Ludhiana Gang Rape Murder Case. शराब का नशा तो था ही, उस में ब्लू फिल्म का जहर घुला तो मिलाजुला नशा इतना गहरा हो गया कि पपीहा, बलबीर और जौहर इंसानियत भी भूल गए और किराएदार का धर्म भी. उन्होंने मकान मालिक की बीमार बेटी को ही दरिंदगी का शिकार बना दिया.
26 -27 अप्रैल, 2016 की रात के करीब 2 बजे का वक्त था. यह समय ऐसा होता है जब ज्यादातर लोग गहरी नींद सोए होते हैं. उसी समय जोर की धमक की आवाज सुन कर लोगों की नींद टूट गई. आवाज ऐसी थी जैसे ऊंचाई से कोई भारी चीज गिरी हो. आवाज सुन कर रमेश भी नींद से उठ गया. पड़ोसियों की नींद में खलल पड़ी तो पड़ोस के 2-3 लड़के अपने घरों से निकल कर आवाज की दिशा की ओर दौड़े.
उस रात रमेश के घर पर उस के अलावा उस की 25 वर्षीय बहन रीटा ही थी. परिवार के बाकी लोग किसी शादी के सिलसिले में लुधियाना से बाहर गए हुए थे. रीटा और रमेश अपनेअपने कमरों में सोए हुए थे. धमक की आवाज से रमेश की नींद टूटी तो उस की समझ में यह नहीं आया कि आवाज कहां से आई. बहरहाल उसे थोड़ी घबराहट जरूर हुई.
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उसे कुछ और नहीं सूझा तो वह इस बारे में अपनी बहन रीटा से बात करने उस के कमरे में चला गया. लेकिन रीटा उसे कमरे में नहीं दिखी तोे उस ने कमरे की ट्यूबलाइट जला दी. उस की रोशनी में रमेश ने जो दृश्य देखा, उस से वह घबरा गया. कमरे में कई जगह खून बिखरा था. चूडि़यों के टुकड़े भी पड़े थे. लग रहा था जैसे कोई उस की बहन से मारपीट कर के उसे जबरन अपने साथ ले गया हो.
रमेश के मकान में 2 किराएदार भी रहते थे. उस ने सोचा कि कहीं यह दुस्साहस उस के किराएदारों का तो नहीं. बहन को खोजता हुआ वह मकान की पहली मंजिल पर बने कमरे में चला गया. कमरे का दरवाजा खुला हुआ था, भीतर कोई नहीं था. अलबत्ता वहां का दृश्य नीचे वाले कमरे से भी ज्यादा चौंकाने वाला था.
इस कमरे को देख कर ही लग रहा था कि वहां काफी संघर्ष हुआ था. किसी महिला के फटे हुए अधोवस्त्र इस हालत में पड़े थे, जैसे उन्हें जबरदस्ती खींच कर उतारा गया हो. यह देख रमेश कुमार को बहन के साथ कोई अप्रिय घटना घटने की आशंका हुई. वह परेशान था कि इतनी रात को रीटा गई तो गई कहां. रमेश का सिर झन्ना गया, उसे चक्कर आने लगे तो कुछ देर के लिए वह वहीं बैठ गया.
उधर धमक की आवाज सुन कर जो पड़ोसी लड़के अपने घरों से बाहर आए थे उन्हें जमीन पर औंधे मुंह पड़ी एक अर्धनग्न महिला दिखाई दी जो खून से लथपथ थी. उस की दाईं बांह पर गहरे कट का घाव था, जहां से लगातार खून बह रहा था.
उन लड़कों ने उस महिला का चेहरा देखने के लिए उसे सीधा किया तो वे हक्केबक्के रह गए. वह उन की पड़ोसन रीटा थी. इस बारे में कुछ पड़ोसियों को बता कर वे तुरंत रीटा के घर गए. उन्होंने दरवाजा खटखटा कर रमेश को आवाज दी. तब तक रमेश भी नारमल हो चुका था. नीचे आ कर उस ने दरवाजा खोला तो उन्होंने उसे बाहर रीटा की लाश पड़ी होने की जानकारी दी.
