PNB Gold Loan Fraud. शेयर मार्केट में करोड़ों के नुकसान की भरपाई के लिए पंजाब नैशनल बैंक के सीनियर ब्रांच मैनेजर अमित कुमार जांगिड़ ने अपनी ही ब्रांच में रखी करोड़ों रुपए की सोने की ज्वैलरी तो गायब की, साथ ही तमाम फरजी लोन से भी करोड़ों रुपए कमाए. यदि एक महिला शिकायत नहीं करती तो शायद यह घोटाला इतना बड़ा हो जाता कि

अमित कुमार जांगिड़ राजस्थान के जिला झुंझुनू के नानसा गेट में स्थित पंजाब नैशनल बैंक शाखा में सीनियर ब्रांच मैनेजर था. वह पिछले 3 साल से इसी शाखा में तैनात था. बात साल 2023 की है. साल का अंतिम महीना चल रहा था. पिछले कई दिनों से वह मानसिक तनाव में था. एक रोज वह अपनी ब्रांच में कुछ ज्यादा ही निराश था. उस का मन काम में नहीं लग रहा था. बैंक के कई काम पेंडिंग हो गए थे. बारबार उस के सीनियर का मैसेज आ रहा था. कौल आ रहे थे. कहा जा रहा था, जल्दी काम पूरा करें. कुछ माह में क्लोजिंग आएगी, तब अचानक से उन पर काम का बोझ बढ़ जाएगा.

कुछ माह पहले ही वह इस ब्रांच में आया था. वह अतिमहत्त्वाकांक्षी था. उसे किसी ने बताया कि शेयर बाजार में पैसा लगा कर तेजी से पैसा कमाया जा सकता है. उस ने ऐसा ही किया.

शेयर बाजार में अपनी जमापूंजी झोंक दी. इस के लिए जरूरत पडऩे पर बैंक, दोस्तों और रिश्तेदारों से कर्ज भी ले लिया. सारी पूंजी उस ने शेयर बाजार में गंवा दी. यह करीब 2.50 करोड़ रुपए था.

कहां तो वह करोड़पति बनने का ख्वाब देख रहा था और उसे शेयर बाजार में लगे जबरदस्त घाटे से कंगाली के कगार पर ला दिया था.

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अमित इसी घाटे से उबरने के लिए गहरी सोच में था. उस की रातों की नींद उड़ चुकी थी. गहरी चिंता में डूबे अमित का ध्यान तब भंग हुआ, जब बैंक में साथ काम करने वाले संतोष सैनी ने उस की मेज थपथपाई और बोला, ”कहां खोए हो भाई, चलो स्ट्रांग रूम में चलना है.’’

”आं…क्या कहा स्ट्रांग रूम?’’ ”हां, स्ट्रांग रूम! वहां के लौकर से एक क्लाइंट को गहने लेने हैं.’’ ”अच्छा चलो, मैं आता हूं…चाबी निकालता हूं.’’ अमित बोला. ”अजीब औरत है वह, हर 2-3 महीने पर गहने छुड़ाती है. फिर अगले कुछ दिन बाद रखने चली आती है. पिछले मंगलवार को ही तो वह गहने रख कर गई थी.’’ सैनी बोला.

”कोई बात नहीं, उस के गहने हैं. वह चाहे जो करे…बैंक को तो उस के बदले में पेमेंट कर ही रही है.’’ अमित बोला और अपनी कुरसी से उठ कर अलमारी से लौकर की चाबी निकालने से पहले वह संतोष द्वारा ले कर आए रजिस्टर को चैक करने लगा.

जल्द ही रजिस्टर चैक कर सामने के कंप्यूटर पर लौकर के ग्राहक की डिटेल चैक की और वहां से ओके करने के बाद रजिस्टर और साथ लाई परची पर साइन कर दिए. तब तक सैनी वहीं खड़ा रहा.

बनाया मालामाल प्लान

बैंक की शाखा में गोल्ड लोन के बदले गिरवी रखे गहनेजेवरात को स्ट्रांग रूम स्थित गोल्ड सेफ के लौकर में रखा जाता था. इस की 2 चाबियां बनाई गई थीं. एक चाबी सीनियर ब्रांच मैनेजर अमित जांगिड़ के पास थी और दूसरी चाबी उपप्रबंधक अनंत प्रकाश चौधरी के पास रहती थी. उपप्रबंधक ने अपनी वाली चाबी सीनियर मैनेजर अमित को ही दे रखी थी.

