छा पूरी हुई?

उत्तर प्रदेश का एक जिला है संभल. इस जिले के थाना नखासा के अंतर्गत आने वाले चंदावली गैलुआ रोड पर स्थित चंदावली इंटर कालेज के पास कच्ची सड़क पर नीले रंग की एक टेरेनो कार खड़ी थी. जब काफी देर तक वह कार वहीं खड़ी रही तो कुछ लोग उस के पास पहुंचे. उन्होंने शीशे से अंदर झांका तो उन्हें कार की पिछली सीट पर एक आदमी पड़ा दिखाई दिया, जिस के सीने पर एक तकिया रखा था. उस आदमी में कोई हलचल दिखाई नहीं दी तो लोगों को शक हुआ. इस के बाद तो एकदूसरे से होते हुए यह खबर चंदावली और गैलुआ गांव के अधिकांश लोगों तक पहुंच गई. धीरेधीरे वहां भीड़ लगने लगी. उन्हीं लोगों में से किसी ने यह सूचना थाना नखासा पुलिस को दे दी. यह 22 अक्तूबर, 2015 की बात है.

सूचना मिलने पर शाम साढ़े 7 बजे के करीब थानाप्रभारी के.के. तिवारी पुलिस टीम के साथ वहां पहुंच गए. उन्होंने लोगों की मदद से कार को काफी हिलायाडुलाया, लेकिन सीट पर पड़े आदमी में कोई हरकत नहीं हुई. इस से लगा कि या तो वह बेहोश हैं या फिर किसी ने उस की हत्या कर दी है. के.के. तिवारी ने इस बात की जानकारी जिले के सभी पुलिस अधिकारियों को दे दी. मामला हत्या का लग रहा था, इसलिए एसपी अतुल कुमार, एएसपी कमलेश दीक्षित भी वहां पहुंच गए. चूंकि कार के दरवाजे लौक थे, इसलिए लौक खुलवाने से पहले पुलिस ने फोन कर के नजदीकी जिला मुरादाबाद से फौरेंसिक एक्सपर्ट्स की टीम को बुलवा लिया.

रात साढ़े 10 बजे फोरैंसिक एक्सपर्ट्स की टीम मौके पर पहुंची तो कार का शीश तोड़ कर उस के दरवाजे खोले गए. पुलिस ने कार के अंदर पड़े आदमी की जांच की तो पता चला कि वह मर चुका था. फोरैंसिक टीम ने कार की स्टीयरिंग, विंडो और हैंडिल लीवर से फिंगरप्रिंट उठाए. कार की जांच में पिछली सीट पर 2 मोबाइल, मिर्च पाउडर और एक लेटरहेड रखा मिला. लेटरहैड पर एक मोबाइल नंबर लिखा था. जब फोरैंसिक टीम जांच कर रही थी, तभी के.के. तिवारी ने अपने मोबाइल से वह नंबर मिलाया तो दूसरी ओर से फोन किसी महिला ने उठाया. उन्होंने उस महिला से पूछा कि क्या वह किसी ऐसे आदमी को जानती है, जिस के पास नीले रंग की टेरेनो कार है?

उस महिला ने कहा, ‘‘यह कार तो मेरे पति की है. कहां हैं वह?’’ महिला ने पूछा. महिला ने अपना नाम गुलिस्तां बताया था. के.के. तिवारी ने कहा, ‘‘उन का ऐक्सीडेंट हो गया है. उन्हें गंभीर चोटें आई हैं. आप जल्दी संभल के थाना नखासा आ जाइए.’’

पति के ऐक्सीडेंट की बात सुन कर महिला रोने लगी. उस ने यह बात अपने ससुर शमीउल्ला खां को बताई तो वह भी परेशान हो गए. उन्हें लगा था कि ऐक्सीडेंट में घायल होने की वजह से वह किसी अस्पताल में भरती होगा.

