Delhi Kidnapping Case. अर्जुन वोहरा का सुबहसवेरे ही अपहरण कर लिया गया. उसी दिन दोपहर को उस के पिता ने 5 लाख की फिरौती दे कर उसे छुड़ा भी लिया. लेकिन अर्जुन की कार और मोबाइल अपहर्त्ताओं के पास रह गए थे, जिन का वे दुरुपयोग कर सकते थे. इस की सूचना पुलिस को देना जरूरी था. हकीकत पता चली तो पुलिस ने कार व मोबाइल तो बरामद किया ही, साथ ही …

अर्जुन वोहरा रविवार को अकसर देर से सो कर उठता था लेकिन 1 मई के रविवार को उस की आंखें जल्दी खुल गईं. उस दिन वह सुबह 5 बजे ही जाग गया. उस समय घर के बाकी लोग सोए हुए थे. फ्रैश होने के बाद अर्जुन का मन नाश्ता करने का हुआ. लेकिन इस के लिए उस ने मम्मी को जगाना ठीक नहीं समझा. उस ने गैरेज से अपनी आई-20 कार निकाली और ईस्ट अर्जुन नगर, दिल्ली स्थित अपनी कोठी से विकास मार्ग की तरफ निकल गया. वहां ऐसे कई रेस्टोरेंट हैं जो रात को भी खुले रहते हैं.

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उस समय 27 वर्षीय अर्जुन वोहरा का मन हौट डौग खाने का कर रहा था. कार ले कर वह प्रीत विहार स्थित 24×7 शौप नाम के रेस्टोरेंट में पहुंचा, लेकिन वहां उस का पसंदीदा हौट डौग नहीं मिला. वहां से वह यमुना स्पोट्र््स कौंप्लेक्स की तरफ चल दिया.

जब उस की गाड़ी विकास मार्ग पर पुष्पांजलि मैडिकल सेंटर से थोड़ा आगे गुरुद्वारे के पास पहुंची, तभी एक सफेद रंग की मारुति स्विफ्ट कार तेज गति से ओवरटेक कर के आगे निकल गई.

अर्जुन वोहरा ने इस बात पर ज्यादा गौर नहीं किया, क्योंकि यह सामान्य बात थी. सड़क पर चल रही गाडि़यों के साथ यह आम बात होती है. उस स्विफ्ट कार के ओवरटेक करने के एक मिनट बाद ही एक कार ने उस की कार को पीछे से टक्कर मार दी.

कार में टक्कर लगने से अर्जुन चौंका. उस ने पीछे की तरफ देखा तो पता चला कि टक्कर सफेद रंग की इओन कार ने मारी थी. अर्जुन ने अपनी कार साइड में लगा दी. उस की कार के रुकते ही, जो स्विफ्ट कार ओवरटेक कर के आगे निकली थी, वह बैक हो कर अर्जुन के पास आ गई.

अर्जुन अपनी कार से उतर कर देखने लगा कि टक्कर लगने से उस की कार को कितना नुकसान हुआ है. जिस इओन कार ने टक्कर मारी थी, उस में कई युवक बैठे थे. अर्जुन ने इओन कार चलाने वाले लड़के से कहा, ‘‘भाई, आप गाड़ी संभाल कर क्यों नहीं चलाते. मैं साइड में चल रहा हूं, इस के बावजूद आप ने मेरी गाड़ी ठोंक दी.’’

अर्जुन के इतना कहते ही इओन कार में बैठे युवक नीचे उतर आए. जो स्विफ्ट कार बैक हो कर आई थी, उस में बैठे युवक भी आ गए. उन दोनों गाडि़यों के युवक एकदूसरे को जानते थे. वे सब के सब उलटे अर्जुन से ही झगड़ने लगे. अर्जुन भी जवान था, वह भी उन की बातों का विरोध करने लगा. लेकिन उन 6 युवकों के सामने अर्जुन अकेला पड़ गया.