ग्राहक पहले संतोष सैनी के पास आते थे, जिन की वह कागजी छानबीन और रजिस्टर में एंट्री करने के बाद ग्राहक की परची और रजिस्टर ले कर अमित जांगिड़ के पास आता था. दोनों स्ट्रांगरूम में साथ जाते थे. ग्राहक भी साथ होते थे, किंतु उन्हें स्ट्रांगरूम के बाहर खड़ा कर दिया जाता था. इस बीच लौकर में गहने रखने या निकालने की प्रक्रिया पूरी की जाती थी.

उस रोज अमित ग्राहक को सौंपने के बाद अपनी केबिन में आ गया था. उस ने थोड़ी देर में संतोष को अपने केबिन में बुलाया. संयोग से तब तक बैंक का लंच टाइम हो गया था.

”संतोष, अपना लंच बौक्स ले आओ, आज तुम्हारे साथ लंच करता हूं. तुम से कुछ जरूरी बात करनी है.’’ अमित बोला. ”अच्छा! अभी आता हूं.’’ कह कर संतोष चला गया. थोड़ी देर में ही वह अपने लंच बौक्स के साथ अमित के केबिन में आ चुका था.

दोनों ने अपनेअपने लंच बौक्स खोल लिए थे. सैनी ने अपने लंच बौक्स में से थोड़ी सब्जी निकाल कर अमित के लंच प्लेट में रख दी थी. इस पर अमित बोला, ”जब हम लोग एकदूसरे का खाना शेयर कर रहे हैं तो हम लोग किसी काम को भी शेयर कर पूरा कर सकते हैं.’’

”हां, क्यों नहीं कर सकते, लेकिन आप का कहने का मतलब मैं नहीं समझा.’’ सैनी बोला. ”वह मैं समझाता हूं…किंतु शर्त है कि उस बारे में हमारेतुम्हारे अलावा किसी और को नहीं मालूम होनी चाहिए…और तुम्हें मेरा साथ देना होगा.’’ अमित बोला. ”काम तो बताओ. किंतु इस से क्या होगा?’’ सैनी ने आश्चर्य जताते हुए सवाल किया. ”बताता हूं विस्तार से बताऊंगा. मेरे दिमाग में एक प्लानिंग है, उस में कामयाब हो गए तो हम लोग मालामाल हो जाएंगे.’’ अमित बोला.

गोपनीय बात करने के लिए दोनों ब्रांच के पास ही बाहर पार्क में चले गए. वहां एकांत में जा कर दोनों आपस में बातें करने लगे. उन के हावभाव से स्पष्ट था कि वे किसी प्लानिंग पर विचारविमर्श कर रहे थे. अंत में दोनों के चेहरे पर चमक आ गई थी. उन्होंंने हाथ मिलाया और ब्रांच में आ गए. दोनों के बीच सहमति बन चुकी थी. वह क्या थी, इस बारे में वही दोनों जानते थे.

इस के बाद कार्यालय में उन दोनों के अच्छे दिन बीतने लगे. साथ ही रहनसहन में भी सुधार होने लगा. ब्रांच में सभी उन के कामकाज और जिम्मेदारी की तारीफ करते.

बात जनवरी, 2026 की है. झुंझुनू जिले के गांव बिरोल की रहने वाली चावली देवी को एक नोटिस मिला. वह कम पढ़ीलिखी थी. वह डाक से मिले लेटर के बारे में कुछ नहीं समझ पाई.

अगले रोज 22 जनवरी, 2026 ही सुबहसुबह को नोटिस ले कर बिरोल के सरपंच प्रतिनिधि नरेंद्र कड़वाल के पास गई.

उन्होंने नोटिस को पढ़ कर बताया कि उसे पंजाब नैशनल बैंक ने लोन चुकाने का नोटिस भेजा है. उस ने 2023 में ही डेयरी लोन लिया था, जिस की किस्त नहीं चुकाई गई है. लोन 1.60 लाख रुपए का है.

