Pooja Vaibhav Theft Case. एकदूसरे से प्यार करने वाले पूजा और वैभव गरीब परिवारों से थे, लेकिन उन के ख्वाब बहुत ऊंचे थे. अपने ख्वाबों को पूरा करने के लिए उन्होंने ऐसे आदमी को निशाना बनाया, जिस के पूजा पर तमाम एहसान थे. पूजा ने उन के साथ जो किया, जान कर कोई मुश्किल से ही किसी की मदद करना चाहेगा
ऐसे तमाम लोग हैं, जो किसी की मदद करते समय यह नहीं सोचते कि उन्हें उस के बदले में क्या मिलने वाला है. ऐसे लोग किसी कमजोर या असहाय की मदद कर के मन ही मन सुकून महसूस करते हैं.
लेकिन बदल रहे सामाजिक परिवेश में कभीकभी नेकियां भी मुसीबत बन जाती हैं. तब मदद करने वाले आदमी को लोग तरहतरह की नसीहतें देने लगते हैं. उन के सामने तरहतरह के उदाहरण पेश किए जाने लगते हैं और समझाया जाने लगता है कि अब जमाना बदल गया है, इसलिए किसी की मदद सोचसमझ कर करनी चाहिए. उस स्थिति में मदद करने वाला आदमी यही सोचता है कि अब नेकी करना भी ठीक नहीं है.
इस तरह की और वीडियो देखने के लिए मनोहर कहानियां का चैनल सब्सक्राइब करें
रामबीर बालियान के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था. वह काफी परेशानी में फंस गए थे. वह जिस हालात से गुजर रहे थे, वह वाकई परेशान करने वाला था. उन के घर से रहस्यमय ढंग से लाखों की नकदी और गहने गायब हो गए थे. चोरी भी इतनी चालाकी से की गई थी कि ज्यादा लोगों पर शक भी नहीं किया जा सकता था.
वह पुलिस के पास जाने से भी डर रहे थे, क्योंकि वह खुद को ही जाल में फंसता महसूस कर रहे थे. इस मुसीबत में वह सिर्फ छटपटा रहे थे. रामबीर बालियान उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर शहर के थाना नई मंडी की पटेलनगर कालोनी में रहते थे. उन का दूध का काफी बड़ा कारोबार था.
आर्थिक रूप से समृद्ध मृदुभाषी रामबीर के परिवार में पत्नी मंजू देवी के अलावा 2 विवाहित बेटे थे. उन में से एक बेटा दिल्ली में रह कर कोचिंग कर रहा था, जबकि दूसरा गुड़गांव में नौकरी करता था. बहुएं पटेलनगर में ही सासससुर के साथ रहती थीं. छुट्टियों पर बेटे आते रहते थे. मूलरूप से गांव के रहने वाले रामबीर नेक दिल इंसान थे. उन से जो हो सकता था, सामर्थ्य के अनुसार वह लोगों की मदद कर दिया करते थे.
4 साल पहले उन्होंने एक गरीब परिवार की मदद करने की सोची. यह परिवार अस्थाई तौर पर दूसरे मोहल्ले में रहता था. उस परिवार में कुल 3 लोग थे. एक मनीराम, दूसरी उस की पत्नी शीला और तीसरी उस की बेटी पूजा. मनीराम मेहनतमजदूरी करता था, जबकि शीला लोगों के घरों में काम करती थी. इन की बेटी पूजा स्कूल जाती थी, लेकिन आर्थिक परेशानियां उस की पढ़ाई में बाधा बन रही थीं.
शीला चूंकि पटेलनगर में कई लोगों के यहां काम करती थी, इसलिए रामबीर भी उसी से अपने घर का काम करा लिया करते थे. जब कभी मौका मिलता, शीला अपनी परेशानियां उन से बताती रहती थी. उसे परेशान देख कर बालियान दंपति ने उस की मदद करने की सोची. दरअसल उन का अपना 2 मंजिला बढि़या मकान था. वह नीचे के हिस्से में रहते थे. घर में चूंकि बेटे नहीं रहते थे, रामबीर और उन की पत्नी रोजाना सुबह और दोपहर बाद डेयरी पर चले जाते थे तो घर में सिर्फ बहुएं ही रह जाती थीं.
घर की ऊपरी मंजिल खाली थी, इसलिए उन्होंने सोचा कि दूसरी मंजिल शीला के परिवार को रहने के लिए दे दी जाए. इस से उस की मदद भी हो जाएगी और घर की भी देखभाल होती रहेगी. रामबीर ने बेटों और बहुओं से सलाहमशविरा कर के शीला को यह बात बताई तो वह बहुत खुश हुई. वह पति और बेटी के साथ उन के यहां रहने आ गई.
समय के साथ उन के बीच विश्वास का एक मजबूत रिश्ता कायम हो गया. समय अपनी गति से चलता रहा. पूजा पढ़ना चाहती थी, लेकिन गरीबी की वजह से उस की पढ़ाई में रुकावट आ रही थी. उस की परेशानी बालियान परिवार से छिपी नहीं थी. ऐसे में जरूरत पड़ने पर वे उस की मदद कर दिया करते थे. वह भी चाहते थे कि पूजा पढ़लिख कर कामयाब हो जाए और अपने परिवार का सहारा बन जाए.
आज ही सब्सक्राइब करें सरिता
आपके लिए स्पेशल छूट

मनीराम और शीला जरूर सीधेसादे थे, लेकिन पूजा तेजतर्रार थी. वह जवानी की दहलीज पर खड़ी थी, इसलिए उस के सपने हिलोरे लेने लगे थे. वह बीए प्रथम वर्ष में पढ़ रही थी, तभी उस की मुलाकात वैभव से हुई, जो नजदीक ही धोबी वाली गली में रहता था और किसी फैक्ट्री में नौकरी करता था. उन की मुलाकात पहले दोस्ती, फिर प्यार में बदल गई.
चढ़ती उम्र का प्यार बहुत तेजी से परवान चढ़ता है. उन दोनों के साथ भी ऐसा ही हुआ. समय ने पूजा को चालाक और शातिर बना दिया था. वह कालेज के बहाने घर से निकलती और वैभव के साथ घूमती. दोनों ने न केवल अपने प्यार को परवाज दी थी, बल्कि साथ जीनेमरने की कसमें भी खाईं.
उन के प्यार को ले कर चर्चाएं चलीं तो यह बात उन के घर वालों को भी पता चल गई. लेकिन पूजा और वैभव ने अपनेअपने ढंग से उन्हें समझा दिया. उन्होंने घर वालों से कह दिया कि वे दोनों एकदूसरे से प्यार ही नहीं करते, बल्कि विवाह करना चाहते हैं.
चूंकि पूजा पढ़ीलिखी थी और जिंदगी देखने का उस का अपना नजरिया था, इसलिए अपने घर में उसी की चलती थी. इस के बाद पूजा और वैभव का रिश्ता पक्का कर दिया गया. उन का विवाह दिसंबर में होना तय हुआ. इस के बाद वैभव और पूजा के यहां आनेजाने लगा. चूंकि रिश्ता तय हो गया था, इसलिए दोनों को मिलने की पूरी आजादी थी.
यह उन का निजी मामला था, इसलिए रामबीर और उन के घर वालों को आपत्ति जताने का कोई मतलब नहीं था. वह खुद भी चाहते थे कि पूजा अपनी जिंदगी हंसीखुशी से बिताए. वहां रहते हुए पूजा ने अपनी अच्छी बातों और आदत से सब का दिल और विश्वास जीत लिया था. पूजा पर विश्वास इस हद तक था कि कई बार बालियान परिवार कहीं बाहर जाता तो पूरा घर पूजा और उस के मातापिता के भरोसे छोड़ जाता था.
