Punjab Crime. पति के शराब पीने की लत से परेशान कर्मजीत ने ननदोई से संबंध तो बनाए ही, पति से छुटकारा पाने के लिए उस के 2 साथियों को भी उसी तरह फांस लिया, लेकिन इस का नतीजा अच्छा नहीं रहा.

सुबहसुबह बेटे मलकीत सिंह की हत्या की खबर सुन कर लीलूराम के घर में रोनापीटना मच गया था. उस की लाश चारपाई पर पड़ी थी. हत्यारे ने उस के गुप्तांग पर किसी धारदार हथियार से वार किए थे, जिस से पूरा बिस्तर खून से सना था. मलकीत की पत्नी कर्मजीत कौर भी दहाड़े मारमार कर रो रही थी.

रोने की आवाजें सुन कर पड़ोसी भी आ गए थे. मलकीत की हत्या पर सभी हैरान थे कि आखिर किस ने इस की हत्या कर दी. इस की तो किसी से कोई दुश्मनी भी नहीं थी. लीलूराम ने जब बहू से बेटे की हत्या के बारे में पूछा तो उस ने कहा, ‘‘रात को खाना खा कर अच्छेभले सोए थे. सुबह जब मैं सो कर उठी तो यह बिस्तर पर इसी हालत में पड़े थे.’’

बेटे की हत्या का दुख लीलूराम को भी था, लेकिन जिस तरह से कर्मजीत कौर नौटंकी कर रही थी, उस से उन्हें उसी पर शक हो रहा था. उन्हें लग रहा था कि हो न हो, यह सब इसी का कियाधरा है, इसलिए पत्नी से बात कर के वह सीधे थाना सदर पहुंचे. थानाप्रभारी जसवीर सिंह से मिल कर उन्हें बेटे की हत्या के बारे में बता कर हत्या का शक बहू पर जाहिर किया.

‘‘बहू ने हत्या की है?’’ जसवीर सिंह ने हैरानी से पूछा, ‘‘तुम यह बात किस आधार पर कह रहे हो?’’

‘‘साहब, कर्मजीत ने पहले भी उसे मारना चाहा था. उस समय वह किसी तरह बच गया था, पर उस की आंखों की रोशनी हमेशा के लिए चली गई थी. मैं कर्मजीत को अच्छी तरह से जानता हूं, वह बड़ी बिगड़ैल औरत है.’’

लीलूराम की बातों से जसवीर सिंह समझ गए कि हत्या का कारण अवैध संबंध होंगे. पुलिस बल के साथ वह लीलूराम के घर के लिए निकल पड़े. कुछ ही देर में वह बीड़ तालाब बस्ती स्थित उस के घर पहुंच गए. वहां एक चारपाई पर मलकीत की लाश पड़ी थी.

लाश का मुआयना करते हुए उन्हें मृतक के गले पर कुछ निशान दिखाई दिए. उस से उन्हें लगा कि शायद गला घोंट कर इस की हत्या की गई है,बाद में उस के शरीर के निचले हिस्से पर चाकू से वार किए गए हैं.

मृतक की पत्नी कर्मजीत कौर पुलिस को देख कर गहरे सदमे में होने का नाटक कर रही थी. पुलिस ने उस के दोनों बच्चों से बात करनी चाही, पर वे पुलिस को कोई खास जानकारी नहीं दे पाए. मौके पर मौजूद लीलूराम और अन्य लोगों से बातचीत कर के पुलिस इस नतीजे पर पहुंची कि कर्मजीत कौर एक चरित्रहीन औरत है.

थानाप्रभारी जसवीर सिंह ने घटनास्थल की जरूरी काररवाई पूरी कर के शव को पोस्टमार्टम के लिए बठिंडा के सरकारी अस्पताल भिजवा दिया. चूंकि हत्या का शक कर्मजीत कौर पर किया जा रहा था, इसलिए पूछताछ के लिए उसे थाने लाया गया. थाने में उस से उस के पति की हत्या के बारे में पूछताछ की जाने लगी तो वह खुद को पाकसाफ बताती रही.

पुलिस ने उसे न्यायालय में पेश कर रिमांड पर लिया और महिला पुलिस की मदद से पूछताछ की गई तो उस ने सब कुछ उगल दिया. उधर पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला कि मृतक की अधिक नशे में गला घोंट कर हत्या की गई थी. उस के बाद उस के गुप्तांग को तेजधार हथियार से काटा गया था.

पूछताछ में कर्मजीत कौर ने पति की हत्या की जो कहानी बताई थी, वह कुछ इस प्रकार थी.

कर्मजीत कौर बठिंडा के सैहनेवाला गांव के रहने वाले बलविंदर सिंह की बेटी थी. मजदूरी कर के जैसेतैसे अपने परिवार को पाल रहा था. कर्मजीत जब 17 साल की हुई तो उस ने उस की शादी बठिंडा की बीड़ तालाब बस्ती के रहने वाले लीलूराम के शराबी बेटे मलकीत सिंह के साथ कर दी.

शादी से पहले बलविंदर को पता नहीं था कि उस का दामाद शराबी है. यह बात उन्हें शादी के बाद ही पता चली थी. लेकिन शादी के बाद क्या किया जा सकता था? वह जैसा भी था, कर्मजीत कौर को उस के साथ ही रहना था. बहरहाल शादी के बाद पहली बार जब वह मायके जाने लगी तो उस ने मजाक के लहजे में पति से कहा, ‘‘अब मैं यहां तभी आऊंगी, जब तुम शराब पीना छोड़ दोगे.’’

जवाब में मलकीत सिंह ने कहा, ‘‘तू कहती है तो तेरे लिए शराब तो क्या, मैं तेरे लिए खानापीना तक छोड़ दूंगा.’’

यह सुन कर कर्मजीत खुश हो गई कि पति ने उस की बात मान ली. नईनवेली पत्नी के जाने के बाद मलकीत का मन नहीं लगा और वह अगले ही दिन उसे लिवा लाया. मलकीत के शराब छोड़ने के बाद कर्मजीत कौर को उस से कोई शिकायत नहीं रही.

उन की गृहस्थी हंसीखुशी से चलती रही और कर्मजीत कौर 2 बच्चों की मां बन गई. लेकिन मलकीत ने यारदोस्तों के साथ शराब पीने लगा था. पत्नी ने उसे बहुत समझाया, पर उस ने उस की बात ध्यान नहीं दिया. मलकीत के छोटे भाई जीत सिंह की शादी हुई तो उस के लिए मलकीत को लोगों से कुछ कर्ज भी लेना पड़ा.

वह कर्ज उसे ही उतारना था. उस की कमाई कुछ खास नहीं थी और खर्च ज्यादा बढ़ गया था. इस की वजह से पत्नी से क्लेश रहने लगा. कर्मजीत कौर अब संयुक्त परिवार से अलग रहना चाहती थी. उस के कहने पर मलकीत सिंह ने एक मकान किराए पर लिया और उसी में परिवार के साथ रहने लगा.

कर्ज उतारने के लिए कर्मजीत कौर ने भी नौकरी करने की इच्छा जताई तो मलकीत ने उसे इस की इजाजत दे दी. बठिंडा के औद्योगिक क्षेत्र स्थित विभिन्न मिलों में चक्कर लगालगा कर कर्मजीत कौर नौकरी तलाशने लगी.

एक दिन वह धागे बनाने वाली एक मिल में गई तो उसे वहां पर उस का ननदोई वीर सिंह मिल गया. वह उसी मिल में नौकरी करता था. सलहज कर्मजीत को देख कर वह बहुत खुश हुआ. जब कर्मजीत ने बताया कि वह अपने लिए नौकरी ढूंढ रही है तो वीर सिंह ने हैरानी से उसे देखते हुए कहा, ‘‘आखिर ऐसी क्या जरूरत पड़ गई जो तुम नौकरी ढूंढ़ रही हो?’’

‘‘जीजाजी, जानते ही हैं मलकीत को अपनी शराब के अलावा और किसी चीज की चिंता है नहीं. घरगृहस्थी में आग लग जाए, उसे इस से मतलब नहीं रहता. मुझे ही पता है कि किस तरह से मैं रसोई चलाती हूं. घर के कामधंधे के बाद मैं खाली रहती हूं, इसलिए सोचा कि कहीं नौकरी कर लूं, जिस से टाइम भी कट जाएगा और घर में चार पैसे भी आएंगे.’’

इस बातचीत के बाद वीर सिंह उसे वहीं स्थित एक रेस्टोरेंट में ले गया, जहां दोनों ने अपनेअपने परिवारों के बारे में विस्तार से बातें कीं. इसी बातचीत में वीर सिंह को यह देख कर ताज्जुब हो रहा था कि शादी के 5 सालों बाद भी कर्मजीत का आकर्षण बरकरार है. उस के आकर्षण में वह बंध गया.

वीर सिंह ने कर्मजीत को काम दिलाने की तसल्ली दी तो उसे कुछ राहत मिली. इस के बाद उस ने वीर सिंह से अपने कमरे पर चलने को कहा तो वह उस के साथ चला गया. घर की स्थिति डावांडोल थी, इस के बावजूद उस ने ननदोई की सेवा में कोई कसर नहीं छोड़ी. यहां भी कर्मजीत ननदोई से अपनी आर्थिक तंगी का रोना रोती रही.

‘‘नौकरी तो मैं तुम्हें दिला दूंगा, पर बदले में मुझे मुंहमांगा इनाम चाहिए.’’ वीर सिंह ने मुसकराते हुए कहा.

‘‘पहले नौकरी तो दिला दो, इनाम भी मिल जाएगा.’’ कर्मजीत ने भी हंसते हुए कहा.

वीर सिंह ने कर्मजीत कौर की मजबूरी देखी ही थी, इसलिए उस ने धागा मिल में काम करने वाले अपने एक दोस्त से कह कर कर्मजीत को वहां काम दिला दिया. इतना ही नहीं, उस ने उस की आर्थिक मदद भी करनी शुरू कर दी. आर्थिक परेशानी में हमदर्दी और मदद से उस ने अपनी सलहज कर्मजीत कौर का दिल जीत लिया.

उस के घर आनेजाने में किसी तरह की रुकावट न आए, इस के लिए वीर सिंह मलकीत सिंह के साथ बैठ कर शराब पीने लगा. नौकरी लगवाने के एहसान के बदले कर्मजीत ने ननदोई का खुले दिल से स्वागत किया. वीर सिंह की नजर तो उस की गदराई जवानी पर थी. एक दिन उस ने कर्मजीत को मुंहमांगा इनाम देने वाली बात याद दिलाई तो कर्मजीत कौर समझ गई कि वह क्या चाहता है.

कर्मजीत को उस की इस मांग पर कोई एतराज नहीं था, इसलिए एक दिन मौका मिलने पर कर्मजीत ने ननदोई को उस का मुंहमांगा इनाम दे दिया यानी उस दिन दोनों के बीच अवैध संबंध बन गए.

इस के बाद वीर सिंह सलहज के यहां अकसर आने लगा. जब रोजरोज का यह खेल बन गया तो एक दिन मलकीत ने अपने जीजा और पत्नी को रंगेहाथों पकड़ लिया.

मलकीत ने अपने जीजा वीर सिंह को तो कुछ नहीं कहा, लेकिन उस का गुस्सा पत्नी पर फूट पड़ा. चुपचाप सुनने के बजाय कर्मजीत कौर भी उस पर हावी हो गई. वह पति की कमजोरियों को जानती थी, इसलिए वह उसे ही जलीकटी सुनाने लगी. इस के बाद वीर सिंह ने ही दोनों को शांत कराया और मलकीत के साथ शराब पीने बैठ गया. थोड़ी देर में मलकीत सिंह टुन्न हो कर चारपाई पर पसर गया.

इस के बाद वीर सिंह मलकीत के खानेपीने का खास ध्यान रखने लगा. चूंकि मलकीत सिंह को पत्नी और जीजा की हकीकत पता थी, इसलिए जब उस का नशा उतर जाता तो वह पत्नी से लड़ाईझगड़ा करने लगता. यही नहीं, उसे बहनोई का आना भी अच्छा नहीं लगता था. इस तरह मलकीत और कर्मजीत के बीच झगड़ा होना आम बात हो गई.

जबकि कर्मजीत वीर सिंह से संबंध खत्म करना नहीं चाहती थी. इस की वजह यह थी कि वह उस की हर तरह से मदद कर रहा था. अब तक कर्मजीत की आर्थिक परेशानियां दूर हो चुकी थीं. उस ने एक प्लौट भी खरीद लिया था. अब उस की लालसा उस प्लौट पर मकान बनाने की थी, जिस से किराए के मकान से वह छुटकारा पा जाए.

उधर पति की रोजरोज की कलह से वह परेशान रहने लगी थी. अपनी यह परेशानी कर्मजीत ने वीर सिंह को बताई तो उस ने मलकीत से छुटकारा दिलाने के लिए उसे शराब के नशे में अपने 2 साथियों भोला सिंह और जग्गा सिंह की मदद से बठिंडा से 15 किलोमीटर दूर झूंबा गांव के एक कुएं में फेंकवा दिया.

उन्होंने सोचा कि वह मर गया होगा, पर संयोग से वह कुआं सूखा था, इसलिए उस को चोटें तो आईं, पर मरा नहीं. वह कुआं जंगल में था, इसलिए 2-3 दिनों तक वह उसी में पड़ा रहा.  2-3 दिनों बाद बलवंत सिंह नाम का एक किसान उधर से गुजर रहा तो उस ने कुएं से बचाओबचाओ की आवाज सुनी.

उस ने कुएं में झांक कर देखा तो उस में एक आदमी दिखाई दिया. इस के बाद उस ने गांव वालों को बुला कर मलकीत को बाहर निकलवाया और उस के घर पहुंचा दिया. लीलूराम ने इलाज के लिए उसे बठिंडा के सरकारी अस्पताल में भरती कराया. मलकीत बच तो गया था, लेकिन उस की आंखों की रोशनी काफी कम हो गई थी, जिस से वह कोई कामधंधा नहीं कर सकता था. वीर सिंह और कर्मजीत को मलकीत सिंह के जिंदा होने का समाचार मिला तो उन्होंने अपना सिर पीट लिया.

मामला पुलिस तक पहुंचा तो कर्मजीत कौर और वीर सिंह ने पुलिस को पंचायत में मामला सुलझा लेने का अनुरोध कर मलकीत सिंह से राजीनामा कर लिया. अवैध संबंधों की बात उजागर होने पर पंचायत में वीर सिंह को जलील होना पड़ा था. पंचायत ने उस पर पाबंदी लगा दी थी कि वह मलकीत सिंह के घर नहीं जाएगा. इस पाबंदी के बाद वीर सिंह का कर्मजीत कौर के यहां आनाजाना एक तरह से बंद हो गया था.

दूसरी ओर वीर सिंह के दोनों साथी भोला सिंह और जग्गा सिंह, जो मलकीत को कुएं में फेंक कर आए थे, वे भी कर्मजीत को पाने की कोशिश में लग गए थे. वे उस के घर के चक्कर भी लगाने लगे थे. कर्मजीत को मकान बनाने के लिए रुपयों की सख्त जरूरत थी. पति की हत्या का प्रयास असफल हो जाने से उस के सारे सपने बिखर गए थे. ननदोई वीर सिंह से तो संबंध लगभग खत्म ही हो गए थे.

इसलिए पैसों के लालच में उस के कदम भोला सिंह और जग्गा सिंह की तरफ बढ़ गए. लेकिन कर्मजीत के सामने समस्या यह थी कि इन से वह कहां मिले, क्योंकि लाचारी की वजह से पति अधिकतर घर में ही पड़ा रहता था और रात में बाहर मिलने पर बस्ती वालों का डर था.

कर्मजीत ऐसे दोराहे पर खड़ी थी, जहां से दोनों ही रास्ते बंद नजर आ रहे थे. ऐसे में पति उसे रास्ते का कांटा नजर आ रहा था, इसलिए कर्मजीत ने खुद सूली पर लटकने के बजाय पति को ही सूली पर टांगने का पक्का इरादा बना लिया. मलकीत शराब तो पीता ही था, इसलिए योजना बना कर उस ने 6 मई, 2016 की रात को पति की शराब में नींद की कई गोलियां मिला दीं.

जैसे ही उस ने वह शराब पी, गहरी नींद में सो गया. इस के बाद कर्मजीत ने भोला सिंह को फोन कर के पति को ठिकाने लगाने की योजन बता दी. उस ने कहा कि रास्ते का कांटा निकल जाने के बाद उन्हें कोई रोकनेटोकने वाला नहीं होगा.

‘‘ठीक है, थोड़ी देर में जग्गा सिंह को ले कर मैं पहुंचता हूं.’’ भोला सिंह ने कहा. आधी रात के बाद भोला सिंह और जग्गा सिंह कर्मजीत कौर के घर पहुंच गए. पहले तो उन्होंने कर्मजीत कौर के साथ संबंध बनाए, उस के बाद नशे में बेसुध पड़े मलकीत सिंह की गला घोंट कर हत्या कर दी.

पिछली बार की तरह इस बार वह जीवित न रह जाए, इस के लिए मलकीत सिंह के गुप्तांग पर छूरे से कई वार कर दिए. हत्या की पुष्टि हो जाने के बाद उसे छोड़ कर चले गए.

कर्मजीत से पूछताछ के बाद पुलिस ने जग्गा सिंह और भोला सिंह को गिरफ्तार कर अगले दिन दोनों को न्यायालय में पेश किया. जहां से उन्हें बठिंडा की केंद्रीय कारागृह भेज दिया. जग्गा सिंह की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने कई जगहों पर छापे मारे, पर वह पुलिस गिरफ्त में नहीं आया. कथा लिखे जाने तक गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपी बठिंडा की जेल में बंद थे.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

वेद शर्मा ‘नीर’

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