One Sided Love: प्यार ऐसी चीज नहीं है, जिसे जबरदस्ती हासिल किया जा सके यह तो दिल से पैदा होता है. लेकिन पीयूष अपनी साथी टीचर नीलम का प्यार जबरदस्ती पाना चाहता था. इसी जिद में वह एक खौफनाक गुनाह कर बैठा.

एक युवक सड़क पर भागा जा रहा था, जिस की उम्र 24-25 साल थी. उस के हाथ में चाकू था, जो खून से सना था. उस के हाथ भी खून से सने थे.

भागते हुए वह चीख रहा था, ‘‘मैं ने उसे मार दिया.’’

उस युवक को उस तरह भागते देख कर लोग हैरान जरूर थे, पर माजरा किसी की समझ में नहीं आ रहा था. लोग एकदूसरे से पूछने लगे, लेकिन जवाब किसी के पास नहीं था. बदहवासी की हालत में भागते उस युवक ने एक प्राइवेट स्कूल में घुसने की कोशिश की, लेकिन स्कूल के स्टाफ और अन्य लोगों ने उसे अंदर नहीं घुसने दिया. चीखताचिल्लाता वह युवक कुछ देर बाजार में भागता रहा. इस के बाद अपने घर के पास जा कर उस ने हाथ में पकड़ा चाकू एक तरफ सड़क पर फेंक दिया और घर में घुस गया.

यह घटना 28 अप्रैल, 2016 की है. सुबह के यही कोई सवा 8 बजे का वक्त था. राजस्थान में झीलों की नगरी के नाम से प्रसिद्ध उदयपुर जिले का एक छोटा सा कस्बा है ऋषभदेव. यह कस्बा धार्मिक नगरी के नाम से भी जाना जाता है. इस कस्बे में ऋषभदेव का दर्शनीय मंदिर है. जहां रोजाना सैकड़ों की संख्या में देशविदेश के पर्यटक दर्शन के लिए आते हैं. इस के अलावा ग्रीन मार्बल की खानों के लिए भी ऋषभदेव प्रसिद्ध है. घटना इसी ऋषभदेव कस्बे की है.

इसी कस्बे के लोहरवाड़ा मोहल्ले में रहने वाले रमनलाल पांचाल की बेटी नीलम रोज की तरह उस दिन भी सुबह करीब साढ़े 5-6 बजे उठ गई थी. उस के जागने के साथ उस का बेटा रिद्धिश भी जाग गया. 3 साल का रिद्धिश उठते ही मां से लिपट कर बोला, ‘‘मम्मा, आज मुझे घुमाने ले चलोगी ना?’’

नीलम ने उस का माथा चूम कर दुलारते हुए कहा, ‘‘आज शाम को हम अपने राजा बेटा को जरूर घुमाने ले चलेंगे, नानी भी साथ चलेंगी, वहां आइसक्रीम भी खाएंगे.’’

रिद्धिश बोला, ‘‘मम्मी, मैं बैलून भी लूंगा.’’

‘‘हां, राजा बेटा को बैलून भी दिलाऊंगी.’’ नीलम ने उसे प्यार करते हुए कहा.

उसी बीच नीलम की मां ने आ कर कहा, ‘‘रिचु बेटे, सुबहसुबह मम्मी को परेशान मत करो. मम्मी को फ्रेश होना है, फिर नहानाधोना भी है. इस के बाद स्कूल जाना है. तुम इस तरह करते रहोगे तो मम्मी स्कूल के लिए लेट हो जाएगी. मम्मी लेट हो गईं तो उस के सर उसे डाटेंगे.’’

यह कहते हुए नीलम की मां ने नवासे रिचु को गोद में उठा लिया और उसे घर के बाहर ले आईं. सुबहसुबह ठंडी सुहानी हवा चल रही थी. रिचु नानी की गोद में खेलने लगा. रिद्धिश को घर में प्यार से सब रिचु कहते थे. रिचु खेलने लगा तो नीलम फ्रेश होने चली गई. इस के बाद उस ने ब्रश किया और तौलिया और अन्य कपड़े ले कर नहाने के लिए बाथरूम में जाने लगी तो रिचु वहां आ गया. वह मचलते हुए बोला, ‘‘मम्मी, मैं भी आप के साथ नहाऊंगा’’

नीलम उसे कैसे मना करती. रोजाना तो नहीं, लेकिन जब भी मौका मिलता था वह मम्मा के साथ ही नहाता था. जब मम्मा के साथ नहीं नहा पाता था तो नानी उसे नहलाती थी.

