Delhi Contract Killing : मोहम्मद मोइन खान ईमानदार व्यक्ति थे और ईमानदारी से अपनी ड्यूटी निभा रहे थे. उन की यह ईमानदारी होटल व्यवसायी रमेश कक्कड़ के हितों के विरुद्ध जा रही थी. उस ने पहले तो मोइन खान को मोटी रकम दे कर खरीदने की कोशिश की, लेकिन जब वह इस में असफल रहा तो उस ने…

मोहम्मद मोइन खान नई दिल्ली नगर पालिका परिषद में एस्टेट औफिसर थे. वह दक्षिणपूर्वी दिल्ली के जामियानगर के जौहरी फार्म इलाके में पत्नी और 3 बेटियों के साथ रहते थे. घर से ड्यूटी के लिए वह अपनी स्विफ्ट डिजायर कार से निकलते थे. 16 मई, 2016 सोमवार को भी वह रोजाना की तरह ड्यूटी के लिए कार से ही निकले थे.

ड्यूटी करने के बाद शाम को करीब साढ़े 7 बजे जैसे ही वह अपने घर के बाहर कार खड़ी कर रहे थे, तभी एक युवक उन के नजदीक आया. मोइन खान उस युवक के इरादों से अनभिज्ञ थे. इस से पहले कि वह कार का दरवाजा खोल कर बाहर निकलते, उस युवक ने बड़ी फुरती से अपनी अंटी से तमंचा निकाल कर उस की बट से कार का शीशा तोड़ दिया और उन पर गोली चला दी.

गोली मार कर वह भाग गया. गोली मोइन खान के सीने पर लगी थी. वह सीट पर लुढ़क गए. गोली की आवाज सुन कर उधर से गुजर रहे लोग इकट्ठा हो गए. जब लोगों को पता चला कि एडवोकेट मोइन खान को गोली मार दी गई है तो किसी ने उन के घर खबर कर दी.

खबर सुनते ही उन की पत्नी निशात खान और तीनों बेटियां घर से बाहर आ गईं. पति को लहूलुहान देख कर निशात खान बिलखबिलख कर रोने लगीं. पिता की हालत देख कर बेटियां भी जोरजोर से रो रही थीं. गंभीर रूप से घायल हो चुके मोइन खान को लोग पास के होली फैमिली अस्पताल ले गए. अस्पताल ले जाने तक वह बेहोश हो चुके थे. डाक्टरों ने उन का चैकअप किया तो पता चला कि उन की मौत हो चुकी है.

एडवोकेट मोइन खान एक जानीमानी शख्सियत थे. जामियानगर इलाके में उन की बहुत अच्छी छवि थी, इसलिए उन की मौत की खबर पाते ही क्षेत्र के सैकड़ों लोग होली फैमिली अस्पताल के बाहर जमा हो गए. सभी इस बात से हैरान थे कि इतने सज्जन आदमी की हत्या किस ने की? वह ऐसे शख्स थे कि किसी से झगड़ना तो दूर, तेज आवाज में बात तक नहीं करते थे.

उधर जैसे ही जामियानगर के थानाप्रभारी मंगेश त्यागी को घटना की जानकारी मिली, वह टीम के साथ होली फैमिली अस्पताल पहुंच गए. उन्होंने मोइन खान की लाश को कब्जे में लिया और यह जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दे दी.

डीसीपी एम.एस. रंधावा को जब जानकारी मिली कि होली फैमिली अस्पताल के बाहर सैकड़ों लोग जमा हैं तो उन्होंने हालात को बिगड़ने से रोकने के लिए आसपास के थानाक्षेत्र की पुलिस फोर्स वहां भेज दी. कुछ ही देर में इलाका छावनी बन गया. खुद डीसीपी एम.एस. रंधावा, एडिशनल डीसीपी विजय कुमार, एसीपी निधिन वल्सन और एसीपी अनिल यादव भी वहां पहुंच गए.

