Relationship Crime Story. जीजा और साली का रिश्ता बड़ा ही नाजुक होता है. कुछ लोग रिश्ते में मर्यादा लांघ जाते हैं, जिस का परिणाम अंतत: दुखद ही होता है. एक दिन राजेश की सास ने उसे बेटी के साथ आपत्तिजनक स्थिति में पकड़ लिया, फिर…
कानपुर के थाना पनकी के गांव सरायमीता के रहने वाले रामनाथ के परिवार में पत्नी सीमा के अलावा 4 बेटियां सपना, अंजना, कुसुम, गौरी तथा 2 बेटे राजू और मोती थे. उन की मोहल्ले में परचून की दुकान थी, जिस से उन्हें ठीकठाक आमदनी हो जाती थी. परिवार का खर्च इसी दुकान की कमाई से चल रहा था.
सपना भाईबहनों में सब से बड़ी थी. जब वह सयानी हुई तो रामनाथ और उन की पत्नी सीमा की नींद हराम हो गई. इस की वजह थी उस की खूबसूरती. अपनी खूबसूरती की ही वजह से वह लड़कों के आकर्षण का केंद्र थी.
पतिपत्नी ने विचारविमर्श कर के जल्द ही उस की शादी करने का निश्चय किया और लड़के की खोज में भागदौड़ शुरू कर दी. उन की भागदौड़ रंग लाई और कानपुर के ही थाना बिठूर के लवकुशनगर के रहने वाले जगराम का बेटा राजेश उन्हें पसंद आ गया.
राजेश का एक बड़ा भाई था रमेश, जिस की शादी हो चुकी थी और वह पत्नीबच्चों के साथ मांबाप से अलग रहता था. राजेश की एक बहन राखी थी, उस की भी शादी हो चुकी थी. राजेश फेरी लगा कर कपड़ा बेचता था, जिस से उसे अच्छी आमदनी होती थी.
सपना सुंदर थी ही, इसलिए राजेश तथा उस के घर वालों को पसंद आ गई. इस के बाद जून, 2007 में सपना और राजेश का विवाह हो गया. सपना राजेश की दुल्हन बन कर ससुराल आ गई. सपना समझदार और संस्कारी लड़की थी, इसलिए उस ने ससुराल आते ही घर संभाल लिया.
सपना तनमन से पति को समर्पित थी तो राजेश भी उसे जीजान से चाहता था. वह उस की हर सुखसुविधा का ध्यान रखता. शादी के 2 सालों बाद सपना ने बेटे को जन्म दिया, जिस का नाम भूषण रखा गया. बेटे के पैदा होने के बाद राजेश का घरआंगन खुशियों से भर उठा. पिता बन कर वह बेहद खुश था.
ससुराल आनेजाने में राजेश की नजर सपना की छोटी बहन अंजना पर पड़ी तो वह उसे भा गई. अंजना भी बहन की तरह खूबसूरत तो थी ही, चंचल भी थी. उस में एक और खूबी यह थी कि उसे अपनी खूबसूरती पर नाज भी था. इसलिए वह रहती भी हमेशा बनसंवर कर थी.
उस ने जवानी की दहलीज पर कदम रखा तो उस की सुंदरता में और भी निखार आ गया. यही कारण था कि राजेश को अंजना भा गई थी. इस के बाद उसे लगने लगा कि सपना को जीवनसाथी चुन कर उस ने बहुत बड़ी गलती की है. उस की शादी सपना से नहीं, उस की छोटी बहन अंजना से होनी चाहिए थी.
ऐसा नहीं था कि सपना में किसी तरह की कमी थी. वह सुंदरसुशील और गृहकार्य में निपुण थी. पति से संबंधों में भी उसे रुचि थी. इस के बावजूद वह पति के मन को बांध कर नहीं रख पाई.
