CBSE Topper. अगर हौसले बुलंद हों और मन में गहरी लगन हो, तब मुश्किल से मुश्किल राह आसान बनाई जा सकती है और सफलता हासिल करने से कोई नहीं रोक सकता है. ऐसा ही कुछ उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के एक स्कूल में देखने को मिला, जहां सिखाने वाले और सीखने वाले, दोनों ही दिव्यांग थे. स्टूडेंट सुन नहीं सकती थी और टीचर देख नहीं सकती थी. फिर भी उन्होंने जो कारनामा कर दिया, वह एक नया इतिहास बन गया. यह फिल्मी कहानी नहीं, बल्कि हकीकत है.

वहां से एक ऐसी सफलता लोगों के सामने आई, जिस ने अंधेरे में हौसले की रोशनी दिखा दी और दोनों प्रेरणा के स्रोत बन गए.  इस बार जब 12वीं के नतीजे आए, तब पूरी ब्लाइंड, गूंगी और बहरी सारा मोइन ने धुंधली दुनिया से निकल कर 12वीं कक्षा की परीक्षा में 98.75 प्रतिशत अंक हासिल कर पूरे शहर को हैरान कर दिया.

अब स्कूल में टीचर्स और बाकी बच्चे सारा को बड़े प्यार से अपनी ‘हेलेन केलरÓ बुलाते हैं. लोगों को यह जान कर तब और भी हैरानी हुई, जब उन्हें मालूम हुआ कि सारा को पढ़ाने वाले टीचर भी ब्लाइंड थे, जिन्होंने उसे स्कूल टौपर बना दिया.

यह सब कैसे हुआ, यह भी एक रोचक कहानी है. सारा के टीचर एक ऐसे शख्स हैं, जिन्होंने खुद अपनी आंखों की रोशनी खोने के बावजूद सारा के सपनों को धुंधला नहीं होने दिया. वह शख्स सलमान अली काजी हैं, जिन के गाइडेंस और टीचिंग में सारा ने पढ़ाई पूरी की.

एक ब्लाइंड गुरु सारा की आंखें, कान और जुबान ब गया. हालांकि सलमान अली काजी की कहानी भी काफी प्रेरणादायी है.   लखनऊ यूनिवर्सिटी से कानून की डिग्री लेने के बाद धीरेधीरे उन की आंखों की रोशनी चली गई. फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी और स्पैशल एजुकेशन को अपना करिअर बना लिया. इस में उन्हें गोल्ड मेडल मिला.

सारा जब छोटी थी, तभी से सलमान उन के साथ जुड़े हुए थे. उन के सामने बड़ी चुनौती थी कि न वह खुद देख सकते थे और न सारा ही देख सकती थी. यहां तक कि सारा न सुन सकती थी और न ही बोल सकती थी. ऐसे में सलमान को एक सामान्य टीचर की तरह सारा को पढ़ाना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन था.

हालांकि शुरुआत में जब वह थोड़ा सुन सकती थी, तब ब्लाइंड को पढ़ाई जाने वाली ब्रेल लिपि उन्हें सिखाई. लेकिन बाद में जब सुनाई देना भी बंद हो गया, तब उस की हथेलियों पर शब्द लिख कर उस से बात करना और उन्हें पढ़ाना शुरू किया. इस तरह सलमान ब्रेल लिपि और खास गैजेट से सारा को पढ़ाने लगे.

सलमान ने स्पर्श की भाषा का उपयोग करते हुए धरती घूमती जैसी बात समझाने के लिए संतरों का इस्तेमाल किया. सारा को उसे छू कर महसूस करवाया कि पृथ्वी कैसे चक्कर काटती है. सौर मंडल समझाने के लिए सिक्कों को सूरज बनाया और अलगअलग साइज की गेंदों से ग्रहों के बारे में बताया. यह सिर्फ पढ़ाई नहीं थी, यह स्पर्श के जरिए एक नई दुनिया बनाने की कोशिश थी.

सारा की इस जीत में क्राइस्ट चर्च कालेज के प्रिंसिपल राकेश कुमार छेत्री और वहां के दूसरे टीचर्स का भी योगदान रहा. प्रिंसिपल ने सारा को सामान्य बच्चों के साथ पढऩे का मौका दिया. कक्षा 9वीं से टीचर्स अपने फ्री कक्षा में सारा को अलग से समय देने लगे थे. सलमान अली उन के बीच एक कड़ी काम करते थे. टीचर्स जो पढ़ाते, सलमान उसे हाथों के स्पर्श के जरिए सारा तक पहुंचाते और सारा के सवालों को टीचर्स को बताते.

बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी के लिए सारा ने रिफ्रैशेबल ब्रेल डिसप्ले और और्बिट रीडर जैसे गैजेट्स का इस्तेमाल किया. कंप्यूटर पर जो भी लिखा होता, वह उसे छू कर पढ़ सकती थी और अपना जवाब टाइप कर सकती थी. इसी का नतीजा निकला कि सारा 98.75 प्रतिशत अंकों के साथ स्कूल की टौपर बन गई. CBSE Topper

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