बहन की मौत की खबर सुन कर रमेश चीखचीख कर रोने लगा. ढांढस बंधा कर लोगों ने पूछा कि यह सब कैसे हुआ. इस पर रमेश ने रोतेरोते बताया, ‘‘रीटा और मैं अलगअलग कमरे में सोए थे. अचानक किसी चीज के गिरने की आवाज आई तो मेरी नींद खुली. पता नहीं यह किस ने किया है.’’
यह बात किसी की समझ में नहीं आई कि जब घर का दरवाजा अंदर से बंद था तो बाहरी व्यक्ति अंदर कैसे गया होगा. घर में जो किराएदार रहते हैं, कहीं उन में से किसी ने तो रीटा को नीचे नहीं गिरा दिया. शक हुआ तो कई लोग रमेश के घर में घुस कर किराएदारों के कमरों में गए. जब किराएदार कमरों में नहीं मिले तो वे लोग सीधे छत पर पहुंचे. वहां उस घर के तीनों किराएदार खड़े मिले. तीनों नशे में धुत थे और उन में से एक के हाथ में बड़ा सा चाकू था.
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रमेश के साथ कुछ लड़कों को वहां आया देख वह किराएदार भड़क उठा जिस के हाथ में चाकू था. वह चाकू दिखाते हुए बोला, ‘‘तुम में से कोई भी आगे आया तो उस का भी वही हाल कर दूंगा जो रीटा का किया है. हम कितने खतरनाक हैं, इस बात की तुम लोगों को खबर नहीं है, हम बंदे को काट कर यूं ही फेंक देते हैं.’’
लेकिन चाकू और उस की धमकी से कोई नहीं डरा. लोग बहुत गुस्से में थे, इसलिए उन्होंने उन तीनों को घेर कर दबोच लिया और उन की पिटाई शुरू कर दी. उन तीनों के नाम क्रमश: पपीहा राम, मोहम्मद जौहर और बलबीर सिंह थे.
इस बीच किसी ने इस घटना की जानकारी पुलिस को दे दी. थोड़ी सी देर में थाना डिवीजन नंबर 7 के थानाप्रभारी हरपाल सिंह ग्रेवाल पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. इस से पहले कुछ लोग रीटा को एक कार में डाल कर अस्पताल ले गए थे. लेकिन वहां जांच के बाद डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.
लोगों ने मोहम्मद जौहर, पपीहा राम और बलवीर को पीटपीट कर बेहाल कर दिया था. मामले की गंभीरता को देखते हुए हरपाल सिंह ने एसीपी (ईस्ट) गुरजीत सिंह व लुधियाना के डीसीपी ध्रुमण निंबले को सूचित कर दिया. पुलिस ने भारी मशक्कत के बाद उन तीनों को भीड़ से छुड़ाया और उन्हें थाने ले गई.
रामप्रसाद मूलरूप से बिहार के जनपद सहरसा के गांव मनोहरगढ़ का रहने वाला था. बरसों पहले उस की शादी सुनीता देवी से हुई थी. उन के 3 बच्चे हुए एक बेटी रीटा और 2 बेटे. गांव में रह कर खेती से किसी तरह परिवार की गुजरबसर हो रही थी. करीब 20 साल पहले रामप्रसाद किसी अच्छे रोजगार की तलाश में पहले अपने बीवीबच्चों के साथ पंजाब आ गया. शुरू में छोटेमोटे काम करने के बाद उसे लुधियाना के एक बड़े कारखाने में नौकरी मिल गई.
कुछ दिनों तक वह किराए पर रहा, फिर इधरउधर से पैसों का इंतजाम कर के उस ने लुधियाना के ताजपुर रोड की ईडब्ल्यूएस कालोनी में प्लौट ले कर अपना 3 मंजिला मकान बनवा लिया. नीचे वह अपने परिवार के साथ रहता था. जबकि ऊपर के कमरे उस ने किराए पर उठा दिए थे.
कुछ अरसा पहले पुराने किराएदार के जाने के बाद उस कमरे में मोहम्मद जौहर और पपीहा राम नाम के 2 युवक आ गए थे. दोनों पास की एक फैक्ट्री में नौकरी करते थे.
मोहम्मद जौहर मूलरूप से उत्तर प्रदेश के जिला आजमगढ़ के गांव बंकट का रहने वाला था, जबकि पपीहा राम उत्तर प्रदेश के ही जिला सुल्तानपुर के गांव बसाह का निवासी था.
ये दोनों सुबह अपने काम पर निकल कर शाम को अपने कमरे पर लौटते थे. नीचे रहने वालों से वे ज्यादा वास्ता नहीं रखते थे. रामप्रसाद और उस के परिवार के किसी सदस्य को उन से कोई परेशानी नहीं थी. करीब 2 हफ्ते पहले जौहर और पपीहा का एक जानकार बलबीर सिंह भी इन दोनों के साथ रहने लगा था. रामप्रसाद ने इस पर कोई एतराज नहीं किया. बलबीर पंजाब के ही बठिंडा शहर का रहने वाला था.
रामप्रसाद की बेटी रीटा जवान हुई तो उस की शादी बिहार के ही जिला सुपौल के गांव लहरनियां के शिव चौधरी से कर दी गई. शिव सूरत की किसी फैक्ट्री में काम करता था. रीटा को भी वह साथ ले गया. वक्त के साथ रीटा 3 बेटियों की मां बन गई.
रीटा ज्यादा बीमार हुई तो रामप्रसाद इलाज के लिए उसे लुधियाना ले आया. रीटा अपने साथ केवल एक साल की बेटी को ही लाई थी. 2 बेटियों को वह पति के पास ही छोड़ आई थी क्योंकि वे दोनों वहीं पढ़ रही थीं. रामप्रसाद ने पहले तो बेटी को सरकारी अस्पताल में दिखाया, जब फायदा नहीं हुआ तो उस ने उस का इलाज प्राइवेट अस्पताल में कराया.
4 साल से रीटा लुधियाना में पिता के घर पर रहते हुए अपना इलाज करवा रही थी. अपनी छोटी बेटी का दाखिला उस ने लुधियाना के ही एक स्कूल में करवा दिया था.
रिश्ते में रामप्रसाद का बड़ा भाई लगने वाला गयाप्रसाद जो जुगियाना में रहता था, उस के यहां आया. 26 अप्रैल, 2016 को उस के बेटे की शादी थी. जिस में शामिल होने के लिए वह रामप्रसाद, उस की पत्नी सुनीता और बेटे संजय को अपने साथ ले गया था. घर पर रामप्रसाद की बेटी रीटा और छोटा बेटा रमेश ही रह गए थे. रीटा की बेटी भी जिद कर के नानानानी के साथ चली गई थी.
जाते समय रामप्र्रसाद ने अपने किराएदारों से भी घर और बच्चों का ध्यान रखने को कह दिया था. रमेश जहां काम करता था, वहां उस की नाइट ड्यूटी होती थी. हमेशा की तरह 26 अप्रैल की रात 8 बजे तैयार हो कर काम पर चला गया था. उस वक्त बाहर से आ रहे जौहर पपीहा और बलबीर से उस ने अपनी बीमार बहन रीटा का ध्यान रखने की बात कही थी.
आमतौर पर रमेश सुबह 6 बजे ही अपनी ड्यूटी से घर लौटता था. लेकिन उस रात सुपरवाइजर से कह कर वह रात 11 बजे ही घर आ गया था. घर पहुंचने पर रीटा ने ही नींद से उठ कर दरवाजा खोला था.
