Twisha Sharma Death Case. मौडल त्विशा शर्मा जैसी पढ़ीलिखी, आत्मनिर्भर, आर्थिक रूप से सक्षम और मिस पुणे रह चुकी महिला, जिस के पास नाम, शोहरत और पैसा सब कुछ था, अगर उस की जिंदगी का अंत भी दहेज प्रताडऩा या संदिग्ध परिस्थितियों में होता है तो यह साफ है कि शादी की सफलता का संबंध पैसे, खूबसूरती या ऊंचे स्टेटस से बिलकुल नहीं है.
मौडल त्विशा शर्मा और एडवोकेट समर्थ सिंह की मुलाकात साल 2024 में एक मैट्रिमोनियल ऐप के जरिए हुई थी. त्विशा के परिवार में उस के पापा नवनिधि शर्मा, मम्मी रेखा शर्मा, भाई शोभित शर्मा और भाभी राशि शर्मा हैं.
समर्थ सिंह के परिवार में उस की मम्मी गिरिबाला सिंह हैं, जो डिस्ट्रिक्ट/सेशंस जज पद से रिटायर्ड हैं. इस के अलावा परिवार में उस की मौसी (गिरिबाला सिंह की बहन) भी हैं, जो भोपाल में ही एक डौक्टर हैं.
शादी के महज 5 महीने बाद 12 मई, 2026 की रात को त्विशा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई. वह भोपाल के कटारा हिल्स स्थित अपनी ससुराल में थी.
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उन्होंने करीब एक साल तक एकदूसरे को जानासमझा. जब दोनों को लगा कि वे एकदूसरे के साथ पूरी जिंदगी बिता सकते हैं तो उन्होंने अपने परिवारों को इस में शामिल किया. चूंकि दोनों ही उच्चशिक्षित और आधुनिक विचारों के थे, इसलिए दोनों परिवारों की सहमति से 9 दिसंबर, 2025 शादी की तारीख तय हो गई.
यह गुनगुनी और आलीशान शाम थी, जब नोएडा और भोपाल के 2 रसूखदार परिवारों का मिलन होने जा रहा था. एक तरफ नोएडा की चकाचौंध से आई ग्लैमर वल्र्ड की मशहूर मौडल और एमबीए ग्रैजुएट त्विशा शर्मा का परिवार था तो दूसरी तरफ भोपाल के प्रतिष्ठित कानूनी घराने से ताल्लुक रखने वाले वकील समर्थ सिंह और उन की मां रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह का परिवार.
भोपाल से चली समर्थ सिंह की बारात 9 दिसंबर, 2025 को नोएडा पहुंची थी. त्विशा के पापा नवनिधि शर्मा ने बारात के स्वागत और रसूख में कोई कसर नहीं छोड़ी थी.
बारातियों और खास मेहमानों के ठहरने के लिए नोएडा के एक बेहद आलीशान फाइव स्टार लग्जरी होटल के दरजनों कमरों को बुक किया गया था. आलीशान सुइट्स, मखमली कालीन और मेहमानों की खिदमत में तैनात स्टाफ, नजारा ऐसा था कि मानो किसी राजघराने की अगवानी की जा रही हो.
नवनिधि शर्मा ने बताया कि दिसंबर, 2025 की वह शाम, जो खुशियों और शहनाइयों के सुरों से सजनी चाहिए थी, अचानक एक व्यापारिक सौदे और अपमान की वेदी में बदल गई. नोएडा के उस आलीशान मैरिज रिजौर्ट में मेहमान सजधज कर तैयार थे.
जयमाला का भव्य स्टेज दूल्हादुलहन का इंतजार कर रहा था और घड़ी की सूइयां टिकटिक करती आगे बढ़ रही थीं.
त्विशा के पापा और भाई बारबार अपनी घडिय़ों को देख रहे थे. बारात के आने का वक्त दोपहर एक बजे का था, लेकिन 3 बज चुके थे और दूरदूर तक न तो बैंडबाजों की आवाज थी, न ही बारातियों की कोई हलचल.
घबराहट जब हद से पार हो गई तो त्विशा के भाई ने तुरंत समर्थ के करीबी हर्षित को फोन लगाया. उधर से आवाज आई तो भाई ने पूछा, ”हर्षित भाई, 3 बज गए हैं. बारात अभी तक क्यों नहीं निकली? सब ठीक तो है न?’’
हर्षित ने हिचकिचाते हुए कहा, ”भाई, थोड़ा मसला हो गया है. वहां माताजी (रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह) को सब वहीं होटल में मना रहे हैं. वह बहुत ज्यादा नाराज हो गई हैं और बारात आगे बढ़ाने को तैयार नहीं हैं.’’
