Aligarh Suicide Case. जब दोनों प्रेमियों की अर्थियां एक साथ आगेपीछे कालोनी से निकलीं तो भले ही बुरा किया हो, पर देखने वालों की जुबां पर उस वक्त एक ही बात थी— ‘‘वाह री मोहब्बत’’
किशन कारखाने जाने के लिए हाथ में लंच बौक्स थामे जल्दी से घर से निकला और सीधे लता की दुकान पर जा पहुंचा. जेब से 10 का नोट निकाल कर वह टाफियों के डिब्बे पर रखते हुए बोला, ‘‘भाभी,एक गुटखा देना.’’ लेकिन लता ने न तो 10 का नोट उठाया और न ही उसे गुटखा दिया. इस पर किशन ने कहा, ‘‘जल्दी गुटखा दो भाभी, मुझे वैसे ही देर हो गई है.’’
‘‘नोट उठा कर हाथ में दो, तब दूंगी.’’ लता शरारती लहजे में बोली. ‘‘तुम्हें हाथ में लेने का इतना शौक है तो लो थामो.’’ कहते हुए किशन ने नोट उठा कर लता के हाथ पर रख दिया. लता ने लड़ी में से एक गुटखा तोड़ा और किशन को देते हुए हंस दी. ‘‘हर समय तुम्हें दिल्लगी ही सूझती है.’’ कहते हुए वह गुटखा ले कर चला गया. गुटखा 5 रुपए का था. उस के 5 रुपए लता पर ही रह गए.
शाम को किशन जब कारखाने से वापस लौटा तो लता की दुकान के पास खड़े उस के दोस्त ने उसे पुकारा, ‘‘शायर साहब, अबे भाई गुटखा तो खिलवा दे.’’ ‘‘जरा टिफिन घर रख आऊं, बस 5 मिनट में आता हूं.’’ कहते हुए किशन घर चला गया. टिफिन रख कर वह लता की दुकान पर आ कर बोला, ‘‘भाभी, इसे गुटखा दे दो. सुबह 5 रुपए रह गए थे न?’’
लता ने चुपचाप लड़ी से गुटखा तोड़ा और किशन के दोस्त को दे दिया. आधा गुटखा उस ने खुद खाया और आधा किशन को दे कर चला गया. दोस्त के जाने के बाद लता ने पूछा, ‘‘किशन, तुम्हारे दोस्त तुम्हें ‘शायर साहब’ क्यों कहते हैं?’’ ‘‘कहते होंगे, तुम्हें क्या लेनादेना?’’ किशन ने यूं ही कह दिया. ‘‘सुनने में अच्छा लगता है.’’ लता चुप नहीं रही.