फोरैंसिक टीम का काम निपट गया तो पुलिस ने जांच शुरू की. लाश के गले पर मिर्च पाउडर पड़ा था, जिस से अंदाजा लगाया गया कि उस की आंखों में मिर्च पाउडर डाला गया था. जरूरी काररवाई करने के बाद पुलिस ने लाश को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया. देर रात शमीउल्ला खां गुलिस्तां और अन्य घर वालों के साथ थाना नखासा पहुंचे तो उन्हें पता चला कि उन का बेटा अब इस दुनिया में नहीं है. थानाप्रभारी ने उन्हें अपने मोबाइल में उस की लाश के फोटो दिखाए तो फोटो देखते ही शमीउल्ला खां की आंखें भर आईं, क्योंकि वह फोटो उन के बेटे उम्मीद खां के थे. के.के. तिवारी ने सांत्वना दे कर उन्हें बताया कि उन के बेटे का एक्सीडेंट नहीं हुआ बल्कि किसी ने उस की हत्या की है.

इस के बाद पुलिस उन्हें मोर्चरी ले गई. शमीउल्ला को लाश दिखाई गई तो उन्होंने उस की शिनाख्त अपने बेटे उम्मीद खां के रूप में कर दी. पोस्टमार्टम कराने के बाद अगले दिन पुलिस ने उम्मीद खां की लाश उस के घर वालों को सौंप दी. 30 वर्षीय उम्मीद खां की हत्या के मामले को सुलझाने के लिए एसपी अतुल कुमार सक्सेना ने एएसपी कमलेश दीक्षित के नेतृत्व में एक टीम गठित की, जिस में थानाप्रभारी के.के. तिवारी, स्पैशल औपरेशन ग्रुप (एसओजी) के प्रभारी संतोष त्यागी जैसे कई तेजतर्रार पुलिस वालों को शामिल किया गया. मृतक जिला अमरोहा के कस्बा गजरौला के निकटवर्ती गांव लिसड़ई बुजुर्ग का रहने वाला था. इस से पुलिस यह सोचने पर मजबूर हो गई कि उस की हत्या संभल के इलाके में क्यों की गई?

अगर किसी को उस की हत्या करनी ही थी तो वह गजरौला से हसनपुर के बीच कहीं भी कर सकता था. आखिर उसे वहां क्यों लाया गया? इस का मतलब हत्यारों या मृतक में से किसी न किसी का संबंध संभल से जरूर रहा होगा. इस बारे में पुलिस ने शमीउल्ला खां से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि संभल के कस्बा हसनपुर के पास गांव बावनखेड़ी में उन की ससुराल है. उम्मीद खां अकसर अपनी ननिहाल आताजाता रहता था.

के.के. तिवारी ने उम्मीद खां की ननिहाल जा कर पूछताछ की तो पता चला कि 22 अक्तूबर को उम्मीद खां वहां नहीं पहुंचा था. उसी बीच उम्मीद के एक दोस्त शाहनवाज ने पुलिस को बताया कि 22 अक्तूबर को वह उम्मीद के साथ था. वह अपनी टेरेनो कार से उसे मुरादाबाद ले गया था. वहां उन दोनों ने कुछ खरीदारी की थी. दोपहर 2 बजे वे लोग गजरौला पहुंचे तो उम्मीद के फोन पर किसी का फोन आया. फोन पर उम्मीद जिस तरह बात कर रहा था, उस से साफ पता चल रहा था कि वह किसी महिला से बात कर रहा है. महिला ने शायद उसे बुलाया था इसीलिए उस ने महिला से कहा कि मैं अभी आ रहा हूं. फोन पर बात होने के बाद उम्मीद ने शाहनवाज से कहा कि वह किसी जरूरी काम से कहीं जा रहा है.

शाहनवाज ने उस से मालूम भी करना चाहा पर उस ने यह नहीं बताया कि वह कहां जा रहा है. उस ने सिर्फ इतना ही बताया कि वह बिजनेस के सिलसिले में किसी से बात करने जा रहा है. उसे गजरौला में उतार कर वह चला गया था. अब पुलिस को यह पता लगाना था कि 22 अक्तूबर की दोपहर को उम्मीद की किस से बात हुई थी, जिस के बाद वह गजरौला से चला गया था. वह फोन नंबर किस का था, यह जानने के लिए पुलिस ने उम्मीद के फोन की काल डिटेल्स निकलवाई तो पता चला कि वह फोन नंबर बावनखेड़ी के रहने वाले मोहम्मद अमीर की बेटी नगमा का था.

