Cyber Fraud: ठगी करने वाले नेटवर्क का जब भंडाफोड़ किया गया, तब कई चौंकाने वाली जानकारियां सामने आईं और साइबर पुलिस की सख्ती से 8 आरोपियों को दबोच लिया गया. उन की गिरफ्तारी छापेमारी के बाद दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और मध्य प्रदेश से हुई. हैरानी की बात यह भी सामने आई कि पकड़े गए आरोपियों ने बीटेक, एमबीए और साइबर सिक्योरिटी डिप्लोमा जैसी बड़ी डिग्रियां ले रखी थीं.
दिल्ली पुलिस ने जांच में पाया कि यह गिरोह औनलाइन स्टाक निवेश के नाम पर लोगों से ठगी कर रहा था. जालसाजों ने एक नकली निवेश प्लेटफार्म के जरिए शिकायतकर्ता से 24 लाख रुपए की ठगी की थी.
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि 14 दिनों में ही ठगी के इस गैंग से जुड़े हुए बैंक खातों में 4.5 करोड़ रुपए के लेनदेन हुए थे और उन के तार कंबोडिया से जुड़े हुए थे. जब इस बड़ी रकम के ट्रांजैक्शन की तहकीकात की गई, तब ऐसे 60 से अधिक शिकायतों का पता चला.
शिकायतकर्ता ने बताया कि उसे एक वाट्सऐप ग्रुप में जोड़ा गया था, जहां ग्रुप एडमिन शेयर बाजार में निवेश के जरिए मोटा मुनाफा कमाने का लालच दे रहे थे. ग्रुप में फरजी प्रौफिट स्क्रीनशौट और निवेश से जुड़े दावे दिखा कर भरोसा बनाया गया था.
गिरोह के ठिकाने पर की गई छापेमारी के दौरान 8 मोबाइल फोन और महत्त्वपूर्ण बैंकिंग रिकौर्ड, कमीशन रिकौर्ड और डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए. गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मोहाली निवासी हरमनजोत सिंह (साइबर सिक्योरिटी डिप्लोमा), कैसर मसूदी (एमबीए), पानीपत निवासी अभिषेक (बीकाम), जाफराबाद निवासी मोहम्मद जाहिद, आमिर मलिक, जबलपुर निवासी अमरजीत, आलोक शर्मा (बीटेक) और रीवा निवासी अनंत पांडेय (बीटेक) के रूप में हुई.
डीसीपी के अनुसार पुलिस ने साइबर क्रिमिनल्स के खिलाफ चलाए गए अभियान में बड़ी काररवाई करते हुए 30 दिनों में 89 लोगों के खिलाफ ऐक्शन लिया है. इन में 35 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि 54 आरोपियों को बाउंड डाउन किया गया है.
डीसीपी (वेस्ट) शरद भास्कर के मुताबिक, काररवाई के दौरान डिजिटल अरेस्ट, फरजी इनवैस्टमेंट स्कैम, एपीके फ्रौड, फेक डेटिंग क्लब और म्यूल बैंक अकाउंट से जुड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है. पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 14 लाख रुपए से ज्यादा कैश, 359 सिम कार्ड, 218 एटीएम कार्ड, 88 मोबाइल फोन और कई डिजिटल डिवाइस बरामद किए हैं. जांच के दौरान करीब 40 करोड़ रुपए के साइबर फ्रौड नेटवर्क का खुलासा हुआ है.
औनलाइन निवेश ठगी का नेटवर्क आजकल एक सुव्यवस्थित अपराध बन गया है. निवेश ठगी नेटवर्क का काम करने का तरीका काफी अलग है, जो आमतौर पर कुछ चरणों में होती है. ठग सोशल मीडिया फेसबुक, इंस्टाग्राम, वाट्सऐप या टेलीग्राम के जरिए विज्ञापन चला कर या मैसेज भेज कर लोगों को निवेश के नाम पर भारी रिटर्न का लालच देते हैं. सदस्यों को वाट्सऐप ग्रुप में जोड़ा जाता है, जहां फरजी मुनाफे के स्क्रीनशौट दिखाए जाते हैं. शुरुआत में, छोटे निवेश पर मुनाफा दे कर पीडि़त का भरोसा जीता जाता है.
उन्हें फरजी डिजिटल प्लेटफार्म से जुडऩे का लालच दिया जाता है. ये जालसाज स्टाक निवेश या ट्रेडिंग के लिए फरजी ऐप्स, जैसे विंगो, मिंग कौइन का उपयोग करते हैं. इन ऐप्स में पीडि़त को अपना पैसा वालेट में बढ़ता हुआ दिखता है, लेकिन असल में वह ठगों के बैंक खातों में जा रहा होता है.
हालांकि ठगी का पैसा सीधे ठगों के पास नहीं जाता, बल्कि इसे कई ‘किराए के बैंक खातों’, जिसे म्यूल अकाउंट कहा जाता है, में घुमाया जाता है ताकि पुलिस इसे ट्रैक न कर सके.
इस तरह की धोखाधड़ी से बचाव के लिए तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर कौल किया जाना चाहिए. इस की शिकायत औनलाइन नैशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी की जा सकती है. Cyber Fraud






