Haryana Crime Story: अविवाहित मुकेश की फेसबुक द्वारा 2 बच्चों की मां निशा से दोस्ती हुई तो दोनों एकदूसरे से प्यार ही नहीं करने लगे, बल्कि घर छोड़ कर भाग भी गए. लेकिन निशा को अपनी गलती का अहसास हुआ तो वह वापस आ गई. मुकेश को प्रेमिका की यह बेवफाई पसंद नहीं आई और वह उस का खून कर बैठा….
हरियाणा के जिला पानीपत के थाना शहर की राजीव कालोनी में ज्यादातर वे लोग रहते हैं, जो वहां की छोटीबड़ी कंपनियों में काम करते हैं. यहां की आबादी का एक हिस्सा ऐसा भी है, जो बतौर किराएदार रहता है. चोरीचकारी और मारपीट जैसे अपराधों को छोड़ दें तो इस कालोनी में कभी ऐसी कोई बड़ी वारदात नहीं हुई कि यहां के लोग दहल उठते.
लेकिन कब, कहां और किस प्रकार का अपराध घट जाए, इस बात को पहले से कौन जानता है. 3 फरवरी, 2016 की दोपहर को इस कालोनी में जो सनसनीखेज वारदात हुई, उस ने न सिर्फ पुलिस वालों को हैरान कर दिया, वहां रहने वालों को भी डरा दिया. दरअसल, कालोनी के ही एक सिरफिरे नौजवान ने सरेआम चाकू से एक महिला की गला काट कर बेरहमी से हत्या कर दी थी. हैरानी और खौफ पैदा करने वाली बात यह थी कि हत्यारा महिला की लाश के पास ही कुर्सी डाल कर आराम से बैठा था. लोगों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए वह चाकू लहरा कर अंजाम भुगतने की धमकी दे रहा था.
दिल दहलाने वाले इस खूनी मंजर और हत्यारे की धमकी के डर का आलम यह था कि कोई भी आगे बढ़ने की हिममत नहीं जुटा पा रहा था. हत्यारा कह रहा था, ‘‘यह सिर्फ मेरे लिए बनी थी, लेकिन इस ने मेरी होने से मना कर दिया, इसलिए इसे जिंदा रहने का कोई हक नहीं रह गया था.’’
घटना की सूचना पा कर थाना शहर के थानाप्रभारी सुरेश कुमार, किला चौकीइंचार्ज प्रवीण कुमार और महिला एसआई नीलम आर्य पुलिस बल के साथ वहां पहुंच गई थीं. थोड़ी देर में डीएसपी दलबीर सिंह भी आ गए थे. घटनास्थल की हालत देख कर पुलिस वालों के भी रोंगटे खडे़ हो गए थे. मृतका खून से लथपथ पड़ी थी. लाश के पास ही कुर्सी डाले हत्यारा बैठा था. पुलिस को देख कर वह थोड़ा सतर्क हो गया था. पुलिस ने आगे बढ़ कर कहा, ‘‘चाकू फेंक कर खुद को कानून के हवाले कर दो. यही तुम्हारे लिए ठीक भी रहेगा.’’
इस से युवक को गुस्सा आ गया. उस ने लाश की ओर इशारा कर के कहा, ‘‘खबरदार, कोई भी आगे बढ़ा तो उस का भी यही अंजाम कर दूंगा, जो इस का किया है.’’
उस की इस धमकी से पुलिसकर्मियों के भी कदम ठिठक गए. थानाप्रभारी ने उसे समझाना चाहा, ‘‘हमारी बात तो सुनो…’’
उन की बात पूरी होती, उस के पहले ही वह चिल्लाया, ‘‘कहा न, कोई आगे नहीं आएगा. अगर कोई आगे आया तो मैं अपनी गर्दन काट लूंगा.’’
कह कर उस ने चाकू अपनी गर्दन पर रख दिया. उस युवक की इस हरकत से पुलिस अधिकारी सकते में आ गए. वे समझ गए कि इस के सिर पर खून सवार है. इस स्थिति में यह कुछ भी कर सकता है. इसलिए पुलिस उसे समझातीबुझाती रही. मृतका की सास और उस का पति जोरजोर से रो रहे थे. जब युवक को लगा कि अब वह बच नहीं पाएगा तो उस ने कहा, ‘‘चलो, पहले लाश उठाओ.’’
