Karnataka Crime News : कोट्टूरक्षय और वसंत का रिश्ता चाचा और भतीजे का था. दोनों की उम्र के बीच में भी बड़ा फासला था, जहां अक्षय 25 साल का था तो उधर चाचा वसंत की उम्र अब 50 वर्ष की हो चुकी थी. मगर दोनों के बीच एक सच्ची और पक्की दोस्ती थी. वह थी शराब की. दोनों ही चाचाभतीजे शराब के बड़े शौकीन थे.

शराब के लिए दोनों के बीच बड़ी अटूट दोस्ती थी. एकदूसरे पर जान देने और जान ले लेने का जज्बा दोनों के अंदर कूटकूट कर

भरा हुआ था. दोनों एक साथ बैठ कर हफ्ते या 2-4 दिन के बीच अपनी महफिल जमा कर एकदूसरे से अपने दुखसुख बांट लिया करते थे.

उस दिन मंगलवार था और तारीख थी 26 जनवरी, 2026. अक्षय अपने घर में मोबाइल देखने में व्यस्त था, तभी उसे अपने चाचा वसंत का फोन आ गया. अक्षय ने तुरंत फोन उठा कर पूछा, ”हां चाचा, कई दिनों बाद आप को मेरी याद आ ही गई. बोलिए क्या बात है?’’”अक्षय, हम कई दिनों से साथ में बैठे भी नहीं. मुझ से नाराज हो क्या तुम?’’ वसंत ने उलाहना देते हुए कहा.

”आप को क्या बताऊं चाचा, मेरी नौकरी भी छूट गई. बड़ी परेशानी में हूं, अब तो मैं आप को पार्टी देने लायक भी नहीं रहा.’’ यह कहते हुए अक्षय सुबक कर रोने लगा था.

”अक्षय, मेरे होते हुए अपने को कभी अकेला मत समझा कर, अब जल्दी से उसी बार में आ जा, जहां पर हमारी पार्टी होती रहती है. आज की ग्रांड पार्टी मेरी ओर से.’’ कहते हुए वसंत ने फोन डिसकनेक्ट कर दिया.

अक्षय को तो जैसे मुंहमांगी मुराद मिल गई. वह अपनी मम्मी से कोई बहाना बना कर सीधे बार के उस केबिन में पहुंच गया, जहां पर उस का चाचा उसी का इंतजार कर रहा था. अक्षय काफी गुस्से और टेंशन में दिखाई दे रहा था. वसंत ने गौर से उस के चेहरे को देखा, उसे सामने वाली कुरसी पर बैठने का इशारा करते हुए बोला, ”अक्षय बेटा, आज तुम बहुत ज्यादा टेंशन में दिखाई दे रहे हो, किसी से झगड़ा कर के तो नहीं आए हो तुम?’’

”चाचा, एक बात हो तो बताऊं, मेरे घर वाले तो जैसे मेरे दुश्मन ही बन गए हैं. हर कोई ताना मारता है,’’ अक्षय ने कुरसी पर बैठते हुए कहा.

”यार अक्षय, अब तू सब कुछ भूल कर यह घूंट लगा,’’ वसंत ने उसे गिलास पकड़ाते हुए कहा.

दोनों काफी देर तक जाम से जाम लड़ाते रहे. आज अक्षय कुछ ज्यादा स्पीड में शराब पी रहा था, जैसे वह अपना दुख कम करने की कोशिश कर रहा हो. वसंत ने उस से पूछ ही लिया, ”अक्षय, यार आज कुछ न कुछ बात अवश्य है, तुम्हारे मन में अवश्य कुछ चल रहा है, साफसाफ बताओ आखिर बात क्या है?’’

”चाचा, अब तो अति ही हो गई है, जिस घर का मैं वारिस हूं, उसी घर में मुझे रोज हर कोई प्रताडि़त करने में लगा हुआ है,’’ अक्षय ने कहा.

”अक्षय, सचमुच तुम्हारे साथ बहुत अन्याय हो रहा है. देखो न, अभी बड़े भाईसाहब ने हरपनहल्ली में डुप्लेक्स मकान भी बेचा था. मैं ने सुना था कि लगभग डेढ़ करोड़ रुपए में बिका था. तुम अपना एक नया बिजनैस खोलने वाले थे, उस का क्या हुआ?’’ वसंत ने पूछा.

”चाचा, जब मैं ने अपना कारोबार शुरू करने के लिए पापा से पैसे मांगे तो उन्होंने साफसाफ कह दिया कि तू नालायक है, शराबी है. मुझे पता है तू मेरा ये सब पैसा अपने शराबी चाचा के साथ शराब की पार्टियां कर के बरबाद कर देगा. मैं तुझे एक फूटी कौड़ी भी नहीं दूंगा. अपना कारोबार करना चाहता है तो खुद मेहनत कर पैसे बचा और अपना कारोबार खोल. अब बताओ चाचा, क्या करूं?’’ अक्षय ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा.

”अक्षय, तेरा बाप तेरे साथ एकदम से सौतेला व्यवहार कर रहा है.  मेरे पास तेरे लिए एक जबरदस्त प्लान है,’’ वसंत ने उस के नजदीक आते हुए कहा.

”चाचा, जल्दी से बता दो, मैं बहुत परेशान हूं,’’ अक्षय ने अधीर होते हुए कहा.

”तेरे पास अब बस एक ही उपाय बचा है, तू एकएक कर अपने पापा, मम्मी और बहन को मार डाल, उस के बाद आटोमैटिक तू सारी संपत्ति का मालिक बन जाएगा.’’  वसंत ने एक मनोहर कहानी अक्षय को सुनाते हुए कहा.

”ये कैसी बातें कर रहे हो चाचा, आप मुझे कैसी बेतुकी शिक्षा दे रहो हो?  मुझे फांसी पर चढ़ाने का इरादा है क्या आप का?’’ अक्षय ने घबराते हुए कहा.

”अक्षय, जब तक तेरा चाचा जिंदा है, तब तक तेरा कोई बाल भी बांका नहीं कर सकता. मेरे पास एक बहुत अच्छा प्लान है, बस तू इसे ध्यान से सुन.’’ कहते हुए वसंत धीरेधीरे अपना पूरा प्लान अक्षय को बताने लगा था.

पूरा प्लान सुनने के बाद अक्षय तो खुशी के मारे अपनी कुरसी से ही उछल पड़ा था. उस के बाद दोनों अपनेअपने घर चले गए.

अक्षय 27 जनवरी, 2026 की शाम को साढ़े 7 बजे जब घर पर पहुंचा तो उस समय घर पर उस की मम्मी जयलक्ष्मी थी, जो किचन में रात के खाने की तैयारी कर रही थी. प्लान के मुताबिक अक्षय ने अचानक से पीछे से आ कर अपनी मम्मी का गला रेत दिया. उस के बाद उस ने मम्मी की लाश को अपने कमरे में बैड के नीचे छिपा दिया और रसोई में खून अच्छी तरह से साफ कर दिया.

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अपने ही मम्मीपापा और बहिन का क़त्ल कर घर में दफ़न करने वाला अक्षय

उस के बाद उस ने अपनी बहन अमृता का मर्डर भी अचानक से कर उस की लाश को भी छिपा दिया. रात के लगभग 9  बजे जब उस के पापा भीमराज घर पर आए तो अक्षय ने उन्हें भी मार डाला और तीनों लाशों को अपने कमरे में गड्ढा खोद कर गाड़ दिया.

गुमशुदगी कराई दर्ज 

29 जनवरी, 2026 को बेंगलुरु के तिलक नगर थाने के इंसपेक्टर के. विश्वनाथ अपने औफिस में बैठे थे, तभी काफी घबराई हालत में अक्षय वहां पहुंचा. इंसपेक्टर के. विश्वनाथ ने जब उस से पूछताछ की तो उस ने बताया कि उस का पूरा परिवार 26 जनवरी, 2026 से रहस्यमयी ढंग से गायब हो गया है.

अक्षय ने अपनी लिखित शिकायत में बताया कि 27 जनवरी, 2026  की सुबह उस के मम्मीपापा और छोटी बहन कोट्टूर कस्बा जिला विजयनगर से बेंगलुरु के जयदेव अस्पताल में गए थे. उस के पापा भीमराज काफी बीमार थे, इसलिए उन्हें जयदेव अस्पताल में भरती कराया गया था.

29 जनवरी, 2026 को पापा की तबीयत ज्यादा खराब होने के कारण उस की छोटी बहन अमृता ने खुद उसे जल्दी अस्पताल आने के लिए कहा था. बहन की बात सुन कर उस ने तुरंत बस पकड़ी और बेंगलुरु के लिए चल पड़ा था. इस बीच उस ने अपने चाचा वसंत कुमार जोकि बेंगलुरु में ही रहते हैं, को भी फोन पर यह जानकारी दे दी थी.

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अक्षय के हाथों मारे गए उनके माँबाप और बहन (फाइल फोटो)

वसंत कुमार ने अक्षय को अपने घर बुलाया था, ताकि दोनों एक साथ हौस्पिटल पहुंच जाएं. 29 जनवरी की सुबह वह अपने चाचा के पास पहुंचा तो चाचा ने 4  लाख रुपए नकद लिए और वे दोनों जयदेव अस्पताल पहुंचे. दोनों ने मिल कर उन तीनों को ढूंढा, रजिस्टर चैक किए और अस्पताल के सारे सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले, लेकिन उन का पता नहीं चला.

पुलिस ने अक्षय की रिपोर्ट पर शिकायत दर्ज कर ली और अक्षय से उस के मम्मीपापा व बहन के फोटो व मोबाइल नंबर भी लिए. पुलिस ने अब 3 लापता लोगों के मोबाइल नंबर सर्विलांस पर लगा दिए थे. पुलिस ने पूरे दिन और रात ढूंढने में बिता दी, परंतु तीनों का कहीं भी कोई सुराग हाथ नहीं लगा.

30 जनवरी की सुबह 9 बजे तिलक नगर थाने के एसएचओ के. विश्वनाथ अपने औफिस में 2 पार्टियों के बीच उन का आपसी मसला सुन रहे थे,  तभी अक्षय वहां अपने चाचा वसंत के साथ आ धमका और अपने परिजनों को ढूंढने के लिए पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने लगा.

एसएचओ के.  विश्वनाथ ने किसी तरह अक्षय को शांत किया और समझाया कि पुलिस टीम अपने मुखबिरों के साथ उस के परिजनों को ढूंढने में दिनरात जुटी हुई है.

रिंगटोन ने खोला राज

के. विश्वनाथ ने दोनों पार्टियों को जब समझाया तो दोनों पार्टियां उन की बात मान कर अपनीअपनी शिकायतें वापस लेने के लिए सहमत हो गईं.

इसी बीच कांस्टेबल मुरगन के. विश्वनाथ के पास तेजी से आया और उस ने चुपके से उन के कान में कहा, ”सर, एक बहुत बड़ा सुराग अभीअभी हमारे हाथ में लगा है. 3 लोगों के लापता होने के केस का अहम सबूत हमारे हाथ में आ चुका है.’’

”मुरगन, अब पहेलियां मत बुझाओ, जल्दी से बताओ आखिर बात क्या है?’’ विश्वनाथ ने अधीर होते हुए कहा.

”सर, ये जो अक्षय है न जिस की बहन का नाम अमृता था, हम लोग तीनों नंबरों से बराबर संपर्क पर थे, पर उन तीनों के नंबर बंद आ रहे थे. अभीअभी मैं ने उस की बहन के मोबाइल पर जब फोन किया तो वह मुझे एक्टिव मिला. जब मैं ने उस नंबर पर फोन किया तो अक्षय की जेब में रखा मोबाइल बजने लगा.

”मैं ने फोन तुरंत काटा और फिर अपने दूसरे साथी कांस्टेबल को दोबारा उसी नंबर पर फोन करने के लिए कहा और मैं दूर से अक्षय की निगरानी करने लगा.जैसे ही साथी कांस्टेबल ने रिंग किया तो उस ने मुझे इशारे से बता दिया. अक्षय को देखने लगा तो उस ने तुरंत फोन उठाया और फोन को काट दिया. बस सर, इतना ही कहना था.’’ मुरुगन ने कहा.

यह सुन कर के. विश्वनाथ खुशी से अपनी कुरसी से खड़े हो गए.  सब से पहले उन्होंने कांस्टेबल मुरुगन का धन्यवाद कह उस की पीठ थपथपाई.

दोनों पार्टियों का सेटलमेंट करा कर उन्होंने उन्हें थाने से विदा किया और फिर सीधे अक्षय के पास जा कर उन्होंने उसे गिरफ्तार कर लिया और इस की खबर अपने उच्च अधिकारियों को दे दी. सीनियर अधिकारी भी यह सब सुन कर हैरान रह गए थे. उन्होंने के.  विश्वनाथ को विस्तृत पूछताछ की खुली छूट दे दी, ताकि वह अपनी जांच बेखौफ जारी कर सकें.

अब तक तिलक नगर थाने में डीसीपी (साउथ ईस्ट बेंगलुरु) मोहम्मद सुजीत एम. एस. भी पहुंच चुकी थीं. अब अक्षय को अपने पास बिठा कर पुलिस ने जब विस्तृत पूछताछ की तो पहले वह तरहतरह से अपने बयान बदलबदल कर पुलिस को गुमराह करता रहा.

उस ने पहले फिल्म ‘दृश्यम’ की तर्ज पर पुलिस को गुमराह किया. अपनी छोटी बहन के गर्भवती होने की झूठी कहानी रची, ताकि हत्या को औनर किलिंग का रूप दिया जा सके. लेकिन पुलिस अब उस की झूठी कहानियों में फंसने वाली नहीं थी, इसलिए पुलिस ने उस के साथ सख्त रवैया अपनाया.जिस के कारण अक्षय अधिक समय तक पुलिस के सामने न टिक सका और उस ने प्रौपर्टी के लालच में तीनों हत्याओं को अंजाम देना कुबूल कर लिया.

रिश्तों का किया खून

आजकल हमें अखबारों और टीवी के माध्यम से रोजाना ऐसी खबरें देखने और सुनने को मिलती हैं, जिस से हमारे रोंगटे खड़े हो जाते हैं. कोट्टूर का ट्रिपल मर्डर केस भी ऐसा ही हैरान करने वाला मामला है, जिस ने खून के रिश्तों की डोर को झकझोर कर रख दिया.

विजयनगर (कर्नाटक) के कोट्टूर ट्रिपल मर्डर केस का मुख्य आरोपी 25 वर्षीय अक्षय ग्रैजुएट था. अक्षय के परिवार में पापा भीमराज (50 वर्ष), मम्मी जयलक्ष्मी उर्फ जयम्मा (45 वर्ष)  और एक छोटी बहन अमृता (18 वर्ष) थे.

अक्षय का परिवार पहले चित्रदुर्ग में बटन की दुकान चलाता था और बाद में उन्होंने कोट्टूर में टायर रिट्रेडिंग का काम करना शुरू किया था. पुलिस जांच में यह सामने आया कि अक्षय शराब का आदी था,  वह स्वभाव से काफी लापरवाह व गुस्सैल था, जिस के कारण उस के मम्मीपापा उसे पैसे देने से कतराते थे.

अक्षय अपना नया व्यवसाय करने के लिए अपने पेरेंट्स से रोज पैसों की मांग करने लगा था. उसे यह पता चल गया था कि हाल ही में उस के पापा ने डेढ़ करोड़ रुपए का एक फ्लैट बेचा है.

इस के अलावा उस के पापा ने उस की छोटी बहन अमृता के नाम पर 50 लाख रुपए की एफडी भी करवा रखी थी. इस के अलावा पापा के पास 1.2 करोड़ की एफडी और मम्मी के पास भी करोड़ों रुपए के गहने थे.

अक्षय के बारबार पैसे मांगने पर भी जब उस के पेरेंट्स ने उसे पैसे देने से इंकार कर दिया तो उस ने यह बत अपने चाचा वसंत कुमार को बताई, जिस के साथ वह अकसर शराब की पार्टियां आयोजित करता रहता था. फिर वसंत कुमार भी पक्का शराबी था, उस के घर वाले भी इसे पैसे देने से बचते रहते थे.

वह भी शराब पीने के लिए पैसों की कमी से काफी परेशान था. इसलिए चाचा वसंत ने अक्षय को अपने पेरेंट्स और बहन को मारने का प्लान बताया.

अक्षय ने मम्मीपापा और बहन के मर्डर का खुलासा होने पर फिल्म ‘दृश्यम’ की तर्ज पर पुलिस को काफी समय तक गुमराह करने की कोशिश की. उस ने थाने जा कर खुद तीनों की गुमशुदगी की सूचना दर्ज कराई और अपनी छोटी बहन के गर्भवती होने की झूठी कहानी रची, ताकि इस वीभत्स मर्डर को औनर किलिंग का रूप दिया जा सके.

पुलिस को किया गुमराह

अक्षय न तो एक अच्छा बेटा बन सका और न ही एक अच्छा भाई. विजयनगर जिले के कोट्टूर कस्बे से आई यह लोमहर्षक घटना आज हर उस इंसान को झकझोर रही है, जो परिवार, रिश्तों और भरोसे की अहमियत को समझता है.

कोट्टूर यही स्थान है,  जहां पर एक साधारण सा किराए का मकान अचानक पूरे देश में एक चर्चा का विषय बन गया. जिस घर में कभी रोजमर्रा की जिंदगी साधारण व शांत रूप से चला करती थी, वहां एक ही रात में खामोशी, डर और सदमे ने अपना घर बना लिया है.

इस कलयुगी भाई ने पुलिस को यह कहते हुए गुमराह किया कि 4  महीने पहले जब उस ने अपनी छोटी बहन अमृता के मोबाइल को चैक किया तो उसे पता चला था कि उस की बहन पीयूसी में पढ़ रहे एक युवक के लगातार संपर्क में थी.

जब उस ने उस युवक को फोन किया तो उसे पूरी तरह से पता चल गया कि दोनों के बीच काफी लंबे समय से प्रेम संबंध थे. इस से गुस्सा हो कर अक्षय ने अपनी बहन को काफी मारापीटा भी था.

लेकिन उस की बहन ने तब उस से यह कहा था कि मैं उस युवक से प्यार नहीं करती हूं, लेकिन जब 26 जनवरी, 2026  को अक्षय को पता चला कि उस की बहन गर्भवती है तो वह फिर अपने होशोहवास में नहीं रह गया था.

अक्षय ने पुलिस को बताया कि उस ने अपनी बहन को गर्भपात कराने के लिए कहा था, लेकिन उस के पेरेंट्स उस की बहन के बचाव के लिए सामने आ गए थे. इसी बात से गुस्से में उस ने अपनी बहन के साथसाथ उन की भी हत्या कर दी थी.

लेकिन जब उस की बहन के शव का पोस्टमार्टम हुआ तो सारी सच्चाई सामने आ गई थी कि उस की बहन तो गर्भवती थी ही नहीं. उस के बाद पुलिस ने अक्षय को गिरफ्तार कर लिया. साथ ही उस के चाचा वसंत कुमार को भी गिरफ्तार कर लिया था.

जबकि इस की हकीकत कुछ और ही थी. 26 जनवरी, 2026  को अक्षय को उस के चाचा वसंत कुमार ने शराब की ग्रांड पार्टी दी थी. पार्टी के बाद चाचा ने उसे प्लान बताया तो अक्षय ने कहा कि चाचा अभी तो मैं होशोहवास में ही नहीं हूं. आज मैं इस घटना को अंजाम बिलकुल भी नहीं दे सकता. कल शाम 27 जनवरी को आप के प्लान पर अमल करूंगा, लेकिन मेरे पास अब तो एक धेला तक नहीं है.

ऐसे प्लान को अंजाम देने के लिए थोड़ीबहुत शराब तो पीनी ही पड़ेगी न. इस से ही जोश आ पाएगा. आप का प्लान एकदम सटीक है,  इसलिए आप मुझे यदि कुछ पैसे दे देते तो मैं थोड़ी पी कर साहस के साथ इस वारदात को बखूबी अंजाम दे सकता हूं.

तब उस के चाचा वसंत ने अक्षय को 5 हजार रुपए देते हुए कहा, ”देख भतीजे, काम बहुत जोखिम का है. इसे शांत मन से ही अंजाम दिया जा सकता है,  इसलिए कम से कम पीना और बाकी काम होने के बाद ये रुपए तेरे कुछ काम आ जाएंगे. यार अक्षय, तेरे पास भी तो कुछ न कुछ होगा ही. देख, यदि तू इस काम को ठीक तरह से अंजाम दे देगा तो मैं हर जगह तेरे साथ ही खड़ा मिलूंगा.’’

27 जनवरी, 2026 को अक्षय उसी बार में गया, वहां पर उस ने 3 पैग पिए और सीधे अपने घर पहुंच गया. जब वह अपने घर पर पहुंचा तो उस समय शाम के साढ़े 7 बज रहे थे. उस ने देखा,  उस समय उस की मम्मी जयलक्ष्मी घर पर थी और रात के खाने की तैयारी कर रही थी. उस ने पूछा, ”मम्मी, आज तुम घर में अकेली हो, बाकी लोग कहां पर हैं?’’

”बेटा, तेरे पापा दुकान पर गए हैं और तेरी बहन एक सहेली के घर पर फंक्शन में गई है.  आज तू घर पर जल्दी आ गया, तेरी नई नौकरी का क्या हुआ बेटा?’’ जयलक्ष्मी ने कहा.

”मम्मी, आज एक अच्छी नौकरी का इंटरव्यू देने गया था. लगता है मेरी नौकरी पक्की है. इंटरव्यू भी अच्छा हुआ है,’’ अक्षय बोला.

जयलक्ष्मी सब्जी छौंकने की तैयारी कर ही रही थी कि तभी पीछे से अक्षय ने कुल्हाड़ी से एक वार सीधे उस की गरदन पर कर दिया,  जिस के कारण उस की मम्मी फर्श पर गिर गई और कुछ समय बाद उस ने दम तोड़ दिया.

अक्षय ने मृत मम्मी को एक नजर देखा और बाथरूम में नहाने चला गया.  नहाने के बाद उस ने अपनी मम्मी के खून से सने कपड़ों पर आग लगा दी और मम्मी के शव को अपने कमरे में अपने बैड के नीचे छिपा दिया.

उस के बाद उस ने अपनी छोटी बहन 8 वर्षीय अमृता को फोन किया,  जो उस समय अपनी सहेली के घर पर थी.

”हां भैया, बताइए क्या बात है?’’ अमृता ने फोन उठाते हुए कहा, ”अमृता,  आज मैं तुम्हारे लिए एक सरप्राइज गिफ्ट लाया हूं. जल्दी घर आ जाओ,’’ अक्षय ने कहा.

”भैया, यह तो बताइए किस खुशी में गिफ्ट दे रहे हो आप?’’ अमृता ने चहकते हुए पूछा.

”आज तेरे भैया की नौकरी पक्की हो गई है, काफी अच्छी सैलरी वाली नौकरी मिली है मुझे. मुझे एडवांस भी मिला है, इसलिए तुम्हारे लिए एक प्यारा सा गिफ्ट लाया हूं.  बस तुम यह बात किसी को मत बताना और सीधे घर आ जाओ.’’ अक्षय ने फोन रखते हुए कहा.

सरप्राइज में दी मौत

उधर अमृता को जैसे ही यह पता चला कि उस के भाई की एक अच्छी नौकरी लग गई है और वह उस के लिए सरप्राइज गिफ्ट लाया है तो वह सहेली से कोई बहाना बना कर वहां से सीधे घर चली आई.

इधर अमृता जैसे ही अपने घर पहुंची, वहां पर तो काल जैसे उस का ही इंतजार कर रहा था. अमृता ने जैसे ही दरवाजा खोला,  दरवाजे के पीछे अक्षय ने तुरंत उस का गला पकड़ लिया और फिर गुस्से से गला दबाता चला गया.

जब अमृता मृत हो कर फर्श पर गिर गई तो उस ने अपनी बहन के शव को अपने कमरे में मम्मी के शव के पास लिटा दिया. उस के बाद वह दोबारा नहाया और अपने वही कपड़े पहन लिए.

रात को 9  बजे अक्षय के पापा भीमराज रोज की तरह घर आए और अपने ड्राइंगरूम में रोज की तरह टीवी खोल कर खबरें देखने लगे. तभी पीछे से अक्षय ने अपने पापा के सिर पर कुल्हाड़ी से वार कर दिया, जिस के कारण उन की भी मौत हो गई.

अक्षय ने अपने पापा की लाश को भी मम्मी और बहन के शव के पास डाल दिया और तीसरी बार फिर वह नहाने बाथरूम में चला गया.

उस के बाद अपने किराए के घर में ही अक्षय ने लगभग 5  फीट लंबा और ढाई फीट गहरा गड्ढा खोदा और अपनी मम्मीपापा और बहन के शवों को दफनाने की कोशिश की.

जब तीनों शव गड्ढे में नहीं समाए तो अक्षय ने कुल्हाड़ी से अपने पापा के दोनों पैरों को काट दिया. उस के बाद उस ने तीनों शवों को गड्ढे के भीतर दफना दिया.  फिर उस ने गड्ढे के ऊपर सीमेंट लगा कर उस के ऊपर टाइलें लगा दीं.

उस के बाद अक्षय एक तख्त अपने मम्मीपापा के कमरे से उठा लाया और उस ने उस गड्ïढे के ऊपर  तख्त बिछा दिया और उस पर और बिस्तर बिछा कर आराम से सो कर खर्राटे मारने लगा.  तीनों की निर्मम हत्या करने के बाद अक्षय 28 जनवरी, 2026 को अपनी बहन और मम्मीपापा के मोबाइल ले कर बस से बेंगलुरु आया और अपना मोबाइल अपने कोट्टूर के घर पर ही छोड़ दिया, ताकि वह पुलिस की नजरों में न आ सके.

उस के बाद वह बेंगलुरु के जयदेव अस्पताल के पास आया और उस ने अस्पताल का एक फोटो अपनी बहन अमृता के मोबाइल से खींचा और उस फोटो को वाट्सऐप ये अपने मोबाइल नंबर पर सेंड कर दिया.

इसी दौरान वह अपने चाचा वसंत से मिला और उन्हें तीनों हत्याओं के बारे में विस्तार से बता दिया.

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इसी घर में अक्षय ने अपने मम्मीपापा और बहिन का क़त्ल किया और लाशें फर्श खोद कर दफ़न कर दे

शव को दफनाने और मम्मीपापा व बहन के लापता होने के नाटक का आइडिया उस के चाचा वसंत कुमार ने ही अक्षय को दिया था, इसीलिए अक्षय ने 29 जनवरी, 2026 को बेंगलुरु के तिलक नगर थाने में जा कर अपने परिजनों की गुमशुदगी की सूचना दर्ज कराई.

लेकिन बाद में पता चला कि घर वालों के लापता होने का राज अक्षय के पेट में छिपा है. पुलिस ने उस से बात की तो उस ने तीनों हत्याओं का राज उगल दिया.  उस से पूछताछ के बाद पुलिस ने अक्षय और वसंत कुमार के खिलाफ हत्या और लाशें छिपाने का केस दर्ज कर लिया गया.

उस के बाद एसएचओ के. विश्वनाथ और जिला विजयनगर एसपी एस. जाह्नïवी, डीएसपी (कुडलीगी) मल्लेश डोड्ïडमनी ने पुलिस टीम और मजदूरों के साथ घटनास्थल का दौरा कर तीनों क्षतविक्षत शवों को गड्ढे से बाहर निकलवाया.

इस दुखद घटना ने उस समय न केवल इंसानों बल्कि बेजुबान जानवर के दिल को भी झकझोर दिया था.

भीमराज परिवार का पालतू कुत्ता अपने मालिक को खोने के बाद से लगातार कुछ दिनों से रो रहा था. यहां तक कि जब तीनों की लाशों को गड्ढे से बाहर निकाला गया तो वह तीनों लाशों के पास बारबार जा कर रोता रहा, जिसे देख कर घटनास्थल पर मौजूद सभी लोगों की आंखों में आंसू छलक आए थे.

अपनों के खून के प्यासे 

आज हमारे समाज में एक विशेष बात देखने को मिल रही है कि बेरहमी से अपनों की जान अपने ही क्यों लेने लगे हैं. ऐसे कई केस सामने आए हैं,  जिस से सवाल उठने लगा है कि आखिर क्यों लोगों में इस प्रकार ही खूंखार प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है.

वैसे तो इस तरह की घटनाएं पूरे देश में बढ़ रही हैं,  लेकिन इन का सब से ज्यादा असर मैट्रोपौलिटन शहरों में देखने को मिल रहा है.

इन सब का प्रमुख कारण यह है कि आज लोग वास्तविकता को छोड़ कर तकनीक पर आश्रित होते जा रहे हैं, जिस के कारण लोगों की मनोदशा में परिवर्तन हो रहा है.

लोग वर्चुअल दुनिया को ही हकीकत मानने की गलती करने लगे हैं. आजकल यूट्यूब और इंटरनेट पर भी भड़काऊ और लोगों को उग्र बनाने के कंटेंट उपलब्ध हैं, जहां लोगों की आसानी से पहुंच हो जाती है.

आजकल हालात ऐसे हो चुके हैं कि एक क्लिक करने पर ही लोग बम बनाने,  हत्या या आत्महत्या के टिप्स आसानी से सर्च कर लेते हैं. ताज्जुब की बात तो यह है कि ये सब कंटेंट किसी एक्सपर्ट की तरफ से इंटरनेट पर उपलब्ध कराया जाने लगा है.

अपने ही परिवार के सदस्यों की ऐसी हत्याएं अचानक से नहीं होती हैं. सालों से मन में दबी हुई कड़वाहट, तिरस्कार या घरेलू विवाद जब अपनी सीमा पार कर जाते हैं तो व्यक्ति अपने आवेग पर नियंत्रण खो बैठता है और सब से करीबी रिश्ते पर ही वार कर बैठता है.

ऐसे लोगों में सहानुभूति की कमी होती है. वे अपनों को इंसान नहीं,  बल्कि अपनी इच्छाओं के रास्ते का कांटा समझ बैठते हैं. जायदाद, बीमा की राशि या किसी अवैध संबंध को रास्ते से हटाने के लिए अपनों का कत्ल करना ‘कोल्ड ब्लडेड’ मानसिकता को दर्शाता है, यहां पर अपराधी के लिए भावनाओं से ऊपर व्यक्तिगत लाभ होता है. कुछ समाजों में झूठी शान को बघारने के लिए परिवार की ‘इज्जत’ को व्यक्ति के जीवन से महत्त्वपूर्ण माना जाता है.

यदि कोई सदस्य सामाजिक मानदंडों के खिलाफ जाता है तो अपने परिवार के ही लोग अपनी झूठी इज्जत बचाने के नाम पर हत्यारे बन जाते हैं. इस के अतिरिक्त नशे की लत भी इस का एक प्रमुख कारण है, क्योंकि ड्रग्स या शराब के प्रभाव में व्यक्ति अपने सोचनेसमझने की क्षमता खो बैठता है.

इन सब से बचने का यहां एक उपाय शेष बचता है कि लोगों को अपनी दैनिक दिनचर्या पर आज बदलाव लाने की जरूरत है. लोगों को अपना दिल और दिमाग शांत रखने के लिए ध्यान और योग की जरूरत है. इस से स्वास्थ्य लाभ के साथसाथ मानसिक तनाव भी कम होगा.

आज इंसान को वापस अपनी किताब की दुनिया में आने की विशेष आवश्यकता है. आज वर्चुअल दुनिया से बाहर निकल कर सामाजिक दायरे में शामिल होना होगा. मोबाइल, टीवी और लैपटाप से दूरी बनानी होगी, क्योंकि लगातार इन से निकलने वाली किरणें हमारे दिमाग पर सीधा असर डालती हैं और इंसान मानसिक रूप से कमजोर हो जाता है.

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