Maharashtra Crime Story. जिस प्रिया से जयेश अटूट प्यार करता था, उस की जिद ने उस के मन में ऐसी नफरत पैदा कर दी कि उस ने सजा की चिंता किए बगैर उस की हत्या ही नहीं कर दी, उस की लाश को ऐसा ठिकाने लगाया कि पुलिस को उस की हड्डी तक नहीं मिली.
महाराष्ट्र के थाणे जनपद के उपनगर डोंबिवली की आजरे पाड़ा साईं दर्शन इमारत की तीसरी मंजिल पर रहने वाली सोबिका परिमल सिकंदर काफी परेशान थी. इस की वजह यह थी कि उस दिन उस के यहां सुबह से ही पानी नहीं आ रहा था, जिस की वजह से वह नहाई तक नहीं थी.
वहां से कुछ दूर स्थित आजरे गांव में सोबिका की छोटी बहन दीपिका उर्फ प्रिया रहती थी. प्रिया अपने फ्लैट में अकेली ही रहती थी. उस ने सोचा कि घर के बाकी काम वह पानी आने पर कर लेगी, फिलहाल वह नहाने का इंतजाम कर ले. नहाने के लिए वह अपनी छोटी बहन प्रिया के फ्लैट पर चली गई.
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वह प्रिया के फ्लैट पर पहुंची तो फ्लैट का दरवाजा खुला था और कपड़े वगैरह इधरउधर बिखरे थे. यह सब देख कर उस का दिमाग चकरा गया. फ्लैट में प्रिया नहीं दिखाई दी. वह उस की लापरवाही को अच्छी तरह से जानती थी. उस ने घर के बिखरे सामान को ठीक किया और उसे फोन लगाया.
कई बार फोन लगाने के बाद भी जब दीपिका उर्फ प्रिया से संपर्क नहीं हो सका तो उस ने पड़ोसियों से उस के बारे में पूछा. पर किसी से कोई जानकारी नहीं मिली. उसे लगा, प्रिया जल्दबाजी में कहीं आसपास चली गई होगी. वह नहाधो कर तैयार हो गई, लेकिन तब तक प्रिया नहीं लौटी. वह उस के फ्लैट में ताला लगा कर अपने फ्लैट पर चली आई.
अपने फ्लैट से भी वह बारबार प्रिया को फोन करती रही, लेकिन हर बार उस का फोन स्विच्ड औफ बताता रहा. इसी तरह 2-3 दिन बीत गए. वह जिस बार में डांस करती थी, वहां भी उस ने फोन कर के पूछा. वहां से पता चला कि 3 दिनों से प्रिया वहां भी नहीं आ रही है. इस के बाद उस का मन किसी अनहोनी से कांप उठा.
वह यह जानकारी पुलिस को देने की सोच रही थी कि उस के फोन की घंटी बज उठी. स्क्रीन पर प्रिया का नंबर देख कर उस के मन को थोड़ी राहत महसूस हुई. उस ने फोन रिसीव किया तो दूसरी ओर से किसी आदमी की आवाज आई, ‘‘तुम्हारी बहन प्रिया अपने गांव चली गई है.’’ इस पर सोबिका ने पूछा, ‘‘आप कौन बोल रहे हैं, प्रिया कहां है?’’
लेकिन कोई जवाब दिए बगैर फोन काट दिया गया. पता नहीं वह कौन था, जिस ने प्रिया के गांव जाने के बारे में बताया था. अगर वह गांव जाती तो उसे बता कर जाती. उस ने प्रिया का नंबर रिडायल किया तो फिर फोन बंद होने का संदेश मिला. वह यह सोचसोच कर परेशान थी कि पता नहीं फोन करने वाला कौन था? उस ने उसी समय अपने गांव फोन किया तो पता चला कि प्रिया वहां नहीं पहुंची है.
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सोबिका बहन को ले कर परेशान हो रही थी. वह अपने जानने वालों को फोन कर के उस के बारे में पूछने लगी. पर उस के बारे में कहीं से कोई जानकारी नहीं मिली. अगले दिन सोबिका के फोन पर प्रिया के नंबर से फिर मिस्डकाल आई. उस ने पलट कर फोन किया तो घंटी जा रही थी, पर फोन कोई रिसीव नहीं कर रहा था. कई बार घंटी बजने के बाद जब फोन रिसीव नहीं किया गया तो सोबिका ने उस के प्रेमी जयेश को फोन किया.
काफी देर बाद जयेश ने फोन उठाया तो उस ने उस से प्रिया के बारे में पूछा. जयेश ने बताया, ‘‘प्रिया तो एक सप्ताह के लिए बंगलुरु गई है. अब उस के बारे में मेरे पास दोबारा फोन मत करना.’’