वे सभी उस के साथ गालीगलौज करते हुए हाथापाई पर उतर आए. अर्जुन अपनी तरह से उन का विरोध करता रहा. फिर भी वह उन के सामने कमजोर पड़ गया. उन युवकों ने अर्जुन का मुंह और बाल पकड़ कर उसे जबरदस्ती अपनी मारुति स्विफ्ट में बैठा लिया. उस कार में 2 युवक आगे बैठे थे और 2 पिछली सीट पर उस के अगलबगल. उन्होंने मारपीट कर के उसे इतना डरा दिया कि वह शोर तक नहीं मचा सका. अर्जुन के बाल पकड़ कर उन्होंने उस का सिर नीचे कर रखा था.

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वे अर्जुन को गाजियाबाद में आईपीएम इंस्टीट्यूट के पास ले गए. अर्जुन को तेज प्यास लग रही थी. उस के कहने पर उन्होंने सड़क किनारे एक दुकान पर कार रोक कर पानी की एक बोतल खरीद कर अर्जुन को दे दी. वहीं पर उन लोगों के बाकी साथी भी इओन और अर्जुन की आई-20 कार ले कर आ गए. वहीं पर अर्जुन को स्विफ्ट कार से उतार कर अर्जुन की ही आई-20 कार में पिछली सीट पर बैठा दिया.

उन लोगों ने अर्जुन के हाथपैर बांधने के साथ उस की आंखों पर भी पट्टी बांध दी. अर्जुन को यह सोच कर डर लग रहा था कि पता नहीं वे लोग उस के साथ क्या करेंगे. उस के हाथ में आईफोन-6 प्लस महंगा फोन था. उस के पास बैठे युवक ने उस के हाथ से फोन ले कर उस के पिता सुनील वोहरा का फोन नंबर पूछा. मजबूरी में अर्जुन ने नंबर बता दिया.

उन का मकसद था अर्जुन के एवज में उस के पिता सुनील वोहरा से फिरौती के तौर पर मोटी रकम वसूलना. एक युवक ने सुनील वोहरा के फोन नंबर 9873523333 पर काल की. सुनील वोहरा कुछ देर पहले ही सो कर उठे थे. फोन की स्क्रीन पर बेटे का नंबर देख कर उन्होंने काल रिसीव की. उन के कान में जो आवाज आई, वह बेटे की नहीं, किसी और की थी. उस ने कहा, ‘‘तुम्हारा बेटा अर्जुन हमारे कब्जे में है. अगर उस की खैरियत चाहते हो तो 20 लाख रुपए का बंदोबस्त कर लो. पैसे कहां पहुंचाने हैं, तुम्हें बाद में बता देंगे.’’ इस के बाद काल कट गई.

बेटे के अपहरण की बात सुनते ही सुनील वोहरा सन्न रह गए. बेटा कहां और किस हालत में है, जानने के लिए उन्होंने अपने फोन से बेटे का नंबर मिलाया. लेकिन तब तक फोन स्विच्ड औफ हो गया था.

बाद में भी उन्होंने उस नंबर पर कई बार बात करने की कोशिश की. लेकिन हर बार वह स्विच्ड औफ ही मिला. सुनील वोहरा एक बड़े कंस्ट्रक्टर थे. वह पुलिस में जाने के बजाय अपहर्त्ताओं को पैसे दे कर बेटे को छुड़ाना चाहते थे. इसलिए वह उन के फोन का इंतजार करने लगे.

कुछ देर बाद ही उन के मोबाइल पर अपहर्त्ता का फोन आ गया. उस ने कहा, ‘‘आप ने पैसों का इंतजाम कर लिया?’’ ‘‘कर लेंगे, लेकिन पैसे बहुत ज्यादा हैं,’’ सुनील वोहरा ने कहा.

पैसों को ले कर आपस में बातें हुईं. आखिरकार 5 लाख रुपए में मामला तय हो गया. डील हो जाने के बाद सुनील वोहरा समझ गए कि अपहर्त्ताओं को उन के बारे में पूरी जानकारी नहीं है. जानकारी होती तो वे एक करोड़ या उस से ज्यादा रुपयों की फिरौती मांगते. बहरहाल उन का मकसद बेटे को सुरक्षित वापस पाना था.

‘पैसे कहां पहुंचाने हैं,’ पूछने पर अपहर्त्ता ने बताया कि वह काले रंग के बैग में 5 लाख रुपए ले कर किसी दुपहिया वाहन से फारुखनगर पहुंच जाएं. वहां पहुंचने पर आगे की बात बता दी जाएगी.

सुनील वोहरा के लिए 5 लाख रुपए मामूली रकम थी. बेटे के किडनैप होने की बात पत्नी या दूसरे बेटे को बता कर वह उन्हें टेंशन नहीं देना चाहते थे. इसलिए किसी से कुछ बताए बिना ही उन्होंने एक बैग में 5 लाख रूपए भर लिए. अपहर्त्ता ने उन्हें दुपहिया वाहन से आने को कहा था. उन के पास एक स्कूटर था तो लेकिन लंबे समय से वह गैरेज में खड़ा था, क्योंकि वह और उन का बेटा कार से ही कहीं आतेजाते थे.

उन्होंने नौकर से स्कूटर की सफाई कराई तो जिज्ञासावश पत्नी ने पूछा, ‘‘आज कार नहीं ले जा रहे हो, स्कूटर से क्यों?’’

‘‘बस ऐसे ही आज स्कूटर चलाने का मन कर रहा है.’’ सच्चाई छिपाते हुए सुनील बोले. सुनील वोहरा नंदनगरी,  दिल्ली से भौपुरा होते हुए लोनी पहुंचे. तभी उन के पास अपहर्त्ता का फोन आ गया. फिर जैसेजैसे अपहर्त्ता ने बताया, वह वैसे ही करते गए. वहां से एक रास्ता मुरादनगर नहर पर निकलता है. वह एरिया खुला और जंगल वाला है.

वहीं से वह टीला मोड़ की तरफ चले गए. वह इलाका एकदम सुनसान था. अपहर्त्ता ने वहीं पर एक पेड़ पर बैग टांगने को कहा. सुनील वोहरा ने एक पेड़ की डाली पर रुपयों से भरा बैग टांग दिया. जिस तरह से अपहर्त्ता उन्हें निर्देश दे रहे थे, उस से तो यही लग रहा था कि वे वहीं कहीं ऐसी जगह पर छिपे हुए थे, जहां से उन्हें उन की सारी गतिविधि दिख रही थी. तभी उन के पास फोन आया, ‘‘अब आप घर चले जाइए, आप का बेटा सुरक्षित घर पहुंच जाएगा.’’

सुनील वोहरा घर लौट आए. इस के बाद भी उन्हें बेटे की चिंता होती रही कि पता नहीं उन्होंने अर्जुन को छोड़ा है या नहीं. अर्जुन सुबह घर से गाड़ी ले कर निकला था. कई घंटे बाद भी वह घर नहीं लौटा तो मां को चिंता हुई. उन्होंने इस बारे में पति सुनील से पूछा. सुनील को तो सारी बात पता थी. वह सच्चाई बता देते तो पत्नी टेंशन करने लगती. इसलिए उन्होंने पत्नी से झूठ बोलते हुए कहा, ‘‘अर्जुन अपने दोस्त के साथ किसी से मिलने गाजियाबाद गया है. दोपहर बाद तक लौट आएगा.’’

अर्जुन को अपहर्त्ताओं ने किसी मकान में छिपा कर नहीं रखा था, बल्कि वह उसे कार में ही बैठा कर इधरउधर घुमा रहे थे. उस की आंखों में भी दर्द होने लगा था. अर्जुन के अनुरोध पर उन लोगों ने उस की आंखों पर बंधी पट्टी खोल दी.