सपना और अंजना समान रूप से सुंदर थीं, लेकिन अंजना के बोलनेचालने का अंदाज थोड़ा अलग और लुभावना था. उस की अदाएं भी आकर्षित करने वाली थीं. इसी से राजेश को लगा कि अंजना सपना से ज्यादा खूबसूरत है. अगर अंजना से उस की शादी हुई होती तो उस की खुशियों के रंग और चटकीले हो जाते. उस के जीवन में बहार आ जाती.
सपना को छोड़ कर अंजना से शादी करना अब मुमकिन नहीं था. इस के बावजूद राजेश ने तय कर लिया कि वह साली को हासिल करने का हर संभव प्रयास करेगा. राजेश जब भी पनकी में कपड़े की फेरी लगाने आता, दोपहर में आराम करने ससुराल पहुंच जाता. जीजा घर आए और साली खुश न हो, ऐसा हो ही नहीं सकता.
राजेश के आने से अंजना खुशी से झूम उठती. अगर साली शबाब की भरी थाली हो और जीजा शौकीन मिजाज तो फिर क्या कहने. राजेश अंजना के मदमाते यौवन का पुजारी हो चुका था, सो अक्सर उस से हंसीमजाक कर लिया करता था. अंजना भी हंसीमजाक में पीछे नहीं रहती थी.
एक दिन राजेश ससुराल पहुंचा तो अंजना घर में अकेली थी. सूना घर देख कर राजेश ने पूछा, ‘‘साली साहिबा, अम्माबाबू नहीं दिख रहे हैं, गांव गए हैं क्या?’’
‘‘नहीं, अम्मा पड़ोस में मुंडन है, वहां गई हैं और बाबू दुकान पर हैं. लेकिन आप यह क्यों पूछ रहे हैं?’’ अंजना ने मुसकरा कर पूछा. ‘‘इसलिए कि अब मैं निश्चिंत हो कर अपनी साली से हंसीमजाक और छेड़छाड़ कर सकूंगा.’’ कह कर राजेश ने अंजना को चूम लिया.
राजेश कुछ देर तक हंसीमजाक करता रहा. उस के बाद गंभीर हो कर बोला, ‘‘अंजना, तुम से हंसीमजाक करने में मेरा दिल दुखता है.’’ ‘‘क्यों?’’ अंजना ने उस के चेहरे पर आंखें टिका कर पूछा, ‘‘जरा मैं भी तो जानूं?’’
‘‘सपना को जीवनसाथी चुन कर मैं ने बहुत बड़ी गलती की है,’’ राजेश ने अंजना की आंखों में झांकते हुए कहा, ‘‘मेरी पत्नी के काबिल तो तुम थी.’’ अंजना खिलखिला कर हंसते हुए बोली, ‘‘जीजाजी, आप भी खूब हैं. मेरी दीदी तो हम से भी अधिक सुंदर और बिंदास हैं.’’
राजेश लंबी सांस खींच कर बोला, ‘‘अंजना, जो बात तुम में है, वह तुम्हारी दीदी में कतई नहीं है. अगर तुम्हें पहले देख लेता तो तुम्ही से शादी करता.’’
‘‘जीजाजी, आप ने मुझे देखा तो था, क्योंकि मैं ने ही आप को चायनाश्ता कराया था. तब शायद आप ने ध्यान नहीं दिया था. ध्यान देते भी कैसे, उस समय तो आप की निगाहें दीदी के चेहरे पर जमी थीं.’’
‘‘अंजना एक बात पूछूं, सचसच बताना?’’ ‘‘पूछो जीजाजी, सचसच ही बताऊंगी.’’ ‘‘अगर सपना के बजाय मैं तुम्हें प्रपोज करता तो क्या तुम मुझ से शादी करने को राजी हो जातीं?’’ ‘‘यह कैसा सवाल है जीजाजी?’’ अंजना से कोई जवाब देते ने बना.
‘‘मैं अपने मन के संतोष के लिए जानना चाहता हूं, इसलिए सचसच बोलना.’’ राजेश ने कहा. ‘‘सच ही बोलूंगी जीजाजी,’’ शर्म से लाल होती अंजना बोली, ‘‘सही बात तो यह है कि मैं आप से शादी करने के लिए फौरन राजी हो जाती.’’
राजेश का मन बल्लियों उछलने लगा. उस ने मुसकराते हुए कहा, ‘‘साली जवान और खूबसूरत हो तो उस पर पहला हक जीजा का होता है.’’
‘‘हां, जरूर होता है, पर मर्यादित.’’ नाजुक रिश्ते की मर्यादा को समझाने के लिए अंजना ने मुंह खोला ही था कि मां सीमा आ गई. इस के बाद दोनों की बातों पर विराम लग गया. सीमा दामाद के पास बैठीं तो अंजना वहां से उठ कर चली गई.
राजेश अकसर दोपहर को ससुराल आता था. उस समय घर में सीमा और अंजना ही होती थीं. चूंकि दोपहर में सीमा सोती थीं, इसलिए अंजना पर प्यार का जाल फेंकने के लिए राजेश को पर्याप्त समय मिल जाता था. पहले दोनो में मुंह से ही हंसीमजाक होता रहा, लेकिन धीरेधीरे राजेश उस से शारीरिक छेड़छाड़ करने लगा.
उन दिनों अंजना जवान हो रही थी. उस के तनमन में जवानी उफान मार रही थी. राजेश की कामुक हरकतों से उसे भी सुखद आनंद की अनुभूति हो रही थी. राजेश उस से शारीरिक छेड़छाड़ करता तो वह विरोध करने के बजाय मुसकरा देती. इस से राजेश का हौसला बढ़ता गया.
राजेश की छेड़छाड़ बढ़ी तो अंजना की जवानी मर्यादा तोड़ने पर उतारू हो गई. परिणामस्वरूप एक दिन वह जीजा की हवस का शिकार हो गई. इस तरह जीजासाली का रिश्ता कलंकित हो गया. साली को पा कर राजेश बहुत खुश हुआ. दूसरी ओर अंजना भी पछताने के बजाय शारीरिक सुख पा कर खुश थी. जबकि उसे ग्लानि होनी चाहिए थी कि बड़ी बहन के हक पर डाका डाला है.
सीमा को दामाद पर अटूट विश्वास था, इसलिए वह उस का खूब मानसम्मान करती थी. इस की एक वजह यह भी थी कि वक्तजरूरत पर राजेश सास की आर्थिक मदद भी कर दिया करता था. सीमा को जब भी रुपयों की जरूरत होती थी, राजेश से मांग लेती थी. वह कभी मना नहीं करता था.
इस के अलावा राजेश घर के कामों में भी मदद करता रहता था. लेकिन सीमा के विश्वास को ठेस तब लगी, जब उस ने राजेश और अंजना को मर्यादा लांघते देख लिया. इस के बाद सीमा ने अंजना को ही नहीं, दामाद को भी जम कर डांटाफटकारा.
इस के बाद शर्म की वजह से राजेश ने ससुराल आना बंद कर दिया, जिस से उस का अंजना से मिलनाजुलना बंद हो गया. अब वे सिर्फ मोबाइल पर बातें कर लेते थे. अंजना जीजा के न आने से परेशान तो रहती थी, लेकिन उस ने खुद को संभाल लिया था और पढ़ाई में जुट गई थी.
धीरेधीरे सीमा को विश्वास हो गया कि शायद अब अंजना और राजेश पहले वाली गलती नहीं करेंगे. लगभग साल भर बाद एक दिन राजेश अचानक ससुराल आ पहुंचा तो सीमा उसे देख कर खुश होते हुए बोली, ‘‘दामादजी, इतने दिनों बाद याद आई, तुम ने आना क्यों छोड़ दिया, डांटना बुरा लग गया क्या? मैं ने तो इसलिए डांटा था कि छोटी बहन की वजह से कहीं बड़ी बहन की गृहस्थी न उजड़ जाए.’’
इस के बाद सीमा ने अंजना को आवाज दी, ‘‘अंजना, देखो तुम्हारे जीजा आए है, इन के लिए चायनाश्ता ले आओ.’’