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मामला हुआ वायरल

लोन का नाम सुनते ही चावली देवी चौंक गई. बोल पड़ी कि यह कैसे हो सकता है? उस ने तो बैंक से कभी कोई लोन नहीं लिया.

इस का पता लगाने के लिए वह सरपंच के साथ नवलगढ़ स्थित नानसा गेट पीएनबी बैंक गई. वह बैंक कर्मचारी संतोष सैनी से मिले. उन्होंने बताया कि लोन चावली देवी के नाम ही है, जिस की कोई किस्त नहीं चुकाई गई है.

यह सुन कर चावली देवी बैंककर्मी पर ही बरस पड़ी. नाराज हो कर बोली कि उस ने आज तक बैंक से कोई लोन नहीं लिया. संतोष सैनी ने उसे शांत रहने को बोला और इस बारे में पता लगाने का आश्वासन दिया.

उस वक्त चावली देवी अपने घर चली गई. शाम के वक्त सैनी चावली के घर गया और उसे बैंक द्वारा तकनीकी गलती होने के बारे में बताया. इस के बदले में 21 हजार रुपए दिए. साथ ही उस ने समझाया कि उस का पूरा लोन चुका दिया गया है. अब उसे कोई नोटिस नहीं मिलेगा.

फिर भी कोई जरूरत पडऩे पर बैंक में आने के बजाय फोन से बात कर सकती है. उस ने एक परची पर मोबाइल नंबर लिख कर दे दिया. चावली देवी यह समझ नहीं पाई कि जब उस ने कोई लोन लिया ही नहीं तो उस के नाम लोन कैसा?

वह तुरंत नरेंद्र के पास गई. उन से बैंककर्मी द्वारा पैसे दिए और लोन चुका दिए जाने की बात बताई. उस के फोन नंबर की परची दे दी. यह बात भी नरेंद्र को कुछ अटपटी लगी. उन्होंने उसी वक्त बैंककर्मी संतोष सैनी को कौल किया. सैनी ने शाम को घर आने के बारे में बोला और तुरंत फोन कट कर दिया.

सैनी उसी शाम नरेंद्र के घर गया. उस ने कहा कि चावली देवी के डेयरी लोन का मामला बैंक में खत्म हो चुका है. यह सब बैंककर्मी की गलती से हो गया है. इसे वह किसी तरह का मुद्ïदा नहीं बनाएं. इस से बैंक की बदनामी होने के साथ ब्रांच के कुछ कर्मचारियों की नौकरी पर खतरा आ सकता है. इसी के साथ सैनी ने उन्हें 50 लाख रुपए देने की पेशकश की.

नरेंद्र को यह काफी अटपटी लगी. वह सोच में पड़ गए. पहले तो उन्होंने 50 लाख रुपए की पेशकश ठुकरा दी और सोशल मीडिया के माध्यम से बैंक द्वारा की गई इस गलती और रिश्वत की पेशकश पर बयान दे दिया.

मामला सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. मामले के मीडिया में आने के बाद विजिलेंस टीम सतर्क हो गई.

बैंक के उस ब्रांच की जांच शुरू हो गई, जहां चावली देवी का मामला आया था. टीम द्वारा की गई शुरुआती जांच में पता चला कि चावली देवी ने बैंक में खाता खुलवाया था. बैंकिंग कारेस्पोंडेंट (बीसी) संचालक संतोष सैनी ने उस के उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर मैनेजर से सांठगांठ कर के डेयरी लोन जारी करवा लिया था.

इस की किस्तें जमा नहीं होने पर चावली देवी को बैंक के रीजनल औफिस से रिकवरी का नोटिस भेजा गया था. संयोग से इसी दौरान 23 जनवरी, 2026 को बैंक में औडिट आ गई थी.

औडिटर को स्ट्रांगरूम का एक पैकेट खुला मिला.

उसे शक हुआ. उस ने अधिकारियों को सूचना दी. इस के बाद बैंक प्रबंधन ने आंतरिक जांच शुरू की. जांच में अलग तरह का मामला सामने आ गया. जांच की बात बैंक लोन से शुरू हुई थी, जो स्ट्रांग रूम में बने लौकर पर जा कर अटक गई थी. कुछ लौकर में रखे नकली सोने के जेवर का खुलासा हो गया.

जांच में करीब 450 पैकेट्स में से 73 गोल्ड पैकेट्स संदिग्ध थे. उन में नकली जेवरात पाए गए. 3 पैकेट में वजन भी कम मिला. वरिष्ठ शाखा प्रबंधक मुकेश सिहाग के अनुसार 4 किलो 198 ग्राम सोने के जेवरात नकली मिले, जिस की अनुमानित कीमत 6.50 करोड रुपए आंकी गई.

इस संबंध में बैंक प्रबंधन ने 28 जनवरी, 2026 को शाखा प्रबंधक अमित जांगिड़, उपप्रबंधक अनंत प्रकाश चौधरी और लोन औफिसर जितेंद्र कुमार, बैंककर्मी संतोष सैनी एवं आलोक कुमार को सस्पेंड कर दिया.

नपे बैंक अधिकारी

इस खुलासे के बाद उन गोल्ड लोन धारक ग्राहकों में भी हड़कंप मच गया था, जिन्होंने लोन के लिए गोल्ड बैंक में गिरवी रखवाया था.

औडिट में गोल्ड लोन घोटाला सामने आने पर बैंक अधिकारी मुकेश कुमार सिहाग ने पुलिस थाना नवलगढ़ में पहली फरवरी, 2026 को पीएनबी नानसा गेट शाखा नवलगढ़ के तत्कालीन वरिष्ठ शाखा प्रबंधक अमित कुमार जांगिड़ निवासी सीथल, बैंकिंग कोरेस्पोडेंट संतोष कुमार सैनी निवासी बाजी वाली ढाणी झाझड़ और उपप्रबंधक अनंत प्रकाश चौधरी निवासी मुकुंदगढ़, जिला झुंझुनू के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज करवा दिया. एसएचओ अजय सिंह ने यह जानकारी अपने सीनियर अफसरों को भी दे दी.

28 जनवरी, 2026 को गोल्ड सेफ का चार्ज डिप्टी मैनेजर सीमा महला को सौंपा जा रहा था. इस से पहले स्ट्रांगरूम की 2 चाबियां तत्कालीन बैंक मैनेजर अमित कुमार और डिप्टी मैनेजर अनंत प्रकाश चौधरी के पास थी. चार्ज ट्रांसफर के दौरान जांच में सेफ में रखे सोने के जेवरातों के पैकेटों के साथ छेड़छाड़ का पता चला. बैंक प्रबंधन ने अपने स्तर पर जांच शुरू की तो बड़े पैमाने पर सोने की हेराफेरी का खुलासा हुआ.

इस बाबत झुंझुनू जिले के एसपी बृजेश ज्योति उपाध्याय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एडिशनल एसपी देवेंद्र सिंह राजावत, नवलगढ़ के सीओ महावीर सिंह आईपीएस के सुपरविजन में 3 पुलिस टीमों का गठन किया गया. टीम में नवलगढ़ थाने के एसएचओ अजय सिंह एवं सरदार मल एसआई (प्रभारी डीएसटी) को भी शामिल किया गया.

हालांकि इस घोटाले के उजागर होने की भनक बैंक मैनेजर अमित जांगिड़ को पहले ही लग चुकी थी. इसलिए वह 23 जनवरी, 2026 को फरार हो गया था. अमित के अचानक लापता होने पर उस की पत्नी ने गुढ़ागौडज़ी थाने में पति की गुमशुदगी भी दर्ज करा दी थी.

पुलिस टीमें आरोपियों की तलाश में जुटी थीं. मामला करोड़ों के सोने की धोखाधड़ी का था. इस पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने पीएनबी की नवलगढ़ शाखा जा कर घटना की पूरी जानकारी ली.

एसपी ने बैंक की आंतरिक जांच कमेटी के साथ बैंक लौकर और स्ट्रांगरूम का निरीक्षण किया. त्वरित जांच के लिए बैंक ने एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया था. उस ने पुलिस के साथ समन्वय स्थापित कर जांच से संबंधित आवश्यक दस्तावेज और जानकारियां उपलब्ध करवाने में मदद करने का भरोसा दिया.

