Crime Against Women. मायके जाने के लिए ससुराल से निकली मैनब बस्ती रेलवे स्टेशन पर एक दलाल के हाथों पड़ कर वेश्या बाजार पहुंच गई. 4 सालों बाद पिता ने ग्राहक बन कर वेश्या बाजार से उसे मुक्त कराया.
मैनब नेपाल के जिला लुंबिनी की रहने वाली थी. उस की शादी बस्केती मोहल्ला धोबीघाट निवासी आरिफ से हुई थी. आरिफ और उस के 2 बच्चे थे. लगभग 4 साल पहले की बात है, मैनब अपने मायके जाने के लिए ससुराल से निकली. उस के साथ उस के दोनों बच्चे भी थे. जनसेवा जननायक एक्सप्रेस से वह बस्ती रेलवे स्टेशन पर उतर गई, क्योंकि वहां से उसे बस पकड़ कर लुंबिनी जाना था. जब तक मैनब की टे्रन बस्ती पहुंची, तब तक रात हो चुकी थी. मैनब ने बच्चों के साथ नाश्ता वगैरह किया और अपना सामान प्लेटफार्म के एक कोने में रख कर बच्चों को वहीं सुला दिया. वह खुद इधरउधर टहल कर रात गुजारने की कोशिश करने लगी.
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24 साल की मैनब को देख कर यह अंदाजा लगाना मुश्किल था कि वह 2 बच्चों की मां होगी. उस का छरहरा बदन, गोरा रंग किसी को भी अपनी ओर आकर्षित कर सकता था. रेलवे स्टेशन पर मौजूद जावेद की नजर मैनब पर पड़ी तो उस की आंखों में चमक आ गई. वह मैनब से बात करने का कोई बहाना तलाशने लगा. जावेद चालू किस्म का आदमी था.
वह किसी ऐसे ही शिकार की तलाश में था. इसलिए अकेली महिलाओं से बात करने का हुनर अच्छी तरह जानता था. उस ने बिना किसी परिचय, बिना किसी भूमिका के मैनब के पास जा कर पूछा, ‘‘इतनी रात में स्टेशन पर परेशान सी घूम रही हो, कहीं जाना है क्या?’’






