Toxic Love Murder . दिव्या को जब पता चला कि उस का प्रेमी रविंद्र शादीशुदा है तो वह उस से किनारा करने लगी. लेकिन रविंद्र की तो जिद थी कि वह दिव्या से ही शादी करेगा. उस की इस जिद ने उस की ही नहीं, दिव्या की भी जान ले ली…

मेरठ प्रदेश के जनपद मेरठ के गढ़ मुक्तेश्वर रोड पर स्थित है एलएलआरएम मैडिकल कालेज एवं अस्पताल. इस के परिसर में बैंक, पोस्टऔफिस, थाना, मैडिकल की पढ़ाई करने वाले छात्रछात्राओं के हौस्टल के अलावा चिकित्सकों व कर्मचारियों के आवास भी हैं. अस्पताल में भी रोजाना सैंकड़ों मरीज इलाज के लिए आते हैं.

16 अप्रैल, 2016 की दोपहर को परिसर में अचानक सनसनी फैल गई. एफ ब्लौक के क्वार्टर नंबर-216 के सामने लोगों की भारी भीड़ जुट गई. सनसनीखेज वारदात की सूचना पा कर थाना मैडिकल के थानाप्रभारी रविंद्र वशिष्ठ भी पुलिस बल के साथ वहां आ पहुंचे थे.  पुलिस जब उस क्वार्टर में दाखिल हुई तो अंदर का नजारा दिल दहला देने वाला था. एक युवक व युवती एकदूसरे के नजदीक फर्श पर पड़े थे. उन के सिर से खून बह कर फर्श पर फैल रहा था. लड़की की मौत हो चुकी थी, जबकि युवक की सांसें चल रही थीं. युवक के हाथ में 315 बोर का एक तमंचा था.

खाली खोखा उस में फंसा हुआ था, जबकि एक खोखा नजदीक पड़ा था. युवक को बचाया जा सके, इस के लिए उसे आननफानन में मैडिकल के इमरजेंसी वार्ड में भरती करा दिया गया. थानाप्रभारी ने इस घटना की सूचना अपने उच्चाधिकारियों को दे दी थी. सूचना पा कर एसपी (सिटी) ओमप्रकाश सिंह व सीओ बी.एस. वीर कुमार भी मौकाएवारदात पर आ गए थे. इस वारदात से हर कोई सकते में था. पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया. गोली मृतका के माथे व बाईं कनपटी पर लगी थी, जो सिर के आरपार निकल गई थी.

फोरैंसिक एक्सपर्ट की टीम को भी मौके पर बुलवा लिया गया था. टीम ने वहां से जरूरी साक्ष्य एकत्र किए. मैडिकल परिसर में इस तरह से दिल दहला देने वाला यह पहला मामला था. लिहाजा लोगों में दहशत थी. पता चला कि मृतका का नाम दिव्या था, जबकि युवक की पहचान रविंद्र गौतम के रूप में हुई. पुलिस के सामने सब से बड़ा सवाल यह था कि इस घटना के पीछे आखिर वजह क्या थी? इस बारे में लोगों से पूछताछ की गई तो पुलिस अधिकारियों को पता चला कि पूरा मामला प्रेमप्रसंग का था. लेकिन यहीं पर एक सवाल यह भी था कि आखिर ऐसे कौन से हालात थे, जिस की वजह से रविंद्र ने दिव्या को मार कर खुदकुशी करने की कोशिश की?

जिस समय घटना घटी थी, दिव्या के घर वाले कहीं गए हुए थे. खबर सुन कर जब वे घर आए तो बेटी की लहूलुहान लाश देख कर दहाड़े मार कर रोने लगे. उधर अस्पताल में भरती रविंद्र की हालत गंभीर बनी हुई थी.  उस के घर वालों को भी बुलवा लिया गया था. गोली उस के भी सिर के पार निकल गई थी. मैडिकल सुपरिंटैंडेंट डा. सुभाष सिंह और सीएमओ डा. अजीत सिंह की देखरेख में डाक्टर उसे बचाने की हर संभव कोशिश कर रहे थे. उस की जेब से भी पुलिस को एक जीवित कारतूस मिला था.

पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त तमंचे व कारतूस को अपने कब्जे में ले लिया था. इस के बाद जरूरी काररवाई पूरी कर के लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. पुलिस ने रविंद्र के खिलाफ हत्या और आत्महत्या की कोशिश करने का मामला दर्ज कर लिया था.

पुलिस ने मृतका व घायल युवक के घर वालों से घटना के बारे में विस्तार से पूछताछ की तो एक ऐसे जुनूनी प्रेमी की कहानी निकल कर सामने आई, जो अपने ढंग से मनमानी कर के न सिर्फ दिव्या को अपना बनाना चाहता था, बल्कि जिंदगी को अपने हिसाब से जीना चाहता था.

मृतका दिव्या बैंक कर्मचारी सुरेंद्र गौतम की बेटी थी. सुरेंद्र के परिवार में पत्नी कुसुमलता के अलावा 4 बेटियां और एक बेटा था. दिव्या दूसरे नंबर की बेटी थी. करीब 3 साल पहले सुरेंद्र की अकस्मात मृत्यु हो गई थी. कुसुमलता के पिता अतर सिंह मैडिकल कालेज में लाइब्रेरियन थे. चूंकि वह अकेले ही थे, इसलिए उन्होंने अपने नाम आवंटित हुए मैडिकल कालेज परिसर का क्वार्टर बेटी कुसुमलता को रहने के लिए दे दिया था, जबकि वह खुद मवाना से ड्यूटी करने आते थे.

कुसुमलता के परिवार की माली हालत बहुत अच्छी नहीं थी. बस किसी तरह जिंदगी बसर हो रही थी. पति की मिलने वाली पेंशन और पिता के सहयोग से वह अपना व बच्चों का खर्च उठा रही थीं. यदाकदा वह पोलियो जैसे सरकारी अभियान का हिस्सा बन कर कुछ रुपए कमा लेती थी. 19 साल की दिव्या इस साल 12वीं कक्षा में पढ़ रही थी. अपनी पढ़ाई के साथ वह कंप्यूटर की कोचिंग भी कर रही थी. जिस सेंटर पर वह कंप्यूटर सीखने जाती थी, वह मैडिकल के नजदीक ही जागृति विहार में था. यहीं से उस की बड़ी बहन ने भी कंप्यूटर का कोर्स किया था.

यह कंप्यूटर सेंटर गजेंद्र का था. यहीं पर दिव्या की मुलाकात रविंद्र से हुई. रविंद्र मेरठ के ही मवाना कस्बे के पास स्थित नासरपुर गांव का रहने वाला था. वह इस कंप्यूटर सेंटर पर कंप्यूटर सीखने के अलावा प्रशासनिक काम भी देखता था. दरअसल वह सेंटर मालिक गजेंद्र का सगा मौसेरा भाई था. 22 वर्षीय रविंद्र की सोहबत अच्छी नहीं थी. वह अपनी मनमर्जी से जिंदगी जीने वाला युवक था. उस की इस तरह की प्रवृत्ति ने घर वालों को भी परेशान कर रखा था. जिम्मेदारियां आने से शायद उस की आदतें सुधर जाएं, यही सोच कर घर वालों ने उस का विवाह बुलंदशहर जिले की एक लड़की से कर दिया था.

कहते हैं, समय रहते इंसान अपनी गलत आदतें नहीं बदलता तो उस के बुरे नतीजे सामने आते हैं. रविंद्र के साथ भी ऐसा ही हुआ. 27 अप्रैल, 2014 को रविंद्र के ही गांव में मोहित नाम के एक युवक की हत्या हो गई. इस हत्या में रविंद्र का भी नाम आ गया. पुलिस से बचने के लिए वह अपने घर से फरार हो गया. कुछ महीने बाद जब मामला थोड़ा शांत हुआ तो वह गांव में वापस आ कर रहने लगा. इस के बाद वह मौसेरे भाई गजेंद्र के यहां कोचिंग सेंटर में कंप्यूटर सीखने के साथसाथ प्रशासनिक काम भी देखने लगा.

दिव्या भले ही गरीब परिवार से थी, लेकिन खूबसूरती के मामले में अव्वल थी. रविंद्र ने जब उसे देखा तो पहली ही नजर में उसे दिल दे बैठा और उस के इर्दगिर्द मंडराने लगा. दिव्या उम्र के जिस मुकाम से गुजर रही थी, वह बहुत नाजुक और बहकने वाली होती है. रविंद्र का कनखियों से उसे देख कर मुसकराना और मीठे अंदाज में बात करना दिव्या को भी लुभा गया. दिव्या को अहसास हो गया कि रविंद्र उसे चाहता है. रविंद्र हालांकि शादीशुदा था, इस के बावजूद वह अकसर दिव्या के खयालों में डूबा रहने लगा. वह उस से अपने दिल की बात कहने को बेचैन रहने लगा.

एक दिन दिव्या जैसे ही कोचिंग सेंटर से घर जाने को हुई, मौका पा कर उस ने उस के सामने अपना हालएदिल कहने के लिए कहा, दिव्या एक बात बोलूं? हां. दिव्या बोली. जब से मैं ने तुम्हें देखा है, तब से मेरा चैन जैसे कहीं खो गया है. रविंद्र ने कहा.  उस की बात सुन कर दिव्या के चेहरे पर शर्म की लाली दौड़ गई और दिल की धड़कनें बढ़ गईं. दिव्या मैं सच कह रहा हूं. मैं तुम से प्यार करने लगा हूं. रविंद्र बोला.

उस की बात सुन कर दिव्या मुसकरा दी और बिना कोई जवाब दिए चली गई. रविंद्र ने उस से जो कहा था, उसे वह काफी पहले महसूस कर चुकी थी. शर्म के चलते उस ने उस समय उसे कोई जवाब नहीं दिया था. वास्तव में वह भी उस के खयालों में डूबने लगी थी. रविंद्र के इजहार के बाद उस रात दिव्या को ठीक से नींद नहीं आई. वह करवटें बदलती रही.

अगले दिन वह कोचिंग सेंटर पहुंची तो रविंद्र उसे इंतजार करता मिला. उस की नजरें उस के चेहरे पर थीं. जैसे ही दिव्या की नजरें उस से मिलीं, वह मुसकरा दी. इस से रविंद्र मन ही मन खुश हो गया. उस दिन के बाद दोनों के बीच प्रेमभरी बातों का गहरा सिलसिला चल निकला. दोनों एकदूसरे को देखने के लिए बेकरार रहने लगे. प्रेम के पंछियों की अपनी अलग उड़ान होती है. वे सुकून के उन लम्हों की तलाश करते हैं, जहां सिर्फ वही दोनों हों. अब वे कोचिंग के  बाहर भी साथसाथ घूमने लगे थे.

रविंद्र कभी उसे मूवी दिखाने ले जाता तो कभी पार्क में बैठ कर दोनों मन की बातें करते. दिव्या प्यार के नए अहसास से बहुत खुश थी. जिंदगी दोनों के लिए जैसे खुशियों का गुलिस्ता हो गई थी. इन्हीं पलों में उन्होंने साथ जीनेमरने की कसमें भी खाईं. इश्क छिपाए नहीं छिपता. दिव्या की बड़ी बहन दीपा अब भी कभीकभी कोचिंग सेंटर पहुंच जाती थी. वहां उसे पता चल गया कि उस की बहन का रविंद्र के साथ चक्कर चल रहा है. उस ने इस बारे में दिव्या से बात की तो दिव्या ने उसे अपने हिसाब से समझा दिया.

उधर रविंद्र की पत्नी को जब पता चला कि उस का पति किसी लड़की से इश्क लड़ा रहा है तो उस ने घर में तूफान खड़ा कर दिया. रविंद्र दबंग था, उस ने पत्नी को धमका दिया. दिव्या के प्यार में वह इस कदर डूब चुका था कि वह उसे अपनी जीवनसंगिनी बनाना चाहता था. पत्नी के साथ आए दिन कलह होने लगी तो बजाए अपनी आदत सुधारने के रविंद्र पत्नी को मायके छोड़ आया. इस के बाद उस ने उस की तरफ पलट कर नहीं देखा. दिव्या और रविंद्र का इश्क परवान चढ़ रहा था. एक साल कब बीत गया, इस का पता ही नहीं चला.

दोनों के रिश्ते उन के घर वालों से छिपे नहीं थे. रविंद्र दिव्या के घर भी जाने लगा था. दिव्या ने भी मन ही मन सोच लिया था कि वह भी रविंद्र से ही विवाह करेगी. एक दिन रविंद्र ने दिव्या से अपने मन की बात बताते हुए कहा, दिव्या, मेरी जिंदगी अब तुम्हारे बिना अधूरी है. मैं जल्द से जल्द तुम से शादी कर के हमेशा के लिए तुम्हें अपनी बनाना चाहता हूं. चाहती तो मैं भी यही हूं, लेकिन… वह बोली. लेकिन क्या?  उस ने चौंक कर पूछा. देखो रविंद्र, शादी के लिए अभी मेरी बड़ी बहन भी है. उन की शादी हो जाने के बाद ही यह हो सकता है.

रविंद्र को दिव्या की यह बात अच्छी नहीं लगी. वह तो यही सोच रहा था कि वह उस की बात सुन कर तुरंत शादी के लिए तैयार हो जाएगी. उस दिन बात आई गई हो गई. उस ने सोचा कि वह अपनी बातों से दिव्या को मना लेगा. इस के बाद उस की जब भी दिव्या से मुलाकात होती, वह अकसर इस मुद्दे पर उस से चर्चा करता. सोतेजागते उठतेबैठते वह उसी के बारे में सोचता रहता. रविंद्र जिद्दी इंसान था. वह दिव्या से शादी करने की जिद कर बैठा. वह दिव्या से घर से भाग चलने के लिए कहता. उस की इन आदतों से दिव्या बोझिल होने लगी. इस बीच दिव्या को पता चल गया कि रविंद्र शादीशुदा है और उस ने अपनी पत्नी को छोड़ दिया है.

यह जानकारी मिलने के बाद दिव्या को दुख हुआ कि रविंद्र ने उस से यह बात क्यों छिपाई? उस ने इस बारे में रविंद्र से कहा तो कुछ नहीं, पर उस से किनारा करने लगी. रविंद्र दिव्या की बेरुखी को समझ नहीं पाया. वह तो दिव्या पर अपना पूरा हक समझने लगा था. रविंद्र को यही लगता था कि दिव्या उस के लिए घरपरिवार सब छोड़ कर उस के इशारे पर वह सब करेगी, जो वह चाहता है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. जब किसी इंसान की अपेक्षाओं को चोट पहुंचती है तो गलतफहमियां भी जन्म ले लेती हैं और इंसान बातों के मतलब अपने हिसाब से लगाने लगता है.

रविंद्र के साथ भी ऐसा ही हुआ. उसे लगा कि दिव्या उस से किनारा कर के उसे धोखा दे रही है, उस से उस का दिल भर गया है और वह किसी और से प्यार करने लगी है. जबकि वह उस के लिए अपनी पत्नी को छोड़ चुका था. यह बात उसे बहुत कचोटती थी. रविंद्र दिव्या पर जितना दबाव बनाने की कोशिश करता, वह उतना ही दूर होती जा रही थी.

जबकि रविंद्र के सिर पर उसे पाने का जुनून सवार था. उस की इन्हीं सब बातों से परेशान हो कर दिव्या ने कोचिंग सेंटर जाना बंद कर दिया. इस से रविंद्र के दिमाग में गलतफहमी और बढ़ गई. उस के लिए सोचने, समझने और मकसद के रूप में बस दिव्या ही थी. दिव्या अब उस से मिलने के बजाय फोन पर ही बातें कर लेती थी. रविंद्र शादी की रट लगाता तो दिव्या उसे समझाने की कोशिश करती.

रविंद्र की इसी जिद पर एक दिन दिव्या ने कहा, रविंद्र, तुम बात को समझने की कोशिश क्यों नहीं करते? मेरे सामने मेरा परिवार भी है. मैं ऐसा कोई भी काम नहीं करना चाहती, जो परिवार को बदनाम करे. मैं तो तुम्हारे लिए बहुत कुछ खो चुका हूं दिव्या.  रविंद्र ने कहा. तुम्हारी बात अलग है रविंद्र, मैं एक लड़की हूं. इसलिए मैं किसी को खोना नहीं चाहती. बेहतर यही है कि तुम समय का इंतजार करो.  दिव्या ने समझाया. मैं इंतजार नहीं, बल्कि अपनी ख्वाहिश पूरी करना चाहता हूं. तुम नहीं मानोगी तो मुझे दूसरे तरीके भी आते हैं. रविंद्र सीधे धमकी पर उतर आया.

दिव्या के दिल को उस की इस धमकी से गहरी चोट पहुंची. इस के बाद तो उस ने मोबाइल पर भी दूरियां बनानी शुरू कर दीं. रविंद्र को लगने लगा कि दिव्या उसे धोखा दे रही है. अपने दोस्तों से उस ने कहना शुरू कर दिया कि जिस के लिए वह बर्बाद हो गया, वही उस की बात नहीं मान रही. अगर उस की ख्वाहिश पूरी नहीं हुई तो एक दिन वह उसे मार कर खुद को भी खत्म कर लेगा.

रविंद्र बुरी तरह परेशान था. उस ने सोचा कि आखिरी बार वह दिव्या से बात करेगा. इस बार भी उस ने बात नहीं मानी तो वह उसे खत्म कर देगा. शादी के जुनून, गलतफहमी और बेवफाई के शक ने उसे विवेकशून्य कर दिया. रविंद्र ने इस बीच एक तमंचे का इंतजाम कर लिया था. 15 अप्रैल, 2016 की शाम उस ने दिव्या से मोबाइल पर बात कर के अपनी जिद दोहराई तो दिव्या नहीं मानी. उस रात रविंद्र को ठीक से नींद नहीं आ सकी.

अगली दोपहर मन ही मन खतरनाक फैसला ले कर रविंद्र अपने घर से निकला. तकरीबन एक बजे का वक्त था, जब वह दिव्या के घर पहुंचा. उस वक्त दिव्या घर में अकेली थी. उस की मां व बहनें पड़ोस में गई हुई थीं, जबकि छोटा भाई स्कूल गया हुआ था. उस ने दिव्या से एक बार फिर अपनी बात दोहराई. काफी देर तक दोनों बातचीत करते रहे. अंत में दिव्या ने शादी करने से इंकार कर दिया तो गुस्से में आ कर रविंद्र ने तमंचा निकाला और दिव्या पर गोली चला दी. गोली लगते ही दिव्या नीचे गिर पड़ी. इस के बाद उस ने तमंचे में दूसरा कारतूस डाला और खुद को भी गोली मार ली. गोली की आवाज सुन कर आसपास के लोगों में अफरातफरी मच गई.

दिव्या की मांबहनें भी दौड़ कर आ पहुंचीं. दिल दहलाने वाला नजारा देख कर उन की चीखें निकल गईं. दिव्या की बहन ने अपने मामा दीपक को यह खबर दी तो उन्होंने पुलिस को सूचित कर दिया. रविंद्र की जिद व जुनून ने अपनी प्रेम कहानी को भयानक अंजाम पर पहुंचा दिया था.  अस्पताल में रविंद्र की हालत नाजुक बनी हुई थी, जिसे देखते हुए उसे रात में दिल्ली के एम्स के लिए रैफर कर दिया गया. लेकिन 19 अप्रैल को उस की भी मौत हो गई. प्यार हो जाना कोई गलत बात नहीं है, लेकिन रविंद्र की जिद्दी प्रवृत्ति ने दिव्या को असमय मौत दे कर उस के परिवार को तो गम दिया ही, साथ ही वह अपनी जिंदगी से भी हाथ धो बैठा. Toxic Love Murder

— कथा पुलिस सूत्रों पर

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