Social Crime Story: मनजीत कौर ने प्रवीण कुमारी को सहेली समझ कर उस के कहने पर अपनी वीडियो क्लिप बनवा ली थी, तब उसे क्या पता था कि यही वीडियो क्लिप उस की जान का जंजाल बन जाएगी.
तनवीर सिंह ने अपनी बहन मनजीत कौर को एटीएम कार्ड देते हुए कहा, ‘‘पापा ने मुझे पैसे निकालने के लिए दिया था, लेकिन मेरा कालेज जाना जरूरी है. इसलिए तुम ऐसा करना कि थोड़ी देर में जा कर पहले एटीएम से रुपए निकाल लेना, उस के बाद बाजार जा कर दरजी से अपने कपड़े ले लेना और लौटते हुए दहीहांडी रेस्टोरेंट वाले शमीजी को 20 हजार रुपए दे देना.’’
‘‘ठीक है, तुम्हारा कालेज जाना जरूरी है तो तुम जाओ. मैं घर के काम करा कर चली जाऊंगी.’’ मनजीत ने कहा.
‘‘और हां, प्रेस वाले से भी पूछ लेना कि उस ने कार्ड छाप दिए या नहीं? अगर नहीं छापे हों तो उन से कह देना कार्ड जल्दी छाप दें. शादी में कुछ ही दिन बाकी रह गए हैं, कार्ड बांटने में भी बड़ा समय लगता है. यह काम जितनी जल्दी निपट जाए, उतना ठीक रहेगा.’’ तनवीर ने कपड़े पहनते हुए कहा.
मनजीत कौर ने भाई से एटीएम कार्ड ले कर अपने पर्स में रख लिया. इस के बाद वह मां के साथ घर के कामों में लग गई. घर के काम कराने के बाद खाना वगैरह खा कर मनजीत दोपहर को बाजार के लिए निकली. पहले उस ने एटीएम से रुपए निकाले.
उस के बाद औटो से गुमार मंडी बाजार गई, जहां दरजी के यहां से उस ने अपने कपड़े लिए. वहां से घंटाघर जा कर लहंगे वाले के यहां से होते हुए वह सिविल लाइन स्थित दहीहांडी रेस्टोरैंट पहुंची. रेस्टोरैंट के मालिक शमीजी को उस ने 20 हजार रुपए दिए, क्योंकि शादी में चायनाश्ते का इंतजाम शमीजी को ही करना था.
सारे काम निपटा कर मनजीत कौर औटो से घर पहुंची. औटो का किराया दे कर जैसे ही वह गेट में घुसी, उस के फोन की घंटी बजी. उस ने फोन रिसीव किया तो दूसरी ओर से एक लड़की की आवाज आई. उस ने अपनी मोटी आवाज में लापरवाही से पूछा, ‘‘मनजीत बोल रही हैं?’’
‘‘जी हां, आप कौन?’’ मनजीत ने पूछा.
‘‘मनजीत है न तो ध्यान से सुन,’’ फोन करने वाली लड़की रौब से धमकी भरे लहजे में बोली. इस के बाद उस ने मनजीत से जो कहा, उसे सुन कर उस का चेहरा सफेद पड़ गया. हाथपैर कांपने लगे. उसे लगा, जैसे फोन हाथ से छूट कर गिर जाएगा. फोन ही नहीं, वह खुद भी गिर जाएगी.
उस लड़की की बातों से मनजीत इतना घबरा गई कि उस से एक कदम भी नहीं चला गया. फोन कटने के तुरंत बाद मनजीत के फोन पर एक वीडियो का एमएमएस आ गया. कांपते हाथों से उस ने इनबौक्स खोल कर वीडियो देखी तो उस के होश उड़ गए. उस का दिलदिमाग और शरीर से नियंत्रण खो गया, जिस से वह चकरा कर गेट के पास ही गिर गई.