मई, 2016 के आखिरी सप्ताह की बात है. रामबीर की बहुएं मायके गई थीं तो पत्नी भी किसी रिश्तेदारी में चली गई थीं. रामबीर अकेले ही रह गए थे. चूंकि उन्हें डेयरी पर जाना होता था, इसलिए नीचे के कमरों में ताला लगा कर वह चले जाते थे. घर का एक ही मुख्य दरवाजा था. दूसरी मंजिल पर जाने के लिए बरामदे से जीना बना था. रामबीर जब जाते थे, आवाज लगा कर पूजा को मुख्य दरवाजा बंद कर लेने को कह देते थे.
सब कुछ ठीकठाक चल रहा था. रामबीर की पत्नी मंजू वापस आई तो 27 मई को उन्हें किसी को भुगतान देना था, इसलिए उन्होंने पत्नी से सेफ के लौकर से रकम लाने को कहा. मंजू ने लौकर खोला तो उस में नजर पड़ते ही उन के होश उड़ गए, क्योंकि उस में रखे करीब डेढ़ लाख रुपए और 40 तोले सोने के गहने गायब थे.
यह जान कर रामबीर के भी पैरों तले से जमीन खिसक गई. उन्हें विश्वास ही नहीं हुआ. पैसे और गहने कब गायब हो गए, उन्हें पता ही नहीं चला. 23 मई के बाद से उन्होंने लौकर खोल कर नहीं देखा था. सब से अधिक हैरान करने वाली बात यह थी कि पैसे और गहने ताला खोल कर गायब किए गए थे.
मामला चोरी का था और चोरी चाबी से सेफ खोल कर की गई थी. जिस कमरे में सेफ थी, वहां तक जाने के लिए 2 कमरे थे. उन के दरवाजों पर वह ताले लगा कर जाते थे. ताले बिलकुल सही सलामत थे. सभी तालों का दूसरी चाबियों का भी एक अतिरिक्त गुच्छा था. उन्होंने उसे घर में ढूंढा तो वह गायब मिला.
रामबीर और उन की पत्नी को पूरा विश्वास था कि चोरी किसी बाहरी आदमी ने नहीं की है, क्योंकि अमूमन चोर ताले तोड़ देते हैं. दूसरे उन के जाने के बाद घर का मुख्य दरवाजा खोलने बंद करने की जिम्मेदारी शीला के परिवार की थी. मनीराम और शीला से तो इस तरह की उम्मीद नहीं की जा सकती थी. पूजा पर उन्हें जरूर संदेह हुआ. एक तो दिन में घर में वही अकेली रहती थी, दूसरे वह तेजतर्रार होने के साथसाथ अक्सर गरीबी का रोना रोती रहती थी, तीसरे उस के पास उस के प्रेमी का भी आनाजाना था.
विश्वास और बदनामी को ध्यान में रख कर रामबीर ने समझदारी दिखाते हुए पुलिस को खबर करने से पहले खुद ही पूजा से पूछताछ करना जरूरी समझा. उन्होंने उस से इस बारे में पूछते हुए कहा, ‘‘देखो पूजा, तुम हमारे बच्चों की तरह हो. घर में इतनी बड़ी चोरी हो गई है. हम जानते हैं कि बाहर के किसी आदमी ने चोरी नहीं की. अगर तुम सब कुछ सचसच बता दो तो अच्छा रहेगा.’’
उन की बात पर पूजा हाथ नचा कर बोली, ‘‘कैसी बात कर रहे हैं अंकलजी, आप को मुझ पर इतना भी भरोसा नहीं. मैं ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि आप इतना घटिया इलजाम मेरे ऊपर लगाएंगे.’’
इसी के साथ उस ने तरहतरह की कसमें खा कर खुद को पाकसाफ साबित करने की कोशिश की तो रामबीर ने कहा, ‘‘तो फिर घर में आया कौन? यह तो तुम्हें ही पता होगा, क्योंकि दरवाजा तुम्हीं बंद करती थी.’’
‘‘मैं इस बारे में कुछ नहीं जानती.’’ पूजा ने कहा. जबकि उस के हावभाव से साफ लग रहा था कि वह झूठ बोल कर जरूरत से ज्यादा तेज बनने की कोशिश कर रही है.
कोई हल नहीं निकला तो रामबीर और मंजू ने मनीराम एवं शीला से बेटी से सच जानने को कहा. लेकिन पूजा लगातार इंकार करती रही. स्थिति बड़ी अजीब हो गई थी. एक दिन और बीत गया. अगले दिन रामबीर ने सब के सामने पूजा को बैठा कर साफसाफ कहा, ‘‘देखो पूजा, मुझे लगता है कि तुम झूठ बोल रही हो. तुम सचसच बता दो, वरना मुझे पुलिस में शिकायत करनी पड़ेगी.’’
उन की इस बात पर पूजा अचानक बिफर पड़ी, ‘‘कर दीजिए पुलिस में शिकायत. पुलिस के सामने मैं भी आप पर कोई इल्जाम लगा दूंगी. कानून मेरा ही साथ देगा, उस के बाद समाज में आप की ही बदनामी होगी. आप खुद चोरी कर के मुझ पर झूठा इल्जाम लगा रहे हैं.’’
पूजा के इस तेवर से सभी हैरान रह गए थे. एक तो चोरी हुई थी, दूसरे पूजा झूठा आरोप लगाने और समाज में बदनाम करने की धमकी दे रही थी. वह इस तरह के घटियापन पर उतर आएगी, किसी को ऐसी उम्मीद नहीं थी.
पूरा बालियान परिवार उलझन में फंस कर परेशान था. एक ही झटके में एहसान भूल कर पूजा उन के साथ दुश्मन की तरह पेश आ रही थी. अब रामबीर उस परिवार की मदद कर के पछता रहे थे. मदद के बदले उन की पीठ थपथपाने के बदले सभी उन्हें ताने मारते हुए नसीहतें दे रहे थे. वह इस समस्या से निकलने का हल खोजने लगे.
बुराई की उम्र ज्यादा लंबी नहीं होती. अगले दिन रामबीर को पता चला कि पूजा के प्रेमी ने एक मोटरसाइकिल खरीदी है, साथ ही शादी के लिए धर्मशाला भी बुक कराई है. उस की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी. इस से साफ लग रहा था कि चोरी में पूजा और उस का प्रेमी शामिल है.
इस के बाद रामबीर थाने पहुंचे और थानाप्रभारी रोजंत त्यागी को पूरी बात बताई. पुलिस ने उन की तहरीर पर अपराध संख्या 969/2016 पर मुकदमा दर्ज कर विवेचना सबइंसपेक्टर प्रहलाद सिंह को सौंप दी.
पुलिस ने रामबीर के घर का निरीक्षण किया, इसी के साथ सबइंसपेक्टर प्रहलाद सिंह, महिला सबइंसपेक्टर शैली राणा, कांस्टेबल प्रीति उपाध्याय और लाल सिंह आदि को वैभव तथा प्रीति की गतिविधियों की सच्चाई परखने को लगा दिया गया. पता चला कि दोनों शादी की तैयारियों के लिए हलवाई और बैंडबाजे वाले से बात कर के उन्हें एडवांस देने की बात कर रहे हैं.
इस के बाद पुलिस ने पूजा से पूछताछ की, लेकिन वह अपने इंकार पर अड़ी रही. आखिर पुलिस ने पूजा और उस के प्रेमी को हिरासत में ले कर थाने में सख्ती से पूछताछ की तो पता चला कि लाखों की चोरी उन्हीं दोनों ने की थी. सीओ अरुण कुमार ने भी देनों से पूछताछ की. विस्तृत पूछताछ में चोरी के पीछे की जो वजह सामने आई, वह चौंकाने वाली थी.
दरअसल, पूजा और वैभव की सोच एक जैसी थी. दोनों ही महत्वाकांक्षी थे और गरीबी जिंदगी भर नहीं झेलना चाहते थे. पूजा का बचपन जरूर गरीबी में बीता था, लेकिन प्रेमी के साथ वह ऐश से जीना चाहती थी. दोनों जब भी मिलते, तरहतरह के सपने बुनते. विवाह को ले कर भी उन के तमाम सपने थे, लेकिन उन के जैसे हालात थे, उन में वे पूरे होते नहीं दिख रहे थे, जबकि ऐसे पलों को हर कोई यादगार बना लेना चाहता है.
हालात गवाही न दें तो महत्वाकांक्षाओं को काबू में रखना ही समझदारी होती है, लेकिन पूजा और वैभव हालात के गुलाम नहीं बनना चाहते थे. दोनों की दिली इच्छा थी कि उन की शादी धूमधाम से हो. सपने पूरे करने के लिए पैसे कहां से आएं, दोनों इसी उधेड़बुन में लगे रहते थे.
पूजा जानती थी कि उस के मकान मालिक के घर में पैसा भी रहता है और गहने भी. उसे यह भी पता था कि पैसे और गहने सेफ में रखे रहते हैं. उस ने उन्हें ही अपना शिकार बनाने की ठान ली. इस बारे में उस ने वैभव से बात की तो वह भी उस का साथ देने को तैयार हो गया. सपने पूरे करने के चक्कर में पूजा बालियान परिवार के सारे अहसान भूल गई.
पूजा शातिर थी. वह अपना काम बड़ी चालाकी से करना चाहती थी. एक दिन उस ने मौका पा कर घर की चाबियों का गुच्छा चुरा कर अपने पास रख लिया. इस के बाद वह मौके की तलाश में रहने लगी. गर्मियों की छुट्टियों में घर की महिलाएं बाहर चली गईं तो 24 मई को रामबीर जैसे ही दोपहर में डेयरी के लिए निकले, उस ने तयशुदा योजना के अनुसार वैभव को बुला लिया.
दोनों ताले खोल कर उन्होंने लौकर से कुल एक लाख 40 हजार रुपए और गहने चुरा लिए. पूजा ने सारा सामान वैभव को दे कर भेज दिया. इसी पैसे से उस ने मोटरसाइकिल खरीदी और विवाह के लिए धर्मशाला भी बुक कराई. पूजा जानती थी कि उस पर शक किया जा सकता है. इस के लिए उस ने सोच रखा था कि वह रामबीर पर झूठा आरोप लगा देगी तो कानून उसी का साथ देगा.
लेकिन उस की चाल उलटी पड़ गई. पुलिस ने दोनों की निशानदेही पर 52 हजार रुपए और आभूषण बरामद कर लिए. बाकी रकम वे खर्च कर चुके थे. पूछताछ के बाद पुलिस ने पूजा और वैभव को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. कथा लिखे जाने तक उन की जमानतें नहीं हो सकी थीं. पूजा के मातापिता रामबीर बालियान का घर छोड़ कर जा चुके थे. प्यार में अंधे पूजा और वैभव ने महत्वाकांक्षाओं को काबू में रख कर शार्टकट न अपनाया होता तो उन का भविष्य तो चौपट होने से बचता ही, साथ ही बालियान परिवार का भरोसा भी कायम रहता.
बालियान दंपति इस तरह भरोसा टूटने से आहत है. उन का कहना है कि मदद करने का ऐसा सिला मिलेगा, ऐसी उन्हें कतई उम्मीद नहीं थी. पूजा ने जो किया, उसे जान कर भला कोई किसी गरीब की मदद क्यों करेगा? Pooja Vaibhav Theft Case
—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित






