Mumbai Murder Mystery. रईस को रूबी से इसलिए नफरत थी, क्योंकि उस ने उस के भाई को अपने रूपजाल में फांस कर निकाह कर लिया था. उस ने इस का बदला तो ले लिया, लेकिन शायद अब पूरी उम्र जेल में ही रहेगा.

थाना मलाड मालवडी पुलिस को गांव वालों से सूचना मिली थी कि समुद्र की झाडि़यों के बीच दलदल में एक बोरी पड़ी है, जिस से बहुत तेज बदबू आ रही है. संभावना है कि उस में

किसी की लाश है. घटनास्थल पर पहुंच कर सीनियर इंसपेक्टर मिलिंद खेतले ने वह बोरी बाहर निकलवाई. बोरी का मुंह मजबूत रस्सी से बंधा था. पंचों की उपस्थिति में बोरी का मुंह खुलवाया तो उस में से एक युवती की लाश निकली.

पुलिस को लगा मृतका की उम्र 40-45 साल के बीच होगी. उस के शरीर पर एक भी कपड़ा नहीं था, जबकि वह जो गहने पहने थी, वे सभी जस के तस थे. लेकिन बाद में पता चला कि वे नकली थे. उस के शरीर पर चोटों के निशान साफ नजर आ रहे थे. उस का सिर पूरी तरह से कुचला था. शायद ऐसा पहचान मिटाने के लिए किया गया था.

मिलिंद खेतले वहां इकट्ठा लोगों से लाश की शिनाख्त कराने की कोशिश कर रहे थे कि तभी मुंबई पुलिस कमिश्नर दत्तात्रय पड़सलगीकर, जौइंट पुलिस कमिश्नर देवेन भारती, अपर पुलिस कमिश्नर चेरंग दोरजे, एडिशनल पुलिस कमिश्नर विक्रम देशमाने, असिस्टैंट पुलिस कमिश्नर सुधाकर पुजारी भी आ पहुंचे.

अधिकारियों के साथ ही प्रैस फोटोग्राफर और फिंगरप्रिंट ब्यूरो की टीम भी आई थी. प्रैस फोटोग्राफर और फिंगरप्रिंट ब्यूरो ने अपना काम कर लिया तो पुलिस अधिकारियों ने भी लाश और घटनास्थल का निरीक्षण किया. इस के बाद मिलिंद खेतले को दिशानिर्देश दे कर सभी चले गए.

अधिकारियों के जाने के बाद मिलिंद खेतले ने सहायकों की मदद से घटनास्थल की काररवाई निपटा कर लाश को पोस्टमार्टम के लिए बोरीवली के भगवती अस्पताल भिजवा दिया. इस के बाद थाने लौट कर सहायकों के साथ विचारविमर्श कर के इस मामले की जांच की जिम्मेदारी इंसपेक्टर महेश ठाकुर को सौंप दी.

हत्या के इस मामले की जांच के लिए महेश ठाकुर ने अपनी एक टीम बनाई, जिस में उन्होंने असिस्टैंट इंसपेक्टर अमृत पवार, संदीप ऐदाले, सबइंसपेक्टर अवधूत धाड़ीकर, हैडकांस्टेबल चंद्रकांत तिवारी, कैलाश पाटिल, हेमंत दोड़े, संतोष सातवसे और वीरेंद्र लोखंडे को शामिल किया.

जांच तभी आगे बढ़ सकती थी, जब लाश की शिनाख्त हो जाती. इसलिए महेश ठाकुर यह पता लगाने में जुट गए कि मृतका कौन थी और कहां की रहने वाली थी? वह शिनाख्त की कोशिश कर ही रहे थे कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ गई, जिस से पता चला कि हत्या करने के बाद लाश के साथ शारीरिक संबंध बनाया गया था. इस से पुलिस को लगा कि हत्यारा मानसिक रोगी था या फिर मृतका से उसे सख्त नफरत थी, जिस का उस ने इस तरह बदला लिया था.

