Jaipur Crime: जयपुर स्थित पुलिस चौकी रेनवाल मांजी के इंचार्ज सत्यपाल ने करीब डेढ़ लाख के इनामी बदमाश नंदू और उस के साथियों को 10 लाख रुपए ले कर छोड़ दिया होता तो पुलिस का एक दूसरा चेहरा कभी सामने न आता, लेकिन पुलिस ने सत्यप्रकाश का गेम ऐसा बिगाड़ा कि बदमाश तो जेल गए ही, मोटी रकम का सपना देखने वाले 3 पुलिस वाले भी नप गए.

29 अप्रैल की दोपहर को यही कोई डेढ़-पौने 2 बज रहे थे. गरमी ऐसी जैसे आसमान से आग बरस रही हो. ऊपर से लू चल रही थी. भयानक गरमी और लू के बावजूद गुड़गांव पुलिस जयपुर के भांकरोटा-जयसिंहपुरा रोड पर दिल्ली के नंबर वाली एक फौर्च्युनर गाड़ी का पीछा कर रही थी. पुलिस की गाड़ी में 4-5 लोग सवार थे, जबकि दिल्ली के नंबर की जिस गाड़ी का वे पीछा कर रहे थे, उस में 3 लोग सवार थे.

गुड़गांव पुलिस आगे वाली उस गाड़ी का पीछा करते हुए भांकरोटा चौराहे से करीब आधा किलोमीटर दूर जयसिंहपुरा के पास उस गाड़ी के एकदम करीब पहुंच गई. इस से फौर्च्युनर में सवार लोगों को लगा कि वे घिर गए हैं. अपने आप को घिरा देख उन्होंने गाड़ी रोक दी और पीछा कर रही गुड़गांव पुलिस की गाड़ी पर फायरिंग करनी शुरू कर दी. जवाब में पुलिस ने भी 8-10 राउंड गोलियां चलाईं. फिल्मी स्टाइल में दिनदहाड़े सरेआम मेनरोड पर गोलियां चलने से उधर से वाहनों से गुजर रहे लोग और राहगीर दहशत में आ गए. ट्रैफिक रुक गया और लोग जान बचाने के लिए इधरउधर भागने लगे.

इस बीच गुड़गांव पुलिस ने फायरिंग करने वाले बदमाशों में से एक को पहचान लिया था. वह दिल्ली का नंबर वन मोस्टवांटेड अपराधी कपिल सांगवान उर्फ नंदू था. उस पर करीब डेढ़ लाख रुपए का इनाम घोषित था. उस की दिल्ली पुलिस के साथसाथ हरियाणा पुलिस को भी तलाश थी. सड़क पर मची भगदड़ का फायदा उठाते हुए बदमाश अपनी गाड़ी में सवार हो कर सड़क के किनारे खड़े एक टैंपो को टक्कर मारते हुए भाग निकले. गुड़गांव पुलिस उन का पीछा करने के लिए गाड़ी मोड़ ही रही थी कि तभी एक ट्रक उन की गाड़ी के सामने आ गया. ट्रक निकल गया तो गुड़गांव पुलिस ने फिर से बदमाशों की गाड़ी का पीछा किया.

पुलिस को बदमाशों की गाड़ी भांकरोटा से मुहाना जाने वाले समानांतर रास्ते पर 2-3 सौ मीटर दूर दिखाई दी, लेकिन कुछ दूर जाने के बाद बदमाशों की गाड़ी जगदगुरु रामानंदाचार्य राजस्थान संस्कृत यूनिवर्सिटी के पास पुलिस की आंखों से ओझल हो गई. गुड़गांव पुलिस ने कुछ देर तक इधरउधर घूम कर बदमाशों की तलाश की, लेकिन उन का कोई पता नहीं चला.

थकहार कर गुड़गांव पुलिस ने इस बात की सूचना आला अधिकारियों को देने के साथ यह भी बता दिया कि मोस्टवांटेड अपराधी नंदू भी उन में शामिल था. इस के बाद गुड़गांव पुलिस के अधिकारियों ने तुरंत जयपुर के पुलिस कमिश्नर संजय अग्रवाल से फोन पर बात की. बातचीत से पता चला कि गुड़गांव पुलिस ने बदमाशों की तलाश में अपने आने की सूचना जयपुर पुलिस को नहीं दी थी. खैर, जयपुर पुलिस कमिश्नर संजय अग्रवाल ने दिल्ली और हरियाणा के कुख्यात अपराधी नंदू के जयपुर में होने और बदमाशों द्वारा फायरिंग किए जाने की घटना को गंभीरता से लिया. उन्होंने तुरंत पूरे जयपुर में कड़ी नाकेबंदी करवा दी.

भांकरोटा, जयसिंहपुरा, नेवटा सहित आसपास के इलाकों में जयपुर पुलिस की क्यूआरटी व एटीएस के अलावा कई थानों की पुलिस ने पूरे शहर की घेराबंदी कर ली. राजस्थान की राजधानी जयपुर से बाहर जाने वाले सभी रास्तों पर पुलिस ने कड़ी निगरानी शुरू कर दी. खासतौर से दिल्ली रोड और सीकर रोड पर बदमाशों के भागने की आशंका को देखते हुए पुलिस की विशेष टीमें लगाई गईं. जयपुर पुलिस उस दिन दोपहर से ले कर रात तक सड़कों पर डटी रही, साथ ही भांकरोटा, जयसिंहपुरा व मुहाना आदि इलाकों में गश्त भी करती रही, लेकिन फायरिंग कर के भागने वाले बदमाशों के बारे में कोई सुराग नहीं मिला.

हालांकि यह गुड़गांव पुलिस का मामला था, लेकिन दिल्ली और हरियाणा के कुख्यात अपराधी नंदू और उस के साथियों के जयपुर में होने और पुलिस पर फायरिंग कर के भागने की घटना से जयपुर पुलिस कमिश्नर चिंतित हो उठे थे. चिंता की एक खास वजह यह भी थी कि करीब सवा महीने पहले 21 मार्च को राजस्थान के कुख्यात अपराधी और मोस्टवांटेड आनंदपाल तथा उस के गुर्गे नागौर में पुलिस पर गोलियां बरसा कर भाग निकले थे. इस घटना से राजस्थान पुलिस की काफी छीछालेदर हुई थी. इसलिए जयपुर पुलिस नंदू के मामले में किसी तरह की लापरवाही नहीं बरतना चाहती थी.

दरअसल, गुड़गांव पुलिस ने इस घटना से 1-2 दिन पहले लूट के आरोप में 2 बदमाशों को गिरफ्तार किया था. उन से पूछताछ में पता चला था कि नंदू अपने कुछ साथियों के साथ जयपुर में है. इसी सूचना के आधार पर गुड़गांव पुलिस की क्राइम ब्रांच के सबइंसपेक्टर सुरेंद्र और सतीश कुमार के साथ उन की टीम 29 अप्रैल को जयपुर आई थी. गुड़गांव पुलिस को कपिल सांगवान उर्फ नंदू की एक लग्जरी कार की लूट के मामले तलाश में थी.

मोस्टवांटेड नंदू की इस कहानी में उसी दिन एक नया मोड़ आ गया. भांकरोटा चौराहे के पास जयसिंहपुरा रोड पर गुड़गांव पुलिस से मुठभेड़ के बाद नंदू अपने दोनों साथियों के साथ फौर्च्युनर गाड़ी से भाग रहा था, तभी डिग्गी रोड पर रेनवाल मांजी पुलिस चौकी के सामने वाली सड़क पर उन की गाड़ी का एक टायर फट गया. टायर फटने के बावजूद बदमाश अपनी गाड़ी को तेजी से भगा कर ले जा रहे थे. टायर फटने से उछलती हुई दौड़ रही गाड़ी को देख कर एक टायर पंक्चर बनाने वाले युवक को शक हुआ. उस ने यह बात पुलिस चौकी के पास स्थित पैट्रोल पंप के मालिक कैलाश चौधरी को बताई तो वह अपने पैट्रोल पंप के केबिन से बाहर निकल आए. बाहर आ कर उन्होंने देखा, कार रोक कर उस में 3 लड़के उतरे और अपने बैग ले कर तेजी से भागने लगे.

उन लड़कों के भागने से आसपास के लोगों को शक हुआ तो कुछ लोगों ने उन्हें थोड़ी दूर दौड़ा कर धांधो की ढाणी के पास पकड़ लिया. इस बीच, वहीं चाय की दुकान करने वाले एक आदमी ने रेनवाल मांजी पुलिस चौकी को इस मामले की सूचना दे दी. लोगों ने जिस जगह तीनों युवकों को पकड़ा था, वह जगह पुलिस चौकी से करीब आधा किलोमीटर दूर थी, इसलिए 5 मिनट में ही चौकी से 2 सिपाही निर्मल और कालूराम मोटरसाइकिल से वहां आ पहुंचे. दोनों सिपाही उन लड़कों के हावभाव देख कर ही समझ गए कि ये कोई भले आदमी नहीं हैं. सिपाहियों ने वहां मौजूद लोगों से कहा कि इन्होंने जयपुर में एक्सीडेंट किया है, इसीलिए इन की गाड़ी का बंपर टूट गया है और टायर भी फट गया है. उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है, पुलिस इन से पूछताछ कर के भागने के कारणों का पता लगा लेगी.

इस तरह वहां जमा लोगों को भरोसा दे कर दोनों सिपाही तीनों युवकों को रेनवाल मांजी पुलिस चौकी ले गए. यह दोपहर करीब 3 बजे की बात है. सिपाही निर्मल और कालूराम तीनों युवकों को ले कर रेनवाल मांजी पुलिस चौकी पहुंचे तो चौकीप्रभारी एएसआई सत्यप्रकाश वहां मौजूद थे. यह चौकी जयपुर ग्रामीण जिला पुलिस के थाना फागी के अंतर्गत आती है. चौकीप्रभारी सत्यप्रकाश ने तीनों युवकों के बैगों की तलाशी ली तो उन में से पिस्तौल और कारतूस के अलावा कुछ रकम भी मिली. पिस्तौल और कारतूस देख कर सत्यप्रकाश समझ गए कि ये तीनों वही अपराधी हैं, जिन के लिए जयपुर पुलिस ने नाकेबंदी कर रखी है.

जयपुर पुलिस का वायरलैस मैसेज पहले ही चौकी पर पहुंच चुका था, जिस में कहा गया था कि दिल्ली और हरियाणा का मोस्टवांटेड नंदू गुड़गांव पुलिस पर फायरिंग कर के अपने 2 साथियों के साथ एक फौर्च्युनर गाड़ी में भागा है. नंदू की तलाश में कड़ी नाकेबंदी की जाए. चौकीप्रभारी ने एक क्रेन बुलवा कर तीनों युवकों की फटे टायर वाली फौर्च्युनर गाड़ी खिंचवा कर चौकी पर मंगवा ली थी. सत्यप्रकाश ने तीनों के नामपते पूछे तो उन में एक ने अपना नाम नवीन राठी तो दूसरे ने हिमांशु छिल्लर और तीसरे ने सचिन छिंकारा बताया. हथियारों के बारे में वे कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए. सत्यप्रकाश को पता चल चुका था कि ये युवक और कोई नहीं, नंदू और उस के साथी हैं.

इस बात को पुख्ता करने के लिए उन्होंने थोड़ी सख्ती की तो तीनों युवकों में से एक स्मार्ट से युवक ने सत्यप्रकाश से सीधेसीधे कहा, ‘‘देखो साहब, मेरा नाम नवीन राठी नहीं, बल्कि नंदू है. ये दोनों मेरे साथी हैं. हरियाणा का एक गैंग हमारे पीछे पड़ा है. वे लोग हमें मार देंगे. आप हमें छोड़ दो, बोलो कितना पैसा चाहिए? इस के अलावा हम तीनों को जयपुर पुलिस भी तलाश रही है. यह नाकेबंदी हमारे लिए ही हो रही है.’’

वह गांव की पुलिस चौकी थी. चौकीप्रभारी सत्यप्रकाश खेलाखाया पुलिस वाला था. उसे पता था कि तीनों ही मोटी मुर्गियां हैं, इसलिए उस ने नंदू की आंखों में झांकते हुए कहा, ‘‘ठीक है, हम तुम को बचा लेंगे. लेकिन इस के लिए तुम्हें 30 लाख रुपए देने होंगे.’’

‘‘इंचार्ज साहब, कभी 30 लाख रुपए गिने भी हैं या सिर्फ जुबान से कह दिया?’’ नंदू ने कुटिलता से कहा, ‘‘2-4 लाख की बात हो तो कहो, वरना 5-7 दिन जेल में रह लेंगे. उस के बाद जमानत हो जाएगी. हमारे लिए जेल आनाजाना कोई नई बात नहीं है.’’

सत्यप्रकाश समझ गए कि तीनों बदमाश पैसे तो दे देंगे, लेकिन सौदेबाजी करनी पड़ेगी. उन्होंने पुलिसिया भाषा में सौदेबाजी की तो नंदू 10 लाख रुपए देने पर राजी हो गया. चौकी पर सत्यप्रकाश के अलावा 2 सिपाही निर्मल और कालूराम भी थे. उन्हें भी सारी बातें पता थीं. सत्यप्रकाश ने दोनों सिपाहियों को अपने विश्वास में ले कर उन्हें 3-3 लाख रुपए में राजी कर लिया. इतनी रकम के लिए दोनों सिपाही अपनी जुबान बंद रखने को तैयार हो गए.

सत्यप्रकाश और नंदू के बीच सौदेबाजी हो गई तो नंदू ने गुड़गांव के अपने एक साथी को फोन कर के कहा, ‘‘मैं जयपुर से बोल रहा हूं. यहां जयपुर पुलिस ने हमें पकड़ लिया है. 10 लाख रुपए ले कर आ जाओ, नहीं तो ये लोग हमें गिरफ्तार कर लेंगे.’’

इसी के साथ नंदू ने उसे यह भी बता दिया कि किस आदमी से 10 लाख रुपए मिलेंगे. साथ ही यह भी बता दिया कि 10 लाख रुपए ले कर रेनवाल मांजी पुलिस चौकी आना है. पुलिस से सौदा होने के बाद नंदू और उस के साथियों की चिंता और तनाव थोड़ा कम हुआ. खुद को रिलैक्स महसूस करते हुए उन्होंने सोचा कि जान बची तो लाखों पाए. सौदेबाजी के बाद नंदू और उस के साथियों की चौकीइंचार्ज और दोनों सिपाहियों से दूरियां खत्म हो गईं. नंदू ने सत्यप्रकाश से कह कर चायनाश्ता मंगवाया. तीनों बदमाश चौकी में ही मेहमान की तरह कुर्सियों पर आराम करने लगे.

सत्यप्रकाश के कहने पर पुलिस चौकी के रसोइए मानसिंह ने उन तीनों के लिए रात का खाना बनाया तो उन्होंने रात करीब साढ़े 8 बजे डिनर किया. इस के बाद तीनों पुलिस चौकी में बने इंचार्ज के रेस्टरूम में आराम करने लगे. बीचबीच में वे अपने साथियों से मोबाइल पर बात भी कर रहे थे. चौकी का एक सिपाही कमरे के बाहर पहरा दे रहा था. दूसरी ओर एडिशनल सीपी (क्राइम) प्रफुल्ल कुमार के निर्देश और डीसीपी (क्राइम) डा. विकास पाठक के नेतृत्व में गठित जयपुर पुलिस की विशेष टीमें हरियाणा पुलिस पर फायरिंग कर के भागे तीनों बदमाशों की तलाश में जुटी थीं.

इन्हीं पुलिस टीमों में से एक को जगदगुरु रामानंदाचार्य राजस्थान संस्कृत यूनिवर्सिटी के पास मल्टीस्टोरी फ्लैट्स में हरियाणा के कुछ युवकों के रहने और दिल्ली के नंबरों की गाडि़यों के आनेजाने की जानकारी मिली. इस जानकारी के आधार पर पुलिस टीम ने रात करीब साढ़े 7 बजे एक फ्लैट पर छापा मारा. फ्लैट की तलाशी में सिम का रैपर, मोबाइल का खाली डिब्बा और कई ऐसे दस्तावेज मिले, जिन से पता चला कि इस फ्लैट में कपिल सांगवान उर्फ नंदू रहता था.

रैपर से पुलिस को मोबाइल का नंबर मिल गया. उस नंबर को पुलिस ने सर्विलांस पर लगाया तो उस की लोकेशन रेनवाल के आसपास आ रही थी. इस के बाद पुलिस की एक टीम रेनवाल इलाके में नंदू और उस के साथियों की तलाश में लग गई. इस पुलिस टीम ने रेनवाल मांजी चौकी के भी 2-3 चक्कर लगाए, पर न तो वहां कोई फौर्च्युनर गाड़ी नजर आई और न ही नंदू और उस के साथी.

इस पुलिस टीम ने रेनवाल मांजी पुलिस चौकी में जाने की जरूरत इसलिए महसूस नहीं की क्योंकि अगर कोई संदिग्ध बदमाश पकड़े जाते तो अब तक पूरे जयपुर में वायरलैस गूंज रहे होते और वहां तमाम आला अफसरों का जमावड़ा लग गया होता. दूसरा कारण यह था कि चौकीइंचार्ज सत्यप्रकाश ने नंदू और उस के साथियों की फौर्च्युनर गाड़ी को झाडि़यों में इस तरह छिपा दिया था कि बाहर से देखने पर वह किसी को नजर नहीं आ रही थी.

नंदू का मोबाइल सर्विलांस पर लगा होने की वजह से पुलिस को यह पता चल गया कि गुड़गांव से कुछ लोग 10 लाख रुपए ले कर जयपुर आ रहे हैं. साथ ही यह भी कि पैसा लाने वालों में से एक का नाम गजराज सिंह है. पुलिस ने उन के फोन टेप करने शुरू किए. गुड़गांव से आ रहे लोगों की लोकेशन जयपुर-दिल्ली रोड की आ रही थी.

इस जानकारी के आधार पर जयपुर पुलिस ने दिल्ली रोड पर लगी नाकेबंदी सख्त करवा दी, साथ ही दिल्ली और हरियाणा के नंबर वाली गाडि़यों की तलाशी सख्ती से ली जाने लगी. नाकेबंदी के दौरान क्राइम ब्रांच एवं दक्षिणी जिले की स्पैशल पुलिस टीम ने जयपुर के पास थाना मुहाना की टीलावाला चौकी के पास एक गाड़ी रोकी. उस गाड़ी में 3 लोग सवार थे. गाड़ी की तलाशी में एक बैग मिला, जिस में 10 लाख रुपए भरे थे. पुलिस ने गाड़ी में सवार तीनों लोगों से पूछताछ की तो उन्होंने अपने नाम गजराज सिंह, परमजीत सिंह और पंकज बताए.

इन तीनों से सख्ती से पूछताछ की गई तो जयपुर ग्रामीण जिले की रेनवाल मांजी पुलिस का भांडा फूट गया और पुलिस का एक दूसरा ही चेहरा सामने आ गया. उन तीनों ने बताया कि नंदू और उस के साथियों को जयपुर ग्रामीण जिले की पुलिस ने पकड़ रखा है और उन्हें छोड़ने के लिए 10 लाख रुपए मांगे हैं. नंदू ने ही उन्हें फोन कर के 10 लाख रुपए लाने को कहा था. ये रुपए ले कर वे रेनवाल मांजी पुलिस चौकी जा रहे थे. उन्होंने यह भी बताया कि नंदू और उस के साथी रेनवाल पुलिस चौकी पर ही हैं.

जांच में लगी पुलिस टीमों ने यह बात अपने उच्चाधिकारियों को बताई. अब जयपुर पुलिस को बेहद सावधानी बरतनी थी, क्योंकि मामले में पुलिस का दूसरा चेहरा सामने आ गया था, साथ ही रेनवाल मांजी चौकी पुलिस को पता चलने पर नंदू और उस के साथियों की जान का खतरा भी हो सकता था. इस के अलावा नंदू की गुड़गांव से आए उस के साथियों से मोबाइल पर बातचीत जारी रखवानी थी, ताकि नंदू या रेनवाल मांजी चौकी पुलिस को यह शक न हो कि 10 लाख रुपए ला रहे उस के साथियों को पुलिस ने पकड़ लिया है.

जब इस बात की जानकारी जयपुर के पुलिस कमिश्नर संजय अग्रवाल को हुई तो उन्होंने रणनीति बना कर रेनमाल मांजी पुलिस चौकी पर छापा मारा. इस के लिए पुलिस टीम ने रात के 12 बजे का समय चुना था. नंदू और उस के दोनों साथी इंचार्ज के कमरे में आराम करते मिल गए. चौकीइंचार्ज सत्यप्रकाश और दोनों सिपाही निर्मल और कालूराम भी वहीं थे. पुलिस ने नंदू और उस के साथियों को तो पकड़ा ही, साथ ही चौकीइंचार्ज सत्यप्रकाश और दोनों सिपाहियों को भी हिरासत में ले लिया.

जयपुर पुलिस द्वारा आधी रात को मारे गए छापे से नंदू और उस के साथियों के अलावा चौकी के तीनों पुलिसकर्मी भी हैरान थे कि यह सब अचानक कैसे हो गया? जब जयपुर पुलिस ने बाहर गाड़ी में बैठे गुड़गांव से आ रहे गजराज सिंह, परमजीत सिंह और पंकज को बाहर निकाला तो उन की समझ में आ गया कि इन्हीं लोगों से पुलिस को उन के रेनवाल मांजी चौकी में होने की जानकारी मिली होगी. एक ही दिन में नंदू के आपराधिक जीवन में यह तीसरा मोड़ आया था.

इस बीच एक और घटना घट गई. हुआ यह कि शुरुआती पूछताछ के बाद जयपुर पुलिस ने 30 अप्रैल को रेनवाल मांजी चौकीइंचार्ज सत्यप्रकाश और दोनों सिपाहियों निर्मल और कालूराम को भांकरोटा थाना पुलिस के हवाले कर दिया. तीनों आरोपी भी उसी थाने में थे. हालांकि एक तरह से वे अपराधी थे, लेकिन उन्हें हवालात में नहीं रखा गया था. इसलिए तीनों पुलिस की नजरों के बीच थाने में इधरउधर घूम रहे थे.

इस का फायदा उठा कर एएसआई सत्यप्रकाश टहलतेटहलते शाम को थाने से बाहर निकल कर फरार हो गया. उसे भागने का मौका भी मिला तो उस वक्त जब जयपुर पुलिस कमिश्नर संजय अग्रवाल कमिश्नर औफिस में नंदू और उस के साथियों के पकड़े जाने की जानकारी देने के लिए प्रैस कौन्फ्रैंस कर रहे थे. उस समय थाना भांकरोटा के थानाप्रभारी हेमेंद्र शर्मा कमिश्नर औफिस में ही थे. कहा जाता है कि सत्यप्रकाश किसी परिचित की कार से भागा था, लेकिन पुलिस ने सत्यप्रकाश को 20 घंटे बाद अगले दिन एक मई को बीकानेर से पकड़ लिया. इस से जयपुर पुलिस की लाज बच गई.

अपराधियों से मिलीभगत करने के आरोप में जयपुर आईजी हेमंत प्रियदर्शी ने एएसआई सत्यप्रकाश और दोनों सिपाहियों निर्मल और कालूराम को निलंबित कर दिया. यह अलग बात है कि अगर सत्यप्रकाश, निर्मल और कालूराम अपराधियों को छोड़ने के एवज में सौदेबाजी न करते तो उन्हें प्रमोशन तो मिलता ही, नंदू और उस के साथी बदमाशों पर पुलिस की ओर से घोषित करीब 2 लाख रुपए की इनाम की राशि भी मिल सकती थी.

नंदू के जीवन में एक ही दिन में 3 मोड़ आने के बाद भी उस की परेशानी खत्म नहीं हुई थी. पहले हरियाणा पुलिस से मुठभेड़ हुई. उस में बचा तो ग्रामीणों ने पुलिस को सौंप दिया. पुलिस से सौदेबाजी की तो भी किस्मत धोखा दे गई. खुद के साथ उस के साथी भी पकड़े गए. गुड़गांव से मंगाए 10 लाख रुपए भी गए और रुपए लाने वाले भी पुलिस के हत्थे चढ़ गए. दिल्ली और हरियाणा में गैंग के लोगों को जब पता चला कि नंदू सहित उन के 6 साथियों को जयपुर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है तो गिरोह के 4 लोग उन की जमानत के लिए 5 लाख रुपए ले कर 1 मई को जयपुर पहुंचे. नंदू की किस्मत यहां भी धोखा दे गई. वे चारों भी पुलिस के हत्थे चढ़ गए.

पुलिस ने उन्हें दौलतपुरा टोल के पास नाकेबंदी के दौरान पकड़ लिया. वे हरियाणा के नंबर की टाटा सफारी में सवार थे. उन की गाड़ी में बिना लाइसैंसी रिवौल्वर, 10 जिंदा कारतूस और 5 लाख रुपए नकद मिले. पकडे़ गए आरोपियों में अजय कुमार जाट, संदीप जाट, राजन जाट और सतपाल जाट शामिल थे. ये चारों हरियाणा के झज्जर के रहने वाले थे. इन में सतपाल उस गजराज सिंह का भाई था, जो गुड़गांव से नंदू को छुड़वाने के लिए 10 लाख रुपए ले कर जयपुर जा रहा था.

नंदू गिरोह के हौसले इतने बुलंद थे कि जयपुर पुलिस द्वारा 6 साथियों के पकड़े जाने के बाद भी सतपाल ने पकड़ने वाले पुलिस इंसपेक्टर से कहा, ‘‘हमें तो गजराज और उस के साथियों की जमानत करानी है. इस में मदद कर के जो चाहो, मिल जाएगा.’’

जयपुर पुलिस ने हरियाणा पुलिस पर फायरिंग कर के भागे नंदू और उस के दोनों साथियों सचिन छिंकारा व गुलशन उर्फ हिमांशु छिल्लर से पूछताछ की और 1 मई को उन्हें मजिस्ट्रैट के समक्ष पेश कर के 3 मई तक पुलिस रिमांड पर लिया. रिमांड अवधि पूरी होने पर थाना भांकरोटा पुलिस ने 3 मई को उन्हें फिर से अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेजने का आदेश दिया गया. बाद में दिल्ली पुलिस की अर्जी पर अदालत ने तीनों को प्रोडक्शन वारंट पर दिल्ली पुलिस को सौंप दिया.

जयपुर पुलिस ने रेनवाल मांजी चौकी के गिरफ्तार एएसआई सत्यप्रकाश तथा सिपाही निर्मल और कालूराम को भी न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया. नंदू के गिरोह के उन 7 लोगों को भी जेल भेज दिया गया, जो 10 लाख रुपए और 5 लाख रुपए ले कर आए थे. रिमांड अवधि के दौरान पूछताछ में नंदू और उस के साथियों के अपराधों के साथ जयपुर को अपनी शरणस्थली बनाने का जो खुलासा हुआ, वह इस प्रकार था.

कपिल सांगवान उर्फ नंदू दिल्ली के 10 मोस्टवांटेड अपराधियों में नंबर वन है. मूलरूप से हरियाणा स्थित महेंद्रगढ़ जिले के नांगल चौधरी पुलिस थानाक्षेत्र के नांगल वाली गांव के रहने वाले सूरजभान के बेटे नंदू का दिल्ली पुलिस के रिकौर्ड में स्थाई पता आरजेड-81बी, नंदा एन्कलेव, नजफगढ़, दिल्ली दर्ज है. 20 वर्षीय नंदू पर दिल्ली पुलिस की ओर से करीब डेढ़ लाख रुपए का इनाम घोषित है.

नंदू के खिलाफ दिल्ली के विभिन्न पुलिस थानों में हत्या, हत्या के प्रयास, लूट और एक्सटौर्शन आदि के 10 मुकदमे दर्ज हैं. इन के अलावा हरियाणा के जींद सिटी व गुड़गांव में भी उस के खिलाफ मुकदमे दर्ज हैं. नंदू और उस के साथियों पर विभिन्न थानों में 8 हत्याओं के मामले दर्ज हैं. वह बीए औनर्स का छात्र है और पिछले 3 सालों से आपराधिक वारदातें कर रहा है. नंदू का बड़ा भाई ज्योति सांगवान उर्फ बाबा भी कुख्यात अपराधी है. उस के खिलाफ दिल्ली एवं अन्य राज्यों में हत्या सहित कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं. उस के साथी सचिन छिंकारा पर भी दिल्ली पुलिस की ओर से 50 हजार रुपए का इनाम घोषित है.

मासूम सा दिखने वाला नंदू इतना खूंखार है कि गोली चलाना और किसी की हत्या कर देना, उसे तमाशा लगता है. वह अपने दुश्मनों से ज्यादा उन के परिवार के लिए खतरनाक है. नंदू ने अपने गिरोह के साथ 20 दिसंबर, 2015 की रात ढाई बजे के करीब दिल्ली में नजफगढ़ के पास छावला इलाके में कुख्यात अपराधी मंजीत महाल के गैंग के सदस्य और घुम्मनहेड़ा के रहने वाले नफे सिंह उर्फ मंत्री के पिता हरिकिशन, मां कमला और पत्नी शर्मिला को गोलियां मार कर उन की हत्या का प्रयास किया था. इन में से हरिकिशन की मौत हो गई थी, जबकि दोनों महिलाएं गंभीर रूप से घायल हो गई थीं. हरिकिशन दिल्ली पुलिस के रिटायर्ड हैडकांस्टेबल थे.

इस मामले में नंदू के साथ गुलशन और सचिन भी थे. दरअसल मंजीत महाल गैंग के नफे सिंह उर्फ मंत्री व अन्य लोगों ने उसी रात दीनपुर इलाके में 11 बजे के करीब सुर्रखपुर निवासी नंदू के जीजा सुनील उर्फ डाक्टर की गोली मार कर हत्या कर दी थी. जीजा की हत्या की सूचना मिलते ही उसी रात नंदू ने बदला लेने के लिए आरोपी नफे सिंह के पिता की हत्या कर दी थी.

नफे सिंह के पिता हरिकिशन सिंह की हत्या करने के अगले दिन नंदू अपने साथियों गुलशन और सचिन के साथ जयपुर आ गया था. जयपुर के एक होटल में उन्होंने पार्टी कर के अपने दुश्मन के बाप की हत्या का जश्न मनाया और फिर जयपुर में ही अपना ठिकाना बना लिया. यहां रहने के लिए उस ने वैशालीनगर में थाने के पीछे की गली में किराए का फ्लैट लिया. यहां रहते हुए वह दिल्ली और हरियाणा भी जाता रहा. उस के साथी भी उस से मिलने जयपुर आते रहे. जयपुर में नंदू नवीन राठी के नाम से रहता था, जबकि गुलशन ने अपना नाम हिमांशु छिल्लर रख लिया था. दोनों ने इन्हीं नामों की आईडी की भी व्यवस्था कर ली थी.

इसी साल 11 जनवरी के दूसरे सप्ताह में नंदू अपने साथियों के साथ दिल्ली गया. उस ने शिकारपुर गांव के रहने वाले 45 वर्षीय विनोद और 19 वर्षीय उस के बेटे कमल की उन के घर में ही हत्या कर दी. पुलिस जांच में पता चला कि विनोद उस धर्मेंद्र उर्फ माडू के पिता थे, जो 20 दिसंबर की रात नंदू के जीजा सुनील उर्फ डाक्टर की हत्या के समय हत्यारों के साथ था. कमल धर्मेंद्र का छोटा भाई था. नंदू और उस के साथियों के हाथों मारे गए विनोद और कमल न तो किसी आपराधिक गैंग में शामिल थे और न ही उन के खिलाफ कोई मामला दर्ज था. कहा जाता है कि नंदू घर में मौजूद 2 बच्चों को भी मारना चाहता था, लेकिन साथियों ने उसे ऐसा करने से मना कर दिया था. सुनील उर्फ डाक्टर की हत्या में शामिल आरोपी धर्मेंद्र को क्राइम ब्रांच ने 31 दिसंबर, 2015 को गिरफ्तार कर लिया था.

विनोद और उस के बेटे कमल की हत्या के बाद नंदू और उस के साथी जयपुर आ कर वैशालीनगर वाले फ्लैट में रहने लगे थे. शक होने पर मकान मालिक ने उन से अपना फ्लैट खाली करा लिया तो उस ने जयपुर के मुहाना के जयसिंहपुरा स्थित ओमेगा रेजीडेंसी अपार्टमेंट में 203 नंबर का फ्लैट किराए पर ले लिया था. उस के साथ 2-3 साथी भी वहां रहते थे. नंदू व उस के साथियों ने फ्लैट मालिक से खुद को स्टूडेंट बताया था.

अपार्टमेंट के गार्ड ने पुलिस को बताया कि नंदू उर्फ नवीन और उस के साथी 2-3 दिन में एक बार फ्लैट से निकलते थे. खानेपीने का सामान ये लोग रात को लाते थे. इन से मिलने के लिए हरियाणा व दिल्ली नंबरों के गाडि़यों में लड़के आते थे. नंदू ज्यादातर खुद ही खाना बनाता था. वे फ्लैट की साफसफाई भी खुद ही करते थे. फ्लैट मालिक ने इन का पुलिस सत्यापन नहीं कराया था. बाद में भेद खुलने पर जयपुर की थाना मुहाना पुलिस ने जयसिंहपुरा निवासी केदार शर्मा को गिरफ्तार कर लिया था. यह फ्लैट तेलंगाना निवासी रिटायर्ड कर्नल शिशिर कुमार का था. कर्नल ने फ्लैट की देखभाल की जिम्मेदारी केदार शर्मा को सौंप रखी थी. केदार ने इन किराएदारों का पुलिस सत्यापन नहीं कराया था.

जयपुर में रहने के दौरान नंदू और उस के साथियों का कोई आपराधिक मामला पुलिस के सामने नहीं आया है. इस बारे में नंदू और उस के साथियों ने पुलिस को बताया कि दिल्ली और हरियाणा पुलिस उन के खिलाफ तेजी से काररवाई कर रही थी, जिस से बचने के लिए उन्होंने जयपुर को अपना ठिकाना बना लिया था. वे जयपुर में कोई अपराध कर के पुलिस की नजरों में नहीं आना चाहते थे. पुलिस को फ्लैट की तलाशी में कुछ ऐसा सामान मिला है, जिस से लगता है कि फ्लैट में युवतियों का भी आनाजाना था. नंदू और उस के साथियों ने अय्याशी के लिए लड़कियां लाने की बात कबूल की है.

मुठभेड़ की इस घटना के 5 दिनों पहले 24 अप्रैल को संस्कृत यूनिवर्सिटी के पास नंदू के किराए के फ्लैट से करीब 400 मीटर दूरी पर 20-21 साल की एक युवती का अधजला शव मिला था. इस लाश की शिनाख्त नहीं हुई है. थाना मुहाना पुलिस इस मामले की जांच कर रही है. पुलिस ने नंदू और उस के साथियों से युवती के अधजले शव के बारे में भी पूछताछ की है, लेकिन अभी खुलासा नहीं हुआ है. पुलिस को शक है कि यह लाश नंदू और उस के साथियों की महिला मित्र की हो सकती है.

हालांकि नंदू और उस के साथियों ने इस बात से इनकार किया है. पूछताछ में नंदू के जयपुर की एक युवती से संबंध होने की बात सामने आई है. नंदू की उस युवती से सोशल साइट के माध्यम से बातचीत होती रहती थी. पुलिस उस युवती के बारे में जानकारी जुटा रही है.

पुलिस जांच में पता चला है कि बड़े भाई ज्योति सांगवान उर्फ बाबा के अपराधी होने की वजह से ही कपिल सांगवान उर्फ नंदू अपराध की दुनिया में आया था. कुछ समय पहले बड़ा भाई हत्या के एक मामले में भोंडसी जेल चला गया तो नंदू ने गिरोह की कमान संभाल ली. इस गिरोह का दिल्ली, हरियाणा में उगाही और नशीले ड्रग्स का काम है. हरियाणा पुलिस से मुठभेड़ के दौरान जिस फौर्च्युनर कार से नंदू और उस के साथी भागे थे, वह कार गुड़गांव से लूटी गई थी.

हरियाणा पुलिस इसी कार लूट के मामले में जयपुर आई थी. नंदू और उस के साथी दिल्ली और हरियाणा में हाईवे पर लग्जरी गाडि़यां भी लूटते थे. नंदू पर 7 गाडि़यां लूटने का आरोप है. गिरोह द्वारा लूटी गई एक एसयूवी कार की सड़क दुर्घटना हो गई तो ये उसे छोड़ कर भाग गए थे. कोई बड़ी वारदात करने के बाद भी ये लोग गाडि़यों को लावारिस छोड़ कर भाग जाते थे. नंदू का सब से विश्वासपात्र गुलशन उर्फ हिमांशु छिल्लर है. वह कार भगाने में माहिर है. गुलशन की वजह से ही नंदू और उस के साथी कई बार पुलिस की पकड़ से बच निकले थे. सचिन छिंकारा भी नंदू का खास है. अधिकांश बड़ी वारदातों में वह नंदू के साथ रहा है.

पुलिस कमिश्नर संजय अग्रवाल के अनुसार, 30 अप्रैल को पकड़े गए 6 अपराधियों (नंदू और उस के दोनों साथियों के अलावा इन्हें छुड़ाने आए 3 लोग) से एक पिस्तौल, 6 कारतूस, पौइंट 38 स्मिथ ऐंड वेसन रिवौल्वर, 6 कारतूस, एक लाइसैंसी और्डिनेंसी रिवौल्वर और 10 लाख रुपए जब्त किए गए हैं. इस के बाद इन अपराधियों की जमानत कराने के लिए आ रहे लोगों से एक अवैध रिवौल्वर, 10 कारतूसों के अलावा 5 लाख रुपए जब्त किए गए हैं.

रिवौल्वर, कारतूस और रकम झज्जर निवासी अजय कुमार उर्फ अजय खत्री से बरामद हुई है. अजय के 3 साथियों झज्जर निवासी संदीप उर्फ नगड़, सतपाल उर्फ डिल्लुआ और राजन को काररवाई के दौरान उत्पात मचाने के आरोप में धारा 151 सीआरपीसी के तहत गिरफ्तार किया गया है. संदीप उर्फ नगड़ नंदू और उस के साथियों को छुड़ाने के लिए 10 लाख रुपए लाते समय पकड़े गए गजराज का सगा भाई है. हरियाणा पुलिस पर फायरिंग के सिलसिले में भी इन लोगों पर भांकरोटा थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है.

नंदू और उस के साथियों को छोड़ने के लिए 10 लाख रुपए में सौदा करने वाले एएसआई सत्यप्रकाश एवं सिपाही निर्मल और कालूराम को पुलिस की सेवा से बर्खास्त करने की काररवाई शुरू कर दी गई है. पुलिस महानिदेशक मनोज भट्ट ने उन के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए हैं. विभागीय जांच इसलिए की जा रही है, ताकि वे अदालत में अरजी लगा कर बिना जांच किए बर्खास्त करने का हवाला दे कर फिर बहाल न हो सकें.

इस पूरे मामले में आरोपी पुलिसकर्मियों सत्यप्रकाश और दोनों सिपाहियों का कहना है कि उन्होंने गैलेंट्रीवार्ड लेने के लिए नंदू और उस के साथियों को छिपा दिया था. वे इन के पूरे गिरोह को पकड़ना चाहते थे, इसीलिए जयपुर पुलिस को इस की सूचना नहीं दी थी. हालांकि इस के उलट जयपुर पुलिस का कहना है कि सर्विलांस के दौरान टेप किए गए अपराधियों के मोबाइल पर हुई बातों में 10 लाख रुपए दे कर छोड़ने की बात साफ सुनाई दे रही है. बहरहाल, नंदू और उस के साथियों की गिरफ्तारी से जयपुरवासियों और दिल्ली तथा हरियाणा पुलिस को भले ही राहत मिली है, लेकिन इस से पुलिस और अपराधियों के चेहरे भी बेनकाब हो गए हैं, साथ ही चिंता की यह बात भी सामने आई है कि जयपुर और आसपास के इलाके कुख्यात अपराधियों की शरणगाह बनते जा रहे हैं.

राजस्थान पुलिस का कहना है कि नंदू कुख्यात अपराधी आनंदपाल से भी ज्यादा खूंखार है. आनंदपाल ने राजस्थान पुलिस को परेशान कर रखा है. 3 सितंबर, 2015 को नागौर पेशी से अजमेर लौटते समय कुख्यात आनंदपाल पुलिस की मिलीभगत से भाग निकला था. उस के बाद 21 मार्च को नागौर में पुलिस की आनंदपाल से मुठभेड़ हुई, जिस में एक जवान की मौत हो गई थी. इस के बाद भी वह पुलिस को चकमा दे गया था. उस ने राजस्थान पुलिस का चैन छीन रखा है. Jaipur Crime

 

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