Criminal Conspiracy. ममता एक तीर से 3 निशाने साधना चाहती थी. अपनी ओर से उस ने पूरी कोशिश भी की, लेकिन उस से चूक यह हो गई कि वह अपने और आरती के डीलडौल में फर्क करना भूल गई. उस की यही एक भूल उसे जेल ले गई.
‘‘मामी, तुम 2-3 दिन से मेरे साथ कोई खेल क्यों नहीं खेल रहीं? काम कर के पलंग पर जा लेटती हो और चुपचप पड़ी सोचती रहती हो. हो क्या गया है तुम्हें?’’ चौदह वर्ष की आरती ने आखिरकार अपनी मामी से पूछ ही लिया. ‘‘मेरी प्यारी लाडो, ऐसी कोई बात नहीं है. चलो आज एक नया खेल खेलते हैं.’’ ममता मामी ने पलंग से उठते हुए आरती से कहा. ‘‘कौन सा नया खेल खेलोगी मामी?’’ आरती ने पूछा.
‘‘परसों रात हम लोगों ने ‘सावधान इंडिया’ में वह ऐपीसोड देखा था न, जिस में एक कातिल औरत बड़ी होशियारी से कत्ल कर के रफूचक्कर हो गई थी?’’ ‘‘ध्यान नहीं है, मामी.’’ आरती ने कुछ सोचते हुए कहा, तो ममता बड़े अल्हड़पन से बोली, ‘‘जब खेलेंगे तो सब ध्यान आ जाएगा.’’ कहते हुए ममता दूसरे कमरे से रस्सी उठा लाई और आरती से बोली, ‘‘आओ रसोई में चलते हैं.’’
आरती पीछेपीछे चली गई तो किचन में जा कर ममता बोली, ‘‘तुम मेरे हाथपैर बांधो, फिर मैं हाथ जोड़ते हुए कहूंगी, ‘मुझे माफ कर दो’ इस पर तुम बोलोगी, ‘आज मैं तुम्हें माफ करने वाली नहीं हूं’ फिर हमारे बीच डायलौगबाजी होगी.’’ आरती को यह सब समझाते हुए ममता रसोई के फर्श पर लेट गई. आरती ने मामी के कहने पर उस के हाथपैर बांध दिए.
इस के बाद ममता गिड़गिड़ाते हुए बोली, ‘‘मुझे माफ कर दो, अब ऐसी गलती कभी नहीं करूंगी.’’ लेकिन आरती को डायलौग बोलने नहीं आते थे, वह चुपचाप खड़ी रही. इस पर ममता ने आरती से हाथ पैर खुलवाते हुए कहा, ‘‘तुम डायलौग नहीं बोल सकती, चलो मैं बोलूंगी. तुम अपने हाथपैर बंधवाओ.’’ आरती ने हाथपैर खोल दिए तो ममता खड़ी हो गई.
‘‘ठीक है मामी, मुझे वह सीरियल याद आ गया. तुम्हीं मेरे हाथपैर बांधो.’’ आरती हाथपैर बंधवाने को तैयार हो गई. ‘‘लो पहले तुम मेरे कपड़े, जेवर पहन कर मेरी तरह बन जाओ.’’ ममता ने आरती को समझाते हुए कहा और उसे अपने जेवर कपड़े पहना दिए. यहां तक कि उस ने आरती के पैरों की अंगुलियों में अपनी बिछिया भी डाल दीं. इस के बाद उस ने आरती को लिटा कर अपने दुपट्टे से उस के हाथपैरों को बांध दिया. साथ ही एक कपड़े से आरती का मुंह भी बांध दिया. अब वह मुंह से आवाज तक नहीं निकाल सकती थी.
इतना सब करने के बाद ममता ने अपना असली खेल शुरू करते हुए हीटर के तारों से उसे करंट लगाना शुरू किया. बिजली के करंट से बिलबिला कर आरती मछली की तरह फर्श पर इधर से उधर तड़पने लगी. पर ममता को उस पर जरा भी दया नहीं आई. जब करंट से भी आरती नहीं मरी तो उस ने रसोई में रखा मिट्टी का तेल उस के ऊपर डाला और आग लगा कर घर से निकल गई.