एसपी के निर्देश पर पुलिस टीमें फरार चल रहे सीनियर मैनेजर अमित जांगिड़ व बीसी संचालक संतोष सैनी की लगातार तकनीकी और अन्य इनपुट के आधार पर तलाश में जुट गई थीं. पुलिस ने आखिर कड़ी मशक्कत के बाद  आरोपी अमित जांगिड़ को मथुरा रेलवे स्टेशन के पास से 8 फरवरी, 2026 गिरफ्तार कर लिया.

झुंझनू पुलिस उसे मथुरा से गिरफ्तार कर नवलगढ़ थाने ले आई. जब वह पकड़ा गया था, तब उस की जेब में जहर की शीशी बरामद हुई थी. अमित का सहयोगी संतोष सैनी भी नवलगढ़ से गिरफ्तार कर लिया गया. दोनों आरोपियों से पूछताछ की तो दोनों ने गोल्ड लोन घोटाले का जुर्म कुबूल कर लिया.

पूछने पर उस ने बताया कि वह जहर खा कर या ट्रेन के आगे कूद कर सुसाइड करना चाहता था. आरोपियों ने पुलिस पूछताछ में गोल्ड लोन घोटाले की परतें खोल दीं.

पुलिस ने आरोपियों अमित जांगिड़ एवं संतोष सैनी से विस्तृत पूछताछ के लिए दोनों को 7 फरवरी, 2026 को नवलगढ़ कोर्ट में पेश कर 3 दिनों के रिमांड पर लिया. उन से की गई पूछताछ में गोल्ड लोन धोखाधड़ी की जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार है—

अमित कुमार जांगिड़ राजस्थान के हनुमानगढ़ के निवासी मातादीन जांगिड़ का बेटा था. अमित जांगिड़ को पंजाब नैशनल बैंक (पीएनबी) में मैनेजर के पद पर नौकरी मिली तो उस की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. बैंक मैनेजर बना तो उस के लिए रिश्ते आने लगे. अच्छे घरपरिवार में शादी हो गई तो हनुमानगढ़ से अमित अपने पेरेंट्स एवं पत्नी के साथ सीथल गांव में रहने लगा. वक्त के साथ अमित एक बेटी का बाप बन गया. वह अपने परिवार के साथ खुशहाल था.

इसी बीच उसे शेयर बाजार से पैसा कमाने का चस्का लग गया, जिस में उसे भारी नुकसान हो गया था. उसी नुकसान की भरपाई के लिए उस ने बैंक में घोटाले को अंजाम दिया था.

ऐसे करते गए घोटाला

यह उस के अकेले के बस का नहीं था. उसे घोटाला करने में सहयोगी चाहिए था. ऐसे में उस ने लालच दे कर बैंक कर्मचारी संतोष सैनी को अपना सहयोगी बना लिया था.

इस तरह से मैनेजर ने संतोष को धोखाधड़ी की स्क्रिप्ट बताई. संतोष को पूरी प्लानिंग बता दी. इस के बाद अमित जांगिड़ ने स्वयं का 4 करोड़ रुपए का बीमा करवा लिया. बीमा करवाने का मकसद घोटाला खुलने पर सुसाइड कर परिवार को 4 करोड़ रुपए बीमे की रकम दिलवाना था.

बीमा करवाने के बाद अमित और संतोष सैनी ने 2 साल पहले 2026 से गोल्ड लोन घोटाला शुरू कर दिया. अमित कुमार पिछले 6-7 सालों से झुंझुनू जिले में ही पोस्टेड था.

अमित ने नवलगढ़ के ही एक गोल्ड वैल्यूअर का फरजी लेटर पैड तैयार किया और उस के फरजी हस्ताक्षर से गोल्ड लोन उठाया.

उस के बाद उस ने अपने चहेतों के नाम गोल्ड लोन करवाए. दोनों ने कई लोगों के नाम फरजी गोल्ड लोन खाते खोल दिए. इस के लिए अमित ने संतोष को मोटी रकम व गोल्ड का लालच दिया.

ये लोग खाताधारकों से बैंक में ही ओटीपी प्राप्त कर गोल्ड लोन के रुपयों की बैंक में ही निकासी कर लेते थे. इस में से कुछ रुपए संतोष सैनी रख लेता था. बाकी के रुपए अमित जांगिड़ के पास रहते थे.

गोल्ड पैकेट में रखे असली गोल्ड के जेवरात बाहर निकाल कर नकली सोने के जेवरात पैकेट में रख कर वापस बैंक की सेफ में रख देते. इस के बाद अपने विश्वास के सहयोगियों से मिल कर बैंक से निकाले गए गोल्ड को अन्य बैंकों में गिरवी रख कर गोल्ड लोन लेते व लोन के रुपए अमित जांगिड़ व संतोष सैनी रख लेते.

पुलिस जांच में सामने आया कि अमित और संतोष के साथ ऐसे लोगों की तादाद 70 से अधिक है. कथा लिखे जाने तक पुलिस उन से भी पूछताछ करने की योजना बना चुकी थी. इन लोगों के खाते में ही गोल्ड लोन की राशि जमा की गई थी. इन के अपने मोबाइल नंबर पर आई ओटीपी खुद बैंक मैनेजर को दी.

आरोपियों से पूछताछ में जिन लोगों का नाम फरजी लोन करवाने में सामने आया, उन में आधा दरजन लोगों से पुलिस ने पूछताछ की. इन लोगों ने आरोपियों के साथ मिल कर करीब 120 से 130 फरजी गोल्ड लोन लिए थे.

करोड़ों के घोटाले को छिपाने के लिए बैंक में लूट करवाने के लिए यूपी के बदमाशों से संपर्क करने के मामले में नवलगढ़ थाना पुलिस ने 2 युवकों को पूछताछ के लिए पकड़ा.

एक युवक कोलसिया का व दूसरा गुढ़ागौडज़ी क्षेत्र का था. पुलिस उन की भूमिका की जांच कर रही है. बैंक की ओर से साथ ही घोटाले के बाद गोल्ड लोन व अन्य लोन खातों का सर्वे और वेरिफिकेशन शुरू किया गया.

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि गिरवी रखी गई ज्वैलरी से 2 से 3 बार गोल्ड लोन उठाया गया. इस के लिए संतोष सैनी अपने परिचित औटो चालक व अन्य जरूरतमंद लोगों को डेयरी लोन या केसीसी आदि करवाने का लालच दे कर उन के दस्तावेजों से लोन उठा लेते.

इस के लिए संतोष सैनी ऐसे लोगों की तलाश करता. उन्हें विश्वास में लेता और बैंक मैनेजर की पत्नी के गहने होने की बात कह कर उन के नाम से गोल्ड लोन उठाता. लोगों को भरोसा दिलाता कि उन्हें किस्त नहीं भरनी होगी. किस्त वह अपने आप भर देंगे.

ऐसे 3 दरजन से अधिक गोल्ड लोन स्वीकृत किए. बैंक के असिस्टेंट जनरल मैनेजर सुधीर कुमार साहू ने भी स्वीकार किया है कि एक ही ज्वैलरी के आधार पर एक से अधिक बार लोन लिए गए. जांच में यह भी सामने आया कि अमित जांगिड़ बेहद शातिर तरीके से ग्राहकों को अपने जाल में फंसाता था. उन की जानकारी के बिना फरजी गोल्ड लोन पास कर देता था.

जब कोई ग्राहक गोल्ड लोन लेने बैंक आता था तो मैनेजर पहले उस का एक लोन विधिवत तरीके से स्वीकृत करता था, जिस से ग्राहक को भरोसा हो जाए. इस के बाद इस ग्राहक के नाम पर बिना जानकारी दिए दूसरा और तीसरा फरजी लोन भी उठा लेता था.

जांच में यह भी सामने आया कि मैनेजर ग्राहकों का मोबाइल फोन अपने पास रख लेता था. लोन प्रक्रिया के दौरान आने वाले ओटीपी को वह स्वयं देख लेता था और उसी के जरिए फरजी लोन की मंजूरी दिला देता था.

इस दौरान ग्राहक को यह तक पता नहीं चलता था कि उस के नाम पर एक से अधिक लोन पास हो चुके हैं. यह पूरा खेल योजनाबद्ध तरीके से किया जाता था, ताकि ग्राहक को शक न हो और बैंक के सिस्टम में सब कुछ नियमानुसार दिखाई दे. इस तरह के बुने जाल में डेयरी लोन और अन्य योजनाओं के लालच में आ कर गरीब लोग फंस गए थे.

झाड़ेवा (सीकर) निवासी कैलाश ने पुलिस को बताया कि 2 साल पहले तत्कालीन बैंक मैनेजर अमित कुमार ने महिला शक्ति योजना के तहत साढ़े 9 लाख रुपए का लोन स्वीकृत किया था, इस में से भी केवल 5 लाख रुपए ही मिले थे.

4.50 लाख रुपए बैंक मैनेजर अमित ने खुद रख लिए थे. उस रकम को चुकाने के लिए अमित ने हर माह 50 हजार रुपए देने का वादा किया था, लेकिन वह रकम उसे नहीं मिली.

कैलाश के नाम से 3 गोल्ड लोन भी बताए जा रहे हैं. जिन में से 2 गोल्ड लोन के गहने पूरी तरह से गायब हैं, जबकि तीसरे गोल्ड लोन में जमा गहनों का आधा सोना भी नहीं मिला.

इस पीडि़त का यह आरोप है कि अब उन के गिरवी रखे गए करीब 200 ग्राम सोने के जेवर भी बैंक से गायब हैं.

ढेवा के ढाणी, नवलगढ़ निवासी पूनम का करीब 680 ग्राम सोना गायब होने की शिकायत सामने आई. ढाका की ढाणी निवासी सरस्वती देवी ने 230.16 ग्राम सोने के जेवर गिरवी रख कर 10.29 लाख रुपए का गोल्ड लोन लिया था.

श्रवणी देवी ने 260 ग्राम वजन के सोने के जेवर गिरवी रख कर 11 लाख रुपए का गोल्ड लोन लिया था. सोना भी चोरी होने का आरोप है.

धायलों की बास तनकारी निवासी संगीता देवी ने 330 ग्राम सोने के जेवर गिरवी रख कर गोल्ड लोन लिया था. इन के 330 ग्राम सोने के जेवर भी चोरी हो गए.

नवलगढ़ के पीपली चौक निवासी पिंकी कंवर ने बताया कि बीसी संचालक संतोष सैनी ने उस के प्लौट को गिरवी रख कर 7 लाख रुपए का लोन कराने की बात कही थी, लेकिन उसे केवल 50 हजार रुपए ही दिए. जब पिंकी का पति विदेश से लौट कर बैंक पहुंचा तो पता चला कि उस की पत्नी के नाम से भैंस पर भी लोन चल रहा है, जिस की उन्हें कोई जानकारी तक नहीं थी. पिंकी ने भैंस पर कोई लोन नहीं लिया था.

दोनों आरोपियों ने महिला शक्ति योजना, पशु डेयरी लोन, केसीसी लोन से करोड़ों रुपए डकार लिए थे. उन के पास से अकूत संपत्ति बरामद की गई. अमित जांगिड़ के पास 2 महंगी कारें, एक बुलेट बाइक, सीकर में 3 मंजिला निर्माणाधीन मकान तथा सीथल गांव में 35 बीघा जमीन खरीदी गई थी.

एक डेयरी फार्म मिला, जिस में 100 से अधिक देसी विदेशी नस्ल की गाएं थीं. पत्नी के नाम गुढ़ा में जमीन का भी पता चला. इसी तरह 5 हजार मासिक की नौकरी करने वाले संतोष सैनी के पास भी कई दुकानें, प्लौट व मकान की पुष्टि हुई.

दोनों ने पिछले एक साल में 8.78 करोड़ रुपए का गबन किया था. उन के द्वारा फरजी तरीके से 214 गोल्ड लोन किए थे, जिन में 161 लोन के बदले पैकेट्स में सोने के नकली जेवरात रखे गए थे. 40 लोन के पैकेट्स में कुछ भी नहीं रखा गया था.

कथा लिखे जाने तक अमित और संदीप के साथसाथ कुल 8 आरोपियों को न्यायिक हिरासत में ले लिया गया था. वे जेल में बंद थे. PNB Gold Loan Fraud

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