Honey Trap Case: कंचन का तो पेशा ही था मर्दों को फांस कर उन से की गई बातों को मोबाइल से रिकौर्ड कर के ब्लैकमेल करने का, लेकिन नायब तहसीलदार संदीप कुमार के बारे में जो पता चला है, उन्हें भी पाकसाफ नहीं कहा जा सकता.

25 अप्रैल की सुबह जयपुर के थाना अशोकनगर के थानाप्रभारी बालाराम ने औफिस में आते ही सब से पहले ड्यूटी अफसर को बुला कर खैरखबर पूछी. उन्होंने बताया कि सब ठीकठाक है तो थानाप्रभारी ने चैन की सांस ली. ड्यूटी अफसर के जाने के बाद उन्होंने घंटी बजा कर अर्दली को बुलाया और चाय मंगाई. इस के बाद चाय पीते हुए मेज पर रखी पुरानी फाइलों को देखने लगे.

थानाप्रभारी चाय पी रहे थे कि अर्दली ने पुन: कमरे में आ कर कहा, सर, एक आदमी आया है, वह आप से मिलना चाहता है. ठीक है, चाय का कप मेज पर रखते हुए उन्होंने कहा, यह चाय का कप हटाओ और उन्हें अंदर भेज दो.

अर्दली के बाहर जाते ही एक आदमी अंदर आया. उस ने बालाराम की ओर हाथ बढ़ा कर कहा, सर, मेरा नाम संदीप कुमार है. मैं नायब तहसीलदार हूं. इस समय मेरी पोस्टिंग अलवर में है. थानाप्रभारी ने नायब तहसीलदार संदीप कुमार से हाथ मिलाते हुए सामने रखी कुर्सी पर बैठने का इशारा किया तो वह बैठ गए. इस के बाद बालाराम ने अर्दली को बुला कर पानी लाने को कहा. अर्दली पानी ले आया तो संदीप कुमार ने पानी पिया. इस के बाद थानाप्रभारी ने पूछा, बताइए नायब साहब, कैसे आना हुआ?

सर, मैं कुछ परेशानी में हूं, इसलिए आप के पास आया हूं. संदीप कुमार ने कहा. नायब साहब, आप की जो भी परेशानी हो, उसे विस्तार से बताइए, ताकि मैं आप की मदद कर सकूं. थानाप्रभारी ने कहा. सर, बात एक महिला से जुड़ी है, वह मुझे ब्लैकमेल कर रही है. संदीप कुमार ने कहा, मैं सीधासादा आदमी हूं और सरकारी अधिकारी हूं. वह मेरी सिधाई का फायदा उठा कर मुझ से लाखों रुपए ऐंठना चाहती है. पैसे न देने पर वह मुझे किसी गलत मामले में फंसाने की धमकी दे रही है.

आगे की कहानी पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

डिजिटल

(1 साल)
USD48USD10
सब्सक्राइब करें

डिजिटल + 12 प्रिंट मैगजीन

(1 साल)
USD100USD79
सब्सक्राइब करें

बुकलेट की सुपर डील!

(डिजिटल + 12 प्रिंट मैगजीन + बुकलेट!)
₹ 1514₹ 999
सब्सक्राइब करें
और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...