मां की आवाज सुन कर अंजना बैठक में आ गई. जीजासाली की नजरें एकदूसरे से मिलीं तो उन के दिलों में प्यार उमड़ पड़ा. लेकिन दोनों में कोई बातचीत नहीं हुई. कुछ देर बाद अंजना राजेश के लिए चायनाश्ता ले आई और दे कर अपने कमरे में चली गई.
चायनाश्ता कर के राजेश ने कहा, ‘‘मम्मी, मैं एक उम्मीद ले कर आप के पास आया हूं?’’ ‘‘बोलो बेटा, क्या बात है? मैं हर संभव उम्मीद पूरी करूंगी.’’
‘‘मांजी सपना 7 महीने के गर्भ से है. वह बीमार भी रहती है, जिस से घर का कामकाज नहीं कर पा रही है. अब खानेपीने में भी दिक्कत होने लगी है. अगर आप अंजना को मेरे घर भेज दें तो हमारी समस्या हल हो सकती है.’’ राजेश ने कहा.
दामाद की बात सुन कर सीमा असमंजस में पड़ गई कि वह क्या करे, क्योंकि एक साल पहले उस ने बेटीदामाद को जिस हालत में देखा था, उस से उसे मना कर देना चाहिए था. लेकिन बड़ी बेटी की परेशानी को भी वह अनदेखी नहीं कर सकती थी, इसलिए वह अंजना को दामाद के साथ भेजने को राजी हो गई.
अंजना ने जीजा के साथ जाने का विरोध तो किया, लेकिन वह बनावटी था. क्योंकि मां के कहने पर वह तुरंत जाने को तैयार हो गई थी. अंजना सपना के घर आ गई और बहन की सेवा में जुट गई. घर के सारे काम अंजना ने संभाल लिए. अंजना और राजेश में हंसीमजाक चलता ही रहता था.
कभीकभी राजेश सपना के सामने ही अंजना से छेड़छाड़ कर देता. तब अंजना विरोध करती, लेकिन वह बनावटी होता. सपना इस हंसीमजाक को टाल देती, क्योंकि वह इसे जीजासाली का हंसीमजाक समझती.
एक रात राजेश की नींद खुली तो उस ने देखा, अंजना के कमरे की लाइट जल रही थी. धीरे से दरवाजा खोल कर वह उस के कमरे में चला गया. अंजना गहरी नींद सो रही थी, शायद वह लाइट बंद करना भूल गई थी. राजेश ने लाइट बंद की और अंजना की बगल में लेट गया.
उस ने अंजना से छेड़छाड़ शुरू की तो वह हड़बड़ा कर जाग कर शोर मचाने को हुई. राजेश ने मुंह पर हाथ रख कर फुसफुसाते हुए कहा, ‘‘अरे चुप रहो, मैं हूं राजेश.’’
इस के बाद अंजना चुप हो गई. जीजा और साली फिर पतन की राह पर चल पड़े. उन्हें जब भी मौका मिलता, पतन की राह पर एक कदम और आगे बढ़ जाते. अंजना दिन भर काम में व्यस्त रहती, शाम होते ही बनसंवर कर जीजा के आने का इंतजार करने लगती.
सपना खाना खा कर सो जाती तो राजेश चुपके से अंजना के कमरे में पहुंच जाता तो रातभर दोनों एकसाथ रहते. सपना को कानोंकान खबर नहीं थी कि उस का पति और बहन क्या कर रहे हैं. बुरे काम का नतीजा भी बुरा ही निकलता है. एक दिन अंजना ने कहा, ‘‘जीजाजी, मैं गर्भवती हो गई हूं. यह गर्भ तुम्हारा ही है. जल्दी कुछ करो, वरना हम दोनों कहीं मुंह दिखाने लायक नहीं रहेंगे.’’