उस ने इधरउधर देखा तो जिस इलाके में कार खड़ी थी, उस इलाके को वह पहचान नहीं सका. वह इओन कार में बैठा था. उस की आई-20 कार कहां गई, उसे पता नहीं था. उस कार में 2 अपहर्त्ता बैठे थे. कुछ देर बाद उस कार के पास 2 युवक सफेद रंग की टीवीएस स्कूटी से आए. उन्होंने कार में बैठे बदमाशों से कहा कि पैसे मिल चुके हैं.

चारों बदमाशों ने वहीं पर आपस में पैसे बांट लिए. एकएक लाख रुपए बांटने के बाद एक लाख रुपए एक युवक ने यह कर रख लिए कि ये पैसे योगेश भाई के हैं. जिस समय वे लोग पैसे बांट रहे थे, उसी समय अर्जुन ने टीवीएस स्कूटी का नंबर देख लिया. जल्दबाजी में वह केवल इतना ही पढ़ पाया यूपी…सीएन 5552.

आपस में पैसे बांटने के बाद उन लोगों ने अर्जुन के गले की ढाईतीन तोले की सोने की चेन, कानों में पहने डायमंड रिंग उतार लिए और उस का एप्पल कंपनी का आई-6 प्लस फोन भी ले लिया. उस की जेब में जो थोड़ेबहुत पैसे थे, वे भी उन्होंने छीन लिए. उन लोगों ने उस के हाथपैर भी खोल दिए. दोपहर करीब साढ़े 12 बजे वे लोग अर्जुन को कौशांबी मेट्रो स्टेशन पर उतार कर चले गए. उतारने से पहले उन्होंने उसे धमकी दी कि पुलिस से शिकायत की तो अंजाम बुरा होगा.

अर्जुन बहुत डरा हुआ था. उन लोगों के चंगुल से निकलने के बाद उस ने राहत की सांस ली. वह एक औटो वाले के पास पहुंचा और उस से दिल्ली के ईस्ट अर्जुननगर चलने को कहा. उस औटो वाले ने कहा कि उस का परमिट केवल यूपी का है, इसलिए वह उसे दिल्ली बौर्डर के पैसिफिक मौल के पास पहुंचा देगा. अर्जुन उस औटो में बैठ गया. औटो वाले के ही फोन से उस ने अपने पिता से बात कर के कहा कि वह पैसिफिक मौल पहुच रहा है.

बेटे की आवाज सुन कर सुनील वोहरा की जान में जान आई. बेटे को लेने के लिए वह तुरंत कार ले कर निकल पड़े. करीब आधे घंटे में वह दिल्लीयूपी बौर्डर पर स्थित पैसिफिक मौल पर पहुंच गए. अर्जुन वहीं एक औटो वाले के पास खड़ा मिल गया.

बेटे को देख कर सुनील वोहरा की आंखें भर आईं. उन्होंने उसे सीने से लगा लिया. अर्जुन ने औटो ड्राइवर को अपनी मजबूरी बता दी थी, इसलिए वह किराया नहीं दे पाया था. सुनील वोहरा ने औटोचालक को धन्यवाद देते हुए उसे किराए से अतिरिक्त पैसे दिए. वह बेटे को साथ ले कर घर पहुंच गए.

5 लाख रुपए दे कर उन का बेटा सहीसलामत छूट कर आ गया, इस की उन्हें बेहद खुशी थी. मामला निपट जाने के बाद उन्हें किसी से कोई शिकायत नहीं थी. लेकिन उन्हें एक बात खटक रही थी कि बदमाशों ने अर्जुन की कार के अलावा उस की सोने की चेन, डायमंड के इअररिंग, उस का महंगा मोबाइल और कार ले ली थी. उन्हें इस बात का डर सता रहा था कि अगर बदमाशों ने कोई अपराध कर के यह सामान घटनास्थल पर छोड़ दिया तो वह परेशानी में फंस सकते हैं. यही सोच कर उन्होंने यह जानकारी पुलिस को देनी जरूरी समझी.