कुछ देर बाद पड़ोसियों ने घर से धुंआ निकलते देखा तो 2-3 लोग घर के अंदर पहुंचे. रसोई का वीभत्स दृश्य देखते ही सब चीखते हुए बाहर भागे. चीखपुकार मची तो पूरा गांव इकट्ठा हो गया. जैसेतैसे आग बुझाई गई तो किचन में जली हुई एक लाश पड़ी नजर आई. कुछ लोगों ने उसे ममता की लाश बताया. लेकिन 1-2 लोग ऐसे भी थे जिन्होंने ममता को बाहर जाते देखा था. वे कह रहे थे कि लाश ममता की नहीं है. कुछ दिन पहले ममता की मां उसे साथ ले कर उस की ससुराल आई थी. वह रोते हुए चीखचीख कर उसे ममता की ही लाश बता रही थी. आगे बढ़ने से पहले यह जान लें कि माजरा क्या था.
उत्तर प्रदेश के जिला हाथरस के थाना मुरसान क्षेत्र का एक गांव है करीज. राजेंद्र प्रसाद इसी गांव में रहते थे. उन के परिवार में उन की पत्नी के अलावा बेटा भूरेंद्र उर्फ भूरे और उस की पत्नी ममता व उन की 14 वर्षीय धेवती आरती थी. आरती मामा के घर रह कर आठवीं कक्षा में पढ़ रही थी.
8 माह पूर्व राजेंद्र प्रसाद के छोटे बेटे भूरेंद्र उर्फ भूरे की शादी जिला हाथरस, तहसील सादाबाद के गांव सलेमपुर निवासी सुरेंद्र कुमार की बेटी ममता के साथ हुई थी. ममता खूबसूरत तो थी ही, साथ ही हृष्टपुष्ट भी थी. कहा जाता है कि शादी से पूर्व गांव के 2 युवकों से ममता के अनैतिक संबंध थे. शादी के बाद भी उन में से एक युवक के फोन ममता की ससुराल में आया करते थे. ममता उस से देरदेर तक बातें करती रहती थी.
मामी को बातें करते देख भांजी आरती ने कई बार उस से पूछा भी था कि वह हंसहंस कर किस से बातें करती है. इस पर ममता ने आरती को बताया था कि वह अपने मामा के लड़के से बात करती है. वह जबतब फोन कर के हालचाल पूछता रहता है.
ड्राइवर होने की वजह से भूरेंद्र अकसर घर से बाहर रहता था. ममता ससुर राजेंद्र प्रसाद सुबह ही कस्बा मुरसान स्थित अपनी दुकान पर चले आते थे. घर पर रहते थे सिर्फ 3 लोग, ममता, उस की सास व 14 साल की भांजी आरती.
आरती अपनी नानी के बजाय मामी से ज्यादा घुलीमिली थी. मामी ममता भी घर का सारा कामकाज निपटा कर आरती के साथ खेल खेला करती थी. कभी कोई खेल, तो कभी कोई. यह दोनों के टाइमपास और मनोरंजन का जरिया था.
ममता की चचिया सास मुनेश भी गांव में ही रहती थी. लेकिन दोनों परिवारों का मकान भी अलग था और खानपान भी. मुनेश का ही बेटा था अलकेश, जो भूरेंद्र से छोटा था. वह ममता को भाभी कहता था. उस के घर आनेजाने पर कोई रोकटोक नहीं थी. होती भी कैसे? वह राजेंद्र प्रसाद के छोटे भाई का बेटा था. पारिवारिक सदस्य की तरह.
देवर होने की वजह से अलकेश ममता से हंसीमजाक करता रहता था. ममता ने उस की बात का कभी बुरा नहीं माना था. इस के बजाय कभीकभी वह मजाकमजाक में सीमाएं लांघ जाती थी. अलकेश ने कभी भी भाभी के बेहूदे मजाक का गलत अर्थ नहीं लगाया था. वह इसे भाभी का अल्हड़पन समझ कर हंसते हुए सिर्फ इतना कहता था, ‘‘मुझे भैया मत समझना, मैं अपनी सी पर आ गया तो दैयादैया कहती नजर आओगी.’’
