Love Betrayal Crime : 24 वर्षीय मोनिश पटेल धनाढ्य परिवार का युवक था. उस ने अपनी ही जाति की अर्चना पटेल को न सिर्फ प्यार के जाल में फांसा, बल्कि उसे गर्भवती भी कर दिया. 20 वर्षीय अर्चना पटेल जब तक इस छलिया प्रेमी की असलियत समझ सकी, तब तक बहुत देर हो चुकी थी.

घर में मोनिश का मन नहीं लग रहा था. इसी साल जून के महीने में उस की शादी होने वाली थी. दूसरी तरफ उस की प्रेमिका अर्चना ने यह कह कर कि वह उस के बच्चे की मां बनने वाली है, उस के होश उड़ा दिए थे. वह मोनिश पर शादी का दबाव बनाने लगी थी. मोनिश ने उसे काफी समझायाबुझाया, मगर उस ने उस की एक न सुनी. दोनों एक ही जाति से थे, फिर भी मोनिश अर्चना से शादी नहीं करना चाहता था.

मोनिश पटेल थोड़ा अतीत के झरोखे में लौटा और टहलतेटहलते खेत पर आ गया. वहां पड़ी खाट बिछा कर उस पर लेटेलेटे सोचने लगा कि अर्चना को हमेशाहमेशा के लिए अपने रास्ते से कैसे हटाया जाए. उस के जेहन में अभी भी अर्चना के शब्द साफसाफ और ऊंची आवाज में उस के कान फाड़ रहे थे, मोनिश, मैं पेट से हूं, तुम्हारे बच्चे की मां बनने वाली हूं. लेकिन तुम अब मुझ से मिलना तो दूर बात तक नहीं करते. और तो और इतने बड़े धोखेबाज निकले कि मुझे छोड़ किसी और से शादी करने जा रहे हो.

एक बात कान खोल कर सुन लो और याद रखना कि तुम मुझे इतना बड़ा धोखा दे कर बच नहीं पाओगे.अगर तुम्हारी शादी होगी तो सिर्फ मुझ से. ऐसे इतनी आसानी से मुझे धोखा नहीं दे सकते तुम. थाने से ले कर कोर्ट तक तुम्हें खींचूंगी और हवालात की हवा खिलाऊंगी. मैं ने तुम से बेपनाह मोहब्बत की, जिस के चलते अपना तनमन सब कुछ आंखें मूंद कर तुम्हें सौंप दिया. अगर तुम ने मुझ से बेवफाई की तो उस का अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहना.

अर्चना के ये धमकी भरे शब्द मोनिश के कानों में पिघले सीसे की तरह चुभ रहे थे. वह खाट से उठा और बैचैनी के आलम में इधरउधर टहलने लगा. सोचने लगा, ‘जून में मेरी शादी है और ये लड़की है कि कुछ सुनने और मानने को तैयार नहीं है. फेमिली वाले भी इस से मेरी शादी नहीं होने देंगे. उलटा मुझे ही जमीनजायदाद से बेदखल कर देंगे. भले ही अर्चना अपनी बिरादरी की है, लेकिन अपने स्टेटस की तो नहीं है. कहां मेरा परिवार संपन्न लोगों में है, वहीं अर्चना का गरीब खस्ताहाल परिवार.’

यही सब सोचतेसोचते मोनिश ने अंत में आखिरकार एक खतरनाक निर्णय ले ही लिया. अब चाहे जो भी हो जाए, अर्चना को यमलोकपुरी का रास्ता दिखाना ही पड़ेगा. अर्चना से परेशान हो कर मोनिश ने उसे मौत के घाट उतारने की प्लानिंग की. चूंकि मोनिश के फेमिली वाले भी उस से परेशान थे, सो वे भी इस साजिश में शामिल हो गए.

22 अप्रैल, 2026 को मोनिश ने अर्चना को फोन कर के प्रयागराज के संदलपुर भलेथुआ गांव में स्थित खेत पर रात को बुलाया कि मैं तुम से शादी करूंगा. इस के लिए पापा और भाई भी राजी हो गए हैं और तुम से मिलना चाहते हैं. अर्चना भी शादी करना चाहती थी, इसलिए वह झट मिलने के लिए खेत पर पहुंच गई. मोनिश के पापा और भाई ने उसे बातों में उलझाए रखा.

मोनिश ने पहले ही प्लानिंग बना ली थी कि अर्चना को न किसी हथियार से मारना है और न ही लाठीडंडे से. तय योजना के अनुसार अर्चना को उस ने खेत में पटका और उस के ऊपर चढ़ बैठा और उस की गरदन पूरी ताकत के साथ दबा दी. मोनिश ने अर्चना की गरदन काफी देर तक दबाए रखी, जब तक कि वह मछली की तरह तड़प कर मर नहीं गई. उस के बाद सभी उस की लाश को वहीं छोड़ घर आ गए.

संदलपुर मलेथुआ गांव में 23 की सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब उसी गांव के निवासी राजेंद्र पटेल का छोटा बेटा आर्यन रोतेबिलखते हुए घर में घुसा. वह घबराते हुए घर वालों और अपने पापा से बोला, ‘ब…ब…बापू बापू. बेटे को बेतहाशा रोतेहकलाते देख राजेंद्र बोला, क्या हुआ आर्यन, क्यों रो रहा है? इतनी सुबहसुबह क्या तुझे किसी ने मारा है? ‘बापू…बापू द..दीदी…दीदी. क्या हुआ दीदी को? बापू, दीदी अपनी चारपाई पर नहीं है. मैं पेशाब करने उठा था तो देखा खाट खाली है. थोड़ा आगे बढ़ा तो..? इतना कह कर आर्यन फिर से दहाड़ें मार कर रोने लगा और बोला, दीदी को किसी ने मार दिया. उस की लाश आगे खेत में पड़ी हुई है. मैं ने उसे बहुत उठाया, लेकिन वह कुछ भी नहीं बोल रही है.

बेटे की बात सुन राजेंद्र समेत सभी घर वाले खेत की ओर भागे तो देखा सच में वहां अर्चना की लाश पड़ी हुई थी. देखते ही देखते पूरा गांव इकट्ठा हो गया. राजेंद्र और उस के घर वालों का रोरो कर बुरा हाल था. अर्चना की लाश को चारपाई पर डाल कर घर लाया गया. तब तक गांव के प्रधान ने फूलपुर थाने को फोन कर के घटना की सूचना दे दी थी. कुछ ही देर में एसएचओ शेषनाथ पाल पुलिस टीम के साथ संदलपुर मलेथुआ गांव पहुंच गए. साथ ही उन्होंने फोरैंसिक टीम और अपने उच्चाधिकारियों को भी घटना की सूचना दे दी.

पुलिस ने घटनास्थल व डैडबाडी का बारीकी से निरीक्षण किया. अभी छानबीन चल ही रही थी कि एसीपी (गंगापार) विवेक यादव के साथ फोरैंसिक टीम व डौग स्क्वायड वाले भी घटनास्थल पर पहुंच गए.

बारीकी से घटनास्थल का निरीक्षण किया गया. मौके पर पहुंची डौग स्क्वायड के खोजी कुत्ते को छोड़ा तो वह सीधा चारपाई पर आता, कभी खेत पर जहां मृतका की डैडबौडी पड़ी थी, वहां जा कर रुक जाता. फोरैंसिक टीम को भी कोई खास सफलता नहीं मिल पा रही थी. बहरहाल, शव का पंचनामा कर के उसे पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया गया.

आगे की काररवाई के लिए डीसीपी (गंगापार) कुलदीप सिंह गुनावत व एसीपी विवेक यादव ने हत्याकांड का शीघ्र परदाफाश करने के लिए एक पुलिस टीम गठित की, जिस में मुख्यरूप से थाना फूलपुर के एसएचओ शेषनाथ पाल, एसआई सौरभ पांडेय, शैलेंद्र कुमार, कांस्टेबल मृत्युंजय सिंह व संजय यादव को शामिल किया गया.

मृतका अर्चना के पापा राजेंद्र पटेल से पुलिस अधिकारियों ने पूछताछ की कि आखिर उन की बेटी की हत्या क्यों की गई होगी? उस की हत्या करने के पीछे कोई न कोई बड़ा राज जरूर छिपा होगा, अन्यथा कोई ऐसे ही जघन्य अपराध करने की हिम्मत नहीं करेगा. इस पर राजेंद्र फूटफूट कर रोने लगा और रोते हुए बोला, साहब, घर से महज 20 मीटर की दूरी पर मोनिश पटेल का घर है. उस के और उस के घर वालों के अलावा मेरी बेटी को कोई और नहीं मार सकता.

राजेंद्र की बात सुन कर इंसपेक्टर शेषनाथ पाल चौंकते हुए बोले, क्यों किस लिए तुम्हारी बेटी की हत्या मोनिश और उस के परिजन करेंगे? क्या बात है, खुल कर साफसाफ पूरी बात बताओ ताकि हम तुम्हें न्याय दिला सकें. ‘साहब, मैं वह अभागा बाप हूं, जिस की बेटी को बहलाफुसला कर कर मोनिश ने अपने प्रेमजाल में फांस रखा था. दोनों चोरीछिपे एकदूसरे से मिलते थे. महीनों तक हमें कोई जानकारी नहीं थी.

इन दोनों की प्रेम कहानी अभी हाल ही में मुझे भी अर्चना के गर्भवती होने के बाद पता चली, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. 3 बेटों और 4 बेटियों में चौथे नंबर की थी अर्चना. राजेंद्र ने बताया कि हम दोनों एक ही बिरादरी के हैं. समाज में हमारी बदनामी हो रही थी. बेटी गर्भ से थी, वे लोग बड़े पैसे वाले हैं, घर में 4 ट्रैक्टर हैं, 2 बेटे विदेश में हैं. धनवान लोग हैं. और हम ठहरे गरीब किसान मजदूर, बस इसी बात का फायदा मेरी भोलीभाली मासूम बेटी से मोनिश ने उठाया है. अब मुझ अभागे को न्याय दिलाइए साहब.

Love Betrayal Crime
पुलिस हिरासत में मोनीश, उसके पापा लाल बहादुर और भाई विकास पटेल

बहरहाल, फूलपुर थाने में मृतका के पापा राजेंद्र पटेल से लिखित तहरीर ले कर 24 घंटे में आरोपी मोनिश पटेल, उस के पापा लालबहादुर पटेल, बड़े भाई विकास पटेल को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया और तीनों से कड़ाई से पूछताछ की गई. शुरूशुरू में मोनिश अर्चना की हत्या की बात से इंकार करता रहा, लेकिन उस के साथ प्रेम संबंध की बात स्वीकार कर लिया. वह बारबार पुलिस से यही कहता रहा कि उस ने अर्चना की हत्या नहीं की.

जब पुलिस ने थोड़ी सख्ती की तो उस ने प्रेमिका की हत्या करना स्वीकार कर लिया और चीखते हुए बोला, हां, मैं ने ही उस कमीनी की हत्या की है. इस उम्र में कौन ऐसा लड़कालड़की हैं, जो दूध के धुले हैं. अरे, तो क्या सभी एकदूसरे से शादी कर लेते हैं. उस की उम्र 20 और मेरी 24 साल है, हो गया नैन मटक्का. पिछले डेढ़दो साल से हमारे बीच संबंध रहे हैं. कभी हम दोनों खेतों पर, कभी प्लौट पर मिलतेजुलते रहते थे.

इसी बीच मेरी शादी तय हो गई जून के महीने में मेरी बारात जानी थी, और वह थी कि वह मेरे साथ शादी के सपने देख रही थी, जिस के लिए मैं और मेरे परिवार वाले कतई तैयार नहीं थे. अर्चना को समझाने की मैं ने बहुत कोशिश की, लेकिन वह किसी भी हाल में मानने को तैयार नहीं थी. उल्टे मुझे थाना तब मजबूरी में उस की हत्या करनी पड़ी.  पुलिस कोर्टकचहरी की धमकी देने लगी.

पुलिस ने मोनिश पटेल, उस के पापा लालबहादुर पटेल, भाई विकास पटेल से पूछताछ कर उन के खिलाफ धारा 103(1) बीएनएस 2023 के तहत मामला दर्ज कर कोर्ट में पेश किया, जहां से तीनों को जिला कारागार भेज दिया गया.

—कथा में मृतका अर्चना और आर्यन बदला हुआ नाम है

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