Crime Stories: नामो मर्द का बच्चा था, उस ने गांव में ललकार कर कहा था कि वह अपनी एक टांग के बदले में दुश्मनों की एक लाश जरूर गिराएगा. वह तो ऐसा नहीं कर सका, पर…

एक दिन मैं अपने क्वार्टर में नाश्ता कर रहा था कि थाने से एक कांस्टेबल आया. उस ने आते ही बताया कि थाने से 2 ढाई मील दूर के एक गांव में हत्या हो गई है. मैं चाहता तो अपने हिसाब से आराम से जाता, लेकिन तब थानेदारों की ऐसी आदत नहीं थी. दूसरे अंगरेजों का जमाना था, जो ऐसे मामलों में लापरवाही बरदाश्त नहीं करते थे. इस के अलावा जल्दी पहुंचने का एक फायदा यह होता था कि घटनास्थल पर पैरों के निशान और दूसरे तमाम सबूत आराम से मिल जाते थे.

तैयार हो कर मैं सिपाही के साथ थाने पहुंचा तो वहां 3 आदमी मेरे इंतजार में बैठे थे. उन में से एक को मैं जानता था. वह उस गांव का नंबरदार था, जहां घटना घटी थी. दूसरे 2 लोगों में एक मृतक का भाई था. बातचीत से वह किसी सम्मानित परिवार का लगता था. उस ने अपना नाम मुख्तार बताया था और मरने वाले का नाम बख्तियार.

मुख्तार के बताए अनुसार, घटना कुछ इस तरह घटी थी. बख्तियार अपने खलिहान में सोया हुआ था. वहां सोने की वजह यह थी कि गेहूं की कटी फसल खेत में पड़ी थी. बख्तियार के बारे में उस ने बताया कि वह फौज का रिटायर हवलदार था. उस के पास सिंगल बैरल बंदूक थी, जिसे वह अपने पास रख कर सोता था. सुबह गांव का एक आदमी उधर से गुजरा तो उस ने देखा कि बख्तियार के धड़ का निचला हिस्सा चारपाई पर है और अगला हिस्सा चारपाई से नीचे गिरा पड़ा है.

बख्तियार को उस हालत में देख कर वह आदमी उस के पास तक गया तो उस ने देखा, चारपाई के नीचे खून जमा है. वह आदमी भाग कर मुख्तार के पास आया और उस ने यह बात मुख्तार को बताई तो वह गांव के नंबरदार को साथ ले कर खलिहान पहुंचा. बख्तियार मर चुका था, इसलिए दोनों बख्तियार के लड़के को साथ ले कर थाने आ गए. जब मैं सिपाहियों के साथ मौकाएवारदात पर पहुंचा, वहां काफी लोग इकट्ठा हो चुके थे. हमें देख कर लोग इधरउधर हो गए. मैं ने आगे बढ़ कर लाश का निरीक्षण किया. मृतक चारपाई से आधा लटका हुआ था, उस के दोनों हाथ आगे की ओर कुछ इस तरह फैले थे, जैसे मरने से पहले उस ने किसी चीज को पकड़ने की कोशिश की हो.

उस का चेहरा मिट्टी से लिथड़ा हुआ था. लाश से कुछ दूरी पर एक सिंगल बैरल बंदूक पड़ी थी. मृतक की आंखें खुली थीं. वह सुंदर पट्ठा जवान था. चेहरे से ही लगता था कि वह दबदबे वाला आदमी था. मेरे कहने पर 2 सिपाहियों ने लाश को सीधा कर के चारपाई पर लिटा दिया. मृतक के सीने और पेट पर खून जमा था. चाकू के 2 घाव सीने पर और एक लंबा घाव पेट पर था. सीने के घाव दिल के पास थे. मैं ने अंदाजा लगाया कि चाकू से दिल कट गया होगा, जिस से उस की मौत हो गई है.

सारी बातें नोट कर के मैं आसपास का निरीक्षण करने लगा. मैं ने हर चीज को बहुत बारीकी से देखी, लेकिन मुझे वहां कोई सबूत नहीं मिला. इस के बाद मैं ने पैरों के निशानों पर गौर किया तो एक ओर से एक आदमी के पैरों के निशान चारपाई की ओर आए थे. वे केवल आने के निशान थे, जाने के नहीं. इस से मैं ने अनुमान लगाया कि ये निशान मृतक के होंगे. मैं ने चारपाई की ओर घूम कर देखा तो सिरहाने की ओर मुझे एक जूते का निशान दिखाई दिया. वह दाएं जूते का निशान था. इस का मतलब यह था कि हत्यारा मृतक के सिरहाने की ओर से खेत से हो कर आया था. मैं आगे बढ़ा तो मुझे यह देख कर हैरानी हुई कि केवल दाएं पैर के जूते के निशान थे, बाएं पैर के जूते का कोई निशान नहीं था.

मैं ने बैठ कर ध्यान से देखा तो दाएं पैर के जूते के बराबर एक गोल सा निशान था, जो उस निशान के साथ चल रहा था. यह लाठी या बैसाखी का निशान हो सकता था. इस का मतलब हत्यारा बाईं टांग से लंगड़ा था, जो लाठी या बैसाखी के सहारे चलता था. मैं ने चारपाई के आसपास की जमीन को देखा, इन निशानों के अलावा वहां कोई और निशान नहीं था. इस का मतलब हत्यारा अकेला था. मैं ने कागजी काररवाई पूरी कर के लाश को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया और मृतक के बड़े भाई मुख्तार को नंबरदार के घर बुलवा लिया. नंबरदार ने बताया कि मृतक अंग्रेजी फौज में हवलदार था. लड़ाई खत्म होने के 3 महीने बाद वह रिटायर हो कर घर आ गया था. वह दबंग आदमी था और गांव में दबदबा रखता था.

संपन्न घराने का बख्तियार फौज में पैसों के लिए नहीं, बल्कि मिलिट्रीमैन कहलाने के लिए भरती हुआ था. मैं नंबरदार से बात कर ही रहा था कि मृतक का बड़ा भाई मुख्तार आ गया. मैं ने नंबरदार को बाहर भेज कर उसे अंदर बुलाया. दुख जताने के बाद मैं ने पूछा, ‘‘मृतक की किसी से दुश्मनी तो नहीं थी या इधर किसी से उस का झगड़ा तो नहीं हुआ था?’’

मुख्तार ने जवाब दिया, ‘‘हम दुश्मनी रखने वाले लोग हैं जी, हमारे यहां छोटेमोटे लड़ाईझगड़े तो होते ही रहते हैं. असल लड़ाई नहर पार के एक परिवार से है. उन के साथ कई बार लाठीडंडे चल चुके हैं.’’

‘‘क्या यह दुश्मनी इस हद तक है कि हत्या की नौबत आ जाए? क्या उन लोगों में इतनी हिम्मत है कि तुम्हारे घर में आ कर वे हत्या कर सकें?’’ मैं ने पूछा.

उस ने कहा, ‘‘दुश्मनी तो ऐसी ही है जी, वे लोग मारनेमरने से नहीं डरते.’’

‘‘दुश्मनी की वजह?’’

‘‘वास्तव में गलती हमारे ही आदमी की है. हम ने माफी भी मांगी, लेकिन उन लोगों का रवैया इतना बेइज्जती वाला था कि न चाहते हुए भी बात बढ़ गई और लाठियांडंडे और कुल्हाडि़यां तक चल गईं, जिस में कुछ उन के आदमी घायल हुए, कुछ हमारे.’’

‘‘थाने तक बात पहुंची थी?’’ मैं ने यह बात सोच कर पूछी थी कि थाने में उस लड़ाई का रिकौर्ड होगा.

मुख्तार ने बताया कि दोनों पक्षों में से कोई थाने नहीं गया था. मैं ने उस से पूछा, ‘‘क्या उन लोगों में कोई ऐसा आदमी है, जिस की बाईं टांग कटी हुई हो या बाईं टांग से लंगड़ाता हो.’’

‘‘बिलकुल है मलिकजी, लेकिन आप यह क्यों पूछ रहे हैं?’’ उस ने कहा.

‘‘मौकाएवारदात से पैरों के जो निशान मिले हैं, उन में दाईं टांग के जूते के निशान हैं, जबकि बाईं टांग के जूते की जगह बैसाखी या लाठी के निशान हैं.’’

मुख्तार ने बताया, ‘‘उस लंगड़े का नाम इनामुल्लाह है और वह नामो के नाम से मशहूर है. मुझे यकीन है कि हत्यारा वही है.’’

मैं ने पूछा, ‘‘यह बात तुम इतने यकीन से पैरों के निशान की वजह से कह रहे हो?’’

‘‘यह बात नहीं है. इस की वजह यह है कि नामो की टांग हमारे साथ हुई लड़ाई में ही कटी थी,’’ मुख्तार ने कहा, ‘‘बड़ा ही जीवट वाला लड़का है, लड़ाई में हमारे किसी आदमी की कुल्हाड़ी उस की टांग में ऐसी लगी कि टांग की हड्डी कट गई. पहले तो वह गांव के झोलाछाप डाक्टरों से इलाज कराता रहा, जब टांग ठीक नहीं हुई तो शहर के अस्पताल गया. तब तक टांग में जहर फैल गया था. मजबूरी में डाक्टरों को उस की टांग काटनी पड़ी. गांव लौट कर उस ने कहा था कि दुश्मनों के एक आदमी को मार कर वह इस का बदला लेगा.’’

मुख्तार, जब्बार और बख्तियार, तीनों भाई संपन्न जमींदार थे. गांव में उन का दबदबा था. मुख्तार सब से बड़ा था, उस से छोटा जब्बार और बख्तियार सब से छोटा. मुख्तार का एक बेटा और 3 बेटियां थीं, जबकि जब्बार का एक बेटा था. जब वह 10 साल का था, तभी जब्बार हैजे से मर गया था. उस के बेटे को दोनों भाइयों ने मिल कर पाला था. उस का नाम गुलाम हुसैन था, लेकिन सब उसे गामो कहते थे, गामो एकदम स्वस्थ और काफी सुंदर था. गामो को शुरू से ही पहलवानी का शौक था. वह गांव की कबड्डी की टीम का लीडर था. आसपास के गांवों में उस की धूम थी. उस की कबड्डी की टीम दूसरे गांवों में भी खेलने जाया करती थी.

नहर पार वालों से उन का कांटेदार मुकाबला होता था. गामो के कारण उस के गांव की टीम का पलड़ा भारी रहता था. एक बार गामो की टीम नहर पार वाले गांव में कबड्डी खेलने गई और मैच जीत लिया. रास्ते में मालटा का एक बाग पड़ता था. जब वे बाग के पास से गुजर रहे थे तो उन्हें बाग की ओर से एक अधेड़ औरत आती दिखाई दी. उस औरत ने गामो के पास आ कर कहा कि वह उस से अकेले में बात करना चाहती है.

वह औरत उसे मालटा के बाग में ले गई. बाग में गहरा अंधेरा था. गामो को एक पेड़ के नीचे कोई खड़ा दिखाई दिया. अंधेरे की वजह से दूर से यह पता नहीं चला कि वह मर्द है या औरत. जब वह पास पहुंचा तो उस ने देखा कि वह एक सुंदर लड़की थी. गामो ने पीछे मुड़ कर उस औरत को देखा तो वह गायब थी.

‘‘तुम्हें मैं ने ही बुलाया है, बुरा तो नहीं लगा?’’ लड़की ने पूछा.

गामो ने कहा, ‘‘बुरा तो नहीं लगा, लेकिन मुझे यहां क्यों बुलाया है?’’

‘‘मेरा नाम फातिमा है, दिल के हाथों मजबूर हो कर मैं तुम से मिलना चाहती थी.’’

गामो ने उसे समझाया कि इस तरह वह बदनाम हो जाएगी, इसलिए वह उस का खयाल दिल से निकाल दे और वापस चली जाए.

‘‘औरत हो कर मैं ने इतना बड़ा कदम उठा लिया और तुम मर्द हो कर भी डर रहे हो. चाहो तो साफसाफ कह दो कि मैं तुम्हें अच्छी नहीं लगी. इस के बाद मैं कभी तुम्हारे रास्ते में नहीं आऊंगी.’’ फातिमा ने कहा.

गामो ने कहा, ‘‘तुम बहुत सुंदर हो फातिमा, मुझे अच्छी भी लगती हो, लेकिन तुम अपनी इज्जत का खयाल करो और वापस चली जाओ.’’

‘‘मुझे गलत मत समझना गामो, मैं तुम से सच्चा प्रेम करती हूं. मैं इस शर्त पर वापस जाऊंगी कि तुम मुझ से दोबारा मिलने का वादा करो, वरना मैं तुम्हारे पीछेपीछे तुम्हारे घर तक पहुंच जाऊंगी.’’

गामों ने उस से मिलने का वादा कर लिया. इस के बाद दोनों रोज मालटा के उसी बाग में मिलने लगे. गामो घोड़ी पर बैठ कर नहर पार से आ कर फातिमा से मिलता था. उन के मिलने की यह बात ज्यादा दिनों तक परदे में नहीं रह सकी. गामो और फातिमा के प्रेम के चर्चे पूरे गांव में फैल गए. जब इस बात की जानकारी फातिमा के घर वालों को हुई तो वे मरनेमारने को तैयार हो गए. उन्होंने फातिमा का घर से निकलना बंद कर दिया. इस के बावजूद फातिमा किसी न किसी तरह गामो से मिलने पहुंच जाती थी. फातिमा के बाप और भाइयों ने उस की पिटाई भी की, लेकिन वह नहीं मानी.

फातिमा की बिरादरी वालों ने ऐलान कर दिया कि अगर गामो उन के गांव के पास भी दिखाई दिया तो वे उस के हाथपांव तोड़ कर उसे हमेशा के लिए अपाहिज बना देंगे. इस पूरे मामले की जानकारी गामो के ताऊ और चाचा को हुई तो उन्होंने उसे समझाया कि वह यह चक्कर छोड़ दे. वह न तो पार वाले गांव में जाए और न ही फातिमा से मिलने की कोशिश करे. उस ने कहा कि अगर उस का रिश्ता फातिमा के घर भेजा जाए तो वह उन की बात मान लेगा.

लेकिन दोनों परिवार एक ही टक्कर के थे, इसलिए गामो की बात नहीं मानी गई. उन्हीं दिनों में बख्तियार फौज से आया था. उस के भाई मुख्तार ने कुछ आदमियों को तैयार कर के उस से कहा कि वह पार के गांव में जा कर गामो के लिए फातिमा के रिश्ते की बात करे. बख्तियार उन लोगों के साथ नहर पार कर के गांव पहुंचा तो गांव वालों ने उन की आवभगत की. सभी ने पूरे मामले पर बात कर के गामो के ताऊ मुख्तार की ओर से माफी मांगी. लेकिन जैसे ही इन लोगों ने फातिमा के रिश्ते की बात की, वे एकदम से बिगड़ गए. फातिमा की बिरादरी वालों ने कहा कि वे फातिमा का नाम भी न लें. सभी वापस आ गए. यह सुन कर गामो ने कहा कि कुछ भी हो, वह फातिमा को हासिल कर के रहेगा. उस के लिए उसे कुछ भी करना पड़े.

कुछ दिनों बाद गामो गांव से गायब हो गया. उसे सब जगह तलाशा गया, लेकिन वह कहीं नहीं मिला. 2 दिन बीत गए तो गामो के घर वालों को लगा कि गामो नहर पार वालों के हत्थे चढ़ गया है. उन्होंने 2 लोगों को नहर पार के गांव भेजा कि चुपके से पता करें कि गामो वहां तो नहीं पहुंचा. उन्होंने वापस आ कर बताया कि वह वहां नहीं है. अब उन के लिए गामो चिंता का विषय बन गया.

चौथे दिन फातिमा के गांव के लोग कुल्हाड़ी, भाले, लाठी और दूसरे हथियार ले कर गामो के गांव आ पहुंचे. उन का कहना था कि गामो को उन के हवाले करो. कुछ मिनटों में गामो की बिरादरी वाले भी हथियार ले कर मैदान में आ गए. बात खुली तो पता चला कि फातिमा रात के किसी वक्त घर से गायब हो गई थी. उन्हें पूरा यकीन था कि फातिमा गामो के साथ ही गई है. मुख्तार ने उन लोगों को बताया कि गामो तो 3 दिनों से गायब है, वे खुद ही उसे तलाश रहे हैं. फातिमा के घर वाले यह बात मानने को तैयार नहीं थे. उन का कहना था कि गामो गांव में ही कहीं छिपा है और फातिमा उसी के साथ है.

बात बढ़ कर मारपीट तक जा पहुंची तो दोनों ओर के 5-6 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए. इसी लड़ाई में नामो की टांग पर कुल्हाड़ी लग गई थी, जिस की वजह उसे टांग से हाथ धोना पड़ा था. यहीं से दोनों परिवारों में दुश्मनी हो गई थी. मैं ने इस पर चिंतन किया तो लगा कि हत्या का कारण संभवत: यही है. मैं ने मुख्तार से 2-4 बातें और पूछीं, जो तफ्तीश के लिए जरूरी थीं. मुख्तार ने फातिमा की बिरादरी के एकएक आदमी का नाम ले कर हत्या का शक जताया. मैं ने उस का पूरा बयान लिख लिया. मेरे लिए यह आसान हो गया कि अब इधरउधर देखने के बजाय तफ्तीश एक ओर करनी थी.

कागजी काररवाई पूरी कर के मैं फातिमा के गांव पहुंचा और उस गांव के नंबरदार को ले कर नामो के घर गया. वहां हमें एक बैठक में बिठाया गया. कुछ देर बाद एक आदमी बैसाखी के सहारे चलता हुआ अंदर आया. उसे देख कर ही मैं समझ गया कि यही नामो है. वह बड़ा सुंदर और सजीला जवान था. ऐसे जवान को बैसाखी के सहारे चलते देख मुझे दुख हुआ.

मैं ने कहा, ‘‘सचमुच तुम मर्द हो, तुम ने अपना वचन पूरा कर के दिखा दिया.’’

‘‘कौन सा वचन?’’ उस ने हैरानी से पूछा, ‘‘आप किस वचन की बात कर रहे हैं जी?’’

मैं ने कहा, ‘‘याद करो नामो, जब तुम्हारी एक टांग कटी थी तो तुम ने रोनेधोने के बजाय ललकारते हुए कहा था कि अपनी एक टांग के बदले दुश्मन की एक लाश गिराओगे.’’

उस ने अपनी कनपटी पर अंगुली मारते हुए कहा, ‘‘ओह हां, वह तो मैं ने गुस्से में कह दिया था. लड़ाईझगड़े में घाव तो आते ही रहते हैं. मेरी टांग तो मेरी गलती के कारण कटी थी. शहरी डाक्टर ने कहा था कि अगर गांव के किसी झोलाछाप को न दिखा कर सीधे शहर आ जाते तो टांग ठीक हो सकती थी.’’

‘‘तो तुम ने अपनी टांग का बदला ले ही लिया?’’ मैं ने उस की बात को नजरअंदाज कर के कहा.

‘‘कैसा बदला जी,’’ उस ने परेशान होते हुए कहा, ‘‘मैं ने किस से बदला ले लिया?’’

‘‘इतना परेशान क्यों होते हो नामो, एक टांग वाला होते हुए भी तुम ने दुश्मन के घर में जा कर उस पर वार किया.’’ मैं ने कहा.

नामो की हालत देखने वाली थी. वह आंखें फाड़फाड़ कर मेरी ओर देख रहा था. अगर 2 टांग वाला होता तो शायद एकदम से उठ कर खड़ा हो जाता, लेकिन एक टांग का होने की वजह से वह कुरसी पर बैठेबैठे इधरउधर हिल रहा था.

‘‘आप क्या कह रहे हैं.’’ उस ने सिटपिटा कर कहा, ‘‘मैं ने किसी दुश्मन पर वार नहीं किया. आप किस दुश्नम की बात कर रहे हैं?’’

‘‘तुम अच्छी तरह जानते हो मैं किस दुश्मन की बात कर रहा हूं.’’ मैं ने उस की आंखों में आंखें डाल कर कहा, ‘‘गामो को भूल गए, रात को गामो के चाचा की हत्या कर दी गई है. यह बताओ कि यह काम तुम ने अकेले किया या तुम्हारे साथ कोई और भी था?’’

मुझे उम्मीद थी कि मेरी बात सुन कर नामो उछल पड़ेगा और जोरशोर से मना करेगा. लेकिन उस ने कोई विशेष प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की. उस ने कहा, ‘‘मैं गामो के चाचा की हत्या क्यों करने लगा? लेकिन हां, अगर कभी गामो सामने आ गया तो उस की हत्या जरूर करूंगा. और हां, हत्या कर के छिपाऊंगा भी नहीं, सीधा आप के पास चला आऊंगा.’’

‘‘अगर तुम मुझे साफसाफ बता दो तो मैं तुम्हारे बचाव के लिए रास्ता निकाल लूंगा. अगर नहीं मानोगे तो फिर मैं खुद ही साबित कर दूंगा कि यह हत्या तुम ने ही की है. उस के बाद मुझ से किसी भलाई की उम्मीद न रखना.’’

अभी मैं नामो से पूछताछ कर रहा था कि कांस्टेबल ने बताया कि नामो की बिरादरी के कुछ लोग मुझ से मिलना चाहते हैं. मैं ने कहा कि अभी किसी को भी अंदर मत आने दो. मैं अपराधी को उस समय कोई छूट नहीं देना चाहता था.

‘‘घटनास्थल पर तुम्हारे पैरों के निशान देखे गए हैं.’’ मैं ने उस के पैरों की ओर इशारा करते हुए कहा, ‘‘इस तरह के निशान और किसी के हो ही नहीं सकते, दाएं जूते का निशान और बाएं जूते की जगह बैसाखी का निशान. अब भी मना करोगे कि हत्या तुम ने नहीं की?’’

मेरी बात के जवाब में नामो कसम खाखा कर खुद को निर्दोष बताने लगा. लेकिन मैं उस की कोई बात मानने को तैयार नहीं था. पुलिस वाले अगर कसमों पर ऐतबार करने लगें और रोनेधोने से डर जाएं तो अपराधी जेल जा ही नहीं सकते. मैं ने घटनास्थल से मिलने वाले निशानों के मोल्ड बनवा लिए थे. वहां जमीन नर्म थी, निशान बिलकुल साफ दिखाई दे रहे थे. वे देसी जूते के निशान थे, जो देहात में ज्यादातर लोग पहनते थे. अब मुझे नामो के निशान से घटनास्थल पर पाए गए निशानों का मिलान करना था.

‘‘हत्या करने वाला हथियार कहां है, खुद दे दोगे तो ठीक रहेगा, नहीं तो घर की तलाशी ले कर मैं खुद बरामद कर लूंगा.’’

‘‘जब मैं ने हत्या ही नहीं की तो हथियार कहां से बरामद कराऊं.’’ नामो ने लगभग रोनी सूरत बनाते हुए कहा, ‘‘अगर तलाशी लेने का ही शौक है तो ले लो.’’

इस से मैं ने अनुमान लगाया कि हथियार घर में नहीं है. हत्या करने के बाद या तो इस ने नहर में फेंक दिया है या कहीं दबा दिया है. फिर भी मैं ने तलाशी लेने का फैसला किया. मैं ने कांस्टेबल को बुला कर कहा कि नामो के रिश्तेदारों को अंदर भेज दे. 3 आदमी अंदर आए, जो सम्मानित लग रहे थे. उन में से एक फातिमा का पिता था, दूसरा जो उम्र में सब से बड़ा था, वह नामो का पिता था. तीसरा नामो का ससुर था. मैं ने उन्हें पूरी जानकारी दे कर कहा कि वे नामो से कह दें कि वह अपना अपराध स्वीकार कर ले और हत्या का हथियार बरामद करा दे.

नामो ने अपराध स्वीकार करने से मना कर दिया. मैं ने उस के घर की तलाशी लेने के लिए 2 कांस्टेबल लगा दिए. नामो अपने मातापिता से अलग रहता था. एक गली छोड़ कर दूसरी गली में उस के मातापिता का घर था. इस से भी मैं ने अनुमान लगाया कि नामो का बाप झूठ बोल रहा है कि नामो सारा दिन अपने घर से नहीं निकला था. दोनों के घरों में काफी दूरी थी. मैं ने नामो को गिरफ्तार कर लिया, उस के घर की बारीकी से तलाशी ली गई. टीन के एक संदूक से एक बड़ा चाकू निकला, जो एक कपड़े में लपेट कर रखा था. यह कमानीदार चाकू था, जो उन दिनों अपराधी लोग रखा करते थे.

इस के अलावा एक बरछे का फल निकला, जो जरूरत पड़ने पर बांस में लगाया जा सकता था. मैं ने दोनों हथियार अपने कब्जे में ले लिए. मैं नामो को ले कर थाने आ गया. अब मुझे पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार था. नामो की काररवाई कर के मैं दूसरे केसों में उलझ गया. पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई तो उस में हत्या का समय रात ढाई बजे के करीब लिखा था. मौत का कारण वही था, जो मैं ऊपर लिख चुका हूं. चाकू या कटार के वार से मृतक का दिल 2 जगह से कट गया था. पेट में गहरा घाव था, जिस से पेट की आंतें कट गई थीं.

मैं ने चाकू और बरछी मैडिकल टेस्ट के लिए भेज दीं, ताकि पता लग सके कि उन हथियारों पर खून के धब्बे तो नहीं थे. शाम तक रिपोर्ट आ गई, जिसे देख कर मैं चकरा गया. लिखा था कि दोनों हथियारों पर खून का कोई निशान नहीं मिला. शाम तक मृतक की लाश भी आ गई, जो कानूनी काररवाई कर के मृतक के घर वालों को सौंप दी गई. मैं समझ गया कि नामो ने हत्या कर के हथियार कहीं फेंक दिया है. अब उस से उगलवाना था कि हथियार कहां फेंका है? मैं ने एक कांस्टेबल से कहा कि वह नामो को हवालात से निकाल कर मेरे पास ले आए. अचानक मुझे मौकाएवारदात पर पाए गए निशानों का खयाल आ गया. कांस्टेबल उसे ले कर आ गया.

मैं ने कांस्टेबल को समझाया कि वह नामो को थाने के सहन में ले जा कर 10 कदम चलवाए और उस के बाद हवालात में बंद कर दे. कांस्टेबल मेरी बात समझ गया. उस ने उस के पैरों के निशान ले लिए और मुझे आ कर बता दिए. घटनास्थल पर मिले जूते के निशानों में जूते की तली में एड़ी की ओर ऐसा निशान उभरा था, जैसे जूता घिस गया हो और वहां चमड़े का टुकड़ा लगवाया गया हो. मैं ने नामो के खुरों के निशान देखे तो वे घटनास्थल पर पाए जाने वाले खुरों से बिलकुल अलग थे. मैं ने बैसाखी के निशान देखे तो वे भी अलग लगे. मैं ने अपने कमरे में जा कर कांस्टेबल को बुला कर कहा कि वह नामो को मेरे पास ले आए. वह उसे ले आया.

‘‘मैं तुम पर कोई दबाव नहीं बनाऊंगा, लेकिन तुम हत्या करना स्वीकार कर लो तो फायदे में रहोगे. एक बात याद रखो, यह आखिरी मौका है, इस के बाद मुझ से कोई उम्मीद मत रखना. घटनास्थल पर तुम्हारे खुरे मौजूद हैं, हत्या का कारण भी साफ है. तुम्हारे खिलाफ सबूत भी मजबूत हैं, बोलो बयान दोगे या नहीं?’’

‘‘मेरा बयान वही है, जो पहले दिया था. जब मैं ने हत्या की ही नहीं तो क्या बयान दूं. अगर मैं ने हत्या की होती तो मैं खुद थाने आ कर पेश हो जाता. अल्लाह गवाह है, वह मेरी मदद जरूर करेगा.’’

मुझे उस की बात में सच्चाई दिखाई दे रही थी. झूठा आदमी बयान देता है तो पता चल जाता है और सच बोलने वाले का चेहरा अलग ही पहचाना जाता है. मैं अपना शक दूर किए बिना नामो को छोड़ना नहीं चाहता था. मैं ने सोचा कि जरूरी नहीं कि नामो ने हत्या के समय यही जूते पहने हों. मैं ने एक कांस्टेबल से कहा कि वही नामो के घर जा कर उस के सारे जूते ले आए. साढ़े 11 बजे का समय. मुझ से एक कांस्टेबल ने कहा कि नामो का ससुर और बाप मिलना चाहता है. उन्होंने मेरे पास आ कर कहा कि वे नामो से मिल कर मुझ से बात करना चाहते हैं. मैं ने कहा कि अभी तफ्तीश चल रही है, इसलिए वे उस से नहीं मिल सकते.

नामो के बाप ने मेरे आगे हाथ जोड़ कर कहा, ‘‘नामो पर दया करें मलिकजी. आप जो कहेंगे, आप की सेवा कर देंगे. अल्लाह ने हमें बहुत कुछ दिया है.’’

‘‘सेवा जरूर बताऊंगा, पहले मैं काम पूरा कर लूं. आप ऐसा करें, नामो से कहें मुझे सब कुछ सचसच बता दे. फिर मैं आप को सेवा बताऊंगा.’’

मेरी बात सुन कर वे एकदूसरे का मुंह देखने लगे. इतने में वह कांस्टेबल आ गया, जिसे मैं ने नामो के घर भेजा था. उस ने मुझे इशारे से बताया कि वह काम कर लाया है. मैं ने नामो के बाप और ससुर से कहा कि वे अच्छी तरह सोच लें, उस के बाद बताएं. उस के बाद मैं ने उन्हें भेज दिया. कांस्टेबल एक थैले में डाल कर 5 जोड़ी जूते ले आया था. उन में एक को छोड़ कर सभी जूते नए थे. पुराने जूते की तली में एक तला लगा हुआ था. मैं कांस्टेबल को ले कर उस जगह गया, जहां नामो के जूते के निशान थे. मैं ने कांस्टेबल से कहा कि वह नामो के दाएं पैर का जूता पहन कर कच्ची जमीन पर चले.

वह 8-10 कदम चला. मैं ने उन निशानों को ध्यान से देखा तो वे भी उन निशानों से थोड़े अलग थे. इस से मैं समझ गया कि नामो निर्दोष है. उस के अपराधी न निकलने से मेरी सारी मेहनत बेकार जा रही थी. मैं ने मुखबिरों को बुला कर आसपास के गांवों में ऐसे आदमी को ढूंढ़ने को कहा, जिस का बायां पैर कटा हुआ हो या फिर बाएं पैर की जगह वह बैसाखी के सहारे चलता हो. इस सारी काररवाई के बाद मैं ने नामो को छोड़ दिया. लेकिन उस से कह दिया था कि वह गांव से बाहर न जाए. अगर कहीं जाना हो तो थाने में बता कर जाए. अब मैं मुखबिरों के सहारे था. ऐसे आदमी को ढूंढ़ना कोई मुश्किल काम नहीं था.

मुखबिरों की कोशिश के बावजूद आसपास के गांवों में ऐसा कोई आदमी नहीं मिला. इस तरह 5 दिन बीत गए और मेरी तफ्तीश एक इंच भी आगे नहीं बढ़ी. मैं हताश हो चला था. मैं अपने एसआई महेंद्र को नामो को लाने के लिए भेजने की सोच ही रहा था कि एक मुखबिर थाने आ गया. वह एक आदमी को साथ लाया था. मुखबिर ने बताया कि यह आदमी साथ वाले गांव में रहता है. जिस रात बख्तियार की हत्या हुई थी, उस की दूसरी सुबह यह एक शादी में गया था. रात को जब यह वापस आया तो इसे बख्तियार की हत्या की खबर मिली.

उसे यह भी पता चला कि पुलिस को एक ऐसे आदमी की तलाश है, जो बाईं टांग से लंगड़ा हो. इस आदमी ने बताया कि उस ने इस तरह का लंगड़ा आदमी घटना से एक दिन पहले देखा था. यह बात मुखबिर के कान में पड़ी तो वह उसे मेरे पास ले आया. मैं ने उस से पूरी बात बताने के लिए कहा. उस का नाम रूपकुमार था. उस के बताए अनुसार, वह घटनास्थल वाले गांव के साथ वाले गांव में रहता था. घटना से एक दिन पहले वह गांव के एक सिरे पर स्थित परचून की दुकान से कुछ सामान लेने गया था. वह दुकान एक रिटायर्ड फौजी की थी, जो विश्वयुद्ध में बर्मा के एक युद्ध क्षेत्र में घायल हो गया था. उस के घाव कुछ इस तरह के थे कि उस का दायां बाजू बेकार हो गया था. सब लोग उसे फौजी दुकानदार कहते थे.

रूपकुमार जब सौदा ले कर दुकान से निकलने लगा तो अचानक फौजी के घर का दरवाजा खुला. एक आदमी बैसाखी के सहारे घर से निकला और रूपकुमार को देख कर तुरंत अंदर चला गया. रूपकुमार ने उस पर कोई ध्यान नहीं दिया. उस से अगले दिन रूपकुमार अपने एक रिश्तेदार की शादी में चला गया. जब वह शादी से लौट कर आया तो उसे पता चला कि पास वाले गांव में एक आदमी की हत्या हो गई है. उस ने जब यह सुना कि पुलिस को एक लंगड़े हत्यारे की तलाश है तो उसे उस फौजी दुकानदार के घर से निकलने वाले लंगड़े की याद आ गई. उस ने लोगों से उस के बारे में बताया. बात फैलतेफैलते मेरे मुखबिर के कान तक पहुंची और वह उसे मेरे पास ले आया.

मैं ने रूपकुमार से कहा, ‘‘अगर वह लंगड़ा तुम्हारे सामने आ जाए तो क्या तुम उसे पहचान लोगे?’’

उस ने कहा, ‘‘मैं ने एक पल के लिए देखा था. लेकिन मैं उसे पहचान लूंगा, क्योंकि उस के चेहरे पर एक लंबा घाव का निशान था.’’

‘‘क्या तुम पूरे विश्वास से कह सकते हो कि उस की बाईं टांग नहीं थी?’’ मैं ने पूछा.

‘‘नहीं जी,’’ वह कुछ देर सोचता रहा, फिर बोला, ‘‘मुझे ऐसा शक है कि वह अपनी दाईं टांग पर खड़ा था और उस की बैसाखी बाईं ओर थी. मैं ने एसआई महेंद्र को बुला कर कहा कि वह फौजी दुकानदार को अपने साथ ले आए.

2 घंटे बाद महेंद्र सिंह फौजी को ले आया. उस का नाम प्रकाश नारायण था, लेकिन लोग उसे फौजी कहते थे. वह मेरे कमरे में आया. सांवले रंग का वह साधारण सा आदमी था. शक्ल से गरीब घराने का लगता था. वह कुछ घबराया हुआ लग रहा था. उस ने हाथ जोड़ कर मुझे प्रणाम किया और एक ओर खड़ा हो गया. मैं ने उसे बैठने के लिए कहा. वह बैठ गया तो उस से इधरउधर की बातें करने के बाद मैं ने पूछा, ‘‘वह लंगड़ा कहां है?’’

मेरा सवाल सुन कर प्रकाश ऐसा बिदका जैसे किसी ने सुई चुभो दी हो. वह हैरानी से मेरा मुंह देखने लगा. मैं ने सोच लिया कि उसे संभलने का मौका नहीं दूंगा.

उस ने कहा, ‘‘आप किस लंगड़े की बात कर रहे हैं, मैं समझा नहीं?’’

‘‘वही लंगड़ा, जिस के साथ मिल कर तुम ने हवलदार बख्तियार की हत्या की है.’’

यह सुनते ही प्रकाश ऐसे उछला, जैसे मैं ने उस पर बम फेंक दिया हो.

‘‘मेरे सामने झूठ बोलने की कोशिश मत करना प्रकाश, मेरे पास ऐसे कई गवाह हैं, जिन्होंने उस लंगड़े को तुम्हारे घर आतेजाते देखा है. अगर तुम ने झूठ बोला तो मैं तुम्हारा क्या हाल बनाऊंगा, सोच भी नहीं सकते. तुम्हारा एक हाथ तो बेकार है ही, दूसरा भी तोड़ दूंगा. फिर भीख मांगते फिरोगे.’’

वह हकला कर बोला, ‘‘मैं ने हत्या नहीं की है सर.’’

‘तो फिर किस ने की है?’’

‘‘जी, गुल्लू ने की है.’’ प्रकाश ने बड़ी मुश्किल से कहा.

‘‘यह गुल्लू कौन है, सीधी तरह उस का नाम बताओ?’’ मैं ने सख्ती से कहा.

‘‘उस का नाम गुलजार है, उसी को लंगड़ा गुल्लू कहते हैं.’’

‘‘हत्या के समय तुम उस के साथ थे?’’ मैं ने यह बात इसलिए कही कि वह मौके का गवाह हो सकता था..

‘‘नहीं सर,’’ उस ने हाथ जोड़ कर कहा, ‘‘आप मुझ से चाहे जैसी कसम ले लें, हत्या के वक्त मैं उस के साथ नहीं था. वह अकेला ही था.’’

मैं ने प्रकाश से पूछा, ‘‘गुल्लू की बख्तियार से क्या दुश्मनी थी?’’

‘‘पुरानी बात है सर, गुल्लू ने अपना बदला लिया है. हवलदार की ही वजह से उस की टांग कटी थी.’’

प्रकाश ने जो बात बताई, उस के अनुसार, गुल्लू भी फौज में था और वह बख्तियार के साथ युद्ध में अगले मोरचे पर तैनात था. गुल्लू हवलदार के अधीनस्थ था. उस जमाने में हवलदार के अधीन 5 जवान हुआ करते थे. जंग जोरों पर थी. प्रकाश गुल्लू और 3 सिपाही बख्तियार के अधीन थे. एक दिन जापानियों का जोरदार हमला हो रहा था, बम बारिश की तरह बरस रहे थे. हवलदार बख्तियार ने गुल्लू को कोई काम बता कर कहा कि वह जा कर उस काम को करे. गुल्लू ने कहा कि हमले का जोर कम हो जाएगा तो वह उस काम को कर देगा.

हवलदार बहुत सख्त फौजी था, अनुशासन में रह कर काम करता था, अपनी बात मनवाने का आदी था. उस ने कहा, ‘‘यह काम अभी करो, मेरा आदेश है, नहीं तो तुम्हारे विरुद्ध काररवाई की जाएगी.’’

गुल्लू न चाहते हुए भी मोर्चे से बाहर चला गया. वह अभी कुछ दूर ही गया होगा कि एक गोला उस के पास आ कर फटा, जिस का एक छोटा टुकड़ा उस के मुंह पर लगा और दूसरा उस के घुटने पर. घाव इतना गहरा था कि डाक्टरों को उस की टांग काटनी पड़ी. गुल्लू को फौज से रिटायर कर दिया गया. इस घटना के लिए गुल्लू बख्तियार को ही जिम्मेदार मानता था. उस ने तभी प्रण कर लिया था कि वह उस से इस का बदला जरूर लेगा. कुछ दिनों बाद प्रकाश भी घायल हो कर गांव आ गया. गुल्लू को पता था कि प्रकाश हवलदार के साथ वाले गांव में रहता है.

प्रकाश और गुल्लू के पत्र के माध्यम से संबंध बने हुए थे. गुल्लू ने उस से कह रखा था कि बख्तियार जब भी गांव आए, उसे सूचित कर दे. जिन दिनों हवलदार बख्तियार गांव आया हुआ था. प्रकाश किसी काम से उस के गांव गया तो उसे पता चला कि वह गांव आया हुआ है. उस ने चिट्ठी लिख कर गुल्लू को हवलदार के गांव आने के बारे में बता दिया. गुल्लू प्रकाश के गांव आ गया और उस के घर में छिप गया. वह इतनी दूर से घोड़ी पर आया था. घटना वाली रात गुल्लू ने प्रकाश को बताया कि वह हवलदार का काम तमाम करने जा रहा है और वहीं से अपने गांव चला जाएगा.

गुल्लू अपनी घोड़ी पर बैठ कर रात को ही चला गया, अगले दिन प्रकाश को पता चला कि बख्तियार की हत्या हो गई है. मैं ने प्रकाश से गुल्लू के गांव का पता पूछा. उस ने जो पता बताया, वह मेरे थाने से 6-7 मील दूर था और मेरे इलाके में नहीं आता था. मैं ने प्रकाश का पूरा बयान लिखा और उसे गिरफ्तार कर के हवालात में बंद कर दिया.

मैं समय नष्ट करना नहीं चाहता था. मैं ने 2 कांस्टेबलों को साथ लिया और गुल्लू को गिरफ्तार करने चल दिया. मैं उस इलाके के थानेदार से मिला. वह एक सिख था. उस का नाम गजेंद्र सिंह था, उस ने मेरी बड़ी आवभगत की. मैं ने उसे अपने आने के बारे में बताया.

‘‘आप जलपान करें मलिकजी, आप का मुलजिम आप को मिल जाएगा.’’ कह कर उस ने एक हैडकांस्टेबल और 2 सिपाहियों को इस आदेश के साथ गुल्लू के गांव भेज दिया कि वे उसे गिरफ्तार कर के थाने ले आएं.

आधे घंटे बाद हैडकांस्टेबल और सिपाही एक आदमी को ले आए. मैं उसे देखते ही समझ गया कि यही गुल्लू है. वह दाईं टांग से बैसाखी पर चल रहा था. वे लोग उसे तांगे पर बिठा कर लाए थे. मैं ने देखा कि उस के चेहरे पर गहरे लंबे घाव का निशान था. गुल्लू ने वैसी ही जूती पहनी हुई थी. मैं ने उस की जूती उतरवा कर देखी तो उस के नीचे तला लगा हुआ था. गजेंद्र सिंह ने कानूनी काररवाई पूरी कर के अपराधी मेरे हवाले कर दिया. मैं उसे ले कर अपने थाने लौट आया.

रात को मैं ने गुल्लू को अपने कमने में बुलाया तो हैडकांस्टेबल ने उसे मेरे सामने ला कर खड़ा कर दिया. उस की आंखें नींद से भारी हो रही थीं. मैं ने हैडकांस्टेबल को इशारा किया कि इसे सोने मत देना. जैसे ही उसे झपकी आती, वह उस के बाल पकड़ कर जोरदार झटका देता. मैं ने उसे खड़ा रखने को कहा.

‘‘तुम अपनी गिरफ्तारी का कारण समझ गए हो गुल्लू,’’ मैं ने कहा, ‘‘मैं ने तुम्हें ऐसे ही गिरफ्तार नहीं किया, मेरे पास तुम्हारे खिलाफ पक्के सबूत हैं और गवाह भी. तुम ने हवलदार बख्तियार की हत्या की है, मौकाएवारदात पर तुम्हारी जूतियों के निशान मिले हैं. इस के अलावा तुम्हारे दोस्त प्रकाश ने सब कुछ उगल दिया है और हत्या का कारण भी बता दिया है. अब तुम्हारे पास हत्या की बात स्वीकार करने के अलावा कोई रास्ता नहीं है.’’

‘‘हां, उस भेडि़ए की हत्या मैं ने ही की है.’’ उस ने नींद से पीछा छुड़ाने के लिए अपने सिर को झटका देते हुए कहा, ‘‘मैं ने उस से बदला ले लिया है. अब मैं जिंदा नहीं रहना चाहता. पूछो, क्या पूछते हो?’’

मैं ने उसे अपने सामने कुरसी पर बिठा दिया. उस ने अपना काफी लंबा बयान दिया, जिसे मैं यहां छोटा कर के बता रहा हूं.

बात उन दिनों की थी, जब विश्वयुद्ध जोरों पर था. जो भी हृष्टपुष्ट जवान दिखाई देते थे, उसे भरती कर लिया जाता था. गरीब घर का गुल्लू जवान था. उस का बाप दूसरों की जमीन ले कर बटाई पर खेती करता था. गुल्लू को यह काम पसंद नहीं था. गुल्लू भी फौज में भर्ती हो गया. उस ने सोचा कि साल, 2 साल में पैसा इकट्ठा हो जाएगा तो शादी कर लेगा. गुल्लू के 2 बड़े भाई थे, जो विवाहित थे. जब लड़ाई ने जोर पकड़ा तो गुल्लू की यूनिट को अगले मोर्चे पर जाने का आदेश मिला. वह बर्मा का मोर्चा था.

जापानी फौज तेजी से आगे बढ़ती हुई बर्मा तक पहुंच गई थी. प्रकाश भी इसी यूनिट में था. गुल्लू और प्रकाश में दोस्ती हो गई थी. बख्तियार इस यूनिट का हवलदार था. प्रकाश और गुल्लू उस के अधीन सिपाही थे. हवलदार बख्तियार बहुत सख्त था. जब वह गुस्से से बात करता था तो उस की आवाज ऐसी निकलती थी, जैसे कोई भेडि़या गुर्रा रहा हो.

प्रकाश और गुल्लू अकसर उस की सख्ती का निशाना बनते थे. गुल्लू तो उस से इतना तंग आ चुका था कि एक दिन उस ने प्रकाश से कहा कि किसी दिन गोलाबारी के बीच वह इस भेडि़ए को गोली मार देगा. लेकिन उसे इस का मौका कभी नहीं मिला. उस के बाद वह घटना घट गई, जिस में उस की टांग चली गई. गुल्लू बेकार हो कर घर आ गया. लंगड़ा होने के साथसाथ चेहरे पर जो घाव आए थे, उस से वह बदसूरत हो गया था. उस की हालत देख कर उस की बूआ ने उस से रिश्ता तोड़ने के लिए कह दिया. गुल्लू को इस का बहुत दुख हुआ. इतना ही नहीं, उस की मंगेतर ने भी कह दिया कि एक लंगड़े और बदसूरत आदमी के साथ वह पूरा जीवन नहीं गुजार सकती.

गुल्लू इस सब का जिम्मेदार बख्तियार को मानता था. वह उस से इतनी अधिक घृणा करने लगा कि अगर उस का बस चलता तो जंग में ही उसे गोली मार देता. उस के एक महीने बाद प्रकाश भी घायल हो कर घर आ गया. दोनों में पक्की दोस्ती हो गई. खतोखिताबत होने लगी. गुल्लू को पता था कि बख्तियार प्रकाश के साथ वाले गांव में रहता है. उस ने प्रकाश से कह रखा था कि जब भी बख्तियार घर आए, उसे जरूर सूचना दे दे. युद्ध समाप्त हो गया तो हवलदार बख्तियार रिटायर हो कर अपने गांव आ गया. प्रकाश को पता चला तो उस ने गुल्लू को पत्र द्वारा सूचना दे दी.

सूचना मिलते ही गुल्लू एक घोड़ी पर सवार हो कर प्रकाश के घर आ गया. घर से चलते समय उस ने एक लंबा तेज धार वाला चाकू अपने पास रख लिया था. दिन के समय प्रकाश और गुल्लू घोडि़यों पर सवार हो कर बख्तियार के गांव चले गए. वे गांव के अंदर न जा कर बाहर से चक्कर काट कर खेतों की ओर चले गए. प्रकाश ने यह पता कर लिया था कि बख्तियार रात को खेतों में सोता है और उस के पास एक बंदूक भी है, जिसे वह अपने पास रखता है.

प्रकाश ने दूर से गुल्लू को वह खेत दिखा दिए, जहां बख्तियार सोता था. गुल्लू को जगह दिखा कर वह वापस आ गया. अब गुल्लू बेचैनी से रात का इंतजार करने लगा. आधी रात के समय वह प्रकाश के घर से निकला. दोनों के बीच यह तय हुआ था कि अगर गुल्लू हवलदार की हत्या करने में कामयाब हो गया तो वापस नहीं आएगा और अगर कामयाब नहीं हुआ तो फिर प्रकाश के घर आ जाएगा. आधी रात का समय था. जब गुल्लू बख्तियार के गांव के बाहर होता हुआ खेतों की तरफ पहुंचा. उस ने दूर से देखा तो हवलदार एक चारपाई पर सोता दिखाई दिया. वह अपनी घोड़ी को धीरेधीरे चला कर खेत के किनारे पहुंच गया. वहां से वह हवलदार की ओर बढ़ा. हवलदार उस वक्त गहरी नींद सोया हुआ था.

गुल्लू किसी तरह की आहट किए बिना हलवदार के सिर की ओर पहुंच गया. सिर की ओर इसलिए कि अगर उस की आंख खुल भी जाए तो वह दिखाई न दे. उस ने बैसाखी जमीन पर रखी और चाकू निकाल कर हवलदार के सीने में भोंक दिया. चाकू लगने पर हवलदार एक झटके के साथ उठा और उस के मुंह से भयानक चीख निकली. उस ने बाएं हाथ से बंदूक पकड़ी, लेकिन तब तक गुल्लू ने चाकू का दूसरा वार कर दिया. बंदूक हवालादार के हाथ से छूट कर जमीन पर गिर पड़ी. गुल्लू उस समय बदले की भावना से पागल हो गया था. उस ने तीसरा वार हवलदार के पेट पर कर के पेट फाड़ दिया.

हवलदार मुंह के बल आधा चारपाई से नीचे गिर गया, जबकि उस का आधा धड़ चारपाई पर ही रहा. इस से उस की जान निकल गई. गुल्लू ने खून से सना चाकू हवलदार के कपड़ों से साफ कर के अपनी जेब में रख लिया. फिर बैसाखी उठाई और घोड़ी पर सवार हो कर अपने गांव चला गया. मैं ने उस से पूछा कि वह चाकू कहां है, जिस से हवलदार की हत्या की थी? उस ने बताया कि घर में मचान पर फेंक दिया था. मैं ने उस का पूरा बयान लिख कर उस के हस्ताक्षर करा लिए और उसे ले कर चाकू बरामद करने चला गया. उस के गांव पहुंच कर नंबरदार और 2 सम्मानित व्यक्तियों को साथ ले कर गुल्लू के घर गया, जहां गुल्लू ने मचान से चाकू बरामद करा दिया.

मैं ने गुल्लू को मैजिस्ट्रेट के सामने पेश कर के उस का बयान करा दिया. गुल्लू ने वही बयान मजिस्ट्रैट के सामने भी दिया. मौके का कोई गवाह नहीं था. अगर गुल्लू अपने बयान से पलट जाता तो बच जाता. लेकिन उसे अब जिंदा रहने में कोई रुचि नहीं थी. उस ने बताया कि अपंग होने के कारण उस के भाई और भाभियां उसे बोझ समझते हैं. सेशन जज ने गुल्लू को मृत्युदंड दिया, जबकि प्रकाश को उस का साथ देने के लिए 5 साल के कारावास की सजा दी. हाईकोर्ट में गुल्लू के बाप ने अपील की, जहां उस के मृत्युदंड को आजीवन कारावास में बदल दिया गया. गुल्लू की जान बचने पर उस के बाप को खुशी हुई, लेकिन गुल्लू को कोई खुशी नहीं हुई थी. Crime Stories

 

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