Punjab Crime Story . दीपक और विपिन ऐसे शराबी थे, जो न दिन देखते थे न रात. यही नहीं, शराब के लिए वे कुछ भी कर सकते थे. यही वजह रही कि पत्नी ने शराब के लिए पैसे नहीं दिए तो दीपक ने भाई की मदद से उसे गला दबा कर मार दिया.
दीपक उर्फ रिंकू और विपिन उर्फ विंपी, दोनों भाई मकान की छत पर बैठे शराब पी रहे थे. यह उन का रोज का काम था. दोनों भाई शराब के इतने शौकीन थे कि शराब पीने के लिए वे न दिन देखते थे, न रात. जब मन हुआ पीने बैठ जाते थे. उन्हें कामधाम की भी चिंता नहीं रहती थी. दोनों भाई ऐसे पियक्कड़ थे कि आंख खुलते ही उन्हें पानी की नहीं, शराब की जरूरत पड़ती थी.
दोनों ही भाइयों को न घर से मतलब था, न बीवी बच्चों से. कामधंधे की भी कोई परवाह नहीं थी. वे काम तभी करते थे, जब शराब के लिए उन के पास पैसे नहीं होते थे. दोनों भाइयों में दीपक बड़ा था और विपिन छोटा. रोज की तरह उस दिन भी शाम 6 बजे से दोनों भाई छत पर पीने बैठ गए थे.
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खाने का समय हुआ तो दीपक की पत्नी सुषमा उन्हें बुलाने आई. लेकिन पीने के आगे उन्हें खाने का होश नहीं था. तब सुषमा ने अपने 4 साल के बेटे को खिलाया और खुद खा कर सो गई. दोनों भाई कब तक पीते रहे, यह सिर्फ उन्हें ही पता था. क्योंकि बाकी लोग तो सो गए थे.
लुधियाना के घुमारमंडी की बाबूराम वाली गली के मकान नंबर 552बी में रहते थे नत्थूराम. कभी यह इलाका लुधियाना से बाहर फिरोजपुर रोड के निकट मामूली बस्ती था. लेकिन शहरीकरण होने की वजह से आज घुमारमंडी पौश इलाका बन गया है. यहां बड़ेबड़े शोरूम खुल गए हैं. सिविल लाइन भी इसी से लगा है.
शहरीकरण की वजह से नत्थूराम की कौडि़यों के भाव की जमीन करोड़ों की हो गई थी. वह बड़े सीधेसादे इंसान थे. बच्चों में उन के 2 बेटे और 2 बेटियां थीं. उन्होंने बच्चों को पढ़ाने की बहुत कोशिश की, पर कोई भी दसवीं से आगे नहीं पढ़ सका और न उन के कहने पर कुछ किया ही.
दीपक और विपिन युवा होते ही गलत सोहबत में पड़ गए और शराब पीने लगे. कोई काम भी टिक कर नहीं किया. नत्थूराम ने दीपक को औटो खरीद दिए, जिन्हें वह किराए पर चलवाता था. लेकिन शराब की लत की वजह से एकएक कर के सारे औटो बिक गए. विपिन कभी बिजली की मरम्मत का काम करता तो कभी किसी दुकान पर नौकरी कर लेता. इसी तरह समय बीतता रहा.
नत्थूराम के मकान से कुछ दूरी पर रामनाथ एवं उन की बहन शांति देवी का परिवार रहता था. रामनाथ के एक भाई परेशचंद्र होशियारपुर में रहते थे. कई सालों पहले उन की मौत हो चुकी थी. उन की मौत के बाद घर की सारी जिम्मेदारी उन के बड़े बेटे संजय के कंधों पर आ गई थी.
परेशचंद्र की संतानों में संजय के अलावा एक बेटा और 2 बेटियां थीं, जिन में सुषमा सब से छोटी थी. संजय ने अपनी जिम्मेदारियों का निर्वाह करते हुए एक अच्छे भाई की तरह छोटे भाईबहनों की परवरिश की और उम्र होने पर सब की शादियां कर दीं. अपने चिकन कार्नर के छोटे से कारोबार से उस ने सभी भाईबहनों को खुशियां देने की पूरी कोशिश की.
छोटी बहन सुषमा शादी लायक हुई तो संजय ने उस के लिए लड़के की तलाश शुरू की. उन्होंने बहन के लिए चाचा रामनाथ से लड़का पूछा तो उन्होंने नत्थूराम के बेटे दीपक का रिश्ता सुझाया. दीपक देखने में ठीकठाक था, इसलिए संजय ने सन 2011 में सुषमा की शादी दीपक से कर दी. शादी के बाद सुषमा को बेटा हुआ तो उस का नाम उस ने जसकुमार रखा.
संजय ने सुषमा की खुशी और सुख को ध्यान में रख कर उस की शादी दीपक से की थी, पर यहां न उसे सुख मिला न खुशी. शादी के बाद जब सुषमा को पता चला कि दीपक पक्का शराबी है तो उसे बड़ा दुख हुआ. लेकिन अब इस बात के लिए पति को तो छोड़ा नहीं जा सकता था.
सुषमा इसे संयोग मान कर दीपक की शराब की लत छुड़वाने की बहुत कोशिश करने लगी, पर सफलता नहीं मिली. सुषमा को दीपक के शराब पीने पर खास आपत्ति नहीं थी, आपत्ति इस बात पर थी कि वह दिनरात शराब पीता था, जबकि सुषमा चाहती थी कि दिन में वह कामधंधा करे, शाम को थोड़ी पी कर खाना खाने के बाद सो जाए. घर में इसी बात का झगड़ा था. लेकिन दीपक अपनी आदतों से बाज नहीं आ रहा था.
बहरहाल, उस दिन देर रात तक शराब पीने के बाद दोनों भाई छत पर ही सो गए थे. सुषमा बेटे के साथ नीचे कमरे में सो रही थी. सुबह करीब 5 बजे नशा टूटने पर दीपक की आंख खुली तो उस ने आसपास नजर दौड़ाई. एक बोतल में थोड़ी शराब दिखाई दी तो उस ने बोतल की शराब हलक के नीचे उतारी और दबे पांव नीचे आ गया.
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वह चोरों की भांति कमरे में घुसा तो सुषमा बेटे के साथ गहरी नींद में सो रही थी. बिना कोई आहट किए उस ने कमरे में रखी अलमारी खोली और लौकर में रखे 20 हजार रुपए निकाल कर जेब में रख लिए.
सुषमा ने ये रुपए बेटे का दाखिला कराने के लिए भाई से मांगे थे. 2 दिनों पहले ही ये रुपए संजय दे गया था. तभी से दीपक की नजर इन रुपयों पर जमी थी. रुपए हाथ में आते ही वह दबे पांव कमरे से निकला और विपिन को जगा कर गायब हो गया.
सुबह 8 बजे सुषमा दीपक को जगाने छत पर पहुंची तो दोनों भाइयों को वहां न पा कर उस के मन में संदेह हुआ. उस ने तुरंत नीचे आ कर अलमारी खोली तो उस में रखे रुपए गायब पा कर उस ने अपना सिर पीट लिया. उस ने फोन कर के यह बात भाई को बताई तो उस ने उसे शांत रहने के लिए कह कर जस के दाखिले के लिए पैसे देने का आश्वासन दिया.
दीपक और विपिन ने यह जो हरकत की थी, यह कोई नई नहीं थी. ऐसा वे अकसर करते रहते थे. शराब के लिए अगर कहीं से पैसे नहीं मिलते थे तो घर में पैसे रखे हैं, इस बात का पता चलते ही वे मौका देख कर पैसे उठा ले जाते थे और तब तक घर नहीं लौटते थे, जब तक उन की जेब खाली नहीं हो जाती थी.
सुषमा बारबार भाई से पति की शिकायत कर के थक चुकी थी. लेकिन वह करे भी तो क्या?और कोई सहारा भी तो नहीं था.
21 दिसंबर, 2015 की रात रामनाथ ने संजय को फोन कर के बताया कि सुषमा की मौत हो चुकी है. उस ने फांसी लगा कर आत्महत्या कर ली है. होशियारपुर से लुधियाना का सफर लगभग 4 घंटे का था. सुबह होते ही संजय लुधियाना आ पहुंचा. जिस छोटी बहन को उस ने बेटी की तरह पाला था, उस की लाश पंखे से बंधे दुपट्टे से झूल रही थी. लाश अभी तक उतारी नहीं गई थी.
मामला आत्महत्या का हो या हत्या का, पुलिस को सूचित करना जरूरी होता है. यही सोच कर संजय ने इस घटना की सूचना थाना डिवीजन नंबर 8 कैलाश चौक पुलिस को दे दी.
संजय की सूचना को डीडी नंबर 3 पर दर्ज कर के थानाप्रभारी राजेश ठाकुर एएसआई सविंदर सिंह, हैडकांस्टेबल मूलराज, सुखराज, कांस्टेबल तिलकराज, मनिंदर और नरविंदर को साथ ले कर घटनास्थल पर पहुंच गए.
सुषमा की लाश पंखे से लटक रही थी. उस ने दुपट्टे का फंदा बना कर अपने गले में डाला था. राजेश ठाकुर ने घटना की सूचना अधिकारियों को देने के साथ क्राइम टीम को बुला लिया था. क्राइम टीम ने लटक रही लाश के कई कोणों से फोटो लिए और बारीकी से निरीक्षण करने के बाद लाश नीचे उतारी गई.
कमरे के निरीक्षण में राजेश ठाकुर को वहां रखी मेज पर एक सुसाइड नोट मिला, जिस में लिखा था, ‘मेरे पति शराब पीते हैं, लेकिन मेरे भाई को यह हक नहीं है कि वह जब चाहें, मेरे पति की बेइज्जती करें, उन्हें बातबात पर जलील करें. मैं ने अपने भाई को बहुत समझाया कि वह हमारे घर के मामलों में दखल न दें, पर वह नहीं माने. मैं न तो अपने पति को छोड़ सकती हूं और न भाई को ही कुछ कह सकती हूं. इसलिए अपनी मर्जी से आत्महत्या कर रही हूं. मेरे बेटे जस का ध्यान रखा जाए.’
सुसाइड नोट में जो लिखा था, उस से राजेश ठाकुर को लगा कि भाई के व्यवहार से तंग आ कर मृतका ने यह कदम उठाया है. बहरहाल लाश को कब्जे में ले कर उन्होंने पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल भिजवा दिया और पूछताछ के लिए संजय को हिरासत में ले कर थाने आ गए.
थाने में की गई पूछताछ में संजय ने बताया कि सब से छोटी होने की वजह से सुषमा पूरे परिवार की चहेती थी. पिता की मौत के बाद उन्होंने उसे बेटी की तरह पालापोसा और शादी लायक होने पर दीपक से उस की शादी कर दी. उस की शादी में वह धोखा खा गए. शादी के बाद पता चला कि दीपक की आदतें ठीक नहीं थीं और वह नशे का आदी था.
सुषमा इसी बात से दुखी रहती थी. लेकिन वह बुद्धिमान और हिम्मतवाली थी. आत्महत्या जैसा कदम वह कतई नहीं उठा सकती थी. उस ने आत्महत्या नहीं की, उस की हत्या की गई है और हत्यारा कोई और नहीं, उस का पति दीपक और देवर विपिन है.
राजेश ठाकुर ने दीपक और विपिन को भी थाने बुलवा कर पूछताछ की. दोनों ने एक ही बात कही कि उस रात 11 बजे तक वे फिरोजपुर रोड स्थित आरती चौक पर एक अहाते में बैठ कर शराब पी रहे थे. रात को जब वे घर लौटे तो सुषमा पंखे से लटक रही थी. घबरा कर उन्होंने तुरंत इस बात की जानकारी सुषमा के चाचा और बूआ को दी.
मामला उलझा हुआ था. राजेश ठाकुर की समझ में नहीं आ रहा था कि मृतका ने आत्महत्या की है या उस की हत्या की गई है? दोषी उस का पति और देवर है या भाई या फिर स्वयं मृतका? आखिर उस की आत्महत्या या हत्या से किस को लाभ पहुंच सकता था, इस के पीछे कारण क्या हो सकता है? इसी तरह के कई सवाल थे, जिन का जवाब उन्हें नहीं मिल रहा था.
बहरहाल, पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने तक राजेश ठाकुर ने हैडकांस्टेबल मूलराज और तिलकराज को दीपक और विपिन के बारे में पता करने के लिए लगा दिया. इसी के साथ उन्होंने सुषमा द्वारा लिखे गए सुसाइड नोट को जांच के लिए हैंडराइटिंग एक्सपर्ट के पास भेज दिया.
पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई तो पता चला कि सुषमा की मौत गला घोंटने से हुई थी. उसे मार कर लटकाया गया था. दूसरी ओर हैंडराइटिंग विशेषज्ञ की रिपोर्ट के अनुसार सुसाइड नोट मृतका द्वारा नहीं लिखा गया था. इस का मतलब उस सुसाइड नोट को किसी और ने लिखा था.
इन बातों से यह स्पष्ट हो गया कि सुषमा ने आत्महत्या नहीं की थी. उस की गला घोंट कर हत्या की गई थी. संजय होशियारपुर से आ कर अपनी बहन की हत्या तो कर नहीं सकता था? सुषमा भी अपना गला अपने हाथों से घोंट नहीं सकती थी और उस के बाद खुद को पंखे से लटका नहीं सकती थी.
इस के बाद बचा कौन, जो यह काम कर सकता था? जाहिर सी बात थी, दीपक और विपिन ही थे, जो इस काम को कर सकते थे. इस के बाद जब राजेश ठाकुर ने सुषमा के 4 साल के बेटे जसकुमार से पूछा तो उस ने बैड की ओर इशारा करते हुए कहा, ‘‘मम्मी को पापा और चाचा ने मारा है.’’
इस के बाद राजेश ठाकुर ने दीपक और विपिन से पूछताछ की तो दीपक ने ढिठाई से कहा, ‘‘साहब, एक तो हमारी बीवी मर गई है, ऊपर से आप हमारे ऊपर ही आरोप लगा रहे हैं.’’
‘‘चुप,’’ राजेश ठाकुर ने डांटते हुए कहा, ‘‘मुझे पता चल गया है कि उस रात तुम दोनों भाई 9 से साढ़े 9 बजे के बीच कुछ देर के लिए अहाते से गायब हो गए थे. दोनों सचसच बता दो, वरना हम तुम से सच उगलवा ही लेंगे.’’
राजेश ठाकुर के तेवर देख कर दीपक और विपिन सहम उठे. उन्होंने अपना अपराध स्वीकार करते हुए बताया कि उन्होंने ही सुषमा की गला घोंट कर हत्या की थी. उस के बाद आत्महत्या दिखाने के लिए उन्होंने उसे दुपट्टे से बांध कर लटका दिया था. दीपक ने बताया कि शादी से पहले वह शौकिया शराब पीता था. लेकिन शादी के बाद वह धीरेधीरे आदी बनता गया. आगे चल कर दोनों भाई स्मैकी बन गए. जब उन के पास पैसे नहीं होते थे तो वे नशे के लिए अलमारी में रखे सुषमा के रुपए चुरा लिया करते थे.
इस बात को ले कर घर में अकसर लड़ाईझगड़ा होता था. घटना से 2 दिन पहले सुषमा का भाई संजय बेटे के दाखिले के लिए 20 हजार रुपए दे गया था. दीपक को इस बात की जानकारी थी. वह उस में से कुछ रुपए झटकना चाहता था. पर उसे मौका नहीं मिल रहा था. उस दिन सुबह मौका मिला तो वे रुपए चुरा कर उन्होंने उड़ा दिए.
21 दिसंबर को उन के पास एक भी रुपया नहीं था. शराब और स्मैक न मिलने की वजह से दोनों भाई तड़प रहे थे. उन्होंने इधरउधर प्रयास किए, पर उन्हें कहीं से रुपए नहीं मिले. मजबूर हो कर दीपक ने सुषमा से कुछ रुपए मांगे तो उस ने रुपए देने से साफ मना कर दिया. शराब और स्मैक न मिलने से उन की स्थिति पागलों जैसी हो रही थी, इसलिए दोनों भाई सुषमा से झगड़ा करने लगे.
उसी बीच दीपक ने अलमारी खोल कर उस में घर के खर्च के लिए रखे रुपए निकाल लिए तो सुषमा ने विरोध करते हुए रुपए छीन लिए. दीपक ने रुपए छीनने की कोशिश की तो सुषमा उसे धक्का दे कर कमरे से बाहर निकल गई. हाथ से रुपए निकलते ही दोनों भाई पागल हो उठे. दीपक बाहर आया और सुषमा को पकड़ कर कमरे में घसीट ले गया तो दोनों भाइयों ने मिल कर उस की गला घोंट हत्या कर दी.
सुषमा मर गई तो अपने अपराध को छिपाने के लिए उन्होंने सुषमा के गले में दुपट्टा बांध कर पंखे से लटका दिया, जिस से लोगों को लगे कि उस ने आत्महत्या की है. पुलिस को गुमराह करने के लिए विपिन ने सुषमा की ओर से सुसाइड नोट लिख कर मेज पर रख दिया. यह सारा काम निपटा कर दोनों भाई अहाते में शराब पीने चले गए. लेकिन उन्होंने जो किया था, 4 साल का जस देख रहा था और रो रहा था. जाते समय वे उसे भी अपने साथ अहाते में लेते गए थे. दीपक और विपिन के इस बयान के आधार पर राजेश ठाकुर ने दीपक और विपिन के खिलाफ सुषमा की हत्या का मुकदमा दर्ज कर अदालत में पेश कर के 2 दिनों के पुलिस रिमांड पर लिया.
रिमांड के दौरान सारे सबूत जुटा कर दोनों भाइयों को पुन: अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. मां की मौत और पिता के जेल चले जाने के बाद जस को संजय के कहने पर उस की मौसी को सौंप दिया गया है. Punjab Crime Story
—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित, कथा में कुछ नाम परिवर्तित हैं