पुलिस को उस नरपिशाच की तलाश थी, लेकिन पुलिस उस तक तभी पहुंच सकती थी, जब लाश की शिनाख्त हो जाती. इस के लिए महेश ठाकुर ने वायरलैस द्वारा मुंबई के सभी थानों को मृतका का हुलिया बता कर यह पता लगाने की कोशिश की कि उस हुलिए की किसी युवती की किसी थाने में गुमशुदगी तो नहीं दर्ज है.

बाद में पता चला कि उन्हीं के थाने में 20-22 साल की एक युवती की गुमशुदगी दर्ज है, जिस का नाम रूबी है और यह गुमशुदगी 5 जनवरी, 2016 को मालवड़ी के अंबूवाडी निवासी मोहम्मद आजाद कुरैशी ने दर्ज कराई थी.

महेश ठाकुर की टीम ने जब आजाद से संपर्क करना चाहा तो वह घर पर नहीं मिला. उस के बड़े भाई मोहम्मद रईस कुरैशी ने लाश को पहचानने से मना करते हुए बताया कि उस के छोटे भाई ने भले ही थाने में अपनी पत्नी रूबी की गुमशुदगी दर्ज कराई है, लेकिन सच्चाई यह है कि वह अपने किसी प्रेमी के साथ भाग गई है. रही बात हत्या की तो उस की हत्या नहीं हुई है, क्योंकि 2 दिनों पहले वह जिंदा देखी गई थी. आजाद उसी की खोज में निकला है.

रईस की बातों पर विश्वास कर के महेश ठाकुर लौट आए. इस की एक वजह यह भी थी कि पुलिस को समुद्र के किनारे जो लाश मिली थी, पुलिस उस की उम्र 40-45 साल मान कर चल रही थी, जबकि आजाद ने अपनी गुमशुदा पत्नी रूबी की उम्र 20-22 साल लिखाई थी.

महेश ठाकुर की टीम लाश की शिनाख्त के लिए रातदिन एक किए हुए थी. उन्होंने उस की शिनाख्त के लिए शहर के सभी रेवले स्टेशनों और बसअड्डों पर ही नहीं, सभी सार्वजनिक स्थानों पर भी लाश के फोटो के पैंफ्लेट तो चिपकवाए ही थे, मुंबई से निकलने वाले लगभग सभी प्रमुख अखबारों और टीवी चैनलों पर भी उस के फोटो दिखा कर शिनाख्त की अपील कराई थी. यही नहीं, उस के फोटो ले कर गेस्टहाउसों, वीयरबारों और होटलों की भी खाक छानी थी, पर नतीजा बेकार ही रहा था.

इस तरह लाश की शिनाख्त कराने में ही महेश ठाकुर की टीम को कई महीने निकल गए. इस के बावजूद सफलता नहीं मिली थी. इस के बाद पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस बारे में एक बार फिर विचारविमर्श किया तो उन्हें लगा कि इस मामले में कहीं न कहीं कुछ गड़बड़ जरूर है.

उस गड़बड़ी का पता करने के लिए महेश ठाकुर की टीम ने कूपर अस्पताल, सायन अस्पताल और केएएम अस्पताल के डाक्टरों से लाश की फोरैंसिक जांच कराई तो पता चला कि समुद्र किनारे मिली लाश को पुलिस मान कर चल रही थी कि उस की उम्र 40-45 साल है, जबकि उस की उम्र 20-22 साल थी. उस की मौत लाश मिलने के 7 दिनों पहले हुई थी.

यह जानकारी मिलने के बाद रूबी की गुमशुदगी दर्ज कराने वाला आजाद और उस का बड़ा भाई रईस शक के घेरे में आ गया. अब पुलिस को अपनी भूल पर पश्चाताप हुआ कि उम्र के भंवरजाल में उलझ कर उस ने इतना समय गंवा दिया.

फोरैंसिक रिपोर्ट से पुलिस को पूरा विश्वास हो गया कि समुद्र किनारे झाडि़यों में मिली लाश रूबी की ही थी. इस बात की पुष्टि के लिए पुलिस जब रईस के घर पहुंची तो वहां ताला लगा मिला. पूछने पर आसपड़ोस वालों ने बताया कि उस घर में रहने वाले एक महीने पहले वहां से चले गए हैं. वे कहां गए हैं, यह बताने को कोई तैयार नहीं था.

इस बात से पुलिस की परेशानी बढ़ गई थी, लेकिन पुलिस निराश नहीं हुई थी. वह आसपड़ोस वालों को विश्वास में ले कर कुरैशी भाइयों के बारे में पता करने की कोशिश करती रही. आखिर महेश ठाकुर की टीम की कोशिश रंग लाई और टीम एक पड़ोसी को विश्वास में लेने में कामयाब हो गई. वह पड़ोसी मुंबई में ही नहीं, गांव में भी कुरैशी भाइयों के पड़ोस में रहता था.

उस ने पुलिस टीम को चौंकाने वाली जानकारियां दीं. उस ने बताया कि उस दिन रईस ने पुलिस टीम को गुमराह किया था. रूबी अपने किसी प्रेमी के साथ नहीं भागी थी, उसे गायब किया गया था. क्योंकि जिस दिन रूबी के घर से गायब होने की बात कही गई थी, उस की चप्पलें घर के बाहर पड़ी थीं. कोई भी घर से जाएगा तो चप्पलें पहन कर जाएगा, न कि छोड़ कर.

उस पड़ोसी के बताए अनुसार, रईस और उस के भाई आजाद की गिनती गांव में दबंग लोगों में होती थी. इसीलिए कोई उन के खिलाफ बोलने को तैयार नहीं था. समुद्र किनारे झाडि़यों में जो लाश मिली थी, वह रूबी की ही थी. घटना वाले दिन उस घर में कुछ ठीक नहीं था.

उस की बीवी ने उस घर से चीख की आवाजें सुनी थीं. उस आदमी से पुलिस टीम को मोहम्मद रईस कुरैशी के घर का पता मिल गया था.

महेश ठाकुर की टीम के लिए यह जानकारी अहम थी. एक तरह से उन की आधी जांच पूरी हो गई थी. अब उन्हें रूबी के हत्यारों को गिरफ्तार करना था, जो उत्तर प्रदेश के अपने गांव चले गए थे. महेश ठाकुर ने सारी जानकारी इंसपेक्टर मिलिंद खेतले को दी तो उन्होंने बिना देर किए सबइंसपेक्टर संदीप पाचांगणे और हैडकांस्टेबल चंद्रकांत तिवारी के नेतृत्व में एक टीम उत्तर प्रदेश के लिए रवाना कर दी.

इस टीम ने उत्तर प्रदेश पहुंच कर वहां की स्थानीय पुलिस की मदद से रईस और उस के भाई आजाद को गिरफ्तार कर लिया. रईस ने अपनी गिरफ्तारी का काफी विरोध किया था, लेकिन पुलिस अब उस के झांसे में आने वाली नहीं थी.

22 मई, 2016 को मुंबई पुलिस रईस, उस के भाई आजाद और मृतका रूबी के मातापिता को साथ ले कर मुंबई आ गई. मुंबई आ कर पुलिस ने मोर्चरी में रखी रूबी की लाश उस के मातापिता को दिखाई तो उन्होंने उस की शिनाख्त अपनी बेटी रूबी के रूप में कर दी. इस के बाद पुलिस ने लाश उस के मांबाप को सौंप दी.

इस के बाद रईस और आजाद से रूबी की हत्या के बारे में पूछताछ शुरू हुई. इस पूछताछ में आजाद निर्दोष पाया गया, जिस से पुलिस ने उसे छोड़ दिया. उस के बाद रईस से पूछताछ शुरू हुई. आखिर उसे अपना अपराध स्वीकार करना पड़ा. इस की वजह यह थी कि लाश की बोरी पर पाए गए फिंगरप्रिंट उस की फिंगरप्रिंट से मेल खा गए थे.

पुलिस द्वारा की गई पूछताछ में रईस ने रूबी की हत्या की जो कहानी पुलिस को सुनाई थी, वह कुछ इस प्रकार थी.

रूबी मांबाप की एकलौती और लाडली बेटी थी. उस के पिता की आर्थिक स्थिति भले ही कमजोर थी, लेकिन वह मानसम्मान के साथ जीने वालों में थे. गांव में उन के पास जो थोड़ी खेती की जमीन थी, उसी पर मेहनत कर के वह गुजारा कर रहे थे. रूबी मांबाप की लाडली थी, इसलिए चंचल और नटखट थी. घर वाले चाहते थे कि वह पढ़लिख कर थोड़ा होशियार हो जाए, जिस से आराम से उस की जिंदगी कट जाए. लेकिन रूबी नौवीं से आगे नहीं पढ़ सकी.

रूबी सुंदर तो थी ही, साथ ही चंचल और नटखट भी थी, वह जिस से भी एक बार बात कर लेती थी, वह खुद ही उस के करीब खिंचा चला आता था. यही वजह थी कि गांव के तमाम मनचले उस के दीवाने हो गए थे. उन्हीं में एक मोहम्मद आजाद कुरैशी भी था. वह रहता भी उसी गली में था, जिस में रूबी का मकान थी.

आजाद का परिवार गांव में संपन्न और दबंग था. उस के परिवार में मातापिता के अलावा एक बड़ा भाई मोहम्मद रईस कुरैशी और उस से बड़ी एक बहन थी. बहन का निकाह हो चुका था. भाईबहनों में छोटा होने की वजह से आजाद नाम की ही तरह आजादखयाल था.

हालांकि आजाद और रूबी के घर वालों में कोई समानता नहीं थी, लेकिन दोनों का बचपन एक साथ गलियों में खेलते हुए बीता था. युवा होने पर आजाद रूबी को चाहने यानी उस से प्यार करने लगा था. रूबी ने जब उस के दिल में अपने लिए चाहत देखी तो उस ने भी उस की तसवीर अपने दिल में उतार ली.

दोनों ही एकदूसरे के दिलों में बस गए तो जल्दी ही उन्होंने एकदूसरे से यह बात कह भी दी. धीरेधीरे उन की चाहत इस कदर बढ़ी कि वे एकदूसरे को अपने जीवनसाथी के रूप में देखने लगे. इस के बाद जब भी उन की मुलाकातें होतीं, वे भविष्य के तानेबाने बुनने लगते. दोनों ने निकाह कर के साथसाथ रहने का फैसला जरूर कर लिया था, लेकिन उन के निकाह में दिक्कत यह थी कि रूबी जहां पठान थी, वहीं आजाद कुरैशी यानी कसाई था. दोनों के ही घर वाले इस निकाह के लिए तैयार नहीं थे.

रूबी और आजाद के प्यार की जानकारी उन के घर वालों को हुई तो दोनों के ही घरों में कोहराम मच गया. मामला काफी नाजुक था, इसलिए दोनों के ही घर वालों ने उन्हें समझाया कि वे एकदूसरे को भूल जाएं. लेकिन दोनों ही एकदूसरे को भूलने की कौन कहे, छोड़ने तक को तैयार नहीं थे.

इस पर दोनों के ही घर वालों ने एकदूसरे से मिलने पर पाबंदी लाग दी, लेकिन दोनों के ही घर वाले उन्हें रोक नहीं पाए. वे पहले की तरह ही एकदूसरे से चोरीछिपे मिलते रहे और जीवन के रंगीन सपनों का तानाबाना बुनते रहे. घर वालों ने ज्यादा सख्ती की तो रूबी और आजाद ने अपने सपनों को साकार करने के लिए सन 2002 में अपना घर छोड़ दिया और दिल्ली आ गए.

दिल्ली में मोहम्मद आजाद का एक दोस्त रहता था. वह रूबी के साथ उसी के यहां ठहरा. दिल्ली की एक मसजिद में दोनों ने निकाह कर लिया. अब उन्हें समाज और दुनिया से कोई लेनादेना नहीं था. रोजीरोटी के लिए मोहम्मद आजाद कैटरिंग का काम करने लगा.

समय अपनी गति से चलता रहा. समय के साथ आजाद का प्यार बढ़ता ही गया. उन के प्यार पर ग्रहण तब लगना शुरू हुआ, जब आजाद का रईस अपने बहनोई इसहाक के साथ उन की तलाश में दिल्ली आ कर उन के घर रहने लगा.

बहनोई तो कुछ दिनों बाद लौट गया, लेकिन रईस ने डेरा डाल दिया. इस की वजह यह थी कि उस का दिल रूबी पर आ गया था. आजाद काम पर चला जाता तो वह रूबी से छेड़छाड़ करता. रूबी रईस का विरोध करती, लेकिन वह अपनी हरकत से बाज नहीं आता. रईस की हरकतें बढ़ती ही गईं तो परेशान हो कर रूबी ने इस बात की शिकायत अपने पति से की.

रूबी की परेशानी तब और बढ़ गई, जब उस की शिकायत पर आजाद ने भाई को कुछ कहने के बजाय उसे ही बुराभला कहा. पति की इस हरकत से जहां रूबी की परेशानी और बढ़ गई, वहीं रईस के हौसले बुलंद हो गए. वह रूबी को पहले से ज्यादा परेशान करने लगा. आखिर उस से परेशान हो कर रूबी ने पति से दिल्ली के बजाय मुंबई में अपना कारोबार करने की सलाह दी.

आजाद को पत्नी की सलाह ठीक लगी. वह रूबी को ले कर मुंबई चला गया. मुंबई के मालवड़ी इलाके में उस के गांव के तमाम लोग रहते थे, उन्हीं के बीच कमरा किराए पर ले कर आजाद भी रूबी के साथ रहने लगा. उस का कारोबार दिल्ली की अपेक्षा मुंबई में ज्यादा अच्छा चल निकला. यह 2015 के शुरुआती दिनों की बात है.

मुंबई आ कर रूबी ने राहत की सांस ली थी, क्योंकि यहां आने के बाद रईस जैसे घटिया इंसान से उस का पीछा छूट गया था. लेकिन यह उस की भूल थी. उसे पता नहीं था कि अब उस की जिंदगी के कुछ ही दिन बचे हैं, उसे मुंबई आए अभी 4-5 महीने ही हुए थे कि रईस मुंबई भी आ पहुंचा. वह उसी के पड़ोस में किराए का कमरा ले कर रहने लगा.

इस बार वह बहनोई को भी साथ लाया था. यहां भी मौका मिलते ही वह रूबी के घर पहुंच जाता और पहले जैसी हरकतें करता. जब रईस रूबी को पाने में नाकाम रहा तो उस ने रूबी को ले कर एक खतरनाक योजना बना डाली, जिस में उस ने अपने बहनोई इसहाक और अपने एक दोस्त गुलाम रसूल उर्फ शब्बीर को यह कह कर शामिल कर लिया कि रूबी की वजह से उस के परिवार के मानसम्मान को काफी ठेस पहुंचा है.

योजना के अनुसार, 3 जनवरी, 2016 की दोपहर 2 बजे के आसपास रईस बहनोई और दोस्त के साथ रूबी के घर पहुंचा. रूबी कुछ कर पाती, तीनों ने उसे दबोच कर पीटपीट कर उस की हत्या कर दी. हत्या के बाद रईस ने रूबी की लाश के साथ दुष्कर्म किया.

लाश को ठिकाने लगाने से पहले उस के सारे कपड़े उतार कर उस के सिर को कुचल दिया. लाश को उस तरह बाहर नहीं ले जाया जा सकता था, इसलिए उस के हाथपैर बांध कर उसे बोरी में भर कर उस का मुंह मजबूत रस्सी से बांध दिया. रात होने पर तीनों ने बोरी ले कर जा धारवली गांव के करीब स्थित समुद्री झाडि़यों के बीच दलदल में फेंक दिया.

इस के बाद उन्होंने रूबी के घर छोड़ कर चली जाने की बात आजाद को बताई तो उस ने थाने जा कर उस की गुमशुदगी दर्ज करा दी. उन लोगों का सोचना था कि न लाश की शिनाख्त होगी, न वे पकड़े जाएंगे. लेकिन पुलिस उन तक पहुंच ही गई.

रईस से पूछताछ के बाद उस की निशानदेही पर पुलिस ने उस के बहनोई मोहम्मद इसहाक कुरैशी और दोस्त मोहम्मद गुलाम रसूल उर्फ शब्बीर को भी गिरफ्तार कर लिया. इन सभी के खिलाफ रूबी की हत्या का मुकदमा दर्ज कर उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहां से सभी को आर्थर रोड जेल भेज दिया गया.    Mumbai Murder Mystery

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...