राजेश परेशान हो उठा, ‘‘यह तुम क्या कह रही हो अंजना? अगर तुम्हारी बात सच हुई तो हम दोनों परेशानी में पड़ जाएंगे. सपना को पता चला तो वह आसमान सिर पर उठा लेगी.’’ ‘‘जीजाजी, मैं सच कह रही हूं. मुझे 2-ढाई महीने का गर्भ है. जल्दी कोई उपाय करो.’’
राजेश परेशान हो उठा. इस के बावजूद उस ने अंजना को भरोसा दिलाया कि वह कोई न कोई उपाय जरूर करेगा. लेकिन इस के बाद भी वह 15-20 दिनों तक अनिश्चिता की स्थिति में रहा. इस के बाद वह अंजना को चोरी से सीएचसी चौबेपुर ले गया, जहां महिला डा. बबिता शर्मा ने अंजना को चेक किया तो बताया कि गर्भ गिराने में खतरा है.
अंजना को कहीं कुछ हो न जाए, राजेश उसे वापस ले आया. गर्भ को ले कर घर में अंजना और राजेश में खूब झगड़ा हुआ. अंजना के गर्भ को ले कर राजेश की नींद हराम हो गई थी. जैसेजैसे दिन बीत रहे थे, वैसेवैसे राजेश की चिंता बढ़ती जा रही थी. आखिर राजेश ने इस समस्या के समाधान के लिए एक खतरनाक योजना बना डाली और समय का इंतजार करने लगा.
20 अप्रैल, 2016 की रात जब अंजना गहरी नींद सो रही थी, राजेश ने अंजना के ऊपर मिट्टी का तेल डाल कर आग लगा दी. अंजना धूधू कर जलने लगी तो बचाव के लिए चिल्लाई. उस की चीख सुन कर सपना कमरे से बाहर आई. मदद के लिए राजेश को बुलाया.
राजेश बाथरूम से निकला और आग बुझाने की कोशिश करने लगा. पड़ोसी भी शोरगुल सुन कर आ गए. राजेश और पड़ोसियों ने आग तो बुझा दी, लेकिन अंजना काफी जल गई थी, जिस से वह बेहोश हो गई थी.
राजेश ने अंजना के जल जाने की खबर सासससुर को दी और उसे ले जा कर हैलट अस्पताल के बर्निंग वार्ड में भरती कराया. इमरजेंसी में तैनात डा. अंबुज शुक्ला और डा. मानसी गुप्ता ने इलाज शुरू करने के साथ पुलिस को सूचना दे दी. डा. मानसी गुप्ता को शक हुआ तो उन्होंने अंजना का एक्सरे कराया.
पता चला कि वह गर्भवती है. होश में आने पर पुलिस ने जब अंजना का बयान दर्ज किया तो अपने बयान में उस ने बताया कि उस के पेट में पल रहा गर्भ उस के जीजा राजेश का है. पुलिस ने राजेश से पूछताछ की तो आधीअधूरी जानकारी दे कर वह गायब हो गया.
सपना, उस की मां सीमा और पिता रामनाथ अंजना को देखने अस्पताल पहुंचे तो वह जिंदगी और मौत के बीच झूल रही थी. दोपहर 12 बजे अंजना ने दम तोड़ दिया. अंजना की मौत के बाद थाना बिठूर में रामनाथ की ओर से थानाप्रभारी एस.के. मिश्रा ने राजेश के खिलाफ अंजना को जला कर मारने की रिपोर्ट दर्ज करा दी. इस के बाद उस की गिरफ्तारी की कोशिश शुरू कर दी गई.
पुलिस ने अंजना के शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया और छापा मार कर राजेश को बिठूर घाट स्थित एक पंडा के मकान से गिरफ्तार कर लिया. थाने आते ही उस ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया. उस ने बताया कि अंजना के गर्भवती होने से वह डर गया कि आगे वह परेशानी में पड़ सकता है, इसलिए उस ने उसे जला कर मार दिया.
23 अप्रैल, 2016 को थाना बिठूर पुलिस ने अभियुक्त राजेश को कानपुर की अदालत में रिमांड मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया, जहां से उसे जिला कारागार भेज दिया गया. Relationship Crime Story.