संयोग से उसी समय उधर से उस की पड़ोसन गुजर रही थी. उस ने मनजीत को गिरते देखा तो शोर मचाते हुए वह उस के पास पहुंच गई. घर वालों के बाहर आतेआते शोर सुन कर अन्य पड़ोसी भी आ गए थे. पड़ोसियों की मदद से मनजीत के पिता जरनैल सिंह उसे उठा कर अंदर ले गए. डाक्टर को बुलाया गया. उस ने इंजैक्शन लगाया. पूछने पर बताया कि शायद इसे एकदम से किसी बात का गहरा सदमा लगा है.
कुछ दिनों बाद ही मनजीत की शादी होने वाली थी. ऐसे में इस तरह कुछ हो जाना चिंता की बात थी. घर वालों को कुछ पता नहीं था. मनजीत को जो सदमा लगा था, वह फोन पर बात होने और वीडियो देखने के बाद लगा था. आखिर किस ने उसे फोन किया था, फोन करने वाले ने ऐसा क्या कह दिया था और उस वीडियो में ऐसा क्या था, जिसे सुन कर उसे इस तरह का सदमा लगा कि वह बेहोश हो गई थी.
यह सब जानने से पहले आइए थोड़ा मनजीत और उस के घर वालों के बारे में जान लेते हैं. मनजीत के पिता सरदार जरनैल सिंह सरकारी नौकरी से रिटायर हो चुके थे. रिटायर होने के बाद उन्होंने लुधियाना के जस्सियां रोड स्थित नवीननगर में शानदार कोठीनुमा मकान बनवाया था. उन के परिवार में पत्नी के अलावा बेटा तनवीर सिंह और बेटी मनजीत कौर थी.
जरनैल सिंह का छोटा परिवार था. वह हर तरह से सुखी और संपन्न थे. दोनों बच्चों को उन्होंने अच्छी शिक्षा दिलाई थी. मनजीत कौर ने पटना साहिब हिमाचल से बीडीएस (दंत चिकित्सक) की पढ़ाई की थी, जबकि बेटा तनवीर सिंह लुधियाना के आर्य कालेज से बीबीए की पढ़ाई कर रहा था. मनजीत अभी और पढ़ना चाहती थी, लेकिन उस की उम्र शादी लायक हो गई थी, इसलिए मातापिता ने उस का विवाह करना उचित समझा. लड़का देख कर उन्होंने उस की शादी ही नहीं तय कर दी थी, बल्कि जल्दी ही उस की शादी होने वाली थी.
मनजीत सहित पूरा परिवार इस शादी से खुश था. घर में शादी की तैयारियां बड़े जोरोंशोरों से चल रही थीं. इसी बीच मनजीत कौर के साथ यह हादसा हो गया था. किसी की समझ में नहीं आ रहा था कि अचानक हंसतीखेलती मनजीत को यह क्या हो गया? मनजीत बिस्तर पर पड़ गई. उसे बिस्तर पर पड़े धीरेधीरे एक सप्ताह हो गया. वह न कुछ खातीपीती थी और न किसी से बात करती थी. अकेली पड़ीपड़ी आंसू बहाती रहती थी. कुछ पूछने पर ठीक से जवाब भी नहीं देती थी. हर समय खोईखोई सी रहती थी. घर का हंसीखुशी का माहौल एक अबूझ से सन्नाटे में तब्दील हो गया था.
शादी के दिन नजदीक आते जा रहे थे. कार्ड बांटे जा चुके थे, करीबी रिश्तेदार आने भी लगे थे. पहले की कुछ रस्में निभाई भी जाने लगी थीं, लेकिन उन रस्मों में भाग लेते समय मनजीत के चेहरे पर उदासी सी छाई रहती थी. पूरा परिवार परेशान था. सब लोग पूछपूछ कर थक गए थे, लेकिन मनजीत ने कुछ नहीं बताया. उस ने जैसे अपने होठों पर ताला जड़ लिया था. यही खामोशी उसे भीतरभीतर खाए जा रही थी.
आखिर इस तरह कब तक चलता. हर चीज का एक अंत होता है. एक दिन भाई तनवीर ने गुरुग्रंथ साहब के पावन स्वरूप श्री जपुजी साहब का गुटखा ले कर मनजीत के सिर पर रखते हुए कहा, ‘‘आप को गुरुग्रंथ साहबजी की कसम, सचसच बताओ क्या बात है, जो तुम अपनी यह हालत किए हो?’’
मनजीत काफी धार्मिक विचारों वाली थी. वह रोजाना सुबह ज्वालानगर स्थित गुरु निवारण साहब गुरुद्वारा जाती थी, शाम की अरदास में भी वह शामिल होती थी. इस के अलावा दिन में जब भी उसे समय मिलता था, वह नामसिमरन करती थी. लेकिन जब से उस की यह हालत हुई थी, उस ने गुरुद्वारा जाना बंद कर दिया था. उस दिन भाई तनवीर ने जब जपुजी साहब का गुटखा उस के सिर पर रखा तो गुटखा हाथ में ले कर वह जोरजोर से गुरु का नाम ले कर रोने लगी. तनवीर ने उसे चुप नहीं कराया. वह चुपचाप खड़ा उसे रोते देखता रहा. शायद वह चाहता था कि उस के मन में जो गुबार भरा है, वह निकाल दे, तभी ठीक रहेगा.
काफी देर तक रोने के बाद जब मनजीत का मन हलका हुआ तो उस ने तनवीर को जो बताया, उसे सुन कर तनवीर को भी चक्कर आने लगा. उस ने भाई को जो बताया था, वह कुछ इस तरह था. मनजीत रोजाना सुबह गुरुद्वारा साहब जाती थी. वहीं उस की मुलाकात प्रवीण कुमारी से हुई. वह भी लगभग रोज ही गुरुद्वारा आती थी. दोनों में परिचय हुआ तो बातचीत में उस ने खुद को मनजीत के सामने बहुत ही धार्मिक प्रवृत्ति की बताया. इस की वजह यह थी कि मनजीत की गुरुघर में बड़ी श्रद्धा थी. इस तरह दोनों जल्दी ही गहरी दोस्त बन गईं. कुछ दिनों की मुलाकात में मनजीत उसे बहन मानने लगी थी.
गुरुद्वारा साहब में अरदास के बाद मनजीत प्रवीण कुमारी के साथ बैठ कर काफी देर तक बातें करती. इसी बातचीत में प्रवीण कुमारी ने मनजीत कौर के घरपरिवार, आर्थिक स्थिति और उस की शादी के बारे में जान लिया था. यही नहीं, उसे यह भी पता चल गया था कि उस के हाथों में काफी रुपए हैं.
इस के बाद एक दिन याद रखने के बहाने प्रवीण कुमारी ने गुरुद्वारा प्रांगण में मनजीत की एक छोटी सी वीडियो क्लिप बना ली. प्रवीण कुमारी यह वीडियो यादगार के लिए बना रही थी, इसलिए मनजीत कौर ने खुशीखुशी बनवा ली थी. तब उसे क्या पता था कि यही वीडियो उस की जान के लिए आफत बन जाएगी. उसे यह वीडियो बनवाने का पछतावा तो उस दिन हुआ, जिस दिन प्रवीण कुमारी ने उसे ब्लैकमेल करने के लिए फोन पर उस वीडियो की क्लिप भेजी.
दरअसल, प्रवीण कुमारी ने उस समय तो यादगार के तौर पर मनजीत कौर की वह सीधीसादी वीडियो क्लिप बनाई थी, लेकिन बाद में उस ने उस वीडियो के साथ छेड़छाड़ कर के उसे अश्लील बना दिया था. दरअसल, वह वीडियो मिक्सिंग की एक्सपर्ट थी. अपना यह ज्ञान अच्छे काम में लगाने के बजाय वह गलत काम में लगाने लगी, जो एक तरह से अपराध था. अश्लील वीडियो बना कर उस ने अपने मोबाइल फोन से वीडियो मनजीत कौर के मोबाइल पर भेज कर उस से ढाई लाख रुपए मांगे. इसी के साथ उसे धमकी भी दी कि अगर उस ने उसे रुपए नहीं दिए तो वह उस वीडियो को उस की ससुराल वालों के पास भेजने के साथसाथ इंटरनैट पर भी डाल देगी.
प्रवीण कुमारी की धमकी सुन कर और अपना वीडियो देख कर मनजीत कौर की हालत खराब हो गई थी. क्योंकि ढाई लाख रुपए देना उस के वश की बात नहीं थी. अगर वह वीडियो उस की ससुराल पहुंच जाती तो उस का रिश्ता तो टूटता ही, बदनामी ऊपर से होती. मांबाप की छोड़ो, वह किसी को भी मुंह दिखाने लायक नहीं रहती. इसी बात को मन में लिए मनजीत कौर घुटघुट कर जी रही थी. कई बार तो उस के मन में आत्महत्या करने तक की बात आ चुकी थी.
प्रवीण कुमारी ने तो ढाई लाख रुपए की मांग करते हुए मनजीत कौर को धमकाया ही था, उस के 2 दिनों बाद किसी आदमी ने भी फोन कर के रुपए मांगे थे. उस ने भी रुपए न देने पर अंजाम भुगतने की धमकी दी थी. इस के बाद तो लगातार उस के फोन आने लगे थे. वह उस से रुपए तो मांगता ही था, अश्लील बातें भी करता था, जिस से मनजीत और ज्यादा डर गई थी. मनजीत कौर की पूरी बात सुनने के बाद इस विषय पर तनवीर काफी देर तक सोचता रहा. मामला गंभीर ही नहीं, बहुत नाजुक भी था. छोटी सी गलती उस की बहन की जिंदगी तबाह कर सकती थी. आखिर काफी सोचविचार कर उस ने जो कदम उठाया, वह एकदम सही था.
तनवीर सिंह मनजीत को साथ ले कर जगतपुरी पुलिस चौकी पहुंचा और चौकीइंचार्ज एएसआई जगतार सिंह को पूरी बात बता दी. उस ने जगतार सिंह से इस मामले को गुपचुप तरीके से निपटा कर दोषियों को गिरफ्तार करने की प्रार्थना की. मामले की गंभीरता को देखते हुए जगतार सिंह ने तुरंत इस बात की जानकारी थानाप्रभारी अवतार सिंह को देने के साथ, तनवीर की शिकायत डीडी नंबर 24 पर दर्ज कर के तुरंत काररवाई शुरू कर दी.
थानाप्रभारी अवतार सिंह ने इस मामले को सुलझाने के लिए हैडकांस्टेबल हरविंदर सिंह, जसवीर सिंह और कांस्टेबल जतिंदर सिंह की एक टीम बनाई, जिसे उन्होंने ज्वालानगर स्थित दुख निवारण गुरुद्वारा के पास लगा दिया. क्योंकि उन्हें लग रहा था कि प्रवीण कुमारी गुरुद्वारे जरूर आएगी, जहां से उसे पकड़ लिया जाएगा. लेकिन पुलिस की यह चाल बेकार गई, क्योंकि प्रवीण कुमार वहां आई ही नहीं. फिर भी वहां से यह जरूर पता चल गया कि वह अपने पति महेंद्र के साथ कहां रहती है.
इस का मतलब यह था कि मनजीत कौर को फोन पर प्रवीण के अलावा जिस आदमी ने धमकी दी थी, वह उस का पति महेंद्र रहा होगा. घर का पता मिलने के बाद चौकीइंचार्ज जगतार सिंह ने प्रवीण कुमारी के घर छापा मारा तो पतिपत्नी घर पर नहीं मिले. इस के बाद मुखबिरों को उन के पीछे लगा दिया गया, साथ ही उन के घर पर एक सिपाही भी तैनात कर दिया गया. सिपाही प्रवीण कुमारी के घर इस तरह नजर रख रहा था कि किसी को पता नहीं चल रहा था कि घर पर नजर रखी जा रही है.
30 दिसंबर को जगतार सिंह जैसे ही चौकी पर पहुंचे, मुखबिर ने उन्हें बताया कि प्रवीण कुमारी अपने पति महेंद्र के साथ बसअड्डे पर मौजूद है. उन्होंने देर करना उचित नहीं समझा और सहयोगियों को साथ ले कर तुरंत बसअड्डे पर पहुंच गए. लेकिन प्रवीण कुमारी उन्हें वहां नहीं मिली. तब वह जस्सिया रोड पर संगम पैलेस की ओर बढ़े. थोड़ी दूर जाने पर प्रवीण कुमारी उन्हें 2 लोगों के साथ जाते दिखाई दे गई. पुलिस ने उन्हें घेर कर पकड़ लिया. पूछने पर पता चला प्रवीण कुमारी के साथियों के नाम महेंद्र और सुखचरण थे. महेंद्र तो प्रवीण कुमारी का पति था, जबकि सुखचरण उन का साथी था. पुलिस तीनों को पकड़ कर जगतपुरी पुलिस चौकी ले आई.
चौकी में की गई पूछताछ में पता चला यह सारी योजना प्रवीण कुमारी और महेंद्र के साथ पकड़े गए सुखचरण सिंह ने बनाई थी. वह उसी गुरुद्वारे में ग्रंथी था, जहां मनजीत कौर रोज माथा टेकने आती थी. उसे मनजीत कौर के परिवार की आर्थिक स्थिति का पता था, इसलिए उस ने प्रवीण कुमारी और महेंद्र के साथ मिल कर उसे ब्लैकमेल करने की योजना बनाई थी.
गुंथी सुखचरण सिंह शादीशुदा था और काफी दिनों से उसी गुरुद्वारा में ग्रंथी था, जबकि महेंद्र उन दिनों बेकार था. महेंद्र का पहले अच्छाखासा काम चल रहा था. लेकिन वह और प्रवीण कुमारी अय्याश प्रवृति के थे, इसलिए अय्याशी के चक्कर में उन का कामधंधा बंद हो गया था. इस के बावजूद उन के शाही खर्चों में कोई कमी नहीं आई थी.
खर्चों की वजह से प्रवीण कुमारी और महेंद्र पर काफी कर्ज हो गया. कर्ज देने वाले परेशान करने लगे तो उन्होंने ग्रंथी सुखचरण सिंह के कहने पर मनजीत को ब्लैकमेल करने की योजना बना ली. सीधीसादी मनजीत उन के जाल में फंस भी गई. अच्छा तो यह हुआ कि उस का भाई समझदार था. वह पुलिस के पास चला गया, जिस से एक लड़की की जिंदगी बरबाद होने से बच गई. पूछताछ के बाद जगतार सिंह ने उसी दिन यानी 30 दिसंबर, 2015 को अपराध संख्या 221/15 पर भादंवि की धारा 389/120बी के तहत प्रवीण कुमारी, उस के पति महेंद्र और ग्रंथी सुखचरण सिंह के खिलाफ केस दर्ज कर तीनों को सक्षम अदालत में पेश कर एक दिन के पुलिस रिमांड पर ले लिया.
रिमांड के दौरान जगतार सिंह ने तीनों अभियुक्तों के मोबाइल फोन कब्जे में ले कर उन्हें जांच के लिए भेज दिए. रिमांड अवधि समाप्त होने पर सभी को एक बार फिर अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. Social Crime Story
(कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित, बदनामी की वजह से कुछ पात्रों के नाम बदले हुए हैं)






