Love Triangle Murder: हरिओम शर्मा चाहते थे कि उन की प्रेमिका प्रेमा सिंह एक बार फिर उन के पास वापस आ जाए, लेकिन अब वह डा. रामावत को छोड़ने को तैयार नहीं थी. फलस्वरूप डा. रामावत मारे गए.

13 मई, 2016 रात के 9 बज चुके थे. पालम गांव दिल्ली के हीरो चौक स्थित रामावत डेंटल क्लीनिक के बाहर सन्नाटा पसर चुका था. उसी समय एक मोटरसाइकिल क्लिनिक के सामने आ कर रुकी. बाइक पर 2 लोग सवार थे. उन में से एक मोटरसाइकिल स्टार्ट किए उसी पर बैठा रहा, जबकि दूसरा उतर कर क्लिनिक के अंदर चला गया.

क्लिनिक में काम करने वाले कर्मचारी अपनेअपने घर जाने की तैयारी कर रहे थे. डा. भगवान सिंह रामावत भी घर जाने के लिए अपना बैग तैयार कर रहे थे. तभी मोटरसाइकिल से उतर कर आए व्यक्ति उन की केबिन में दाखिल हुआ. डा. रामावत उस से अपरिचित थे, इसलिए उन्होंने उसे घूरते हुए कहा, क्लिनिक बंद होने का वक्त हो गया है, आप सुबह 9 बजे आइए.

उन की बात सुन कर उस व्यक्ति के चेहरे पर पाशविकता झलकने लगी. उस ने होंठों पर धूर्त मुसकान ला कर अजीब से लहजे में कहा, अब आप को सुबह का इंतजार नहीं करना पड़ेगा. मैं भी सुबह का इंतजार नहीं कर सकता. डाक्टर साहब, अब आप वहां जाने की तैयारी कर लीजिए, जहां से आए हैं.

यह क्या बकवास है. डा. रामावत ने थोड़े ऊंचे स्वर में कहा. मैं ने कहा न, सुबह आना. अभी क्लिनिक बंद हो रहा है. कुछ कहने के बजाय उस व्यक्ति ने जल्दी से देखी कट्टा निकाला और डा. रामावत पर तान दिया. एकाएक उस के हाथ में तमंचा देख कर डा. रामावत बुरी तरह डर गए. उस व्यक्ति ने ढीठता से कहा, मैं इलाज कराने नहीं, आप का काम तमाम करने आया हूं.

तुम्हारी मुझ से क्या दुश्मनी है, मुझे क्यों मारना चाहते हो? बुरी तरह खौफजदा डा. रामावत ने पूछा तो वह लापरवाही से बोला,हम लोगों की किसी से कोई दुश्मनी नहीं होती. इस के साथ ही उस ने निशाना साध कर फायर कर दिया. गोली डा. रामावत के गले में लगी. खून का फौव्वारा छूटा और रामावत फर्श पर गिर कर तड़पने लगे. कुछ देर तड़पने के बाद उन का शरीर शांत हो गया. इस के बाद युवक तमंचा अपनी जींस के पिछले हिस्से में खोंस कर बाहर चला गया. क्लिनिक में काम करने वाले तीनों कर्मचारी भयभीत खड़े रह गए.

वह व्यक्ति बड़े ही इत्मीनान से कांच का दरवाजा खोल कर बाहर निकल गया और बाहर स्टार्ट खड़ी मोटरसाइकिल पर जा बैठा. उस के बैठते ही मोटरसाइकिल तेज रफ्तार से आगे बढ़ गई. ‘रामावत डेंटल क्लिनिक’ में काम करने वाले एक कर्मचारी भूपेश ने पुलिस कंट्रोल रूम को फोन कर के इस वारदात की सूचना दी. लगभग एक घंटे बाद बीट औफिसर एएसआई राजेंद्र सिंह 2 सिपाहियों के साथ जिप्सी से घटनास्थल पर पहुंचे. उन्होंने मौकाएवारदात की स्थिति देखने के बाद उन्होंने इस घटना की सूचना पुलिस स्टेशन पालम विलेज को दे दी. थाना पालम विलेज के थानाप्रभारी अखिलेश मिश्रा पुलिस टीम के साथ करीब 11 बजे घटनास्थल पर पहुंचे. उन्होंने घटनास्थल और डा. भगवान सिंह रामावत का निरीक्षण किया. उन्हें लगा कि डा. रामावत के शरीर में अभी जान है. उन्होंने तुरंत उन्हें दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल भिजवा दिया. लेकिन वहां के डाक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.

यह घटना पालम गांव के हीरो चौक स्थित जैन भवन, मकान नंबर डब्ल्यू जेड 462 के ग्राउंड फ्लोर पर बने रामावत डेंटल क्लिनिक में घटी थी. डा. रामावत इसी मकान के फर्स्ट फ्लोर पर रहते थे. उन के साथ एक महिला रहती थी, जिस का नाम प्रेमा सिंह था. डा. रामावत की हत्या की खबर सुन कर उस मकान में रहने वाले अन्य किराएदार तो घटनास्थल पर आ गए थे, लेकिन प्रेमा सिंह नहीं आई थी.

अखिलेश मिश्रा ने एक सिपाही को इस निर्देश के साथ फर्स्ट फ्लोर पर भेजा कि वह प्रेमा सिंह को बुला लाए. सिपाही ने वापस आ कर बताया कि फर्स्ट फ्लोर पर कोई नहीं है. जबकि मकान में ताला भी नहीं लगा है. इस से अखिलेश मिश्रा को लगा कि डा. रामावत के मर्डर में प्रेमासिंह का किसी न किसी रूप में जरूर हाथ है. इसीलिए वह पुलिस के डर से भाग गई है.

बहरहाल, अखिलेश मिश्रा ने घटनास्थल की कानूनी काररवाई पूरी की और दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल जा कर डा. रामावत का शव सील मोहर करा कर पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल की मोर्चरी भिजवा दिया. जब इस मामले की जानकारी डीसीपी सुरेंद्र कुमार को मिली तो उन्होंने इस आपराधिक वारदात का खुलासा करने और हत्यारे को पकड़ने की जिम्मेदारी स्पेशल स्टाफ के एसीपी जगजीत सागवान को सौंप दी.

एसीपी जगजीत सागवान ने तत्काल एक जांच टीम गठित की, जिस में स्पैशल स्टाफ के इंसपेक्टर रमेश कुमार, संजीव कुमार, नवीन कुमार, एएसआई विजेंद्र, हैडकांस्टेबल जयवीर, ओम, पवन, कुलदीप, हंसकुमार, कांस्टेबल अशोक, राजेंद्र, अश्विनी तथा एटीओ वीएस गुलिया को शामिल किया गया. अखिलेश मिश्रा और महिला इंसपेक्टर मीना सिंह को स्पेशल स्टाफ की टीम की मदद करने को कहा गया. आननफानन में सभी लोग इस हत्याकांड की परतें उधेड़ने में लग गए.

पुलिस टीम ने सब से पहले प्रेमा सिंह की खोज की. उसे खोजने में पुलिस को कोई भागदौड़ नहीं करनी पड़ी. वह डा. भगवान सिंह के किराए के उसी फ्लैट में मिल गई. मिलने पर टीम ने उस से पूछा, डाक्टर की हत्या की खबर मिलते ही तुम भाग क्यों गई थीं? उस दिन मैं यहां थी ही नहीं. दरअसल 2007 में मेरा मेरे पति से तलाक हो गया था. कारण यह था कि मैं ब्यूटीपार्लर चलाती थी. पति को मेरा यह काम पसंद नहीं था. वह चाहते थे कि मैं हाउसवाइफ बन कर रहूं. प्रेमा सिंह ने कहा.

प्रेमा सिंह का जब पति से तलाक हुआ था. उस का 18 साल का एक बेटा और 16 साल की एक बेटी थी. दोनों बच्चे उस के पति के साथ ही रहते थे.  पति एयरफोर्स में था और पालम में ही एयरफोर्स कालोनी में रहता था. वह 10-15 दिनों में बच्चों से मिलने जाती रहती थी. वह उन्हें अपने साथ घुमाने भी ले जाती थी.

13 मई को भी वह बच्चों के साथ घूमने निकली थी. उसी बीच उस ने बच्चों के साथ लक्ष्मीनगर स्थित एक मौल में 6 से 9 बजे के शो में फिल्म जंगलबुक देखी थी. इस के बाद उस ने बच्चों को एक कैब में बैठा कर घर भेज दिया और खुद लक्ष्मीनगर में रहने वाली अपनी बहन के घर जा कर सो गई थी. अगले दिन सुबह वह लौटी तो उस ने डा. रामावत की हत्या की खबर सुनी. प्रेमा सिंह ने पुलिस को फिल्म के 3 टिकट भी दिखाए थे. पुलिस टीम उस के दोनों बच्चों से मिली तो उन्होंने भी यही बात बताई.

पुलिस ने लक्ष्मीनगर में रहने वाली प्रेमा सिंह की बहन तथा उस के परिवार से मिल कर पूछताछ की तो उन्होंने भी बताया कि 13 मई की रात प्रेमा सिंह उन्हीं के साथ थी और 14 मई की सुबह करीब 11 बजे नाश्ता कर के पालम गांव चली गई थी.

इन बातों से साफ हो गया कि डा. भगवान सिंह रामावत की हत्या में प्रेमा सिंह का हाथ नहीं था. प्रेमा सिंह ने यह बात भी खुल कर बता दी थी कि 55 वर्षीय डा. रामावत से उस के प्रेमिल संबंध थे. वही उस का सारा खर्च उठाते थे.

स्पैशल स्टाफ की टीम ने डा. रामावत और प्रेमा सिंह के मोबाइल फोन और जैन भवन में लगे सीसीटीवी की फुटेज भी खंगाला. लेकिन इस का कोई फायदा नहीं हुआ. टीम ने एक बार फिर प्रेमा सिंह से मिल कर पूछा कि क्या उसे किसी ऐसे शख्स की जानकारी है, जो किसी वजह से डा. रामावत से रंजिश रखता रहा हो.

कुछ देर सोचने के बाद प्रेमा सिंह ने कहा, डा. रामावत बहुत ही अच्छे इंसान थे. उन की किसी से कोई रंजिश नहीं थी. हां, हरिओम शर्मा उन से जरूर खार खाता था. उस ने एक बार मेरे सामने कहा था कि वह उस की जान ले लेगा, जो मेरी मदद कर रहा है. यह हरिओम शर्मा कौन है? प्रौपर्टी डीलर है. वह मुझ पर गंदी नीयत रखता था. मैं ने थाना सागरपुर में उस के खिलाफ जान से मारने की धमकी देने और छेड़छाड़ करने का केस भी दर्ज कराया था.

प्रेमा सिंह से हरिओम का पता ले कर पुलिस टीम ने पूछताछ के लिए उसे उस के औफिस से हिरासत में ले लिया. वह महावीर एन्क्लेव में रहता था और वहीं अपना प्रौपर्टी डीलिंग का औफिस खोल रखा था. पुलिस टीम ने उस पर अंधेरे में तीर चला कर सच उगलवा लिया. टीम ने उस से कहा, तुम ने जिस डा. रामावत के मर्डर की सुपारी दी थी, वह तो बहुत ही फट्टू टाइप का निकला. दस डंडे भी नहीं झेल सका और सारी कहानी बक डाली.

यह सुनते ही हरिओम शर्मा सुबकने लगा. इस के बाद उस ने डा. रामावत की हत्या कराने की बात स्वीकार कर के सारी हकीकत बयान कर दी. 42 वर्षीया प्रेमा सिंह अपने पति रुद्रप्रताप के साथ एयरफोर्स कालोनी में रहती थी. उस का एक बेटा था और एक बेटी. प्रेमा सिंह ने एमए किया था. वह आधुनिकता के रंग में रंगी फैशनपरस्त, बिंदास महिला थी. उसे पुरुषों से दोस्ती करना और उन के साथ घूमनाफिरना अच्छा लगता था.

जबकि रुद्रप्रताप संस्कारी और धार्मिक प्रवृत्ति का था. उसे प्रेमा सिंह का आधुनिक व्यवहार बिलकुल अच्छा नहीं लगता था. ऊपर से प्रेमा ने महावीर एन्क्लेव में ब्यूटीपार्लर खोला हुआ था, जिसे ले कर रुद्रप्रताप से उस का अकसर झगड़ा होता रहता था. एक दिन दोनों में कहासुनी इस हद तक बढ़ी कि प्रेमा सिंह को घर छोड़ना पड़ा.

पति से अलग हो कर वह महावीर एन्क्लेव में किराए के मकान में रहने लगी. इस से नाराज हो कर रुद्रप्रताप ने कोर्ट में तलाक का मुकदमा दायर कर दिया. 3 सालों बाद दोनों का तलाक हो गया.

महावीर एन्क्लेव के जिस मकान में प्रेमा सिंह रहती थी, उसी मकान के सामने वाले मकान में 32 वर्षीय हरिओम शर्मा रहता था. वह प्रौपर्टी डीलर था और बड़े ठाठबाट से रहता था. प्रेमा सिंह हालांकि 2 बच्चों की मां थी, लेकिन अभी भी वह नवयौवना जैसी दिखती थी. उस के मांसल जिस्म को देख कर हरिओम शर्मा दीवाना हो गया.

एक दिन दोनों की मुलाकात हुई तो दोनों ही एकदूसरे के इतना करीब आ गए कि उन के बीच मधुर संबंध बन गए. अनुभवी प्रेमा सिंह की देह के कटाव देख कर हरिओम शर्मा पूरी तरह उस का मुरीद बन गया. वह प्रेमा पर अपनी दौलत लुटाने लगा. वह चाहता था कि प्रेम उसे अपनी खूबसूरत देह के समंदर में डुबो कर प्रेम रस पिलाती रहे. ऐसा ही हुआ भी. 2007 से 2013 तक दोनों के मधुर संबंध बने रहे.

इसी दौरान हरिओम शर्मा को अपने प्रौपर्टी डीलिंग के काम में लाखों का घाटा हो गया. थोड़ी तंगी आई तो प्रेमा ने भी उस से मुंह मोड़ लिया. उस ने डा. भगवान सिंह रामावत से मधुर संबंध बना लिए.

डा. रामावत के पिता नादर सिंह मकान नंबर 6-266 नसीरपुर, दिल्ली में सपरिवार रहते थे. नादर सिंह को जमीनदारी विरातस में मिली थी. इलाके में उन का काफी रुतबा था और वह इलाके के अमीर आदमियों में शुमार होते थे. डा. भगवान सिंह उन के एकलौते बेटे थे. नादर सिंह ने बेटे पर खूब खर्च किया, जिस के चलते भगवान सिंह डाक्टर बन गए. उन्होंने पालम गांव में अपना क्लिनिक खोल लिया.

प्रेमा सिंह से उन के नजदीकी रिश्ते बने तो उन्होंने उसे साथ रखने के लिए उसी मकान में एक हिस्सा किराए पर ले लिया, जिस में उन का क्लिनिक था.

जब हरिओम शर्मा को रामावत से प्रेमा के रिश्तों का पता चला तो वह अंदर ही अंदर झुलस उठा. वह प्रेमा सिंह से अपने 5 लाख रुपए मांगने लगा. इस पर प्रेमा सिंह ने उसे 5 लाख का चेक दे दिया, साथ ही थाना सागरपुर में हरिओम के खिलाफ छेड़छाड़ की रिपोर्ट लिखा दी. जमानत पर छूटने के बाद हरिओम ने प्रेमा सिंह का दिया चेक बैंक में डाला तो वह बाउंस हो गया. हरिओम ने प्रेमा सिंह के खिलाफ धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज करा दी.

हरिओम शर्मा की पहली शादी सन 2010 में पलवल की शांति से हुई थी, दूसरी शादी वजीराबाद की रेनु से सन 2014 में हुई. देनों ही पत्नियां उसे छोड़ कर चली गई थीं. इस के पीछे प्रेमा सिंह का ही हाथ था. उस ने हरिओम की पत्नियों पर यह राज खोल दिया था कि हरिओम से उस के जिस्मानी रिश्ते हैं.

इस सब के बावजूद हरिओम चाहता था कि प्रेमा सिंह उसी की हो कर रहे. उस ने एक दिन उस से मिल कर इस बाबत बात की. लेकिन वह रामावत से अलग होने को राजी नहीं हुई. तो गुस्से में हरिओम ने कहा, तुम रामावत से अलग न हुई तो मैं रामावत को जान से मार दूंगा.

हरिओम को जब भी प्रेमा सिंह के साथ बिताए एकांत के वे क्षण याद आते तो वह तड़प उठता. वह अच्छी तरह समझ गया था कि जब तक रामावत जीवित रहेगा, प्रेमा सिंह उस के पास नहीं आएगी. इसलिए उस ने रामावत की हत्या करने का फैसला कर लिया. हरिओम ने इस बारे में अपने एक दोस्त विक्रांत से बात की. विक्रांत भी प्रौपर्टी डीलर था. रामावत की हत्या की सुपारी विक्रांत ने 2 लाख में फाइनल की. विक्रांत ने इस के लिए जलबोर्ड का टैंकर चलाने वाले अंगद कुमार से बात की.

अंगद ने अपने दोस्त सोनू को भी इस साजिश में शामिल कर लिया. सोनू और अंगद दोनों, मैनपुरी के रहने वाले थे. अंगद के कहने पर सोनू मैनपुरी से एक देसी कट्टा और 2 कारतूस खरीद लाया. दोनों ने पहले डा. रामावत की तथा उन के क्लिनिक की रेकी की. इस से उन्हें लगा कि वारदात अंजाम देने के लिए रात 9-10 बजे का समय उचित है. 13 मई की रात लगभग 9 बजे अंगद और सोनू हरिनगर से चुराई मोटरसाइकिल से डा. रामावत के क्लिनिक के बाहर जा पहुंचे. सोनू मोटरसाइकिल स्टार्ट किए क्लिनिक के बाहर ही खड़ा रहा, जबकि अंगद क्लिनिक में घुसा और रामावत को गोली मार कर बाहर आ गया. इस के बाद दोनों मोटरसाइकिल से फरार हो गए.

पुलिस ने हरिओम शर्मा की निशानदेही पर विक्रांत, अंगद व सोनू को गिरफ्तार कर लिया. अंगद ने हत्या में प्रयुक्त कट्टा अपने घर से तथा चोरी की मोटरसाइकिल मैनपुरी से बरामद करा दी. पुलिस ने हरिओम, विक्रांत, अंगद और सोनू के खिलाफ आईपीसी की धारा 302 और 25 आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज कर अदालत में पेश किया, जहां से सभी को जेल भेज दिया गया. Love Triangle Murder

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