पुलिस जैसे ही आगे बढ़ी, उसी बीच उस ने अपने हाथ की कलाई पर चाकू से वार कर लिया. खून की धार फूट पड़ी. ऐसे में ही पुलिस ने चकमा दे कर उसे पकड़ लिया और फुर्ती से चाकू छीन लिया. इस के बाद तुरंत अपनी जीप से अस्पताल पहुंचाया. पुलिस के सामने सब से बड़ा सवाल यह था कि इतनी बड़ी घटना आखिर घटी क्यों थी? इस बारे में पुलिस ने पूछताछ की तो पता चला कि जिस युवक ने खौफनाक तरीके से फिल्मी अंदाज में यह हत्या की थी, उस का नाम मुकेश था. मृतका का नाम निशा था.
जिस समय यह वारदात हुई थी, मृतका निशा छत पर कपड़े फैलाने गई थी. उसी बीच मुकेश चाकू ले कर वहां आ गया. वह सीधे छत पर गया और निशा का हाथ पकड़ कर नीचे खींच लाया. वह उस से साथ चलने को कह रहा था. निशा ने मना किया तो उस ने उस का गला काट दिया. सास ने बहू को बचाने की कोशिश तो की, लेकिन बचा नहीं सकी. बहरहाल, पुलिस ने शव का पंचनामा भर कर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया. इस के बाद मृतका के पति संजय वर्मा की तहरीर पर हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया. हत्या में प्रयुक्त चाकू बरामद कर लिया गया. प्राथमिक उपचार के बाद पुलिस ने मुकेश को कस्टडी में ले लिया और थाने ला कर विस्तार से पूछताछ की.
मुकेश, निशा के घर वालों और पड़ोसियों से पूछताछ में एक ऐसे सिरफिरे आशिक की चौंकाने वाली कहानी निकल कर सामने आई, जो फेसबुक से करीब आई निशा को हमेशा के लिए अपनी बनाने की जिद पर अड़ा था, जबकि उस के प्यार में पड़ कर वादे करने वाली निशा हालात बदलने पर बदल चुकी थी. खूबसूरत और बनसंवर कर रहने वाली 30 वर्षीया निशा संजय वर्मा की पत्नी थी. संजय एक पावरलूम फैक्ट्री में नौकरी करता था. उस के 2 बेटे, 8 साल का आदी और 6 साल का वंश था. उस के मातापिता भी साथ रहते थे. वैसे तो ये लोग मूलरूप से उत्तर प्रदेश के जिला बलरामपुर के रहने वाले थे, लेकिन लगभग 15 सालों से पानीपत में रह रहे थे. परिवार में खुशियों का बसेरा था. वक्त अपनी गति से चल रहा था.
मूलत: बिहार का रहने वाला 22 वर्षीय मुकेश भी कालोनी में किराए पर रहता था और अमन भवन चौक स्थित एक फैक्ट्री में कपड़ा सिलाई का काम करता था. चूंकि वह संजय के घर के नजदीक रहता था, इसलिए अक्सर उस की नजरें निशा पर पड़ जाती थीं. धीरेधीरे उस की खूबसूरती उसे भाने लगी. फिर तो वह उसे देखने के बहाने तलाशने लगा. निशा जल्दी ही उस की मंशा भांप गई. 3 महीने पहले मुकेश ने निशा को फेसबुक पर फ्रैंड रिक्वेस्ट भेजी तो उस ने सहर्ष स्वीकार कर ली. इस के बाद दोनों एकदूसरे के दोस्त बन गए.
दोनों के बीच चैटिंग होने लगी. निशा किस डगर पर चल चुकी है, यह बात परिवार का कोई नहीं जानता था. चैटिंग और मोबाइल पर होने वाली बातों से दोस्ती गहराई तो मुकेश निशा से प्यार करने लगा. एक दिन मौका पा कर उस ने प्यार का इजहार भी कर दिया. निशा ने नासमझी दिखाई और परिवार के बारे में सोचे बगैर उस के प्यार पर अपने प्यार की मोहर लगा दी. दिलों में प्यार का पौधा अंकुरित हुआ तो वे एकदूसरे के खयालों में डूबे रहने लगे. जल्दी ही चोरीछिपे दोनों की मुलाकातों का सिलसिला भी चल निकला.
मुकेश रसिया किस्म का युवक था. निशा से मुलाकात होती तो वह उस की इतनी तारीफें करता था कि वह खुशी से फूली नहीं समाती. पति और प्रेमी में फर्क होता है. घरपरिवार की जिम्मेदारियों में पति वह प्रेम प्रदर्शित नहीं कर पाता, जो मुकेश करता था. यह एक बड़ी सच्चाई है कि परिवार सिर्फ प्रेम करने से नहीं चलता. उस के लिए पैसों की भी जरूरत पड़ती है, जिसे हासिल करने के लिए काम करना पड़ता है. संजय परिवार के लिए समर्पित था, जिस के लिए वह मेहनत भी खूब करता था. उसी के बलबूते घर चल रहा था.
दूसरी ओर मुकेश अविवाहित था. उस के पास समय ही समय था. वह निशा से मीठीमीठी बातें कर के अपना वक्त बिता रहा था. एक समय ऐसा भी आया, जब दोनों के बीच मर्यादा की दीवारें टूट गई. मुकेश और निशा एकदूसरे का सान्निध्य पा कर खुश थे. अनैतिक रिश्तों की गर्त ऐसी होती है, जिस पर कदम बढ़ा कर पीछे हटाना मुश्किल होता है. वक्त के साथ निशा और मुकेश के रिश्ते गहराते गए. ऐसे रिश्ते छिपाए नहीं छिपते. उड़तेउड़ते खबर संजय तक पहुंची, पत्नी के किस्से सुने तो उस ने उस से बात की. लेकिन वह साफ मुकर गई.
प्रेमिल रिश्तों में मुकेश और निशा ने साथ जीने और मरने की कसमें खाईं थीं. मुकेश ने तय कर लिया था कि वह निशा से विवाह कर के उसे अपने साथ रखेगा. सोच को साकार करने के लिए 7 दिसंबर, 2015 को वह निशा को ले कर भाग गया. बहू की इस हरकत से वर्मा परिवार को भारी बदनामी का सामना करना पड़ा. संजय ने किला चौकी में निशा की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करा कर सच्चाई पुलिस को बता दी. मोबाइल लोकेशन के जरिए 5 दिनों में ही घर वालों और पुलिस ने निशा को खोज निकाला.
दोनों फरीदाबाद में रह रहे थे. 11 दिसंबर को पुलिस दोनों को पकड़ कर ले आई. इस के बाद दोनों पक्षों के लोग इकट्ठा हुए. निशा को भी समझाया गया और मुकेश को भी. दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया. तय हुआ कि निशा अपने घर रहेगी और मुकेश उसे परेशान नहीं करेगा. निशा का मन बदल जाए और मुकेश भी उसे परेशान न करे, इस के लिए संजय ने उसे दिल्ली स्थित उस के मायके पहुंचा दिया. लेकिन इस तरह भला कब तक चलता. संजय की मां शीला बुजुर्ग थीं, बच्चे स्कूल जाते थे. घर के तमाम काम होते थे, कौन संभालता.
जनवरी के अंतिम सप्ताह में संजय निशा को घर ले आया. घर वालों ने एक बार फिर उसे जमाने की ऊंचनीच समझाई. उस ने वादा किया कि अब वह ऐसा कोई काम नहीं करेगी, जिस से परिवार की बदनामी हो. उस ने मन ही मन तय भी कर लिया कि अब वह मुकेश से कोई वास्ता नहीं रखेगी. दूसरी ओर मुकेश को पता चला कि निशा आ गई है तो वह उस से मिलने की कोशिश करने लगा. उस ने कई बार मोबाइल से फोन किया, लेकिन निशा ने उस का कोई जवाब नहीं दिया. उस ने निशा को देखने के लिए उस के घर के बाहर के कई चक्कर लगाए, लेकिन निशा की नजर उस पर पड़ती तो वह उसे नजरअंदाज कर देती.
निशा के इस बदलाव ने उसे बेचैन कर दिया. निशा शादीशुदा थी और अपनी गलतियों को सुधार रही थी. मुकेश को भी खुद में सुधार लाना चाहिए था, लेकिन वह निशा पर अपना पूरा हक समझने लगा था. उस ने साथ जीनेमरने की जो कसमें खाई थीं, उन्हें वह भुला नहीं पा रहा था. निशा की उपेक्षा से वह बुरी तरह आहत होता जा रहा था. एक बार मौका देख कर उस ने निशा से कहा, ‘‘निशा, क्या हो गया है तुम्हें, तुम मुझ से बात क्यों नहीं करतीं?’’
‘‘मुकेश मेरी मजबूरियों को समझो. और मुझे भूल जाओ. अब मैं शादीशुदा हूं.’’
मुकेश तड़प उठा, ‘‘कैसी बात कर रही हो, मैं तुम्हारे बिना जिंदा नहीं रह सकता. मुझे तुम्हारा साथ चाहिए.’’
‘‘अब यह नहीं हो सकता मुकेश,’’ कहने के साथ निशा ने चेतावनी दी, ‘‘मुझे आइंदा परेशान करने की कोशिश मत करना, वरना ठीक नहीं होगा.’’
मुकेश बुरी तरह हताश हो गया. उस की हालत हारे हुए जुआरी सी हो गई. निशा की बेरुखी से उस की रातों की नींद उड़ गई. उस के सिर पर निशा को हासिल करने का जुनून सवार था, लेकिन उस के सारे प्रयास विफल हो रहे थे. वह दिनरात इसी बारे में सोचता रहता था. यही वजह थी कि उस ने मन ही मन खतरनाक निर्णय ले लिया कि अगर निशा ने उस की बात नहीं मानी तो वह उसे किसी और की भी नहीं रहने देगा. इस के बाद उस ने एक चाकू का इंतजाम किया और निशा से आखिरी बार बात करने की ताक में रहने लगा.
3 फरवरी की दोपहर निशा नहाधो कर कपड़े फैलाने छत पर गई तो मुकेश की नजर उस पर पड़ गई. अपने कपड़ों में चाकू छिपा कर वह संजय के घर में दाखिल हो गया. उस समय निशा की सास शीला रसोई में थीं. वह सीधे छत पर पहुंच गया. उसे सामने पा कर निशा सकपका गई, ‘‘त…त…तुम यहां कैसे आए?’’
‘‘निशा मुझे तुम से आखिरी बार बात करनी है.’’
‘‘लेकिन मुझे तुम से कोई बात नहीं करनी.’’
मुकेश को गुस्सा आ गया. उस ने ताव में निशा का हाथ पकड़ कर कहा, ‘‘बात तो तुम्हें करनी होगी. तुम मेरे साथ चलो, मैं तुम्हें हमेशा खुश रखूंगा.’’
‘‘छोड़ो मुझे, तुम पागल हो गए हो क्या?’’
‘‘हां, मैं तुम्हारे प्यार में पागल हो गया हूं.’’ कह कर वह निशा को खींच कर नीचे ले आया.
शीला ने यह नजारा देखा तो हक्कीबक्की रह गईं. उन्होंने मुकेश को रोकना चाहा तो उस ने चाकू निकाल कर उन्हें पीछे हटने को मजबूर कर दिया. इस के बाद उस ने चाकू दिखा कर निशा से पूछा, ‘‘बोलो, साथ चलोगी या नहीं?’’
‘‘मैं कहीं नहीं जाऊंगी, छोड़ो मुझे.’’
निशा ने खुद को उस के चंगुल से छुड़ाने की कोशिश की तो वह आपा खो बैठा और पलक झपकते चाकू से उस की गर्दन पर घातक वार कर दिया. निशा फर्श पर गिर पड़ी और कुछ ही सैकेंड में उस ने दम तोड़ दिया. शीला चीखीचिल्लाईं तो आसपास के लोग आ गए. लेकिन मुकेश हाथ में चाकू लिए कुर्सी डाल कर वहीं बेखौफ हो कर बैठ गया और सब को धमकाने लगा. उस की धमकी से डर कर कोई उसे पकड़ने का साहस नहीं कर सका. उस के बाद सूचना पा कर पुलिस आ गई.
विस्तृत पूछताछ के बाद पुलिस ने अगले दिन मुकेश को अदालत में पेश किया, जहां से उसे 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. कथा लिखे जाने तक उस की जमानत नहीं हो सकी थी. निशा उस के प्यार में न पड़ी होती और अपने बहके कदमों को वक्त रहते संभाल लिया होता तो यह नौबत कभी न आती. मुकेश ने भी निशा को जबरन हासिल करने की कोशिश न की होती तो उस का भविष्य चौपट न होता. अब उस की जिंदगी जेल में ही कटेगी. Haryana Crime Story
—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित






