Crime Story in Hindi. सीमा का पति कौशलराज भले ही मंदबुद्धि था, लेकिन वह उसे बहुत प्यार करता था. इस के बावजूद सीमा ने जब उस की तुलना प्रेमी से की तो उसे उस का प्यार तुच्छ लगा. तब उस ने जो किया, 2 घर बरबाद हो गए.

मई का महीना शुरू होते ही भीषण गर्मी पड़ने लगी थी. सूर्यनगरी के नाम से मशहूर जोधपुर शहर रेत और पहाडि़यों के बीच बसा है, इसलिए वहां कुछ ज्यादा ही गर्मी पड़ती है. लेकिन रेत की वजह से रातें जरूर ठंडी होती हैं, जो लोगों को काफी सुकून देती हैं.

जोधपुर शहर के हाथीराम का ओड़ा की मच्छी मार्केट का रहने वाला कौशलराज उर्फ हरीश पिछले कई दिनों से बहुत खुश था. वही नहीं, उस का पूरा परिवार खुश था. इस की वजह यह थी कि उस की शादी बड़ी मुश्किल से हुई थी. 27 साल की उम्र में उस के सिर पर सेहरा बंधा था. मांबाप बरसों से बेटे को दूल्हे के रूप में घोड़ी पर बैठा देखना चाहते थे, लेकिन कहीं बात ही नहीं बन रही थी.

कहा जाता है कि शादी भी संयोग से होती है. कौशलराज के जवान होते ही मातापिता उस के लिए दुलहन लाने का सपना देखने लगे थे. उन्होंने नातेरिश्तेदारों, परिचितों और मोहल्ले वालों से भी कौशलराज के लिए कोई अच्छी लड़की बताने को कहा था. लेकिन कहीं से बात नहीं बनी.

एकदो लोग शादी करने के मकसद से आए भी, लेकिन बेटी के लिए कौशलराज उन्हें पसंद नहीं आया. इस की वजह यह थी कि वह देखने में तो ठीकठाक था, लेकिन दिमाग से थोड़ा कमजोर था.

वैसे कौशलराज में इतनी भी कमी नहीं थी कि वह विवाह योग्य न हो, पर पता नहीं क्यों उस की शादी नहीं हो रही थी. नातेरिश्तेदारों ने उस की शादी के लिए जो उपाय बताए, मातापिता ने वह भी किए. लेकिन उन का भी कोई फल नहीं निकला. न तो कोई रिश्ता आया और न कहीं बात आगे बढ़ी. शादी न होने से कौशलराज भी कुंठित सा होता जा रहा था.

मातापिता उसी की चिंता में सूखते जा रहे थे कि कहीं बेटा कुंवारा ही न रह जाए, क्योंकि उम्र ज्यादा हो जाएगी तो विवाह होना मुश्किल हो जाएगा. चिंता की एक वजह यह भी थी कि कौशलराज 3 बहनों का एकलौता भाई था. अगर वह कुंवारा रह जाता तो उन का वंश आगे नहीं बढ़ सकता था.

कौशलराज की शादी की कोशिश चल ही रही थी कि इसी साल मार्च के महीने में किसी परिचित ने एक लड़की बताई. लड़की का नाम सीमा था और वह महाराष्ट्र के जिला बीड के महाजल गांव की रहने वाली थी. उस की उम्र कोई 23-24 साल बताई गई थी. उस की शादी हो चुकी थी, लेकिन पति से नहीं निभी तो वह मायके आ गई थी और पति को तलाक दे दिया था. उस के घर वाले काफी गरीब थे.

सीमा के बारे में पता चलने पर घर वालों ने खूब सोचाविचारा, उस के बाद तय किया कि सीमा भले ही तलाकशुदा है, लेकिन उस के सथ विवाह होने से कौशलराज का घर तो बस जाएगा. उसे जिंदगी का एक सहारा मिल जाएगा.

कौशलराज के घर वाले यह रिश्ता किसी भी हालत में छोड़ना नहीं चाहते थे. उन्होंने रिश्ता बताने वाले परिचित से बात आगे बढ़ाने को कहा तो उस ने कौशलराज के घर वालों को सीमा के घर वालों से मिलवा दिया. सीमा और कौशलराज ने भी एकदूसरे को देखा. घर वालों के साथसाथ सीमा और कौशलराज ने भी शादी के लिए हामी भर दी. कहा जाता है कि बिचौलिए ने यह रिश्ता कराने के लिए कौशलराज के घर वालों से 2 लाख रुपए लिए थे.

खैर, दोनों परिवारों और लड़कालड़की में रजामंदी हो गई तो 29 मार्च को सीमा और कौशलराज की शादी करा दी गई. पहले उन की शादी कोर्ट में हुई, उस के बाद आर्यसमाज मंदिर में.

इस शादी से सब से ज्यादा खुशी कौशलराज के घर वालों, नातेरिश्तेदारों और उस की तीनों बहनों को हुई थी. शादी होने के बाद उन की चिंता खत्म हो गई थी. सभी को लगता था कि कौशलराज की जिंदगी अब सही राह पर आ जाएगी.

सीमा कौशलराज के पतझड़ भरे जीवन में बहार बन कर आई थी. पत्नी के सुख ने उस के जीवन में उमंग ला दी थी. सीमा ने भी जल्दी ही कुशल गृहिणी की तरह घर का पूरा कामकाज संभाल लिया था. सीमा गरीब परिवार से जरूर थी, लेकिन कौशलराज और उस के घर वालों को सीमा से कोई परेशानी नहीं थी.

6 मई शुक्रवार को सीमा ने रोज की तरह घरगृहस्थी के सारे काम निपटाए और दोपहर में कुछ देर आराम करने के लिए अपने कमरे में चली गई. लेकिन उस दिन उसे नींद नहीं आई. वह काफी देर तक सोचती रही. अचानक कौशलराज के भोलेपन पर उस के होठों पर कुटिल मुसकान तैर गई. वह पलंग से उठ खड़ी हुई.

सीमा ने घड़ी की ओर देखा. शाम के 4 बज चुके थे. शाम की चाय का वक्त हो गया था, इसलिए उस ने साड़ी की सलवटें ठीक कीं, आईने में चेहरा देखा, बाल ठीक किए और रसोई में चाय बनाने चली गई. चाय वगैरह पीने के बाद घर के अन्य काम निपटाए और शाम के खाने की तैयारी में जुट गई.

उस दिन उस ने कौशलराज की पसंद का खाना बनाया. रात करीब 7, साढ़े 7 बजे कौशलराज जब घर आया तो सीमा ने उसे खाना खिला कर खुद भी खाया. खाने के बर्तन वगैरह साफ करने के बाद रात लगभग साढ़े 8 बजे वह पति के साथ कमरे में चली गई. दोनों बातें करते हुए टीवी देखते रहे.

सीमा उस दिन कुछ ज्यादा ही खुश नजर आ रही थी. कमरे में आने से पहले उस ने हल्का मेकअप भी किया था. इस से उस का मादक सौंदर्य और भी निखर आया था. अचानक उस ने कौशलराज को बांहों में भर लिया तो उस ने उसे छेड़ते हुए पूछा, ‘‘सीमा, आज तुम्हारा क्या इरादा है?’’

सीमा ने चेहरे पर मुसकान बिखेरते हुए कहा, ‘‘तुम रोजाना रात को मुझे तंग करते हो, आज मैं तुम्हें तंग करूंगी.’’ ‘‘अच्छा, आज तुम मुझे कैसे तंग करोगी?’’ कौशलराज ने भोलेपन से पूछा.

‘‘आज हम एक खेल खेलेंगे, मियांबीवी वाला खेल.’’ सीमा ने कहा. ‘‘वह कौन सा खेल है और तुम ने इसे कहां सीखा है?’’ कौशलराज ने पूछा. ‘‘यह खेल मैं ने टीवी पर देख कर सीखा है.’’ सीमा ने कौशलराज की आंखों में झांकते हुए कहा.

‘‘चलो, तुम कहती हो तो हम वह खेल खेल ही लेते हैं, लेकिन एक बात बताओ, इस में जो जीतेगा, उसे क्या मिलेगा?’’ कौशलराज ने जिज्ञासावश पूछा. ‘‘इस खेल में अगर तुम जीत गए तो रातभर मस्ती करना और हार गए तो आज छुट्टी.’’ सीमा ने मुसकराते हुए कहा. ‘‘ठीक है, जैसी तुम्हारी इच्छा, खेल शुरू करो.’’ कौशलराज ने कहा.

सीमा ने खेल शुरू करने के लिए पहले से ही पलंग के नीचे रखी रस्सी निकाली और उस ने कौशलराज के दोनों हाथ पीठ की तरफ बांध दिए. इस के बाद उसे पलंग पर सीधा लिटा दिया. कौशलराज सीधा लेट गया तो सीमा उस के सीने पर चढ़ कर बैठ गई और उस का गला झटके से दबा दिया. गला दबने से कौशलराज अचेत हो गया. सीमा ने पहले से ही ला कर रखा चाकू निकाला और बेहोश कौशलराज के दाहिने हाथ की नसें काट दीं.

अचेत होने की वजह से नसें कटने पर भी कौशलराज चीखा नहीं. नसें कटने से पलंग पर खून ही खून फैल गया. सीमा मुसकराते हुए कौशलराज का खून बहता देखती रही.

खून बह जाने से कुछ ही देर में कौशलराज की सांसें थम गईं. सीमा को जब विश्वास हो गया कि कौशलराज की मौत हो गई है तो वह चीखती-चिल्लाती कमरे से बाहर आई और सास को बताया कि कौशलराज ने अपने कमरे में चाकू से हाथ की नसें काट कर आत्महत्या कर ली है.

बहू की बातें सुन कर सास सन्न रह गई. वह समझ नहीं पाई कि अचानक यह क्या हो गया? उस ने घर के अन्य लोगों को जगाया. सब ने कमरे में जा कर देखा तो पलंग पर कौशलराज सीधा लेटा था और उस के दाहिने हाथ की नसें कटी हुई थीं, जहां से खून बह रहा था. कौशलराज के दिल की धड़कनें थम चुकी थीं. सभी को उस की इस तरह की मौत पर हैरानी हुई.

ऐसी कोई बात भी नहीं थी कि उसे आत्महत्या करने की जरूरत पड़ती. घर वालों ने सीमा से इस बारे में पूछा तो उस ने कोई जवाब नहीं दिया. केवल इतना ही कहा कि उन्होंने चाकू से अपने हाथ की नसें काट कर आत्महत्या कर ली है. आत्महत्या क्यों की, इस बात के जवाब में उस ने कुछ नहीं बताया. मामला संदिग्ध देख कर घर वालों ने थाना सदर बाजार पुलिस को सूचना दे दी.

थाना सदर बाजार पुलिस ने निरीक्षण में देखा कि पलंग पर पड़े कौशलराज के शव की स्थिति बिलकुल अलग थी. पुलिस ने शव को कब्जे में ले कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और मृतक के चाचा की शिकायत पर हत्या का मामला दर्ज कर लिया.

इस मामले की जांच के लिए एसीपी सुरेंद्र सिंह के नेतृत्व में थाना सदर बाजार की थानाप्रभारी पुष्पा कंवर, नागौरी गेट की थानाप्रभारी मुक्ता पारीख एवं सदर कोतवाली के थानाप्रभारी प्रदीप सिंह की एक टीम गठित की गई. जांच टीम में सिपाही प्रकाश जोशी, कमरुद्दीन, मुकेश मीणा तथा किशोर सिंह को भी शामिल किया गया था.

पुष्पा कंवर को घटनास्थल की स्थिति से ही मामला संदिग्ध लग रहा था. मृतक कौशलराज अपने सारे काम दाहिने हाथ से करता था. हैरानी की बात यह थी कि उस के उसी हाथ की नसें कटी मिली थीं. जबकि दाहिने हाथ से काम करने वाला दाएं हाथ की नसें नहीं काट सकता.

इस के अलावा एक और बात इस मामले में शक पैदा कर रही थी. वह यह कि जिस कमरे में कौशलराज एवं सीमा थे, उस कमरे के बाहर खिड़की पर कूलर लगा था. उस दिन रात को भीषण गर्मी थी. इस के बावजूद कूलर वाली वह खिड़की अंदर से बंद थी.

पुष्पा कंवर के दिमाग में एक बात और कौंध रही थी कि कौशलराज के दोनों हाथ जब रस्सी से बंधे थे तो पलंग पर रस्सी खुली क्यों पड़ी थी? इस का मतलब उस के हाथों में बंधी रस्सी किसी ने खोली थी. वह रस्सी खून से सनी थी. इन बातों से साफ लग रहा था कि कौशलराज की हत्या की गई थी.

पुलिस को अब यह पता लगाना था कि कौशलराज की हत्या किस ने और क्यों की. पुलिस की जांच और कौशलराज के घर वालों से पूछताछ में यह बात सामने आई कि उस रात कमरे में कौशलराज और सीमा ही थे. कमरे में जब पतिपत्नी ही थे और दोनों में से पति की हत्या हो गई थी तो पुलिस के शक की सुई सीमा पर ही जा टिकी.

पुलिस ने गुप्तरूप से सीमा और कौशलराज की वैवाहिक जिंदगी के बारे में पता किया तो पता चला कि इस नवदंपति के बीच किसी बात को ले कर घर में कभी कोई झगड़ा नहीं हुआ था. सीमा और कौशलराज के चालचलन के बारे में भी पता किया गया. मुख्यरूप से सीमा ही पुलिस के शक के दायरे में थी, इसलिए पुलिस ने उसे थाने ला कर पूछताछ की तो वह यही कहती रही कि कौशलराज ने खुद अपने हाथ की नसें काट कर आत्महत्या की है.

आखिर सीमा की रटीरटाई बातें सुन कर पुलिस अधिकारी तंग आ गए तो उन्होंने कहा कि अगर अब उस ने सारी बातें सचसच नहीं बताई तो उस के गांव से उस के प्रेमी को पुलिस पकड़ लाएगी और हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लेगी.

पुलिस का यह दबाव सीमा सहन नहीं कर सकी और वह टूट गई. उस ने कहा कि उस के प्रेमी को न लाया जाए. वह सारी बातें सचसच बता देगी. उस ने स्वीकार कर लिया कि कौशलराज की हत्या उसी ने की थी. इस के बाद सीमा ने कौशलराज उर्फ हरीश की हत्या की जो कहानी बताई, वह इस प्रकार थी—

सीमा महाराष्ट्र के जिला बीड के माजला शहर पुलिस थाना इलाके के गांव माजल फुलेनगर की रहने वाली थी. पहले पति से तलाक के बाद वह मायके में ही रह रही थी. उस के मातापिता काफी गरीब थे. उस का गांव के ही एक युवक से प्रेमप्रसंग चल रहा था. इसी बीच बिचौलिए के माध्यम से 2 लाख रुपए ले कर उस के मातापिता ने उस की शादी जोधपुर के कौशलराज से कर दी थी.

22 साल की सीमा जब दुलहन बन कर ससुराल आई तो पता चला कि उस का 27 साल का पति कौशलराज मंदबुद्धि है. इसलिए वह उसे नापसंद करने लगी. उस के दिलोदिमाग में पति की जो छवि थी, उस पर कौशलराज किसी भी कीमत पर खरा नहीं उतरता था. वह चाहती थी कि उस का पति अच्छा पैसा कमाने वाला हो, उसे गाड़ी में बैठा कर घुमाने ले जाए, नए फैशनेबल कपड़े दिलाए.

सीमा मन ही मन अपने प्रेमी से कौशलराज की तुलना करती तो उसे लगता कि बेकार ही वह इस शादी के चक्कर में फंस गई. इसलिए कौशलराज से शादी के कुछ समय बाद ही वह उस से कटीकटी रहने लगी. हालांकि कौशलराज ने सीमा को पति का प्यार देने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी. उस के घर वालों ने भी उस पर बहू के रूप में पूरा विश्वास किया था.

उसी बीच सीमा ने अपनी मां से एक बार कहा भी कि कौशलराज मंदबुद्धि है और वह उसे बिलकुल भी पसंद नहीं है, वह उस की पत्नी बन कर नहीं रह सकती. तब मां ने उसे दुनियादारी की बातें समझाते हुए कहा था कि शादीब्याह कोई गुड्डेगुडि़या का खेल नहीं. वह तलाकशुदा है. अगर उस ने कौशलराज को छोड़ दिया तो फिर उस का घर बसना मुश्किल हो जाएगा.

मां के दबाव की वजह से ही सीमा मजबूरी में जोधपुर में कौशलराज के साथ रह रही थी. वहां रहते हुए उस ने ससुराल से भागने की योजना बनाई, लेकिन 1-2 बार कोशिश करने के बाद भी भागने में सफल नहीं हुई. भागने पर उसे यह भी अंदेशा था कि पुलिस उसे ढूंढ़ निकालेगी. इस के अलावा ससुराल वाले मातापिता से 2 लाख रुपए भी लौटाने को कहेंगे, तब उस के मांबाप पैसे कहां से देंगे.

इस के बाद सीमा ने कौशलराज से छुटकारा पाने के लिए उस की हत्या की खौफनाक योजना बना डाली. हत्या की योजना उस ने टीवी पर आने वाले आपराधिक सीरियल देख कर बनाई. सीरियल देख कर उस ने कौशलराज की हत्या को आत्महत्या का रूप देने और खुद बच निकलने की साजिश ही नहीं रच डाली, बल्कि योजना के अनुरूप कौशलराज की हत्या कर भी दी.

सीमा ने आपराधिक सीरियल देख कर पति की हत्या की साजिश रची थी, लेकिन वह कोई प्रोफेशनल अपराधी तो थी नहीं, इसलिए ऐसे कई साक्ष्य मौके पर छोड़ दिए, जिन की वजह से पुलिस के हाथ उस तक पहुंच गए. सीमा को तो कानून अपने किए की सजा दे देगा, लेकिन उस ने अपनी नादानी से बसाबसाया घरसंसार उजाड़ दिया. अगर वह प्रेमी से पति की तुलना नहीं करती तो शायद उस की घरगृहस्थी चल निकलती.

सीमा ने अपना भविष्य संवारने के बजाय खुद अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली. अब जब कभी वह जेल से छूटेगी तो उस के जीवन की राह और कठिन होगी. उसे न उस का प्रेमी अपनाएगा और न कोई दूसरा.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

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