IPS Love Story: यूपी के आईपीएस अधिकारियों की एक जोड़ी इन दिनों मीडिया की सुर्खी और इंटरनेट पर छाई हुई  है. आईपीएस अधिकारी कृष्ण कुमार बिश्नोई और आईपीएस अंकिता वर्मा की लव स्टोरी की शुरुआत मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी के गृह जनपद गोरखपुर में तैनाती के दौरान हुई. इस के बाद दोनों 29 मार्च, 2026 को सामाजिक रीतिरिवाज से विवाह बंधन में बंध गए. इन के विवाह की कुछ बातें इतनी दिलचस्प रहीं कि…

संभल के एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई और बरेली की एएसपी अंशिका वर्मा आखिर 29 मार्च को विवाह बंधन में बंध गए. इन दोनों आईपीएस अधिकारियों के विवाह की खबरें देश भर की मीडिया और सोशल मीडिया में छाई रहीं. बाड़मेर से ले कर जोधपुर तक में आयोजित इस भव्य शादी और प्री वेडिंग कार्यक्रमों में दोनों अफसरों का फिल्मी और पारंपरिक अंदाज सोशल मीडिया की सुर्खी बना रहा.

उत्तर प्रदेश के जिला संभल के एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई और बरेली (दक्षिण) की एएसपी अंशिका वर्मा के विवाह की रस्में राजस्थान के बाड़मेर स्थित ‘कृष्ण निवास’ और जोधपुर के अजीत पैलेस में संपन्न हुईं. हालांकि आईपीएस अंशिका वर्मा मूलरूप से यूपी के प्रयागराज की रहने वाली हैं, लेकिन उन्होंने कृष्ण के साथ दांपत्य जीवन की शुरुआत करने के लिए राजस्थान में बिश्नोई समाज में होने वाली शादी की सभी रस्मों को पूरी शिद्दत से निभाया.

हल्दी कार्यक्रम में परिवार के सदस्यों के साथ आईपीएम कृष्ण कुमार विश्नोई

पहले बाड़मेर में बारात सभा की सभी रस्में पूरी हुईं, जिस में कृष्ण कुमार बिश्नोई पारंपरिक राजस्थानी जोधपुरी सूट, पगड़ी और कृपाण धारण कर शामिल हुए. ढोलनगाड़ों और फिल्मी गानों के बीच बारात जोधपुर के लिए रवाना हुई.

बारात सभा के दौरान एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई के हाथों में मेहंदी भी लगाई गई. मेहंदी की रस्म के दौरान वे काफी खुश नजर आए और संगीत की धुन पर जम कर झूमते भी दिखे. इस से पहले 27 मार्च को हल्दी और संगीत का कार्यक्रम हुआ था, जहां पूरे परिवार ने ढोलनगाड़ों के साथ जश्न मनाया. सोशल मीडिया पर इन रस्मों के वीडियो और तसवीरें खूब वायरल हुईं, जिस में कृष्ण कुमार बिश्नोई और अंशिका वर्मा का मस्ती भरा अंदाज दिखा.

सगाई और रिंग सेरेमनी के दौरान यह आईपीएस जोड़ी पूरी तरह फिल्मी रंग में रंगी दिखी. कृष्ण कुमार बिश्नोई ने ‘प्यार का सिग्नल…’ गाने पर जम कर डांस किया और फिर ‘चल प्यार करेगी…’ गाने पर शानदार स्टेज परफारमेंस दी. इस दौरान कृष्ण कुमार बिश्नोई ने अंशिका को गोद में उठा लिया, जिसे देख मेहमानों ने खूब तालियां बजाईं. उन्होंने अपने पापा सुजाना राम बिश्नोई के साथ ‘पापा कहते हैं…’ गाने पर भी डांस कर सब का दिल जीत लिया.

