UP Crime News: पति द्वारा साथ छोड़ देने के बाद नीलिमा ने अपने जुड़वां बच्चों हार्दिक और दीपशिखा की अच्छी परवरिश करते हुए उच्चशिक्षा भी दिलवाई. दोनों बच्चे गुरुग्राम की अच्छी कंपनियों में जौब कर रहे थे. फिर एक दिन ऐसा क्या हुआ कि अपनी बहन दीपशिखा को पलकों पर बिठा कर रखने वाले 25 वर्षीय हार्दिक ने बहन दीपशिखा की चाकू से गोद कर न सिर्फ हत्या कर दी, बल्कि मम्मी नीलिमा को भी लहूलुहान कर दिया. उच्चशिक्षित हार्दिक ने ऐसा क्यों किया?
मुरादाबाद के दिल्ली रोड स्थित बुद्धि विहार में नीलिमा किराए के मकान में रहती थी. करीब 2 साल से वह इस मकान में अपने जुड़वां बच्चों 25 वर्षीय दीपशिखा व हार्दिक के साथ रह रही थी. दीपशिखा वर्तमान में गुरुग्राम में स्थित आईटी कंपनी विप्रो में असिस्टेंट मैनेजर के पद पर कार्यरत थी. जबकि उस का भाई हार्दिक बीटेक कर के गूगल में सर्विस करता था. गुरुग्राम में भी एक साल पहले हार्दिक ने गूगल की नौकरी छोड़ दी थी. वह अब यूट्यूबर बन गया था. जुड़वां भाईबहन दीपशिखा व हार्दिक गुरुग्राम के सेक्टर-23 के एक फ्लैट में रह रहे थे.
3 मार्च, 2026 को दीपशिखा व हार्दिक कार द्वारा गुरुग्राम से अपनी मम्मी नीलिमा के पास बुद्धि विहार में होली मनाने आए थे. नीलिमा दिल्ली रोड स्थित एक निजी बीमा कंपनी में असिस्टेंट मैनेजर के पद पर कार्यरत थी.
तीनों ने 4 मार्च, 2026 को खूब रंगगुलाल से होली खेली. सभी लोग खुश थे, खुशनुमा माहौल था. पढ़ेलिखे अच्छी प्रोफाइल वाले मुरादाबाद के इस परिवार में 6 मार्च, 2026 को ऐसी वारदात हुई, जिस से शहर में सनसनी फैल गई. हार्दिक पुणे (महाराष्ट्र) की एक मुसलिम युवती से प्यार करता था. वह उस युवती से शादी करना चाहता था. मम्मी नीलिमा और बहन दीपशिखा इस शादी का विरोध कर रही थीं, जिस कारण हार्दिक नाराज था.
करीब 7 महीने पहले मुसलिम प्रेमिका से हार्दिक का ब्रेकअप हो गया था, जिस के कारण वह डिप्रेशन में रहने लगा था. होली पर उसी प्रेमिका को ले कर नीलिमा, दीपशिखा व हार्दिक में आपस में कहासुनी हुई थी. हार्दिक का कहना था कि तुम लोगों की वजह से ही मेरा मेरी दोस्त से ब्रेकअप हुआ है. बात आईगई हो गई थी.
इसी बीच हार्दिक के दिमाग में ऐसा फितूर चढ़ा कि उस ने 6 मार्च, 2026 की दोपहर करीब 12 बजे अपनी बहन दीपशिखा की चाकू से हत्या कर दी. फिर उस की लाश कंबल में लपेट कर पलंग पर डाल दी. उस समय हार्दिक की मम्मी अपने औफिस में थी. दीपशिखा की हत्या कर हार्दिक तुरंत ही कार ले कर मम्मी के औफिस पहुंच गया था. वहां पहुंच कर वह अपनी मम्मी से बोला, ”मम्मी, हम भाईबहन गुरुग्राम जा रहे हैं. आप घर चलो, हमें विदा करो. वैसे भी हम दोनों आप को सरप्राइज देंगे.’’
बेटे के चेहरे पर मुसकान देख कर नीलिमा ने समझा कि दोनों ने कोई प्लान बनाया होगा. बेटे के साथ कार में बैठ कर नीलिमा औफिस से घर आ गई. घर में दाखिल होते ही दीपशिखा का खून में लथपथ शरीर कंबल में लिपटा बैड पर पड़ा दिखाई दिया. यह सब देख कर नीलिमा की चीख निकल गई.
वह चीखते हुए बोली, ”यह हाल किस ने किया है?’’
चीख इतनी तेज थी कि आसपास रहने वालों को सुनाई दी.
बस इसी दौरान हार्दिक ने अपनी मम्मी का मुंह एक हाथ से दबा दिया व जेब से चाकू निकाल कर अपनी मम्मी नीलिमा पर भी वार करने लगा था.
लहूलुहान मांबेटी
अचानक हुए हमले से नीलिमा ने हार्दिक का चाकू वाला हाथ पकड़ लिया था, जिस कारण उन के हाथ की कई अंगुलियां कट गई थीं. हार्दिक ने इस के बाद अपनी मम्मी नीलिमा की गरदन पर भी वार किया. चाकू का एक वार कंधे पर किया. चीखपुकार सुन कर आसपड़ोस के लोग नीलिमा के घर के अंदर आने लगे तो गंभीर रूप से घायल नीलिमा फिर चिल्लाई कि पकड़ो इसे, इस ने मेरी बेटी दीपशिखा की हत्या की है और मुझे भी मारना चाह रहा था. जब हार्दिक ने देखा कि पड़ोसी आ गए हैं तो वह चाकू लहराता हुआ अपनी कार में बैठ कर वहां से भाग गया था.


बहन दीपशिखा की जिस कमरे में हत्या हुई, वहां की जांच करतो फॉरेंसिक टीम
लोगों ने तुरंत ही थाना मझोला पुलिस को फोन द्वारा इस वारदात की सूचना दे दी. सूचना पाते ही एसएचओ रविंद्र कुमार मय फोर्स के घटनास्थल पर पहुंच गए थे. पुलिस ने तुरंत दीपशिखा और उस की मम्मी नीलिमा को जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां डौक्टरों ने दीपशिखा को देखते ही मृत घोषित कर दिया था. नीलिमा के घाव गंभीर थे, उसे एडमिट कर के हाथ व गरदन व गंधे पर चाकू के वार थे. उपचार शुरू कर दिया था. दीपशिखा का शव मोर्चरी में रखवा दिया था.
घटना की सूचना मिलते ही मुरादाबाद के एसएसपी सतपाल अंतिल, एसपी (सिटी) कुमार रणविजय सिंह व सीओ कुलदीप गुप्ता जिला अस्पताल पहुंचे और घायल नीलिमा से बात की. उधर पुलिस ने दीपशिखा का शव पोस्टमार्टम हाउस भिजवा दिया था. जिला अस्पताल के 2 डौक्टरों डा. मनोज यादव और डा. दुर्गेश्वर की टीम ने 25 वर्षीय दीपशिखा के शव का पोस्टमार्टम किया.
पोस्टमार्टम की विडियोग्राफी व फोटोग्राफी भी करवाई गई. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दीपशिखा के शरीर पर 80 घाव मिले थे. उस की गरदन रेत कर हत्या की गई थी. सिर से ले कर पैर तक घाव ही घाव थे. एसएसपी सतपाल अंतिल ने इस जघन्य अपराध के अभियुक्त हार्दिक की गिरफ्तारी के लिए 4 पुलिस टीमों को लगाया. पुलिस टीम में थाना मझोला के एसएचओ रविंद्र कुमार, एसआई तेजपाल, शिवम, हैडकांस्टेबल रविंद्र, प्रमोद शर्मा, बेअंत सिंह, दिनेश कुमार आदि को शामिल किया गया.
पुलिस ने 7 मार्च, 2026 को हार्दिक को मुरादाबाद के जीरो पौइंट से उस समय गिरफ्तार कर लिया, जब वह बाहर भागने की फिराक में था. पूछताछ में हार्दिक ने पुलिस को बताया कि बहन की हत्या के बाद वह जेल चला जाता. ऐसे में मम्मी अकेली रह जातीं, इसलिए उस ने मम्मी को भी मारने की कोशिश की.
हार्दिक एसपी (सिटी) कुमार रणविजय सिंह को भी गुमराह कर रहा था. तब उन्होंने उसे डांटते हुए कहा कि तुम ने अपनी बहन की हत्या की, उस के बाद अपनी मम्मी को भी मौत के घाट उतारने की कोशिश की. अब तुम पूरी जिंदगी जेल की रोटियां खाओगे. कुमार रणविजय सिंह ने उस से यह भी पूछा कि तुम्हारी मुसलिम प्रेमिका से जब तुम्हारा ब्रेकअप हो गया था, तब तुम ने इतना बड़ा कदम क्यों उठाया? तुम दोनों भाग कर भी विवाह कर सकते थे. हत्या करने की और कोई वजह तो नहीं है.
इतना सुनते ही आरोपी हार्दिक ने नीचे निगाह कर ली थी. इस के बाद उस ने बहन की हत्या करने की सारी कहानी पुलिस को बता दी. नीलिमा मूलरूप से उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले की रहने वाली थी. इन की शादी पीलीभीत निवासी इंद्रजीत सिंह के साथ हुई थी. करीब 21 वर्ष पहले इंद्रजीत सिंह नीलिमा को छोड़ कर अलग हो गए थे. इंद्रजीत सिंह से 25 साल पहले नीलिमा को जुड़वां बेटीबेटा पैदा हुए थे.
नीलिमा पढ़ी लिखी थी. नीलिमा को अकेला छोड़ कर इंद्रजीत सिंह कहीं चले गए, जोकि आज उन का कोई अतापता नहीं है. नीलिमा ने बदायूं में प्राइवेट नौकरी कर अपने दोनों बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलवाई थी. बेटी को बीबीए करवाया, बेटे हार्दिक को बीटेक करवाया था.
दोनों गुरुग्राम में जौब करते थे. दीपशिखा विप्रो कंपनी में असिस्टेंट मैनेजर के पद पर कार्यरत थी. बेटा हार्दिक गूगल में सर्विस करता था. एक साल पहले गूगल की सर्विस छोड़ कर वह यूट्यूबर बन गया था. इंस्टाग्राम पर उस के 13 हजार से ज्यादा फालोअर हैं. 2 साल से वह मुरादाबाद में रह रहा था. दोनों बच्चों को नीलिमा ने अनगिनत मुश्किलों से लड़ते हुए पाला था. दोनों बहनभाई में बहुत प्यार था.
बहन दीपशिखा गुरुग्राम में अपने भाई हार्दिक का खूब खयाल रखती थी. नौकरी छूटने के बाद हार्दिक के सामने पैसों की कमी आ गई थी. वह अकसर अपनी मम्मी नीलिमा से पैसे मांगता रहता था.
प्रेमिका की खातिर खून
पुणे (महाराष्ट्र) की रहने वाली मुसलिम प्रेमिका के चक्कर में हार्दिक की नौकरी छूट गई थी, जो पैसा उसे गूगल की नौकरी से मिलता था, अधिकतर पैसा वह अपनी प्रेमिका पर खर्च करता था. घटना से 7 महीने पहले प्रेमिका से ब्रेकअप होने के बाद हार्दिक डिप्रेशन में रहता था. दीपशिखा उसे समझाती थी कि प्रेमिका दूसरे धर्म की है, उस से तुम्हारी कभी नहीं बनेगी. तो हार्दिक बहन पर हमलावर हो जाता था.


हार्दिक की घायल मम्मी नीलिमा को अस्पताल से इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई
वैसे हार्दिक का व्यवहार शांत था, लेकिन जब उस की प्रेमिका का जिक्र आता तो वह आक्रोशित हो जाता था. उस के व्यवहार में बदलाव आने का परिवार को महसूस तो हो रहा था, लेकिन यह पता नहीं था कि वह हत्या का प्लान बना चुका था. घटना से कुछ दिन पहले उस ने एक वीडियो पोस्ट किया, जिस में वह कह रहा है कि इंसान को गुलामी नहीं आजाद जिंदगी जीनी चाहिए. उस के अलावा उस ने अपनी बहन दीपशिखा के साथ कई वीडियो बनाए. उन्हें पोस्ट किया, जिस में वह बोलता है कि 20 साल बाद फेमिली वालों को अपने बच्चों को आजादी देनी चाहिए.
यह परिवार 1990 में बदायूं से मुरादाबाद आ कर बस गया था. अधिकतर जगह किराए पर रहा था. दीपशिखा की हत्या जिस मकान में हुई थी, वह मकान भी किराए पर था. डिप्रेशन में चल रहे हार्दिक ने अपने प्यार के लिए बहन और मम्मी को मारने का प्लान तैयार किया था. घटना से कुछ दिन पहले भी उस ने बदायूं के अपने परिचित व दोस्तों से तमंचा प्राप्त करने की कोशिश भी की थी, लेकिन सभी ने हाथ खड़े कर लिए थे.
पहले हार्दिक बहन और मम्मी की हत्या गोली मार कर करना चाहता था. जब तमंचे का इंतजाम नहीं हुआ तो उस ने चाकू से हत्या करने का प्लान बना डाला था. घटना से एक दिन पहले हार्दिक ने अपनी मम्मी को दिल्ली के 3 वकीलों के फोन नंबर दिए थे. नंबर देते समय वह बोला कि इन की जरूरत आगे पड़ेगी. नीलिमा ने समझा कि हार्दिक शायद अपनी प्रेमिका से शादी करने जा रहा है, इसलिए वकीलों के फोन नंबर दे रहा है. नीलिमा ने हार्दिक से आगे सवाल नहीं किया था, क्योंकि उस समय वह मानसिक रूप से परेशान दिखाई दे रहा था.
नीलिमा के परिवार की एक दुकान शहर बदायूं की मेन बाजार में थी. वह दुकान नीलिमा के परिजनों ने एक करोड़ रुपए में बेची थी. उस में नीलिमा भी हिस्सेदार थी. यह दुकान पिछले वर्ष सितंबर 2025 में बिकी थी. नीलिमा के हिस्से में करीब 25 से 30 लाख रुपए आए थे. वह पैसे नीलिमा के पास थे. बेटा हार्दिक अकसर अपनी मम्मी से उक्त पैसों की मांग करता था.

डिप्रेशन में चल रहे हार्दिक ने अपने प्यार के लिए बहन और मम्मी को मारने का प्लान तैयार किया था. घटना से कुछ दिन पहले भी उस ने बदायूं के अपने परिचित व दोस्तों से तमंचा प्राप्त करने की कोशिश की थी, लेकिन सभी ने हाथ खड़े कर लिए थे.
नीलिमा कहती थी कि तुम लोग बड़े हो गए हो, तुम नौकरी भी करते हो. तूने नौकरी क्यों छोड़ी? अब भी समय है, अपनी नौकरी जौइन कर ले या अन्य किसी कंपनी में जौब ढूंढो. इन पैसों से मुझे मकान खरीदना है. हम लोग कब तक किराए पर रहेंगे. तुम्हारी शादियां भी करनी हैं. यह पैसा मैं ने फिक्स करवा दिया है.
हत्या का दूसरा पहलू

हार्दिक उक्त पैसा अकसर मांगता था. नीलिमा ने पैसा देने से साफ मना कर दिया. पैसा देने के मामले में बहन दीपशिखा अपनी मम्मी का साथ देती थी. जिस कारण हार्दिक दीपशिखा से चिढ़ जाता था. 9 मार्च, 2026 को नीलिमा की अस्पताल से छुटटी मिल गई थी. उस से पहले 7 मार्च, 2026 को दीपशिखा के पोस्टमार्टम के बाद उस के शव को परिवार के लोगों के सुपुर्द कर दिया था. दीपशिखा के मामा ने मुखाग्नि दी. नीलिमा ने जिस बेटी को 25 साल तक पालपोस कर बड़ा किया, उस की मौत के बाद उस के अंतिम दर्शन भी न कर सकी. आरोपी हार्दिक से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने उसे 7 मार्च, 2026 को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया. UP Crime News