पुलिस टीम बावनखेड़ी स्थित मोहम्मद अमीर के घर पहुंची तो घर पर पुलिस को देख कर नगमा घबरा गई. पुलिस ने जब उस से पूछा कि क्या वह गजरौला के गांव लिसड़ई बुजुर्ग के रहने वाले उम्मीद खां को जानती है तो उस ने साफ मना कर दिया. जिस समय पुलिस नगमा से बात कर रही थी, उस की बड़ी बहन सायमा भी वहां मौजूद थी. पुलिस पूछताछ के समय दोनों बहनें बारबार एकदूसरे की ओर देख रही थीं. काल डिटेल्स में नगमा का फोन नंबर आया था. इस के बावजूद वह पुलिस से झूठ बोल रही थी. दूसरे दोनों बहनों के घबरा कर एकदूसरे की ओर देखने से भी पुलिस को शक हो गया. उन के व्यवहार से पुलिस को लगा कि दोनों बहनें उम्मीद की हत्या के बारे में कुछ न कुछ जरूर जानती हैं.

एएसपी कमलेश दीक्षित ने टीम में शामिल महिला सिपाहियों से कहा कि दोनों लड़कियों को गाड़ी में बैठा कर थाने ले चलो, इन से कुछ जरूरी बातें करनी हैं. नगमा और सायमा को ले कर पुलिस टीम थाने लौट आई. थाने में दोनों बहनों से उम्मीद खां की हत्या के बारे में पूछताछ की जाने लगी. पहले तो दोनों बहनें झूठ बोलती रहीं, लेकिन जब उन से मनोवैज्ञानिक तरीके से पूछताछ की गई तो वे अपने ही जाल में उलझती चली गईं. आखिर उन्होंने स्वीकार कर लिया कि उम्मीद की हत्या उन्होंने ही कराई थी. इस के बाद उन्होंने उम्मीद की हत्या की जो कहानी बताई, वह इस प्रकार थी.

उम्मीद खां उत्तर प्रदेश के जिला अमरोहा के थाना गजरौला के गांव लिसड़ई बुजुर्ग का निवासी था. उस के पिता किसान थे. उम्मीद खां 6 भाइयों में दूसरे नंबर पर था. गजरौला और हसनपुर के बीच एक गांव है सिंघली जागीर. वैसे तो यहां तमाम नर्सरियां हैं, जिन में अनेक किस्म के फूलों के पौधे मिलते हैं. लेकिन यहां की 2 नर्सरियां काफी बड़ी हैं, जिन का सालाना करोड़ों का टर्नओवर है.

उम्मीद खां जब बड़ा हुआ तो उस ने अपनी खेती का काम करने के बजाय नर्सरी का काम सीखना चाहा. घर वालों से पूछ कर वह गांव की एक बड़ी नर्सरी में काम करने लगा. 2-3 साल वहां काम करने के बाद जब उसे नर्सरी के सारे कामों की जानकारी हो गई और यह भी पता चल गया कि इस काम में कितनी आमदनी है तो उस ने नर्सरी की नौकरी छोड़ दी.

उम्मीद खां अपनी नर्सरी खोलना चाहता था, लेकिन उस के पास जमीन नहीं थी. उस ने अपने गांव के पास ही जमीन किराए पर ले कर नर्सरी का काम शुरू कर दिया. फूल आदि के पौधे कहां से मंगाए जाते हैं, कौनकौन से पौधे नर्सरी में ही तैयार किए जाते हैं, इस की उसे अच्छी जानकारी थी. अपनी मेहनत से कम पूंजी में ही उस का काम अच्छा चल निकला.

गजरौला औद्योगिक क्षेत्र है, जहां पर बिरला समूह की वाम आर्गेनिक जैसी कई बड़ी फैक्ट्रियां हैं. इस के अलावा यहां तमाम औद्योगिक प्रतिष्ठान, होटल और कोठियां हैं. उम्मीद खां इन सभी जगहों पर जा कर पौधे सप्लाई करने लगा, जिस से उसे मोटी कमाई होने लगी. पैसा आने के बाद उस के रहनसहन का अंदाज बदल गया. उस ने नर्सरी की आमदनी से आलीशान घर बनवाया और सन 2013 में निशान कंपनी की नीले रंग की टेरेनो कार खरीद ली.

