Kidnapping Murder Case. परविंदर को इस बात की ईर्ष्या थी कि उस के चाचा दिन दूनी रात चौगुनी उन्नति क्यों करते जा रहे हैं. अपनी इसी ईर्ष्या की वजह से उस ने अपने चाचा को बरबाद करने के लिए जो योजना बनाई, आखिर उस का अंजाम क्या हुआ...

शाम के ठीक पौने 4 बजे जसकीरत कपड़ा ले कर अपनी स्कूटी को चमकाने लगा था, क्योंकि 4 बजे उसे सुलतानपुर लोधी रोड पर ट्यूशन पढ़ने जाना था. वह अपनी हर चीज को इसी तरह साफसुथरी रखता था. 14 साल का जसकीरत नौवीं में पढ़ता था. वह रोजाना स्कूटी साफ करता, कौपीकिताबें लेता और मां कुलदीप कौर के हाथों जूस पी कर ट्यूशन पढ़ने के लिए निकल जाता.

11 अप्रैल की शाम को भी जसकीरत मां के हाथों जूस पी कर ट्यूशन पढ़ने चला गया था. बेटे के जाने के बाद कुलदीप घर के कामों में व्यस्त हो गई. जसकीरत 4 बजे ट्यूशन पढ़ने जाता था तो साढ़े 6, 7 बजे तक लौटता था. लेकिन उस दिन वह रात 8 बजे तक नहीं लौटा तो मां को चिंता हुई. फिर उन्होंने सोचा कि ट्यूशन पढ़ कर वह अपने किसी दोस्त के साथ उस के घर या बाजार चला गया होगा, इसीलिए उसे देर हो रही है.

वह बेटे के बारे में ही सोच रही थी कि जसकीरत के पिता सरदार नरेंद्र सिंह फैक्ट्री से आ गए. ड्राइंगरूम में अपना ब्रीफकेस रख कर बेसिन में हाथमुंह धोते हुए उन्होंने पूछा, कुलदीप, जसकीरत नहीं दिख रहा, अभी ट्यूशन पढ़ कर नहीं लौटा क्या? जी नहीं, अभी तक तो नहीं लौटा. लगता है, दोस्तों के साथ बाजार चला गया है या फिर किसी के घर चला गया है. आप कपड़े बदलिए, मैं चाय बना कर लाती हूं. कुलदीप कौर ने कहा.

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