उस वक्त जौहर, पपीहा और बलबीर अपने कमरे में बैठ कर शराब पीते हुए ब्लू फिल्म देख रहे थे. तीनों जवान थे. अश्लील दृश्य देख कर उन के मन में भी कुछ वैसा ही करने का विचार आया. उस समय किसी कालगर्ल के पास जाना उन के लिए आसान नहीं था.
इस से अलग कोई और रास्ता नजर न आता देख, उन तीनों को रीटा का ध्यान आया. इस बात की उन्हें कोई जानकारी नहीं थी कि रमेश भी घर लौट आया है. वे लोग समझ रहे थे कि रीटा घर में निपट अकेली होगी.
वे तीनों रात एक बजे के करीब रीटा के कमरे में गए और जबरदस्ती उसे उठा कर अपने कमरे में ले आए. उस ने चिल्लाने की कोशिश की तो उन लोगों ने उस के मुंह में कपड़ा ठूंस दिया. अपने कमरे में ले जा कर उन हैवानों ने उस बीमार के साथ बारीबारी से बलात्कार किया. इस के बाद वे उसे छत पर ले गए.
उन का इरादा उस के जिस्म से और खेलने का था. लेकिन इस बीच उस की तबियत बिगड़ने लगी, वह पूरी तरह बेहोशी की अवस्था में चली गई. अब उन्हें इस बात का डर सताने लगा कि अगर मर गई तो लेने के देने पड़ जाएंगे. इसलिए उन्होंने बचने के लिए उसे छत से नीचे फेंकने का फैसला कर लिया. इस के बाद वह उसे उठा कर छत पर बनी दीवार के पास ले गए.
बलबीर के हाथ में तेजधार वाला चाकू था. रीटा को फेंकते वक्त उसी चाकू से रीटा की बाजू पर घाव हो गया था.
रीटा को छत से फेंकने के बाद तीनों अपना सामान उठा कर वहां से भाग जाना चाहते थे लेकिन इस से पहले ही पड़ोसियों ने उन्हें घेर कर काबू कर लिया और उन की जम कर पिटाई करने के बाद तीनों को पुलिस के हवाले कर दिया था.
पंजाब की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले लुधियाना शहर में गैंगरेप की बढ़ती घटनाओं ने पुलिस को पहले ही शर्मसार कर रखा था. पिछले 3 महीने में यहां बलात्कार के करीब 2 दरजन मामले दर्ज हो चुके थे.
26 अप्रैल को एक ही दिन में दुराचार की 4 घटनाएं हुई थीं. 27 तारीख को रीटा के साथ हुई घटना ने पुलिस की चिंता और बढ़ा दी. इसलिए डीसीपी निंबले ने आक्रोशित लोगों को शांत कर के आश्वासन दिया था कि आरोपियों के खिलाफ सख्त काररवाई की जाएगी.
अभियुक्तों को लोगों के चंगुल से छुड़वा कर इंसपेक्टर हरपाल सिंह पहले ही अपनी जिप्सी में बिठा चुके थे. उन्होंने रमेश कुमार से तहरीर ले कर केस दर्ज करने के लिए थाने भिजवा दी. केस दर्ज होने से पहले ही अस्पताल से सूचना मिली कि रीटा की मृत्यु हो गई है.
इसी आधार पर थाना डिवीजन नंबर-7 के थानाप्रभारी हरपाल सिंह ने मोहम्मद जौहर, पपीहा व बलबीर के खिलाफ भादंवि की धारा 302 /376-डी/ 511/ के तहत मामला दर्ज करा दिया. तीनों अभियुक्तों को कोर्ट में पेश कर के उन्हें 5 दिन के रिमांड पर लिया गया. रिमांड अवधि में विस्तृत पूछताछ कर के उन्हें कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया. Ludhiana Gang Rape Murder Case
—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित






