Hindi StoriesHindi StoriesHindi Stories: बरकत मसीह दोहरे चरित्र का आदमी था. वह अपनी पत्नी कामिनी से प्रेम भी करता था और नफरत भी. उस की मोहब्बत ही हमेशा नफरत को काबू किए रहती थी, लेकिन एक दिन जब उस की नफरत मोहब्बत पर हावी हुई तो…
बात तब की है, जब मेरी तैनाती पंजाब के एक ऐसे देहाती इलाके में थी, जो काफी हराभरा था. उन दिनो गांवों में बिजली की बात तो दूर, सड़कें भी पक्की नहीं थीं. वह इलाका काफी पिछड़ा हुआ था. गर्मियों के दिन थे. दोपहर को मैं एक पेड़ के नीचे बैठा काम कर रहा था, तभी पास के एक गांव का नंबरदार मुझ से मिलने आया. वह बड़ा ही चापलूस था, लेकिन मेरा मुखबिर था. मैं ने उस से आने की वजह पूछी तो उस ने बताया कि एक घटना घट गई है, वह उसी की सूचना देने आया है.
उस ने बताया कि उस के गांव का बरकत मसीह अपनी घर वाली को साइकिल पर बिठा कर कहीं जा रहा था. जब वह छोटी नहर की पुलिया पर पहुंचा तो सामने से एक बैलगाड़ी बहुत तेज रफ्तार से आ रही थी. बैल भड़के हुए थे, जो गाड़ी वाले से संभल नहीं रहे थे. नहर की पुलिया पर दोनों ओर कोई दीवार नहीं थी, इसलिए बरकत मसीह ने बैलगाड़ी से बचने की कोशिश की तो साइकिल सहित नहर में जा गिरा. जब तक वह संभलता, पत्नी कई गोते लगा चुकी थी. नहर अधिक गहरी नहीं थी. उस ने पास जा कर देखा तो पत्नी अधमरी हो चुकी थी. वह पत्नी को पानी से बाहर निकाल कर ला रहा था, तभी उस ने दम तोड़ दिया.
यह एक साधारण सी घटना थी, जिस में पुलिस का कोई काम नहीं था. फिर भी मैं ने नंबरदार से कुछ बातें पूछ कर तसल्ली कर ली. इस घटना पर कोई रिपोर्ट भी दर्ज नहीं करनी थी. नंबरदार अपना कर्तव्य समझ कर मुझे खबर करने आ गया था. उसे गए कुछ समय ही गुजरा था कि वह दोबारा एक लड़के को ले कर मेरे पास आ गया. उस के चेहरे से ऐसा लग रहा था, जैसे वह कोई नई खबर ले कर आया है. मैं ने उसे बिठा कर आने का कारण पूछा तो उस ने कहा, ‘‘मलिक साहब, मामला गड़बड़ है.’’
‘‘कौन सा मामला गड़बड़ है?’’ मैं ने हैरानी से पूछा.
‘‘वही बरकत मसीह और उस की पत्नी वाला. आप तुरंत मेरे साथ चलिए.’’ उस ने कहा.
‘‘उस में तुम्हें क्या गड़बड़ लगा, जरा मुझे भी तो बताओ?’’
‘‘मैं तो क्या, यह लड़का बताएगा.’’ उस ने लड़के को मेरे सामने करते हुए कहा, ‘‘ओए, तू ने जो कुछ देखा था, साहब को बता दे.’’
पहले तो लड़का झिझका, उस के बाद उस ने जो बताया, उस से मुझे वह मामला हत्या का लगा. वह लड़का नंबरदार के ही गांव का रहने वाला था. जिस समय नहर पर वह घटना घटी थी, वह जामुन के एक पेड़ पर चढ़ कर जामुन तोड़ रहा था. दोपहर का समय था, आसपास कोई आदमी दिखाई नहीं दे रहा था. उस ने देखा कि एक साइकिल सवार साइकिल पर पीछे एक औरत को बैठाए जा रहा था. सामने से एक बैलगाड़ी आ रही थी, जिस के बैल काबू से बाहर थे.
साइकिल वाले ने घबरा कर साइकिल मोड़ी तो वह साइकिल सहित नहर में गिर गया. पानी में गिरते ही औरत हाथपैर मारने लगी. आदमी ने उस की मदद करने के बजाय उस का सिर पकड़ कर पानी में डुबो दिया. कुछ देर तड़प कर औरत ऊपर उभरी तो उस ने उस का गला दबा दिया. इस के बाद उस ने औरत को पानी से बाहर निकाला तो औरत में कोई हलचल नहीं दिखाई दे रही थी. आदमी ने इधरउधर देखा. कुछ दूर खेतों में कुछ किसान काम कर रहे थे. उस ने आवाज दे कर उन किसानों को बुलाया तो 7-8 लोग वहां आ गए. लड़का भी पेड़ से उतर कर उन के पास पहुंच गया.