यह सुनते ही लड़की वालों के पैरों तले से जमीन खिसक गई. त्विशा के भाई, पिता और परिवार के कुछ खास लोग तुरंत उस वीआईपी होटल की तरफ भागे, जहां गिरिबाला सिंह और उन के खास मेहमानों को ठहराया गया था.
जब लड़की वाले हांफते हुए होटल के उस कमरे में दाखिल हुए तो वहां का माहौल किसी अदालत से भी ज्यादा सख्त और तनावपूर्ण था. उम्र भर कटघरे में लोगों को सजा सुनाने वालीं रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह के चेहरे पर अहंकार और नाराजगी साफ झलक रही थी.
लड़की वालों ने हाथ जोड़ कर पूछा, ”अम्माजी, क्या बात हो गई? कोई कमी रह गई क्या?’’
गिरिबाला सिंह ने अपनी तीखी नजरों से उन्हें देखा और कड़े लहजे में कहा, ”कमी..? आप ने हमारी हैसियत के हिसाब से हमारा इंतजाम ही नहीं किया है! हमारा नाम, हमारा स्टैंडर्ड क्या है, भूल गए आप? ड्राइवर गाड़ी ले कर सामने वक्त पर खड़ा नहीं रहता. जब हम आते हैं तो वह अदब से गाड़ी का दरवाजा तक नहीं खोलता. हमें जो प्रोटोकाल और स्टैंडड्र्स मिलने चाहिए थे, उस का यहां नामोनिशान नहीं है. हमारा सरेआम अपमान हुआ है.’’
त्विशा के लाचार पापा और भाई ने तुरंत सिर झुका लिया. समाज का डर और बेटी के भविष्य का सवाल था. भाई ने हाथ जोड़ कर कहा, ”अम्माजी, हम से बहुत बड़ी भूल हो गई. हम छोटे लोग हैं, हमें माफी दे दीजिए.’’
शादी के दिन हुआ ड्रामा
लेकिन माफी से बात बनने वाली नहीं थी. अहंकार के पीछे असल में ‘लालच’ का खेल चल रहा था. कमरे का दरवाजा बंद था. अंदर सिर्फ कुछ लोग थे. कानून की रक्षक सौदेबाजी पर उतर आई थीं. शुरुआत एक बहुत बड़ी रकम की डिमांड से हुई. काफी मिन्नतें करने, हाथ जोडऩे और मोलभाव के बाद गिरिबाला सिंह का अहंकार आखिरकार एक नंबर पर आ कर थमा. वह नंबर था 10 लाख कैश.
त्विशा के बेबस परिवार में से एक सदस्य के पास उस समय एक लाख रुपए कैश था, वह दिया और बाकी रकम भी देने का वादा किया. तब जा कर जज साहिबा का ‘स्टैंडर्ड’ संतुष्ट हुआ, ड्राइवर ने गाड़ी का दरवाजा खोला और बारात आगे बढ़ी थी.
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शाम के वक्त जब बारात होटल से वेन्यू के लिए रवाना हुई तो माहौल ढोलनगाड़ों, शहनाइयों और विदेशी धुनों पर थिरकते बारातियों से गूंज उठा. विंटेज कार में सवार दूल्हा समर्थ सिंह, हाथ में तलवार लिए किसी राजकुमार की तरह लग रहा था. उस के पीछे चल रहे उस के दोस्त और परिवार के लोग जिन में कई नामचीन वकील और प्रशासनिक अधिकारी शामिल थे, जो गर्व से सिर उठाए चल रहे थे.
रिजौर्ट के मुख्य द्वार को हजारों की तादाद में मंगाए गए असली डच गुलाबों और सफेद लिली के फूलों से सजाया गया था. हवा में महंगे परफ्यूम और मोगरे की महक घुली हुई थी. रास्ते के दोनों ओर कांच के बड़ेबड़े झूमर लटके थे, जिन की रोशनी जमीन पर बिछे शीशों पर रिफ्लेक्ट हो रही थी.
मंडप को चारों तरफ से सिल्क के सफेद परदों और ताजे फूलों की लताओं से सजाया गया था. मंडप के ठीक ऊपर एक विशाल क्रिस्टल झूमर लगा था, जो रात के अंधेरे में तारों की तरह चमक रहा था. वैदिक मंत्रोच्चार के लिए बनारस से विशेष पंडित बुलाए गए थे.
जयमाला का स्टेज किसी भव्य महल के हिस्से जैसा दिख रहा था, जिस के पीछे विशाल एलईडी स्क्रीन्स पर त्विशा और समर्थ की प्रीवेडिंग तसवीरों की रील चल रही थी.
त्विशा शर्मा ने लाल और सुनहरे रंग के बेहद कीमती डिजाइनर लहंगे में एंट्री की. एक मौडल और अभिनेत्री होने के नाते उस के चलने के अंदाज में एक ग्रेस था.
जब वह स्टेज पर पहुंची तो समर्थ ने मुसकरा कर उस का हाथ थामा. दोनों ने एकदूसरे को जयमाला पहनाई और पूरा आसमान रंगबिरंगी आतिशबाजी से नहा उठा.
मंडप में जब दोनों फेरे ले रहे थे, तब अग्नि के फेरों की गवाह सिर्फ वो रसूखदार हस्तियां नहीं थीं, बल्कि त्विशा के पापा का वह अटूट विश्वास भी था, जिन्होंने अपनी बेटी की खुशियों के लिए लाखों रुपए पानी की तरह बहा दिए थे.
लेकिन उस चमचमाते मंडप के पीछे, फूलों की खुशबू के नीचे एक भयानक और लालची सच भी छिपा हुआ था. उस वक्त विदाई के आंसू बहाते हुए त्विशा के पापा नवनिधि शर्मा को जरा भी अंदाजा नहीं था कि जिस ‘जज’ और ‘वकील’ के परिवार को वह अपनी बेटी सौंप रहे हैं और जिस शादी पर उन्होंने अपनी जिंदगी भर की कमाई लगा दी है, वह मंडप विदाई का नहीं, बल्कि महज 5 महीने बाद त्विशा के लिए एक जंजाल साबित होने वाला था.
सामने आने लगी सच्चाई
शादी के बाद जब त्विशा भोपाल आई तो उसे उस मुखौटे के पीछे छिपी क्रूर और लालची पितृसत्तात्मक मानसिकता का सामना करना पड़ा, जिस का अंत बेहद दर्दनाक रहा.
शादी के बाद 10 दिसंबर, 2025 से ले कर 12 मई, 2026 की उस आखिरी रात तक, बंद कमरों के पीछे जो कहानी सामने आई, वह किसी बुरे सपने जैसी थी.
शादी के शुरुआती कुछ हफ्ते उत्सव और नए माहौल को समझने में बीते. लेकिन जल्द ही त्विशा को समझ आ गया कि जो समर्थ शादी से पहले बेहद आधुनिक और खुले विचारों का दिखता था, वह शादी के बाद पूरी तरह बदल चुका था.
त्विशा ने 2009 से 2012 के बीच मौडलिंग इंडस्ट्री में कदम रखा था. इसी दौरान उस ने मिस पुणे ब्यूटी पेजेंट का खिताब जीता, जिस के बाद उसे एडवर्टाइजमेंट और फिल्मों में काम करने के मौके मिलने लगे.
बताया जाता है कि उस ने कुछ कमर्शियल प्रोजेक्ट्स और तेलुगु फिल्मों में भी काम किया था. उन की चर्चित फिल्म में ‘मुग्गुरू मोनागल्लू’ का नाम सामने आया है. इस के अलावा वह साल 2018 में ‘जरा संभल के’ नाम की शौर्ट फिल्म में भी नजर आई थी.
ग्लैमर और कारपोरेट वल्र्ड में अपनी पहचान बनाने वाली त्विशा को भोपाल आते ही घर की चारदीवारी में रहने को कहा गया. समर्थ और उस की मां को त्विशा का मौडलिंग और मार्केटिंग का काम पसंद नहीं था.
घर में समर्थ की मां, जो उम्र भर अदालतों में फैसले सुनाती रही थीं, अब घर की सर्वेसर्वा थीं. त्विशा पर यह दबाव बनाया जाने लगा कि वह अपने पुराने जीवन को पूरी तरह भूल जाए. शादी के 2-3 महीने बीतते ही रिश्तों में खटास और बढ़ गई.
त्विशा के मायके वालों के अनुसार, इसी दौरान समर्थ और उस की मां की तरफ से ‘दहेज और रसूख’ को ले कर ताने शुरू हो गए. मार्च के महीने में त्विशा को पता चला कि वह गर्भवती है. एक महिला के लिए यह जीवन का सब से खूबसूरत पल होता है, लेकिन त्विशा के लिए यह दौर और कठिन हो गया.
हाल ही में सामने आई त्विशा की वाट्सऐप चैट्स से पता चलता है कि गर्भावस्था के दौरान भी उसे मानसिक शांति नहीं मिली. समर्थ का व्यवहार उस के प्रति रूखा और हिंसक होने लगा था. छोटीछोटी बातों पर बहस, चिल्लाना और उसे मायके से अलगथलग करने की कोशिशें तेज हो गईं.
त्विशा ने अपनी मम्मी को भेजे गए वाट्सऐप मैसेज में लिखा था, ‘मम्मी, यहां सब बहुत अजीब है. मेरी जिंदगी नरक जैसी हो गई है.’
अप्रैल आतेआते घर का माहौल एक जेल जैसा हो चुका था. त्विशा, जो कभी अपने फैसले खुद लेती थी, अब अपने ही घर में बेबस थी. समर्थ एक वकील था और उस की मां जज थीं; वे कानून की बारीकियां जानते थे, इसलिए वे त्विशा को इस तरह प्रताडि़त करते थे कि कोई बाहरी सबूत न छूटे.
आई दुखद खबर
मई के शुरुआती दिन त्विशा के लिए असहनीय हो चुके थे. वह किसी भी तरह इस दलदल से बाहर निकलना चाहती थी. उस ने अपनी मम्मी और भाभी से कई बार फोन पर रोते हुए कहा था कि उसे भोपाल से आ कर ले जाएं, क्योंकि अब वह और बरदाश्त नहीं कर सकती.
12 मई, 2026 की रात घर में एक बार फिर किसी बात को ले कर भयंकर विवाद हुआ.
पुलिस जांच के अनुसार, विवाद की जड़ में त्विशा की आजादी, दहेज की कुछ मांगें और दोनों के बीच का अविश्वास था. समर्थ और उस की मां ने त्विशा को मानसिक रूप से इस कदर तोड़ दिया कि वह बेबस हो गई.
उसी रात, भोपाल के कटारा हिल्स वाले घर की छत पर बनी एक एक्सरसाइज रौड से त्विशा का शव लटका हुआ मिला. यह कहना उस की ससुराल वालों का है. उन्होंने यह भी कहा कि उस ने आत्महत्या की है.
रात लगभग 11 बजे के बाद नोएडा में बैठे त्विशा शर्मा के पापा के फोन पर एक कौल आई. दूसरी तरफ घबराई हुई आवाज थी. कुछ सेकेंड की चुप्पी के बाद उन्हें बताया गया, ”त्विशा की हालत बहुत खराब है, जल्दी भोपाल आ जाइए.’’
पहले तो परिवार को लगा कि शायद फिर कोई घरेलू झगड़ा हुआ होगा, लेकिन थोड़ी देर बाद दूसरी कौल में बताया गया कि त्विशा अब नहीं रही. यह खबर सुनते ही घर में चीखपुकार मच गई. त्विशा की मम्मी की तबीयत बिगडऩे लगी. पापा गहरे सदमे की हालत में थे. परिवार ने तुरंत भोपाल जाने की तैयारी शुरू की.
बताया जाता है कि उन के साथ त्विशा का भाई, कुछ करीबी रिश्तेदार और परिवार के परिचित भी गए थे. रात में ही दिल्ली एयरपोर्ट से रवाना हुए सभी लोग सुबह की पहली फ्लाइट से भोपाल पहुंचे. यह 13 मई, 2026 का दिन था.
समर्थ सिंह के परिवार के लोगों ने बताया कि त्विशा ने आत्महत्या कर ली है.
त्विशा के परिवार को अस्पताल ले जाया गया. वहीं उन्होंने उसे देखा. परिवार का आरोप है कि त्विशा के शरीर पर चोटों के निशान थे. चेहरा और शरीर सूजा हुआ लग रहा था. कुछ निशान सामान्य आत्महत्या की कहानी से मेल नहीं खाते थे. यही वह क्षण था, जब परिवार का शक और गहरा हो गया.
बाद में ससुराल पक्ष के लोगों के बीच बहस हुई. मायके पक्ष का आरोप था कि उन्हें पूरी जानकारी नहीं दी जा रही. घटना की असली कहानी छिपाई जा रही है और प्रभावशाली लोग मामले को दबाने की कोशिश कर रहे हैं.
कुछ लोगों ने समर्थ सिंह के परिवार से सवाल किए कि रात में क्या हुआ? त्विशा आखिरी बार किस के साथ थी? पुलिस को सूचना किस ने दी? समर्थ कहां है?
