Love Crime: रेखा देवी का 14 साल की उम्र में सुरेंद्र दादरवाल के साथ बाल विवाह हो जरूर हो गया था, लेकिन गौना बाद में होना तय हुआ. इस दौरान रेखा पढ़ाई करती रही. बालिग होतेहोते वह बीएससी कर चुकी थी. गौना होने से पहले रेखा को पति इतना दुश्मन नजर आने लगा कि उस ने उस की हत्या करा दी. आखिर रेखा ने ऐसा क्यों किया?
रेखा ने नागपुर (महाराष्ट्र) में बैठ कर पति सुरेंद्र उर्फ सुरेश दादरवाल की हत्या का ब्लूप्रिंट तैयार किया. उस ने अपने प्रेमी राजूराम जाट और उस के साथी जीवण राम को हत्या की योजना में शामिल किया. योजना अत्यंत सरल, लेकिन घातक थी. रेखा ने प्रेमी राजू के साथ योजना बनाई कि सुरेंद्र को सुनसान जगह पर रोक कर, हेलमेट उतारते ही चाकू से ताबड़तोड़ वार करना और पुलिस को भ्रमित करने के लिए मोबाइल पास में नहीं रखना था.
बाइक पर असली नंबर प्लेट बिलकुल नहीं रखना. इस के लिए चोरी की बाइक की नंबर प्लेट लगा कर घटना को अंजाम देने का रेखा ने निर्देश दिया था. रेखा पिछले 3 महीने से वाईफाई कौल कर प्रेमी राजू से पति सुरेंद्र दादरवाल की हत्या की योजना बनाने में लगी हुई थी. रेखा के प्यार में पागल राजूराम अपनी गर्लफ्रेंड को पाने के लिए खून से हाथ तक रंगने को तैयार हो गया था. मूलरूप से राजस्थान के डीडवाना-कुचामन जिले के मकराना क्षेत्र की रहने वाली रेखा देवी पिछले काफी समय से अपने पापा आशाराम जाट के साथ नागपुर में रह रही थी.
रेखा की शादी साल 2018 में सुरेंद्र उर्फ सुरेश दादरवाल निवासी गांव ईटावा लाखा, जिला डीडवाना-कुचामन, राजस्थान के साथ हुई थी. रेखा की सुरेंद्र के साथ जब शादी हुई थी, उस समय वह 14 साल की थी. यानी रेखा का सुरेंद्र के साथ बाल विवाह हुआ था, लेकिन रेखा का गौना नहीं हुआ था, इस कारण वह ससुराल नहीं जाती थी. वह मायके में ही रह कर पढ़ाई कर रही थी. राजस्थान में आज भी कई जातियों में बाल विवाह चोरीछिपे आम बात है. बाल विवाह के बाद लड़की (दुलहन) जब बालिग हो जाती है, तब उस का गौना कर ससुराल ले जाया जाता है. गौने के बाद ही दंपति में संबंध बनते हैं. गौने से पहले शादीशुदा हो कर भी रेखा कुंवारी थी.
रेखा का गौना होता, उस से पहले ही वह राजूराम के प्यार में पड़ गई. रेखा 2020 में कोचिंग करने कुचामन में किराए के कमरे में रहती थी. इसी दौरान साथ में कोचिंग कर रहे राजूराम से उस की नजदीकियां बढ़ीं. 2023 तक साथ में कोचिंग कर रहे रेखा और राजूराम के बीच प्रेम प्रसंग हो चुका था.रेखा और राजू के बीच प्रेम पनपा तो दोनों मिलने लगे. रेखा ने राजू से एक रोज कहा, ”राजू, मेरी शादी हो चुकी है, मगर गौना होना बाकी है. ऐसे में हमारे प्यार का अंजाम क्या होगा, नहीं जानती. मगर मैं तुम्हारे बिना जी नहीं पाऊंगी.’’
”रेखा, तुम शादीशुदा हो कर भी कुंवारी ही हो. अब गौना मुझ से होगा, सुरेंद्र से नहीं. मैं तुम्हारा प्यार पाने के लिए कुछ भी कर सकता हूं. अपनी जान तक कुरबान कर सकता हूं.’’ राजू ने रेखा को आश्वस्त करते हुए कहा तो रेखा उस के सीने से लिपट कर बोली, ”मेरी बीएससी की पढ़ाई पूरी हो चुकी है, मैं अब नागपुर जा कर परिवार के साथ रहूंगी. तुम मुझे भुलाना मत. मेरा पहला और आखिरी प्यार तुम ही हो.’’
”मैं तुम को जिंदगी के आखिरी पल तक नहीं भूलूंगा, लेकिन तुम मत भुलाना.’’ राजू ने कहा था.
रेखा बीएससी के बाद कुचामन से नागपुर चली गई. वहां अपने परिवार के साथ रहने लगी. रेखा का प्रेमी राजूराम से फोन से संपर्क बना रहा. दोनों फोन पर बातें कर मन को हलका कर लेते थे.
सुरेंद्र प्राइवेट स्कूल में पढ़ाता था, साथ ही वह प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी कर रहा था. सुरेंद्र की पत्नी रेखा से कभीकभी बातें होती थीं, मगर रेखा उस से अनमने मन से बातें करती थी. सुरेंद्र को पत्नी का व्यवहार अच्छा नहीं लगता था, मगर वह करता भी तो क्या. रेखा को गौने का डर सताने लगा था. उसे पता था कि उस का गौना अगर सुरेंद्र के साथ हो गया तो वह प्रेमी राजू को पा नहीं सकेगी. ऐसे में उसे खयाल आया कि क्यों न पति सुरेंद्र को रास्ते से हटा दिया जाए. पति के रास्ते से हटने पर वह प्रेमी राजू के साथ शादी कर के रह सकती थी.
यह विचार मन में आया तो रेखा अपने पति को रास्ते से हटाने का जाल बुनने लगी. एक दिन रेखा प्रेमी राजू से बोली, ”राजू, अगर मुझे पाना चाहते हो तो सुरेंद्र को ठिकाने लगाना होगा.’’
”मगर कैसे, अगर हम पकड़े गए तो…’’ राजू ने शंका जताई.
तब रेखा ने उसे प्लान समझाया, ”राजू, तुम अपने दोस्त जीवण राम को योजना में शामिल कर लो. सुरेंद्र की लोकेशन मैं बता दूंगी. तुम एक चाकू डीमार्ट कुचामन से खरीद कर पास में रख लेना. अपनी बाइक पर फरजी नंबर प्लेट लगा कर, मोबाइल फोन घटना वाले दिन घर पर ही रहने देना, ताकि मोबाइल की लोकेशन के आधार पर पकड़े न जाएं.
”मुंह पर कपड़ा बांध कर रखना, साथ ही हेलमेट पहन कर रखना, ताकि सीसीटीवी में कैद होने पर भी पहचान नहीं हो. सुरेंद्र को कहीं सुनसान जगह पर बहाने से रोक लेना. वह बाइक रोक कर जैसे ही हेलमेट उतारे, उसे चाकुओं से गोद देना.
”मौत होने पर उस की बाइक के साथ उसे सड़क पर फेंक देना और वहां से भाग जाना. सड़क पर सुरेंद्र को देखने पर ऐसा लगेगा कि एक्सीडेंट में वह मरा है. बस, इस के बाद हम दोनों शादी कर लेंगे और मौज से रहेंगे.’’
”प्लान तो तुम ने गजब का बनाया है. प्लान के हिसाब से तो हम पकड़े नहीं जाएंगे.’’ राजू बोला.
राजूराम के साथ जीवण राम भी कोचिंग करता था. दोनों की अच्छी दोस्ती थी. इसी दोस्ती के चलते राजू का साथ देने को जीवण राम जाट तैयार हो गया.
योजनानुसार राजूराम ने डीमार्ट कुचामन से तेज धारदार चाकू खरीद कर पास में रख लिया. एक फरजी नंबर प्लेट राजू ने अपनी बाइक पर लगा ली.
29 नवंबर, 2025 की सुबह रेखा जाट ने पति सुरेंद्र उर्फ सुरेश की लोकेशन प्रेमी राजू जाट को भेज कर कहा, ”राजू, आज सुरेंद्र बोरावड़ जा रहा है. बोरावड़ से वह जिंदा नहीं लौटना चाहिए. आज उस का काम तमाम कर देना. मैं उस की लोकेशन भेजती रहूंगी.’’
”डार्लिंग, तुम लोकेशन बताती रहना. आज वह जिंदा नहीं बचेगा. हम बोरावड़ के लिए निकल रहे हैं.’’ वह बोला.
राजू योजनानुसार दोस्त जीवण राम के साथ बाइक पर बोरावड़ के लिए निकल गया. दोनों ने अपने मोबाइल घर पर ही छोड़ दिए थे. फरजी नंबर प्लेट लगी बाइक पर सुरेंद्र की 29 नवंबर, 2025 की सुबह से ही रैकी करने लगे. मगर पूरे दिन सुरेंद्र की हत्या करने का मौका नहीं मिला. तब राजू और जीवण राम ईटावा लाखा गांव से डेढ़ किलोमीटर दूर सुरेंद्र दादरवाल की ढाणी से 200 मीटर पहले सड़क पर जा कर सुरेंद्र का इंतजार करने लगे. शाम के ठीक 6 बजे सुरेंद्र जब अपने घर से 200 मीटर दूर पहुंचा तो बाइक खड़ी किए राजू व जीवण उसे दिखे. सुरेंद्र को उन्होंने रुकने का इशारा किया.
सुरेंद्र ने बाइक रोकी तो राजू बोला, ”भैया, हम रास्ता भटक गए हैं, जरा रास्ता बताना.’’
बाइक रोक कर सुरेंद्र ने जैसे ही हेलमेट उतारी और बाइक से नीचे उतरने लगा. उसी समय राजू ने चाकू निकाल कर सुरेंद्र के गले पर वार किया.
तब जीवण ने राजू से चाकू लेते हुए कहा, ”चाकू मुझे दे, तू देर लगाएगा.’’
जीवण ने दनादन चाकू के कई वार सुरेंद्र की पीठ पर किए. सुरेंद्र कुछ समझ पाता, उस से पहले ही उस का काम तमाम कर दिया. सुरेंद्र की हत्या के बाद शव को बाइक पर रख कर सड़क किनारे फेंक दिया और आरोपी वहां से बाइक पर भाग निकले. उस समय अंधेरा घिर रहा था. साढ़े 6 बजे पिता ने सुरेंद्र के मोबाइल पर कौल किया तो उस ने फोन नहीं उठाया.
थोड़ी देर बाद उस रास्ते से ताऊ उमाराम कुछ लोगों के साथ गुजरे तो उन्होंने सुरेंद्र को बाइक के पास गिरे देखा. उन लोगों ने तत्काल पुलिस थाना गच्छीपुरा (नागौर) को घटना की सूचना दी. घटना की सूचना मिलते ही एसएचओ महावीर सिंह चौधरी तत्काल पुलिस टीम के साथ 5-7 मिनट में घटनास्थल पर पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण कर सुरेंद्र दादरवाल को गच्छीपुरा अस्पताल ले गए, जहां पर डौक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.
थोड़ी देर पहले पापा को खेत पर तिरपाल दे कर लौटा सुरेंद्र अब इस दुनिया में नहीं था. सुरेंद्र के एक्सीडेंट की खबर परिजनों को पुलिस ने दी तो वे भागेभागे गच्छीपुरा अस्पताल पहुंचे, जहां पर पता चला कि सुरेंद्र की मौत हो गई है. बेटे की मौत की खबर सुन कर पापा एवं छोटा भाई पछाड़ खा कर गिर पड़े और रोने लगे. प्रथमदृष्टया मामला एक्सीडेंट में मौत का लग रहा था. मगर पुलिस ने जब शव का बारीकी से निरीक्षण किया तो मामला संदिग्ध लगा. मृतक की पीठ पर कई गहरे जख्म थे, गला किसी धारदार हथियार से काटा हुआ था. अगर एक्सीडेंट होता तो बाइक को भी नुकसान होता, मगर ऐसा कुछ नहीं हुआ था.
एक और बात, सुरेंद्र जो चप्पलें घर से पहन कर गया था, उन में से एक चप्पल गायब थी. एक चप्पल सुरेंद्र की ही थी, मगर दूसरे पैर की चप्पल की जगह किसी और की चप्पल घटनास्थल पर मिली थी. सुरेंद्र की हत्या करते समय हड़बड़ी में आरोपी अपनी एक चप्पल वहीं पर छोड़ सुरेंद्र की चप्पल पहन कर भाग गए थे. पुलिस ने मृतक का शव मोर्चरी में रखवा दिया. घटना की सूचना गच्छीपुरा थाने के एसएचओ महावीर सिंह चौधरी ने उच्चाधिकारियों को दे दी थी.
मकराना के सीओ विक्की नागपाल तत्काल घटनास्थल पर पहुंचे और गच्छीपुरा थाने की पुलिस के साथ मिल कर जांचपड़ताल की. इस के बाद अस्पताल जा कर शव का निरीक्षण किया. शव पर गहरे जख्म थे, जो घटना को संदिग्ध बना रहे थे. सीओ विक्की नागपाल ने मृतक सुरेंद्र के परिजनों से बातचीत की. परिजन गहरे सदमे में थे. परिजनों ने बताया कि यह एक्सीडेंट है या मर्डर, वे नहीं जानते. परिजनों की किसी से अदावत या लड़ाईझगड़ा नहीं था. सीओ नागपाल कुछ एसएचओ को दिशानिर्देश दे कर मकराना लौट गए.
29 नवंबर, 2025 को मृतक सुरेंद्र दादरवाल के ताऊ उमाराम निवासी इटावा लाखा अपने 24 वर्षीय भतीजे सुरेंद्र उर्फ सुरेश दादरवाल की सड़क दुर्घटना में मृत्यु होने की रिपोर्ट बीएनएस की धारा 281, 106 (1) के तहत थाना गच्छीपुरा में दर्ज करा दी. इंसपेक्टर महावीर सिंह ने मृतक के फेमिली वालों को भरोसा दिया कि मामले की जांच की जाएगी. अगर मर्डर हुआ है तो मामले में हत्या की धारा जोड़ दी जाएगी. मृतक के घर वालों ने पुलिस से न्याय की मांग की. परिजनों ने मैडिकल बोर्ड गठित कर मृतक के शव का पोस्टमार्टम कराने की मांग की, जिस पर पुलिस ने 30 नवंबर, 2025 को मैडिकल बोर्ड से मृतक के शव का पोस्टमार्टम कराया.
पोस्टमार्टम के बाद शव उस के परिजनों को सौंपा गया. परिजन शव घर ले गए और उसी रोज अंतिम संस्कार कर दिया. जवान बेटे की मौत ने परिजनों को गहरा सदमा दिया था. पोस्टमार्टम करने के दौरान मृतक सुरेंद्र के गले एवं पीठ पर तेज धारदार हथियार से चोटें कारित करना प्रतीत हुआ. मैडिकल बोर्ड से मिली पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी मृत्यु तेज धारदार हथियार से गला रेतने से होना प्रतीत हुआ.
घटना की गंभीरता को देखते हुए उच्च अधिकारियों को पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने पर बताया कि सुरेंद्र उर्फ सुरेश दादरवाल की सड़क दुर्घटना में मौत नहीं हुई थी. उस की धारदार चाकू से गला काट कर हत्या की गई थी. आरोपियों ने हत्या को हादसा दिखाने के लिए सुनसान जगह पर हत्या कर शव को बाइक सहित सड़क पर फेंका था. घटना जब डीडवाना-कुचामन की एसपी ऋचा तोमर के सामने आई, तब उन के निर्देशानुसार परबतसर के एएसपी नेमीचंद खारिया एवं मकराना के सीओ विक्की नागपाल के सुपरविजन में एक पुलिस टीम का गठन किया गया.
इस पुलिस टीम में गच्छीपुरा थाने के एसएचओ महावीर सिंह चौधरी, हैडकांस्टेबल सुंदर सिंह, प्रेमप्रकाश, गोपाल सिंह, कांस्टेबल विकास, बलवीर भींचर, सुनील, शिंभूराम, ओमाराम, रामकुमार, हरेंद्र, धर्माराम, देवीलाल, किशोर कुलदीप, केशाराम एवं महिला कांस्टेबल बजू देवी को शामिल किया गया. पुलिस टीम ने अलगअलग जांच शुरू की. पुलिस ने घटना वाले दिन के इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच की तो एक फुटेज में बाइक पर 2 लोग संदिग्ध दिखे. बाइक की नंबर प्लेट से उस के मालिक का पता किया तो संदिग्ध बाइक पर जो नंबर प्लेट लगी थी, वह स्कूटी की नंबर प्लेट थी.

पुलिस गिरफ्त में आरोपी राजूराम जाट जीवण राम
मतलब साफ था कि बाइक पर फरजी नंबर प्लेट थी. ऐसे में पुलिस ने जब और सीसीटीवी खंगाले तो एक सीसीटीवी फुटेज के आधार पर सब से पहले आरोपी जीवण राम की पहचान हुई. पुलिस ने आरोपी जीवण राम को पकड़ लिया. पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की तो जीवण राम ने राजूराम और रेखा देवी की पूरी साजिश का खुलासा कर दिया. जीवण राम के कुबूलनामे के बाद पुलिस ने रेखा और उस के प्रेमी राजूराम से पूछताछ की तो आरोपियों ने सुरेंद्र उर्फ सुरेश दादरवाल की हत्या का गुनाह कुबूल कर लिया.
पुलिस ने 6 दिसंबर, 2025 को आरोपियों राजूराम (21 साल), निवासी गुगड़वार, जीवण राम (23 साल) निवासी शेषमा का बास पांचवा और आरोपी रेखा देवी (21 साल) निवासी दादरवालों की ढाणी, इटावा लाखा, जिला डीडवाना-कुचामन, राजस्थान को गिरफ्तार कर लिया. तीनों आरोपियों से गच्छीपुरा थाने में एसएचओ महावीर सिंह चौधरी और सीओ विक्की नागपाल ने पूछताछ की तो आरोपियों ने घटना की सारी कडिय़ां खोल दीं, जिस पर सुरेंद्र मर्डर के मामले में साजिश रच कर हत्या करने की धाराएं शामिल कर ली गईं.

बेटे की मौत से सदमे में मृतक सुरेंद्र के पापा मेवाराम दादरवाल
आरोपियों के गुनाह कुबूल कर सारी कहानी बयां करने के बाद डीएसपी विक्की नागपाल ने प्रैसवार्ता कर सुरेंद्र उर्फ सुरेश दादरवाल हत्याकांड का खुलासा कर दिया. आरोपियों से पुलिस पूछताछ में जो खूनी कहानी सामने आई, वह इस प्रकार हैं—
राजस्थान के जिला नागौर से अलग कर के नए जिले के रूप में अस्तित्व में आए डीडवाना-कुचामन जिले की मकराना तहसील का एक गांव है इटावा लाखा. इसी गांव के रहने वाले किशनाराम दादरवाल गांव से करीब 2 किलोमीटर दूर दादरवालों की ढाणी में रहते थे. किशनाराम जाट का बड़ा बेटा उमाराम एवं छोटा बेटा मेवाराम हैं. उमाराम एवं मेवाराम अपनेअपने परिवार के साथ दादरवालों की ढाणी में अलगअलग रहते थे.
मेवाराम अपनी पत्नी एवं 2 बेटों के साथ रहता था. बड़ा बेटा सुरेंद्र उर्फ सुरेश पढ़ाई पूरी कर के प्राइवेट स्कूल में पढ़ाता था, साथ ही वह प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी कर रहा था. सुरेंद्र का छोटा भाई भी पढ़ रहा है. सुरेंद्र बहुत ही मिलनसार था. सुरेंद्र पिता के साथ खेतीबाड़ी में भी हाथ बंटाता था. वर्ष 2018 में सुरेंद्र जब 17 साल का था, तब उस की शादी 14 साल की रेखा के साथ कर दी गई थी. बाल विवाह के बाद बालिग होने पर रेखा को गौना कर के सुरेंद्र के साथ ससुराल इटावा लाखा, दादरवालों की ढाणी लाया जाना था.
रेखा के पापा आशाराम जाट सेना से रिटायर थे. वह मकराना से नागपुर (महाराष्ट्र) वर्षों पूर्व जा बसे थे. नागपुर में उन का ग्रेनाइट, मार्बल का कारोबार था. मकराना का संगमरमर पत्थर विश्वप्रसिद्ध है. 2018 में शादी के बाद रेखा भी परिवार के साथ नागपुर जा कर रहने लगी. रेखा बीएससी की पढ़ाई के लिए 2020 में नागपुर से कुचामन आ कर कोचिंग करने लगी. वह किराए का कमरा ले कर कुचामन में रहती थी.
कोचिंग के दौरान दोनों की आंखें चार हुईं तो दोनों के बीच प्यार हो गया. रेखा भूल गई कि वह शादीशुदा है. वह राजूराम के साथ घूमने लगी. राजू उस के कमरे पर रातें बिताने लगा. रेखा के फेमिली वाले नागपुर में थे, सो उसे कुचामन में कोई रोकटोक करने वाला नहीं था. बस, इसी का फायदा उठा कर रेखा और उस का प्रेमी राजू प्यार में हदें पार करते गए.
राजू कुंवारा था. राजू मासूम चेहरे वाली रेखा पर ऐसा फिदा हुआ कि वह उस के हरेक नखरे उठाने को तैयार था. रेखा भी सात फेरे लेने वाले पति सुरेंद्र को भुला कर राजू की बांहों में मचलने लगी. दोनों मौजमस्ती कर के कोचिंग करने लगे. कुचामन में शेषमा का गांव पांचवा निवासी जीवण राम सुंदरिया भी पढ़ता था. राजूराम और जीवण में गहरी दोस्ती थी. जीवण को रेखा और राजू के प्रेमप्रसंग के बारे में पूरी जानकारी थी. राजू अपनी कोई भी बात दोस्त जीवण राम से नहीं छिपाता था. ऐसे में राजू अपनी प्रेमिका रेखा के बारे में उसे सब कुछ बताता रहता था.
हंसीखुशी के बीच 3 साल कब गुजर गए, पता ही नहीं चला. 2023 में रेखा की बीएससी क्लियर हो गई. तब रेखा ने प्रेमी से कहा, ”राजू, मेरी 2018 में इटावा लाखा के सुरेंद्र उर्फ सुरेश दादरवाल के साथ शादी हो चुकी है, मगर तुम से मिलने के बाद मैं उसे भुला चुकी हूं. मैं समाज के दबाव में आ कर भी सुरेंद्र के साथ नहीं रहूंगी. सुरेंद्र से जब मेरी शादी हुई, तब मैं नाबालिग थी. मैं उस शादी को नहीं मानती. मैं ने तो तुम से प्यार किया है और समय आने पर शादी भी तुम से ही करूंगी.’’
”मैं भी तुम से प्यार करता हूं रेखा और शादी भी तुम से ही करूंगा. इस के लिए चाहे मुझे कुछ भी करना पड़े, लेकिन तुम नागपुर जा कर मुझे भुला मत देना. मुझे हर पल तुम्हारी याद सताएगी. तुम्हारे साथ बिताए पलों को याद कर के मैं जी लूंगा. तुम जब कहोगी शादी कर लूंगा.’’ राजू ने रेखा को प्यार से दुलारते हुए कहा था.
बीएससी करने के बाद रेखा नागपुर चली गई थी. पति के प्रति उस का लगाव कम हो गया था. वह अपने प्रेमी राजूराम के साथ नई जिंदगी शुरू करने का मन बना चुकी थी. सुरेंद्र जब पत्नी रेखा को फोन करता तो वह उस का फोन रिसीव नहीं करती थी. कई बार कौल करने पर रेखा उस से झगडऩे लगती थी. रेखा कहती थी, ”मुझे वक्तबेवक्त कौल मत किया करो. मैं अपनी पढ़ाई में बिजी रहती हूं.’’
पत्नी की रूखी बातें सुन कर सुरेंद्र भी उसे कुछ खरीखोटी सुना देता था. सुरेंद्र सोचता कि ये कैसी पत्नी है, जो हर वक्त बिजी रहती है. सुरेंद्र को पता नहीं था कि उस की पत्नी उस से बेवफाई कर के किसी अन्य युवक के प्यार में पड़ गई है. वह मन को समझाता कि गौना कर के पत्नी रेखा को घर लाएगा तो सब ठीक हो जाएगा. उधर रेखा नागपुर जाने के बाद भी प्रेमी राजू से लगातार संपर्क में थी. दोनों की घंटों फोन पर बातें होती थीं. रेखा राजू को पति सुरेंद्र के आने वाले हरेक फोन की बात भी बताती थी.
सुरेंद्र का कौल आने पर रेखा चिढ़ जाती थी. रेखा को लगने लगा था कि पति उस के लिए बोझ बन चुका है और उस के जीते जी वह अपने प्रेमी के साथ जीवन नहीं बिता पाएगी. उस की शादी को 7 साल हो गए थे, अब उस के घर में और ससुराल में गौना करने की बातें होने लगी थीं. रेखा के फेमिली वाले और ससुराल वाले अनजान थे कि रेखा गौना नहीं करना चाहती. वह किसी और लड़के के प्यार में पागल है. फेमिली में जब रेखा के गौने की बात चलती तो रेखा कहती, ”मैं सरकारी नौकरी लगने से पहले गौना नहीं करूंगी.’’
तब उस के फौजी पापा उसे समझाते, ”बेटी, गौना होने के बाद भी तुम नौकरी के लिए तैयारी कर सकती हो. ससुराल वाले नौकरी से रोक थोड़ी रहे हैं.’’
”पापा, गौने के बाद घर के काम से फुरसत मिलेगी तो तैयारी करूंगी. मैं अभी गौना नहीं करूंगी.’’
रेखा बहाने बना कर गौना नहीं होने देना चाहती थी. वह जानती थी कि अगर गौना हो गया तो उसे अपने प्यार को भुलाना पड़ेगा. वह पति को तो भुला सकती थी, मगर प्रेमी को नहीं. ऐसे में रेखा ने प्रेमी राजू के साथ पति सुरेंद्र को रास्ते से हटाने की योजना बना डाली.
रेखा ने प्रेमी से कहा, ”राजू, अगर सुरेंद्र से मेरा गौना हो गया तो हमें बिछुडऩा पड़ेगा. फेमिली वाले गौने की तैयारी में हैं. मैं कब तक बहाने बना कर गौना टालती रहूंगी. तुम सुरेंद्र को रास्ते से हटा दो तो हमें एक होने से कोई रोक नहीं सकता.’’
तब राजू ने रेखा से कहा, ”सुरेंद्र की हत्या के जुर्म में पकड़े गए तो क्या होगा.’’
तब रेखा ने कहा, ”मैं सुरेंद्र की हत्या की ऐसी प्लानिंग करूंगी कि उस की हत्या दुर्घटना लगेगी. दुर्घटना में मौत होने पर हम साफ बच जाएंगे. मैं योजना बताती हूं.’’ यह बात सितंबर, 2025 की है. प्लान के अनुसार रेखा ने सितंबर 2025 से अपने मोबाइल का रिचार्ज नहीं करवाया. वह वाईफाई कौलिंग के जरिए प्रेमी राजूराम के संपर्क में रही. यह प्लान का पहला हिस्सा था. सितंबर, 2025 से दोनों सुरेंद्र दादरवाल को रास्ते से हटाने की साजिश रच रहे थे. रेखा अपने पापा के पास नागपुर में रहती थी. वहीं से वाईफाई कौलिंग से राजूराम से संपर्क करती रही. राजूराम लगातार सुरेंद्र की लोकेशन पर नजर रखता रहा, जिस में दोस्त जीवण राम को भी दोस्ती का वास्ता दे कर योजना में शामिल कर लिया.

आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद उन का सार्वजनिक जुलूस निकालती पुलिस
रेखा के प्लान अनुसार, राजू ने पहले ही एक चाकू खरीद कर रख लिया था. प्लान के अनुसार बाइक पर फरजी नंबर प्लेट लगा ली. राजू एवं जीवण राम ने सुरेंद्र की रैकी के दौरान अपने मोबाइल घर पर ही रखे थे, ताकि मोबाइल लोकेशन के आधार पर पकड़े न जाएं. आरोपियों ने सुरेंद्र की हत्या का पूरा प्लान बना लिया. घटना वाले दिन 29 नवंबर, 2025 को रेखा ने पति सुरेंद्र की लोकेशन दी. तब राजूराम और जीवण राम दादरवालों की ढाणी जाने वाली कच्ची सड़क पर पहुंच गए.
उधर सुरेंद्र अपने पापा को तिरपाल दे कर जब शाम को 6 बजे खेत से घर जाने के लिए निकला तो उस के घर से 200 मीटर पहले बाइक खड़ी कर के दोनों ने सुरेंद्र को रोका. बाइक रोक कर सुरेंद्र जीवण राम से बात करते हुए हेलमेट उतारने लगा, तभी राजू ने सुरेंद्र पर हमला कर दिया. सुरेंद्र चीख भी न सका और उस की सांसें थम गईं. हत्या को एक्सीडेंट दिखाने के लिए बाइक और शव सड़क पर डाल दिया.
उधर हत्याकांड को अंजाम देने के बाद आरोपी राजू ने रेखा को सुरेंद्र का काम तमाम करने की जानकारी दी. तब घटना के अगले दिन रेखा नागपुर से फ्लाइट से जयपुर आई. जयपुर से किशनगढ़ होते हुए शादी के 7 साल बाद पहली बार ससुराल इटावा लाखा आई और शोकसभा में शामिल हो कर घडिय़ाली आंसू बहाए और रोतेकलपते वापस चली गई. वह ससुराल वालों को विश्वास दिलाना चाहती थी कि उसे सुरेंद्र की मौत का गहरा दुख है. पुलिस की मेहनत रंग लाई. पुलिस ने रेखा देवी, उस के प्रेमी राजूराम और जीवण राम को गिरफ्तार कर हत्याकांड का खुलासा कर दिया.

सीओ विक्की नागपाल
आशाराम ने जिस बेटी पर विश्वास किया, उसी बेटी ने उन को बदनाम कर दिया. आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद 7 दिसंबर, 2025 को पुलिस ने राजूराम एवं जीवण राम का गच्छीपुरा कस्बे में पैदल परेड निकाली. पुलिस ने तीनों आरोपियों को 7 दिसंबर को न्यायिक मजिस्ट्रैट मकराना के समक्ष पेश कर 3 दिनों के रिमांड पर लिया और थाने ला कर उन से कड़ी पूछताछ की.

एसपी रिचा तोमर
रिमांड के दौरान आरोपियों की निशानदेही पर सुरेंद्र की हत्या में प्रयुक्त चाकू, बाइक, मृतक की चप्पल एवं आरोपियों के मोबाइल जब्त किए. पूछताछ होने एवं रिमांड अवधि समाप्त होने पर 10 दिसंबर, 2025 को पुलिस ने आरोपियों को फिर से न्यायिक मजिस्ट्रैट मकराना के समक्ष पेश किया, जहां से तीनों आरोपियों को जेल भेज दिया गया. Love Crime