अपनी बात कह कर अलकेश बाहर चला जाता था. एकदो बार ममता की सास ने उसे टोका भी था, ‘‘बहू, तू क्यों लड़के को परेशान करती है?’’ पर उफनती जवानी वाली ममता को यह बात समझ नहीं आती थी. वह सास की बात एक कान से सुन कर दूसरे से निकाल देती थी. एक दिन अलकेश घर में घुसा ही था कि ममता पूरे बदन पर केवल तौलिया लपेटे बाथरूम से नहा कर बाहर निकली. अलकेश को सामने देखते ही वह बनावटी गुस्सा चेहरे पर ला कर बोली, ‘‘शर्म नहीं आती, बिना आवाज दिए अंदर घुस आए?’’
‘‘अपने घर में घुसने के लिए क्या आवाज देनी पड़ेगी? शर्म तो तुम्हें आनी चाहिए जो किवाड़ खुले छोड़ कर नंगी नहाती हो और तौलिया लपेट कर बाथरूम से बाहर निकल आती हो. ठीक है घर में कोई मर्द नहीं रहता, फिर भी दरवाजा तो बंद रखना ही चाहिए भाभी.’’ अलकेश ने ममता को समझाने की कोशिश की.
‘‘यह सोच कर किवाड़ खुले छोड़ दिए थे कि हमारे देवरजी तशरीफ ला रहे होंगे. अगर दरवाजा बंद होता और तुम खटखटाते तो भी तो मुझे ही बाथरूम से आ कर दरवाजा खोलना पड़ता. तब तो ये तौलिया भी बदन पर नहीं होता. तब क्या करते देवरजी?’’ ममता ने अपने बदन को ढकने की नाकाम कोशिश करते हुए हंस कर पूछा और भाग कर कमरे में चली गई. अलकेश वापस लौट गया.
अलकेश वापस तो लौट गया था, पर ममता का गदराया हुआ बदन उस के दिमाग से नहीं निकल पा रहा था. गांव में इधरउधर घूमने के बाद वह फिर ममता को देखने उस के घर जा पहुंचा. उस वक्त ममता कपड़े पहन चुकी थी और चाय बनाने किचन में जा रही थी. अलकेश को फिर आया देख वह मुसकरा दी. उसे मुसकराते देख अलकेश ने पूछा, ‘‘ताई वगैरह कहां हैं?’’ ‘‘मांजी आरती को ले कर बाजार गई हैं.’’ ममता ने कहा, ‘‘बैठ जाओ, चाय बनाती हूं.’’
‘‘भाभी, यहां से जाने के बाद कहीं मन ही नहीं लगा. इसलिए वापस लौट आया.’’ अलकेश ने अपने बालों में अंगुली फिराते हुए कहा. ‘‘तुम्हारी भाभी अच्छेअच्छों की नींद उड़ा देती है. मुझे मालूम था कि तुम्हें भी चैन नहीं आएगा.’’ ममता पूरे मूड में थी. वह चाय बनातेबनाते उस से बतियाती रही. ‘‘सचमुच बहुत जोरदार चीज हो तुम भाभी.’’ अलकेश ने डरतेडरते मन की बात कह दी. ‘‘तुम्हें कैसी लगी ये चीज?’’ नाराज होने के बजाय ममता ने चाय का प्याला उस की ओर बढ़ाते हुए कहा, ‘‘चाय पीओ.’’ ‘‘अगर चीज बढि़या न लगी होती तो दोबारा यहां लौट कर क्यों आता?’’ अलकेश चाय का प्याला लेते हुए बोला.
ममता ने अलकेश को खुला निमंत्रण दिया था. वह भी खुद पर कहां तक काबू रखता? उस ने खुल कर बात करनी शुरू की तो ममता दिल और शरीर के सारे पट खोलने को तैयार हो गई. फलस्वरूप उसी दिन दोनों के बीच अवैध संबंध बन गए. अलकेश और ममता के बीच की सारी दीवारें टूट चुकी थीं. जब भी ममता को अलकेश की जरूरत होती, फोन कर के उसे बुला लेती और जब अलकेश चाहता तो मौका देख कर खुद ही आ जाता. धीरेधीरे ममता अलकेश के प्यार में दीवानी होती चली गई. अलकेश भी उस के इश्क में पागल बन गया.
ममता की चचिया सास मुनेश को जब यह पता चला कि उस के बेटे अलकेश को भूरेंद्र की पत्नी ममता ने अपने प्यार के जाल में फंसा रखा है तो एक दिन वह आगबबूला हो कर ममता के घर जा पहुंची और उसे खूब खरीखोटी सुनाई. साथ ही कह भी दिया, ‘‘अगर अब कभी भी मेरे बेटे से बात की तो तुझे जिंदा ही आग लगा दूंगी.’’ अपनी चचिया सास की यह बात ममता को इतनी बुरी लगी कि वह उसे अपना दुश्मन मान बैठी. इस के बावजूद न तो ममता ने अलकेश से बोलना छोड़ा और न ही अलकेश ने उस के पास आनाजाना बंद किया.
अब दोनों चोरीछिपे मिलने लगे थे. जहां अलकेश किसी भी हालत में ममता को छोड़ने के लिए तैयार नहीं था, वहीं ममता पूरी तरह से अलकेश की बनने को तैयार थी. बस एक अलकेश की मां ही थी, जो दोनों को अलग करने पर तुली थी.
राजेंद्र प्रसाद की बेटी रामपुर (छर्रा) में ब्याही थी. एक दिन उन के दामाद राकेश कुमार ने फोन कर के उन से कहा, ‘‘बच्चा जल गया है, बड़ी परेशानी हो रही है. आप कुछ दिन के लिए मम्मी को भेज दीजिए.’’
शाम को दुकान से घर लौट कर राजेंद्र प्रसाद ने यह बात अपनी पत्नी को बताई. अगले दिन जब वह बेटी की ससुराल जाने के लिए तैयार होने लगी तो उस ने आरती से पूछा, ‘‘मैं रामपुर जा रही हूं. तू मम्मीपापा के पास चलेगी?’’ लेकिन आरती ने जाने से मना कर दिया. इस पर वह अकेली ही अपनी बेटीदामाद के घर रामपुर चली गई. सास के जाने के बाद ममता ने सादाबाद से अपनी मां राममूर्ति को अपने पास बुला लिया. सास के चले जाने के बाद ममता को किसी का कोई डर नहीं रह गया था. अब वह जरा सा मौका मिलते ही फोन कर के अलकेश को घर बुलाने लगी.
राममूर्ति को अपनी बेटी ममता और अलकेश की प्रेम लीला की भनक लग गई थी. इस के बावजूद मां ने अपनी बेटी से कुछ नहीं कहा. राममूर्ति जानती थी कि यह सब उस की बेटी के खेल हैं, जिन्हें वह मांबाप के घर भी खेलती थी. इस की वजह वह भूरेंद्र के बाहर रहने को भी मानती थी.
इसी सब के चलते एक दिन आरती ने अपनी मामी ममता को छोटे मामा (अलकेश) के साथ रंगरेलियां मनाते हुए देख लिया. उस ने दूसरे कमरे में आराम से लेटी ममता की मां राममूर्ति के पास जा कर कहा, ‘‘नानी, जरा उठ कर देखो, मामी छोटे मामा अलकेश के साथ कपड़े उतार कर पता नहीं क्या कर रही हैं?’’
‘‘चुप हो जा, ऐसी बातें देखने के बाद भी किसी से नहीं कहते. ऐसी बातें बताना भी पाप होता है.’’ राममूर्ति ने आरती को समझा कर चुप करा दिया. अलकेश के जाने के बाद राममूर्ति ने ममता से कहा, ‘‘आज आरती ने तेरी करतूतें अपनी आंखों से देख ली हैं. उस ने दूसरे कमरे में आ कर मुझे भी बताया. यह सब गलत है बेटी, अब तू शादीशुदा है, ऐसे खेल खेलना छोड़ दे. वैसे भी तू पहले से ही बदनाम है.’’
लेकिन ममता पर मां की बात का कोई असर नहीं पड़ा. वह चुपचाप सुन कर आरती के पास जा पहुंची और प्यारप्यार में आरती से सब कुछ पूछ लिया. नादान आरती ने बातोंबातों में कह दिया कि नानी ने तो कुछ नहीं कहा, अब वह मामा के घर लौटने पर उन्हें सब कुछ बताएगी.
‘‘तू जिंदा रहेगी तभी तो बताएगी?’’ बुदबुदाती हुई ममता अपने कमरे में जा कर पलंग पर लेट गई. आरती ने बातोंबातों में भले ही कुछ भी कह दिया था, लेकिन उस के मन में कोई मैल या दुर्भावना नहीं थी. वैसे भी घर में किसी और के न रहने से वह दिनरात ममता के साथ लगी रहती थी. वह मासूम नहीं जानती थी कि जो बात उस ने यूं ही कह दी है, ममता मामी उसे दिल से लगाए बैठी है.
इस के दूसरे दिन ही 16 मई, 2016 को दोपहर 12 बजे ममता ने खेलखेल में आरती को बांध कर उस की नृशंस तरीके से हत्या कर दी. उस ने उस मासूम को करंट लगा कर भी मारने की कोशिश की. जब वह करंट से नहीं मरी तो उस ने उस पर मिट्टी का तेल छिड़का और आग लगा दी. इस के बाद वह घर से निकल गई. आरती की लाश की शिनाख्त उस के खुद के रूप में हो, इसलिए ममता ने उसे अपने कपड़े और गहने पहना दिए थे.
गांव वालों ने इस वीभत्स हादसे की सूचना पुलिस को दे दी थी. उन्होंने आरती के नाना राजेंद्र प्रसाद को फोन कर के उन्हें भी इस बारे में बता दिया था. खबर मिलते ही थाना मुरसान के थानाध्यक्ष मोहम्मद असलम पुलिस टीम के साथ घटनास्थल के लिए रवाना हो गए.
थोड़ी देर में हाथरस के एसपी डा. अजयपाल शर्मा और सीओ सिटी प्रीति सिंह भी गांव करील स्थित घटनास्थल पर जा पहुंचे. तब तक राजेंद्र प्रसाद भी अपने घर पहुंच चुके थे. लाश देखने के बाद भी राजेंद्र प्रसाद धोखा खा गए. उन्होंने पुलिस अधिकारियों को बताया कि ये लाश उन की पुत्रवधू की है. लेकिन लोगों द्वारा सही स्थिति बताने पर लाश उन की धेवती आरती की पाई गई. उसे राजेंद्र प्रसाद ने 2 साल की उम्र से ही अपने पास रख कर पालापोसा और पढ़ाया था.
हत्या के समय समय आरती आठवीं में पढ़ रही थी. आरती नानानानी और मामा की दुलारी थी. इसीलिए वह भाई के जलने की खबर पा कर भी नानी के साथ अपने मांबाप के घर नहीं गई थी. ममता की वह काफी करीबी थी.
पूछताछ में पुलिस को पता लग गया कि आरती की हत्या ममता और अलकेश के प्रेम संबंधों के चलते हुई थी. आरती ने उन दोनों को आपत्तिजनक स्थिति में एकसाथ देख लिया था और यह बात मामा को बताने की धमकी दी थी, इसी वजह से आरती की साजिशन हत्या हुई थी.
पुलिस अधिकारियों द्वारा पूछताछ के बाद मुरसान के थानाध्यक्ष मोहम्मद असलम ने पंचनामे के बाद लाश को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया. हत्या का यह मुकदमा उसी दिन मृतका आरती के नाना राजेंद्र प्रसाद की तहरीर पर ममता, उस की मां राममूर्ति और एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ धारा 302 व 201 के तहत दर्ज कर लिया गया. सीओ सिटी प्रीति सिंह अपनी टीम के साथ गांव करील पहुंची और ममता की मां राममूर्ति को गिरफ्तार कर के थाना मुरसान ले आईं.
इस मामले में मुख्य आरोपी ममता की गिरफ्तारी सब से अहम थी. इस के लिए एसपी डा. अजयपाल शर्मा के निर्देशन में पुलिस की दो टीमें बनाई गईं. इन में से एक टीम ममता के मायके सलेमपुर, सादाबाद भेजी गई और सीओ सिटी प्रीति सिंह के निर्देशन में दूसरी टीम ने संभावित जगहों पर दबिश दी. क्योंकि किसी भी कीमत पर ममता को गिरफ्तार करना जरूरी था.
दूसरे दिन ममता को पास ही के गांव जटोई से गिरफ्तार कर लिया गया. वह गन्ने के एक खेत में छिपी हुई थी. उसे गिरफ्तार कर के थाना मुरसान लाया गया. ममता की गिरफ्तारी की खबर थानाध्यक्ष मोहम्मद असलम द्वारा जब एसपी डा. अजयपाल शर्मा और सीओ सिटी प्रीति सिंह को दी गई तो दोनों पुलिस अधिकारी थाना मुरसान जा पहुंचे.
ममता से सीओ सिटी प्रीति सिंह और एक महिला एसआई ने विस्तार से पूछताछ की. उस ने बताया कि आरती की हत्या ‘सावधान इंडिया’ का एक ऐपीसोड देख कर पूरी योजना के तहत की गई थी. हत्या क्यों की गई? प्रीति सिंह के पूछने पर ममता ने बताया कि आरती ने उसे अलकेश के साथ आपत्तिजनक हालत में देख लिया था और वह अपने मामा भूरेंद्र से बताने को कह रही थी.
पुलिस को संदेह था कि भूखीप्यासी ममता एक दिन और एक रात अकेली खेत में छिप कर नहीं रह सकती. जरूर किसी ने उस की मदद की होगी. लेकिन जब यह बात ममता से पूछी गई तो उस ने सच नहीं बताया.
एसपी डा. अजयपाल ने अपनी प्रैस मीटिंग में बताया कि ममता के संबंध पिछले 4 महीनों से अपनी चचिया सास मुनेश के बेटे अलकेश के साथ थे. पूछताछ के बाद उसी दिन ममता को जेल भेज दिया गया.
दिल दहला देने वाली इस घटना की सूचना पर गांव करील पहुंचे एसपी डा. अजयपाल और क्षेत्राधिकारी (नगर) प्रीति सिंह ने बताया कि उस रसोई, जिस में आरती की हत्या की गई थ, की दीवार पर लिखा था- ‘मेरी हत्या मुनेश चाची ने की है- ममता.’
यानी ममता अपनी चचिया सास मुनेश को अपनी हत्या में महज इस खुन्नस से फंसाना चाहती थी क्योंकि उस ने ममता व अपने बेटे अलकेश के संबंध पता लगने पर ममता को न केवल बहुत बुराभला कहा था, बल्कि यहां तक कह दिया था कि आज के बाद अगर उसे अलकेश से बातें करते देखा गया तो उसे जिंदा आग लगा देगी. इसी वजह से ममता ने मुनेश को निशाने पर ले कर दीवार पर उस का नाम लिख दिया था ताकि वह उस की हत्या में फंस जाए.
दूसरे निशाने पर रास्ते का रोड़ा बनी आरती को ममता बना कर जला देना था, जिस से सब लोग लाश को ममता की ही समझें. उस का तीसरा निशाना खुद को मरी दिखा कर कानून से बचना था.
दाद देनी होगी ममता के दिमाग की जो एक निशाने से 3 शिकार करना चाहती थी. लेकिन वह मात इसलिए खा गई क्योंकि आरती के बदन व ममता के बदन और डीलडौल में जमीन आसमान का फर्क था.
ममता चचिया सास को झूठे कत्ल में फंसा कर उसी के बेटे अलकेश की बन जाना चाहती थी. उस ने इस बात पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया था कि अगर मृतका को ममता मान भी लिया जाता तो भी आरती की तलाश तो होती ही, और तब हकीकत सामने आ ही जाती.
कथा लिखे जाने तक अलकेश नहीं पकड़ा जा सका था.
इस मामले में पुलिस कप्तान डा. अजयपाल का कहना था कि जिस वीभत्सता के साथ घटना को अंजाम दिया गया था, उसे देखते हुए आरोपियों के खिलाफ एनएसए लगाने की संस्तुति की जाएगी. भरसक प्रयास होगा कि इन पर एनएसए लगे. Criminal Conspiracy
लेखक: कुंवर शैलेश बिट्टन