रिचु को जिद करते देख नीलम ने उस के कपड़े निकाले और उसे भी अपने साथ बाथरूम में ले गई. नीलम ने पहले बेटे को नहलाया, उस के बाद जल्दीजल्दी खुद भी नहाया. बाथरूम से निकल कर रिचु को अपनी मां को सौंपते हुए कहा, ‘‘मम्मी, आप इसे तैयार कर देना. मैं तैयार करने लगी तो स्कूल पहुंचने में लेट हो जाऊंगी.’’

नीलम की मां स्थिति को जानतीसमझती थीं, इसलिए बोलीं, ‘‘बेटी, तू चिंता मत कर, मैं इसे संभाल लूंगी. तू फटाफट तैयार हो जा.’’

नीलम ने जल्दीजल्दी खुद को तैयार किया और शीशे में निहारा तो उसे लगा कि आज वह रोज से ज्यादा खूबसूरत लग रही है. खूबसूरत तो वह थी ही, सुबह की उमंग और हलके मेकअप ने उस की खूबसूरती और बढ़ा दी थी. अपनी खूबसूरती पर वह हलके से मुसकरा दी. तभी मां ने आवाज दी, ‘‘बेटी, नाश्ता तैयार है, फटाफट नाश्ता कर लो. रिचु भी दूध पीने को मचल रहा है.’’

चेहरे पर आई बालों की लटों को संवारते हुए एक बार फिर शीशे में खुद को निहारने के बाद नीलम ने दीवार घड़ी की ओर देखा. घड़ी में पौने 8 बज रहे थे. वह कमरे से बाहर आते हुए बोली, ‘‘मम्मी, आज तो वाकई देर हो रही है. मुझे जल्दी से एक परांठा दे दो. रिचु का दूध गर्म हो गया हो तो वह भी दे दो, मैं उसे दूध भी पिला देती हूं.’’

नीलम की मां परांठे की प्लेट और दूध का गिलास उसे देते हुए बोलीं, ‘‘बेटी, जल्दी करो.’’

नीलम ने पहले रिचु को दूध को पिलाया, उस के बाद खुद नाश्ता किया. इस के बाद बेटे को गोद में ले कर कहा, ‘‘राजा बेटा, अब आप की मम्मा स्कूल जा रही हैं. आओ एक पप्पी दो. और हां, नानी को परेशान मत करना. अगर नानी को परेशान किया तो घुमाने नहीं ले जाऊंगी.’’

‘‘आप नानी से पूछ लो, मैं कोई शैतानी नहीं करता. शाम को घुमाने का प्रौमिस है ना?’’ रिचु ने भोलेपन से कहा.

‘‘हां बेटा, शाम को घुमाने का प्रौमिस,’’ नीलम ने कहा, ‘‘चलो राजा बेटा, अब मम्मा को एक पप्पी दो.’’

रिचु ने मम्मा को पप्पी दी तो नीलम ने उसे गोद से उतार दिया. दीवार घड़ी पर नजर डाली तो 8 बजने में कुछ मिनट शेष थे. नीलम ने पर्स कंधे पर डाला और मां तथा बेटे को बायबाय कहते हुए तेजी से घर से बाहर निकल गई. नीलम बेटे के बारे में सोचते हुए तेजी से पैदल ही क्लासिक पब्लिक स्कूल की तरफ चली जा रही थी. छुट्टी के दिन को छोड़ कर उस का रोज का लगभग यही नियम था. स्कूल ज्यादा दूर नहीं था. सुबह 8 बजने से कुछ पहले वह घर से निकलती थी और पैदल ही 10-15 मिनट में स्कूल पहुंच जाती थी.

नीलम अपने विचारों में खोई चली जा रही थी कि आज 28 तारीख है. अगले सप्ताह स्कूल से तनख्वाह मिल जाएगी तो कुछ पैसे मम्मी को दे कर बाकी बचे पैसों से वह अपने लिए एक नई डिजाइन की साड़ी और रिचु के लिए कुछ कपड़े खरीदेगी. आधे से ज्यादा रास्ता तय कर के नीलम होली चौक से आगे प्रैस गली स्थित मशानिया महादेव मंदिर के पास पहुंची थी कि घात लगा कर बैठा पीयूष भंडारी एकाएक उस के सामने आ कर खड़ा हो गया. उस के हाथ में एक बड़ा सा चाकू चमक रहा था. नीलम कुछ समझ पाती, उस ने उस के गले, सीने व पीठ पर उसी चाकू से तबातोड़ कई वार कर दिए. इस के बाद उस ने उसी चाकू से अपने हाथ की नस काट ली.

नीलम पहले चिल्लाई, उस के बाद बेसुध हो कर गिर पड़ी. उस की चीख सुन कर आसपास के लोग उस की ओर बढ़े तो पीयूष भाग निकला. भागता हुआ वह शिल्पी मोहल्ले स्थित अपने घर पहुंचा और घर में घुस कर दरवाजा बंद कर लिया. नीलम सड़क पर बेहोश पड़ी थी. जहांजहां चाकू घोंपा गया था, वहां से खून बह रहा था. वहां रहने वाले सभी लोग नीलम को जानते थे, इसलिए किसी ने इस घटना की जानकारी नीलम के घर वालों को दे दी. कस्बे में रिक्शा या औटो जल्दी नहीं मिलते. कोई साधन नहीं मिला तो कुछ लोग नीलम को चार पहिए वाली ठेली पर लाद कर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए. कस्बे के उस अस्पताल में इलाज की खास व्यवस्था नहीं थी, इसलिए प्राथमिक उपचार के बाद डाक्टर ने नीलम को उदयपुर रैफर कर दिया.

घर के तथा कस्बे के कुछ लोग नीलम को उदयपुर के एमबी अस्पताल ले गए, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका. काफी मात्रा में खून बह जाने की वजह से नीलम की मौत हो गई. इस के बाद पुलिस ने अपनी औपचारिक काररवाई कर के नीलम की लाश का पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. उस के शरीर पर चाकू के 6 घाव मिले थे. नीलम की मौत के बाद ऋषभदेव कस्बे में आक्रोश फैल गया था. बाजार बंद हो गया. कुछ लोग पाटुना चौक पर पहुंच गए तो कुछ लोग पुलिस थाने पर पहुंच कर नारे लगाने लगे. वहीं कुछ लोग सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंच कर अव्यवस्थाओं को ले कर आक्रोश जताते हुए अस्पताल को बंद करवाने लगे.

सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंच गए. कस्बे में तनाव की स्थिति को देखते हुए आसपास के पुलिस थानों खैरवाड़ा, बावलवाड़ा, पहाड़ा व सराड़ा से अतिरिक्त पुलिस बुला ली गई. अधिकारियों ने लोगों को समझाबुझा कर शांत किया और आरोपी को गिरफ्तार कर के कड़ी से कड़ी सजा दिलाने का आश्वासन दिया. उधर पोस्टमार्टम के बाद घर वाले नीलम का शव एंबुलैंस से ऋषभदेव ले आए और सीधे शिल्पी मोहल्ले में रहने वाले नीलम के हत्यारे पीयूष भंडारी के घर पहुंच गए. पीयूष के घर ताला लटक रहा था. नाराज घर वालों ने पीयूष के घर का दरवाजा तोड़ दिया और नीलम की लाश घर के अंदर रख दी.

वे पीयूष के घर को आग लगाने जा रहा रहे थे कि तभी सूचना पा कर पुलिस अधिकारी वहां पहुंच गए. आक्रोश में भरे लोग अधिकारियों से नीलम की मौत पर मुआवजा दिलाने की मांग करने लगे. पुलिस ने आरोपी को पकड़े जाने की जानकारी देते हुए उस के खिलाफ कड़ी से कड़ी काररवाई करने का आश्वासन दिया. इस के बावजूद लोगों का गुस्सा शांत नहीं हुआ. इस के बाद अधिकारियों ने कानून का हवाला दे कर लोगों को समझाना शुरू किया. वहां काफी देर तक चले हंगामे के बाद लोग शांत हो कर नीलम का शव ले जाने पर सहमत हुए. इस के बाद घर वाले नीलम का शव अपने घर ले गए और उसी दिन शाम को उस की अंत्येष्टि कर दी.

वारदात की जानकारी मिलते ही पुलिस ने आरोपी पीयूष भंडारी को उस के घर से पकड़ लिया था. वारदात कर के वह अपने घर में जा कर छिप गया था. हाथ की नसें काट लेने से उस के शरीर से भी काफी खून बह गया था. पुलिस ने पहले ऋषभदेव के अस्पताल ले जा कर उस का प्राथमिक उपचार कराया, उस के बाद उसे उदयपुर रैफर कर दिया गया.

इलाज के बाद 30 अप्रैल को पुलिस ने पीयूष भंडारी को न्यायालय में पेश किया, जहां से पूछताछ के लिए 2 दिनों के पुलिस रिमांड पर ले लिया. पुलिस ने पीयूष की निशानदेही पर वह चाकू बरामद कर लिया, जिस से उस ने नीलम का खून किया था. रिमांड अवधि पूरी होने पर पुलिस ने उसे दोबारा अदालत में पेश किया, जहां अदालत के आदेश पर उसे डूंगरपुर जेल भेज दिया गया. सीआई ज्ञानेंद्र सिंह इस मामले की जांच कर रहे हैं.

एक मई की रात को नीलम की याद में कस्बे के लोगों ने ऋषभदेव मंदिर से पाटुना चौक तक कैंडल मार्च निकाला. इस में सैकड़ों  लोगों ने भाग लिया. उसी दिन नीलम के घर वाले और पांचाल समाज के लोग विधायक नानालाल अहारी के नेतृत्व में गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया से मिले. उन्होंने गृहमंत्री से न्याय दिलाने की मांग की. कहानी तो हालांकि यहीं पर खत्म हो जाती है, लेकिन यह जानना जरूरी है कि आखिर पीयूष ने नीलम को क्यों मार डाला?

लोहरवाड़ा मोहल्ले के रहने वाले रमनलाल पांचाल ने पहले कुछ सालों तक कुवैत में काम किया था. वहां से लौट कर उन्होंने ऋषभदेव में मनिहारी की दुकान खोल ली थी. दुकान अच्छी चलती थी. उन के 3 बच्चे थे, 2 बेटियां और एक बेटा. इन में सब से बड़ी नीलम थी. वह काफी खूबसूरत थी. उस ने उदयपुर की मोहनलाल सुखाडि़या यूनिवर्सिटी से साइंस में ग्रैजुएशन किया था. उस की शादी करीब 4 साल पहले राजस्थान के जिला डूंगरपुर के रठौड़ा निवासी हरीश पांचाल से हुई थी.

शादी के बाद नीलम ससुराल चली गई. ससुराल में वह खुश थी. उस का पति हरीश अहमदाबाद में बिजनैस करता था. घर में उसे किसी तरह की कोई परेशानी नहीं थी. नीलम गर्भवती हुई तो अचानक पतिपत्नी या ससुराल में ऐसा न जाने क्या हुआ कि उन में मनमुटाव हो गया. शादी के करीब साल भर बाद ही नीलम मायके आ गई तो लौट कर नहीं गई. पिता के घर ही उस ने बेटे को जन्म दिया, जिस का नाम रखा रिद्धिश उर्फ रिचु. घर में खुशियां छा गईं. बेटे ने उस का खालीपन दूर कर दिया. धीरेधीरे रिचु बड़ा होने लगा. रिचु के पैदा होने से नानानानी को भी एक खिलौना मिल गया था. मामा और मौसी भी रिचु को अपनी आंखों से दूर नहीं जाने देते थे.

नीलम पढ़ीलिखी थी. पिता के घर में हालांकि किसी तरह की कोई कमी नहीं थी, लेकिन घर में पड़ेपड़े वह बोर होने लगी थी. उस ने नौकरी करने का मन बनाया. ऋषभदेव कस्बा ही तो है, वहां महिलाओं के लिए नौकरी के अवसर बहुत कम हैं. नीलम अपने पति से अलग मायके में रह रही थी. उसे नौकरी देने पर कई तरह की बातें हो सकती थीं. सारी स्थितियों पर विचार करने के बाद नीलम ने किसी स्कूल में बच्चों को पढ़ाने का मन बनाया.

उसे बच्चों को पढ़ाने में रुचि भी थी. उस ने कुछ स्कूलों में बात की तो क्लासिक पब्लिक स्कूल में बात बन गई. कस्बे के प्राइवेट स्कूलों में तनख्वाह ज्यादा नहीं मिलती, लेकिन नीलम ने यह सोच कर यह नौकरी स्वीकार कर ली कि इस से उस का समय तो पास हो जाएगा. अपने खर्च के लिए एक बंधीबंधाई रकम हर महीने हाथ में आ जाएगी. समस्या बेटे रिचु की थी, जिसे नीलम की मां ने संभालने की जिम्मेदारी ले ली. स्कूलों में आमतौर पर 6 घंटे की नौकरी होती है, इसलिए उस ने सोचा कि दोपहर में तो वह घर आ ही जाया करेगी. इस बीच रिचु नानी के पास रह लेगा.

करीब एक साल पहले नीलम ने स्कूल की नौकरी जौइन कर ली थी. इसी स्कूल में कस्बे के ही शिल्पी मोहल्ले के रहने वाले प्रभाष भंडारी का बेटा पीयूष भंडारी कई सालों से पढ़ा रहा था. वह भी ग्रैजुएट था. वह करीब 25 साल का था, अभी उस की शादी नहीं हुई थी. स्कूल में आई नई टीचर नीलम को देख कर वह उस पर फिदा हो गया. वह मन ही मन उसे प्यार करने लगा. एकदो बार बातचीत में उस ने नीलम से अपने प्यार का इजहार भी किया, लेकिन नीलम ने उसे फटकार दिया. इस से वह निराश नहीं हुआ. वह किसी न किसी तरीके से नीलम का प्यार हासिल करने की कोशिश में लगा रहा.

लेकिन नीलम ने कभी उसे तवज्जो नहीं दी. जब भी उस ने कोशिश की, नीलम ने उसे झिड़क दिया. पीयूष की हरकतों से तंग आ कर नीलम उस से दूर रहने लगी. उस की हरकतों को अनदेखी करते हुए कभी उस ने अपने घर वालों से उस के बारे में नहीं बताया, लेकिन स्कूल में उस की हरकतों की चर्चा जरूर होने लगी. तब स्कूल की बदनामी के डर से स्कूल प्रबंधक ने उसे नौकरी से निकाल दिया. यह कुछ महीने पहले की बात है.

स्कूल से नौकरी छूटने के बाद पीयूष नीलम को रोजरोज देख नहीं पाता था. एकाध बार पीयूष ने स्कूल से लौटते समय नीलम से बात करने की कोशिश की, लेकिन नीलम ने उसे कोई भाव नहीं दिया. पीयूष से यह बरदाश्त नहीं हुआ. वह तड़प उठा. वह उसे सबक सिखाने के बारे में सोचने लगा. आखिर उस ने तय कर लिया कि अगर नीलम उस की नहीं हुई तो वह किसी और के लिए उसे जीने नहीं देगा. इस के बाद उस ने एक चाकू का इंतजाम किया और मौके का इंतजार करने लगा.

27 अप्रैल की रात पीयूष को नींद नहीं आ रही थी. वह नीलम के बारे में ही सोचता रहा. बारबार वह उस के जेहन में आ रही थी. हर बार वह उसे इग्नोर करते हुए फटकार रही थी. नीलम की दीवानगी ने उसे पागल कर दिया था. वह उस से एकतरफा प्यार करता था. आखिर उस ने रात में ही तय कर लिया कि सुबह वह नीलम को उस की फटकार का जवाब दे देगा.

28 अप्रैल की सुबह तैयार हो कर पीयूष घर से निकल गया. उस ने चाकू अपने कपड़ों में छिपा रखा था. वह प्रैस गली स्थित मशानिया महादेव मंदिर के पास जा कर बैठ गया. उसे पता था कि नीलम रोज 8 बजे के करीब इसी रास्ते से स्कूल जाती है. नीलम को आते देख वह अपना आपा खो बैठा और पास आते ही उस पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर के उस की जान ले ली. पीयूष की इस सनक ने उस की विधवा मां का भी आसरा छीन लिया है. पीयूष के पिता प्रभाष भंडारी नल फिटिंग का काम करते थे. कुछ साल पहले उन की मौत हो गई थी. उस के बाद परिवार में पीयूष, उस का बड़ा भाई और मां ही रह गई थी. पीयूष अब जेल चला गया है.

एकतरफा प्यार की इस कहानी का ऐसा दुखद अंत होगा, किसी ने सोचा भी नहीं था. पीयूष को तो कानून सजा देगा. लेकिन नीलम के घर वाले पूछते हैं कि आखिर इस में नीलम की क्या गलती थी? पीयूष की सनक ने रिचु से उस की मां का प्यार छीन लिया. पिता का प्यार उसे मिला ही नहीं. जबकि रिचु अपनी मां की मौत से अनजान है. उसे मम्मी के स्कूल से लौटने का इंतजार है. वह अकसर अपनी नानी से पूछता है, ‘नानी, मम्मा स्कूल से कब आएगी?’ One Sided Love

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

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