Delhi Crime Story. नीलम बेवफा तो पहले ही हो गई थी. अब वह पति की मारपीट से परेशान हो कर उस से छुटकारा पाना चाहती थी. यह बात उस ने अपने प्रेमी अनुज से कही तो वह प्रेमिका के लिए हत्या जैसा अपराध करने को भी राजी हो गया.

दिल्ली पुलिस के कंट्रोल रूम को 18 फरवरी, 2016 की सुबह सूचना मिली कि गोकलपुरी में भागीरथ पुलिया के पास झाडि़यों में एक आदमी की लाश पड़ी है. सूचना में जो जगह बताई गई थी, वह थाना गोकलपुरी के अंतर्गत आती थी. इसलिए पुलिस कंट्रोल रूम ने यह सूचना थाना गोकुलपुरी की पुलिस को दे दी.

कुछ ही देर में पुलिस कंट्रोल रूम की वैन भागीरथ पुलिया के पास उस जगह पहुंच गई, जहां लाश पड़ी थी. सूचना पा कर बीट अफसर एएसआई हुकुम सिंह भी हैडकांस्टेबल कालूराम, अजय कुमार और महिला कांस्टेबल रेनू के साथ वहां पहुंच गए.

मरने वाले युवक की उम्र 24-25 साल थी. उस का सिर फटा था और चेहरा कुचला हुआ था. वहीं खून से सना एक पत्थर पड़ा था, जिसे देख कर यही लग रहा था कि हत्यारे ने उसी पत्थर से मृतक के सिर और चेहरे पर वार किए थे.

वहां मौजूद लोगों से मृतक के बारे में पूछा गया तो सभी ने उसे पहचानने से मना कर दिया. थानाप्रभारी धर्मदेव भी आ गए थे. उन्होंने मृतक के कपड़ों की जेबों की तलाशी ली तो पैंट की जेब से एक पर्स मिला. पर्स से एक हजार रुपए नकद, कुछ विजिटिंग कार्ड्स और एक कपल का फोटो मिला.

धर्मदेव ने लाश मिलने की सूचना डीसीपी अजीत कुमार सिंगला को भी दे दी थी. पर्स से मिले विजिटिंग कार्ड्स पर जो फोन नंबर लिखे थे, उन नंबरों पर फोन कर के उन्हें मृतक का हुलिया बताया गया. साथ ही लाश की शिनाख्त के लिए घटनास्थल पर आने को भी कहा गया.

11 बजे के करीब डीसीपी अजीत कुमार सिंगला और एसीपी संदीप लांबा भी वहां आ गए. धर्मदेव ने मृतक की जेब से मिले विजिटिंग कार्ड्स के आधार पर जिन लोगों को फोन किए थे, उन में से 4 लोग घटनास्थल पर आ पहुंचे थे.

उन्होंने लाश को पहचान कर बताया कि मृतक का नाम नीरज है. वह गढ़ी अलीपुर, दिल्ली में पत्नी और 3 साल की बेटी के साथ किराए पर रहता था. नीरज शादी पार्टियों में खाना बनाने का ठेका लेता था. जो लोग आए थे, वे भी उसी के साथ काम करते थे.

धर्मदेव ने एक कांस्टेबल को गढ़ी अलीपुर भेज कर नीरज की पत्नी को बुलवा लिया. उस का नाम नीलम था. नीलम ने जैसे ही पति की लाश देखी, जोरजोर से रोने लगी.

धर्मदेव ने उसे सांत्वना दे कर चुप कराया. उस के बाद सामान्य हो जाने पर उस से पूछा कि उसे किसी पर शक तो नहीं है? उस ने किसी पर शक नहीं जताया तो उन्होंने घटनास्थल की काररवाई कर के लाश को पोस्टमार्टम के लिए गुरु तेग बहादुर अस्पताल भिजवा दिया और थाने आ कर अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करा दिया.

डीसीपी अजीत कुमार सिंगला ने इस मामले के खुलासे के लिए एसीपी संदीप लांबा के नेतृत्व में एक टीम बनाई, जिस में थानाप्रभारी धर्मदेव, एटीओ रामवीर सिंह, एएसआई पवन मलिक, हैडकांस्टेबल विजेंद्र, कालूराम, नवीन, मोहित, मनोज, सुधीर, अबरार और महिला कांस्टेबल रेनू को शामिल किया गया. जांच की जिम्मेदारी एटीओ रामवीर सिंह को सौंपी गई.

पुलिस टीम ने जांच की शुरुआत मृतक नीरज के घर से शुरू की. पूछताछ में मृतक की पत्नी ने बताया था कि वह गुस्सा बहुत करते थे. हर किसी से लड़ाईझगड़ा करने लगते थे. शराब पी कर तो जैसे पागल हो जाया करते थे, जिस से देखो, उसी से गालीगलौज और मारपीट पर उतारू हो जाते थे. 17 फरवरी की शाम वह प्रिंस के साथ एक रिश्तेदार की शादी में गए थे.

‘‘यह प्रिंस कौन है?’’ रामवीर सिंह ने पूछा.   ‘‘करावलनगर में रहता है. वह भी उन के साथ शादियों में खाना बनाता था. प्रिंस की मेरे पति से दोस्ती नहीं थी, वह उन के दोस्त अनुज के साथ कभीकभी मेरे घर आ जाता था. वह मुझ पर गंदी नजर रखता था. इसलिए मैं ने उन से कहा था कि प्रिंस ठीक आदमी नहीं है, इसलिए उसे आने से मना कर दो. शायद उन्होंने उसे घर आने से मना कर दिया था, इसलिए वह कुछ दिन से हमारे घर नहीं आया था. काफी दिनों बाद वह परसों बाइक से आया और उन्हें साथ ले गया.’’

नीलम को सिर्फ इतना ही पता था कि प्रिंस करावलनगर में रहता है. करावलनगर काफी बड़ा इलाका है. बिना पते के प्रिंस को वहां ढूंढ़ना आसान नहीं था. इस पर रामवीर सिंह ने उन लोगों से प्रिंस के बारे में पूछा, जिन्होंने घटनास्थल पर जा कर नीरज की शिनाख्त की थी.

उन से पता मिल गया तो रामवीर सिंह करावल नगर स्थित प्रिंस के घर पहुंच गए और उसे पूछताछ के लिए थाने ले आए. थानाप्रभारी धर्मदेव की मौजूदगी में उन्होंने अंधेरे में तीर चलाते हुए कहा, ‘‘तुम ने नीरज की हत्या का प्लान तो बहुत बढि़या बनाया था, लेकिन जल्दबाजी में तुम से एक भूल हो गई?’’

अचानक ऐसा सवाल करने पर गुनहगार के चेहरे पर अपने आप हैरानी वाले भाव आ जाते हैं. लेकिन प्रिंस के चेहरे पर इस तरह का कोई भाव दिखाई नहीं दिया. उस ने पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा, ‘‘सर, मैं ने नीरज का मर्डर किया ही नहीं तो मुझ से कोई भूल कैसे हो गई?’’

‘‘तुम 17 फरवरी की शाम को नीरज को उस के घर से अपनी बाइक पर बिठा कर ले गए थे न? तुम ने उस के साथ शराब पी और सिर पर पत्थर मार कर उस की हत्या कर दी?’’ रामवीर सिंह ने कहा.

‘‘आप समर्थ हैं सर जी, किसी को भी जेल भेज सकते है, लेकिन मुझ बेकसूर को फंसा कर आप असली हत्यारे को बचा लेंगे.’’ प्रिंस ने यह बात इतनी बेबाकी से कही कि रामवीर सिंह को वह बेगुनाह लगा.

‘‘असली हत्यारे?’’ रामवीर सिंह ने हैरानी से पूछा, ‘‘क्या मतलब है तुम्हारा, तुम ने नहीं तो उस का मर्डर और किस ने किया है?’’

‘‘सर, नीरज की बीवी को सब पता है. यह सब उसी का कियाधरा है.’’ प्रिंस ने कहा. ‘‘एक बात बताओ, नीरज की पत्नी तो कह रही थी कि तुम उस पर गंदी नजर रखते थे?’’

‘‘सर, वह कपड़ों की तरह दोस्त बदलने वाली औरत है. उस ने मुझे भी फांसने की कोशिश की थी, लेकिन मैं उस की बातों में नहीं आया. शायद इसीलिए वह मेरे ऊपर इस तरह का आरोप लगा रही है.’’ प्रिंस ने कहा.

रामवीर सिंह को लगा कि प्रिंस सच कह रहा है. उन्होंने उसे हिदायत दे कर छोड़ दिया. इस के बाद थानाप्रभारी धर्मदेव से विचारविमर्श कर के रामवीर सिंह यह सोच कर एक बार फिर घटनास्थल पर गए कि क्या पता वहां से कोई सूत्र मिल जाए. गहनता से जांच करने पर वहां झाड़ी के पास, जहां नीरज की लाश पड़ी थी, सिगरेट के 9 टोंटे मिले, जो नेवीकट ब्रांड के थे. इस से यही लगा कि हत्या करने वाला एक नहीं, बल्कि 2 या 3 लोग थे. उन्होंने यह पता लगाना चाहा कि इस ब्रांड की सिगरेट नीरज के जानने वालों में से कौनकौन पीता है. इस बारे में उन्होंने प्रिंस से भी बात की, पर कोई सफलता नहीं मिली.

अचानक उन्हें अनुज का नाम ध्यान आया, क्योंकि नीलम ने उन्हें बताया था कि प्रिंस अनुज के साथ ही कई बार उस के यहां आया था. नीलम से उन्होंने अनुज के बारे में पूछा तो वह हड़बड़ा कर बोली, ‘‘अनुज तो हमारे गांव का है, वह रिश्ते में मेरा भतीजा लगता है. इस वक्त वह गांव में है.’’

नीलम की हरकतों से रामवीर सिंह को शक हो गया. उन्होंने नीलम के पड़ोसियों से बातचीत की तो कई चौंकाने वाली बातें पता चलीं. पता चला कि अनुज गांव में नहीं, बल्कि गढ़ी अलीपुर में ही था और नीरज की हत्या होने से करीब 2 हफ्ते पहले दोनों में काफी झगड़ा हुआ था. उस वक्त नीरज ने अनुज को पीटा भी था. वहीं उन्हें यह बात भी पता चली कि अनुज और प्रिंस का एक दोस्त अमित नेवीकट सिगरेट पीते थे.

यह महत्त्वपूर्ण जानकारी मिलने के बाद रामवीर सिंह ने प्रिंस, अनुज और अमित को हिरासत में ले कर पूछताछ की. पहले तो तीनों खुद को निर्दोष बताते रहे लेकिन जब सख्ती की गई तो वे सच्चाई को ज्यादा देर तक छिपा नहीं सके. उन्होंने नीरज की हत्या का जुर्म स्वीकार कर लिया.

नारायण झा मूलरूप से बिहार के रहने वाले थे. उन के 3 बेटे और 2 बेटियां थीं. सब से छोटा बेटा नीरज ज्यादा पढ़लिख नहीं सका तो वह गांव के रहने वाले कमल प्रसाद, जो दिल्ली में रह कर कैटरिंग का काम करता था, के साथ दिल्ली आ गया और उसी के साथ शादीब्याह में होने वाली पार्टियों में खाना बनाने का काम करने लगा.

काम अच्छा चलने लगा तो नीरज बनठन कर रहने लगा. वारदात से डेढ़ साल पहले वह गांव गया तो उस के ठाठ देख कर गांव की ही नीलम उस पर फिदा हो गई. दोनों एक ही बिरादरी के थे, इसलिए उन की शादी हो गई.

एक महीने बाद नीरज गांव से दिल्ली आया तो अनुज की मदद से उस ने गढ़ी अलीपुर में एक कमरा किराए पर ले लिया. अनुज भी उसी मकान में रहता था. इस के 2 महीने बाद नीरज गांव जा कर पत्नी नीलम को साथ ले आया.

अनुज उत्तर प्रदेश के जिला हरदोई के कस्बा बिलग्राम का रहने वाला था. साथसाथ काम करने की वजह से उस का नीरज के घर आनाजाना था. उस की पत्नी नीलम को देख कर अनुज का मन डोल गया. वह उसे भाभी कहता था. इस रिश्ते की आड़ में वह नीलम से हंसीमजाक भी कर लेता था.

नीलम को अनुज की बातें अच्छी लगती थीं. अनुज उस की थोड़ी तारीफ कर देता तो वह फूली नहीं समाती. इसी तरह उन के बीच नजदीकी संबंध बन गए. फिर एक दिन ऐसा भी आया जब दोनों ने अपनीअपनी सीमाएं लांघ कर शारीरिक संबंध बना लिए.

नीरज खाना बनाने के लिए दिल्ली से बाहर भी जाता रहता था. बाहर जाने पर वह कईकई दिनों बाद घर लौटता था. ऐसे में नीलम अनुज के साथ अपनी हर रात रंगीन करती थी. इस तरह की बातें ज्यादा दिनों तक लोगों की नजरों से छिपी नहीं रहतीं. नीलम जिस बिल्डिंग में रहती थी, उस में और भी तमाम लोग किराए पर रहते थे. उन्हें अनुज और नीलम के रिश्ते की जानकारी हुई तो फिर यह बात नीरज के कानों तक भी पहुंच गई.

नीरज को कानों सुनी बात पर विश्वास नहीं हुआ. उस ने पत्नी से कुछ कहा तो नहीं, पर वह नीलम और अनुज पर नजर रखने लगा. एक दिन उस ने अपने ही कमरे में अनुज और नीलम को रंगेहाथों पकड़ लिया. इस के बाद उस ने अनुज की ही नहीं, पत्नी की भी खूब पिटाई की.

इस के बाद अनुज वह कमरा खाली कर के गढ़ी अलीपुर में ही दूसरे मकान में कमरा ले कर रहने लगा. अब नीलम और अनुज का मिलना आसान नहीं था क्योंकि नीरज पत्नी पर नजर रखने लगा था. इस के बावजूद नीलम अपने प्रेमी अनुज से फोन पर बात कर के घर से बाहर मिलने का मौका निकाल लेती थी.

नीरज की नजरों में नीलम बेवफा हो चुकी थी, इसलिए वह जब भी शराब पी कर आता, उस की पिटाई कर के गुस्सा निकालता. रोजरोज की मारपिटाई से नीलम तंग आ गई और पति से नफरत करने लगी.

ऐसी ही स्थितियों में मुलाकात होने पर उस ने अनुज से कहा, ‘‘अनुज, मेरे सामने अब 2 ही रास्ते हैं. एक तो यह कि मैं पति की पिटाई सहती रहूं, दूसरा यह कि आगे की जिंदगी तुम्हारे साथ बिताऊं. लेकिन यह तय है कि अगर तुम्हारे साथ आगे की जिंदगी न बिता सकी तो मुझे आत्महत्या करनी पड़ेगी.’’

‘‘तुम थोड़ा सब्र से काम लो, सब ठीक हो जाएगा.’’ अनुज ने नीलम को ढांढस बंधाना चाहा तो वह गुस्से में बोली, ‘‘खाक सब्र करूं, वह जब देखो तब मुझे रुई की तरह धुनता है. इस तरह तो मेरी जान ले लेगा. वह मेरी जान ले, मैं चाहती हूं कि उस से पहले तुम उसे ही रास्ते से हटा दो.’’

नीलम की इन बातों से अनुज समझ गया कि नीलम पति के साथ हरगिज रहना नहीं चाहती. उसे खुशी हुई कि नीरज को रास्ते से हटाने के बाद नीलम उस के साथ रहने को तैयार है. इसलिए उस ने कहा, ‘‘तुम्हारी खुशी के लिए मैं तुम्हारा साथ देने को तैयार हूं.’’

अनुज और नीलम ने सलाहमशविरा कर के तय किया कि किसी भाड़े के हत्यारे से नीरज का कत्ल करा दिया जाए तो अच्छा रहेगा. इस से उन का काम भी हो जाएगा और उन पर किसी को शक भी नहीं होगा.

अनुज की जानकारी में ऐसा कोई शख्स नहीं था, जो यह काम कर सके. लिहाजा उस ने अपने दोस्त प्रिंस से बात की तो उस ने कहा, ‘‘अनुज यह काम हो तो जाएगा, लेकिन मैं चाहता हूं कि नीलम को इस बात की भनक नहीं लगनी चाहिए कि यह काम किया किस ने है. क्योंकि नीरज की लाश बरामद होने के बाद पुलिस नीलम से पूछताछ जरूर करेगी. पुलिस की सख्ती के आगे वह अपना मुंह खोल देगी.’’

अनुज ने प्रिंस की सलाह पर अमल किया और नीलम से कह दिया कि वह किसी का खून नहीं करा सकता. इस के बाद योजना के अनुसार उस ने नीलम से मिलना और फोन पर बात करना बंद कर दिया. प्रिंस चूंकि उस का गहरा दोस्त था, इसलिए प्रिंस ने कह दिया कि दोस्ती की खातिर वह नीरज को उस के रास्ते से हटा देगा. प्रिंस ने अपनी योजना में अपने दोस्त अमित को भी शामिल कर लिया.

17 फरवरी, 2016 को जौहरीपुर में नीरज के एक रिश्तेदार की शादी का रिसैप्शन था. वह रिश्तेदार प्रिंस का भी दोस्त था. प्रिंस जानता था कि वहां नीरज जरूर जाएगा. इसलिए उस ने उसी दिन नीरज को ठिकाने लगाने का फैसला कर लिया. योजना के मुताबिक प्रिंस बाइक ले कर नीरज के घर पहुंचा और फोन कर के उसे घर के बाहर बुला लिया. फिर बाइक पर बैठा कर उसे जौहरीपुर ले गया. वहां नीरज, प्रिंस, अमित और अनुज ने साथ बैठ कर शराब पी. नीरज को उन्होंने ज्यादा शराब पिला दी. तब तक रात का 1 बज गया था. प्रिंस, अनुज और अमित नीरज को भागीरथ पुलिया के पास ले आए और धक्का दे कर गिरा दिया. उस के गिरते ही उन्होंने वहां बड़े पत्थर से उस का सिर व चेहरा कुचल कर उसे मार डाला.

पुलिस ने प्रिंस, अनुज और अमित को नीरज की हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर के तीसहजारी न्यायालय में महानगर दंडाधिकारी के समक्ष पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. चूंकि नीलम को न हत्या की जानकारी थी, न ही वह हत्या में शामिल थी, इसलिए पुलिस ने उस पर कोई काररवाई नहीं की. मामले की जांच इंसपेक्टर रामवीर सिंह कर रहे हैं. Delhi Crime Story

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

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