आदमी के पास पैसा आता है तो साथ में कई बुराइयां भी साथ ले कर आता है. उम्मीद खां के साथ भी यही हुआ. नई कार लेते ही उस के जैसे पर लग गए. वह अपनी व्यावसायिक पार्टियों के पास कार से जाने लगा. इस से उस का धंधा और बढ़ गया. अब उसे सारा काम अकेले संभालना मुश्किल लगने लगा था. उम्मीद को अपने साथ काम करने के लिए एक ईमानदार लड़के की जरूरत महसूस होने लगी थी. उम्मीद खां के एक चाचा थे सरदार खां, जो गांव में ही रहते थे. उन का एक बेटा अबरार खां खाली था. वह दिन भर गांव में आवारागर्दी करता रहता था. उम्मीद ने उस से कहा, ‘‘अबरार, तुम दिन भर खाली घूमते रहते हो. गांव के जिन लड़कों के साथ तुम रहते हो, वे अच्छे नहीं हैं. अगर तुम मेरे साथ काम करो तो कुछ बन सकते हो.’’

अबरार जानता था कि उम्मीद ने जब से नर्सरी का काम शुरू किया है, उस की किस्मत बदल गई है. इसलिए उस ने उम्मीद की बात मान ली. अगले दिन से ही वह उम्मीद के साथ काम करने लगा. धीरेधीरे उम्मीद काम की जिम्मेदारी अबरार पर डालने लगा. जबकि वह खुद गजरौला से बाहर जा कर ठेके लेने लगा था. अबरार जितनी मेहनत से काम कर रहा था, उम्मीद उसी के हिसाब से उसे तनख्वाह भी दे रहा था. उम्मीद खां ने अबरार को कार चलाना भी सिखा दिया था. उम्मीद की गैरमौजूदगी में अबरार ही पार्टियों के पास जाता था और नर्सरी में नौकरों से काम भी कराता था. अबरार मालिक की तरह वहां रह रहा था. अब वह भी अच्छे और महंगे कपड़े पहनने लगा था.

हसनपुर तहसील के गांव बावनखेड़ी में उम्मीद की ननिहाल थी. वह बच्चों के साथ अकसर अपनी ननिहाल आताजाता रहता था. कभीकभी वह अबरार को भी साथ ले जाता था. उस की ननिहाल के पास ही मोहम्मद अमीर का घर था. उस के 2 बेटे और 5 बेटियां थीं. करीब 10 साल पहले उस की पत्नी का इंतकाल हो गया था. वह एक बेटे और 3 बेटियों की शादी कर चुका था. अब उसे एक बेटे और 2 बेटियां सायमा व नगमा की शादी करनी थी. दोनों ही बेटियां शादी योग्य थीं. वह उन के लिए लड़के देख रहा था.

अबरार एक बार उम्मीद के साथ बावनखेड़ी गया तो उस की नजरें सायमा से चार हो गईं. एकदूसरे को देख कर दोनों ही मुसकरा पड़े. अबरार उस का मतलब समझ गया. मौका मिलते ही उस ने सायमा का मोबाइल नंबर ले लिया. एकदूसरे से अपनी बात कहने और उस की सुनने का मोबाइल फोन बढि़या जरिया है. सायमा और अबरार को नजदीक लाने में मोबाइल ने अपनी अहम भूमिका निभाई.

अबरार ने सायमा से फोन पर बात की तो उसे भी उस से बात करना अच्छा लगा. इस के बाद उन की मोबाइल पर लंबीलंबी बातें होने लगीं, जिस से वे एकदूसरे के नजदीक आते गए. कभीकभी अबरार अकेला ही उम्मीद की कार ले कर बावनखेड़ी चला जाता था, जिस से सायमा पर उस का अच्छाखासा प्रभाव जम गया. बाद में सायमा के पिता से भी उस की जानपहचान हो गई, जिस से वह उस के घर भी जाने लगा.

अबरार और सायमा की प्रेमकहानी के बारे में उम्मीद को पता चला तो उसे ताज्जुब हुआ कि अबरार ने उस के ननिहाल की लड़की सायमा को कैसे पटा लिया? सायमा की एक छोटी बहन नगमा थी. उम्मीद ने सोचा कि वह नगमा पर अपना प्रभाव डाल कर उसे पटाने की कोशिश करेगा. लेकिन काफी कोशिश के बाद भी वह सफल नहीं हुआ.

एक दिन उस ने अबरार से कहा, ‘‘तुम्हारा और सायमा का यह खेल इस तरह कब तक चलता रहेगा. क्यों न तुम किसी दिन सायमा को मुरादाबाद ले आओ. उसे यहां घुमा देंगे.’’

उम्मीद की इस बात पर अबरार पहले तो चौंका कि उस की प्रेम वाली बात उम्मीदभाई को कैसे पता चल गई. अब चूंकि वह उस से झूठ भी नहीं बोल सकता था, इसलिए उस ने उम्मीद की बात मान ली. इस के बाद उस ने सायमा के सामने मुरादाबाद घूमने का प्रस्ताव रखा.

सायमा ने कहा कि उस के अब्बू उसे अकेली बाहर जाने की इजाजत नहीं देंगे. शायद छोटी बहन को साथ ले जाने को कहूं तो वह इजाजत दे दें. अबरार ने कहा कि वह अपने अब्बू से बात करे. जो भी बात हो, वह उसे बता दे. वह कार ले कर बावनखेड़ी आ जाएगा. इस के बाद सायमा ने अपने अब्बू से कहा, ‘‘अब्बू हमें गजरौला से कुछ खरीदारी करनी है. अबरार अपनी कार ले कर आया है. हम उस के साथ चले जाएं तो जल्दी लौट आएंगे.’’

अमीर ने दोनों बेटियों को गजरौला जाने की इजाजत दे दी. सायमा ने अबरार को यह खबर दी तो वह उम्मीद के साथ बावनखेड़ी पहुंच गया और सायमा व नगमा को गाड़ी में बैठा कर गजरौला लौट आया. उम्मीद भी वहीं मिल गया. पहले चारों ने एक रेस्टोरैंट में नाश्ता वगैरह किया. इस के बाद उम्मीद ने दोनों बहनों को बाजार से खरीदारी कराई. दोनों बहनें उम्मीद खां से बहुत खुश थीं. इस के बाद उम्मीद खां उन्हें ले कर गजरौला के एक होटल में पहुंचा. वह होटल उस के परिचित का था. वहां उस ने किराए पर 2 कमरे लिए. एक कमरे में अबरार और सायमा चले गए. दूसरे कमरे में उम्मीद खां नगमा को साथ ले कर चला गया.

अबरार और सायमा ने तो हंसीखुशी से संबंध बनाए जबकि उम्मीद खां ने नगमा के साथ जबरन संबंध बनाए. बाद में उस ने नगमा को कुछ पैसे दे कर खुश करने की कोशिश की. इस के बाद यह सिलसिला सा चल निकला. उम्मीद खां नगमा पर पानी की तरह पैसा बहाने लगा. यही नहीं, वह उस पर शादी करने का दबाव भी डालने लगा. नगमा को जब पता चला कि उम्मीद खां शादीशुदा ही नहीं, 3 बच्चों का बाप है तो उसे अपनी गलती का अहसास हुआ. उस ने उम्मीद खां से दूरी बनानी शुरू कर दी. जबकि उम्मीद खां उस पर निकाह करने का दबाव बना रहा था. नगमा ने निकाह करने से साफ मना कर दिया तो उम्मीद खां बौखला उठा.

उस ने नगमा को धमकी दी कि अगर उस ने उस के साथ निकाह नहीं किया तो वह उस के होने वाले जीजा अबरार को नौकरी से हटा देगा. यही नहीं, वह उसे गांव में भी बदनाम कर देगा. उस की इस धमकी से नगमा डर गई. उस ने यह बात अपने होने वाले जीजा अबरार को बताई तो वह भी परेशान हो उठा. क्योंकि अबरार भी नहीं चाहता था कि उस की होने वाली साली नगमा 3 बच्चों के पिता उम्मीद खां से शादी करे. दरअसल उसे लगा कि अगर किसी तरह उम्मीद खां और नगमा की शादी हो गई तो सायमा के घर वालों के सामने उस की इज्जत कम हो जाएगी.

इस के बाद नगमा और अबरार उम्मीद खां से छुटकारा पाने का उपाय सोचने लगे. एक दिन इन दोनों ने मिल कर एक भयानक योजना बना डाली. अपनी उस योजना में अबरार ने अपने एक दोस्त गौरव को भी शामिल कर लिया. गौरव अमरोहा के ही जोया कस्बे का रहने वाला था. योजना के मुताबिक 22 अक्तूबर, 2015 की दोपहर को नगमा ने उम्मीद खां को फोन कर के कुछ देर इधरउधर की बातें करने के बाद कहा, ‘‘उम्मीद, आज तुम से मिलने का मन कर रहा है. तुम हसनपुर आ जाओ. मैं वहीं पर तुम्हारा इंतजार कर रही हूं. और हां, आज तुम्हारे मन की मुराद भी पूरी हो जाएगी. मैं तुम से आज ही निकाह कर लूंगी. इस का सारा इंतजाम मैं ने कर लिया है.’’

नगमा की इन बातों से उम्मीद खां बहुत खुश हुआ. उस समय वह अपने दोस्त शाहनवाज के साथ था. वह उसे उस के घर छोड़ कर अपनी निशान टेरेनो कार से हसनपुर के लिए रवाना हो गया. हसनपुर में तय जगह पर उसे नगमा अपनी बहन सायमा और अबरार के साथ खड़ी मिल गई. तीनों कार में बैठ कर संभल की ओर चल पड़े. नगमा ने उम्मीद खां को बताया कि उन दोनों का निकाह संभल के डेरा सराय में मौलवी द्वारा पढ़ाया जाएगा. कार हसनपुर से आगे रहरा मार्ग पर चितावली गांव के नजदीक पहुंची तो अबरार ने गाड़ी रुकवा ली. दरअसल योजना के अनुसार वहां अबरार का दोस्त गौरव खड़ा था. वहीं पर उस की मोटरसाइकिल भी खड़ी थी.

मोटरसाइकिल किसी जानकार के यहां खड़ी कर के गौरव भी उन की कार में बैठ गया. कार थोड़ी ही दूर चली थी कि दोनों बहनें लघुशंका के बहाने कार से उतर कर खेत में चली गईं. उम्मीद, अबरार और गौरव इधरउधर की बातें करने लगे. तब तक अंधेरा हो चुका था. वापस आ कर नगमा और सायमा फिर से गाड़ी में बैठ गईं. नगमा और सायमा अपने साथ मिर्ची का पाउडर लाई थीं. कार में बैठने के बाद उन्होंने वह पाउडर उम्मीद की आंखों में डाल दिया. उम्मीद खां अपनी आंखें मसलने लगा तो उन लोगों ने दुपट्टे से उस का गला घोंट दिया.

उम्मीद खां की मौत हो गई. इस के बाद अबरार ने लाश को पिछली सीट पर लिटा कर उस के मुंह पर तकिया रख दिया. उम्मीद की हत्या के बाद अबरार ने नगमा और सायमा को कार से हसनपुर छोड़ा. फिर वह गौरव को वहां ले गया, जहां उस ने अपनी मोटरसाइकिल खड़ी की थी. गौरव वहां से मोटरसाइकिल से कार के पीछेपीछे चलने लगा. अबरार कार ले कर संभल जिले के थाना नखासा के पास गैलुआ गांव पहुंचा. खेत के रास्ते पर कार खड़ी कर के उस ने कार में रखे लेटरहेड पर उम्मीद खां के घर का मोबाइल नंबर लिखा और कार को लौक कर के वहीं छोड़ दिया. इस के बाद वह गौरव की मोटरसाइकिल से गजरौला लौट आया.

पूरी बात पता चलने पर पुलिस ने अबरार और गौरव को भी गिरफ्तार कर लिया. उम्मीद को मार कर अबरार ने एक तीर से दो निशाने साधने चाहे थे. एक तो उस की होने वाली साली का पीछा छूट जाता, दूसरे उस की नर्सरी पर उस का कब्जा हो जाता. इस के बाद वह दोनों बहनों को अपने घर में रखना चाहता था, जो उस के काम में हाथ बंटातीं. पूछताछ के बाद पुलिस ने चारों अभियुक्तों को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. कथा लिखे जाने तक किसी की जमानत नहीं हो सकी थी. Hindi Crime Story

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