बताया जाता है कि उस समय माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया कि पुलिस को बीचबचाव करना पड़ा. परिवार के लिए सब से बड़ा झटका तब लगा, जब उन्हें पता चला कि समर्थ सिंह वहां मौजूद नहीं है. यही बात बाद में पूरे केस का बड़ा विवाद बन गई, आखिर पति घटना के बाद कहां चला गया?
त्विशा की सास गिरिबाला सिंह ने बताया कि उन लोगों ने त्विशा को सीपीआर देने की कोशिश की थी.
नवनिधि शर्मा ने कहा कि मैं यह पूछना चाहता हूं कि जब मेरी बेटी ने कथित तौर पर दूसरी मंजिल पर खुदकुशी की तो उसे नीचे ला कर कैमरे के सामने सीपीआर देने का क्या मतलब है?
नवनिधि शर्मा ने यह भी सवाल उठाया कि घर के पास पुलिस चौकी होने के बावजूद पुलिस को तुरंत सूचना क्यों नहीं दी गई?
दोनों पक्षों में बात बिगड़ जाना स्वाभाविक था. त्विशा के परिजन रिपोर्ट लिखाने थाने गए, लेकिन वहां उन की कोई सुनवाई नहीं हुई. परेशान परिजन 14 मई, 2026 को पुलिस कमिश्नर के कार्यालय पर पहुंच गए. वहां उन्होंने जोरदार प्रदर्शन किया. जिस पर कमिश्नर ने संज्ञान लिया. फलस्वरूप देर रात पुलिस ने रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह और उन के बेटे समर्थ सिंह के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली.
15 मई को गिरिबाला सिंह ने अग्रिम जमानत के लिए अदालत में प्रार्थना पत्र दिया. शाम करीब 7 बजे अदालत ने गिरिबाला सिंह की जमानत मंजूर कर ली.
गिरिबाला सिंह जिला जज के पद से रिटायर हुई थीं. इन्होंने रजिस्ट्रार का पद भी संभाला है. मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की सदस्य सचिव भी रही हैं और वर्तमान में भोपाल जिला उपभोक्ता अदालत की अध्यक्ष हैं.
त्विशा ने वाट्सऐप चैट्स में अपने परिवार से कई बार ससुराल पक्ष और पति द्वारा प्रताडि़त किए जाने की शिकायत की थी. वहीं ससुराल पक्ष ने इन सभी आरोपों से इनकार किया है. परिवार ने कई वाट्सऐप चैट्स और अन्य जगहों पर त्विशा द्वारा प्रताडऩा की बातचीत और आरोप के साक्ष्य दिए गए हैं. पुलिस ने उन्हें भी जांच का हिस्सा बनाया है.
13 मई को पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी आ गई. जमानत मिल जाने पर गिरिबाला सिंह खुल कर सामने आ गईं. उन्होंने लड़की पक्ष द्वारा लगाए गए सभी आरोपों के खिलाफ एक प्रैस कौन्फ्रेंस की. उन्होंने त्विशा पर ड्रग्स प्रयोग करने के आरोप लगाए और साबित करने की कोशिश की कि उन की पुत्रवधू ने आत्महत्या की है.
उन्होंने पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि रिपोर्ट में आत्महत्या किए जाने की पुष्टि हुई है.
री–पोस्टमार्टम की मांग
लेकिन त्विशा के फेमिली वालों ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर असहमति व्यक्त करते हुए भोपाल जिला एवं सत्र न्यायालय से दोबारा पोस्टमार्टम कराए जाने की अपील की, लेकिन यहां उन्हें झटका लगा था. अदालत ने दोबारा पोस्टमार्टम कराए जाने से साफ इंकार कर दिया. 16 मई, 2026 को परिजनों ने इस केस की सीबीआई से जांच कराने की मांग की. कोई सुनवाई न होने पर 17 मई को सभी परिजन सीएम हाउस के बाहर पहुंच गए. वहां प्रदर्शन करने लगे. सीएम हाउस के अधिकारियों ने उन्हें बुलाया और आश्वासन दिया कि सीबीआई जांच के लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखा जाएगा.
22 मई, 2026 को परिजनों की मांग पूरी कर ली गई और मध्य प्रदेश सरकार ने इस केस की सीबीआई जांच के लिए केंद्र सरकार को पत्र लिख दिया. त्विशा के परिजनों ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में भी एक रिट दायर की थी, जिस में त्विशा की डैडबौडी का दोबारा पोस्टमार्टम करने की मांग की गई थी. यह भी कह सकते हैं कि जिला अदालत द्वारा प्रार्थना पत्र निरस्त करने पर उस के विरुद्ध अपील की गई थी.