जयेश ने जिस अंदाज में उसे जवाब दिया था, वह सोबिका को अच्छा नहीं लगा. इस से पहले जब भी जयेश उस से बात करता था, बड़े तमीज के साथ पेश आता था. इस से सोबिका को उस पर कुछ शक हुआ. वह उसी समय रात 10 बजे के करीब थाना मानपाड़ा पहुंची.
सोबिका ने थाने में मौजूद असिस्टैंट इंसपेक्टर झेंडे को अपनी बहन दीपिका उर्फ प्रिया के कई दिनों से गायब होने की बात बता दी. झेंडे ने जब उस से पूछा कि उसे किसी पर शक वगैरह तो नहीं है, उस ने प्रिया के प्रेमी जयेश पर शक जाहिर किया. जयेश डोंबिवली दाबड़ी गांव के स्वामी समर्थ अपार्टमैंट में रहता था.
असिस्टैंट इंसपेक्टर झेड़े ने सोबिका की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज कर सूचना सीनियर इंसपेक्टर गौतम रणदिवे को दे दी. इस के बाद प्रिया के गायब होने के मामले की जांच के लिए एक पुलिस टीम बनाई गई, जिस में इंसपेक्टर गौतम रणदिवे ने सबइंसपेक्टर विजय मोरे, कांस्टेबल मालगोटे, राजेंद्र ठोंमरे, ज्योतिबा सांलुके, आर.आर. पाटिल, सुरेश नाईक, मधुकर पोरवटे और कुणाल शिर्के को शामिल किया गया.
टीम ने जयेश के घर छापा मारा तो वह घर पर ही मिल गया. पुलिस उसे हिरासत में ले कर थाने आ गई. थाने में जब उस से प्रिया के बारे में पूछा गया तो उस ने कहा, ‘‘सर, मैं उस के बारे में कुछ नहीं जानता. मुझे पता नहीं वह कहां गई है.’’
‘‘लेकिन तुम ने तो सोबिका से कहा था कि प्रिया अपने घर बंगलुरु चली गई है.’’ गौतम रणदिवे ने कहा. ‘‘वह तो सर मैं ने ऐसे ही कह दिया था.’’ जयेश ने कहा.
‘‘मान लिया जाए कि प्रिया बंगलुरु चली गई है तो तुम्हारे पास उस का फोन कैसे आया? क्योंकि तुम ने उसी के फोन से सोबिका से बात की थी.’’ गौतम रणदिवे ने कहा.
जयेश उन की इस बात का जवाब नहीं दे सका. इस के बाद उन्होंने उस पर मनोवैज्ञानिक दबाव डाला तो उस ने कहा, ‘‘सर, अब प्रिया इस दुनिया में नहीं है. मैं ने उस की हत्या कर के लाश भीमाशंकर की पहाडि़यों पर ठिकाने लगा दी है.’’
पुलिस को पहले से ही यही आशंका थी. वह उसे भीमाशंकर की पहाडि़यों पर ले गई, पर वहां पुलिस का कोई सबूत नहीं मिला. जयेश ने बताया कि लाश जलाने के बाद उस ने 2 मजदूरों से वहां की सफाई करा दी थी. उस ने अपनी प्रेमिका की हत्या क्यों की, इस बारे में पुलिस ने विस्तार से पूछताछ की तो प्रिया की हत्या की जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार थी.
25 वर्षीय जयेश पाटिल मूलरूप से महाराष्ट्र के जनपद रायगढ़ के गांव वालिवटे का रहने वाला था. उस का कंस्ट्रक्शन का काम था. कई सालों पहले उस का परिवार थाणे जनपद के डोंबिवली के गांव दिव्या दातीवली में आ कर बस गया था.
जयेश के परिवार में पिता श्रवण पाटिल का कंस्ट्रक्शन का काम जनपद रायगढ़ के जंगलों में चल रहा था. घर का सारा काम जयेश की मां संभालती थी. परिवार सुखी और संपन्न था. किसी चीज की कोई कमी नहीं थी.
छोटा होने की वजह से जयेश लाडला बेटा था. अपनी पढ़ाई पूरी कर के वह एक बड़ा कंस्ट्रक्टर बनना चाहता था, लेकिन एक समय ऐसा आया कि उस के सारे सपने शीशे की तरह टूट कर बिखर गए.
वह अपनी पढ़ाई पूरी करता, उस के पहले ही अचानक सन 2013 में उस की मां की मौत हो गई. इस से भी बड़ा झटका उसे तब लगा, जब उस के पिता श्रवण पाटिल ने दूसरी शादी कर ली. सौतेली मां का व्यवहार परिवार के प्रति कुछ ठीक नहीं था. जिस के कारण जयेश को अपनी पढ़ाई बीच में ही बंद करनी पड़ी थी.