पता चला कि वह औरत मर चुकी थी. वह उसी आदमी की पत्नी थी. उस ने उन किसानों से पत्नी के डूब कर मरने की बात बताई तो उन लोगों ने दुख प्रकट किया. एक आदमी ने उस की साइकिल नहर से निकाली और एक रेहड़ी का प्रबंध कर के औरत की लाश को गांव भिजवाया. लड़के ने पहली बार हत्या करते देखा था, इसलिए वह इतना डर गया था कि गांव जाने के बजाय इधरउधर घूमता रहा. नंबरदार थाने में रिपोर्ट कर के वापस जा रहा था, तभी रास्ते में वह उसे मिल गया. लड़के को लगा कि सारी बात नंबरदार को बता देनी चाहिए. नंबरदार ने जब यह बात सुनी तो वह लड़के को ले कर थाने आ गया.
मैं ने नंबरदार से नहर के बारे में पूछा तो उस ने बताया कि नहर दूसरी नहरों से काफी छोटी थी. वह इतनी गहरी भी नहीं थी कि उस में कोई डूब कर मर जाए. पानी से पुलिया की ऊंचाई भी इतनी नहीं थी कि गिरने से चोट लगे. साफ था कि बरकत मसीह ने ही अपनी पत्नी की हत्या की थी. मैं ने नंबरदार से पूछा, ‘‘क्या उन का घर में आपस में झगड़ा होता था, जिस से उस ने पत्नी को मार दिया?’’
‘‘लड़ाईझगड़े का तो सवाल ही नहीं पैदा होता मलिकजी, वह तो अपनी बीवी का दीवाना था. कुछ लोेग तो उसे जोरू का गुलाम कहते थे. उस की पत्नी थी ही इतनी खूबसूरत कि कोई भी उस का दीवाना हो सकता था.’’
नंबरदार की इस बात से लगा कि शायद लड़के के देखने में कोई गलती हो गई है. वह पत्नी को डूबने से बचा रहा होगा, इसे लगा होगा कि वह उसे डुबो रहा है. जल्दी में कोई कदम उठाने के बजाय मैं ने लाश का पोस्टमार्टम कराना उचित समझा. मैं 2 सिपाहियों के साथ बरकत मसीह के घर पहुंच गया. मरने वाली महिला कामिनी के मांबाप पास के गांव के रहने वाले थे, जो आ चुके थे. कामिनी की बुआ के आने का इंतजार हो रहा था. उन के घर में रोनापीटना मचा था. पुलिस देख कर घर में सन्नाटा छा गया. गांव वाले आपस में खुसुरफुसुर करने लगे थे.
मैं ने नंबरदार से कहा कि वह बरकत को बुला कर मेरे पास ले आए. कुछ ही देर में बरकत मसीह आ गया. वह सुंदर और जवान युवक था. मैं ने पुलिसिया नजरों से उसे देखा. उस की आंखें लाल थीं और उन में नमी थी. शायद वह रो रहा था. मैं ने उस से कहा, ‘‘मर्द हो कर औरतों की तरह आंसू बहा रहे हो, धीरज रखो.’’
उस ने घबरा कर मेरी तरफ देखते हुए कहा, ‘‘कुछ नहीं.’’ उस के बाद दोनों हाथों से वह अपनी आंखें साफ करने लगा.
‘‘कामिनी को क्या हुआ, एक बार मैं उस की लाश देखना चाहता हूं.’’ मैं ने कहा.
‘‘सर, वह पानी में डूब कर मर गई.’’ कह कर उस ने मुझे पूरी घटना सुना दी.
‘‘पहले मैं लाश देखूंगा, क्योंकि अगर कहीं कोई नई बात निकल आई तो मैं अपने अधिकारियों को क्या जवाब दूंगा.’’ मैं ने कहा, ‘‘इस में घबराने की कोई बात नहीं है. तुम ऐसा करो, लाश के कमरे से सब को निकाल दो. मैं जा कर लाश देख लूंगा.’’
सब को निकाल कर उस ने मुझे कमरे में बुलाया. कमरे में आ कर मैं ने बरकत को बाहर जाने को कहा, लेकिन वह बाहर जाने को तैयार नहीं था. मैं ने 2 सिपाहियों से उसे बाहर ले जाने को कहा तो वे उसे खींच कर बाहर ले गए. बरकत के जाने के बाद मैं ने लाश की चादर खींची तो लाश देख कर मुझे धक्का सा लगा. वह बहुत सुंदर युवती थी. उस की आंखें इस तरह खुली थीं, जैसे मुझे ही देख रही हो. चेहरे में काफी खिंचाव था. नंबरदार की वह बात मुझे सच लगी कि उस औरत का कोई भी पति होता, वह गुलाम बन कर ही रहता.
मैं ने उस की गरदन की ओर देखा तो मुझे वह चीज दिखाई दे गई, जो मैं देखना चाहता था. गले पर लाल सा निशान था और वह निशान गला दबाने का था. मैं ने दोनों सिपाहियों को बुला कर कहा, ‘‘बरकत को कहीं जाने मत देना.’’
नंबरदार से कहा कि वह लाश को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाने की व्यवस्था करे. वह एक तांगा ले आया तो जरूरी काररवाई करने के बाद मैं ने लाश को सिविल अस्पताल भिजवा दिया. शक की बुनियाद पर बरकत को हिरासत में ले कर थाने आ गया. अगले दिन मैं थाने आया तो सिपाही ने कहा कि बरकत मुझ से बात करना चाहता है. मैं ने उसे अपने कमरे में बुलाया तो देखा, उस की आंखें लाल हो रही थीं, जैसे वह सारी रात सोया न हो. उस ने कहा, ‘‘आप ने मुझे हवालात में क्यों बंद कर रखा है? मेरी घरवाली मर गई है, मुझ गरीब से क्या गलती हो गई है?’’
‘‘मुझे कुछ शक है. लाश की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कह सकूंगा.’’ मैं ने कहा.
शाम करीब 5 बजे पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ गई. रिपोर्ट के अनुसार, कामिनी की मौत पानी में डूबने और सांस रुकने से हुई थी. उस में लिखा था कि मृतका के फेफड़ों, आंतों और मैदे में इतना पानी नहीं था, जितने पानी में डूब कर मौत होती है. इस के अलावा उस के गले पर दबाव का जो निशान पाया गया था, उस के बारे में कहा गया था कि उस पर कोई वजन पड़ा हो या दबाया गया हो. एक खास बात यह थी कि मृतका 3 महीने की गर्भवती थी.
रिपोर्ट देखने के बाद मुझे लड़के के बयान पर यकीन हो गया. कामिनी की लाश को उस के मातापिता के हवाले कर दिया. बरकत के ससुर ने पूछा कि उसे हवालात में क्यों बंद कर रखा है तो मैं ने कहा, ‘‘मुझे शक है कि तुम्हारी बेटी को बरकत ने गला घोंट कर मारा है? क्या तुम्हारी बेटी बरकत के साथ खुश थी?’’
मेरी इस बात पर वह मुझे हैरानी से देखते हुए बोला, ‘‘जी, वह बहुत खुश रहती थी, हमेशा बरकत की तारीफ करती रहती थी.’’
मैं ने कहा, ‘‘सोच कर बताओ, कभी उन में कोई झगड़ा हुआ था?’’
‘‘नहीं सरकार, शादी के बाद से अब तक उन में कोई झगड़ा नहीं हुआ था.’’ उस ने कहा.
मैं ने उस से बहुत घुमाफिरा कर पूछा, लेकिन कोई काम की बात पता नहीं चली. उस के जाने के बाद मैं ने बरकत को बुलवा कर कहा, ‘‘कामिनी की लाश का पोस्टमार्टम हो गया है और उसे तुम्हारे ससुर और साले ले गए हैं.’’
यह सुन कर वह रोते हुए बोला, ‘‘मुझे भी जाने दीजिए सरकार, मैं अपनी कामिनी को अपने हाथों से दफनाना चाहता हूं.’’
मैं ने कहा, ‘‘इन्हीं हाथों से, जिन से तुम ने उस का गला दबाया था.’’
यह सुन कर वह ऐसा उछला, जैसे उस के पैरों पर बम फोड़ दिया गया हो. उस की आंखें फैल गईं और रंग पीला पड़ गया. गर्मियों में वह ऐसे कांप रहा था, जैसे लोग ठंड में कांपते हैं. वह संभल कर बोला, ‘‘यह क्या कह रहे हैं सरकार, कामिनी तो मेरी जान थी, भला मैं उसे क्यों मारूंगा?’’
‘‘हत्या की वजह भी तुम्हीं बताओगे, वरना मैं तो पता कर ही लूंगा.’’ मैं ने कहा.
‘‘सरकार, आप पूरे गांव में किसी से भी पूछ लें, हम दोनों में कितना प्रेम था,’’ बरकत ने कुछ सोच कर कहा, ‘‘वह मेरे बच्चे की मां भी बनने वाली थी. मैं अपने बच्चे और पत्नी को कैसे मार सकता हूं?’’
बरकत ने जो कहा था, उस में वजन था. लेकिन मैं उस लड़के के बयान और पोस्टमार्टम की रिपोर्ट को कैसे झुठला सकता था. मैं ने उस की आंखों में आंखें डाल कर कहा, ‘‘कामिनी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में साफसाफ लिखा था कि उस की हत्या गला दबा कर की गई थी.’’
वह मेरी बात पर घबराने के बजाय दृढ़ता से बोला, ‘‘साहब, हम दोनों एकसाथ नहर में गिरे थे. हो सकता है, साइकिल का कोई पुरजा उस की गरदन पर जा लगा हो.’’
उस ने दलील अच्छी दी थी. लेकिन मैं समझ रहा था कि वह जरूरत से ज्यादा चालाक है और मुझ से झूठ बोल रहा है. मुझे लगा कि यह आसानी से मानने वाला नहीं है, इसलिए मैं ने सख्ती करने का फैसला कर लिया. मैं ने कहा, ‘‘तुम्हारे लिए यही अच्छा है कि तुम इकबालिया बयान दे दो. हो सकता है मैं तुम्हारी कुछ मदद कर दूं. अगर नहीं देते हो तो मुझे जरूरत भी नहीं है. मेरे पास ऐसा गवाह मौजूद है, जिस ने तुम्हें कामिनी का गला दबाते हुए देखा है. अब बोलो, क्या कहना चाहते हो?’’
मेरी इस बात पर उस की हालत खराब हो गई, उस से कुछ कहते नहीं बन रहा था. मैं उसे और मौका नहीं देना चाहता था, इसलिए मेज पर घूसा मार कर पूछा, ‘‘बोलो, तुम ने हत्या की है?’’
‘‘नहीं सरकार, मैं ने उस की हत्या नहीं की है.’’ वह सहम कर बोला.
मैं ने उसे हवालात में बंद कर दिया और अपने मुखबिरों से कहा कि वे शाम तक यह पता लगा कर बताएं कि कामिनी का चरित्र कैसा था? लेकिन मुखबिरों से कोई काम की बात पता नहीं चली. मैं ने उस लड़के को दोबारा बुला कर पूछा तो उस ने कहा, ‘‘साहब, मैं ने अपनी आंखों से उसे गला दबाते देखा था. कुछ और बातें पूछ कर मैं ने उस लड़के को भेज दिया. उस के जाने के बाद नंबरदार आ गया तो उस ने बरकत के बारे में कुछ बातें बताईं.’’
नंबरदार के बताए अनुसार, बरकत एक हकीम की दुकान पर जड़ीबूटियां कूटने का काम करता था. वह अपनी पत्नी को बहुत प्यार करता था. किसी बात पर दोनों में कभीकभी छोटामोटा झगड़ा जरूर हो जाता था, लेकिन बाद में बरकत उसे मना लेता था. बरकत के घर के बराबर में एक औरत रहती थी, जिस का नाम सरदारा था. लोग उसे दारू कहते थे, उस की कामिनी से बहुत पटती थी. वह उस के बारे में सबकुछ जानती थी. अगर उस से पूछताछ की जाए तो शायद वह उस के बारे में कुछ बता सके.
मैं ने दारू को लाने के लिए तुरंत एक सिपाही को भेज दिया. इसी बीच एक और मुखबिर आ गया. उस ने मुझे जो कुछ बताया, वह मुझे पहले से ही पता था. लेकिन उस ने एक नई बात यह बताई कि बरकत को कोई बीमारी लगी थी, जिस का इलाज वह उसी हकीम से करा रहा था, जिस के यहां काम करता था. मैं ने मुखबिर से कहा कि वह उस की बीमारी का पता लगा कर मुझे बताए. जिस सिपाही को मैं ने दारू को लाने को भेजा था, वह उसे ले कर आ गया. लेकिन उस के साथ उस का पति भी आया था. दोनों काफी घबराए हुए थे. मैं ने दोनों को अपने कमरे में बुलवाया. औरत 35 साल के लगभग थी और मर्द 40 के लपेटे में था. मैं ने देखा, मर्द घबराया हुआ लग रहा था, लेकिन औरत शांत थी.
‘‘हम से क्या गलती हो गई सरकार,’’ मर्द हाथ जोड़ कर बोला, ‘‘आप ने मेरी घरवाली को क्यों बुलवाया है?’’
मैं ने उसे तसल्ली देते हुए कहा, ‘‘घबराने की कोई बात नहीं है. मुझे इन से 2-3 बातें पूछनी हैं.’’
यह कह कर मैं ने पति को बाहर भेज दिया. औरत मेरी ओर देखने लगी. मैं ने कहा, ‘‘सुना है कि तुम्हारी कामिनी से बड़ी गहरी दोस्ती थी. उस के मरने का मुझे बहुत अफसोस है. उस के बारे में मैं तुम से 2-3 बातें पूछना चाहता हूं.’’
‘‘बस जी, अल्लाह को जो मंजूर था, वह हो गया. बड़ी प्यारी लड़की थी,’’ उस ने एक आह भर कर कहा, ‘‘आप जो पूछना चाहें, पूछ लें. मुझे जो पता होगा, जरूर बताऊंगी.’’
‘‘मुझे शक है कि कामिनी की हत्या हुई है,’’ इतना कह कर मैं ने उस के चेहरे को गौर से देखा. मुझे लगा था कि हत्या की बात पर वह उछल पड़ेगी, लेकिन वह सामान्य रही.
‘‘आप का शक ठीक है, मुझे भी यही शक था. लेकिन मैं किसी से कुछ कह नहीं सकी.’’ उस ने कहा.
दारू ने यह बात कह कर मुझे हैरान कर दिया था. मैं ने पूछा, ‘‘शक का कोई कारण तो होगा?’’
‘‘यह लंबी कहानी है,’’ उस ने कहा.
इस के बाद उस ने मुझे जो कहानी सुनाई, उसे मैं यहां संक्षेप में लिख रहा हूं.
कामिनी 2 भाइयों की एकलौती बहन थी, इसलिए घर में सब की लाडली थी. जवान हुई तो इतनी खूबसूरत निकली कि सब के आकर्षण का केंद्र बन गई. ईसाई होने की वजह से उसे घूमनेफिरने की आजादी थी. उस से लड़के बात करने से कतराते थे, क्योंकि वह ऐसा जवाब देती थी कि वे मुंह ताकते रह जाते थे. कामिनी की बिरादरी के कई लड़के उस से शादी करना चाहते थे, लेकिन उसे उन में से कोई भी पसंद नहीं था. वह अपनी ही तरह सुंदर लड़का चाहती थी. उन्हीं दिनों गांव के एक लड़के से उस की दोस्ती हो गई, जो बहुत सुंदर था. उस का नाम कमाले था.
उन की दोस्ती दीवानगी तक जा पहुंची. दोनों रोजाना चोरीछिपे मिलने लगे, लेकिन उन का यह मिलन छिपा नहीं रहा. जल्दी ही उस के भाइयों और पिता को पता चल गया. उन्होंने सख्ती करने के बजाय उस की शादी बरकत से कर दी. कमाले को जब उस की शादी के बारे में पता चला तो उस ने कामिनी से भाग चलने को कहा. लेकिन वह इस के लिए तैयार नहीं हुई. क्योंकि मांबाप, भाइयों ने उसे बहुत लाडप्यार से पाला था, इसलिए वह नहीं चाहती थी कि उस की वजह से उस के घरवालों की बदनामी हो. अपने मांबाप की इज्जत के लिए उस ने अपनी मोहब्बत का गला घोंट दिया. उस दिन वह कमाले से लिपट कर इतना रोई थी कि कमाले को संभालना मुश्किल हो गया था.
इस के बाद कमाले ने कहा, ‘‘अच्छा, ऐसा करता हूं कि मैं तुम से महीने में 2-3 बार मिलने आ जाया करूंगा.’’
‘‘अगर किसी ने देख लिया तो बदनामी होगी.’’ कामिनी ने कहा.
‘‘जरूरी नहीं कि हम मिलें ही, दूर से ही एकदूसरे को देख लिया करेंगे.’’ कमाले ने समझाया.
कामिनी ब्याह कर बरकत के घर आ गई. कमाले महीने में 2-3 बार बरकत के गांव आता रहता था. इस तरह दोनों दूर से ही एकदूसरे को देख कर अपने मन को तसल्ली दे लेते थे. इसी बीच कामिनी ने अपनी पड़ोसन दारू को अपना भेदी बना लिया. उस ने उस से सब कुछ सचसच बता दिया. इस के बाद दारू उस की खबर कमाले तक पहुंचाने लगी. कभीकभी दारू उन का मिलन भी करवा देती थी. शादी को 2 साल हो गए थे, लेकिन उसे कोई बच्चा नहीं हुआ था. उस जमाने में डाक्टरी टैस्ट तो होते नहीं थे, सारी कमी मर्द के बजाय औरत पर डाल दी जाती थी.
कमाले बराबर कामिनी से मिलने आता रहता था, बाद में दोनों एक वीरान कब्रिस्तान के पास रात में मिलने भी लगे थे. उस जगह पर कोई दिन में भी नहीं जाता था. उन दिनों घरों में शौचालय तो होते नहीं थे, लोग खेतों में जाया करते थे. औरतें अंधेरे में जाया करती थीं. कामिनी भी दारू के साथ जाती थी, उधर कमाले आ जाता था. दारू उसे कमाले के पास छोड़ कर इधरउधर हो जाती थी. वे दोनों मिलते जरूर थे, लेकिन रहते अपनी हद में थे.
धीरेधीरे दोनों हदें पार करने लगे. समय गुजरता रहा. शादी के 2 सालों बाद कामिनी ने अपने अंदर कुछ बदलाव देखा तो उस ने दारू से कहा. दारू ने उसे गले से लगा कर कहा, ‘‘बड़ी खुशी की बात है, तू मां बनने वाली है.’’
कामिनी सुन कर बहुत खुश हुई. उस ने बरकत को यह बात बताई तो वह भी खुश हुआ. लेकिन कुछ देर बाद वह बुझ सा गया और सिर झुका कर कुछ सोचने लगा. कामिनी समझ नहीं पाई कि उस के मां बनने की खुशी में उसे खुश होना चाहिए था, जबकि वह बुझ सा क्यों गया. इस के बाद बरकत के मिजाज में चिड़चिड़ापन आ गया.
बरकत को चुप देख कर एक दिन कामिनी ने पूछा तो बरकत ने उसे जो जवाब दिया, उसे सुन कर वह सन्न रह गई. उस ने कहा, ‘‘कामिनी यह बच्चा मेरा नहीं हो सकता, क्योंकि मैं बाप बनने के काबिल नहीं हूं.’’
‘‘यह तुम क्या कह रहे हो?’’ कामिनी ने कहा, ‘‘यह बच्चा तुम्हारा ही है. तुम से किस ने कहा कि तुम बाप नहीं बन सकते?’’
‘‘कामिनी हमारी शादी के डेढ़ साल बाद भी जब हमें कोई बच्चा नहीं हुआ तो मैं ने हकीमजी, जिन के यहां मैं काम करता हूं, से पूछा तो उन्होंने मुझे बताया कि तुम्हारी पत्नी बिलकुल ठीक है, कमी मेरे अंदर है. लेकिन घबराने की कोई बात नहीं है, मैं तुम्हें ऐसी दवा दूंगा कि तुम बिलकुल ठीक हो जाओगे. और वह दवा पूरे छह महीने तक चलेगी. लेकिन अभी दवा लेते हुए मुझे 2 महीने ही हुए हैं.’’
कामिनी ने कहा, ‘‘हो सकता है, तुम 2 महीने में ही ठीक हो गए हो?’’
यह सुन कर उसे कुछ तसल्ली हुई, लेकिन पूरी तरह नहीं. अब उस की हालत ऐसी हो गई कि कभी वह खुश रहता तो कभी कामिनी से लड़नेमरने पर उतारू हो जाता. कामिनी गुस्सा हो जाती तो किसी तरह उसे मना लेता. एक दिन बरकत काम से लौटा तो कामिनी से बहुत लड़ा. उस ने कहा, ‘‘यह जो बच्चा तेरे पेट में पल रहा है, यह हराम का है. मैं ने हकीम से पूछा था कि क्या उन की दवा से मैं 2 महीने में ठीक हो सकता हूं तो उन्होंने कहा कि कभी नहीं, यह जो दवा दी गई है, यह 3 महीने चलेगी, उस के बाद नई दवा दी जाएगी, जो 3 महीने चलेगी. उस के बाद ही तुम पूरी तरह से ठीक हो जाओगे.
उस दिन भी कामिनी ने बरकत को काफी समझाने की कोशिश की, पर बरकत उस की बात मानने को तैयार नहीं था. पति की इस बात पर कामिनी रूठ गई, पर बरकत ने उसे मना लिया. इस घटना के 2-3 दिनों बाद गांव में एक मेला लगा. कामिनी ने बरकत से कहा कि वह उसे मेला दिखा लाए. बरकत की उस दिन छुट्टी थी. वह उसे साइकिल पर बिठा कर मेला दिखाने ले गया. पता चला कि दोनों नहर में गिर गए, जिस में कामिनी की मौत हो गई.
इस के बाद दारू ने कहा, ‘‘अब आप को पता चल गया होगा कि मैं ने क्यों कहा था कि ऐसा तो होना ही था.’’
पूरी कहानी सुनने के बाद मैं ने दारू से कहा कि अब वह घर जाए. फिर जब कभी जरूरत पड़ेगी, उसे बुला लिया जाएगा. उस के जाने के बाद मैं ने अपने एक एएसआई जो पठान था, को बुला कर उसे कमाले का पता दे कर कहा कि वह उसे ले आए. अगर वह न आए तो उस की ठुकाई कर के उसे घसीटता हुआ ले आए. वह तुरंत उसे लेने चला गया. इस के बाद मैं ने बरकत को हवालात से निकाल कर लाने को कहा. अब मेरे पास गवाह भी था और पूरी कहानी भी मैं सुन चुका था. मुझे कमाले का बयान भी लेना था और बरकत का मैडिकल चैकअप भी कराना था, क्योंकि मैं यह साबित करना चाहता था कि वह संतान पैदा करने के काबिल नहीं है, जबकि उस की पत्नी को 3 महीने का गर्भ था और उस ने शक की बिनाह पर उस की हत्या की थी.
एक सिपाही बरकत को मेरे कमरे में ले आया. वह कुरसी पर बैठने जा रहा था, तभी मैं ने अपने हाथ में थामा बेंत का डंडा जोर से मेज पर पटका, जिस से एक तेज आवाज हुई. वह उछल कर पीछे हट गया. मैं ने डांट कर कहा, ‘‘वहीं खड़े रहो. मैं ने तुम्हें बड़ा सम्मान दिया, लेकिन अब तुम इस के काबिल नहीं रहे, लगातार झूठ बोलते रहे. अब झूठ बोले तो तुम्हें उलटा लटका दूंगा. मैं एक बार और कह रहा हूं कि अगर तुम ने शराफत से इकबालिया बयान दे दिया तो फायदे में रहोगे.’’
‘‘मैं क्या इकबालिया बयान दूं, मैं ने अपनी बीवी की हत्या नहीं की है.’’ उस ने कहा.
वह काफी ढीठ हो रहा था. मैं ने उस पर सीधा हमला करते हुए कहा, ‘‘कामिनी के पेट में किस का पाप पल रहा था?’’
यह सुन कर वह 2 कदम पीछे हट गया, उस का चेहरा पीला पड़ गया. वह मुझे इस तरह देखने लगा, जैसे मैं कोई जादूगर हूं.
‘‘वह मेरी घर वाली थी, उस के पेट में मेरा ही बच्चा होगा न.’’ उस ने कहा.
‘‘तुम बड़े बेशर्म हो. मुझे पता है कि तुम इस काबिल नहीं हो कि बाप बन सको. अगर नहीं मानोगे तो मैं उस हकीम को यहां बुलवा लूंगा जिस की दवा तुम खा रहे थे.’’ मैं ने उसे घेरने की गरज से कहा.
हमला उस की मरदानगी पर हुआ था, इसलिए उसे परेशान तो होना ही था. वह सिर झुका कर खड़ा हो गया. मुझे उस पर दया भी आई. उस ने सिर उठाया तो उस की आंखों में आंसू थे. उस ने कहा, ‘‘सरकार, मैं बश्ेर्म नहीं हूं. मैं ने ही कामिनी को गला घोंट कर मारा है. पूछिए, आप क्या पूछना चाहते हैं, मैं आप की सभी बातों का जवाब दूंगा.’’
इस के बाद उस ने लंबा बयान दिया, जो इस तरह था. बरकत की शादी कामिनी से हुई तो वह बहुत खुश था. कामिनी बहुत सुंदर थी. वह उस की हर बात मानता था. कामिनी ने उस की इस कमजोरी का खूब फायदा उठाया. वह उसे अंगुलियों पर नचाने लगी. लोग उसे जोरू का गुलाम कहने लगे. एक साल बीता तो लोग पूछने लगे कि बच्चा क्यों नहीं हो रहा? दोनों यही जवाब देते कि अभी जल्दी क्या है, हो जाएगा. लेकिन अकेले में जब वे इस बात पर विचार करते तो परेशान हो जाते. मर्द कैसा भी हो, वह यह कतई सहन नही कर सकता कि कोई उसे नपुंसक कहे.
बरकत ने पत्नी से कहा, ‘‘वह गांव की किसी दाई को दिखा कर पूछे कि अभी तक उसे बच्चा क्यों नहीं ठहरा.’’
कामिनी ने एक दाई को दिखाया तो उस ने कहा कि वह बिलकुल ठीक है. मर्द में ही कोई कमी हो सकती है. कामिनी ने बरकत से कहा कि वह हकीम से अपने आप को चैक कराए. बरकत ने ऐसा ही किया. हकीम ने बताया कि वह बच्चा पैदा करने लायक नहीं है. अगर वह बच्चा चाहता है तो उसे 6 महीने तक इलाज कराना होगा. हकीम ने उस का इलाज शुरू कर दिया. उसे दवा खाते 2 महीने ही हुए थे कि कामिनी ने उस से बताया कि वह मां बनने वाली है. यह सुन कर वह बहुत खुश हुआ, लेकिन पलभर बाद उसे लगा कि कामिनी मजाक कर रही है. अगर ऐसा सचमुच है तो उस के किसी से अवैध संबंध हैं.
बरकत ने हकीम से पूछा तो उस ने कहा कि 2 महीने में उस का ठीक होना कतई संभव नहीं है. यह दवा 2 कोर्स में होती है. अभी तो उस का पहला कोर्स चल रहा है. दूसरा कोर्स 3 महीने बाद शुरू होगा, जिस में बच्चा पैदा करने वाले शुक्राणु बढ़ाए जाएंगे. बरकत समझ गया कि कामिनी हराम का बच्चा लिए घूम रही है. उस ने तय कर लिया कि वह इस बात का पता लगाएगा कि कामिनी के किसी के साथ अवैध संबंध तो नहीं हैं? उस ने कई बार दिन में आ कर देखा, वह उसे घर में ही मिली. उसे लगा कि कामिनी रात को दिशामैदान जाती है, तब वह प्रेमी से मिलती होगी. उस ने रात में भी उस का पीछा किया, लेकिन उसे कोई शक वाली बात नहीं दिखाई दी.
लेकिन एक रात वह अचानक कामिनी और दारू का पीछा करता हुआ गया तो उस रात दोनों बहुत दूर निकल गईं. कब्रिस्तान के पास पहुंच कर दारू तो खेत में चली गई, जबकि कामिनी हंसती हुई कब्रिस्तान में गायब हो गई. बरकत ने आगे बढ़ कर वहां जो देखा, अवाक रह गया. कामिनी एक जवान लड़के से लिपटी हुई थी. दोनों की दबीदबी हंसी की आवाजें आ रही थीं. आगे जो हुआ, उसे देख कर बरकत को गुस्सा तो बहुत आया, लेकिन किसी तरह खुद पर नियंत्रण कर के वह वापस घर आ गया.
बस, वहीं से उसे पत्नी से नफरत हो गई, लेकिन कामिनी को देख कर पता नहीं उसे क्या हो जाता था कि वह सब कुछ भूल जाता था. उस ने सोचा कि सब कुछ देख कर भी वह चुप रहेगा. अगर वह कामिनी को तलाक देता है या उस की हत्या करता है तो इतनी सुंदर पत्नी से हाथ धो बैठेगा, इसलिए सब कुछ जानते हुए भी वह चुप रहा.
इस घटना के कुछ दिनों बाद कामिनी ने बरकत से कहा कि वह उसे मेला दिखा लाए. दोनों साइकिल पर मेला देखने जा रहे थे तो रास्ते में बरकत के दिमाग में हलचल मची, वह उसे मारने के बारे में सोच रहा था, लेकिन उस की भोली सूरत देख कर उस का इरादा बदल जा रहा था. यही सोचतेसोचते उस की साइकिल नहर की पुलिया पर पहुंच गई.
उसी बीच सामने से तेजी से बैलगाड़ी को आता देख कर वह संतुलन खो बैठा. बैलगाड़ी से बचने के चक्कर में वह पत्नी के साथ नहर में गिर गया. कामिनी तैरना नहीं जानती थी. वह बारबार पानी से सिर निकाल कर कह रही थी कि मुझे बचा लो. वह उसे बचाने के लिए तेजी से तैर कर गया, लेकिन तभी उसे उस की बेवफाई याद आ गई. उस ने उसे बचाने के बजाय उस की गरदन पकड़ कर दबा दी, जिस से वह मर गई.
बयान देते समय बरकत रो रहा था. मैं समझ रहा था कि उस का रोना असली है. वह दोहरे चरित्र का मालिक था. उसे कामिनी से प्रेम भी था और नफरत भी. उस का बयान सुन कर मैं आंखें बंद किए बैठा था कि तभी मेरे पठान एएसआई ने आ कर कहा, ‘सर, मैं कमाले को ले आया हूं.’ मैं ने उसे अंदर लाने को कहा. मेरे कमरे में एक सुंदर जवान आया, जो कमाले था. उस के पीछे एएसआई खड़ा था.’ मैं ने पूछा, ‘‘तुम्हें पता है, कामिनी पिछले दिनों नहर में डूब कर मर गई है?’’
उस ने कहा, ‘‘जी पता है, इस की चर्चा आसपास के गांवों में फैल चुकी है.’’
‘‘तुम्हें तो कामिनी के मरने का बहुत दुख होगा?’’ मैं ने उस की आंखों में आंखें डाल कर पूछा.
‘‘साहब, मेरा उस से क्या वास्ता? मैं तो उसे जानता तक नहीं, मुझे उस के मरने का क्यों दुख होगा?’’ उस ने कहा.
‘‘मैं ने सुना है कि तुम उस से मिलने बहुत दूर से आते थे. तुम्हारी उस से बहुत गहरी दोस्ती थी.’’
‘‘साहब, आप ने गलत सुना है. मैं तो उस को जानता तक नहीं था.’’
एएसआई, जो उस के पीछे खड़ा था, को मैं ने उसे इशारा किया. उस ने कमाले के बालों को जोर से झटका दिया तो वह नीचे गिर पड़ा. जैसे ही वह उठा, उस के गाल पर तमाचा मारा तो उस के मुंह से खून निकलने लगा.
‘‘तुम से जो पूछा जा रहा है, उसे ठीकठीक बताओ, नहीं तो खाल खींच लूंगा.’’ एएसआई ने कहा.
मैं ने कहा, ‘‘सचसच बताओ, कामिनी से तुम्हारे संबंध थे या नहीं? अगर झूठ बोले तो मैं तुम्हारी अम्मा दारू को भी बुला लूंगा, जो तुम दोनों को मिलवाती थी.’’
इस पर वह टूट गया. उस ने भी वह पूरी कहानी सुना दी, जो ऊपर लिखी गई है. मैं ने उस का बयान लिख कर उस के हस्ताक्षर करा लिए. केस मजबूत हो गया था. कमाले का बयान, बरकत का बयान, जिस लड़के ने बरकत को गला दबाते देखा था, उस की गवाही, दारू की गवाही, हकीम की गवाही. यह सब तैयार कर के मैं ने अदालत में चार्जशीट पेश कर दी.
अपराधी के बयान और सभी गवाहों के बयान से अदालत ने बरकत को मृत्युदंड की सजा दी. बरकत के वकील ने हाईकोर्ट में अपील दायर की, जिस में उस ने कहा कि बरकत अपनी पत्नी के चरित्र से इतना दुखी हो गया था कि वह हर समय दिमागी तौर से बीमार रहने लगा था. एक दिन इसी तकलीफ के कारण उत्तेजित हो कर उस ने पत्नी की हत्या कर दी. अदालत ने उस की यह अपील मान ली और उस की मृत्युदंड की सजा कम कर के केवल 7 साल की Hindi Stories






