NEET Paper Leak. इसे सरकार में बैठे कुछ असरदार लोगों की शिक्षा माफिया से मिलीभगत ही कहेंगे, जिस की वजह से पिछले 10 सालों में 89 परीक्षाओं के पेपर लीक हुए और 45 परीक्षाएं रद्द की गईं. हर बार जांच हुई, लेकिन असली गुनहगारों को बचाया जाता रहा. कोचिंग सेंटरों का देश भर में 58 हजार करोड़ से अधिक का कारोबार है. इन संचालकों की एनटीए के पैनल में जुड़े प्रोफेसर्स से सांठगांठ रहती है. ये प्रोफेसर कोचिंग सेंटरों पर गेस्ट फैकल्टी बन कर जाते रहते हैं. जब तक इन पैनलिस्ट प्रोफेसरों की एनटीए के एग्जाम पेपरों तक पहुंच रहेगी, पेपर लीक का सिलसिला जारी रहेगा.
भारत में अपने बच्चे को डौक्टर बनाना हर दूसरे परिवार का सपना होता है. क्योंकि डौक्टरी का पेशा सब से सम्मानित और मानवता की सेवा के लिहाज से बेहद महत्त्वपूर्ण होता है. डौक्टरी पेशे से जुडऩे के बाद पैसा अर्जित करने की भी अपार संभावनाएं रहती हैं. इसलिए अपने बच्चे को डौक्टर बनाने का सपना देखने वाले इंटरमीडिएट की परीक्षा के साथ ही अपने बच्चों को फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलौजी की कोचिंग दिलाने लगते हैं.
दरअसल, भारत में डौक्टर के पेशे से जुडऩे के लिए एक एंट्रेस टेस्ट होता है. नीट के नाम से होने वाली यह प्रवेश परीक्षा इसलिए महत्त्वपूर्ण होती है, क्योंकि इस की रैंकिंग के आधार पर ही तय होता है कि नीट की परीक्षा पास करने वाले कैंडिडेट का प्रवेश निजी मैडिकल कालेज में होगा या सरकारी मैडिकल कालेज में.
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देश की सब से बड़ी नीट प्रवेश परीक्षा में हर साल करीब 20 से 22 लाख स्टूडेंटस शामिल होते हैं. पिछले साल की ही बात करें तो 22.76 लाख छात्रों ने नीट की परीक्षा दी थी, जबकि देश में एमबीबीएस की कुल सीटें करीब 1.29 लाख ही हैं. इस का मतलब साफ है कि एक सीट के लिए औसतन 17 से 18 छात्र दावेदार होते हैं.