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में 22 मई को त्विशा के शव का दोबारा पोस्टमार्टम करने के आदेश जारी किए. हाईकोर्ट के जस्टिस ए.के. सिंह की एकल पीठ ने सुनवाई करते हुए दिल्ली एम्स के डायरेक्टर को आदेश दिया कि वे विशेषज्ञ डौक्टरों की टीम गठित करें. डौक्टरों की यह टीम भोपाल एम्स में आ कर मृतका का दोबारा पोस्टमार्टम करेगी. यह काररवाई जल्द से जल्द किए जाने के निर्देश दिए गए.
इस से पहले जो पोस्टमार्टम हुआ था, उस पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया कि त्विशा करीब 2 महीने की गर्भवती थी और मौत से कुछ दिन पहले उस का गर्भपात कराया गया था. त्विशा के परिजनों ने आरोप लगाया कि गर्भपात उस की इच्छा के खिलाफ कराया गया था. उन का आरोप यह भी है कि शरीर पर चोट के निशान मिलने और मौत से कुछ मिनट पहले मम्मी और भाई को किए गए फोन कौल ने भी यह साबित कर दिया है कि यह आत्महत्या नहीं हत्या का ही मामला है.
22 मई, 2026 शुक्रवार को भोपाल पुलिस ने आरोपी समर्थ सिंह को उस समय गिरफ्तार किया था, जब वह उच्च न्यायालय में अग्रिम जमानत याचिका वापस लेने के बाद जबलपुर जिला न्यायालय में सीजेएम कोर्ट में सरेंडर करने पहुंचा था.
सीजेएम ने यह कहते हुए सरेंडर कराने से इनकार कर दिया था कि जिस कोर्ट में दहेज हत्या का प्रकरण चल रहा है, वहां सरेंडर करें. इस के बाद जबलपुर पुलिस ने उसे हिरासत में ले कर भोपाल पुलिस के हवाले कर दिया.
भोपाल पुलिस गिरफ्तार कर उसे रात 2 बजे भोपाल ले कर आई थी. समर्थ सिंह इस से पहले फरार चल रहा था. पुलिस ने उस पर 30 हजार रुपए का इनाम भी घोषित कर दिया था.
इस के बाद अदालत ने पुलिस की मांग पर समर्थ सिंह को 7 दिनों के लिए भोपाल पुलिस को सौंप दिया. कोर्ट ने समर्थ सिंह का पासपोर्ट भी जब्त करने का आदेश दिया, ताकि आगे कभी जमानत मिले तो आरोपी देश छोड़ कर फरार होने की स्थिति में न रहे.
पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने कहा कि पुलिस ने दहेज हत्या के विभिन्न पहलुओं, मायके पक्ष के आरोपों, पुलिस की जांच में शामिल किए गए बिंदुओं पर पूछताछ के लिए एसआईटी गठित कर दी है.
वह 24 मई, 2026 की एक भारी और गमगीन सुबह थी. भोपाल के औल इंडिया इंस्टीट्यूट औफ मैडिकल साइंसेज के मोर्चरी रूम के बाहर पसरा सन्नाटा किसी भी पत्थर दिल को रुला देने के लिए काफी था.
कमरे के भीतर लगातार 4 घंटे तक दिल्ली एम्स के डौक्टरों की टीम त्विशा का दोबारा पोस्टमार्टम करते हुए एकएक पहलू को बारीकी से खंगाल रही थी. एकएक घाव, शरीर पर बना हर वो निशान जो एक बेबस बेटी की चीख बयां कर रहा था, उसे कैमरे की नजर (वीडियोग्राफी) से हमेशा के लिए कैद किया जा रहा था. सच को दबाने की कोशिशों के खिलाफ यह विज्ञान और न्याय की आखिरी जंग थी.
बाहर बैठे पिता नवनिधि शर्मा के जेहन में रहरह कर बेटी का वो मासूम चेहरा घूम जाता था, जो कभी अपनी शादी के वीआईपी अरमानों में खोया था.
4 घंटे बाद जब डौक्टरों ने 3 अलगअलग बौक्स में सैंपल इकट्ठा कर उन्हें सील किया तो जैसे इंसाफ की एक धुंधली सी उम्मीद की किरण दिखाई दी.
दिल्ली एम्स की टीम अब यह सच एक बंद लिफाफे में सीधे अदालत को सौंपेगी. वही लिफाफा, जिस में त्विशा की मौत का असली राज बंद है. पोस्टमार्टम के बाद डौक्टरों की टीम और एसआईटी ने घटनास्थल का मौकामुआयना भी किया. रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह से भी बातचीत की.
दिल्ली एम्स के मैडिसिन एवं टौक्सिकोलौजी विभाग के प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष डा. सुधीर कुमार गुप्ता ने बताया कि हिस्टोपैथोलौजी और विसरा का एनालिसिस किया जाना बाकी है, इसलिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट में अभी कुछ वक्त लगेगा.
शाम ढलतेढलते भोपाल का भदबदा विश्राम घाट आंसुओं के समंदर में डूब गया. चिता सज चुकी थी. त्विशा की भाभी ने उसे चिता पर लिटाए जाने से पहले लाल जोड़ा पहनाया. जिस बहन ने भाई शोभित शर्मा की कलाई पर कभी राखी बांधी थी, जिस बहन की डोली को बड़े चाव से विदा किया था, आज उसी बहन को मुखाग्नि देने के लिए भाई के कांपते हुए हाथ आगे बढ़े.
अंतिम संस्कार के बाद त्विशा का परिवार भोपाल के एक गेस्टहाउस में लौटा. कमरे में सन्नाटा था. सामने मेज पर त्विशा की तसवीर रखी थी, जिस पर अब फूल चढ़ चुके थे.
मम्मी रेखा शर्मा लगातार रो रही थीं. पापा नवनिधि शर्मा चुप बैठे थे. भाई हर्षित शर्मा ने चुप्पी तोड़ी कहा कि 12 मई सुबह 9:52 पर भोपाल जयपुर एक्सप्रैस से त्विशा ने रिजर्वेशन कराया था. 15 मई को वह अजमेर मेरे पास आने वाली थी. 2 दिन मौत और इंतजार कर लेती तो शायद त्विशा आज जीवित होती.
त्विशा की देह तो पंचतत्त्व में विलीन हो गई, लेकिन भदबदा विश्राम घाट की ठंडी होती चिता की राख के पीछे छोड़ गई, कई सुलगते हुए कानूनी सवाल. एक लाचार पिता और भाई के लिए यह उन की लाडली की विदाई जरूर थी, लेकिन उस ‘रसूखदार सिस्टम’ के खिलाफ जंग की शुरुआत थी, जिस ने उन की चीख को दबाने की हर मुमकिन कोशिश की थी.
त्विशा घटना वाले दिन 3 घंटे तक अपनी ससुराल के पास में ही स्थित ब्यूटी पार्लर में मसाज आदि करवाती रही. ब्यूटी पार्लर संचालक के पास रिटायर्ड जज गिरिबाला का कई बार फोन आया. आखिर में उस ने पूछा कि बात क्या है?
गिरिबाला ने बताया कि त्विशा ने आत्महत्या कर ली है. दूसरे दिन 5 लोग भी ब्यूटीपार्लर पहुंचे. संचालिका के अनुसार वे वेशभूषा से वकील प्रतीत हो रहे थे. 1-2 के गले में आईकार्ड भी पड़ा था. वह फुटेज ले कर गए हैं.
संचालिका ने यह भी बताया कि यह त्विशा की दिनचर्या का हिस्सा था. महीने में एक दिन ब्यूटी पार्लर आया करती थी. 3 घंटे तक त्विशा ने ब्यूटी पार्लर में क्याक्या किया, इस की फुटेज वे 5 लोग क्यों ले कर गए, यह भी अभी तक एक राज बना हुआ है.
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने शनिवार को त्विशा शर्मा की अप्राकृतिक मौत के मामले का स्वत:संज्ञान लिया था. 25 मई, 2026 को इस की सुनवाई हुई.
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की 3 सदस्यीय पीठ ने कहा कि यह धारणा बनाई जा रही थी कि आरोपियों के न्यायपालिका और कानूनी बिरादरी से जुड़े होने के कारण निष्पक्ष जांच नहीं हो पाएगी.
उधर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 28 मई, 2026 की दोपहर को पूर्व जज गिरिबाला सिंह की निचली अदालत की तरफ से मिली अंतरिम जमानत रद्द की. सीबीआई ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया. इन का बेटा समर्थ सिंह पहले से ही सीबीआई की गिरफ्त में था. कोर्ट ने पूछताछ के लिए गिरिबाला को 5 दिनों के रिमांड पर सीबीआई को सौंप दिया.
मौडल त्विशा शर्मा जैसी पढ़ीलिखी, आत्मनिर्भर, आर्थिक रूप से सक्षम और मिस पुणे रह चुकी महिला, जिस के पास नाम, शोहरत और पैसा सब कुछ था, अगर उस की जिंदगी का अंत भी दहेज प्रताडऩा या संदिग्ध परिस्थितियों में होता है तो यह साफ है कि शादी की सफलता का संबंध पैसे, खूबसूरती या ऊंचे स्टेटस से बिलकुल नहीं है.
यह मामला लोगों को इसलिए झकझोर रहा है, क्योंकि बाहर से देखने पर उन की जिंदगी ‘परफेक्ट’ लगती थी. शिक्षा, ग्लैमर, पैसा, पहचान, आधुनिक जीवनशैली. फिर भी शादी कुछ महीनों में टूट गई और अब उस की चर्चा दहेज प्रताडऩा और संदिग्ध मौत के रूप में हो रही है.
सामान्य सोच यह होती है कि शिक्षा, पैसा और ऊंचा सामाजिक स्तर रिश्तों को सुरक्षित बना देते हैं, लेकिन वास्तविक जीवन कई बार इस से बिलकुल अलग तसवीर दिखाता है.
त्विशा शर्मा के परिवार ने जिस तरह संघर्ष किया, वह भोपाल के इतिहास में हमेशा सुनहरे अक्षरों में चमकता रहेगा.
लव मैरिज के बाद कोमल की संदिग्ध मौत साल 2025 की शुरुआत बरेली के लाल फाटक इलाके के लिए आम दिनों जैसी ही थी. इसी इलाके में प्रदीप मिश्रा अपने परिवार के साथ रहता है. प्रदीप पेशे से एक औटो ड्राइवर है, जो दिनरात पसीना बहा कर अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के सपने बुन रहा था. उस की 18 साल की बेटी कोमल मिश्रा इलाके के ही एक स्थानीय स्कूल में हाईस्कूल (10वीं) की पढ़ाई कर रही थी.
उसी स्कूल के कमरों और गलियारों में सुभाष नगर थाना क्षेत्र के शांति विहार का रहने वाला 19 साल का अमित मंडल भी घूमता था. दोनों एक ही स्कूल में थे, उम्र का वो पड़ाव था, जहां भावनाएं अकसर समझदारी पर हावी हो जाती हैं. धीरेधीरे दोनों की जानपहचान दोस्ती में बदली और दोस्ती गहरे जुड़ाव में बदल गई.
4 अक्तूबर, 2025 को अमित मंडल कोमल को बहलाफुसला कर अपने साथ भगा ले गया. उस वक्त वह नाबालिग थी.
घर से भागने के बाद, दोनों ने शादी कर ली. कोमल को लगा कि उस ने अपनी पसंद का हमसफर चुन कर अपनी जिंदगी संवार ली है, लेकिन उसे क्या पता था कि जिस घर की दहलीज पर उस ने कदम रखा है, वहां खुशियां ज्यादा दिन की मेहमान नहीं थीं. शादी के शुरुआती दिन बीतते ही हकीकत सामने आने लगी.
शादी के 7 महीने बीत चुके थे. साल 2026 के मई का महीना आतेआते शांति विहार के उस मकान में, जहां कोमल बहू बन कर आई थी, तनाव की दीवारें खड़ी होने लगी थीं और फिर एक दिन, वह खबर आई जिस ने सब को सन्न कर दिया.
शादी के महज 7 महीने बाद कोमल की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई.
ससुराल जाते ही कोमल के पति अमित, उस की सास और ससुर ने उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताडि़त करना शुरू कर दिया. वे लोग कोमल को हर दिन यह ताना मारते थे कि मुफ्त में शादी कर ली, दहेज में कुछ भी ले कर नहीं आई.
मौत की खबर मिलते ही कोमल के मायके में कोहराम मच गया. पिता प्रदीप मिश्रा और परिवार का रोरो कर बुरा हाल था. कल तक जो बेटी सब की आंखों का तारा थी, आज वह इस दुनिया में नहीं थी. अगर वह भागती नहीं, अगर वह कुछ समय और रुक जाती तो शायद आज जिंदा होती. यह वह टीस है जो कोमल के पिता को जिंदगी भर कचोटती रहेगी. इस संदिग्ध मौत ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
कोमल के पिता का साफतौर पर आरोप है कि उन की बेटी ने आत्महत्या नहीं की है, बल्कि ससुराल वालों ने एक सोचीसमझी साजिश के तहत पहले कोमल को मार डाला और फिर खुदकुशी का रूप देने के लिए उस के शव को फंदे पर लटका दिया, ताकि दुनिया को यह एक आत्महत्या लगे.