पढ़ाई छोड़ने के बाद वह अपने पिता के काम में हाथ बंटाने लगा. लेकिन वहां भी उसे सुकून नहीं मिला. दूसरी शादी के बाद पिता का व्यवहार भी बदल गया था. पहले की तरह प्यार करने के बजाय वह बातबात में उसे डांट देते थे.
यही वजह थी कि जयेश धीरेधीरे अपने परिवार से दूर होता गया. उस ने खुद का कारोबार शुरू किया. उस का कारोबार चल भी निकला. उसी बीच यारदोस्तों के साथ वह शराब और शबाब के चक्कर में पड़ गया.
दीपिका उर्फ प्रिया और जयेश पाटिल की मुलाकात लगभग डेढ़ साल पहले रंगीला बीयर बार में हुई थी. जयेश अपने एक दोस्त के साथ वहां बीयर पीने गया था. प्रिया वहां बीयर परोसने का काम करती थी. खूबसूरत प्रिया को देख कर वह इतना प्रभावित हुआ कि अकसर वहां जाने लगा. आए दिन वहां जाने से प्रिया से उस की अच्छी जानपहचान हो गई. दोनों ने एकदूसरे को अपनेअपने फोन नंबर भी दे दिए.
इस के बाद दोनों की फोन पर बातें होने लगीं. वे एकदूसरे के परिवार के बारे में भी जान गए. धीरेधीरे दोनों की मुलाकातें बढ़ीं तो प्यार की गाड़ी पटरी पर आगे बढ़ने लगी. बाद में वह प्रिया के फ्लैट पर रहने लगा. दोनों के बीच शारीरिक संबंध भी बन गए थे. इस के बाद जयेश ने डोंबिवली के दावड़ी गांव स्थित स्वामी समर्थ अपार्टमेंट में एक फ्लैट किराए पर ले लिया.
प्रिया नहीं चाहती थी कि जयेश उस से अलग रहे. इसलिए उस ने फिर से जयेश को अपने फ्लैट पर ही रहने के लिए बुला लिया. प्रिया उसे इतना चाहती थी कि उस के कहने पर उस ने बीयर बार की अपनी नौकरी तक छोड़ दी.
प्रिया की बहन सोबिका को जब उस के और जयेश के संबंधों की जानकारी हुई तो उस ने कोई ऐतराज नहीं किया. इस की वजह यह थी कि जयेश एक होनहार लड़का था. वह उस के बारे में सारा पता लगा चुकी थी. और तो और जब कभी उन दोनों के बीच किसी बात को ले कर कोई विवाद हो जाता तो वह उन का समझौता करा देती थी. सोबिका प्रिया को डांटती और समझाती थी, क्योंकि जयेश प्रिया को दिल से चाहता था. वह उसे किसी भी चीज की कमी नहीं होने देता था. 2 साल तक दोनों साथ रहे.
हर इंसान का समय एक जैसा नहीं रहता, जयेश का भी कंस्ट्रक्शन का काम कुछ मंदा पड़ गया. जबकि प्रिया की आदत पहले से ही खुले हाथों से खर्च करने की थी. जबकि जयेश उसे फिजूलखर्च के लिए मना करता था. इस पर प्रिया फिर से बीयर बार में काम करने की जिद करने लगी. जबकि जयेश अब नहीं चाहता था कि वह बीयर बार में काम करे.
इन्हीं सब बातों को ले कर प्रिया का जयेश से झगड़ा हो गया. जिस फ्लैट में वह रहती थी, वह उसे फ्लैट मालिक के कहने के बाद भी खाली नहीं कर रही थी. उस ने 20 हजार रुपए फ्लैट मालिक से ले कर वह फ्लैट खाली कर दिया और आजरे गांव में किराए पर कमरा ले कर रहने लगी. झगड़ा होने की वजह से जयेश उस के साथ नहीं रह रहा था.
एक महीने बाद जयेश साईं गजानंद अपार्टमेंट में किराए पर रहने लगा. इस तरह प्रिया और जयेश अलगअलग रहने लगे. लेकिन कभीकभी वे एकदूसरे से मिलने उन के यहां चले जाते थे. घर पर खाली रह कर प्रिया का मन नहीं लगता था, इसलिए वह उल्हासनगर के सत्यम बीयर बार में काम करने लगी. यह बात जयेश को पता चली तो उसे बहुत बुरा लगा.
3 नवंबर, 2015 को जयेश ने रात साढ़े 10 बजे प्रिया को फोन कर के अपने फ्लैट पर बुलाया. जिस समय प्रिया उस के यहां पहुंची, उस समय वह अकेला बैठा शराब पी रहा था. प्रिया के आने के बाद वह उस के लिए खाना लेने इमारत के नीचे गया. उस समय जयेश की मेज पर आधी बोतल शराब बची थी, जिसे जयेश के आने तक प्रिया ने पी ली.