जिस कार में मोइन खान को गोली मारी गई थी, उस की जांच के लिए क्राइम इनवैस्टीगेशन टीम और फोरैंसिक एक्सपर्ट की टीम को भी बुलवा लिया गया. दोनों ही टीमों ने वहां से सबूत इकट्ठे किए. पुलिस अधिकारियों ने मृतक की पत्नी के अलावा क्षेत्र के ही प्रतिष्ठित लोगों से भी पूछताछ की. इस पूछताछ में पता लगा कि वकील साहब बेहद शरीफ आदमी थे. नई दिल्ली नगर पालिका परिषद में इतने बड़े पद पर नौकरी करने के बावजूद भी उन के अंदर घमंड नाम की कोई चीज नहीं थी.

पुलिस ने लाश को कब्जे में ले कर पोस्टमार्टम के लिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भेज दिया. उस समय तक रात हो चुकी थी, इसलिए पोस्टमार्टम अगले दिन 17 मई को होना था. तब तक के लिए उन की लाश मोर्चरी में रखवा दी. जामियानगर इलाके में शांति व्यवस्था बनी रहे, इस के लिए डीसीपी ने वहां भारी मात्रा में पुलिस तैनात करा दी.

उधर पुलिस आयुक्त आलोक कुमार वर्मा ने इस मामले को गंभीरता से लिया. विशेष आयुक्त कानून व्यवस्था (दक्षिणी) पी. कामराज, डीसीपी एम.एस. रंधावा, एसीपी निधिन वल्सन, अनिल यादव और जामियानगर के थानाप्रभारी मंगेश त्यागी को अपने औफिस बुला कर इस विषय पर बात की, साथ ही डीसीपी से कहा कि वह इस केस को जल्द से जल्द सुलझाने के लिए जरूरी काररवाई करें.

पुलिस आयुक्त के निर्देश पर डीसीपी एम.एस. रंधावा ने एडिशनल डीसीपी विजय कुमार के नेतृत्व में 6 पुलिस टीमें बनाईं. पहली टीम का निर्देशन जामियानगर के थानाप्रभारी मंगेश त्यागी, दूसरी का न्यू फ्रैंड्स कालोनी के थानाप्रभारी कुलदीप यादव, तीसरी का सरिता विहार के थानाप्रभारी मनिंदर सिंह, चौथी टीम का ओखला के थानाप्रभारी अतुल वर्मा, पांचवीं का स्पैशल स्टाफ के इंसपेक्टर नरेश कुमार और छठीं टीम का निर्देशन इंसपेक्टर ऐशवीर सिंह कर रहे थे.

सभी पुलिस टीमें अलगअलग बिंदुओं पर काम करने लगीं. पुलिस ने इस बारे में सब से पहले मरहूम मोइन खान की पत्नी निशात खान से उन के दिवंगत पति के बारे में पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि वह सन 1999 से एनडीएमसी में नौकरी कर रहे थे. वह वहां असिस्टैंट लीगल एडवाइजर थे. वर्तमान में वह कनाटप्लेस स्थित होटल कनाट के 140 करोड़ रुपए का केस देख रहे थे.

इस केस को निपटाने के लिए माननीय हाइकोर्ट ने उन के पति को एस्टेट औफिसर नियुक्त किया था. निशात खान ने पुलिस को यह भी बताया कि होटल कनाट के मालिक रमेश कक्कड़ ने फैसला अपने पक्ष में करने के लिए उन के पति को 3 करोड़ रुपए रिश्वत के रूप में देने की पेशकश की थी, लेकिन उन्होंने उस की पेशकश ठुकरा दी थी.

निशात खान की बात सुनने के बाद होटल कनाट का मालिक रमेश कक्कड़ पुलिस के शक के दायरे में आ गया. रमेश कक्कड़ दक्षिणी दिल्ली के सफदरजंग डेवलपमेंट एरिया में रहता था. पूछताछ के लिए पुलिस उसे थाने ले आई. पुलिस की एक टीम मृतक मोइन खान के औफिस में काम करने वाले ऐसे लोगों से पूछताछ कर रही थी, जो उन के संपर्क में ज्यादा रहते थे.

जौहरी फार्म में जिस जगह पर मोइन खान को गोली मारी गई थी, पुलिस ने उस के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकौर्डिंग देखी. एक कैमरे की रिकौर्डिंग में एक मोटरसाइकिल ऐसी दिखी, जो उन की गाड़ी का पीछा करती हुई जौहरी फार्म तक आई थी और घटना के बाद वहां से चली गई थी. उस मोटरसाइकिल का नंबर सीसीटीवी की फुटेज में साफ दिखाई दे रहा था. वह मोटरसाइकिल जामियानगर इलाके के ही चिराग नाम के युवक की थी.

पुलिस ने चिराग से पूछताछ की तो उस ने बताया कि उस की मोटरसाइकिल बटला हाउस का रहने वाला उस का दोस्त बिलाल मांग कर ले गया था. चिराग को साथ ले कर पुलिस बिलाल के घर पहुंची, लेकिन वह घर पर नहीं मिला.

17 मई को एम्स में मोइन खान की लाश का पोस्टमार्टम होना था. चूंकि वह एक वकील थे, इसलिए सैकड़ों की संख्या में वकील और विभिन्न सामाजिक संगठनों के लोग वहां इकट्ठा हो गए. सभी लोग आक्रोश में थे. वकीलों ने पुलिस को चेतावनी दी कि 2 दिनों के अंदर घटना का परदाफाश नहीं किया गया तो वे आंदोलन करेंगे. इस से पुलिस भी तनाव में थी. बहरहाल पुलिस ने उन सभी को जैसेतैसे समझाया.

पुलिस ने कनाट होटल के मालिक रमेश कक्कड़ के मोबाइल फोन की काल डिटेल्स निकलवाई. काल डिटेल्स से पता चला कि घटना वाले दिन और उस के बाद उस की रामफूल नाम के एक शख्स से कई बार बात हुई थी. रमेश कक्कड़ से रामफूल के बारे में पूछा गया तो उस ने बताया कि वह उस का बौडीगार्ड है. पुलिस की सभी टीमें अलगअलग तरीके से केस को खोलने में लगी थीं. पुलिस पेशेवर शूटरों की भी धरपकड़ कर रही थी. उन से की गई पूछताछ में भी मोइन खान के हत्यारों का कोई क्लू नहीं मिल रहा था.

उसी दौरान जामियानगर क्षेत्र का रहने वाला एक बदमाश थानाप्रभारी मंगेश त्यागी के पास पहुंचा. अचानक उस बदमाश को अपने कक्ष में देख कर थानाप्रभारी चौंके. उन्होंने उस से थाने में आने की वजह पूछी तो वह बोला, ‘‘सर, मोइन खान की हत्या के बारे में रामफूल नाम के एक बाउंसर ने मुझ से बात की थी. चूंकि मोइन खान एक वकील के अलावा सरकारी अधिकारी थे, इसलिए मैं ने उन की हत्या की सुपारी लेने से मना कर दिया था. जब मुझे पता चला कि पुलिस इस केस के बारे में बदमाशों को उठा कर उन से पूछताछ कर रही है तो पिटाई से बचने के लिए मैं खुद ही थाने चला आया.’’

उस बदमाश ने रामफूल का नाम बताया था, जो रमेश कक्कड़ का बौडीगार्ड था. ये दोनों व्यक्ति संदेह के दायरे में पहले से ही थे. थानाप्रभारी मंगेश त्यागी ने इस महत्त्वपूर्ण सूचना के बारे में डीसीपी एम.एस. रंधावा को अवगत करा दिया. उन्होंने तुरंत रामफूल को उठाने के निर्देश दिए.

पुलिस रमेश कक्कड़ की निशानदेही पर रामफूल को उस के घर से थाने ले आई. रमेश कक्कड़ पहले से ही पुलिस की हिरासत में था. अपने मालिक को पुलिस कस्टडी में देख कर उस के होश उड़ गए. वह घबरा गया. उसे लगा कि रमेश कक्कड़ ने पुलिस को सब कुछ बता दिया होगा.

इसलिए पुलिस ने जब उस से मोइन खान की हत्या के बारे में पूछा तो पिटाई के डर से उस ने स्वीकार कर लिया कि मोइन खान की हत्या उस ने रमेश कक्कड़ के कहने पर भाड़े के हत्यारों से कराई थी. हत्या में जोजो लोग शामिल थे, उस ने उन के नाम भी बता दिए. हत्यारे कहीं फरार न हो जाएं, पुलिस टीमों ने उसी दिन संगम विहार क्षेत्र में तिगड़ी के रहने वाले इसराइल, जैतपुर के रहने वाले इसराइल के चचेरे भाई सलीम खान, बटला हाउस निवासी आमिर अल्वी और बटला हाउस के ही अनवर ओमैस को उन के ठिकानों से गिरफ्तार कर लिया.

पुलिस के गले की फांस बने इस संवेदनशील केस के हल होने की जानकारी मिलते ही डीसीपी रंधावा, एडिशनल डीसीपी विजय कुमार भी थाना जामियानगर पहुंच गए. उन की मौजूदगी में थानाप्रभारी मंगेश त्यागी ने अभियुक्तों से पूछताछ की तो मोइन खान की हत्या की जो कहानी सामने आई, वह होटल कनाट की लीज फाइल से जुड़ी पाई गई.

मूलरूप से उत्तर प्रदेश के जिला प्रतापगढ़ के कस्बा कुंडा के रहने वाले मोइन खान ने एलएलबी की थी. उन्हें सन 1999 में नई दिल्ली नगर पालिका परिषद में असिस्टैंट लीगल एडवाइजर के पद पर नौकरी मिल गई थी. उन के परिवार में पत्नी निशात खान के अलावा 3 बेटियां थीं. अपने परिवार के साथ वह दक्षिणपूर्वी दिल्ली के जामियानगर थाने के अंतर्गत आने वाले जौहरीफार्म में रहते थे. नई दिल्ली नगर पालिका परिषद का होटल कनाट को ले कर रमेश कक्कड़ से विवाद चल रहा था. उस विवाद को एनडीएमसी की तरफ से मोहम्मद मोइन खान ही देख रहे थे.

दरअसल, एनडीएमसी ने दिल्ली के कनाटप्लेस क्षेत्र में चार सितारा होटल कनाट बनवाया था. करीब 15 साल पहले एनडीएमसी ने यह होटल रमेश कक्कड़ के पिता हरिराम कक्कड़ को लीज पर दे दिया था. लीज की शर्त यह थी कि होटल संचालक पूरी कमाई से 21 लाख रुपए सालाना एनडीएमसी को देगा और यदि होटल से सालाना कमाई तय रकम से ज्यादा होती है तो वह उस कमाई का 21 प्रतिशत एनडीएमसी में जमा करेगा.

यह होटल कनाटप्लेस इलाके में स्थित होने की वजह से काफी चलता था, इसलिए इस से जो कमाई होती थी, वह तय रकम से अधिक थी. बाद में इस होटल को हरिराम कक्कड़ के बेटे रमेश कक्कड़ ने संभाल लिया था.

लीज की शर्तों के मुताबिक होटल संचालक को इस की आमदनी का 21 प्रतिशत एनडीएमसी के खाते में जमा करना चाहिए था, लेकिन उस ने ऐसा नहीं किया. एनडीएमसी ने इस के लिए नोटिस भेजा, पर रमेश कक्कड़ ने इसे गंभीरता से नहीं लिया. तब एनडीएमसी ने रमेश कक्कड़ पर 140 करोड़ रुपए की पेनल्टी लगाई और उस की लीज खत्म करने की काररवाई शुरू कर दी. यह बात सन 2003 की है.

रमेश किसी भी हाल में होटल को छोड़ना नहीं चाहता था, इसलिए वह कोर्ट चला गया. मगर कोर्ट में भी रमेश कक्कड़ को राहत नहीं मिली. निचली अदालत ने फैसला एनडीएमसी के पक्ष में दिया. इस फैसले के खिलाफ रमेश कक्कड़ दिल्ली हाइकोर्ट गया. कई सालों तक यह मामला दिल्ली हाइकोर्ट में चलता रहा. दिल्ली हाइकोर्ट के चीफ जस्टिस जे.आर. मिधा ने 21 जुलाई, 2015 को एनडीएमसी को आदेश दिया कि इस मामले में जो भी और्डर करना है, वह 6 महीने के अंदर करे, जिस से केस को निपटाया जा सके.

इतना ही नहीं, इस केस में उचित निर्णय लेने के लिए असिस्टैंट लीगल एडवाइजर मोइन खान को एस्टेट औफिसर नियुक्त कर दिया. यह पद अहम माना जाता है. एस्टेट औफिसर नियुक्त होने के बाद मोइन खान के अधिकार क्षेत्र में वृद्धि हो गई. होटल कनाट की फाइल उन के पास थी ही. उन्होंने रमेश कक्कड़ को औफिस बुला कर उस का स्टेटमेंट लिया. इस के अलावा उन्होंने होटल कनाट के और भी कई कर्मचारियों से बात की.

जांच करने के बाद एस्टेट औफिसर मोइन खान ने 14 मई, 2016 को एक रिपोर्ट तैयार करनी थी. यह रिपोर्ट 17 मई, 2016 को दिल्ली उच्च न्यायालय में पेश करनी थी. रमेश कक्कड़ को पूरा विश्वास था कि मोइन खान ने जो रिपोर्ट तैयार की है, वह उस के खिलाफ ही जाएगी. और उस रिपोर्ट के आधार पर ही उच्च न्यायालय का फैसला भी उस के खिलाफ जाएगा. फैसला खिलाफ जाने की वजह से फोर स्टार होटल कनाट भी उस के हाथ से चला जाएगा. इस बात को ले कर वह परेशान रहने लगा.

रमेश कक्कड़ को परेशान देख कर उस के बौडीगार्ड रामफूल ने उस से परेशानी की वजह पूछी. रामफूल रमेश का विश्वासपात्र था. रमेश कक्कड़ का दिल्ली के ग्रेटर कैलाश पार्ट-1 में एक बार था, जो किसी वजह से 4-5 साल पहले बंद हो गया था. रामफूल उसी बार में बाउंसर था. बार बंद होने के बाद रमेश ने उसे अपना बौडीगार्ड बना लिया था.

रमेश ने रामफूल से कहा, तुम्हें तो पता ही है कि इस होटल का एनडीएमसी से केस चल रहा है और मोइन खान किसी भी तरह मेरी बात नहीं सुन रहा है. 17 मई को हाईकोर्ट में तारीख है. मुझे लगता है कि वह कोर्ट में हमारे खिलाफ ही जाएगा. मान लो, इस होटल से हमारा कौंट्रैक्ट निरस्त हो गया तो यह होटल तो हमारे हाथ से चला ही जाएगा, साथ ही तुम लोग भी बेरोजगार होे जाओगे. मैं चाहता हूं कि किसी भी तरह मोइन खान को कोर्ट जाने से रोका जाए.सर, आप बताइए कि इस में मैं आप की क्या मदद कर सकता हूं. मैं आप के लिए कुछ भी करने को तैयार हूं. रामफूल ने जोश में कहा.

मुझे तुम्हारे ऊपर विश्वास है, तभी तो मैं ने अपने मन की बात तुम से कह रहा हूं. रामफूल, इस मोइन खान ने मेरा जीना हराम कर रखा है. यह तो मुझे सड़क पर ला देगा. इसलिए मैं चाहता हूं कि इस का काम तमाम कर दिया जाए. तुम यह काम करा दो. इस में जो भी खर्च होगा, मैं दे दूंगा. रमेश कक्कड़ बोला. सर, आप चिंता न करें. मैं यह काम करा दूंगा. रामफूल ने रमेश को विश्वास दिलाया.

रामफूल ने यह काम कराने के लिए जामियानगर क्षेत्र के ही रहने वाले एक बदमाश से बात की. उस बदमाश को जब बताया गया कि मोइन खान नाम के जिस आदमी को ठिकाने लगाना है, वह वकील होने के साथसाथ एक सरकारी अफसर भी है तो उस बदमाश ने मोइन खान के नाम की सुपारी लेने से मना कर दिया.

रामफूल का एक दोस्त था इसराइल, जो उस के साथ रमेश के ही बार में बाउंसर था. वह संगम विहार के तिगड़ी में रहता था. रामफूल ने उस से बात की. इसराइल का एक चचेरा भाई था सलीम खान. वह दबंग था और बदरपुर के पास जैतपुर में रहता था. उस का जामियानगर इलाके में माइक्रोफाइनैंस का धंधा था. इसराइल ने सलीम से कहा कि वह ऐसे शूटरों का इंतजाम कर दे, जो आसानी से काम कर दें.

सलीम जामियानगर के ही रहने वाले आमिर अल्वी को जानता था. वह इलाके का बदमाश था. सलीम ने उस से बात की तो आमिर अल्वी ने अपने ही 2 चेलों बिलाल और अनवर ओमैस को टारगेट पूरा करने की जिम्मेदारी दे दी. ये दोनों बटला हाउस इलाके में ही रहते थे.

काम को कैसे अंजाम देना है, इस बारे में सभी ने बैठ कर योजना बनाई. रामफूल ने सभी साथियों को मोइन खान का घर और औफिस दोनों दिखा दिए. पता चला कि वह स्विफ्ट डिजायर कार नंबर डीएल2सी एपी4036 से औफिस जाते हैं. फिर सभी ने मोइन खान की रैकी कर के यह पता लगा लिया कि वह घर से औफिस के लिए कितने बजे निकलते हैं और औफिस से घर किनकिन रास्तों से हो कर जाते हैं. रैकी करने के बाद उन्होंने तय कर लिया कि वे घटना को अंजाम ऐसी जगह पर देंगे, जहां से वे आसानी से भाग सकें.

उन्होंने मोइन खान के शाम को औफिस से घर लौटते समय मारने की योजना बनाई. 16 मई, 2016 को योजना के मुताबिक रामफूल, इसराइल मोइन खान के औफिस के पास चैरी कलर की वैगनआर कार नंबर डीएल6सी एन1764 में जा कर बैठ गए. यह कार रामफूल की थी. ये लोग मोइन खान के औफिस से निकलने का इंतजार करने लगे.

जैसे ही मोइन खान अपनी स्विफ्ट डिजायर कार ले कर औफिस से निकले, रामफूल और इसराइल उन का पीछा करने लगे. उधर अनवर ओमैस और बिलाल जामियानगर इलाके में एक निर्धारित स्थान पर मोटरसाइकिल लिए खड़े थे. मोटरसाइकिल बिलाल के दोस्त चिराग की थी. बिलाल उस से किसी काम के बहाने मोटरसाइकिल मांग कर लाया था. इसराइल की इन दोनों से फोन पर बात चल रही थी. इसराइल इन्हें फोन कर के जानकारी दे रहा था कि वे लोग अब कहां पहुंचे हैं.

मोइन खान इस बात से अनजान थे कि मौत उन का पीछा कर रही है. साजिशों से अनभिज्ञ रहते हुए वह अपने घर की तरफ चले आ रहे थे. तभी रास्ते में ही उन्हें ध्यान आया कि उन्हें अपनी पत्नी के लिए शुगर स्ट्रिप ले जानी हैं. उन की पत्नी निशात खान शुगर पेशेंट हैं. स्ट्रिप लाने के लिए उन्होंने अपनी कार सफदरजंग अस्पताल की तरफ मोड़ दी. उसी अस्पताल के बाहर उन के एक जानकार का मैडिकल स्टोर था.

कार सड़क किनारे खड़ी कर के वह उस मैडिकल स्टोर पर गए. उन का पीछा कर रहे रामफूल और इसराइल ने भी कुछ दूरी पर अपनी कार रोक दी. कार में ही बैठेबैठे वे उन पर निगाहें जमाए हुए थे. मोइन खान उस मैडिकल स्टोर वाले से काफी देर तक बातचीत करते रहे. यह देख इसराइल ने बिलाल को फोन कर के सफदरजंग अस्पताल आने को कहा. बिलाल अनवर ओमैस को ले कर सफदरजंग अस्पताल के पास चला गया. उस समय शाम के करीब 6 बज रहे थे.

कुछ देर बाद मोइन खान वहां से चले तो बिलाल और अनवर ने मोटरसाइकिल से उन की कार का पीछा करना शुरू कर दिया. जबकि रामफूल और इसराइल वहीं रह गए. मोटरसाइकिल बिलाल चला रहा था. बिलाल को रास्ते में काम को अंजाम देने का मौका नहीं मिला. वह उन की गाड़ी के पीछे लगा रहा.

जैसे ही मोइन खान जौहरी फार्म स्थित अपने घर के बाहर पहुंचे तो उन की गाड़ी के रुकते ही अनवर मोटरसाइकिल से उतर कर उन की कार के पास जा पहुंचा. उस ने जल्दी से अपने तमंचे की बट से कार का शीशा तोड़ कर मोइन खान को गोली मार दी. गोली उन के सीने पर लगी, जिस से कुछ ही देर में उन की मौत हो गई.

गोली मारने के बाद अनवर झट से बिलाल की मोटरसाइकिल पर बैठ गया और दोनों वहां से भाग गए. मोइन खान को ठिकाने लगाने की जानकारी बिलाल ने इसराइल को दे दी. इस के बाद इसराइल रामफूल के पास पहुंच गया. काम पूरा हो चुका था, इस के बदले में रमेश कक्कड़ से पैसे भी लेने थे. इसलिए रामफूल और इसराइल रमेश कक्कड़ के घर पहुंच गए. रमेश को जब पता चला कि रास्ते का कांटा हट गया है तो वह बहुत खुश हुआ. उस ने उसी समय 50 हजार रुपए रामफूल को देते हुए कहा कि बाकी के डेढ़ लाख रुपए 1-2 दिनों में दे देगा. उन 50 हजार रुपयों में से एक हजार रुपए रामफूल और इसराइल ने शराब आदि पर खर्च कर दिए. 49 हजार रुपए उस ने बिलाल और अनवर को दे दिए.

अभियुक्तों से पूछताछ के बाद पुलिस ने अनवर की निशानदेही पर बिलाल को भी गिरफ्तार कर लिया. सभी अभियुक्तों को 19 मई को साकेत कोर्ट में ड्यूटी मजिस्ट्रेट के सामने पेश कर के 2 दिनों का पुलिस रिमांड लिया गया. रिमांड अवधि में अभियुक्तों की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त तमंचा, वैगनआर कार, मोटरसाइकिल, मोबाइल फोन और 49 हजार रुपए भी बरामद कर लिए गए. फिर अभियुक्तों को 21 मई को पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मृतक मोइन खान के घर जा कर उन की पत्नी निशात खान और बच्चों से मुलाकात कर घटना पर दुख जताया, साथ ही उन्हें एक करोड़ रुपए की सहायता राशि देने व उन के पति को शहीद का दरजा दिए जाने की घोषणा की. वहीं केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने भी उन्हें 25 लाख रुपए की सहायता राशि देने का ऐलान किया.

नई दिल्ली नगर पालिका परिषद के भी 7 हजार कर्मचारियों ने मृतक के परिवार को एकएक दिन की सैलरी दी है. इतना ही नहीं, परिषद ने मृतक की पत्नी निशात खान को उन के पति के ग्रेड बी पर ही नौकरी देने का भरोसा दिया है, साथ ही उन्हें टाइप-3 का एक सरकारी आवास भी अलौट कर दिया है.

अब भले ही निशात खान के परिवार को कितना ही पैसा या सुविधाएं मिलें, पर इस से उन के पति वापस तो नहीं आ सकते. उन का तो घरौंदा उजड़ ही गया है. केस की तफ्तीश इंसपेक्टर सुहैब फारुखी कर रहे हैं.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

 

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