बाड़मेर से बारात जोधपुर के लिए रवाना होने के बाद जोधपुर के मशहूर अजीत पैलेस में 29 मार्च, 2026 को कृष्ण कुमार बिश्नोई ने अंशिका वर्मा के संग सात फेरे लिए और एकदूसरे के जीवनसाथी बन गए. शादी के बाद 30 मार्च को जोधपुर के ही लारिया रिसौर्ट में एक भव्य रिसैप्शन का आयोजन किया गया, जिस में संभल, बरेली व यूपी के अनेक पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी भी शामिल हुए. साथ ही कई दिग्गज हस्तियां भी इस शादी के गवाह बनीं.

आईएएस हो या आईपीएस, होते तो सब इंसान ही है. समाज का अभिन्न अंग होने के कारण उन की भी शादियां होती हैं. फिर अगर आईपीएस कृष्ण कुमार बिश्नोई और अंशिका वर्मा की शादी हो गई तो इतना प्रचारित किए जाने की क्या बात है? यह सवाल सभी के जेहन में होगा कि इंटरनेट की दुनिया इन दोनों की शादी पर इतनी सुर्ख क्यों है? शादी के पारंपरिक अंदाज की फोटो से ले कर बेहद खूबसूरत वीडियो क्यों लोगों को इस शादी से जोड़ रहे हैं? दरअसल, इस अनोखी शादी की कई बातें हैं, जो दूसरी शादियों से अलहदा हैं.

पहला तो यही कि कृष्ण कुमार बिश्नोई और अंशिका वर्मा दोनों भारतीय पुलिस सेवा से जुड़े हैं. दूसरे उन की पहली नियुक्ति शुरुआती दौर में एक ही शहर यूपी के गोरखपुर में रही. दोनों की प्रेम कहानी उसी समय शुरू हुई. बाद में एक दूजे की पसंद गहरे प्रेम में तब्दील हो गई और 3 साल बाद दोनों एक दूजे के हो गए. तीसरे पुलिस विभाग में लोकप्रियता की बुलंदियों को छूने वाले इस जोड़े ने आधुनिक तामझाम को छोड़ कर बेहद पारंपरिक ढंग से सभी रीतिरिवाजों और मान्यताओं को अपनाते हुए शादी की रस्में पूरी कीं, जो अधिकांश नौकरशाही से जुड़े लोग नहीं करते.

कृष्ण कुमार बिश्नोई ने इस शादी से दहेज प्रथा पर भी प्रहार किया. उन्होंने अपनी शादी में पारंपरिक दिखावे और दहेज के दिखावे को पूरी तरह नकार दिया. उन्होंने अपनी पत्नी अंशिका वर्मा से शादी में केवल एक रुपया और एक नारियल शगुन के तौर पर स्वीकार किया. यह शादी न केवल उन के सादगीपूर्ण जीवन को दर्शाती है, बल्कि दहेज प्रथा के खिलाफ एक मिसाल भी है. दोनों की शादी के बारे में विस्तार से जानना इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि कृष्ण कुमार बिश्नोई जहां संभल जिले में एसपी के पद पर रहते हुए कई कारणों ये राष्ट्रीय चर्चा का विषय बने तो वहीं अंशिका वर्मा बरेली जिले में एएसपी रहते हुए लेडी सिंघम के रूप में विख्यात हुईं.

ऐसे लोकप्रिय जोड़े की शादी और लव स्टोरी लोगों के लिए प्रेरणास्रोत साबित होगी, इसलिए उन की शादी और लव स्टोरी को बताना बेहद जरूरी है.

कौन हैं एसपी बिश्नोई

दरअसल, इस प्रेम कहानी के नायक हैं संभल के एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई, जो अपनी सख्त प्रशासनिक कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं. एक अनूठी प्रेम कहानी का नायक होने और आईपीएस बनने से पहले कृष्ण कुमार बिश्नोई के जीवन संघर्ष की भी एक गाथा है, जो देश से प्यार करने वालों और कुछ अलग करने वालों की चाह रखने वालों के लिए प्रेरणादायक है.

राजस्थान के बाड़मेर जिले में धोरीमना गांव से ताल्लुक रखने वाले साधारण किसान परिवार में कृष्ण कुमार बिश्नोई का जन्म हुआ था. वह बेहद ही साधारण परिवार से ताल्लुक रखते हैं. कृष्ण कुमार बिश्नोई 6 भाईबहनों में सब से छोटे हैं. उन के फादर का नाम सुजानाराम बिश्नोई है जबकि मम्मी गंगा देवी कुशल गृहिणी हैं. कृष्ण कुमार बिश्नोई के सब से बड़े भाई भजन लाल बिश्नोई ही गांव में खेतीबाड़ी का काम संभालते हैं.

वर कृष्ण कुमार विश्नोई और अंशिका वर्मा दोनों ही भारतीय पुलिस सेवा से जुड़े हैं

छोटी सी खेतीबाड़ी के जरिए कड़ी मेहनत से 6 बच्चों के बड़े परिवार को पालना कोई आसान काम नहीं था, लेकिन कृष्ण के पापा जानते थे कि उन की कठिन मेहनत में ही उन के बच्चों का उज्जवल भविष्य छिपा है. वह अपने सभी बच्चों को उन की इच्छानुसार शिक्षा दिला कर कामयाब इंसान बनाना चाहते थे. परिवार के सभी बच्चों ने उन की इच्छा को पूरा भी किया.  सब से छोटे कृष्ण कुमार ने गांव के ही प्राइमरी स्कूल से पढ़ाई की. बचपन से ही वह पढऩेलिखने में काफी तेज थे. 8वीं क्लास में उन्होंने पूरे जिले में टौप किया. इस के बाद आगे की पढ़ाई सीकर और फिर जोधपुर के केंद्रीय विद्यालय में की.

उन्होंने दिल्ली के सेंट स्टीफेंस कालेज से ग्रैजुएशन किया. फिर फ्रांस सरकार की स्कौलरशिप पर अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा में मास्टर डिग्री हासिल की. इस के बाद उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में एक साल तक काम किया, जहां उन्हें 30 लाख रुपए सालाना का पैकेज मिल रहा था. लेकिन इस सब के बावजूद कुछ ऐसा था, जिस से उन्हें खालीपन महसूस होता था. क्योंकि उन का मन तो देश सेवा में लगा था, इसलिए उन्होंने इस जौब को अलविदा कह दिया. इस के बाद वह वापस अपने वतन लौट आए. शुरू में परिवार तथा दोस्तों ने इस बात के लिए खूब समझाया कि यूएन में इतने बड़े पैकेज की नौकरी छोड़ कर उन्होंने ठीक नहीं किया.

कृष्ण परिवार के साथ सभी दोस्तों की बातें एक कान से सुन कर दूसरे कान से निकाल देते थे. क्योंकि अब उन्होंने ठान लिया था कि भले ही कुछ भी हो, वे समाज सेवा के लिए कोई ऐसी नौकरी करेंगे जो सिस्टम से जुड़ी हो और उन्हें सेवा का अवसर मिले. बहुत विचार करने के बाद उन्हें सिविल सर्विस से जुड़ी सेवा ही एकमात्र ऐसी सेवा दिखी, जिस में रह कर वह अपने अरमानों को पूरा कर सकते थे. लिहाजा उन्होंने सिविल सर्विस में जाने का निश्चय कर लिया, लेकिन इस के लिए जरूरी था कि वह इस के योग्य हों. लिहाजा उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा देने का मन बना लिया.

कृष्ण ने दिल्ली की जवाहर लाल नेहरू यूनिविर्सिटी को अपना अगला ठिकाना बनाया, जहां से उन्होंने पहले एम.फिल किया. इसी बीच उन्होंने विदेश मंत्रालय में भी संविदा कर्मी के रूप में काम किया. साथ ही वह यूपीएससी की तैयारी करते हुए पुलिस अफसर के रूप में अपना करिअर बनाने के सपने संजोने लगे. उन का सपना आईपीएस अफसर बनने का था. उन्होंने इस के लिए कड़ी मेहनत की, लेकिन 2017 के अपने पहले प्रयास में वह सफल नहीं हो पाए. लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अगले साल 2018 में फिर जीतोड़ मेहनत की तो इस बार उन्हें सफलता मिल गई और वह मात्र 24 साल की उम्र में आईपीएस बन गए.

आईपीएस कृष्ण कुमार बिश्नोई अपने मम्मीपापा के साथ विवाह का निमंत्रण कार्ड ले कर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने पहुंचे.

आईपीएस बनने का सपना पूरा होने के बाद उन्हें यूपी कैडर मिला. अंडर ट्रेनी आईपीएस की तैनाती के बाद उन्हें 2019 में मेरठ व 2021 में मुजफ्फरनगर में बतौर एएसपी तैनाती मिली. 2022 में उन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जिले गोरखपुर में एसपी (सिटी) के रूप में बड़ी तैनाती मिली. गोरखपुर में 29 महीने तक एसपी (सिटी) रहते हुए उन्होंने संगठित अपराध पर कड़ा प्रहार किया था. वहां उन्होंने अपराधियों की लगभग 803 करोड़ रुपए की अवैध संपत्ति कुर्क की थी, जिस के डर से कई अपराधी शहर छोड़ कर भाग खड़े हुए थे.

इस दौरान वह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के काफी करीब माने जाते रहे. जब भी मुख्यमंत्री गोरखपुर मठ आते थे तो बिश्नोई सुरक्षा व्यवस्था में पूरी मुस्तैदी के साथ कमान संभालते थे. उन्हें साल 2024 में गोरखपुर से संभल जिले में एसपी के रूप में तैनात किया गया. दरअसल, संभल पश्चिमी उत्तर प्रदेश का एक अति संवेदनशील जिला है, जहां मुसलिम आबादी की अधिकता के कारण अकसर छोटेछोटे धार्मिक कारणों से सांप्रदायिक तनाव पैदा हो जाते हैं. इस क्षेत्र में अकसर अल्पसंख्यक आबादी से जुड़े विपक्षी राजनीतिज्ञ पुलिस पर हावी हो जाते हैं. कड़े फैसले न लेने की इच्छा शक्ति और दबाव के चलते पुलिस का मनोबल गिरा रहता था.

सख्त फैसलों से बने सुपर कौप

संभल की सुरक्षा को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक ऐसे पुलिस अधिकारी की लंबे समय से तलाश थी, जो किसी भी दबाव में काम न करे. जिस में सही फैसले लेने की इच्छाशक्ति हो. ऐसा शख्स उन के सामने ही था, जिसे उन्होंने थोड़ी देर से पहचाना. वह शख्स कोई और नहीं, कृष्ण कुमार बिश्नोई थे, जो सीएम योगी के ही शहर गोरखपुर के एसपी (सिटी) थे. बस, सीएम योगी ने कृष्ण कुमार बिश्नोई को संभल भेजने का फैसला कर लिया. संभल में जौइनिंग से पहले बिश्नोई ने सीएम योगी से मुलाकात की थी, जहां सीएम ने उन्हें शासन की प्राथमिकता गिनाते हुए अपराधियों पर सख्त काररवाई के आदेश दिए.

संभल पहुंचने के बाद बिश्नोई ने कानूनव्यवस्था को ले कर कई सख्त फैसले लिए और प्रशासन के साथ मिल कर जिले में कानून व्यवस्था मजबूत करने के प्रयास किए. इसी के बाद नवंबर, 2024 का वह महीना आया, जब संभल जिले में जामा मसजिद सर्वे के दौरान तनाव की स्थिति पैदा हो गई. इस दौरान हिंसा की घटनाएं सामने आईं. हालात काफी बिगड़ गए, जिसे देख पुलिस प्रशासन ने तुरंत काररवाई की और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया.

पुलिस ने ऐसी व्यूह रचना की, जिस से सांप्रदायिक हिंसा करने वालों का दमन ही नहीं हुआ, बल्कि भविष्य में ऐसा करने की सोच रखने वालों के लिए नजीर बन गई. एसपी बिश्नोई इसी सांप्रदायिक तनाव के बीच उस वक्त सोशल मीडिया पर छा गए, जब उन्होंने उपद्रवी युवाओं को समझाते हुए कहा था कि ‘नेताओं के चक्कर में अपना भविष्य खराब न करें.’ यह वीडियो सोशल मीडिया पर जम कर वायरल हुआ. बताया जाता है कि पुलिस ने बेहद कम समय में हालात को नियंत्रित कर लिया था. हिंसा फैलाने वालों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए और कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया. कानूनव्यवस्था संभालने की इस काररवाई के बाद पुलिस प्रशासन की सक्रियता की चर्चा प्रदेश स्तर तक हुई.

संभल हिंसा पर बड़ी काररवाई करने वाले बिश्नोई को उन के साहसिक नेतृत्व के लिए 2025 में ‘मुख्यमंत्री मेडल’ से सम्मानित किया गया था. हालांकि राजनीतिक रूप से एसपी बिश्नोई की आलोचना जरूर हुई, लेकिन उन्होंने सारी काररवाई विधिसम्मत ढंग से की, इसलिए न्यायपालिका ने भी उन का साथ दिया.

संभल में पुलिस ने उन के नेतृत्व में कानूनव्यवस्था के साथसाथ आर्थिक अपराधों पर भी काररवाई की. बिजली चोरी के खिलाफ अभियान चलाते हुए पुलिस और बिजली विभाग की संयुक्त टीमों ने कई जगहों पर छापेमारी की. इस दौरान बड़ी संख्या में अवैध कनेक्शन पकड़े गए बिश्नोई ने संभल में अपने कार्यकाल में कई बड़े और चर्चित मामलों को सुलझाया है. संभल में 100 करोड़ से अधिक के बीमा धोखाधड़ी घोटाले का खुलासा उन के ही नेतृत्व में हुआ, जिस में 70 से अधिक गिरफ्तारियां की गईं. इस उपलब्धि के लिए उन्हें 26 जनवरी, 2025 को प्लैटिनम पदक और उत्कृष्ट सेवा पुलिस पदक से सम्मानित किया गया.

इस के अलावा नवंबर 2024 में जामा मसजिद सर्वे के दौरान भड़की हिंसा को उन्होंने कुशल रणनीति से नियंत्रित किया, जिस से उन की प्रशासनिक क्षमता की सराहना हुई. संभल में बिटकौइन निवेश के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह के खिलाफ भी उन्होंने कड़ी काररवाई की. इस मामले में आरोपी के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी करवाया गया और पीडि़तों का पैसा वापस दिलाने की प्रक्रिया शुरू की गई.

इस तरह के मामलों में उन की सख्ती ने उन्हें एक प्रभावी और निर्णायक अधिकारी के रूप में स्थापित किया है. उन्हें पुलिस सेवा में उत्कृष्ट कार्य के लिए पुलिस मंथन-2025 सम्मेलन में बेस्ट पुलिस अवार्ड से सीएम योगी ने सम्मानित किया. जिस कारण उन की चर्चा प्रदेश भर में हुई. इस आईपीएस जोड़ी की प्रेम कहानी तब तक अधूरी है, जब तक इस की नायिका के बारे में जानकारी नहीं दी जाए. इस की नायिका हैं आईपीएस अंशिका वर्मा.

अंशिका का बैकग्राउंड

अंशिका वर्मा का जन्म 3 जनवरी, 1996 को उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में हुआ था. उन के पापा अनिल वर्मा उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रिसिटी कारपोरेशन लिमिटेड के रिटायर्ड कर्मचारी हैं और उन की मम्मी हाउसमेकर. अंशिका की 2 बड़ी बहनें भी हैं, जो वर्किंग हैं. अंशिका की एक बहन इंजीनियर हैं और दूसरी अपना खुद का बिजनैस चलाती हैं. अंशिका प्रयागराज के सिविल लाइन इलाके की रहने वाली हैं. वह बचपन से ही पढ़ाई में तेज थीं. मजबूत एनालिटिकल और प्रौब्लम सौल्विंग स्किल्स ने उन्हें और बेहतर बनाया.

कृष्ण और अंशिका दोनों को लगने लगा कि वे एकदूसरे को इतना पसंद करते हैं कि जीवन भर का साथ निभाना जीवन को नई दिशा दे सकता है, कहते हैं इंसान की शिक्षा में ही उस की परिपक्वता छिपी होती है.

शुरुआती पढ़ाई प्रयागराज में करने के बाद उन्होंने अपनी स्नातक की पढ़ाई नोएडा के गलगोटिया कालेज औफ इंजीनियरिंग से की. जहां से उन्होंने 2018 में इलैक्ट्रौनिक ऐंड कम्युनिकेशन में बीटेक डिग्री हासिल की. टेक्निकल बैकग्राउंड होने के बाद भी सिविल सर्विस के प्रति उन के जुनून ने उन्हें यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा में बैठने के लिए प्रेरित किया.

2018 में यूपीएससी की तैयारी शुरू करने के बाद उन का उद्देश्य कानूनव्यवस्था के माध्यम से समाज में योगदान देना था. पहले प्रयास में कुछ दिक्कतें आईं, जिस से उन का पहला अटेंप्ट क्लियर नहीं हो सका. लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. क्योंकि यूपीएससी पास करना उन का जुनून बन गया था. उन्होंने सेल्फ स्टडी से फिर तैयारी की. हर रोज 8 से 10 घंटे तक बगैर कोचिंग के सब्जेक्ट्स पर पढ़ाई करते हुए आगे बढ़ीं.

कहते हैं मेहनत और जुनून के आगे ऊपर वाला भी नतमस्तक हो जाता है. 2020 में अपने दूसरे प्रयास में अंशिका ने यूपीएससी सीएसई क्लियर कर लिया. अंशिका ने शानदार 136वीं आल इंडिया रैंक हासिल की. इसी के साथ उन का चयन भारतीय पुलिस सेवा के लिए हुआ. 2021 में वह इंडियन पुलिस सर्विस में शामिल हुईं और उन्हें कैडर मिला उत्तर प्रदेश. उन की पहली पोस्टिंग आगरा के फतेहपुर सीकरी पुलिस स्टेशन में स्टेशन हाउस औफिसर (एसएचओ) के तौर पर हुई.

किसी भी आईपीएस के लिए जरूरी होता है कि वह नौकरी करने के दौरान पहले 3 महीने किसी थाने में बतौर एसएचओ का कार्यकाल पूरा करे, ताकि वह पुलिसिंग के बेसिक काम सीख सके और एक पीडि़त इंसान किस तरह की पीड़ाओं से गुजारता है, उसे जान सके. 18 दिसंबर, 2023 को उन्हें गोरखपुर में असिस्टेंट सुपरिटेंडेंट औफपुलिस (एएसपी) के पद पर प्रमोट किया गया. एएसपी के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई हाईप्रोफाइल मामलों से निपटने में अहम भूमिका निभाई. कुछ ही समय में अंशिका की गिनती तेजतर्रार पुलिस औफिसर के तौर पर होने लगी.

गोरखपुर में करीब 3 साल तक नौकरी करने के बाद अंशिका वर्मा की पहचान तेजतर्रार आईपीएस अधिकारी के तौर पर होने लगी. अंशिका के तेवर और प्रशासनिक क्षमताओं के कारण मीडिया ने उन्हें ‘लेडी सिंघम’ का नाम दे दिया. नौकरी की शुरुआत से ही महिलाओं से जुड़े मुद्दों और उन की सुरक्षा को प्राथमिकता देना उन के कार्यकाल का मुख्य फोकस रहा है. इस वजह से वह काफी चर्चा में रहती हैं, साथ ही उन की सक्सेस स्टोरी भी लोगों के लिए एक मोटिवेशन का काम करती है.

अनुशासन और कठोर नियम के चलते अंशिका उन पुलिसकर्मियों के बीच दहशत बन गईं, जो लापरवाह और कामचोर थे. अंशिका वर्मा एक पुलिस अधिकारी के तौर पर लोगों की पीड़ा और दर्द को करीब से जानना चाहती थीं, इसलिए वह सादे कपड़ों में कभी भी और कहीं भी अकेले लोगों के बीच निकल पड़तीं. उन्हें कभी अपनी सुरक्षा का खौफ नहीं रहा, क्योंकि पढ़ाई के साथ उन्होंने मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग ले कर आत्मरक्षा के गुर भी सीखे थे. गोरखपुर में 3 साल काम करने के बाद उन का तबादला बरेली जनपद में हो गया. वह बरेली में पहली महिला एसओजी (स्पैशल औपरेशन ग्रुप) कमांडो यूनिट का नेतृत्व कर रही हैं.

अंशिका वर्मा ने अपने कार्यकाल में कई अहम मामलों का खुलासा किया है. उन्होंने गोरखपुर में बदमाश डायना की गिरफ्तारी और स्टांप घोटाले का परदाफाश कर अपनी पहचान बनाई. तभी उन्हें लेडी सिंघम का खिताब भी मिला.

इस सराहनीय काम के लिए उन्हें डीजीपी सम्मान भी मिला. मार्च 2025 में दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स चैंबर औफ कौमर्स एंड इंडस्ट्री के महिला शिखर सम्मेलन में उन्हें ‘वीमन आइकन अवार्ड’ से सम्मानित किया गया, जो उन के कार्य और महिला सशक्तिकरण के प्रति योगदान को दर्शाता है. जब आप सरकारी नौकरी में होते हैं तो बहुत सी बातें और काम ऐसे होते हैं, जिन्हें जनता तक आसानी से नहीं पहुंचाया जा सकता. इस के लिए आज की युवा पीढ़ी के पुलिस व प्रशासनिक अफसरों ने सोशल मीडिया का सहारा लेना शुरू किया है.

अंशिका वर्मा सोशल मीडिया पर भी ऐक्टिव रहने लगीं और अपने नायाब कामों के कारण वह जल्द ही सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रिय हो गईं. इंस्टाग्राम पर तो उन के 6 लाख से अधिक फालोअर्स हैं. बरेली में तैनाती के दौरान अंशिका वर्मा ने कई चर्चित मामलों में सक्रिय भूमिका निभाई. धर्म परिवर्तन से जुड़े मामलों, एनडीपीएस ऐक्ट के तहत काररवाई और हत्या के मामलों में पुलिस टीमों का नेतृत्व करते हुए उन्होंने कई आरोपियों को गिरफ्तार कराया. संवेदनशील मामलों में उन की सक्रियता के कारण पुलिस की काररवाई को गति मिली और कई मामलों में कम समय में खुलासा संभव हुआ.

अंशिका वर्मा उस समय सब से ज्यादा सुर्खियों में आईं, जब उन्होंने महिला सुरक्षा के लिए एक नई पहल शुरू की. वर्ष 2025 में बरेली में उन्होंने ‘वीरांगना यूनिट’ का गठन कराया. यह उत्तर प्रदेश की पहली ऐसी यूनिट मानी जाती है, जिस में विशेष रूप से ट्रेंड महिला पुलिसकर्मियों को शामिल किया गया. इस यूनिट की महिला कमांडो को ताइक्वांडो, आत्मरक्षा और दंगा नियंत्रण जैसी ट्रेनिंग दी गई, ताकि वे संवेदनशील मामलों में तुरंत काररवाई कर सकें. महिला सशक्तिकरण की दिशा में इस पहल को महत्त्वपूर्ण कदम माना गया और इस के लिए उन्हें राज्य सरकार की ओर से सम्मानित भी किया गया.

कृष्ण और अंशिका की लव स्टोरी की शुरुआत 2024 से गोरखुपर में ही हो गई थी, जहां कृष्ण कुमार बिश्नोई एसपी (सिटी) थे और अंशिका वर्मा एएसपी थीं. एक दूजे की कार्यशैली और आदतों में समानता के कारण अंशिका वर्मा और कृष्ण कुमार बिश्नोई एकदूसरे को पंसद तो करने लगे थे. अंशिका जिस दंबग तरीके से काम करती थीं, जिस तरह के फैसले लेती थीं, काम करने के जो मानवीय तरीके अपनाती थीं, उन्हें ले कर कृष्ण कुमार बिश्नोई भरी मीटिग्ंस में न सिर्फ उन की तारीफें करते, बल्कि अपने उच्चाधिकारियों से भी उन की सराहना कर देते थे. कृष्ण कुमार अंशिका के काम करने के तरीकों से बेहद प्रभावित थे.

लेकिन एक ही जिले में दोनों तैनात थे, ऊपर से अंशिका कृष्ण की मातहत अधिकारी थीं, लिहाजा एकदूसरे को पंसद करने के बावजूद दोनों ने कभी एकदूसरे से अपनी पंसद का इजहार नहीं किया. बाद में जब 2025 के बीच अंशिका बरेली में एएसपी बन कर गईं और कृष्ण कुमार संभल में एसपी बन कर अपनी दंबगई दिखा रहे थे तो पहले अकसर फुरसत के पलों में दोनों एकदूसरे की कुशलक्षेम जानने के लिए फोन पर बातचीत करने लगे. बाद में गोरखपुर तैनाती के दौरान पुरानी यादों को ताजा करने लगे. बातचीत के इसी सिलसिले के दौरान कब आत्मीयता इतनी बढ़ गई कि दोनों निजता और परिवार की बातें करने लगे.

कृष्ण और अंशिका दोनों को लगने लगा कि वे एकदूसरे को इतना पसंद करते हैं कि जीवन भर का साथ निभाना जीवन को नई दिशा दे सकता है. कहते हैं इंसान की शिक्षा में ही उस की परिपक्वता छिपी होती है.

सुर्खियों में जोड़ी

कृष्ण और अंशिका का प्रेम भी उन्हीं की तरह परिपक्व था. उन्होंने जब अपने दिल की बात एकदूसरे से बताई तो जाहिर है एक ही सोच रखने वाले इंसानों के बीच सहमति बन ही जाती है. जब दोनों ने अपने प्रेम का इजहार किया तो बात आगे बढ़ी. दोनों ने पहले अपने परिवारों को यह बात बता कर उन की सहमति ली, इस के बाद दोनों परिवारों के बीच बात हुई और फिर इसी साल फरवरी में उन की शादी की बात सार्वजनिक हो गई. फरवरी माह में ही कृष्ण कुमार बिश्नोई तथा अंकिता वर्मा ने संभल में एक सादे समारोह में एकदूसरे को अंगूठी पहना कर अपने रिश्ते की घोषणा कर दी.

जब कृष्ण बिश्नोई तथा अंकिता वर्मा ने शादी का फैसला किया तो के.के. बिश्नोई अपने पेरेंट्स को ले कर सीएम योगी आदित्यनाथ को शादी का निमंत्रण देने पहुंचे थे, तब योगी ने उन के साथ जो फोटो खिंचवाई थी, वह भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई. पुलिस सेवा में काम करने वाले अधिकारियों के लिए व्यक्तिगत जीवन और पेशेवर जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं होता. ऐसे में इन दोनों तेजतर्रार पुलिस अधिकारियों का जीवनसाथी बनने का फैसला अपने आप में चर्चा का विषय बन गया. दोनों अधिकारियों को उन के काम को ले कर प्रदेश स्तर पर पहचान मिल चुकी थी. कई मौकों पर उन की कार्यशैली की चर्चा भी होती रही है.

अब यह जोड़ी जीवन की नई पारी शुरू कर चुकी है. 29 मार्च को राजस्थान के जोधपुर में निजी जीवन में भी एकदूसरे का साथ निभाने की कसमें खा कर उत्तर प्रदेश पुलिस की यह जोड़ी फिर लोगों के बीच सेवा करने के लिए पहुंच गई है. IPS Love Story

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