वह अर्जुन को ले कर उसी दिन शाम 5 बजे के करीब थाना आनंद विहार पहुंच गए. सुनील वोहरा ने थानाप्रभारी संजय सिन्हा को बेटे के अपरहण की बात बताई. मामला गंभीर था. थानाप्रभारी ने इस बारे में एसीपी सुरेंद्र चौधरी से बात कर के अज्ञात बदमाशों के खिलाफ भादंवि की धारा 364ए/392/394/397/506/34 के तहत रिपोर्ट दर्ज कर ली. मामला उच्चाधिकारियों तक पहुंचा तो पूर्वी जिले के डीसीपी ऋषिपाल ने अभियुक्तों की तलाश के लिए स्पैशल स्टाफ और थाना पुलिस की अलगअलग टीमें बनाईं.

एसीपी (औपरेशन) के नेतृत्व में बनाई गई टीम में एसटीएफ के इंसपेक्टर के.जी. त्यागी, एसआई मुकेश कुमार, प्रदीप, जयसिंह, नीरज कुमार, एएसआई ओमेंद्र, रविंद्र, हेड कांस्टेबल ब्रह्मपाल सिंह, कृपाल सिंह, अबरार, सतबीर, कांस्टेबल रामबीर सिंह, आवेश और आस मोहम्मद को शामिल किया गया. जबकि विवेक विहार क्षेत्र के एसीपी सुरेंद्र चौधरी के निर्देशन में बनी टीम में थानाप्रभारी संजय सिन्हा, एसआई विनीत, कांस्टेबल राजपाल, बालस्वरूप आदि को शामिल किया गया. इन दोनों टीमों का निर्देशन डीसीपी ऋषिपाल कर रहे थे.

चूंकि बदमाशों ने अर्जुन का मुख्य सड़क से दिनदहाड़े अपहरण किया था, इसलिए पुलिस ने इस केस को गंभीरता से लिया. पुलिस टीम ने अर्जुन वोहरा से अपहरण की पूरी कहानी विस्तार से सुनी. इस से पुलिस इस नतीजे पर पहुंची कि बदमाश बेहद शातिर हैं, तभी किडनैप करने के बाद उन्होंने बड़ी आसानी से फिरौती हासिल कर ली. पुलिस ने अपहरण के मामलों से जुड़े अनेक अदमाशों के फोटो अर्जुन को दिखा कर पूछा कि क्या उन में से कोई शामिल था? अर्जुन उन में से किसी को नहीं पहचान पाया. जिन बदमाशों ने उस का अपहरण किया था, उस ने उन सभी का हुलिया पुलिस को बता दिया. उस ने यह भी बताया कि एक बदमाश के दाएं हाथ पर आरवी का टैटू बना था और एक के बाएं गाल पर ताजी चोट लगी थी. उस से पूछताछ करने के बाद दोनों पुलिस टीमें बदमाशों की तलाश में जुट गईं.

अर्जुन ने पुलिस को एक सफेद रंग की स्कूटी का नंबर यूपी… सीएन 5552 बताया था. यह नंबर अधूरा था. स्पैशल स्टाफ की टीम ने इस अधूरे नंबर की जांच शुरू की. काफी मशक्कत के बाद पता चला कि स्कूटी का पूरा नंबर यूपी 14 सीएन 5552 है. यह गाड़ी गाजियाबाद की अथौरिटी में रजिस्टर्ड थी. पता चला कि यह स्कूटी सकलपुरा, लोनी (गाजियाबाद) निवासी दीपक के नाम पर रजिस्टर्ड थी.

पुलिस टीम दीपक के घर पहुंच गई. पूछताछ में उस ने बताया कि पहली मई को गांव का ही अनुज नाम का उस का दोस्त किसी काम के लिए सुबह के समय उस से स्कूटी मांग कर ले गया था और कुलदीप उर्फ कालू वापस दे गया था. पुलिस अनुज और कुलदीप के घर गई तो दोनों ही घर से गायब मिले. पुलिस को दीपक के पास से अनुज का मोबाइल नंबर मिल गया था, जो स्विच्ड औफ आ रहा था.

आजकल अधिकांश युवा सोशल साइट पर एक्टिव रहते हैं. सोशल साइट से पुलिस को कई महत्त्वपूर्ण केसों को खोलने में हैल्प भी मिली है. इसलिए स्पैशल स्टाफ टीम ने फेसबुक पर अनुज का एकाउंट खोजना शुरू कर दिया. अनुज नाम से अनेक लोगों के फेसबुक एकाउंट बने हुए थे. उन सभी को एकएक कर के देखना शुरू किया गया. उस में जो फोटो लगे थे, वे सभी अर्जुन को दिखाए गए. इस के अलावा अनुज की फ्रैंड लिस्ट के फोटो भी अर्जुन को दिखाए. फ्रैंड लिस्ट का एक फोटो अर्जुन ने पहचान लिया. उस का नाम आर्यन यादव था.

इस के बाद पुलिस ने आर्यन यादव का फेसबुक एकाउंट खोला. उस में एक फोटो ऐसा था, जिस में वह 2-3 गाडि़यों के बीच में खड़ा था. उन गाडि़यों के फोटो को जूम कर के देखा तो यूपी 16 एजेड 6477 नंबर की स्विफ्ट कार भी थी. अर्जुन के अपहरण में भी स्विफ्ट कार का उपयोग किया गया था. कहीं यह वही कार तो नहीं है, जानने के लिए पुलिस ने आगे की जांच की तो पता चला कि यह कार गांव बिसरख, ग्रेटर नोएडा के करन सिंह के नाम पर थी.

पुलिस टीम करन सिंह के यहां गई तो जानकारी मिली कि यह कार उन का बेटा योगेश दिल्ली ले कर गया है. पुलिस ने योगेश का मोबाइल नंबर हासिल कर लिया. सर्विलांस टीम इस नंबर की जांच कर के लोकेशन का पता लगाने लगी.

आखिर मुखबिर और सर्विलांस टीम की मदद से स्पैशल स्टाफ की टीम ने 5 मई, 2016 को योगेश को आनंद विहार बौर्डर के पास से गिरफ्तार कर लिया. उस से अर्जुन के अपहरण के बारे में पूछताछ की गई तो उस ने आसानी से जुर्म कबूल कर लिया. उस ने बताया कि इस वारदात में उस के साथी रोहित, अनुज, कुलदीप उर्फ कालू और सुशांक सिंह शामिल थे.

इन सभी के नामपते हासिल कर के उन के यहां दबिशें डाली गईं. पर सभी फरार मिले. लेकिन पूर्वी जिले के ही वाहन चोर विरोधी दस्ते के एसआई राजेंद्र सिंह और जितेंद्र ने 5 मई को ही रोहित को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल कर ली.

इस के 2 दिनों बाद दिल्ली पुलिस को गाजियाबाद जिले के थाना भोजपुर से सूचना मिली कि सकलपुरा गांव के कुलदीप उर्फ कालू और अनुज को भज्जन गांव के प्राइमरी स्कूल के पास से 2 तमंचों के साथ पकड़ा गया है. दोनों ही वहां लूट की योजना बना रहे थे.

भोजपुर पुलिस ने उन्हें भादंवि की धारा 398, 307, 401 व 25 आर्म्स एक्ट के तहत गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. दोनों अभियुक्तों ने भोजपुर पुलिस के सामने दिल्ली में अर्जुन के अपहरण कर फिरौती वसूलने की बात भी कबूल ली थी. इस के बाद ही भोजपुर पुलिस ने दिल्ली पुलिस को उन के गिरफ्तार करने की सूचना दी थी.

अभियुक्तों से की गई पूछताछ में पता चला कि सभी अभियुक्त कोई पुराने क्रिमिनल नहीं, बल्कि कालेजों में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स थे. योगेश यादव ग्रेटर नोएडा के बिसरख गांव के करन सिंह यादव का बेटा था. कुछ दिनों पहले इन की जमीन बिकी थी, तब फौरच्यूनर, स्कार्पियो और स्विफ्ट गाडि़यां खरीदी थीं. योगेश गाजियाबाद के ही आईपीएम इंस्टीट्यूट से एलएलबी कर रहा था.

इस की दोस्ती वैशाली सैक्टर-5 के रहने वाले सुशांक से थी. सुशांक भी एक अच्छे परिवार से था. उस के पिता नेवी के रिटायर्ड औफिसर थे और बहन एमबीबीएस डाक्टर है. वह भी आईपीएम इंस्टीट्यूट से वकालत की पढ़ाई कर रहा था. इन दोनों की दोस्ती कुलदीप उर्फ कालू, रोहित और अनुज से थी. अनुज बीए की पढ़ाई कर रहा था और कुलदीप गांव में ही एक छोटी सी दुकान चलाता था. जबकि ओमप्रकाश का बेटा रोहित गाजियाबाद के एक मौल में बाउंसर था.

ये भले ही संपन्न परिवार से थे लेकिन घर से इन्हें खर्चे के लिए निश्चित रकम ही मिलती थी. जबकि इन के घूमने और खानेपीने का खर्चा कहीं ज्यादा था. ऐसे में इन्हें इधरउधर से पैसों का इंतजाम करना पड़ता था. एंजौय करने के लिए ये फिजूलखर्ची करते थे. तभी इन्होंने सोचा कि किसी की चेन स्नैचिंग कर के या राह चलते किसी व्यक्ति को हड़का कर पैसे झटक लें. इस से उन का कुछ खर्चा निकल सकता है.

इसी योजना को साकार करने के लिए ये सभी पहली मई, 2016 को आनंदविहार बौर्डर पर इकट्ठे हुए. योगेश अपनी स्विफ्ट कार में था और सुशांक इओन ले आया था. आनंदविहार बसअड्डे से बाहर इन्हें कोई शिकार नहीं मिला तो ये लक्ष्मीनगर की तरफ विकास मार्ग पर निकल गए. निर्माण विहार के पास 24×7 रेस्टोरेंट से इन्होंने अर्जुन वोहरा को निकलते देखा, जो वहां हौट डौग खाने आया था.

अर्जुन एक रईस परिवार से था. उस के पिता एक बड़े कंस्ट्रक्टर थे. खुद अर्जुन भी हिमाचल में अपने एक कंस्ट्रक्शन को देख रहा था. गले में वह भारी सोने की चेन पहने हुए था और उस के हाथ में आईफोन था. यह सब देख कर योगेश और उस के साथियों को वह शिकार नजर आया. जैसे ही अर्जुन अपनी आई-20 कार में बैठा, इन लोगों ने उस की कार के पीछे अपनी गाडि़यां लगा दीं और पुष्पांजलि मैडिकल सेंटर से आगे गुरुद्वारे के पास एक योजना के तहत अर्जुन की कार रोक कर उस का अपहरण कर लिया.

अर्जुन के पिता से पैसों की डील हो जाने के बाद निर्धारित जगह से पैसे लेने के लिए इन्होंने कार के बजाय दोपहिया वाहन से जाना उचित समझा. इस की व्यवस्था के लिए इन्होंने अनुज को लोनी में उतार दिया. अनुज अपने ही गांव के दीपक के पास गया और किसी बहाने से उस की टीवीएस स्कूटी मांग लाया. उसी स्कूटी से वह अुर्जन के पिता द्वारा पेड़ पर टांगे गए 5 लाख की फिरौती का बैग लाए थे.

योगेश और रोहित की निशानदेही पर पुलिस ने मारुति स्विफ्ट कार, स्कूटी और एक फोन बरामद किया. इस के अलावा पुलिस ने अर्जुन की आई-20 कार और उस का मोबाइल भी बरामद कर लिया. पूछताछ के बाद इन दोनों को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया. जबकि सुशांक सिंह फरार है. कथा लिखने तक पुलिस गाजियाबाद की भोजपुर द्वारा गिरफ्तार किए गए अनुज और कुलदीप को भी ट्रांजिट रिमांड पर लाने की कोशिश कर रही थी. Delhi Kidnapping Case

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

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