जयेश जब उस के लिए खाना ले कर आया, उस समय तक प्रिया पर शराब का नशा चढ़ने लगा था. जयेश प्रिया से कुछ कहता, उस के पहले ही प्रिया के मोबाइल पर किसी का फोन आ गया. वह फोन पर बातें करने लगी. बातें करतेकरते वह बैडरूम में चली गई और दरवाजा बंद कर लिया. कुछ समय बाद जयेश बैडरूम में आ गया और उस से खाने को कहा. खाना खाने के बाद प्रिया के मोबाइल पर फिर किसी का फोन आया तो वह फिर बैडरूम में चली गई और दरवाजा बंद कर लिया.
इस बार जयेश को प्रिया पर काफी गुस्सा आया. वह बैडरूम का दरवाजा खोल कर अंदर गया तो प्रिया बड़े आराम से उस के बैड पर लेटी फोन पर बातें कर रही थी. वह प्रिया का हाथ पकड़ कर कमरे से बाहर लाया और उसे अपने घर जाने को कहा.
लेकिन प्रिया ने जयेश की बातों पर ध्यान देने के बजाय हाथ झटक कर कहा, ‘‘मैं यहां से जाऊंगी नहीं, तुम्हें जो करना है कर लो.’’
इसी बात पर दोनों में तूतू मैंमैं होने लगी. शराब अपना काम कर रही थी. शराब के नशे में प्रिया किचन में गई और वहां से सब्जी काटने वाली छुरी उठा लाई. उस ने अपने एक हाथ की नस काट ली. उस की इस हरकत से जयेश चिढ़ गया और उस के हाथ से छुरी छीन कर बोला, ‘‘तुम मरना चाहती हो न, मैं तुम्हें खुद ही मार देता हूं.’’
यह कह कर जयेश ने वह छुरी सीधे प्रिया के सीने में उतार दी. दूसरा वार करने के लिए उस ने छुरी निकालने की कोशिश की तो छुरी टूट गई, जिस का आधा भाग प्रिया के सीने में रह गया और मूठ जयेश के हाथों में आ गई.
प्रिया जमीन पर गिर कर कुछ ही मिनटों में शांत हो गई. प्रिया के मरने पर जयेश का शराब का नशा उतर गया. अब उसे पुलिस और कानून का डर सताने लगा. शव को ठिकाने लगाने के लिए वह अपने एक दोस्त के पास गया और उस की कार यह कह कर मांग लाया कि उस की बहन बीमार है. उसे अस्पताल ले जाना है.
प्रिया की लाश एक चादर में लपेट कर उस ने कार में डाली और उस के घर गया. उस के पौकेट से घर की चाबी निकाली और घर का ताला खोल कर पुलिस और उस के घर वालों को गुमराह करने के लिए घर का सारा सामान इधरउधर बिखेर कर अपने गांव रायगढ़ की तरफ रवाना हो गया.
रास्ते में उस ने एक माचिस और 5-5 लीटर के 2 कैन पैट्रोल से भरवा लिए. इस के बाद वह अपने गांव पहुंचा. वहां अपने खेतों की तरफ गया. तभी उसे गांव का एक गरीब किसान दिखाई दिया. उस ने उस किसान को कुछ पैसों का लालच दिया और कहा कि एक चीज को ठिकाने लगाना है.
यह कह कर वह उसे कार में रखी दीपिका उर्फ प्रिया की लाश के पास ले गया. किसान ने कार में जब लाश देखी तो डर गया और पीछे हट गया. लेकिन कुछ ज्यादा पैसे और जयेश की मिन्नतों पर वह उस का काम करने को तैयार हो गया.
लेकिन यह काम उस के अकेले के वश का नहीं था. इसलिए वह जयेश से बात कर के गांव से अपने 2 साथियों को बुला लाया. जयेश ने उन्हें शराब पीने के लिए पैसे दिए. उन पैसों से पहले दोनों ने शराब पी, उस के बाद दीपिका की लाश को कार से निकाल कर गांव के बाहर स्थित भीमाशंकर की पहाडि़यों पर ले कर गए. वहां उन्होंने कुछ लकडि़यां इकट्ठी कीं और पैट्रोल डाल कर लाश जला दी.
अगले दिन उस ने उन्हीं किसानों से वह जगह पूरी तरह से साफ करा दी. जहां लाश जलाई थी. इस के बाद जयेश अपने घर डोंबिवली आ गया. उसे ख्वाब में भी भरोसा नहीं था कि पुलिस का हाथ उस के गिरेबान तक पहुंचेगा.
पुलिस ने जयेश से विस्तार से पूछताछ करने के बाद उसे भादंवि की धारा 365/302/201 और 34 के तहत गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. आगे की तफ्तीश सबइंसपेक्टर विजय मोरे कर रहे थे.
—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित






