Mumbai Crime: पत्नी के प्रेमसंबंधों के बारे में पता चलने पर बाबू उसे रोकने ही नहीं लगा, बल्कि उस से मारपीट भी करने लगा. पति नाम के इस कांटे को निकालने के लिए रीवा ने मोनू को शरीर का चारा डाल कर जो दांव चला, वह उसे जेल तक ले गया.
दिन के लगभग 2 बजे महानगर मुंबई के उपनगर अंधेरी के थाना साकीनाका पुलिस को घाटकोपर के राजावाड़ी अस्पताल से एक महत्त्वपूर्ण सूचना मिली. ड्यूटी पर मौजूद इंसपेक्टर आबूराव सोनवणे ने चार्जरूम में ड्यूटी पर तैनात सबइंसपेक्टर बड़रे को बुला कर तुरंत सूचना दर्ज कराई. साथ ही उन्होंने इस सूचना की जानकारी कंट्रोल रूम और वरिष्ठ अधिकारियों को भी दे दी. सूचना दर्ज कराने के बाद आबूराव सोनवणे, इंसपेक्टर बाबूलाल शिंदे, चंद्रशेखर नलावणे, असिस्टैंट इंसपेक्टर दत्तात्रेय देशमुख, अनिल जयकर, सबइंसपेक्टर बाबूराव शिंदे, बड़रे, कांस्टेबल रतन गायकवाड़, कोलेकर और पाटिल को साथ ले कर घाटकोपर स्थित राजावाड़ी अस्पताल जा पहुंचे.
जिस समय वे अपनी टीम के साथ वहां पहुंचे, डाक्टरों की टीम एक लाश का निरीक्षण कर रही थी. उस लाश के साथ आए लोग भी वहां मौजूद थे. पूछताछ में मृतक का नाम बाबू राजरत्नम बताया गया. डाक्टरों के अनुसार, उस की मौत लगभग 10-11 घंटे पहले हुई थी. उसे गला घोंट कर मारा गया था. क्योंकि उस के गले पर गहरा निशान स्पष्ट नजर आ रहा था, जबकि घर वालों का कुछ और ही कहना था. मृतक की पत्नी रीवा और बेटे जीतू का कहना था कि उन्हें पता ही नहीं चला कि बाबू की मौत कब और कैसे हुई, पत्नी रीवा के बताए अनुसार, वह रात को काफी देर से घर आए थे और आते ही अपनी चारपाई पर सो गए थे. सुबह 4 बजे पानी आया तो उन्होंने हमेशा की तरह उठ कर पानी भरा, उस के बाद फिर अपनी चारपाई पर जा कर सो गए थे.
सुबह 6 बजे के करीब बेटा जीतू रात की ड्यूटी कर के आया तो वह भी उन्हीं की चारपाई पर उन के पास लेट कर सो गया. वह चूंकि एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाती थी, इसलिए सुबह उठ कर घर का सारा काम निपटाया और नाश्ता बना कर साढ़े 6 बजे स्कूल चली गई. इस बीच क्या हुआ, उसे कुछ पता नहीं. सवा 1 बजे जीतू ने उसे फोन कर के बताया कि एक बजे जब वह सो कर उठा तो देखा उस के पापा अभी भी सो रहे थे. उस ने पापा को उठाना चाहा तो उन में कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई. इस के बाद जीतू ने घबरा कर उसे फोन किया.
रीवा ने स्कूल से ही इस बात की जानकारी पति के बड़े भाई यशु को दे दी. इस के बाद उस के पड़ोस में रहने वाले अपने पिता रतन तथा मां शांती को बताया. जल्दी से भाग कर वह घर आई और घर वालों तथा पड़ोसियों की मदद से पति को अस्पताल ले गई. रीवा ने पुलिस को जो बताया, वह काफी संदिग्ध था. बहरहाल, पुलिस ने प्राथमिक काररवाई निपटाई और लाश को पोस्मार्टम के लिए भिजवा दिया.
अस्पताल से यह पुलिस टीम सीधे अंधेरीकुर्ला रोड स्थित जरीमरी बस्ती की राधाकृष्ण चाल पहुंची, जहां रीवा पति और बच्चों के साथ रहती थी. चाल के जिस मकान में मृतक बाबू रहता था, वह 2 कमरों का छोटा सा मकान था. पीछे वाले कमरे में ही छोटा सा किचन, टौयलेट और बाथरूम भी था, जबकि दूसरे कमरे में एक चारपाई पड़ी थी, उसी पर बाबू सोता था. वहीं उस की हत्या हुई थी. निरीक्षण में पुलिस ने कमरे का सारा समान अपनीअपनी जगह व्यवस्थित पाया. आनेजाने का एक ही दरवाजा था, जो अंदर से बंद था. इसलिए कोई बाहरी आदमी अंदर नहीं आ सकता था.
इंसपेक्टर आबूराव सोनवणे अपनी टीम के साथ कमरे का निरीक्षण कर ही रहे थे कि सीनियर इंसपेक्टर अभिनाश धर्माधिकारी और एसीपी समद शेख भी आ गए. दोनों अधिकारियों ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया और आपस में सलाह कर के इस मामले की जांच इंसपेक्टर आबूराव सोनवणे और चंद्रशेखर नलावणे को सौंप दी. समद शेख और अभिनाश धर्माधिकारी काफी दिनों तक क्राइम ब्रांच में रह चुके थे, जहां उन्होंने चंदन तस्करी से ले कर अपहरण जैसे कई बड़े पेचीदा मामले सुलझाए थे. उस हिसाब से यह मामला उन के लिए कुछ भी नहीं था.
इस के बावजूद इस मामले को ले कर उन के ऊपर काफी दबाव था. इस की वजह यह थी कि मृतक राजनीतिक पार्टी आरपीआई (रिपब्लिकन पार्टी औफ इंडिया) से जुड़ा था. इस के अलावा बौद्ध विहार मंदिर का अध्यक्ष भी था. घटनास्थल की जांच और अब तक की पूछताछ से यह साफ हो गया था कि हत्यारा कोई बाहरी नहीं था. इस से साफ था कि हत्या का राज घर में ही छिपा था. इसलिए पुलिस ने इस मामले की जांच मृतक बाबू के घर से ही शुरू की. यही वजह थी कि घर वालों के सामान्य होते ही पुलिस ने उन्हें थाने बुला लिया.
थाने में की गई पूछताछ में परिवार के किसी सदस्य से कोई खास जानकारी नहीं मिली, लेकिन मृतक के 5 साल के बेटे फैंडली ने पुलिस को जो बताया, उस से मृतक की पत्नी रीवा संदेह के दायरे में आ गई. उस ने पुलिस को बताया कि जिस रात उस के पापा की हत्या हुई थी, उस रात उस के घर मोनू अंकल आए थे और वह कई बार मम्मी के साथ पापा की चारपाई के पास गए थे. इस के अलावा पूछताछ में पुलिस ने एक चीज यह भी देखी थी कि पति की मौत पर पत्नी को जिस तरह दुखी होना चाहिए, रीवा उस तरह दुखी नहीं लग रही थी. इन बातों से पुलिस को लगा कि बाबू की हत्या में किसी न किसी रूप से रीवा का हाथ अवश्य है.
पुलिस ने रीवा से मोनू के बारे में पूछा तो उस ने जिस मोनू के बारे में बताया, वह उस के बड़े बेटे जीतू का दोस्त था. वह उसी के साथ नौकरी करता था. वह अकसर उस के घर आयाजाया करता था. जब फैंडली से उस की शिनाख्त कराई गई तो उस ने कहा, ‘‘यह वह मोनू नहीं है, जो उस रात आया था.’’
रीवा से दोबारा मोनू के बारे में पूछा गया तो उस ने कहा कि वह इस के अलावा किसी और मोनू को नहीं जानती. पुलिस जानती थी कि रीवा झूठ बोल रही है. इसलिए सच्चाई का पता लगाने के लिए पुलिस ने उस के मोबाइल नंबर की काल डिटेल्स निकलवाई तो पता चला उस की एक नंबर पर बहुत ज्यादा बातें होती थीं.
संदेह होने पर पुलिस ने उस नंबर के बारे में पता किया तो जो जानकारी मिली, वह चौंकाने वाली थी. वह नंबर भी उसी के नाम था, लेकिन उस का उपयोग कोई और कर रहा था. पुलिस ने तुरंत उस नंबर की काल डिटेल्स और लोकेशन पता करवाई तो पता चला कि जिस रात बाबू की हत्या हुई थी, उस नंबर की भी लोकेशन रीवा के घर की थी. जबकि वह रहता मुंबई के उपनगर जोगेश्वरी के प्रेमनगर में हनुमान मंदिर के पीछे था.
पुलिस ने रीवा के मोबाइल का इनबौक्स, काल लौग और उस से खींचें गए फोटो देखे तो इनबौक्स और काल लौग में तो कुछ नहीं मिला, लेकिन गलती से उस के मोबाइल में मोनू के साथ एक सेल्फी रह गई थी. उस फोटो को मृतक के बेटे फैंडली को दिखाया गया तो उस ने बताया कि यही वह मोनू है, जो उस रात उस के घर आया था.
पुलिस को अब मोनू को पकड़ना था. पुलिस को उस की लोकेशन मिल गई थी, इसलिए छापा मार कर तुरंत उसे गिरफ्तार कर लिया गया. वही असली मोनू था. रीवा के बेटे फैंडली ने उस की शिनाख्त भी कर दी. पूछताछ में उस ने अपना अपराध भी स्वीकार कर लिया. उस का नाम अजय उर्फ अभिमन्यु उर्फ मोनू चौधरी था.
बाबू की हत्या अवैध संबंधों की वजह से हुई थी. मोनू के अपराध स्वीकार कर लेने के बाद पुलिस ने रीवा को भी गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने जब उस से बाबू की हत्या के बारे में पूछताछ की तो उस ने खुद को निर्दोष बताया. लेकिन जब उस का सामना मोनू से कराया गया तो उस ने भी अपना अपराध स्वीकार कर लिया. इस के बाद दोनों ने बाबू की हत्या की जो कहानी बताई, वह अवैध संबंधों की घिनौनी कहानी थी.
रीवा के पिता रतन बहुत पहले तमिलनाडु से मुंबई आ गए थे. मुंबई के उपनगर अंधेरी कुर्ला रोड पर स्थित जरीमरी बस्ती में उन के गांव के तमाम लोग रहते थे, इसलिए वह भी वहीं रहने लगे. उन्हें यहां कोई ढंग का काम नहीं मिला तो उन्होंने बस्ती के नाके पर पानबीड़ी का स्टाल लगा लिया. इसी की कमाई से उन के परिवार की गुजरबसर हो रही थी. उन के परिवार में पत्नी शांति के अलावा 2 बेटे और एक बेटी रीवा थी.
रीवा जब कालेज में पढ़ रही थी, तभी उसे प्राइमरी स्कूल से कालेज तक साथ पढ़ने वाले रमन से प्यार हो गया था. रीवा ने जहां ग्रेजुएशन कर के बीटीसी की, वहीं रमन की नौकरी दूसरे शहर में लग गई. इस के बावजूद वह रीवा से मिलता रहता था. रीवा रमन से शादी करना चाहती थी, लेकिन जब उस ने पिता से बात की तो उन्होंने रमन से उस की शादी करने से मना ही नहीं किया, बल्कि आननफानन में पड़ोस में रहने वाले अपनी ही जाति के बाबू से उस की शादी कर दी. मजबूरन रीवा को यह रिश्ता स्वीकार करना पड़ा.
बाबू कपड़ों की सिलाई का काम करता था और अपने बड़े भाई यशु के साथ रहता था. वह समाजसेवा के कामों में भी रुचि लेता था, इसलिए समाजसेवा करतेकरते एक समय ऐसा भी आया, जब वह रामदास अठावले की भारतीय रिपब्लिकन पार्टी से जुड़ गया. सामाजिक कार्यकर्ता होने की वजह से उसे जरीमरी बौद्ध विहार मंदिर का अध्यक्ष बना दिया गया था. शादी के कुछ दिनों तक तो बाबू अपने भाई के साथ रहा, लेकिन जल्दी ही उस ने उसी चाल में अपना खुद का मकान खरीद लिया और पत्नी के साथ रहने लगा. आगे चल कर संतान के रूप में उस के यहां 2 बेटे हुए, जिन में जीतू अब 17 साल का है और फैंडली 5 साल का.
बाबू की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी, इसलिए रीवा भी साकीनाका सफेद पुल के पास एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाने लगी. इस से भी घर की हालत में सुधार नहीं आया तो बेटा जीतू भी किसी कंपनी में रात की ड्यूटी पर जाने लगा. वह शाम को जाता था तो सुबह ही आता था. रीवा की शादी भले ही बाबू से हो गई थी, लेकिन वह अपने पहले प्रेम को भुला नहीं पाई थी. शादी के बाद भी वह अपने प्रेमी रमन से मिलती रही, जबकि रमन की भी शादी हो गई थी. उस के भी बच्चे हो गए थे. शादी के कुछ दिनों बाद बाबू को इस की जानकारी हुई तो इस बात को ले कर अकसर दोनों में लड़ाईझगड़ा होने लगा.
किसी भी चीज की एक हद होती है. हद खत्म होते ही आदमी बगावत पर उतर आता है. रीवा की भी सहनशक्ति की हद खत्म हो चुकी थी. वह रोजरोज के लड़ाईझगड़े और मारपीट से तंग आ चुकी थी, इसलिए वह पति से छुटकारा पाना चाहती थी. लेकिन सवाल यह था कि यह काम करवाया किस से जाए. जिस से वह सुकून की जिंदगी जी सके. इसी चक्कर में रीवा की जिंदगी में मोनू आया. 22 वर्षीय मोनू उर्फ अजय उर्फ अभिमन्यू चौधरी उत्तर प्रदेश के जिला महाराजगंज का रहने वाला था. काम की तलाश में वह मुंबई आया तो यहां गांव वालों के साथ कारपेंटर का काम करने लगा. मोनू की रीवा से मुलाकात उसी के स्कूल में हुई थी. मोनू स्कूल में फर्नीचर का काम करने आया था.
काम के दौरान ही रीवा उस से मिली तो न जाने क्यों उसे लगा कि यह आदमी उस का काम कर सकता है. फिर वह उस के आगेपीछे घूमने लगी. मोनू भी बच्चा नहीं था. उस के हावभाव से समझ गया कि वह क्या चाहती है. फिर दोनों जल्दी ही करीब आ गए. रीवा को मोनू से अपना काम निकलवाना था, इसीलिए वह उस के करीब आई थी. यही नहीं, अपने मकसद के लिए उस ने मोनू को अपना तन भी सौंप दिया. इस के बाद तो मोनू पूरी तरह उस के वश में हो गया. मोनू से बातचीत के लिए उस ने अपने नाम से एक सिमकार्ड भी ला कर उसे दे दिया था.
उस ने ऐसा इसलिए किया था कि एक तो कोई उस के इस रिश्ते पर शक न कर सके, दूसरे वह आसानी से उस के पति की हत्या के आरोप में फंस जाए. उस ने सोचा था कि पुलिस उसे गिरफ्तार कर के जेल भेज देगी, उस के बाद वह आसानी से अपने प्रेमी रमन से मिल सकेगी. इधर एक महीने से उस ने मोनू से मिलनाजुलना कम कर दिया था. जबकि मोनू उस से मिले बगैर रह नहीं सकता था. जब उस ने यह बात रीवा से कही तो उस ने कहा कि उस के संबंधों की जानकारी पति को हो गई है, जिस की वजह से वह उसे मारतापीटता है. अगर उसे उस से मिलनाजुलना है तो उस के पति नाम के इस कांटे को निकाल फेंके.
रीवा के प्रेम में मोनू कुछ इस तरह पागल था कि वह उस के लिए कुछ भी करने को तैयार था. भले ही वह उस के पति की हत्या ही क्यों न हो. रीवा यही तो चाहती थी. मोनू ने हामी भर दी तो उस ने उस के साथ मिल कर बाबू की हत्या की योजना बना डाली. 16 जुलाई की रात का समय भी तय हो गया. उस रात रीवा ने मकान का दरवाजा खुला छोड़ दिया. बड़ा बेटा अपनी ड्यूटी पर था. रीवा घर में छोटे बेटे के साथ थी. रात एक बजे के करीब मोनू दबे पांव उस के यहां पहुंचा. रीवा धीरे से फैंडली के पास से उठी और उस के साथ बाबू की चारपाई के पास आ गई. गहरी नींद में सो रहे बाबू के गले में उस ने अपना दुपट्टा डाल दिया तो दोनों ने उसे पूरी ताकत से कस दिया. पलभर छटपटा कर बाबू ने दम तोड़ दिया.
बाबू को मौत के घाट उतार कर दोनों कई बार उस के पास आएगए. जब उन्हें विश्वास हो गया कि वह मर चुका है तो मोनू जोगेश्वरी स्थित अपने घर चला गया. रीवा सुबह उठी और स्कूल चली गई. सभी सामान्य रूप से अपनेअपने काम में लग गए. उन्हें पता नहीं था कि रात में फैंडली जाग गया था और उस ने मां और मोनू की हरकतों को देख लिया था. पूछताछ के बाद पुलिस ने मोनू उर्फ अजय उर्फ अभिमन्यु और रीवा के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर अंधेरी की अदालत में पेश किया, जहां से दोनों को न्यायिक हिरासत में आर्थर रोड जेल भेज दिया गया. Mumbai Crime






